अग्नि संकल्प

कह गया अभी मन में कोई, सन्देश तुम्हे हम देते हैं
इस घोर  युद्ध  की  वेला  में  उदघोष  तुम्हे  हम  देते  हैं|

हो भीड़ उधर और छीड़ इधर तो चिंता कभी नहीं करना
तुम गरजो सिंहों के समान, रण बीच कभी ना तुम डरना|

तुम  एक  अकेले  खड़े  हुए  हो  घिरे  शत्रु  की  सेना  से
पर चकित करो वैरी दल को अपने  भीषण बल पौरुष से|

अंत तो ये ही होगा कि शव  गिरा  पड़ा  होगा किसी छोर
अग्नि भस्म कर बिखरा देगी इस तन को जाने किस ओर|

पर अग्नि की  जाज्वल्यमान  लपटें इतना  कर  जायेंगी
था  कोई हृदय से मस्ताना,  दुनिया को दिखला जायेंगी|

कुछ  घने सयाने  नीति की कुछ बात  बना  कर जायेंगे
कुछ होंगे  प्रशंसा  हाथ  लिए, कुछ  निंदा  कर के जायेंगे|

पर  दूर  कहीं  इक  कोने  में  हँसता  रोता  मैं  होऊंगा
फिर कहीं किसी माता की छाया में चलता बढ़ता हूँगा|

याद करूँगा जब  अतीत,  बलिदान  बीच रण दिया हुआ
पाऊंगा मुख को तेजस्वी, अग्नि सम फिर से तपा हुआ|

पर फिर से याद वो आएगा जो युद्ध अभी अपराजित है
जिस सत्य पे अंग कटाए थे वो सत्य अभी अप्रकाशित है|

तो लेता हूँ संकल्प कि जब तक शत्रु सैन्य विध्वंस न हो
विश्राम नहीं लेना तब तक जब तक कि पूर्ण विजय न हो|

- आर्य मुसाफिर

अग्नि-संकल्प--

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Comments

  1. says

    It is really very motivating and inspiring poetry and is relevant in today's context as well.

    I could not understand the meaning of the word "छीड़" in third line (हो भीड़ उधर और छीड़ इधर तो चिंता कभी नहीं करना). Is it a printing error or has some meaning?

    • Arya Musafir says

      @Amit
      नमस्ते भाई
      जैसा कि अग्निवीर जी ने लिखा है, छीड़ से अभिप्राय उस स्थान से है जहाँ बहुत कम लोग हों.

      धन्यवाद

  2. Ved Arya says

    Pt. Poetry shows that Pt. Lekhram probably knows about his martyrdom.
    Could you please tell me where I can get his whole collection of poems.
    Ved

    • says

      This is not written by Pt Lekhram. It is written by someone who is thoroughly inspired by him. Arya Musafir is his pen name that he adopted to continue the legacy of Pt Lekhram to best of his might.

      Dhanyavad

  3. says

    आर्य्य मुसाफिर जी के तेजमय कविता का पठन करके अच्छा लगा। केवल एक त्रुटि है- भगवान श्रीराम जी का चित्र नीला लगाया गया है।

  4. Harshavardhan says

    तो लेता हूँ संकल्प कि जब तक शत्रु सैन्य विध्वंस न हो
    विश्राम नहीं लेना तब तक जब तक कि पूर्ण विजय न हो……

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  1. अग्नि संकल्प: कह गया अभी मन में कोई, सन्देश तुम्हे हम देते हैं इस घोर युद्ध की वेला में उदघोष… http://goo.gl/fb/WbGV6

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