कह गया अभी मन में कोई, सन्देश तुम्हे हम देते हैं
इस घोर  युद्ध  की  वेला  में  उदघोष  तुम्हे  हम  देते  हैं|

हो भीड़ उधर और छीड़ इधर तो चिंता कभी नहीं करना
तुम गरजो सिंहों के समान, रण बीच कभी ना तुम डरना|

तुम  एक  अकेले  खड़े  हुए  हो  घिरे  शत्रु  की  सेना  से
पर चकित करो वैरी दल को अपने  भीषण बल पौरुष से|

अंत तो ये ही होगा कि शव  गिरा  पड़ा  होगा किसी छोर
अग्नि भस्म कर बिखरा देगी इस तन को जाने किस ओर|

पर अग्नि की  जाज्वल्यमान  लपटें इतना  कर  जायेंगी
था  कोई हृदय से मस्ताना,  दुनिया को दिखला जायेंगी|

कुछ  घने सयाने  नीति की कुछ बात  बना  कर जायेंगे
कुछ होंगे  प्रशंसा  हाथ  लिए, कुछ  निंदा  कर के जायेंगे|

पर  दूर  कहीं  इक  कोने  में  हँसता  रोता  मैं  होऊंगा
फिर कहीं किसी माता की छाया में चलता बढ़ता हूँगा|

याद करूँगा जब  अतीत,  बलिदान  बीच रण दिया हुआ
पाऊंगा मुख को तेजस्वी, अग्नि सम फिर से तपा हुआ|

पर फिर से याद वो आएगा जो युद्ध अभी अपराजित है
जिस सत्य पे अंग कटाए थे वो सत्य अभी अप्रकाशित है|

तो लेता हूँ संकल्प कि जब तक शत्रु सैन्य विध्वंस न हो
विश्राम नहीं लेना तब तक जब तक कि पूर्ण विजय न हो|

अग्नि-संकल्प--

 

 

 

 

 

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Disclaimer: By Quran and Hadiths, we do not refer to their original meanings. We only refer to interpretations made by fanatics and terrorists to justify their kill and rape. We highly respect the original Quran, Hadiths and their creators. We also respect Muslim heroes like APJ Abdul Kalam who are our role models. Our fight is against those who misinterpret them and malign Islam by associating it with terrorism. For example, Mughals, ISIS, Al Qaeda, and every other person who justifies sex-slavery, rape of daughter-in-law and other heinous acts. For full disclaimer, visit "Please read this" in Top and Footer Menu.

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16 Comments on "अग्नि संकल्प"

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WannabeHuman
WannabeHuman
1 year 9 months ago

Salute _/\_

WannabeHuman
WannabeHuman
1 year 7 months ago
Naman _/\_ “.. याद करूँगा जब अतीत, बलिदान बीच रण दिया हुआ पाऊंगा मुख को तेजस्वी, अग्नि सम फिर से तपा हुआ| पर फिर से याद वो आएगा जो युद्ध अभी अपराजित है जिस सत्य पे अंग कटाए थे वो सत्य अभी अप्रकाशित है| तो लेता हूँ संकल्प कि जब… Read more »
Harshavardhan
Harshavardhan
4 years 11 months ago

तो लेता हूँ संकल्प कि जब तक शत्रु सैन्य विध्वंस न हो
विश्राम नहीं लेना तब तक जब तक कि पूर्ण विजय न हो……

Usha
Usha
6 years 17 days ago

English please !! 🙁

Sunny Chawla
Sunny Chawla
6 years 16 days ago

This is just the poetry … Are u that Usha who has channel named xXx0Sanctuary0xXx ?

Good Man
6 years 1 month ago

Wonderful poetry.

agnisainik Basant
6 years 2 months ago

आर्य्य मुसाफिर जी के तेजमय कविता का पठन करके अच्छा लगा। केवल एक त्रुटि है- भगवान श्रीराम जी का चित्र नीला लगाया गया है।

Ved Arya
Ved Arya
6 years 2 months ago

Pt. Poetry shows that Pt. Lekhram probably knows about his martyrdom.
Could you please tell me where I can get his whole collection of poems.
Ved

Agni
6 years 2 months ago

This is not written by Pt Lekhram. It is written by someone who is thoroughly inspired by him. Arya Musafir is his pen name that he adopted to continue the legacy of Pt Lekhram to best of his might.

Dhanyavad

Amit
6 years 4 months ago

It is really very motivating and inspiring poetry and is relevant in today's context as well.

I could not understand the meaning of the word "छीड़" in third line (हो भीड़ उधर और छीड़ इधर तो चिंता कभी नहीं करना). Is it a printing error or has some meaning?

Arya Musafir
Arya Musafir
6 years 4 months ago

@Amit
नमस्ते भाई
जैसा कि अग्निवीर जी ने लिखा है, छीड़ से अभिप्राय उस स्थान से है जहाँ बहुत कम लोग हों.

धन्यवाद

agniveer
6 years 4 months ago

It means an isolated place in colloquial terms. Dhanyavad

Aman
Aman
6 years 4 months ago

Beautiful ! Simply Fanatastic ! Above all , Very Inspirational !!

SatyaSanatan
6 years 4 months ago

Wow….Absolutely Brilliant.

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6 years 4 months ago

अग्नि संकल्प: कह गया अभी मन में कोई, सन्देश तुम्हे हम देते हैं इस घोर युद्ध की वेला में उदघोष… http://goo.gl/fb/WbGV6

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6 years 4 months ago

अग्नि संकल्प (http://agniveer.com/?p=1197) The resolve of Agni. Yet anoth… http://agniveer.com/?p=1197

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