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आज अग्निवीर वेबसाईट पर अलग-अलग विषयों पर बड़ी मात्रा में लेख प्रकाशित किये गए हैं| इसलिए किसी व्यक्ति के लिए थोड़े बहुत लेखों को पढ़ कर ही अग्निवीर के द्रष्टिकोण का अनुमान लगाना मुश्किल है| वैसे तो हमने हमारा लक्ष्य और स्वप्न इस वेबसाईट के अलग-अलग भागों (Site Name, Tag Line, Footer Statement, About pageऔर Disclaimer section)के द्वारा स्पष्ट कर दिया हैं, पर फिर भी हमें लगता है कि किसी भी प्रकार की गलत धारणाएँ याँ भ्रम को दूर रखने के लिए, विभिन्न विषयों पर हम कैसे मंतव्य रखते है उसका स्पष्टीकरण कर लेना उपयुक्त होगा|

१. अग्निवीर वैदिक धर्म में, जिस धर्म को Vedic Religion in brief लेख में संक्षिप्त में समझाया गया है, दृढ विश्वास रखता है| इसके साथ-साथ अग्निवीर शांति, सहनशीलता और जिसके मूल में सत्य और प्रमाणिकता हो ऐसे चरित्र और एकता में विश्वास रखता है| अगर किसी व्यक्ति को इस बात पर कोई आपत्ति या मतभेद हो तो अग्निवीर उसके समाधान के लिए चर्चा करने को हमेशा से तैयार है| और अगर जरुरत पड़ी तो अग्निवीर अपनी इस मान्यता में बदलाव/सुधार लाने के लिए भी तैयार है| पर आज तक कोई व्यक्ति इस में किसी भी प्रकार की खराबी नहीं ढूँढ पाया|

२. अग्निवीर ईश्वरकृत तथा मानवजाति के सर्वप्रथम ग्रंथ – वेद –में विश्वास रखता है| अग्निवीर मानता है कि ईश्वर की प्रेरणा से हमें वेदों का ज्ञान प्राप्त हो सकता है| केवल वेद ही सर्वश्रेष्ठ और उत्तम ग्रंथ है इस निष्कर्ष पर आने के पीछे बहुत से तार्किक कारण है|

३. केवल वेद ही उत्तम ग्रंथ होने पर भी, अग्निवीर वेदों का स्वीकार करने के लिए किसी भी व्यक्ति पर किसीभी प्रकार का दबाव डालने में विश्वास नहीं रखता| क्योंकि ऐसा करना स्वयं वेदों के मूल सिद्धांत के विरुद्ध है| वेद ही श्रेष्ठ ग्रंथ है इस बात का निर्णय, और बाद में उसका स्वीकार, पहले से ही स्थापित मान्यताओं के आधार पर नहीं परन्तु चर्चा के निष्कर्ष के रूप में ही होना चाहिए| ये वेदों का ही सार है| इसलिए जो लोग अभी तक वेदों को श्रेष्ठ नहीं मानते पर “सत्य का स्वीकार और असत्य का अस्वीकार” मंत्र का अपने जीवन में आचरण करते है, और सारे विश्व को अपना ही एक परिवार समझते है, वो सभी लोग अग्निवीर की दृष्टि में नेक हैं|

४. हर एक व्यक्ति का अपना अलग विचार या मत होता है| इसलिए अग्निवीर के विचारों का कोई व्यक्ति, वर्ग/समुदाय या फ़िर कोई धर्म संप्रदाय से भिन्न होना स्वाभाविक है| पर ऐसा होने पर भी अग्निवीर किसी भी समस्या का समाधान करने के लिए बौद्धिक चर्चा का मार्ग ही अपनाने में विश्वास रखता है| वैदिक धर्म समग्र मानवजाति के लिए है| इसलिए अगर कोई व्यक्ति हमारे साथ एकमत न भी हो फिर भी उस व्यक्ति के साथ हमारा व्यवहार परिवार के एक सदस्य के जैसा ही रहेगा|

वैदिक धर्म मनुष्यों की जाति, पंथ, लिंग, जन्म, भौगोलिक स्थान या अन्य मान्यताओं को ध्यान में न लेते हुए उन सभी लोगों के लिए एक समान है जो लोग सर्व मानवजाति के लिए आनंद और शांति की कामना करते हैं| वैदिक धर्म उन सभी लोगों के लिए भी है जो अपने विचार और मान्यताएँ दूसरों पर जबरदस्ती या छल-कपट से नहीं थोपते|

५. अग्निवीर ईश्वर की सच्ची उपासना करने, आध्यात्मिक उन्नति करने, और जीवन में यथार्थ सुख और आनंद प्राप्त करने के लिए अष्टांग योग में विश्वास रखता है|

यम अहिंसा, सत्य, अस्तेय, अपरिग्रह, ब्रह्मचर्य

नियमशौच(शरीर और मन की शुद्धि), संतोष(संतुष्ट और प्रसन्न रहना), तप(स्वयं से अनुशाषित रहना), स्वाध्याय(आत्मचिंतन करना), ईश्वर-प्रणिधान(ईश्वर के प्रति पूर्ण समर्पण, पूर्ण श्रद्धा)

आसनईश्वर के ध्यान में लंबे समय तक शांत और स्थिर बैठना

प्राणायाम – आसन में बैठने के बाद श्वास लेने सम्बन्धी खास तकनीकों द्वारा प्राण पर नियंत्रण करना

प्रत्याहारमन को बाहरी अशांति से अलग कर इन्द्रियों को अंतर्मुखी करना

धारणा – मन को हदय या मस्तक जैसे किसी स्थान पर स्थिर कर ईश्वर का ध्यान करना

ध्यान  – कोई एक स्थान पर मन को स्थिर करने के बाद वेद मंत्र या अन्य शब्दों के माध्यम से इश्वर का अनुभव करने के लिए इश्वर के गुण-कर्म स्वभाव का निरंतर चिंतन करना

समाधि – ईश्वर का ध्यान धरे रहने से जब इश्वर की अनुभूति होती है, ऐसी अवस्था

६. अग्निवीर विकासमूलक और प्रेम भरे अभिगम में विश्वास रखता है, और मानता है कि द्वेषपूर्ण अभिगम अपनाने से द्वेष का ही सामना करना पड़ता है| इसलिए अग्निवीर का अभिगम सदा से ही प्रामाणिक तरीके से बौद्धिक और भावात्मक जागरूकता फ़ैलाना है|

७. अग्निवीर जन्म पर आधारित जाति-व्यवस्था का सख्त विरोधी है| अग्निवीर जाति-व्यवस्था को समर्थन देने वाले सभी लोगों का भी सख्त विरोधी है| अग्निवीर मानता है कि जो लोग जाति-व्यवस्था की आड़ में रहकर सामाजिक और राजनैतिक हकों की समानता का लाभ कुछ ही ‘उच्च’ वर्ग के लोगों के लिए सीमित कर देना चाहते है, वो सभी लोग, सभ्य समाज और मानवता के शत्रु हैं| अग्निवीर उन सभी लोगों के साथ साथ इस शर्मनाक जाति-व्यवस्था को समर्थन देने वाले सभी गलत ग्रंथो का भी अस्वीकार करता है|

८. अग्निवीर उन सभी विकृत लोगों और उनके विकृत ग्रंथो का सख्त विरोधी है जो यह मानते है कि स्त्रियों के अधिकार पुरुषों के अधिकारों की तुलना में निम्न और गौण होने चाहिए| वेदों में स्त्रियों को बहुत ऊँचा स्थान दिया गया है| और जो लोग यह बात को नहीं मानते वो सभी मानवता के सबसे बड़े शत्रु है|

९. अग्निवीर – ‘मातृवत परदारेषु’ – पत्नी के सिवाय सभी स्त्री माता समान है – सिद्धांत में दृढ़ विश्वास रखता है| अग्निवीर संप्रदाय, जाति, समाज या दूसरी कोई मानव निर्मित हदों को ध्यान में न लेते हुए, उन सभी लोगों को अपराधी ठहरता है जो ‘मातृवत परदारेषु’ के सिद्धांत को नहीं मानते| अग्निवीर आज के ऐसे सभी विज्ञापनों, व्यवसायों, फिल्मों, खेलों और अपराधियों के राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय संगठित गुटों का भी विरोध करता है, जो स्त्री को केवल मनोरंजन और वासना की वस्तु समझते हैं| अग्निवीर इन गुन्हेगारों के राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय संगठित गुटों को समाज में फैला हुआ रोग मानता है|

वेद कहते है कि स्त्रियों का शोषण कर के धन कमाने वाले लोगों को सख्त से सख्त सजा होनी चाहिए| हम स्त्रियों को बुरखे में कैद रखने की प्रथा का भी विरोध करते है| इसके साथ साथ मनोरंजन के नाम पर माता समान स्त्री के व्यापारिक शोषण का भी सख्त विरोध करते हैं|

१०. अग्निवीर ग्रिफिथ और मेक्स मुलर द्वारा किये हुए वेदों के गलत अनुवादों को नहीं मानता| वेदों को समझने के लिए हम अपनी वेबसाईट के डाउनलोड सेक्शन में उपयोगी पुस्तकों का संग्रह करने का प्रयत्न कर रहे है| लेकिन हम ये बात स्पष्ट कर देना चाहते है कि केवल आधुनिक भाषा के प्रयोग से ही वेदों का अर्थघटन संभव नहीं| वैदिक मंत्र सूत्रों के समान होते है| और हर एक मंत्र में गहरा सार छिपा हुआ होता है| इसलिए वैदिक मंत्रो को समझने के लिए गहन अंत:अवलोकन, थोडा संस्कृत भाषा का ज्ञान, और मंत्रो की अनुभूति करने की आवश्यकता होती है| वैदिक मंत्रो को रटने जैसे अन्य कोई यांत्रिक तरीके से उसका अर्थघटन संभव नहीं| वेदों में ना ही कोई इतिहास है और ना ही कोई खास समय पर घटी हुई घटनाओं का वर्णन| वेदों में केवल मूल ज्ञान और सिद्धांतों का समावेश है|

११. कई लोगों का मानना है के अग्निवीर भी आर्य समाज जैसी ही कोई एक संस्था है| पर यह सत्य नहीं है| आज के समय के आर्य समाज के नेताओं के गलत मार्ग अपनाने के कारण आज “आर्य समाज” शब्द अपना मूल अर्थ खो चुका है| पर दयानंद सरस्वती, जो हमारे आदर्श हैं, द्वारा विस्तारपूर्वक प्रस्तुत किए गए आर्य समाज के मूल लक्ष्य के साथ हम एकमत है| इसलिए अगर आप केवल आर्य समाज के सही अर्थ और मूल लक्ष्य को ध्यान में रख कर हमें देखतें है तो हाँ हम “आर्य समाजी” हैं| पर अगर आप हमें आर्य समाज जैसी कोई संस्था के रूप में देखते हैं तो हम “आर्य समाजी” नहीं हैं| इसलिए इस विरोधाभास से दूर रहने के लिए हम “आर्य”, “वैदिक” या फिर “अग्निवीर” के नाम से पहचाने जाना ज्यादा पसंद करते हैं|

१२. अग्निवीर संकुचित मनोवृत्ति में विश्वास नहीं रखता| हम ऐसा दावा कभी नहीं करते कि हमारे वचन ही ईश्वर के अंतिम वचन हैं| इसलिए हम खुले मन से सभी बुद्धिजीवीयों को मुक्त रूप से अपने विचार व्यक्त करने के लिए आमंत्रित करते हैं| परन्तु हम जन्म पर आधारित जाति-व्यवस्था, स्त्री हीनता का समर्थन और अपमानजनक टिप्पणियों, इन तीन विषयों पर चर्चा कर समय की बर्बादी करना नहीं चाहते|

१३. आलोचना का अर्थ द्वेष या तिरस्कार नहीं है| हम थोड़े बहुत मतभेदों के कारण अपने माता-पिता और भाई-बहनों के साथ वाद-विवाद करते रहते हैं| और यह स्वाभाविक भी है| पर उसका अर्थ ये नहीं है कि हम अपने परिवारजनों के साथ द्वेषभाव या बैर रखते है| ठीक उसी तरह, आज हमारे पास बड़ी मात्रा में ऐसे लेखों का संग्रह है जो आज की प्रचलित मान्यताओं पर कई सवाल उठाते है| पर हमारी लोगों से विनती है कि ऐसे लेख लिखने के पीछे हमारा उद्देश्य द्वेष या तिरस्कार है ऐसा न मानें|

१४. हां, हम सुधार और परिवर्तन के मार्ग पर हैं| हम इसे “शुद्धि आंदोलन” कहते है| हम सभी लोगों से वैदिक धर्म का स्वीकार कर अपने जीवन में उसका आचरण करने का वचन माँगते है| हम वैदिक धर्म का आचरण करते है, और आगे भी अधिक एकाग्रता और दृढ़ मन से करेंगे| वैदिक धर्म का स्वीकार करने में जाति, संप्रदाय या लिंग का कोई बंधन नहीं है| हम हिंदू, मुस्लिम या फ़िर ईसाई धर्मो को मानने वाले सभी लोगों को, मानवजाति के कल्याण के लिए और स्वयं को शांति, एकता, चरित्र और कर्त्तव्य पालन का आदर्श बनाने के लिए वैदिक धर्म स्वीकार करने को आमंत्रित करते हैं| यह प्रक्रिया असीमित सफलता, प्रतिभा, सुख, जोश, उत्साह, समृद्धि और जीवन के लक्ष्य का द्वार खोलेंगी|

१५. अग्निवीर ना ही कोई एक व्यक्ति है या ना ही कोई व्यक्तियों का समुदाय| अग्निवीर एक विचारधारा है| हम बार-बार “मैं” और “हम” को मिलाते रहते है| क्योंकि हम विचारधाराओं के मेल में विश्वास रखते हैं| “मैं” और “हम” एक ही हैं, उनमें केवल शाब्दिक भिन्नता है| अगर आप हमारे स्वप्न और लक्ष्य के साथ सहमत हैं, तो आप भी हमारे लिए अग्निवीर ही हैं|

हमारी विनती है कि आप अग्निवीर के विषयों को उसके पूरे सन्दर्भ में देखें| आप हम से थोड़े बहुत या पूर्ण रूप से सहमत या असहमत हो सकते हैं| पर केवल इस कारण से बौद्धिक मतभेदों को भावनाओं के मतभेदों में परिवर्तित न होने दें| समग्र मानवजाति हमारे लिए एक परिवार समान है|

 

हम कभी भी एक दूसरे के प्रति द्वेष न रखें|

हम कभी भी एक दूसरे का बुरा न चाहें|

हम कभी भी एक दूसरे की निंदा न करे और एक दूसरे पर दोष न लगाएं|

हम एक दूसरे से भिन्न होकर भी एक दूसरे के कल्याण की ही कामना करें|

हम परिपक्व बन के बिना शत्रुता के अपने आपको अभिव्यक्त कर सकें|

हम एक परिवार की ही तरह मिलजुल कर रहें और उसका आनंद उठाएं|

जैसे गाय अपने बछड़े को प्रेम करती है ठीक उसी प्रकार हम भी एक दूसरे से प्रेम करते रहें|

शांति, सहनशीलता, सत्य और परस्पर सहयोग हमारे शस्त्र बनें|

सर्वथा शांति की स्थापना हो|

 

ॐ शांति शांति शांति!

The 4 Vedas Complete (English)
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Disclaimer: By Quran and Hadiths, we do not refer to their original meanings. We only refer to interpretations made by fanatics and terrorists to justify their kill and rape. We highly respect the original Quran, Hadiths and their creators. We also respect Muslim heroes like APJ Abdul Kalam who are our role models. Our fight is against those who misinterpret them and malign Islam by associating it with terrorism. For example, Mughals, ISIS, Al Qaeda, and every other person who justifies sex-slavery, rape of daughter-in-law and other heinous acts. For full disclaimer, visit "Please read this" in Top and Footer Menu.

31 COMMENTS

  1. ज्ञान में ज्ञानी हूँ।
    रणभूमि में योद्धा हूँ।
    व्यवस्था में व्यवस्थापक हूँ।
    सेवा में तत्पर हूँ।
    अतं: में सम्पूर्ण मानव हूँ।

  2. Main vado main believed kart a hu or vado ka adhyan karna chata hu kripya mugha bataye ki vastavik bad Hindi main kahan uplabdh Honga main duniya main Dachau janna chata hu or is hear ko prapt karke moksh prapt karna chats hu

  3. Rampal ji bolte h kabir he god h or WO ye baat proof k sath bolte… apkaa iske bare m kya bichaar h… please btayee… unka ghyn kyaa sachaa h..?

    • kya kabeerji ke paahle duniya nahi thi tab uska sanchalak kaun tha ? isliye raam paal kibaat jhuthi hai ! ishvar koi vyakti nahi hota vah to ek shakti hai!

    • Priy Saurabh, Namaste!
      This site deails with basic attributes of a human being to accept truth and reject falsehood. The authors of the articles work here for a global understanding of vedic teachings. There is lot of scientific revelations are involved in these articles.To reach its like minded readers, this site shouldn’t be restricted to any particular sect of society.
      Dhanywad.

    • In my opinion, being the knowledge of our rishi’s was for human kind, every is allowed to know it. the religions were not made when the knowledge gained.

  4. @Rajiv, I agree that we should go beyond religion and caste. But there may be differences in the approaches to reach there. Let me point out what I believe to be negatives in the three alternative approaches to reform:
    1. Dayanand and Shradhdhanand believed in calling spade a spade and both lost their life in their efforts. Still, their approach of talking truth, however bitter, reduced the number of people joining their efforts and all our political parties dumped them.
    2. Gandhi believed in following one of his 3 monkeys and closing mouth shut when it comes to speaking bitter truth. This helped him become ‘Mahatma’ but it also ensured breeding of fanatics from other religions.
    3. Vivekanada’s approach seemed to be similar to Gandhi, he seemed to believe in soft criticism, sometimes using Abrahamic scriptures to explain Advait Vedanta. But this is often misunderstood to be his endorsement of those faiths. If you go on Christian evangelist websites you will find a lot of quotes from Vivekanada to make you believe that he endorsed Christ. But they totally whitewash his criticisms of missionaries and Christianity. As a sample visit http://www.youtube.com/watch?v=FX5l9TSrecI and also read all my comments there.
    If the scope of the mission is worldwide, as in the case of Agniveer, I agree that becoming Gandhi’s monkey may be necessary until fanatics begin to breed again. I neither oppose nor endorse one approach over the other so long as all are aware of negatives of them and the ultimate intention is good.

  5. We are still doing the wrong things. We are not trying to learn and use the things our old man left for us. What we do is fighting for the situations which do not exists in which conditions there words had meanings. We need to extract and show the things in practical way for betterment of society, rising above the religion or cast.

  6. i have a lot of questions in my mind,but i would like to ask only one qwestion to you.sir please tel me are you and vedas strictly believe in one and only one GOD withot anyone and are you not a pagan person?
    is idle worship is strictly prohibited in vedic rules?

    • @saman, All the answers to your questions are in the articles in this website. Pl. go through the section on Vedas and Hinduism and most of your queries will be solved.
      Answers to your questions above,
      a) Vedas believe in one God whom sages may call by different names.
      b) I do not know what you meant by ‘pagan’ . So let me use Merriam-Webster dictionary which gives two possible definitions.
      1. a follower of a polytheistic religion (as in ancient Rome)- By this definition neither Vedic religion nor Islam are pagan.
      2. one who has little or no religion and who delights in sensual pleasures and material goods : an irreligious or hedonistic person- Vedic religion focuses on Yam and Niyam, self control, etc. so cannot be a pagan. Islam, with its founder himself involved in all sensual pleasures can be called as a pagan cult by this definition.
      c) Vedas do not have these words ‘idol worship’.

  7. Agniveer is the best site to know about our VEDAS n our Granth… It gives culture n well managed life stlye.. Please follow this if u want to live peaceful n well cultured life style….

  8. प्रश्न: 1

    इस्लाम एक पुराना धर्म है. अपनी शिक्षाओं लागू आज नहीं हो सकता है. लेकिन इस्लाम था और अभी भी एक अरब विश्वासियों के साथ एक महान धर्म है. इस्लाम मानव सभ्यता में एक महत्वपूर्ण भूमिका निभाई.

    एक विश्वास की महानता अपने अनुयायियों की संख्या है, लेकिन जुटना और अपने निहित सत्य, इसकी उपयोगिता और साध्यता द्वारा निर्धारित नहीं है. वहाँ एक समय है कि हर किसी का मानना ​​था कि पृथ्वी फ्लैट था. सभी दार्शनिकों और भविष्यद्वक्ताओं सहमति जताई और आम भावना यह पुष्टि की है. अभी तक यह सच नहीं था.

    इस्लाम मानव सभ्यता में एक महत्वपूर्ण भूमिका निभाते किया. लेकिन यह थी कि एक सकारात्मक या नकारात्मक भूमिका है? कितने मानव जीवन अल्लाह की वेदी पर बलिदान किया गया? मुहम्मद अरब के यहूदियों को जो कि 2000 साल के लिए भूमि घर बुलाया exterminated. वे उनके अरब compatriots के साथ गठजोड़ किया था और उनके साथ intermarried. वे पूरी तरह Arabianized थे. अरब में कोई धार्मिक संघर्ष था. मुहम्मद धार्मिक असहिष्णुता ही नहीं शुरू की है, वह अरब के जातीय सफाई चलाया और एक “दैवीय ठहराया” के बीच नफरत अपने अनुयायियों और यहूदियों के अपने टोल ले जा रहा है कि यहां तक ​​कि इस दिन के लिए उकसाया. उनकी idolaters को मारने के आदेश 1400 के वर्षों में और अधिक मानव जीवन को नष्ट कर दिया की तुलना हिटलर 13 साल में नष्ट करने का सफल. केवल भारत में मरने वालों की संख्या नौ करोड़ के करीब थी. इस्लाम अपने अनुयायियों के मन पर एक बड़ा प्रभाव था. लेकिन हम भुगतान किया है और उस प्रभाव के लिए हमारे जीवन के साथ भुगतान रखने के लिए. मुसलमानों और आतंकवाद के वर्तमान लहर की पीड़ा पिछड़ेपन उस प्रभाव का परिणाम हैं.

  9. kya hum dharm aur adhyatm ke saath samaj me phaili kuchh any buraiyon par bhi charcha kar sakte hain ? yadi haan to sanjeev ji bataiye ki bhrashtachar ke virodh me aap kya kar rahe hain.

  10. EK VICHAR DHARA JISKI AAJ ATYADHIK AVSHYKTA THI HUMESHA KI BHANTI PHIR SE SHURU HO CHUKI HAI. APKE PRAYAS KE LIYE SADHUVAD.

  11. DEAR AGNIVEER WHAT IS THE REAL DHARAM ON THE EARTH TO WHICH FOLLOW .IT IS VERY DOUBTFULLY THAT THERE ARE MANY DHARMA LIKE HINDU MUSLIM SIKH AND ISAAI. AND MANY MORE LIKE THIS PLEASE GUIDE ME

  12. अग्निवीर जी नमस्ते, आपने कहा था कि अग्निवीर कोई व्यक्ति विशेष नहीं बल्कि एक संस्था जिसका नाम अग्निवीर है, क्या मैं पूछ सकता हूँ कि इसके संचालक कौन हैं? कहीं स्वामी अग्निवेश तो इसके संचालक नहीं ?

    • अग्निवीर एक संस्था एवं व्यक्ति से बढ़कर एक विचारधारा है जो यजुर्वेद मंत्र १५. ५२ से प्रेरित है. अग्निवेश जैसी मानसिकता को अग्निवीर राष्ट्रविरोधी, मानवता विरोधी एवं विघटनकारी मानता है.

  13. Dear sir,

    Now a days there are so many people have making claims to be Guru and open your wisdom eye and take you to heaven after death. Are these people are true and to be followed?

    • All such people are fooling themselves and others. When they cannot even control their own urges like hunger, thirst, toilet etc for more than a few hours, how can they control anyone’s destiny. But spiritualism is the most successful business model without any recession risks. Hence it is a natural destination for fraud marketeers.

  14. Namaste adarniy Arya musafir ji,
    Bhasha mein anuvaad karne ke liye aapko bahut bahut dhanyavaad. Aajkal jab har koi english ke peeche bhag raha hai, hamari website ko bhasha (hindi) mein likhna uttam aur sarahniya hai.

  15. ……………..
    Where does agniveer stand on war (use of muscle power) that countries, organizations and individuals use to promote their interests and beliefs?
    ……………..
    Obviously such bullies/ forces can not be wished away in “सर्वथा शांति की स्थापना हो| ॐ शांति शांति शांति!” It obviously sounds wonderful when you say there should NOT be caste or gender or color based discrimination. BUT what is your stand when some agniveer (victim) confronts discriminating bully who is inimical to philosophical rant??? These forces are REAL, are all pervading. Each one of us have to face these daily. Silence of agniveer on such an important issue is puzzling. WHERE DOES AGNIVEER (victim) STAND WHEN CONFRONTED WITH SUCH FORCES???
    ……………..
    Stand may (?) have been expressed in some other article. However, that stand (in case there is one) is so important that it ought to have found its place in this article. Thanks.
    ……………..
    – Ketan Bhatt

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