हिन्दू मुस्लिम एकता

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हमने इतिहास में लिखे हिन्दू मुस्लिम एकता के प्रतीकों पर एक दृष्टि डाली. सदैव कहा जाता रहा कि सदियों से हिन्दू मुसलमान इस देश भारत में साथ साथ रहते आये हैं, हमारी संस्कृति गंगा जमुनी है, हमारा प्यार मुहब्बत का रिश्ता है, इंसानियत का रिश्ता है….

मिसाल के तौर पर इस्लाम के सूफी ख्वाजा मोईनुद्दीन चिश्ती हर हिन्दू मुसलमान के दिल में बसे हैं. उनकी कब्र पर जहां मुसलमान सर झुकाते हैं तो भाईचारे की भावना से विवश हिन्दू भी सर झुकाते हैं.

फिर, अजीमोशान शहंशाह अकबर जो हर दिल अजीज हैं, जिन्होंने भारत के राजाओं और प्रजाओं को काट काटकर एक छत्र में खड़ा कर दिया. जिन्होंने धर्म के बन्धनों को तोड़कर छत्तीसों हिन्दू राजपूत कन्याओं को अपने हरम में डालकर अपने सबसे करीब आने का सुनहरा अवसर दिया. क्या इससे बढ़कर हिन्दू मुस्लिम एकता का प्रतीक कुछ हो सकता है? ये और बात है कि कभी इन शौक़ीन सुल्तानों ने अपने हरम से उत्पन्न हुई किसी स्त्री को किसी हिन्दू को नहीं ब्याहने दिया.

फिर, टीपू सुलतान ने अपनी मातृभूमि भारत के लिए अंग्रेजों से लड़ाई की और शहीद हो गए.

अतः मोईनुद्दीन चिश्ती, अकबर, और टीपू सुलतान जैसे व्यक्ति ही वास्तव में हिन्दू मुस्लिम एकता के प्रतीक हैं, ऐसा हमारे इतिहास को पढने से प्रतीत होता है.

यह बात अलग है कि कुछ सिरफिरे ऐसे एकता के प्रतीकों पर यह कह कर प्रश्न खडा कर देते हैं कि मोईनुद्दीन चिश्ती तो एक गद्दार घुसपैठिया था जिसने मुहम्मद गौरी को भारत के हिन्दू राजा पृथ्वीराज चौहान पर हमला करने के लिए उकसाया था और सहायता दी थी. वे कहते हैं कि अकबर ने जब चित्तौड़ विजय के समय तीस हज़ार निर्दोष लोगों के कत्ले आम के आदेश दिए (और उतनी स्त्रियों को या जल मरने के लिए या अपने सैनिको कि हवस पूर्ती के लिए छोड़ दिया), और उनके सिरों को काटकर उनसे मीनार बनवायीं तो फिर वह एकता का प्रतीक कैसे हुआ? जब टीपू सुलतान ने हजारों हिन्दुओं को जबरन मुसलमान बनाया और हजारों को क़त्ल किया क्योंकि वे मुसलमान न बने तो फिर वह एकता का प्रतीक कैसे? वे कहते हैं कि टीपू भारत के लिए नहीं बल्कि अपनी हुकूमत के लिए अंग्रेजों से लड़ रहा था.

सदियों से साथ साथ रहने की बात पर जब ये सिरफिरे सवाल उठाते हैं कि एक समय इस देश की सीमाएं पश्चिम में ईरान को तो पूर्व में बर्मा को छूती थीं, और उत्तर में कश्मीर भी इसी भारत भूमि का अंश था तो फिर ऐसा कैसे हुआ कि सदियों से साथ साथ रहने वाले भाइयों ने हमारी भारत माता को पांच टुकड़ों (अफगानिस्तान, पाकिस्तान, भारत, कश्मीर, बंगलादेश) में तोड़ डाला जिनमें से चार में आज साथ रहने वाले हिन्दू दीखते ही नहीं, तो इस पर सब इतिहासकार और सेकुलरवादी बिफर पड़ते हैं. हम भी इन सिरफिरों से बिलकुल संतुष्ट नहीं!

अरे! क्या हिन्दू मुस्लिम एकता के लिए कुछ हिन्दू सिर्फ अपने सिर, अपनी स्त्रियाँ, अपना धर्म और अपनी जमीन भी नहीं दे सकते? क्या हिन्दुओं का यह कर्त्तव्य नहीं था कि दुनिया भर में इस्लामी परोपकार और कल्याणकारी भावना से ओतप्रोत घूम रहे मुगलों, अरबों, तुर्कों आदि को कुछ सिर, बहनें, बेटियां  और धर्म अर्पण कर उनके परोपकार का मोल चुकाते? जो मुग़ल आदि सदा अपने मुल्क छोड़कर पराये मुल्क भारत को एक करने के महान उद्देश्य से यहाँ संघर्ष करते रहे, वे इतना तो अधिकार रखते ही थे कि उन्हें पारितोषिक के रूप में धन, स्त्रियाँ, राज्य, धर्म और इन सबसे बढ़कर “एकता का प्रतीक” सम्मान मिले. अरे लानत है ऐसे स्वाभिमानी हिन्दुओं पर जो सांप्रदायिक सद्भाव के लिए इतना भी नहीं कर सकते! इस देश के अधिकाँश इतिहासकारों के लिए यह हर्ष का विषय होना चाहिए कि ऐसा ही हुआ |भले ही कुछ सिरफिरे आज इसका विरोध करते रहें जैसा कि महान मुगलों के समय क्षुद्र महाराणा प्रताप और शिवाजी ने किया था और यहाँ अग्निवीर कर रहा है. पर कौन पूछता है इनको? दिल्ली में ही अकबर, बाबर, हुमायूं, औरंगजेब, लोदी, आदि के नाम पर सड़कों और स्थानों के नाम रखे गए हैं ताकि एकता के धरोहर इन नामों का सम्मान हो सके!

खैर छोड़ें इन व्यर्थ बातों को.

आज हम जिस विषय पर लिखने जा रहे हैं, वह सेकुलरवादियों और एकपक्षीय एकता चाहने वालों को शायद अच्छा न लगे. आज से अट्ठारह वर्ष पहले ६ दिसंबर सन १९९२ को इस देश के एक और “एकता के प्रतीक” मुगलों में से एक बाबर के नाम पर बनाया गया एक ढांचा तोड़ डाला गया. इसका इतिहास कुछ ऐसा है कि अयोध्या में बहुत पुराना राम मंदिर हुआ करता था जिस के बारे में करोड़ों हिन्दुओं का यह विश्वास है कि श्रीराम उसी स्थान पर जन्मे थे. इसे कुफ्र की निशानी मानकर बाबर के जिहादियों ने बलपूर्वक तोड़ डाला क्योंकि मूर्तिपूजा इस्लाम में वर्जित है और इसलिए वहां बाबर के नाम की मस्जिद बना दी. राम मंदिर को बलपूर्वक तोड़े जाने की घटना पर एक शब्द भी न निकालने वाले सेकुलरिस्टों और जिहादियों को जैसे ही बाबरी ढांचा टूटने की खबर मिली, उनके हृदयों पर जैसे आकाश टूट पडा, जैसे बिजली सी गिरी या वज्रपात हो गया.

ठीक ही था, राम ठहरा इस देश के निवासियों का पूर्वज और बाबर ठहरा पराये मुल्क से यहाँ आकर परोपकार के निमित्त धन, स्त्रियाँ, राज्य आदि की व्यवस्था करने वाला जिसका एकमात्र उद्देश्य इस भारत को एकछत्र के नीचे लाकर विश्व का कल्याण करना था! एक राम था जिसने पराया देश लंका विजय करने पर भी राज्य वहीँ के स्थानीय लोगों को दे दिया, उनकी स्त्रियों को माता कहकर उनकी ओर देखा भी नहीं और एक ओर बाबर था जिसने राज्य जीतकर यहाँ के स्थानीय लोगों की सेवा करना ज्यादा उचित समझा और स्त्रियाँ जीतकर इन्हें अपना ही कर्त्तव्य समझ कर अपने हरम की ओर रवाना कर दिया! इस तरह के “एकता के प्रतीक” बाबर के जीवन के कुछ और प्रेरक (?) प्रसंगों को पढने की इच्छा से हमने स्वयं बाबर का लिखा हुआ “बाबरनामा” पढ़ा जिसमें उसने अपने जीवन की घटनाएं अपनी लेखनी से ही लिखी हैं ताकि आने वाली पीढी भी उनसे कुछ सीख ले सके. आप भी बाबरनामा को यहाँ पढ़ सकते हैं http://www.archive.org/details/baburnama017152mbp

हमारा यह दृढ विश्वास था कि बाबर एक पक्का मुसलमान था और इस्लामी रिवाज के अनुसार अपने देश से अधिक दूसरे देशों के लोगों, धर्म, राज्य और स्त्रियों का अधिक ध्यान उसे सताता था. पर अचानक हमने कुछ ऐसा पढ़ा कि जिससे इस महात्मा मोमिन बाबर के चरित्र के कुछ और रंग सामने आये! और तब हमें लगा कि हिन्दू मुस्लिम एकता के प्रतीकों में से सबसे अधिक यदि कोई मूल्यवान है तो वह है बाबरी ढाँचे का विध्ध्वंस. चौंकिए नहीं! खुद बाबर के लिखे बाबरनामा से यह पता चलता है कि राम मंदिर तोड़कर उसके नाम पर बनाया गया ढांचा असल में मस्जिद ही नहीं था! ऐसा इसलिए क्योंकि बाबर खुद मुसलमान ही नहीं था! क्योंकि-

बाबर एक समलैंगिक (homosexual), नशेड़ी, शराबी, और बाल उत्पीड़क (child molester) था

बाबरनामा के विभिन्न पृष्ठों से लिए गए निम्नलिखित अंश पढ़िए
१. पृष्ठ १२०-१२१ पर बाबर लिखता है कि वह अपनी पत्नी में अधिक रूचि नहीं लेता था बल्कि वह तो बाबरी नाम के एक लड़के का दीवाना था. वह लिखता है कि उसने कभी किसी को इतना प्यार नहीं किया कि जितना दीवानापन उसे उस लड़के के लिए था. यहाँ तक कि वह उस लड़के पर शायरी भी करता था. उदाहरण के लिए- “मुझ सा दर्दीला, जुनूनी और बेइज्जत आशिक और कोई नहीं है. और मेरे आशिक जैसा बेदर्द और तड़पाने वाला भी कोई और नहीं है.”

२. बाबर लिखता है कि जब बाबरी उसके ‘करीब’ आता था तो बाबर इतना रोमांचित हो जाता था कि उसके मुंह से शब्द भी नहीं निकलते थे. इश्क के नशे और उत्तेजना में वह बाबरी को उसके प्यार के लिए धन्यवाद देने को भी मुंह नहीं खोल पता था.

३. एक बार बाबर अपने दोस्तों के साथ एक गली से गुजर रहा था तो अचानक उसका सामना बाबरी से हो गया! बाबर इससे इतना उत्तेजित हो गया कि बोलना बंद हो गया, यहाँ तक कि बाबरी के चेहरे पर नजर डालना भी नामुमकिन हो गया. वह लिखता है- “मैं अपने आशिक को देखकर शर्म से डूब जाता हूँ. मेरे दोस्तों की नजर मुझ पर टिकी होती है और मेरी किसी और पर.” स्पष्ट है की ये सब साथी मिलकर क्या गुल खिलाते थे!

४. बाबर लिखता है कि बाबरी के जूनून और चाह में वह बिना कुछ देखे पागलों की तरह नंगे सिर और नागे पाँव इधर उधर घूमता रहता था.

५. वह लिखता है- “मैं उत्तेजना और रोमांच से पागल हो जाता था. मुझे नहीं पता था कि आशिकों को यह सब सहना होता है. ना मैं तुमसे दूर जा सकता हूँ और न उत्तेजना की वजह से तुम्हारे पास ठहर सकता हूँ. ओ मेरे आशिक (पुरुष)! तुमने मुझे बिलकुल पागल बना दिया है”.

इन तथ्यों से पता चलता है कि बाबर और उसके साथी समलैंगिक और बाल उत्पीड़क थे. अब यदि इस्लामी शरियत की बात करें तो समलैंगिकों के लिए मौत की सजा ही मुक़र्रर की जाती है. बहुत से इस्लामी देशों में यह सजा आज भी दी जाती है. बाबर को भी यही सजा मिलनी चाहिए थी. दूसरी बात यह है कि उसके नाम पर बनाए ढाँचे का नाम “बाबरी मस्जिद” था जो कि उसके पुरुष आशिक “बाबरी” के नाम पर था! हम पूछते हैं कि क्या अल्लाह के इबादत के लिए कोई ऐसी जगह क़ुबूल की जा सकती है कि जिसका नाम ही समलैंगिकता के प्रतीक बाबर के पुरुष आशिक “बाबरी” के नाम पर रखा गया हो? इससे भी बढ़कर एक आदमी द्वारा जो कि मुसलमान ही नहीं हो, समलैंगिक और बच्चों से कुकर्म करने वाला हो, उसके नाम पर मस्जिद किसी भी मुसलमान को कैसे क़ुबूल हो सकती है?

यह सिद्ध हो गया है कि बाबरी मस्जिद कोई इबादतघर नहीं लेकिन समलैंगिकता और बाल उत्पीडन का प्रतीक जरूर थी. और इस तरह यह अल्लाह, मुहम्मद, इस्लाम आदि के नाम पर कलंक थी कि जिसको खुद मुसलमानों द्वारा ही नेस्तोनाबूत कर दिया जाना चाहिए था. खैर वे यह नहीं कर सके पर जिसने यह काम किया है उनको बधाई और धन्यवाद तो जरूर देना चाहिए था. यह बहुत शर्म की बात है कि पशुतुल्य और समलैंगिकता के महादोष से ग्रसित आदमी के बनाए ढाँचे को, जो कि भारत की हार का प्रतीक था, यहाँ के इतिहासकारों, मुसलमानों, और सेकुलरवादियों ने किसी अमूल्य  धरोहर की तरह संजो कर रखना चाहा.

यह ऐसी ही बात है कि जैसे मुंबई में छत्रपति शिवाजी टर्मिनल्स स्टेशन पर नपुंसक और कायर आतंकवादी अजमल कसब द्वारा निर्दोष लोगों को मौत के घाट उतारने के उपलक्ष्य में उस स्थान का नाम “कसब भूमि” रखकर उसे भी धरोहर बना दिया जाये!

Babur-and-Babri

बाबर नरसंहारक, लुटेरा, बलात्कारी, शराबी और नशेड़ी था

यहाँ पर इस विषय में कुछ ही प्रमाण इस दरिन्दे की लिखी जीवनी बाबरनामा से दिए जा रहे हैं. इसके और अधिक कारनामे जानने के लिए पूरी पुस्तक पढ़ लें.

पृष्ठ २३२- वह लिखता है कि उसकी सेना ने निरपराध अफगानों के सिर काट लिए जो उसके साथ शान्ति की बात करने आ रहे थे. इन कटे हुए सिरों से इसने मीनार बनवाई. ऐसा ही कुछ इसने हंगू में किया जहाँ २०० अफगानियों के सिर काट कर खम्बे बनाए गए.

पृष्ठ ३७०- क्योंकि बाजौड़ में रहने वाले लोग दीन (इस्लाम) को नहीं मानते थे इसलिए वहां ३००० लोगों का क़त्ल कर दिया गया और उनके बीवी बच्चों को गुलाम बना लिया गया.

पृष्ठ ३७१- गुलामों में से कुछों के सिर काटकर काबुल और बल्ख भेजे गए ताकि फतह की सूचना दी जा सके.

पृष्ठ ३७१- कटे हुए सिरों के खम्बे बनाए गए ताकि जीत का जश्न मनाया जा सके.

पृष्ठ ३७१- मुहर्रम की एक रात को जश्न मनाने के लिए शराब की एक महफ़िल जमाई गयी जिसमें हमने पूरी रात पी. (पूरे बाबरनामा में जगह जगह ऐसी शराब की महफ़िलों का वर्णन है. ध्यान रहे कि शराब इस्लाम में हराम है.)

पृष्ठ ३७३- बाबर ने एक बार ऐसा नशा किया कि नमाज पढने भी न जा सका. आगे लिखता है कि यदि ऐसा नशा वह आज करता तो उसे पहले से आधा नशा भी नहीं होता.

पृष्ठ ३७४- बाबर ने अपने हरम की बहुत सी महिलाओं से बहुत से बच्चे उत्पन्न किये. उसकी पहली बेगम ने उससे वादा किया कि वह उसके हर बच्चे को अपनाएगी चाहे वे किसी भी बेगम से हुए हों, ऐसा इसलिए क्योंकि उसके पैदा किये कुछ बच्चे चल बसे थे. यह तो जाहिर ही है कि इसके हरम बनाम मुर्गीखाने में इसकी हवस मिटाने के लिए कुछ हजार औरतें तो होंगी ही जैसे कि इसके पोते स्वनामधन्य अकबर के हरम में पांच हजार औरतें थीं जो इसकी ३६ (छत्तीस) पत्नियों से अलग थीं. यह बात अलग है कि इसका हरम अधिकतर समय सूना ही रहता होगा क्योंकि इसको स्त्रियों से अधिक पुरुष और बच्चे पसंद थे! और बाबरी नाम के बच्चे में तो इसके प्राण ही बसे थे.

पृष्ठ ३८५-३८८- अपने बेटे हुमायूं के पैदा होने पर बाबर बहुत खुश हुआ था, इतना कि इसका जश्न मनाने के लिए अपने दोस्तों के साथ नाव में गया जहां पूरी रात इसने शराब पी और नशीली चीजें खाकर अलग से नशा किया. फिर जब नशा इनके सिरों में चढ़ गया तो आपस में लड़ाई हुई और महफ़िल बिखर गयी. इसी तरह एक और शराब की महफ़िल में इसने बहुत उल्टी की और सुबह तक सब कुछ भूल गया.

पृष्ठ ५२७- एक और महफ़िल एक मीनारों और गुम्बद वाली इमारत में हुई थी जो आगरा में है. (ध्यान रहे यह इमारत ताजमहल ही है जिसे अधिकाँश सेकुलर इतिहासकार शाहजहाँ की बनायी बताते हैं, क्योंकि आगरा में इस प्रकार की कोई और इमारत न पहले थी और न आज है! शाहजहाँ से चार पीढी पहले जिस महल में उसके दादा ने गुलछर्रे उड़ाए थे उसे वह खुद कैसे बनवा सकता है?)

बाबरनामा का लगभग हर एक पन्ना इस दरिन्दे के कातिल होने, लुटेरा होने, और दुराचारी होने का सबूत है. यहाँ यह याद रखना चाहिए कि जिस तरह बाबर यह सब लिखता है, उससे यह पता चलता है कि उसे इन सब बातों का गर्व है, इस बात का पता उन्हें चल जाएगा जो इसके बाबरनामा को पढेंगे. आश्चर्य इस बात का है कि जिन बातों पर इसे गर्व था यदि वे ही इतनी भयानक हैं तो जो आदतें इसकी कमजोरी रही होंगी, जिन्हें इसने लिखा ही नहीं, वे कैसी क़यामत ढहाने वाली होंगी?

सारांश

१. यदि एक आदमी समलैंगिक होकर भी मुसलमान हो सकता है, बच्चों के साथ दुराचार करके भी मुसलमान हो सकता है, चार से ज्यादा शादियाँ करके भी मुसलमान हो सकता है, शराब पीकर नमाज न पढ़कर भी मुसलमान हो सकता है, चरस, गांजा, अफीम खाकर भी मुसलमान हो सकता है, हजारों लोगों के सिर काटकर उनसे मीनार बनाकर भी मुसलमान हो सकता है, लूट और बलात्कार करके भी मुसलमान हो सकता है तो फिर वह कौन है जो मुसलमान नहीं हो सकता? क्या इस्लाम इस सब की इजाजत देता है? यदि नहीं तो आज तक किसी मौलवी मुल्ला ने इस विषय पर एक शब्द भी क्यों नहीं कहा?

२. केवल यही नहीं, जो यह सब करके अपने या अपने पुरुष आशिक के नाम की मस्जिद बनवा दे, ऐसी जगह को मस्जिद कहना हराम नहीं है क्या? क्या किसी बलात्कारी समलैंगिक शराबी व्यभिचारी के पुरुष आशिक के नाम की मस्जिद में अता की गयी नमाज अल्लाह को क़ुबूल होगी? यदि हाँ तो अल्लाह ने इन सबको हराम क्यों बताया? यदि नहीं तो अधिकतर मुसलमान और मौलवी इस जगह को मस्जिद कहकर दंगा फसाद क्यों कर रहे हैं? क्या इसका टूटना इस्लाम पर लगे कलंक को मिटाने जैसा नहीं था? क्या यह काम खुद मुसलमानों को नहीं करना चाहिए था?

३. जब इस दरिन्दे बाबर ने खुद क़ुबूल किया है कि इसने हजारों के सिर कटवाए और कुफ्र को मिटाया तो फिर आजकल के जाकिर नाइक जैसे आतंकी मुल्ला यह क्यों कहते हैं कि इस्लाम तलवार के बल पर भारत में नहीं फैला? जब खुद अकबर (जिसको इतिहासकारों द्वारा हिन्दुओं का रक्षक कहा गया है और जान ए हिन्दुस्तान नाम से पुकारा गया है) जैसा नेकदिल (?) भी हजारों हिन्दुओं के सिरों को काटकर उनके खम्बे बनाने में प्रसिद्ध था तो फिर यह कैसे माना जाए कि इस्लाम तलवार से नहीं फैला? क्या ये लक्षण शान्ति से धर्म फैलाने के हैं? फिर इस्लाम का मतलब ‘शान्ति’ कैसे हुआ?

४. भारत, पाकिस्तान, अफगानिस्तान, बंगलादेश में रहने वाले सब मुसलमानों के पूर्वज हिन्दू ही थे जो हजारों सालों से यहाँ रहते आ रहे थे. जब बाबर जैसे और इससे भी अधिक दरिंदों ने आकर यहाँ मारकाट बलात्कार और तबाही मचाई, सिरों को काटकर मीनारें लहरायीं तो दहशत के इस वातावरण में बहुत से हिन्दुओं ने अपना धर्म बदल लिया और उन्हीं लाचार पूर्वजों की संतानें आज मुसलमान होकर अपने असली धर्म के खिलाफ आग उगल रही हैं. जिन मुसलमानों के बाबरी मस्जिद (?) विध्ध्वंस पर आंसू नहीं थम रहे, जो बार बार यही कसम खा रहे हैं कि बाबरी मस्जिद ही बनेगी, जो बाबर को अपना पूर्वज मान बैठे हैं, ज़रा एक बार खुद से सवाल तो करें- क्या मेरे पूर्वज अरब, तुर्क या मंगोल से आये थे? क्या मेरे पूर्वज इस भारत भूमि की पैदावार नहीं थे? कटे हुए सिरों की मीनारें देखकर भय से धर्म परिवर्तन करने वाले पूर्वजों के वंशज आज कौन हैं, कहाँ हैं, क्या कभी सोचा है? क्या यह विचार कभी मन में नहीं आता कि इतने कत्ले आम और बलात्कार होने पर विवश माता पिताओं के वे लाल आज कहाँ हैं कि जिन्हें अपना धर्म, माता, पिता सब खोने पड़े? क्या भारत, पाकिस्तान, अफगानिस्तान, बंगलादेश में रहने वाले ७०-८० करोड़ मुसलमान सीधे अरबों, तुर्कों के वंशज हैं? कभी यह नहीं सोचा कि इतने मुसलमान तो अरब, तुर्क, ईरान, ईराक में मिला कर भी नहीं हैं जो इस्लाम के फैलाने में कारण बने? क्या तुम्हारे पूर्वज राम को नहीं मानते थे? क्या बलपूर्वक अत्याचार के कारण तुम्हारे पूर्वजों का धर्म बदलने से तुम्हारा पूर्वज राम की बजाय बाबर हो जाएगा? अगर नहीं तो आज अपने असली पूर्वज राम को गाली और अपने पूर्वजों के कातिल और बलात्कारी बाबर का गुणगान क्यों?

५. अयोध्या की तरह काशी, मथुरा और हजारों ऐसी ही जगहें जिन्हें मस्जिद कह कर इस्लाम का मजाक उड़ाया जाता है, जो बाबर की तरह ही इसके पूर्वजों और वंशजों की हवस की निशानियाँ हैं, इनको मुसलमान खुद क्यों मस्जिद मानने से इनकार नहीं करते?

६. यदि बाबरी ढांचा टूटना गलत था तो राम मंदिर टूटना गलत क्यों नहीं था? यदि राम मंदिर की बात पुरानी हो गयी है तो ढांचा टूटने की बात भी तो कोई नयी नहीं! तो फिर उस पर हायतौबा क्यों?

अंत में हम कहेंगे कि जिस तरह भारत में रहने वाले हिन्दू मुसलमानों के पूर्वजों पर अत्याचार और बलात्कार करने वाले वहशी दरिन्दे बाबर के नाम का ढांचा आज नहीं है उसी तरह बाकी सब ढांचे जो तथाकथित इस्लामी राज्य के दौरान मंदिरों को तोड़कर बनवाये गए थे, जो सब हिन्दू मुसलमानों के पूर्वजों के अपमान के प्रतीक हैं, उनको अविलम्ब मिट्टी में मिला दिया जाए और इसकी पहल हमारे खून के भाई मुसलमान ही करें जिनके साथ हमारा हजारों लाखों सालों का रक्त सम्बन्ध है. इस देश में रहने वाले किसी आदमी की, चाहे वह हिन्दू हो या मुसलमान, धमनियों में दरिन्दे जानवर बाबर या अकबर का खून नहीं किन्तु राम, कृष्ण, महाराणा प्रताप और शिवाजी का खून है. और इस एक खून की शपथ लेकर सबको यह प्रण करना है कि अब हमारे पूर्वजों पर लगा कोई कलंक भी देश में नहीं रह पायेगा.

क्या दृश्य होगा कि हिन्दू और मुसलमान एक साथ अपने एक पूर्वजों पर लगे कलंकों को गिराएंगे और उस जगह अपने पूर्वजों की यादगार के साथ साथ उनके असली धर्म वेद की पाठशाला बनायेंगे जहां राम और कृष्ण जैसे धर्मयोद्धा तैयार होंगे कि फिर कोई बाबर आकर इस भूमि के पुत्रों को उनके माता पिता, दोस्तों और धर्म से अलग न कर सके!

और तब तक के लिए, आओ हम सब हिन्दू और मुस्लिम भाई मिलकर हर साल पूरे उत्साह के साथ ६ दिसंबर के पावन पर्व को ‘शौर्य दिवस’ और ‘गौरव दिवस’ के रूप में मनाएं. हाँ, मथुरा और वाराणसी में ऐसे ही वहशी दरिन्दे ‘औरंगजेब’ के बनाये ढांचें – जो इस्लाम के पावन नाम पर बदतर कलंक है -  उनको मिटाने का सौभाग्य हमारे मुस्लिम भाइयों को ही मिले.

६ दिसंबर १९९२ के दिन हिन्दू-मुस्लिम एकता के सबसे बड़े प्रतीक की स्थापना करने वाले सभी भाई-बहनों को हम सब हिन्दू और मुसलमानों का कोटि-कोटि नमन.

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Comments

  1. रवि शंकर says

    साधुवाद आपको इतना बढ़िया लिखने के लिये

  2. rakshak arya says

    धन्यवाद अग्निवीर जी , उत्तम लेख |
    इससे बहुत लोगो कि आँखों से भ्रम कि पट्टी उतर जायेगी |

  3. Gaurav Tripathi says

    AAP LOG SAHI KH RAHE HAI

    BHARAT KO PUNAH KRANTI KI JRURT HAI

    GAURAV TRIPATHI
    THE ANCIENT INDIAN
    BHARAT KI PRACHIN SANSKRITI KA PUNAH JAGRAN NVINTA KE SATH

  4. raj.hyd says

    yah babri dhancha agar muslike madhyam setoda jata to jyada achha hota , do samudayo me katuta nah failti athva sarkar isko tudvati tab bhi achha rahata , jab ek samuday ne usko masjid maan liya tab dusra samuday use todega tab katuta bhi fail jati hai ussebachna chahiye tha !hame mansiktaur par muslmo ko hi samjhana chahiye tha ki vah yah dhancha tode , sansar me sab kuch sambhav hai bas prbhavi prachar ki avashykta hai ! jo aap is manch se kar hi rahe hai

  5. ved prakash vidyarthi says

    aapne bahut achchha sankalan prastut kar usaka vishleshan bhi kiya hai.aapko saadhuvaad!aryon,hinduon kovaastvik itihaas pataa chalega to sambhavatah unmen jagriti aayegi.

  6. Ganesh says

    Eye Opener!!! I never new that Babur had these great qualities!!!! :) Although only fools will say or believe that Islam was NOT spread by sword in India, but this book (Baburnama) bashes their claims!!!!

    Thank You Agniveer!

    • tarukh siddiqui hashmati says

      itihas per gard main bhi thoda saaf kar du jaise ki sindh ke brahmin raja dahir ne apni sagi bahen se shadi kar li thi
      prithvi raaj chauhan sanyogita ko utha ke le gaya tha
      raja maansingh ne jodha ko ek muslim ko byah diya taki akbar uske ilake pe hamla na kare bahen de di kroor musalmaano ko sirf apne raaj ke liye aur jab musalmaan itne hi bure the to jaan bachane ke liye humayun ko kyun rakhi bhej di kya hindu raja apni bahen ki raksha nahi kar sakte the

      • HAHAHA says

        आदरणीय तारुख सिद्दिक़ि हश्माती जी।
        अल्लाह भला करे।
        भाईजान, आप इतिहास छोड़िए, आप आधुनिक समय की बात करे। वह सब तो पुरानी बाते है – उन्हे उजागर करके आप क्या सिद्ध करना चाहते है? मैं आपसे पूछना चाहता हु कि ओसामा बिन लादेन ने 9/11 में धमाके क्यो कराए? शिया सुन्नी आपस में क्यो लड़ मरते है? क्या इस्लाम का अर्थ शांति नही है? क्या आप ओसामा बिन लादेन का समर्थन करते है जैसा आपके ROLE MODEL ज़ाकिर नाईक करते है? भाई ज़ाकिर नाईक ने तो हर मुसलमान को आतंकवादी तक बनने के लिए कहा था? क्या आप उनसे सहमत है?

        क़ुरान 2 256 का अपमान मुसलमान क्यो करते है – स्वधर्मत्यागियो को मारकर? क़ुरान 5 32 का अपमान आतंकवादी क्यो करते है? 60 7 तथा 60 8 का अपमान मुसलमानो से ही क्यो हुआ है? क्या आप मानते हो कि क़ुरान की पाक शिक्षाओ का अपमान करने वाले (अल – क़ाएदा, तालिबान, अन्य आतंकवादी) सदा जहन्नुम में जाऐंगे?

        अब कृपया यह मत कहिएगा कि हिन्दू भी वेद की कुछ शिक्षाओ का अपमान करते है क्योकि वेदो में पुनर्जन्म का उल्लेख है। अभी भूल हो गई तो सुधारने का मौका मिलेगा। अगले जन्म में तो सुधर ही सकते है। लेकिन ईस्लाम सदा के लिए जहान्नुम / जन्नत में फेंकता है। भूल सुधारने का तो मौका देता ही नही। और आपके ROLE MODEL ज़ाकिर नाईक के अनुसार गैर मुसलमान कितना भी अच्छा क्यो न हो, वह जहन्नुम में ही जाएगा। अब कोई गैर मुसलमान भाई बहन सोचेंगे कि जब अल्लाह ने जहन्नुम ही देना है तो अच्छे क्यो बने? बुरे ही रहते है। आप स्वयं देख ले कि ज़ाकिर नाईक ने क्या सिखाया। मैंने किसी ईसाई को यह कहते नही सुना कि अच्छा गैर ईसाई भी hell में ही जाएगा। फिर मुसलमान क्यो गैर मुसलमानो को जहन्नुम में जाते हुए देखना चाहते है?

        मेरी इस्लाम से कोई शत्रुता नही है। सबसे बड़ा अमन परस्त मजहब यही है यदि आतंकवादियो को मुसलमान का दर्ज़ा न दिया जाए। बुरी बात तो यह है कि कुछ के कारण पूरा इस्लाम बदनाम होता है। ज़ाकिर नाईक जैसे कुछ बकवास ही सुना देते है। अब जो व्यक्ति हर मुसलमान को आतंकवादी बनाना चाहता है उसका क्या किया जाए?

        • eisa khan says

          ek din ayega jab imam mehdi bhi afghanistan se nikle ge! jab wo ayege to sab christians aur israelis se ladenge aur jeet hamari hi hogi yani muslims ki……… ye jo ab muslims ke saath ho raha hai hame to muhammad SAW ne 1400 YEARS Pehle hi bata diya tha….
          muslims pa aisa waqt ayega jaise koi bhooka admi khane ke table par toot padta hai…. uske baad muslims phir sari duniya me hukumat karinge…

          • raj.hyd says

            shri Eisa ji, muhammad ji bhavishvakta bhi the kya ? fir unhone apne hi samne marne vali santano aubibi khudeeza ji ki maut ki bhavishyvani kyo nahi kar paye the ? apne do sasur aur do damad ki hatya bhi muslim karenge aur unke navase husain ji ki hatya bhi muslim karenge kya iski bhavshyvani muhammad ji kar gaye the?mehendi ji ki s jamane me [kaun se sal me] ayenge yah bhavishyvani karne me kya taklif thi ? ap jaise kitni muslim margaye aur chale gaye n kayamat ayi aur n imam mehandi aye yah jhuthi bate hai ap gadho ke samne gajar latkane vali upma pesh kar rahe hai

  7. huma khan says

    humne babarnaama nhi padha ha lkin itihas gwah ha ki jitne bhi mughal shasak guzre ha sb ayyash kism k the, to is baat pr koi bahas nhi honi chahiye ki wo kya the or kya nhi…..islam sharab pine ki ijazat hargiz nhi deta….islam ek sath 4 biwiya bhi sath rkhne ki ijazat nhi deta…islam esi kisi cheez ki ijazat nhi deta jo allah pak k qanoon k khilaf ho….or homosexuality…..astaghfirullah….allah hi maghfirat kre ese bando ki…..babar ne masjid bnayi uske piche itihas ab logo ko pta chala ha….islam najayaz tariqe se apnayi zameen pr masjid bnane ki ijazat bhi hargiz nhi deta…..islaaam me balpurwak or zorzabardasti se dharm parivartan bhi krana wajib nhi ha…agar koi insaan apni khushi se ise apnayega tbhi wo isko sache mann se qubul bhi kr payega……..

    • shravak says

      @huma

      —islaaam me balpurwak or zorzabardasti se dharm parivartan bhi krana wajib nhi ha—-
      kya apko pata hai, apke purvaj kaise Islam mein aaye?

      • huma khan says

        ye islam me khi nhi likha ha ki zor zabardasti se aap kisi ko dharm parivartan kra skta ha….no doubt…..hindu dharm bht purana ha… but you know one thing the word hindu is deriven from a persian word, wich means inhabitants of the region beyond the Indus Valley……or jb arab desh me islam dharm ki shuruaat huyi thi to itihas gwaah ki jin logo ne bhi islaam qubul kiya tha wo sirf is dharm ki achaaiyo ki wjh se kiya tha….wha kisne zorzabardasti ki thi??????? kisi ne bhi nhi…….

      • tarukh siddiqui hashmati says

        @shravak hamare purvaj to arab se aaye but mujhe ye batawo ki tumhare 36 karod bhagwaan kahan se aaye. aur ek baat aur batawo ki ved me likha hai ke ishwar ek hai to tumhare 36 karod kaise aur brahma, vishnu aur mahesh me se sabse bada kaun hai

    • Ganesh says

      @huma,

      Aap baburnaamaa padne mein intrsted nahin hain to koi baat nahin…par apke bahut se muslim bhai use ek

      inspiration maante hain..mujhe nahin pataa ki aap us mulla mentality se wakif hain ki nahin jo Akbar to bevakoof

      (kyonki usne tathakathit roop se sabhi dharmon kaa adar kiyaa), par aurangjeb par fakr karte hain kyon ki usne

      talwaar ke dam par islam ko faydaa pahunchayaa (forced conversions kar ke)….

      Rahi baat islaam ke sharab pine ki izaazat naa dene ki to suniye:

      -Ye jo sharaab ko haraam karne wali ayat kuran mein aayee hai uska kissa ye hai:

      Jis samay ye ayat utri us samay arab ke log sharaab ko ghar ghar banaate aur peete the…..Ek baar ek sahabi ji

      sharaab peekar koran padh rahe the aur sharaab ke nashe mein koran ko kuch ka kuch padhte jaa rahe the (poori tara

      galat tareeke aur matlab se pad rahe thhe)..ye baat ek hajrat ne note ki aur mohammad sahab ko bataee…

      Mohammad sahab turant allah talaa ki taraf mukhatib hue aur fauran ye ayat allah ne jibrail ke dwaraa bhej di:

      “ला तकरबुसालाता व अनतुम सुकारा|”
      matlab जब नशा करो तो नमाज के कर;ब न जाओ|

      ab ye baat bhi sochne layak hai ki jab sharaab insaan ke liye itni buri hai to allah talaa ne use hajaaron salon

      baad, karoron logo ke barbaad ho jaane ke baad achanak kyon haraam kiyaa???

      aur agar woh sahabi hazrat namaaj padte waqt galti naa karte to sharaab aaj tak haraam naa hoti!!! Kyonki allaah

      talaa ko ye pata hi na chaltaa ki sharaab buri cheez hai!!!

      As far as vedaas are concerned please see below refrences:

      Rigveda 10.5.6:

      One becomes sinful if he or she crosses even one of the 7 restraints. Yaskacharya defines these 7 sins in his

      Nirukta as: Theft, Adultery, Murder of a noble person, Abortion, Dishonesty, Repeating misdeeds and consumption of

      alcohol.

      Rigveda 8.2.12:

      Those who consume intoxicants lose their intellect, talk rubbish, get naked and fight with each other.

      Rigveda 7.86.6:

      An action performed as per the inner voice does not lead to sins. Dumb…

      • Ganesh says

        Contd…..

        Dumb arrogance against inner voice, however, is source of frustration and miseries in same manner as intoxication and gambling destroy us. Ishwar inspires those with noble elevated thoughts towards progress and propels down those who decide to think lowly. Lowly acts performed even in dreams cause decline.

        Atharvaveda 6.70.1:

        Weak minds are attracted towards meat, alcohol, sensuality and womanizing. But O non-violent mind, you focus your mind towards the world in same manner as a mother cares for her child.

        So the intoxication is considered as recipe for weakness, failure and destruction……

        As far as islam’s view on keeping 4 wives at once is concered..most of the muslims in history have kept more than 4 wives and enumorous numbers of sex slaves as islam approves to keep those women as sex slaves who have been won in fight!!

        Also if islaam was such an against to this practice why did the nabi of islaam who should have been the greatest example of this kept more wives at once???? What meessage does it give to the followers???

        You said “islam esi kisi cheez ki ijazat nhi deta jo allah pak k qanoon k khilaf ho….or homosexuality…..astaghfirullah….allah hi maghfirat kre ese bando ki…..”

        Ye allaah ka kaisaa kanoon hai jo war mein kisee ko haraa dene par unki biwiyon par haq dilaata hai….nikah ke jariye bhi aur jabarjasti rakhail banaakar bhi????

        Agar aap kahen ki ye to un besaharaaon ko sahara dene ke vaste hai ho muhtarmaa ye sahaaraa to Bahan yaa Beti banaa kar bhi diyaa ja saktaa hai…aur koi stree apne pati se itnaa pyaar kar sakti hai (jo ki swabhawik hai) ki uskee mrityu ke baad voh akeli rahnaa chahe…TO???

        Jahaan tak homosexuality ka sawaal hai to ye islaam ke hi nahin balki har ek nazariye se bura hai…..par islaam to aise logon ko wajib-ul-katl tak karaar deta hai (as per your own zakir nayak)….ye baat sahi nahin lagti….agar ye log kuch buraa karte hain to unhen sahi raah par laane ki koshish honi chahiye …..par kisi ki jaan le lena…

        • Ganesh says

          Cont…..

          jaan le lena ??????

          Ye jo aapne islaam ke najayaz tareeke se masjid naa banane ki baat kahi to mutarmaa….arab se lekar bhrat tak aur poori duniyaa mein iske itne udaharn hain ki shayad aap unhe padhte padhte thak jayen par vo khatam naa hon…..

          Aur aapki ye baat “.islaaam me balpurwak or zorzabardasti se dharm parivartan bhi krana wajib nhi ha…agar koi insaan apni khushi se ise apnayega tbhi wo isko sache mann se qubul bhi kr payega……..”

          thoda soch kar is tarah ki batein bola kijiye:

          Tarikh-i-Wassaf summarizes the plight of Hindus when messengers of Islam visited India on vacation.

          “The vein of the zeal of religion beat high for the subjection of infidelity and destruction of idols… The Mohammedan forces began to kill and slaughter, on the right and the left unmercifully, throughout the impure land, for the sake of Islãm, and blood flowed in torrents. They plundered gold and silver to an extent greater than can be conceived, and an immense number of precious stones as well as a great variety of cloths… They took captive a great number of handsome and elegant maidens and children of both sexes, more than pen can enumerate… In short, the Mohammedan army brought the country to utter ruin and destroyed the lives of the inhabitants and plundered the cities, and captured their off-springs, so that many temples were deserted and the idols were broken and trodden under foot, the largest of which was Somnãt. The fragments were conveyed to Dehlî and the entrance of the Jãmi‘ Masjid was paved with them so that people might remember and talk of this brilliant victory… Praise be to Allah the lord of the worlds.”

          Kindly refer to ayats of quraan which clearly tell the muslims to kill the others who do not believe in faith of allah and mohammad!!!! They are so huge in numbers that I found useless to mention here….

          I would comment more on your views as I get time….

      • Ganesh says

        Cont….

        Dumb arrogance against inner voice, however, is source of frustration and miseries in same manner as intoxication and gambling destroy us. Ishwar inspires those with noble elevated thoughts towards progress and propels down those who decide to think lowly. Lowly acts performed even in dreams cause decline.

        Atharvaveda 6.70.1:

        Weak minds are attracted towards meat, alcohol, sensuality and womanizing. But O non-violent mind, you focus your mind towards the world in same manner as a mother cares for her child.

        So the intoxication is considered as recipe for weakness, failure and destruction……

        As far as islam’s view on keeping 4 wives at once is concered..most of the muslims in history have kept more than 4 wives and enumorous numbers of sex slaves as islam approves to keep those women as sex slaves who have been won in fight!!

        Also if islaam was such an against to this practice why did the nabi of islaam who should have been the greatest example of this kept more wives at once???? What meessage does it give to the followers???

        You said “islam esi kisi cheez ki ijazat nhi deta jo allah pak k qanoon k khilaf ho….or homosexuality…..astaghfirullah….allah hi maghfirat kre ese bando ki…..”

        Ye allaah ka kaisaa kanoon hai jo war mein kisee ko haraa dene par unki biwiyon par haq dilaata hai….nikah ke jariye bhi aur jabarjasti rakhail banaakar bhi????

        Agar aap kahen ki ye to un besaharaaon ko sahara dene ke vaste hai ho muhtarmaa ye sahaaraa to Bahan yaa Beti banaa kar bhi diyaa ja saktaa hai…aur koi stree apne pati se itnaa pyaar kar sakti hai (jo ki swabhawik hai) ki uskee mrityu ke baad voh akeli rahnaa chahe…TO???

        Jahaan tak homosexuality ka sawaal hai to ye islaam ke hi nahin balki har ek nazariye se bura hai…..par islaam to aise logon ko wajib-ul-katl tak karaar deta hai (as per your own zakir nayak)….ye baat sahi nahin lagti….agar ye log kuch buraa karte hain to unhen sahi raah par laane ki koshish honi chahiye …..par kisi ki jaan le lena…

      • tarukh siddiqui hashmati says

        maine babarnama padha hai usme likha hai ki jab main dilli pahuncha to wahan ke hindu mujhe dekh rahe the unhone uper to kuch nahi but dhoti pahen rakhi thi aur dhoop se bachne ke liye peeche dhoti ko uthakar sar ko dhak liya jisse peeche ka hissa khula tha. aur aurangzeb itna hi bura tha to kyon banaras ke pande ki beti uske paas gayi thi madad ke liye aur usne ye nahi dekha ke wo ladki hindu hai uske kiye usne ek governor ke do tukde karwa diye ye hote hain baadshah.

    • says

      huma ji shayad aapko bhi knowledge thodi kam he….aapne bhi shayad school ki books parhli:))……….aap mughal history k bare me jaaan na chayengi to aapko bta dun..k sirf 2 log aise the jo aayaas the….woh the akbar aur jahangir(salim)…..aur jaisa aapne keh diya k sab ayaash the to aap pehle jaankari len k aurngzeb jaisa badshah jiske ikhtiyar me sab kuch tha,woh quran shareef likh kr jo paise aate the unse roti khata tha,or yakeen nahi aata to uski banayi hui masjid dekhen(moti masjid)woh kitni sadgi sai bani hui he,sirf usne 1 he masjid banyai akhir kyun????
      coz public k paise ko woh fazool imarto me kharach krna nahi chahta tha,is he wajah sai usne shahjahaan ko qaid me rkha tha,
      shahjahan ne public ka paisa(baitul maal) sara kharach kr diya tha,or jo banda yeh kehta he k usne apne baap pr julm kiya to bta dun k aurangzeb ne shahjahan ko aise jagah qaid kiya tha jahan sai woh tajmahal dekh ske,
      jb shahjahan ki ankhe kamzor ho gayi to auragzeb ne russia sai 1 shisha mangaya tha jo door ki cheez paas la ske,
      aur babri masjid jo in kafiro sai shaheed ki,iska hisab uper lai liya jayega,
      yeh kehte he k wahan mandir tha,wahan itni sari zameen thi us time babar ko kya padi thi k wahin pr masjid bnaye,
      jb faisa aya to khan shahab ne kha tha k wahan mandir nahi tha,aisa ho skta he k wahan pr murtiya zameen me pehle se dabi ho,
      aadmi kisi pr bhi bharosa kre pr hindi pr nahi,coz woh kbhi tumhara sath nahi dega,
      yeh log taqat ki pujari he,
      jahan taqat dekhi wahin jhuk gaye,

  8. huma khan says

    or suniye aapne dr. zakir naik ko aatanki mulla kha……..to kaan khol kr suno wo aatanki nhi ha…….wo jo khte ha deen or dharm ki roshni me khte ha……..or jo kuch khte ha sach khte ha……..apni aankho se pda parda agar hta dijiyega or apne kaano se ungli nikal de or tb unki baato ko dhyan se sirf ye soch kr sune ki koi speaker bol rha ha or aap sun rhe ha…or ye baat apne dimagh me na laye ki bolne wala ek muslim insaan ha………uske baad unki koi bhi baat agar apke dharm k dayre se bahar ho tb khna….agar islam khta ha ki orto ko parda jayaz ha to aapke yha kis ved or puran me ye likha ha ki orto ko nanga ghumaao…..

    • shravak says

      @huma

      Mohatarma, parda toh apki ankhon pe pada hua hai, jara parda uthaiye aur is blog ke Zakir naik sambandhit sabhi article padhiye. iflaasi pan chodiye.

      • tarukh siddiqui hashmati says

        @shravak are artikals chhodo shravak ji aap apni kitaben to padh lo aapne nahi padhi to dr. naik ne padh kar suna diya to itna bura kyun laga. aap ye chhodo ke islam kya kehta hai but ye to batawo ki hindu dharm kya kehta hai marne ke baad ke baare me kisko dozakh milegi aur kisko jannat hindu dharm ke hisab se bata do aur sabse important sawal brahma, vishnu,mahesh me se sabse bada bhagwaan kaun hai. aur tumahara ishwar kaun hai kisko ishwar mante ho srshti ka rachayita kaun hai

        • raj.hyd says

          param adarniy sri tarukh ji , koi bhi manushy marega usko jannat v jahnnum nahi milegi kyoki simit karm ka fal asmit nahi mil sakta ! hindu bhi jab marega usko bhi svarg ya nark nahi milega ,brahmma, vishnu mahesh adi gun vachak nam hai ! yah koi vyakti vishesh nahi hai ! jaise ishvar nyay kari bhi hai palan karta bhi hai , srishti karta bhi hai , ishvar ek nirakar chetan shakti ka nam hai usi ne hi sare sansar ko banaya hai 1 ap islam ko chodne ki bat kyo karna chahte hai ? kuran to ishvar ki kitab kabhi ho hi nahi sakti hai !

  9. huma khan says

    or suno wo aapke dharmik sadhu santo or mahatmaao se to lakh jgh ache ha jo khud ko sadhu khte ha or sath me rhne wali orto k sath hi sambandh rkhte ha……….cheeeee….lanat ha ese sadhu santo pr apne hi dharm ko kalankit krte ha…ye kis ved me likha ha…..

    • shravak says

      @huma

      Agniveer un sabhi fake baba/guro ka baar baar tiraskaar karte hai, par unki hawas toh islami jannati hawas se kafi choti hai jisme 72 kunwari hooriya milne ki gurantee hai. Kya aap iska tiraskaar karengi?

      • huma khan says

        if he is bodyless than from whr the concept came ki brahma has 4 head……….

        Andhatama pravishanti ye asambhuti mupaste”

        “They enter darkness, those who worship the natural elements” (Air, Water, Fire, etc.). “They sink
        deeper in darkness, those who worship sambhuti.”
        [Yajurveda 40:9]7……..

        wo log jo apne hi haatho se banayi huyi cheezo ki pooja krte ha wo agyanta k andhero me khote jaate ha……..or ye tum jese agyani ha jo bina kuch jane kuch bhi likhte ho….is site k jo bhi owner ha ek baat hmesha yaad rkhe….aapki site pr jude log sirf aapki community ko belong krte ha jinhe apne dharm k baare me kuch nhi pta unhe dusre dharm k baare me kese pta hoga…or kisi ki baat me ha milana bhi agyanta ha…..to jb tk kisi baat ki puri jaankari na ho apna muh band rkho………….or is site k owner se last appeal ki agar esi koi bhi bhadkaau baat khni ha ya bahas krni ha to esi jgh kre jha har dharm k log ho or jo bhtar tareeqe se aapko baato ka jawab de ske……or agar ap dr Zakir Naik kiu website visit krege to payege ki unhone kitne respectfully sbhi dharmo ko explain kiya ha….koi dharm bura nhi hota ha…buro wo log hote ha jo galat tareeqe se usko follow krte ha or logo k samne uski galat tasveer pesh krte ha or khte ha ki yhi hmara mazhab ha……..babar ghalat tha lkin it doesnt mean ki saare muslim ghalat ha……….islaam se sacha po acha religion buri duniya me koi nhi ha………….

      • huma khan says

        bilkul me iska triskaar nhi krugi….agar allah ne esa kha ha or waada kiya ha to iske piche bhi koi wjh rhi hogi na…..or me kon hoti hu uski shaan me gustaakhi krne wali…..wo sb un logo k liye ha jo duniya me apne nafs pr control krte ha or kisi gher ldki pr galat nazar nhi rkhte ha or na hi koi haram kaam krte ha….. ye wada allah ka unhi logo se haki unki jannat me itni khubsurat hooro se nawaza jayega jiski duniya me kalpana bhi nhi ki ja skti ha….or ye uss sb se to acha ha ki bhgwan indra k darbaar me nartkiya adhe kapdo me nachti ha………

    • Ganesh says

      Muhtarmaa Thodaa jabaan sambhaal kar baat kijiye….

      Jo apne sadhu santon kaa refrence diyaa hai to aap kitne sadhu santon ko jaantee hain??

      KOI SADHU AGAR BURI HARKAT KARTA HAI TOH USE LOG FOLLOW KARNA CHOD DETE HAIN!!!

      aur aapke is logic se to islaam apne aap hi ek terrorist majhab proove ho jataa hai……Osama ke al qaida se lekar lashkar, jaish, hijb-ul, tahreek……aur na jane kyaa kyaa…….

      kyaa inhen kisee hindu sadhu sant ne banayaa hai ki islam ki seekh aur taleem ne banayaa hai??

  10. huma khan says

    Agniveer believes Vedas – the first texts of humankind…………..agar vedo pr believe krte ho…..or to sare ved uthaao or aankhe khol kr padho…..
    “Ekam evadvitiyam”
    “He is One only without a second.”
    [Chandogya Upanishad 6:2:1]1……….
    ye rigved me likha ha……..to kha se 33 crore devi devta aa gye….

  11. huma khan says

    “Na casya kascij janita na cadhipah.”
    “Of Him there are neither parents nor lord.”
    [Svetasvatara Upanishad 6:9]2………

    wo sirf ek ha akela ha pure sansar ko bnane wala or palne wala….agar wo itne bdi srishti ki rachna kr skta ha to iska bharan poshad bhi kr skta ha….is sansar ko chalane k liye use department ki zrurt nhi ha…………ki bharish wala department kisi ko de diya or anaj wala kisi ko….peda krne wala kisi ko or marne wala kisi dusre ko………

  12. huma khan says

    Na tasya pratima asti”
    “There is no likeness of Him.”
    [Svetasvatara Upanishad 4:19]3………….

    khula virodh aapke apne purano me ha murti pujan ka fir aap kese hindu…..jisko hatho se bna diya wo kesa bhagwan bhaiyo….brahma, the Creator wo ha jisne hum sb ko bnaya….wo nhi jisko humne bnaya or fir usko puja…………..

    “His form is not to be seen; no one sees Him with the eye.”
    [Svetasvatara Upanishad 4:20]4
    use koi nhi dekh skta na hi wo kisi pr zahir ho skta ha………..

  13. huma khan says

    Yajurveda

    The following verses from the Yajurveda echo a similar concept of God:

    1. “na tasya pratima asti”
    “There is no image of Him.”
    [Yajurveda 32:3]5

    2. “shudhama poapvidham”
    “He is bodyless and pure.”
    [Yajurveda 40:8]6

    3. “Andhatama pravishanti ye asambhuti mupaste”

    “They enter darkness, those who worship the natural elements” (Air, Water, Fire, etc.). “They sink
    deeper in darkness, those who worship sambhuti.”
    [Yajurveda 40:9]7

    4. Sambhuti means created things, for example table, chair, idol, etc.

    The Yajurveda contains the following prayer:
    “Lead us to the good path and remove the sin that makes us stray and wander.”
    [Yajurveda 40:16]8

    5[Yajurveda by Devi Chand M.A. page 377]

    6[Yajurveda Samhita by Ralph T. H. Giffith page 538]

    7[Yajurveda Samhita by Ralph T. H. Giffith page 538]

    8[Yajurveda Samhita by Ralph T. H. Griffith page 541]

    • Subi says

      @huma khan:

      I am impressed with your comments on this blog and you look to me a knowledgeable person.

      By the way I recently encountered a situation where I was looking for an answer from various perspectives, and would like to have an opinion from Islam about this. The situation is as below:

      One of my close friends who was an orphan and was adopted by a couple in his early childhood and they brought him up like his own parents.

      He got married around three years before and was having a happy life. He was looking upset for few days… I kept on asking as to what was causing him to become this much upset.. but initially he refused to express anything and pretended to me that he was happy!

      One evening I took him to a restaurant and asked him to tell me whatever was the issue
      and assured that I would try to help from bottom of my heart.

      He finally broke down and described me the situation as follows:

      For past some time he was noting that his father was looking at his wife with lusty eyes and he often saw him watching his wife from corners and windows…

      To add to his misery ..very recently he noted that his wife also started to reacting to his father’s actions in some positive manner (she looked to be attracted to him)…and after this he is in a situation of shock!!!!!

      I was myself shocked after knowing this and was looking for some help from physiologist but thought that it would also be a good idea to have an opinion from various religious beliefs.

      Could you kindly enlighten me from the view of Islam on such a situation with authentic proofs from Islam and its history and I would be thankful to you for this…..

      Subi

  14. Ganesh says

    Cont..

    Dumb arrogance against inner voice, however, is source of frustration and miseries in same manner as intoxication and gambling destroy us. Ishwar inspires those with noble elevated thoughts towards progress and propels down those who decide to think lowly. Lowly acts performed even in dreams cause decline.

    Atharvaveda 6.70.1:

    Weak minds are attracted towards meat, alcohol, sensuality and womanizing. But O non-violent mind, you focus your mind towards the world in same manner as a mother cares for her child.

    So the intoxication is considered as recipe for weakness, failure and destruction……

    As far as islam’s view on keeping 4 wives at once is concered..most of the muslims in history have kept more than 4 wives and enumorous numbers of sex slaves as islam approves to keep those women as sex slaves who have been won in fight!!

    Also if islaam was such an against to this practice why did the nabi of islaam who should have been the greatest example of this kept more wives at once???? What meessage does it give to the followers???

    You said “islam esi kisi cheez ki ijazat nhi deta jo allah pak k qanoon k khilaf ho….or homosexuality…..astaghfirullah….allah hi maghfirat kre ese bando ki…..”

    Ye allaah ka kaisaa kanoon hai jo war mein kisee ko haraa dene par unki biwiyon par haq dilaata hai….nikah ke jariye bhi aur jabarjasti rakhail banaakar bhi????

    Agar aap kahen ki ye to un besaharaaon ko sahara dene ke vaste hai ho muhtarmaa ye sahaaraa to Bahan yaa Beti banaa kar bhi diyaa ja saktaa hai…aur koi stree apne pati se itnaa pyaar kar sakti hai (jo ki swabhawik hai) ki uskee mrityu ke baad voh akeli rahnaa chahe…TO???

    Jahaan tak homosexuality ka sawaal hai to ye islaam ke hi nahin balki har ek nazariye se bura hai…..par islaam to aise logon ko wajib-ul-katl tak karaar deta hai (as per your own zakir nayak)….ye baat sahi nahin lagti….agar ye log kuch buraa karte hain to unhen sahi raah par laane ki koshish honi chahiye …..par kisi ki jaan le lena…

  15. Ganesh says

    @Agniveer, by mistake I tried to paste all my comments at once which exeeded 2000 characters.. I am again pasting them properly….

  16. raj.hyd says

    param pujya huma ji , “agar tu kahai hai , to surt dikha de , ye mandir ,ye masjid ke jhagde mita de , jamana teri rahabari hi chahata , o ,parda nashin rukh se parda hata de ” huma ji, ishvar to kitabo me kaid ho gaya hai janta me nahi aa paya hai , vah chahe hindu ho ya muslim hindu murti puja karte hai , aur muslim dargaho me jakar shish jhukate hai aur kabro me jakar fool agarbatti chadha karke shish jhukate hai ! kible ki disa me namaj padhte hai, patthar chahe dur ka ho ya pas ka hai to patthar! jab yah kaha jata hai ki kurani khuda ji satve asman me hai , tabto sidhe letkaar namaz honi chahiye thi, kible ki disha me kyo?jab muslim hazz ke liye jate hai tab tin stambho par [ param adarniy sri iblees ji]jise ap muslim log shaitan kaha kar pukarte hai , usko patthar[kankar] marna jaruri kyo hai ? kya usme kisi shaitan ki shakti virajman rahat hai 1 murti puja karna ya shaitan ko patthar ek sikke do pahalu hai ! kya us stmbho me agar pattahr n mara jaye to muslimo ka kya nuksan ho jayega ! jo muslim hazz karne nahi ja pate hi vah to ptthar bhi nahi mar pate unki kaun si hani ya labh ho jata hai ? dekhiye kuran 38 /75 jisme adam ji ko kurani khuda ji “dono hatho ” se banane ki svikroti karte hai ! hamne to yah samjha hai ki kisi hath ka nirman to kisi mata ji ke garbhashy me” hi” hota hai ! ab kaun muslim batla payega ki khuda ji ki mata ji kaun thi ? dekhiye kuran 2/62 jisme kurani khuda ji isiyo vyahudiyo ko muslimo ke sath hi achhe ‘badla ” dene ka vada karte hai! tab yah samuday muhammad ji ko rasul manne ke liye bhi badhy nahi hai ! dekhiye kuran 8/65-66 jisme kurani khuda ji, muhammad ji ko muslimo ko jehad karne ke liye ubharne ko kaha hai 1 sath me yah bhi kaha hai ki agar 20 muslim jehad ke liye jame rahe to vah 200 gair muslim par jame rahenge ? agli hi ayat me kurani khud ji kahate hai ki hamne tumhara bojh halka kar diya hai ,usko malum hua ki tumme kuch kamjori hai ,ab agar 100 muslim jame rahe to vah 200 gair muslim par bhari padenge ! adarniy huma bahan ji ,jara ap batlayengi ki yah…

  17. raj.hyd says

    param adarniy huma ji , hamari bat kuch raha gayi thi ,jara batlaiyega ki keval ek ayat ke antar se yah bhari antar kurani khuda je ke vichar me kaise aa gaya ?kurani khudaa ji apne niyam me badlav kyo laye ? kurani khda ji itne bhari antar ko “kuch kamjori” kahate hai aur yah kamjori bhi bad me malum hui ! kya pahale se janne me asmarth the? kya yah kamjori ab ajivan muslimo me rahegi! kya amerika ke sainiko ka iaraqi muslim mukabla kar paye the? irakq ki muslim abadi to bahut jyada thi , ameriki sainik to bahut kam aye the ? fir yah kuran ki ayat jhuthi nahi ho gai ! batlaiye aise kurani khuda ji ko sachha khuda kyo mana jaye ? ek bat aur batlaiye , 124000 nabi v rasul is sansar me aye hai ! vah kin desho me aye, kab aye ,aur unke kya nam the ? ham chahenge ki ap hamri sabhi shankao ka samadhan jarur karengi ! agar apko hamari bat se kuch bhi taklif huyi ho to ham apse uske liye asnkhybar[be tadad] kshama chahenge ! hamara maaksad apke “komal dil” ko taklif dena nahi hai, lekin apni bat rakhna jarur hai ! apne is manch me aa kar ham jaise nachij ko bat karne ka avsar diya uske liye bhi ham apko asankhybar dhanyvad dena chahenge !! hame afsos hota hai ki kuch kurani khuda ji ko manne vale bahut jaldi is manch se chale jate hai ,asha hai ki ap is manch se nahi jayengi

  18. Parvej Khan says

    Ye jo aapne likha kya likha hai hamare itihaas mai ye nahin hai aapne ye itihaas apne kahani likhi hai ye sab galat hai babar ek accha aadmi tha aur ayodhya main koi ram mandir hi nahin tha agar hum itihaas main jaaye to yahan bharat main logon ko khane peene tak ki tameez nahi thi sab muslmano ne sikhaya tha aur ye jo aapme kahani likhi hai isse muslmaano ke dilon main dard hoga jase mere ho raha he aapse main apeel larta hoon ki aap aisi mandhadak bakwaas mat likho

    • says

      Ye jo aapne likha kya likha hai hamare itihaas mai ye nahin hai aapne ye itihaas apne kahani likhi hai ye sab galat hai babar ek accha aadmi tha aur ayodhya main koi ram mandir hi nahin tha agar hum itihaas main jaaye to yahan bharat main logon ko khane peene tak ki tameez nahi thi sab muslmano ne sikhaya tha aur ye jo aapme kahani likhi hai isse muslmaano ke dilon main dard hoga jase mere ho raha he aapse main apeel larta hoon ki aap aisi mandhadak bakwaas mat likho

    • विश्व हिन्दू परिषद says

      O GANDI NALI KE KEEDE, TUJHE HAMARI SARI HISTORY MALUM HAI, GUJRAT MAI KYA HUA WO BHOOL GAYA

  19. says

    let suppose man liya jaaye ki babar sahi nahin tha aur usne jo bhi maqbara ya dhancha banaya ho theek lekin bad me usme kai saalon tak nammaj hoti rahi aur us maqbare ka structure masjid jaisa tha lekin present time main to wo masjid hi thi na koi proof de sakta hai wahan rammandir tha phir use hindu bhaiyon ko todne ki kya jarroorat thi

    • Truth Seeker says

      dear pervez jab ram ka hi koi hisrorical saboot nahi ki kab aur kahan paida huye ? actual mein hain ya imaginory hain tab koi kaise bata sakta hai ramjanmbhumi kahan hai?

      babri masjid se kuch door city mein pehle se hi ram janm mandir hai aur wahan har roz pooja hoti hai

      aur tulsidas to babur ka contemporary ha usne koi mandir ya uske torne ka zikr nahi kiya.

      • satyakijai / truth seeker says

        @Truth Seeker
        Bhai Ram ke Madhyam se santo ne ek adarsh vayakti ko samne rakha hai. Kaise Ram ne Lanka ko Jintne ke bad bhi vaha ki sampti nahi looti aurto ke sath balatkar nahi kiya.Iske viprit Mohammed ji ne logo ki samapti looti unki aurte ke sath balatkar kiya.Logo ko force kiya ki unki baat mane nahi to ve sab kaffir hai.

    • raj.hyd says

      kya apne kabhi us dhanche me kaba ki disha me banne vala “alla” usme dekha tha ? kya usme kale murtiyo se ankit hone vale khambe nahi the? jo hamne svayam dekha tha 1 kis masjid me murtyo ke ankit vale khambe hote kya ap iska koi udaharan bhi denge? namaz to ap muslim sadko me bhi baith karke padh lete hai, to kya fir vah sadak sirf muslim ki ho jayegi ? agar muslim hi us dhghnche ko prem se hinduo ko dedete to jyada achha rahata muslim “hi” us dhanche ko todteto aur jyada achha hota ? vah to majburan ek ugr bhid ne uksave me tod diya jo nahi karna chahiye tha !

  20. raj.hyd says

    adam ji kis sthan me paida huye the kaun se muslim v isaibatlayenge ibraheem kis kamre me paida huye the kya ap batlayenge ? jab macca vmadeena aur saudee arab ke kisibhi nagar me muslim koi mandir charch gurudvare adi banane ki izazat nahi dte hai tovah kyo ayodhya adi me jahan muslim nam matr ko hai vaha masjid chahte hai ! yah doharapan kyo ? jantantr ka labh uthana chahtehai aur saudee arab me chut nahi dete akhir kyo ? is desh ke muslim saudee arab ki nitiyo ka khulkar virodh kyo nahi karte ? ya to gair muslimo ko saudee arab me rahane ki izazat mat dijiye ? agar rahane ki iza zat dete hai to apni tarah se ishvar ki aradhna ka adhikar charch mandir gurudvare banane ki chut dene me kya taklif hai ? ya to nastik raho athva masjid me jakar namaz padho ! fir muslim kyo kahate hai ki majahab me jabardasti nahi ha!i yah muslimo ka doharapan kyo hai ?

    • satyakijai / truth seeker says

      @raj.hyd
      Baat gair Muslimi ki hee nahi hai Saubi Arab ke kaanun ke anusar to Arbi Muslman Gair-Saudi Muslim se apni ladki ka nikah nahi karta hai. Aur saudi Arab ka Muslim Gair Saudi Arab Muslim ki beti, Bahan se nikah kar sakta hai.
      Muslimo ka raja (Khalifa, representative) kewal arbi Muslim hi ho sakta hai. Non-Arbi Muslim ko yah adhikar nahi hai.

      • raj.hyd says

        duniya ke sabhi sunni muslim bhi apni beti ka nikah kisi shiya muslim se nahi karte hai vaisa hi hal shiya muslim bhi karte hai , apni beti ka nikah kisi sunni muslim se nahi karte hai ! aur yaha tak ki shiya muslim ki masjid me jakar sunni muslim namaz bhi nahi padhte hai ! shayad kurani allah unki namaz svikar nahi karta hoga !

        • Truth Seeker / Satyakijai says

          @raj.hyd
          Islam koi dharm nahi balki ye mohammed ka rajnitik agenda tha duniya par raj karne ka. Aur Saudi Arab bhi Iska palan kar raha hai taki log uske culture ke parti, desh ke parti vafadar rahe. Saudi Arab Aur Mohammed ke anusar unki bhasha ( Arbi) he shresth bhasha hai. Unka desh ya Mecca – Madina hi sabse pavitra Shahar hai. Unke Sahar ya Kabba ke uppar hi Allah satve Ashman se bhi uppar hai. Saudi ka prophet hi sabse achha prophet hai. Saudi Arab ka dharm he Duniya ka matra ek sacha dharm hai. Saudi Arab ki sanskriti he sabse achhi sankriti hai. Ye Saudi Arab political agenda nahi to qya hai.

          • raj.hyd says

            manniy shri truth seekaer ji ,ap jo kaha rahe hai ,vah sahi kaha rahe hai durbhagy apne desh ka bhi hai , jisne vaidik dharm ke alava any matantaro ko bhi ek dharm ki manyta di gayi hai 1 jinko dharm se lena dena nahi hai vahapne ko dharmik kahane lagte hai quran mme anek jagah muslimo ke liye bhi giroh kah gaya hai ! joapne ko samajhdar samajhte hai unhone hi jab dharm ka prchar nahi kiya ya us disha me koi ruchi nahi rakhte hai, tab burai samajme kyo nahi failengi ? jis jamin ka sahi upyog nahi kiya jata vah banjar ho jati hai usme ghas baool adi bahut jaldi paida ho jate hai isliye manushy ko sanskarit karna ati avshyak hai ! agniveer ji ko chahiye ki ati shighr apna t, v. chainal khle usse vaidik dharm ka dharaprvah prachar kare ! ane udyogpatiyo se is vishay par chanda bhi mil sakta hai! ary samaj to apne apasi sanghrsho me lipt hai baba ramdev ji rajnaiti ke akhade me kude huye hai ! abto matr ek asha ki kiran agniveer ji hi hai jo kuch kar rahre hai aur age bhi kuch kar sakte hai !

  21. raj.hyd says

    kya laakho sal purana silsilebar itihas kahain milta hai ? fir ram ji ka itihas kaise mil sakega ? isliye valmiki ramayan hi ram ji ka jivan[itihas] pesh karti hai usko kyo n mana jaye ?

    • raj.hyd says

      Jab confirm pata hi nahi to uske liye kiyun larna? aise bahut se dhanche hain moortiyon wale khambhe hain.. ho sakta hai kahin qareeb se laye hon kiyunki babri masjid abadi se bahar h. High court mein bhi aastha k h according mana h na ki atcheological survey k hisab s. samjhe

      • raj.hyd says

        uchha nyayalay ne bhi usi astha ke nam par muslimo ko bhi ek tihayi hissa de diya hai !aur confirm kya hota hai ? jab ham anek bar us sthan ko dekh kar aye hai jab us sthan par tala laga hota tha tab hamne jhankar dekha tha kya isko majsjid kaha ja sakta tha? hargij nahi ? yah bat sath hai ki usme murti rakhi gayi thi ! jab is desh ka vibhajan 10 lakh manushyo ki hatya ki kimat par ho sakta tha, tab ek vivadit dhanche par murti bhi kyo nahi rakhi ja sakti thi ? yah to desh ke vibhajan ke samne bahut choti si ghatna hai ! panjab me bahut si aisi masjide hai jahan par kabhi namaz nahi padhi jati us sthan me janvar bandhe jate hai ! aisa hi hal narnaul hariyana adi jagah ka bhi hai aur anek muslim kshetro me hamne svayam dekha hai ki anek mandiro me puja n hokar muslim vahan apni manmarji kiya katrte hai, jab aspas hindu hi nahi hai tab puja bhi kaise ho sakti hai ? agar babar masjid banani thi to naye int lagakar kyo nahi banayi gayi thi 1 babar to badshah tha uske pad dhan ki kya kami thi ? jo babar sharab adi ka sevan karta ho us dhan se bani masjid me namaz kyo padhi jati thi ?

  22. jai shankar says

    Adan jo hai wo bahut hi miss-understanding se bhari hai.Allahu Akbar -god is great matlab allah mahan hai.ye sabit karta hai ki allah mahan pahle nahi tha ab mahan hai.ex.deta hu taki samaj me aasani hogi, jab hum chote bachhe ko jab bada hua to kahte hai aadmi hua ab baccha nahi raha.Admi ko hum bada kahte hai is liye ki kabhi wo chota tha us ke mukable me. TO YAHA ALLAH IS GREAT KAHNA KI KABHI WO SIMIT KABILE TAK RAHA HO AUR AB MAHAN HO GAYA HO.KABHI WO BHI MAHAN NAHI THA AISA SIDDHA HOTA HAI.AUR EK BAAT PUKTA HAI KI ALLAH MAHAN NAHI HAI WO KAISE DEKHO ‘ALLAH MAHAN HAI ‘AUR ‘MAHAN JO HAI WO ALLAH HAI ‘ IN DONO ME BHED KYA HAI PAHLE ME SIRF ALLAH KI AURO KE SAAT TULNA HUI,AUR BHI MAHAN HO SAKTA HAI YE NA DIKHANE KE LIYE. PAR DUSRE ME JO JO BHI MAHAN HOGA WO ALLAH HOGA.TULNA KE LIYE KOI BHI NAHI BACHA.TO ADAN KA PAHLA SENTENCE HI GALAT HO RAHA HAI MAHAN JO HAI WO ALLAH HAI AISA AGAR KAHA HOTA TO BAAT SAHI THI.AUR IS ME EK KHAMI HAI JO NAJAR NAHI AATI.ALLAH AGAR MAHAN HO GAYA TO JO CHOTA HAI AANU KE JAISA HAI WO KOUN HAI ? YE MANA KI ALLAH MAHAN HAI TAB SAWAL UTHTA HAI KI CHOTE SE AANU ME KOUN HAI?YAHA SARE MUSLIMO KO HAAR MANNI PADTI HAI.PAR HINDU KAHTE HAI AANU RENU SE BHI CHOTA AUR MAHAN SE BHI MAHAN WO HAI.(ANURENUYAT MAHTOMAHT ) AB TUM HI SOCHO KOUN SAHI HAI AUR KOUN GALAT.ADAN KA PAHALA VAKYA HI AADHA HAI TO BAKI SAB KAISE PURNA HOGA. JAGO MUSLIMO JAGO HINDU TUMSE KAHI AAGE JA CHUKE HAI AUR TUM ABHI BHI SOYE HO.SUBHAH HO CHUKI HAI AUR TUM CHADAR ODH KE MAT SO O !

  23. manvi says

    जो अल्लाह धर्म के नाम पर खून खराबा करने को उकसाता है वो महान कैसे हो गया !! अल्लाह और उसके दरिन्दे बन्दे आतंकवादी हैं जो अपने ही लोगों का खून बहाकर खुश हैं !! जो अल्लाह के नाम पर मरते हैं क्या वो ये भूल जाते हैं की मरने वाला भी अल्लाह का बाँदा है , फिर कैसा अल्लाह है ये जो मरने पर खुश होता है !!

  24. sonu says

    Respected People of our country, please stop wasting your time on religious fight. No one is forcing you to change your religion and every religion teach good manners and always kind for all human beings.
    There are few bad people in every religion who letting there religion down. And in my opinion the bad or evil people don’t have religion, country and state. They all fall under one category which we called Impious.
    So, this is my appeal to all Indians that India is our country and we all have to make our country develop,strong, well cultured and so please stop fighting on religion.
    From now make our country future bright and happy.

    • Ankur says

      @sonu : Dear friend , this is what Hindus in general are taught by their parents.
      “every religion teach good manners and always kind for all human beings.”
      alas if that was true.(know Islam and Christianity )You are right that we should not fight in the name of religions, but at the same time we should be aware of our original history , our civilization and fore most our vedic dharma, so that no one is able to belittle us and take advantage , as people have been doing and are doing.

    • Arun says

      Sonu, it is important to speak up if you want a better world, and no not all religions teach to be kind to all. You clearly do not know anything about dhimmitude in a religion like Islam, or know that Christians are taught to view all other faiths as demonic, even practices like yoga.

      You can work on developing India and speak up at the same time. There is no contradiction.

      • Arun says

        Here is one section that addresses you point. I wish your statement of what all religions teach were true. It isn’t, and they have a serious impact (the whole reason Pakistan and Bangladesh came into being because of religions do not teach merely good manners and kindness). That is why people need to speak up.

        “The divine charter of Islam holds that humanity is divided according to a strict hierarchy of worth. At the top of this hierarchy are free Muslim males, the super-race and cream of humanity. Below them, in descending order of humanity, are: Muslim male slaves, free Muslim women, Muslim female slaves, then Christian and Jewish males and females. Finally, the rest of humanity comes in dead last, because they lack a soul they are regarded as worthless having no rights whatsoever. This unfortunate final grouping includes Buddhists, Hindus, atheists, agnostics, and others. The al-Qaeda organization certainly considers non-Muslim life unworthy. Does only a tiny minority have this view? Does only a tiny minority endorse violence and terror? The answer is no, and this should be reason for serious concern.” From the paper above.

        Blood money is Saudi Arabia varies depending on the religion of the victim. Same order, Muslim male, Muslim female, Christian or Jewish male, Christian or Jewish female, everyone else male, everyone else female (Hindu, Buddhist, Sikh, Jain, Zoroastrian, all others). There is no real equality in Islam. Equality just for people in your own group ie Muslim males is not real equality any more than equality for white men only was not true equality.

        So we need to speak up, not only for our own people but for others, including really moderate Muslims who face danger from other Muslims in speaking up.

  25. anti-agni says

    !! . .हज सिसडी के नाम पर देिखयेमुिलम को कैसे लुटा जाता है. . !!

    सऊदी सरकार हज पर जानेवालेयािय की सहायता के िलये एयर इंिडया को एकतरफ का तेल िनःशुक देती है। “”हज सिसडी” “????

    सुीम कोट ने सरकार को आदेश दया हैक वह दस साल के भीतर मुसलमान को हजयाा के दौरान दी जाने वाली सिसडी ख़म करे। यह संभवतया पहला मौका है क कसी वग की सिसडी ख़म होने का उसी वग ारा न केवल वागत कया जा रहा है बिक यह भी मांग की जा रही हैक यह नेक काम सरकार दस साल म नह इसी साल पूरा कर दे। एआईएम के मुख असदुीनओवैसी नेतो यहां तक कह दया क 600 करोड़ की यह सिसडी हज यािय को नह बिक एयरइंिडया को मदद के तौर पर दी जाती है। सुीम कोट की यायमूितआफताब आलम और रंजना काश देसाई की बच नेयह एितहािसक फैसला देते समय पिव कुरान का वह हवाला भी दया िजसम यह कहा गया है क हज मुसलमान को अपनेख़च पर ही करना चािहये। आय की बात यह है क जब ाइवेटएयर सिवसबक म जाने वाले हािजय को 12 से 15 हज़ार .म लानेले जानेको तैयार ह, ऐसेम सरकार सिसडी की आड़ म हािजय को जबरन एयरइंिडया सेलाने लेजानेके िलये ित याी लगभग 57000 .की भारी भरकम रकम ख़च कर रही है। इसमसे 12000 .जहां ित हाजी से िलये जातेह वह शेष रकम सरकार सिसडी के नाम पर देती है। 2007 मसरकार ने ित हाजी 47,454 .एयर इंिडया को भुगतान कया था। हज की बजाये जो लोग उमराह करनेकभी भी सऊदी अरब जाते हतो वेमा 18,000 .तक ख़च कर रटन एयर टकट कसी भी िवदेशी या देसी ाइवेटलाइट का आराम सेहािसल कर लेते ह। अगर थोक म जाने वाले लगभग सवा लाख हािजय का अनुबंधकसी गैर सरकारी हवाई सेवा से होता हैतो यह कराया मुिकल से12000 . सेभी कम होगा। इसकी वजह यह है क हािजय को ले◌े जाने वाली सारी लाइटपूरी तरह भरकर चलगी जबक वैसे 50 ितशततक हवाई जहाज़ खाली जातेह।

  26. says

    Well nice read but the world is not interested in truth. The definition of Human Rights will be very soon re-writen. Obviously some Muslims especially the hardliner Sunni/Wahabi/Hanafi/Salafi/Barelvi/Deobandi Islamist groups will be pinched in their bottom. For them it was/is a matter of pride and valiance as can be seen here from the spate of counter-comments.

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