कुछ दिनों पहले मीडिया ठग राजदीप सरदेसाई ने कैराना के हिन्दुओं और हिन्दू शहीद प्रशांत पुजारी का उपहास उड़ाया था और अब एक और मीडिया दलाल बरखा दत्त हिन्दुओं को धमकाने और उनके जख्मों का मजाक बनाने में लगी हुई है।

कश्मीरी हिन्दुओं के सामूहिक नरसंहार की वह खुलेआम हंसी उड़ा रही है। अपने सोशल मीडिया के अकाउंट में फोटो डाल कर वह ये जताने की कोशिश में है कि कश्मीरी मुसलमान बहुत ही आदर आतिथ्य करने वाले हैं और जम्मू तथा दिल्ली में तम्बूओं में जीवन गुजार रहे कश्मीरी हिन्दू झूठे हैं। अग्निवीर और उसकी बातचीत –

बरखा: देखो, मेरे पास हिन्दू परिवार की एक तस्वीर है जो बड़ी ख़ुशी से घाटी में मुस्लिम परिवार के साथ रह रहा है। जाहिर है, कश्मीर में हिन्दू, मुस्लिमों के साथ सुरक्षित हैं। वहां प्यार और विश्वास का खुशनुमा माहौल है जो दिल को बहुत सुकून देता है।

अग्निवीर: मेरे पास भी एक पेंटिंग है, जिस में दिखाया गया है कि चारों तरफ़ हरियाली और सुनहरी धूप बिखरी हुई है और एक मांसखोर शेर एक हिरन के साथ अठखेलियाँ कर रहा है। देखो, यह चित्र मन को खुश कर देता है।

बरखा: तुम कहना क्या चाहते हो?

अग्निवीर: वही, जो तुम कह रही हो।

बरखा: मैं बस यही कहना चाहती हूँ कि कश्मीरी हिन्दू, कश्मीरी मुस्लिमों के साथ सुरक्षित हैं।

अग्निवीर: और मैं सिर्फ यह स्थापित करना चाहता हूँ कि हिरन, मांसाहारी जानवरों के साथ सुरक्षित रहते हैं।

बरखा: हाहा, इन्टरनेट के दक्षिणपंथी मूर्ख हिन्दू, मांसाहारी जानवर, दूसरों का शिकार करते हैं। आखिर एक चित्र से यह तथ्य कैसे बदल सकता है?

अग्निवीर: और तुम विक्षिप्त वामपंथी, किसी अनजान जगह पर खींची गई और फ़ोटोशॉप की गई तुम्हारी तस्वीर, आखिर इस सत्य को कैसे झुठला सकती है कि जिहादियों ने हिंसा और बलात्कार का खूनी खेल खेलकर घाटी से साढ़े तीन लाख हिन्दुओं को खदेड़ दिया है?

बरखा: तो तुम घाटी में हिन्दू – मुस्लिम एकता नहीं चाहते?

अग्निवीर: १+० =?

बरखा: बेवकूफ! आखिर शून्य में कोई संख्या मिलाने का फायदा ही क्या? नतीजा तो वही संख्या होगी।

अग्निवीर: पर हम एक और शून्य में मिलाप चाहते हैं, तो उन्हें जोड़ ही क्यों न दें?

बरखा: मूर्ख! जवाब तो फिर भी १ ही होगा! ० को किसी संख्या में मिलाने का मतलब ही क्या है?

अग्निवीर: और ६६,००,००० मुस्लिमों को १२०० हिन्दुओं से मिलाने का क्या मतलब है? किन्हीं दो पक्षों को मिलाने के लिए उन दोनों का अस्तित्व होना आवश्यक है। इस समय वहां एक पक्ष दूसरे पक्ष द्वारा समाप्त किया जा चुका है। और हमारा कहना यह है कि समाप्त किये जा चुके पहले पक्ष को पुन: कश्मीर में लाना होगा और दूसरे पक्ष को अपने द्वारा किये गए भीषण दरिंदगी भरे घिनौने व्यवहार के लिए उनसे क्षमा याचना करनी होगी, तभी उसके बाद मेल-मिलाप की बात सोची जा सकती है।

बरखा: यह सब सियासी खेल है। लोग तो दूरियां पाटना चाहते हैं, परन्तु राजनैतिक लोग ही ऐसा नहीं होने देते।

अग्निवीर: तुम किस राजनैतिक पार्टी की बात कर रही हो? नाम लेकर कहो? वह जो हिन्दुओं का वतन अलग से बसाना चाहती है या वह पार्टी जो इस का विरोध कर रही है? और तुम किस की तरफ़ हो?

बरखा: तुम कश्मीरी मुस्लिमों से नफरत करते हो। तुम्हें शर्म आनी चाहिए। मेरी तस्वीर में मुस्लिम परिवार को देखो क्या अब भी तुम्हें लगता है कि हिन्दू कश्मीर घाटी में असुरक्षित हैं?

अग्निवीर: १. तो अब तुम्हारा असली चेहरा सामने आ गया है। तुम्हारे कहने का मतलब है कि क्योंकि एक हिन्दू परिवार, एक मुस्लिम परिवार के साथ रहता पाया गया है, इसलिए हिन्दुओं की अपनी मातृभूमि की मांग जो वह दशकों से कर रहे हैं, फ़िज़ूल है? बड़ी चालाकी से तुम यासीन मलिक, गिलानी और दूसरे अलगाववादी सूअरों के मंसूबे को आगे बढ़ा रही हो – जो हिन्दुओं के लिए कोई जगह नहीं देना चाहते, जहाँ हिन्दू शांति से भय मुक्त हो कर रह सकें, जहाँ वापस कोई उन्हें अपने घरों से न खींच सके और फिर से कोई उनकी स्त्रियों, बहन-बेटियों का बलात्कार न कर सके।

२. तुम चाहती हो कि तुम्हारी तस्वीर देखकर कश्मीरी हिन्दू – इस बात पर भरोसा कर लें कि कश्मीरी मुस्लिमों के साथ रहना सुरक्षित है। और जब पांच लाख विस्थापित हिन्दू अपना दर्द बयां करते हुए बताते हैं कि कैसे कश्मीर की हर एक मस्जिद में ये ऐलान हुआ करता था कि हिन्दू स्त्रियों का बलात्कार करो, आदमियों को मारो, बच्चों को मारो, कश्मीर बनेगा पाकिस्तान इत्यादि, तब तुम बड़ी बेशर्मी से कहती हो कि आतंक का कोई धर्म नहीं होता? आखिर तुम्हारी एक तस्वीर उन पांच लाख आवाजों को कैसे दबा सकती है? वह तस्वीर उन लाखों आवाज़ों से ज्यादा वजनी कैसे हो गई? क्या वे सब आवाजें झूठी हैं? क्या वे सभी नफरत करने वाले हैं? और तुम अकेली ही अम्बर सरिया की तरह भरोसेमंद और मां की ममता की प्रतिमा हो?

बरखा: तुम कौन हो?

अग्निवीर: मैं अग्निवीर हूँ, मैं कश्मीरी हिन्दुओं का रक्षक हूँ, मैं अलगाववादियों की मौत और राष्ट्रद्रोहियों का काल हूँ, मैं गद्दारों को उनके बिल से निकाल कर मारता हूँ, मैं उनकी कमर तोड़ देता हूँ जो कश्मीरी हिन्दुओं को धमकाते हैं चाहे अपनी कलम से या तलवार से। इसलिए सावधान रहो।

This article is available in English: Barkha Dutt Insults Kashmiri Hindus, IITian Retaliates

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