भारत माता के अमर सपूत राम प्रसाद बिस्मिल की आत्मकथा से कुछ प्रेरक प्रसंग| यह जीवनी उन्होंने अपनी फांसी के कुछ दिन पहले ही लिखी थी:

Written during his jail term, shortly before his death

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माता

इस संसार में मेरी किसी भी भोग-विलास तथा ऐश्‍वर्य की इच्छा नहीं । केवल एक तृष्णा है, वह यह कि एक बार श्रद्धापूर्वक तुम्हारे चरणों की सेवा करके अपने जीवन को सफल बना लेता । किन्तु यह इच्छा पूर्ण होती नहीं दिखाई देती और तुम्हें मेरी मृत्यु का दुःख-सम्वाद सुनाया जायेगा । माँ ! मुझे विश्‍वास है कि तुम यह समझ कर धैर्य धारण करोगी कि तुम्हारा पुत्र माताओं की माता – भारत माता – की सेवा में अपने जीवन को बलि-वेदी की भेंट कर गया और उसने तुम्हारी कुक्ष को कलंकित न किया, अपनी प्रतिज्ञा पर दृढ़ रहा । जब स्वाधीन भारत का इतिहास लिखा जायेगा, तो उसके किसी पृष्‍ठ पर उज्जवल अक्षरों में तुम्हारा भी नाम लिखा जायेगा । गुरु गोविन्दसिंहजी की धर्मपत्‍नी ने जब अपने पुत्रों की मृत्यु का सम्वाद सुना था, तो बहुत हर्षित हुई थी और गुरु के नाम पर धर्म रक्षार्थ अपने पुत्रों के बलिदान पर मिठाई बाँटी थी । जन्मदात्री ! वर दो कि अन्तिम समय भी मेरा हृदय किसी प्रकार विचलित न हो और तुम्हारे चरण कमलों को प्रणाम कर मैं परमात्मा का स्मरण करता हुआ शरीर त्याग करूँ ।
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सत्यार्थ प्रकाश

(यहाँ क्लिक करके सत्यार्थ प्रकाश डाउनलोड करें )

“देव-मन्दिर में स्तुति-पूजा करने की प्रवृत्ति को देखकर श्रीयुत मुंशी इन्द्रजीत जी ने मुझे सन्ध्या करने का उपदेश दिया । मुंशीजी उसी मन्दिर में रहने वाले किसी महाशय के पास आया करते थे । व्यायामादि के कारण मेरा शरीर बड़ा सुगठित हो गया था और रंग निखर आया था । मैंने जानना चाहा कि सन्ध्या क्या वस्तु है । मुंशीजी ने आर्य-समाज सम्बन्धी कुछ उपदेश दिए । इसके बाद मैंने सत्यार्थप्रकाश पढ़ा । इससे तख्ता ही पलट गया । सत्यार्थप्रकाश के अध्ययन ने मेरे जीवन के इतिहास में एक नवीन पृष्‍ठ खोल दिया । मैंने उसमें उल्लिखित ब्रह्मचर्य के कठिन नियमों का पालन करना आरम्भ कर दिया । मैं कम्बल को तख्त पर बिछाकर सोता और प्रातःकाल चार बजे से ही शैया-त्याग कर देता । स्नान-सन्ध्यादि से निवृत्त हो कर व्यायाम करता, परन्तु मन की वृत्तियां ठीक न होतीं । मैने रात्रि के समय भोजन करना त्याग दिया । केवल थोड़ा सा दूध ही रात को पीने लगा । सहसा ही बुरी आदतों को छोड़ा था, इस कारण कभी-कभी स्वप्‍नदोष हो जाता । तब किसी सज्जन के कहने से मैंने नमक खाना भी छोड़ दिया । केवल उबालकर साग या दाल से एक समय भोजन करता । मिर्च-खटाई तो छूता भी न था । इस प्रकार पाँच वर्ष तक बराबर नमक न खाया । नमक न खाने से शरीर के दोष दूर हो गए और मेरा स्वास्थ्य दर्शनीय हो गया । सब लोग मेरे स्वास्थ्य को आश्‍चर्य की दृष्‍टि से देखा करते थे ।”

(यहाँ क्लिक करके सत्यार्थ प्रकाश डाउनलोड करें )

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ब्रह्मचर्य

विद्यार्थियों तथा उनके अध्यापकों को उचित है कि वे देश की दुर्दशा पर दया करके अपने चरित्र को सुधारने का प्रयत्‍न करें । सार में ब्रह्मचर्य ही संसारी शक्तियों का मूल है । बिन ब्रह्मचर्य-व्रत पालन किए मनुष्य-जीवन नितान्त शुष्क तथा नीरस प्रतीत होता है । संसार में जितने बड़े आदमी हैं, उनमें से अधिकतर ब्रह्मचर्य-व्रत के प्रताप से बड़े बने और सैंकड़ों-हजारों वर्ष बाद भी उनका यशगान करके मनुष्य अपने आपको कृतार्थ करते हैं । ब्रह्मचर्य की महिमा यदि जानना हो तो परशुराम, राम, लक्ष्मण, कृष्ण, भीष्म, ईसा, मेजिनी बंदा, रामकृष्ण, दयानन्द तथा राममूर्ति की जीवनियों का अध्ययन करो ।

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फांसी से तीन दिन पूर्व

अंतिम इच्छा

वर्तमान समय में भारतवर्ष की अवस्था बड़ी शोचनीय है । अतःएव लगातार कई जन्म इसी देश में ग्रहण करने होंगे और जब तक कि भारतवर्ष के नर-नारी पूर्णतया सर्वरूपेण स्वतन्त्र न हो जाएं, परमात्मा से मेरी यह प्रार्थना होगी कि वह मुझे इसी देश में जन्म दे, ताकि उसकी पवित्र वाणी – ‘वेद वाणी’ का अनुपम घोष मनुष्य मात्र के कानों तक पहुंचाने में समर्थ हो सकूं ।

आओ हम सब अपने भीतर के बिस्मिल को जगाएं|

पूरी आत्मकथा यहाँ पढ़ें

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Agniveer symbolizes the efforts of a soul marching towards the ultimate goal through destruction of ego and falsehood. With focus only on right knowledge, right actions and right devotion. In other words, Agniveer stands for compassion, character, tolerance and rational humanism. Agniveer believes in One World, One Humanity, One Family.

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10 Comments on "राम प्रसाद बिस्मिल"

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jaidev sharma
jaidev sharma
2 years 10 months ago
sab se pehle param pujya swami dayanand ji ko koti koti parnaam uske baad agniveer ji aap ka bahut bahut abhinandan aap ke is paryas se meri jindgi main bahut bada badlab aya hai sach aur jooth ki pehchaan hone lagi hai aur bahut se dooshon se azad hone ki… Read more »
RamNarayan
RamNarayan
2 years 9 months ago

Jaidev ji, aapko vedic duniya mein swaagatham! Mere dristi mein tho agniveer ji aajke nav samaaj ke liye, uttham ved gyaan prachaarak hai.

gaurav dwivedi
3 years 9 months ago

hindu akhir best hai are purana sabse bada dharm hai akhir

ritesh sharma
3 years 10 months ago

jai shri ram

ritesh sharma
3 years 10 months ago

bahut bahut dhanyawaad mahan jaankari ke liye

ritesh sharma
3 years 10 months ago
agni veer ji na jane kaun sa wo subh samaye tha jab mujhe aapki sait ka pata chala waise main jayada pada likh nahin hoon par aapki sait thoda bahut hindi mein bhi hai pad ke bahut khusi hoti hai aapki sait ik nayi disha mein le gai mujhe main… Read more »
dinesh chaudhary
4 years 9 days ago

Great work you have done sir.All the questions have been destroyed by ved knowledge.I also put your material as it is on “realiseinrealeyes.wordpress.com”.

Thanks you so much.

Ganesh
Ganesh
4 years 6 months ago

Good One…. 🙂

shakil akhtar
5 years 3 months ago

jai Bismil…..

रवि शंकर
रवि शंकर
5 years 5 months ago

बहुत ही प्रेरणा दायक है राम प्रशाद बिस्मिल. धन्यवाद इसको नेट पर शेयर करने के लिये

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