हिन्दू धर्म में जाति व्यवस्था नहीं

हिन्दू धर्म में जाति व्यवस्था नहीं
Author:
Series: Discover Hinduism
Genres: Hindi हिंदी, Society
Publisher: Agniveer
हिन्दू धर्म पर जातिगत भेदभाव के आरोपों का सटीक उत्तर देती एक मात्र पुस्तक!
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About the Book

सिर्फ हमारे कर्म ही पुरस्कृत होते हैं, हमारा जन्म नहीं!

पहली बार हिन्दू धर्म में जाति-व्यवस्था की सच्चाई से परदा उठाती पुस्तक! आपके दिमाग में उथल-पुथल मचा हिन्दुत्व पर पुनर्विचार करने पर मजबूर कर देगी – यह पुस्तक! हिन्दू धर्म पर लगे जातिगत भेदभाव के आरोपों को चुप कराने के साथ ही, हिन्दुत्व की बुनियाद – सामाजिक समता के सिद्धांतों को प्रस्थापित करती है – यह पुस्तक!

‘हिन्दू धर्म को जानें’ इस श्रृंखला की यह दूसरी पुस्तक है, जो हिन्दू धर्म में जाति-व्यवस्था (वर्ण-व्यवस्था) के पीछे की सच्चाई को समझने के लिए आवश्यक सभी बुनियादी सवालों के जवाब देती है। जैसे – ‘आर्य’ मतलब कौन? ब्राह्मण, क्षत्रिय, वैश्य और शूद्र कौन है? दास, दस्यु और राक्षस कौन हैं?

यह पुस्तक “जन्मना जाति-व्यवस्था भारतवर्ष के लिए क्यों अभिशाप है?” इसका विस्तारपूर्वक उत्तर देती है। यह बताती है कि कैसे शताब्दियों तक आक्रमणकारियों ने इस जाति-व्यवस्था का उपयोग कर हमें बांटा और गुलाम बनाए रखा। यह पुस्तक बताती है कि कैसे और क्यों जन्मना जाति-व्यवस्था को आज भी देश के अंदरूनी दुश्मन शह दे रहे हैं और कैसे हमारे राष्ट्र की एकता और प्रगति में जाति-व्यवस्था सबसे बड़ा अवरोध है।

लेकिन यह पुस्तक सिर्फ हमारे राष्ट्र पर हुए जाति-व्यवस्था के दुष्परिणामों को ही नहीं दर्शाती बल्कि जाति-व्यवस्था की विष-बेल को जड़ से उखाड़ने के लिए ऐसी व्यवस्था पर भी विस्तार से प्रकाश डालती है जिसमें हानि से बचा जा सके।

वेदों के अनगिनत प्रमाणों से यह पुस्तक – अपने गुप्त मंसूबों को पूरा करने के लिए जन्मना जाति-व्यवस्था का  समर्थन करने वाले विकृत दिमागों को उत्तर देती है। यह पुस्तक इतिहास में हुए वर्ण-परिवर्तन के विपुल उदाहरणों से दिखाती है कि ‘वर्ण’ अर्थात ‘पसंद’ है, जिसका जन्म से कोई लेना-देना नहीं है। इस पुस्तक में प्रस्तुत तर्क और प्रमाण जन्मना जाति-व्यवस्था के संहार में प्रबल हथियार साबित होंगे।

इस पुस्तक को पढ़ने के बाद वेदों के बारे में दुष्प्रचारित धारणा – वेद जन्मना जाति-व्यवस्था के जनक हैं – इसका पूरी तरह उन्मूलन होता है। और जो भाई-बहन इस दुष्प्रचार से आहत हो वेदों में अपनी आस्था खो बैठे हैं, वे निश्चित ही पुनः वेदों की ओर लौटेंगे और हिन्दुत्व के सामाजिक समता के सिद्धांत का आदर करेंगे।

इस पुस्तक से प्राप्त होनेवाली धनराशी का उपयोग जन्मना जातिगत भेदभाव को मिटाने में किया जाएगा।

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