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वीरों की उठती उमंग बन
सागर की मचली तरंग बन
अमर फाग का दिव्य रंग बन
लहरा लहरा ध्वजा ओम की!

प्रेम पवन के मधुर झकोरे
स्नेह सुधा के सुभग हिलोरे
टंकारे  के वानक गोरे
आ फिर बन जा ध्वजा ओम की!

मोर्वी की टंकार गुंजा फिर
विश्व विजय का तार हिला फिर
वह वैरी से प्यार दिखा फिर
चहुँ दिश चमका ध्वजा ओम की!

जय जय जय पाखण्ड खंडनी
जय जय जय दुश्चरित दंडनी
जय जय जय सद्धर्म मंडनी
दुखहर सुखदा ध्वजा ओम की!

फिर ऋषियों के साम गान हों
मनुज मात्र के वेद प्राण हों
जीव जात बांधव समान हों
ऐसा युग ला ध्वजा ओम की!

ओम ओम का कर उच्चारण

निश दिन करती जा प्रभु पूजन
अविरत चिंतन अविरत सिमरण
यह रस बरसा ध्वजा ओम की!

किस दीपक की ज्वाला है तू
किस उर की मणिमाला है तू
उतरी ज्यों सुर बाला है तू
गिरी निश शोभा ध्वजा ओम की!

हम सब तुझ पर प्राण वार दें
जननी पर जी जान वार दें
सुख संपत सम्मान वार दें
यह वर दे जा ध्वजा ओम की!

-पंडित चमूपति

अग्निसंकल्प

अग्निसंकल्प

राष्ट्रभक्ति और धर्मरक्षा के लिए प्रेरित करती कविताओं का संग्रह

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  • Muhabattein-e-husn me na dubo aye navjawano,
    Ye chalawa hai jo meet jayega samaye ke saath deewano,
    Sir utha ke dekho Dharm tumhe pukar raha aye parwano;
    Sashtra uthao, dahaard lagao, heela do parvaton ko aye aaz ke tufaanon!

    Vandemataram!

  • dharmayodha, islam is most intolerant religion same as christianity where god of those religions are so much insecure, jealous and salsemen for their versions of heaven.

    both Yhwh and allah are ready to put nearly 2/3 of human population in their private FOREVER HELL. burning, torturing them just because we didn’t believe in their Bullsh!t fairy-tale stories.

    Hell is such a pathetic, cruel and brutal concept that the evilness of both abrahmic gods exceed than Nazis.
    please don’t compare brutal savage abrahmic religions.

    PS : i have no personal grudge against people of those religions BUT i have strong objection on their pathetic ideology.