ये धरती ऋषियों मुनियो की,
अत्याचारी तलवारो से लाल हुए ।

आज भी कई मंदिरो की आरती,
रमजानो में बर्बाद हुई ।।

प्रेमचंद की “ईदगाह” पढ़ि,
तो कभी “बाबरनामा” भी पढ़ लेना।

कैसे तोड़े तीन हजार मंदिर,
इसका इतिहास भी जान लेना ।।

दुनिया के 52 मुस्लिम मुल्कों में,
एक मंदिर न बन पाया।

इकलौते भारत देश में,
तीन लाख मास्जिद बना डाला ।।

बामियान की बुद्ध प्रतिमा का,
धर्म-मजहब ने विध्वंस किया।

सीरिया इराक की धरती को,
इन्होंने यज़ीदियों के खून से लाल किया ।।

दरगाहो पर जाते थे हर धर्म,
पर मंदिर “काफिरो” के घर कहलाए।

चिड़िया तो फिर भी बेहतर थी,
जो हर मंदिर मस्जिद बिन भेद भाव उड़ लेती थी।।

चिड़िया जो मंदिर से दाना चुग,
मस्जिद में पानी को जाती थी ।

ईद, बकरीद, सबे-ए-बारात की,
दावत वो बन जाती थी।।

रफ़ी ने “रघुपति राघव..” गाया,
पैसो की बौछार हुयी ।

गुलशन कुमार ने आरती गई,
तो सीना गोलियों से लाल हुयी ।।

कैसे भूला दे उन अत्याचारो को,
जो धर्म-मजहब ने करवा डाले ।

कैसे भूला दे “जजिया कर” को,
जो धर्म-मजहब के नाम वसूला था ।।

हजारो बुद्ध सन्यासियों का,
धर्म-मजहब के नाम पर क़त्ल-ए-आम हुआ ।

कैसे भूला दे क़त्ल वीर वंदा वैरागी का,
जो धर्म-मजहब के नाम हुआ।।

कैसे भूला दे उस बाबरी मस्जिद को,
जन्मभूमि तोड़ बनवाया था ।

कैसे भूल दे ज्ञानवापी को,
जो चीत्कार रही धर्म-मजहब के अत्याचारो को।।

कैसे भूला दे उस टीपू, औरंगजेब को,
जो लाखो को धर्म-मजहब के नाम मरवाया था ।

कैसे भूला दे उस औरंगजेब को,
जिसने शम्भा जी को हाथी से खिंचवाया था ।।

कैसे भूला दे उस गोरी को,
जिसने पृथ्वीराज को अन्धा कर मरवाया था।

कैसे भूला दे पृथ्वीराज की अफगानी कब्र को,
जहाँ आज भी धर्म-मजहब के नाम पर जूते मारे जाते है ।।

कैसे भूला दे सोमनाथ के सन्यासियों को,
जो ग़ज़नवी क़त्लोे का शिकार हुई ।

कैसे भूला दे उन गौ माता को,
जो हर ईद-बकरीद पर शहीद हुईं ।।

कैसे भूला दे आजमगढ़ और फैज़ाबाद को,
जो नाम, धर्म-मज़हब ने बदलवाया था ।

कैसे भूला दे उस जिन्ना को,
जो धर्म -मजहब के नाम पर देश को बंटवाया था ।।

बीते वर्षो की कुल मृत्यु का,
80 प्रतिशत मजहब विशेष के नाम हुए।

हम तो अब भी “अतिथि देवो भव” के अनुयायी है,
बस रहना है तो सावधान इन मजहब के धोखे बाजो से ।।

हिन्दू हृदय सम्राट रहा,
लेकिन मुर्ख नहीं बन सकता है ।

ऐसे बीमारू ख्यलो का,
गुलाम नहीं अब बन सकता।।

रहने दो ऐसी मानवता,
जो एक तरफ़ा दिखलाई दे ।

सेकुलरिज्म के नाम पर,
आज भी गौहत्या करवाती है।।

सेकुलरिज़्म का पाठ,
सबने हमको पढा डाला ।

सनातन संस्कृति की उत्तपत्ति स्थल को,
इस धर्म-मजहब के खेल ने उजाड़ डाला ।।

– श्री आलोक मणि त्रिपाठी 

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