एक संवाद

श्रुति :     मुझे आर्यन से प्यार है. वो कितना क्यूट है. पता है मैं उसी से शादी करुँगी.

अग्निवीर :       मगर उसका नाम तो सराफत है. वो तो मुसलमान है.

श्रुति :     उससे क्या? हर इन्सान बराबर होता है. सबके खून का रंग एक ही होता है. हिन्दू मुसलमान का खून मिला दें को क्या आप उसको अलग अलग पहचान जाओगे कि कौन सा हिन्दू का है, कौन सा मुसलमान का.

अग्निवीर :       बहन, डाल में कुछ काला है. सराफत खुद का नाम आर्यन क्यों रखेगा? उसने तुम्हे फंसाने के लिए ऐसा किया है. अगर वो तुम्हे सच्चा प्यार करता तो तुमसे शुरू से ही सच्चाई बताता और अपने असली नाम से ही तुमसे परिचय करता.

श्रुति :     उसको मुझसे प्यार था, इसीलिए उसने ऐसा किया. उसे लगा होगा कि मुसलमान होने के कारण मैं उससे बात नहीं करुँगी. वो बहुत अच्छा है.

अग्निवीर :           बहन मुझे लगता है कुछ गलत हो रहा है. वैसे भी तुम्हारा जीवन खतरे में है.

 

श्रुति :     बेवकूफ, तुम क्या बोल रहे हो?

अग्निवीर :       तुम बहन उसे भूल जाओ, उससे शादी मत करो.

श्रुति :     अपने काम से काम रखो. मेरे मामले में मैं जैसा चाहूँ करूँ.

अग्निवीर :       तुम हिन्दू लड़की हो. मुझे इस बात से मतलब है. तुम्हारा जीवन खतरे में हैं. तम्हे बताना और रोकना मेरा फ़र्ज़ है.

 

श्रुति :     कैसे मेरा जीवन खतरे में है?

अग्निवीर :       क्या तुम्हें पता है कि उससे शादी करने के लिए तुम्हे अपना धर्म छोड़ना पड़ेगा? तुम्हे मुसलमान बनना पड़ेगा?

श्रुति :     नहीं बनना पड़ेगा. आर्यन वैसा नहीं है. वो भी सब धर्मों को बराबर मानता है. हम दरगाह भी गए हैं और मंदिर भी.

अग्निवीर :       तुमने दरगाह और मंदिरों के क्या किया?

श्रुति :     दरगाह पर चादर चढ़ाई और मंदिर में पूजा की.

अग्निवीर :       उसने तुम्हारे साथ तुम्हारे बगल में खड़ा होकर पूजा की?

श्रुति :     वो मेरे साथ गया था, मदिर के दरवाजे तक.

अग्निवीर :       क्यों, अन्दर जाकर साथ पूजा क्यों नहीं की?

श्रुति :     यह उसकी मर्जी है. उसका धर्म है. मुझे उससे कोई मतलब नहीं. वो मुझसे कैसा व्यवहार करता है, यह महत्वपूर्ण है. उसे मेरे धर्म से कोई प्रॉब्लम नहीं, मुझे उसके धर्म से. वो क्यों मेरे धर्म के अनुसार पूजा करे?

अग्निवीर :       मगर तुमने तो दरगाह में चादर चढ़ाई, पूजा की ना? अगर तुम कर सकती हो तो वो क्यों नहीं कर सकता?

आर्पिता:    (चुप) कोई ज़वाब नहीं.

अग्निवीर :       उससे पूछो क्या वह तुमसे तब भी शादी कर सकता है जब तुम अपना धर्म ना छोडो?

श्रुति :     हाँ हाँ क्यों नही? क्यों नहीं करेगा वो?

 

 

 

 

 

(दो दिन बाद…..)

 

श्रुति :     ऐसा है ना कि उसकी फॅमिली न थोड़ी पुराने विचारों वाली है, इसलिए हम ना उसके धर्म के अनुसार निकाह करेंगे… पर ना मैं तो अर्पिता ही बनी रहूंगी… सराफत .. ऊँ हूँ… आर्यन ये सब नहीं सोचता… वैसे भी हमें उसकी फॅमिली से अलग रहना है.. तो इसमें कोई बड़ी बात भी नहीं है… है ना?

अग्निवीर :       अच्छा तुम्हे पता है तुम्हे धर्म बदलने के लिए क्या करना होगा?

श्रुति :     आर्यन ने बताया कि सिर्फ एक एफिडेविट देना होगा कि मैं मुसलमान बन रही हूँ. नाम भी बदलने कि ज़रुरत नहीं है.

अग्निवीर :       और एक बार तुम एफिडेविट दे दोगी तो पता है क्या होगा?

श्रुति :     मेरा धरम मेरा निजी मामला है, तुम्हे या दुनिया को इससे क्या? तुम बीच में टांग मत अडाओ.

अग्निवीर :       काश तुम्हारे धर्म से किसी को फर्क नहीं पड़ता. मगर शायद तुम नहीं जानती कि एक बार एफिडेविट देकर धर्म बदल लेने के बाद तुम सराफत तो दूसरी बीवी लाने का अधिकार दे दोगी. तुम्हारा उसकी एकमात्र बीवी रहने का अधिकार ख़तम हो जायेगा.

श्रुति :     नॉन सेन्स. फालतू कि बात कोई तुमसे सीखे. देश में कानून नाम कि भी कोई चीज़ है पता है तुमको?

अग्निवीर :       हाँ हाँ, मैं कानून कि ही बात कर रहा हूँ. सराफत के धर्म में उसको तुम्हारे अलावा तीन और शादियाँ करने का हक है, और वो भी तुमको पूछे बिना.. पता भी है तुमको?

श्रुति :     छोडो, बेवक़ूफ़ मत बनाओ मुझे… ऐसा कुछ नहीं है…

अग्निवीर :       एक काम करो, किसी वकील से पूछ लो. सच्चाई का पता चल जायेगा..

 

(एक हफ्ते बाद)

श्रुति :     भाई, बात तो तुम्हारी सही है. मगर इससे कोई फर्क नहीं पड़ता. मैंने आर्यन से बात की है. उसने वादा किया है कि वो ऐसा कुछ नहीं करेगा… तो मुझे बहुत प्यार करता है. वो महिलाओं कि भी बहुत इज्ज़त करता है.

अग्निवीर :       हो भी सकता है.. मगर एक बात बताओ, अगर वो तुमसे इतना प्यार करता है तो वो तुमसे अपने धरम के कानून के अनुसार शादी क्यों करना चाहता है. वो तुमसे इस्लामी कानून के बाहर रहकर शादी करे. हिन्दू तरीके से नहीं तो कोर्ट मैरिज कर ले. मगर नहीं, वो तुमसे धर्म बदलवाकर मुसलमानी कानून से ही शादी करेगा, क्योंकि इससे उसे तुम्हे दबा कर रखे कि छूट मिलेगी. वो जब चाहे तुम्हे अपनी दूसरी या तीसरी या चौथी बीवी बना देगा.

श्रुति :     तुम नहीं जानते वो मुझे कितना प्यार करता है. वो मेरे पे जान देता है.

अग्निवीर :       अच्छा, तुम उसके लिए मुसलमान बनने को तैयार हो ना. क्या वो तुम्हारे लिए हिन्दू बनेगा?

श्रुति :     बकवास बंद करो. वो क्यों बनेगा? मैं ही नहीं बोलूंगी उसको. अपना अपना धर्म है.

अग्निवीर :       एक बार टेस्ट तो कर लो कि वो तुमको कितना प्यार करता है.

श्रुति :     मुझे पता है वो मुझसे बहुत ज्यादा प्यार करता है, अपनी जान से भी ज्यादा.. मुझे नहीं करना टेस्ट.

अग्निवीर :       वो अगर तुम्हे इतना ही प्यार करता है, वो दूसरों के जैसा नहीं है, वो सब धर्मों कि इज्ज़त करता है तो बताओ भला वो तुम्हे मुसलमान बना कर ही क्यों शादी करना चाहता है जिसमे वो तुम्हे अपनी चौथी बीवी तक बना सकता है. वो क्यों नहीं बोल देता कि वो दकियानूसी बातों में विश्वास नहीं करता और एक सामान्य भारतीय कि तरह शादी करेगा? बताओ क्यों नहीं करता वो ऐसा?

श्रुति :     (चुप)

 

 

(कुछ दिन बाद)

श्रुति :     तुम चिंता मत करो… मैं उसे जानती हूँ.. वो मुझे कभी भी हर्ट नहीं करेगा. मैं उसे अच्छे से जानती हूँ. दूसरी शादी कि तो वो बात भी नहीं करेगा.

अग्निवीर :       हो सकता है. भगवान् करे यही सच भी हो. मगर फिर भी एक खतरा है, पता है?

श्रुति :     क्या?

अग्निवीर :       वो तुम्हे अपनी हर बात मानने के लिए बाध्य कर सकता है. तुमको गुलाम जैसा बना कर रख सकता है. उसकी सही गलत कोई भी बात नहीं मानने पर वो तुम्हे दूसरी बीवी लाने कि धमकी देकर ब्लैक मेल कर सकता है. तुम्हे चुपचाप सब कुछ सहना होगा.

श्रुति :     तुम क्या समझते हो, मैं पुलिस में कंप्लेंट कर दूंगी. उसको कोर्ट में घसीट दूँगी.. हूँ…

अग्निवीर :       किस बात के लिए?

श्रुति :     दूसरी बीवी लाने कि धमकी देने के लिए. और क्या?

अग्निवीर :       मगर तुम ऐसा नहीं कर सकोगी… तुम तो पहले ही एफिडेविट देकर उसे चार शादियाँ करने कि इजाज़त दे चुकी होगी बहना

श्रुति :     तो मैं कोर्ट में जाकर उससे तलाक ले लुंगी… तुम क्या समझते हो मुझको.. अपने बाप भाई से लड़कर उससे शादी कर सकती हूँ तो क्या उससे नहीं लड़ सकती?

अग्निवीर :       तुम ऐसा कर नहीं पाओगी. सराफत के धर्म में औरतों को तलाक लेने का हक नहीं है. शौहर मतलब पति चाहे तो तलाक ले सकता है, औरत नहीं. और तो और उसे तुमसे तलाक लेने के लिए कोर्ट जाने कि भी ज़रूरत नहीं, वो तुमसे तीन बार ‘तलाक तलाक तलाक’ बोल कर एकतरफा तलाक ले सकता है. और तो और तुमको व्हात्सप्प पर या फेसबुक पर या एस एम् एस के जरिये भी तीन बार ‘तलाक तलाक तलाक’ बोल कर तलाक ले सकता है. वो किस भी दिन गुस्से में भी ऐसा कर दे तो तुम्हारा तलाक हो जायेगा.

श्रुति :     अच्छा? ऐसा भला होता है कहीं? झूठ. तुम विश्व हिन्दू परिषद् वाले, आर एस एस वाले, आग्रह व्रत वाले ऐसी ही झूठी अफवाहें फैलाते हो..

अग्निवीर :       बहन,ये उतना ही सच है जितना सराफत के लिए तुम्हारा प्यार है. चले तो इन्टरनेट पर तुम खुद चेक कर लो, चाहे वकील चाचा से मिल कर जान लो. और एक बात ध्यान रखो, मैं तुम्हारा भाई हूँ, तुम्हारी चिंता है मुझे इसलिए तुम्हे समझा रहा हूँ.बाकी तुम खुद सोच समझ कर फैसला करो.

श्रुति :     मैंने एक बार उसे पुछा था, कभी गुस्से में ही सही मुझे छोड़ तो नहीं दोगे. पता है उसने क्या कहा था? उसने बोला अगर गलती से तलाक दे भी दिया ना, तो फिर से तुम से ही शादी करूँगा… बहुत प्यार करता हूँ तुमको… वो मुझे सच में बहुत प्यार करता है..

 

अग्निवीर :       अच्छा, वो दूसरी शादी भी तुम्ही से करेगा… कभी छोड़ दिया तो?

श्रुति :     बिल्कुल. जान देता है वो मुझ पर.

अग्निवीर :       इसका प्रोसेस पता है तुम्हें?

श्रुति :     प्रोसेस क्या है, हम वापस रहने लगेंगे पति पत्नी बनकर, और क्या?

अग्निवीर :       मेरी भोली बहना, इतना अस्सं नहीं है यह. उसके लिए तुम्हे किस और मर्द से पहले शादी करनी होगी, उसके साथ एक रात सम्भोग करना होगा, और फिर वह मर्द तुम्हे तलाक देगा तभी तुम वापस सराफत से शादी कर पाओगी… समझी..

श्रुति :     चलो झूठे, ऐसा भी कहीं होता है? तुम मुझे आर्यन के विरुद्ध भड़का रहे हो, मैं नहीं बहकने वाली तुम्हारी उल जलूल बातों से….

अग्निवीर :       मैं जो कह रहा हूँ सच है.. तुम्हारी कसम… और यह भी कि वह दूसरा मर्द अगर तुम्हे तलाक देने को राजी ना हो तो तुम्हें उसके साथ ही ज़िन्दगी गुजारनी पड़ेगी… और तुम उससे तलाक भी नहीं ले सकती क्योंकि सराफत के धर्म में औरत तलाक नहीं ले सकती… और हाँ.. तब ना तुम और ना है सराफत उसका कुछ बिगड़ सकते हो…

श्रुति :     तुम मुझे फालतू डरा रहे हो…

अग्निवीर :       नहीं, यही उसके धर्मं का कानून है और इसे हलाला बोलते हैं. चाहे तो गूगल कर के देख लो.

श्रुति :     सुनकर तो खतरनाक लगता है.. दूसरा मर्द तलाक ना दे तो?

अग्निवीर :       इसी डर से हलाला करने के लिए किसी मौलवी से औरत की शादी करा दी जाती है. मौलवी से पहले से करार होता है तो वो तलाक दे देता है. वैसे भी वो चार से ज्यादा बीवियां नहीं रख सकता… उसे औरों का भी तो हलाला करना होता है.

श्रुति :     छि:, कितनी गन्दी गन्दी बात कर रहे हो तुम. मुझे नहीं पसंद ये मौलवी औलवी…… तुम सरासर झूठ बोल रहे हो… बोलो.. सच बताओ, तुम झूठ बोल रहे हो ना?

 

अग्निवीर :       काश मैं जो बोल रहा हूँ, वो झूठ होता… मगर तुम्हें खुद ही रिसर्च करना चाहिए….

 

 

(कुछ दिन बाद….)

 

श्रुति :     भाई, एक बात बताऊँ….

अग्निवीर :       बोलो

श्रुति :     तुमने जितनी बात बताई वो सब सच है… मैंने आर्यन से भी बात की.. वो बोलता है सब झूठ है और ऐसा होता कहाँ है.. मगर नेट पर तो मैंने पाया है कि यह सच है… तारेक फ़तेह को भी सुना है.. वो भी कह रहा है कि यह सब होता है… मगर फिर भी…

अग्निवीर :       मगर क्या बहन?

श्रुति :     मैं आर्यन के बिना रह नहीं सकती.. कई बार मन को मनाने कि कोशिश की मैंने भाई, मगर मन उसके बिना लगता ही नहीं… मैं जानती हूँ कि जो कुछ मैंने किया, उससे मेरे माता पिता भी दुखी हैं, तुम भी दुखी हो.. मगर मैं दिल के आगे मजबूर हो गई हूँ… क्या पता उसने मुझे कुछ करा वरा तो नहीं दिया है… मैं दिन रात उसी के बारे में सोचती रहती हूँ, मन कहीं लगता ही नहीं है…

अग्निवीर :       बहन, तुम्हे स्ट्रोंग बनके खुद को संभालना होगा.. एक बार किसी से प्यार हो जाये तो उसको छोड़ना आसान नहीं होता… मगर ज़िन्दगी के फैसले भावुक होकर तो नहीं लिए जा सकते.. दिमाग का भी उपयोग तो करना ही होगा ना..

श्रुति :     भाई, मैं कैसे शेयर करूँ तुमसे.. मगर ये भी सच है कि जब वो मुझे भगा कर ले गया था तो मैंने बहुत मना करने पर भी वो मुझे यूज़ करता रहा… अब समझ आ रहा है कि वो यही चाहता था मुझसे… मगर मैं क्या करूँ… भाई उसने मुझे सच में कुछ करा दिया है लगता है.. या पता नहीं क्यों… मैं उसके बिना नहीं रह सकुंगी, ऐसा मुझे हमेशा लगता है.. भाई मैं क्या करूँ?

अग्निवीर :       बहन, यह बहुत साधारण सी समस्या है. कुछ दिन तुम्हें पागलों जैसा लगेगा… मन कहीं नहीं लगेगा… ऐसा होता ही है. जहाँ तक कुछ करा देने कि बात है, ऐसा कुछ होता वोट नहीं है, यह सब मन का भरम है… हाँ, तुम जितना अपने परिवार वालों के साथ रहोगी, उनसे घुल मिल कर रहोगी, उनसे बात करोगी, अपने मन को दुसरे कामों में व्यस्त रखोगी, तुम उतनी जल्दी इस सबसे उबार जाओगी.. सोचो माँ बाबा ने सब जानते हुए भी तुम्हे घर पर ही रखा ना, अब भी हो तुम्हें कितना प्यार करते हैं, तू उनका प्यार क्या तुम्हारी ज़िन्दगी में कल आये किसी लड़के के प्यार को हरा नहीं सकेगा..

 

श्रुति :     मैं ट्राई करती हूँ भाई.. तुम मेरा साथ देना.. आखिर मैं किस से शेयर करुँगी तुमसे नहीं कर पाउंगी तो?

अग्निवीर :       ज़रूर…..

 

(कुछ दिनों बाद…..)

अग्निवीर :       अर्पिता, क्या हाल हैं? सुना है सराफत किसी दूसरी लड़की से साथ भाग गया है फिर से?

श्रुति :     हाँ भाई, सुना तो है कि इस बार ***जी कि लड़की को फंसाया है उसने… भाई तुम्हारा लाख लाख शुकर है कि तुमने मुझे बचा लिया… बहुत तकलीफ हुई भाई इस झटके से उबरने में… मगर भगवान् कि कृपा कि तुम RSS, विश्व हिन्दू परिषद्, बजरंग दल, आग्रह व्रत वाले भले लोग हम बेवक़ूफ़ लड़कियों को आगाह करके सपोर्ट दे कर इस जाल से बचा लेते हो…

 

अग्निवीर :       मगर इतना ही काफी नहीं है, तुम्हें भी अपनी सहेलियों को आगाह करना होगा… इन धूर्तों से तुम्हे और बहनों को भी बचाना होगा..

श्रुति :     हाँ भाई, मैंने सरिता को बचने का फैसला कर लिया है… मैं उसे किस भी हालत में बचाऊँगी भाई… ये मेरा वादा है अपने भाई से…

This Hindi Translation is contributed by Brother Sunil. For original post in English, visit http://agniveer.com/love-jihad-tutorial-1/

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