माँ

मेरी भी नहीं तेरी भी नहीं वो तो होती सबकी सांझी माँ ना हिंदू की ना मुस्लिम की माँ तो बस एक होती है माँ

दुनिया और मैं

एक बच्चे की मासूम प्रार्थना! एक योगी की साधना यही प्रार्थना है!

बचपन और जवानी

जवानी आयी और बचपन विदा हो गया! पर जाते जाते बचपन कुछ कह गया! बचपन की जवानी को सीख, इस कविता में.

तुलादान

श्रीकृष्ण और उनकी पत्नी रुक्मिणी के वैवाहिक जीवन की एक घटना का काव्य रूपांतरण। श्रीकृष्ण जन्माष्टमी के पावन पर्व पर अग्निवीर की यह भेंट!

महाराणा प्रताप

महाराणा प्रताप के जीवन की कुछ घटनाएं इस कविता में हैं। भारत माँ के कुछ दमदार पुत्र ऐसे हैं जिन्होंने विपत्ति के समय में भी दुनिया में इस देश का नाम गुंजाये रखा। महाराणा प्रताप ऐसा ही एक नाम है।

भाई तू क्यों नहीं आया?

उसने भाई को पुकारा होगा. पर कोई नहीं आया. समाज में दुशासन तो सब हैं, कृष्ण कौन बनेगा?

मातृभूमि

To all those who love their motherland. A poem on the occasion of Independence Day.

ध्वजा ओम की!

पूरे संसार को श्रेष्ठ बनाने का संकल्प. व्यर्थ के जाति बंधन तोड़ कर मानव मात्र को एक करने का संकल्प. महान कवि और दार्शनिक पंडित चमूपति की अमर कृति!

धधक धधक हे सत्य की अग्नि

An inspiring poem from Aryaveer Vaidik to arouse the Agniveers into nation-building!

प्रयाण

अग्निवीर का सोते सिंहों को प्रयाण सन्देश