करना है प्रयाण मुझे अभी युद्ध क्षेत्र को

है शत्रु जहाँ युद्ध की है दुन्दुभी बजा रहा

कर भेड़िए इकट्ठे बढ़ा चला है भीड़ में

दिखा के सैन्य भेड़ियों का सिंह को डरा रहा

कहता है सर्वश्रेष्ठ हूँ कि सैन्य है बढ़ा हुआ

हैं लाख मेरी तरफ अकेला तू खड़ा हुआ

है सूचना इसे क्या सिंह एक हो तो क्या

घातक है लाख भेड़ियों से सिंह सोया हुआ

घसीटेंगे तेरे सैन्य से तुझको ही धरा पर

तू चढ़ जा आसमान में आ जा या जमीं पर

झुंडों से घिरा काँपेगा करता हुआ थरथर

जिस दिन दहाड़ेंगे हम इस नींद से उठ कर

कहना है आज हर किसी वैरी से ये हमें

ये धर्म सिंहों का है जो है प्राण सम हमें

देखा जो इसकी ओर यदि गिद्ध दृष्टि से

टुकड़ों में गिना जाएगा इतिहास पृष्ठों में

राणा नहीं तो राणा का भाला तो अभी है

कटार म्यान में हैं पर पानी तो अभी है

अब तक तो हो गया जो होना था अनाचार

आरम्भ है ये युद्ध का प्रतिशोध अभी है

जागो अभी! सुनो मेरे सोते हुए सिंहों

मैं जा रहा हूँ रण को मिल पाऊं ना कहीं

उठ जाओ दहाड़ो और अम्बर को गुंजा दो

सबसे ही ये गूंजेगा किसी एक से नहीं

आर्य मुसाफिर

अग्निसंकल्प

राष्ट्रभक्ति और धर्मरक्षा के लिए प्रेरित करती कविताओं का संग्रह

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Disclaimer:  We believe in "Vasudhaiv Kutumbakam" (entire humanity is my own family). "Love all, hate none" is one of our slogans. Striving for world peace is one of our objectives. For us, entire humanity is one single family without any artificial discrimination on basis of caste, gender, region and religion. By Quran and Hadiths, we do not refer to their original meanings. We only refer to interpretations made by fanatics and terrorists to justify their kill and rape. We highly respect the original Quran, Hadiths and their creators. We also respect Muslim heroes like APJ Abdul Kalam who are our role models. Our fight is against those who misinterpret them and malign Islam by associating it with terrorism. For example, Mughals, ISIS, Al Qaeda, and every other person who justifies sex-slavery, rape of daughter-in-law and other heinous acts. Please read Full Disclaimer.
  • Namaste Arya Musafir,
    Bohot hi achhi aur prerna denewali kavita likhi hai.. is kavita mein Veer Ras kut kut ke bhara hai… Rana Pratap ka Khagad firse uthega aur is baar kisi Mohammad ghori ko kshama nahi milegi!!!

    Dhanyavaad