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करना है प्रयाण मुझे अभी युद्ध क्षेत्र को

है शत्रु जहाँ युद्ध की है दुन्दुभी बजा रहा

कर भेड़िए इकट्ठे बढ़ा चला है भीड़ में

दिखा के सैन्य भेड़ियों का सिंह को डरा रहा

कहता है सर्वश्रेष्ठ हूँ कि सैन्य है बढ़ा हुआ

हैं लाख मेरी तरफ अकेला तू खड़ा हुआ

है सूचना इसे क्या सिंह एक हो तो क्या

घातक है लाख भेड़ियों से सिंह सोया हुआ

घसीटेंगे तेरे सैन्य से तुझको ही धरा पर

तू चढ़ जा आसमान में आ जा या जमीं पर

झुंडों से घिरा काँपेगा करता हुआ थरथर

जिस दिन दहाड़ेंगे हम इस नींद से उठ कर

कहना है आज हर किसी वैरी से ये हमें

ये धर्म सिंहों का है जो है प्राण सम हमें

देखा जो इसकी ओर यदि गिद्ध दृष्टि से

टुकड़ों में गिना जाएगा इतिहास पृष्ठों में

राणा नहीं तो राणा का भाला तो अभी है

कटार म्यान में हैं पर पानी तो अभी है

अब तक तो हो गया जो होना था अनाचार

आरम्भ है ये युद्ध का प्रतिशोध अभी है

जागो अभी! सुनो मेरे सोते हुए सिंहों

मैं जा रहा हूँ रण को मिल पाऊं ना कहीं

उठ जाओ दहाड़ो और अम्बर को गुंजा दो

सबसे ही ये गूंजेगा किसी एक से नहीं

आर्य मुसाफिर

अग्निसंकल्प

अग्निसंकल्प

राष्ट्रभक्ति और धर्मरक्षा के लिए प्रेरित करती कविताओं का संग्रह

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Agniveer aims to establish a culture of enlightened living that aims to maximize bliss for maximum. To achieve this, Agniveer believes in certain principles: 1. Entire humanity is one single family irrespective of religion, region, caste, gender or any other artificial discriminant. 2. All our actions must be conducted with utmost responsibility towards the world. 3. Human beings are not chemical reactions that will extinguish one day. More than wealth, they need respect, dignity and justice. 4. One must constantly strive to strengthen the good and decimate the bad. 5. Principles and values far exceed any other wealth in world 6. Love all, hate none
  • Namaste Arya Musafir,
    Bohot hi achhi aur prerna denewali kavita likhi hai.. is kavita mein Veer Ras kut kut ke bhara hai… Rana Pratap ka Khagad firse uthega aur is baar kisi Mohammad ghori ko kshama nahi milegi!!!

    Dhanyavaad