सबसे पहले मैं “Faishal Ahmed” अग्निवीर को धन्यवाद देता हूँ , आपने मेरे विचारों को पब्लिश किया।

मैंने वहाँ अपने भाईयो का कमेंट देखा , और मुझे बिलकुल भी आश्चर्य नहीं लगा। इस सत्य को लाखों अपना रहे और करोड़ो नहीं अपना पा रहे क्योकि उनकी उम्मीद इस चीज से जुड़ी है “की उनको कोई काल्पनिक जन्नत मिलेगी , उसमे ठन्डे दूध के नहर होंगे ,शराब की नदियाँ होगी या फिर सुन्दर ७२ हूरे मिलेगी और गिलमा भी।

पर मुस्लिम भाई इतने डरे हुए है क़ुरान की धमकी से की एक बार भी नहीं सोचा की “जन्नत में गिलमा ? और शराब का क्या काम ? जबकी ये दोनों ही हराम की श्रेणी में आती। नबी मोहम्मद कुछ भी करे , इनको उनका हर काम जायज लगता। क्योकि वही इनको काल्पनिक जन्नत ले जाएंग। एक ओर बात मोहम्मद साहब की मृत्यु जहर से हुई थी , उनकी ही पत्नी ने उन्हें जहर दिया था। उनका सारा परिवार दर्दनाक मृत्यु से समाप्त हो गयी।

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जिनपे किसी ईश्वर कृपा होगा ‘उनका और उनके पूरे परिवार के साथ कभी ऐसा होगा’ ?

खैर जैसा की मैंने वादा किया था की मैं अपने पिछले पोस्ट में कहे सारी बातों को हवाला के साथ प्रूफ करूँगा।

TOPIC- Is Qu’ran Currupted ?

जानकारी के लिए मोहम्मद साहब के मृत्यु के पश्चात मुस्लिम दो गुटो शिया और सुन्नी में बट गए थे। इसीलिए मैं शिया हदीसो का भी सहारा लिया , हमें दोनों की हदीसों का सही आकलन करना होगा तभी हम सब तथ्यों पर पहूचेंगे। दूसरा बात मुहम्मद साहब पढ़े लिखे व्यवसायी थे। इसपर मैं अगले पोस्ट पे लिखूंगा। एक ओर बात इसमें भी आपत्ति दिखाने वाले दिए हए रेफरेंस को नोट कर खुद जहाँ भी सुविधा हो अपने हिसाब से देख ले।

कुरान में रज्म की आयतें (आदेश ) न होने के निम्न कारण है –

1 -कुरान सम्पूर्ण (Complete) नहीं है —

शिया लोगों का विश्वास है मौजूदा कुरान पूरा नहीं है, इसमे रद्दोबदल किया गया है. कई सूरा और आयतें कम कर दी गयी, और बदल दी गयी है. मुहम्मद के वंशज इमाम जाफर सादिक ने अपनी किताब “उसूले काफी” में जो लिखा है इस प्रकार है. यह शिया लोगों की हदीस है –

“इमाम जफ़र सादिक ने कहा कि जिब्राइल ने रसूल को जो कुरान दी थी, उसमे 17000 आयतें थीं. और मौजूद कुरान में सिर्फ 6666 हैं.

उसूले काफी -पेज 671”.

“इमाम जफ़र ने कहा कि, रसूल के इंतकाल के बाद खलीफा उस्मान और अबू बकर ने कुरान में कमोवेशी कर दी थी. और कुरान का दो तिहाई हिस्सा गायब कर दिया था. – उसूले काफी -फासले ख़िताब.पेज 70”.

2 – कुरआन का संकलन —

पूरा कुरान 23 सालों में थोडा थोडा जमा होता गया था. जिसे मुहम्मद अपने लेखक “कातिब” या Scribner से लिखवा लेता था मुहमद के लेखक का नाम “जैदबिन साबित था. जो कुरान के हिस्सों को पत्तों, झिल्लिओं, चमड़े, और कागजों पर लिख लेता था. कभी मुहम्मद अपने दामाद अली से लिखवा लेता था. कुरान की एक मूल प्रती मुहमद अपनी पुत्री ‘फातिमा’ के घर रख देता था. इस कुरान को शिया लोग असली कुरान या “मुसहफ़ ए फातिमा कहते हैं. यही असली कुरान था. और मौजूद कुरान से तीन गुना बड़ा था.

मौजूदा कुरान में 114 सूरा Chapters, 6666 आयतें Verses और 77934 शब्द हैं. और अरबी के कुल 323671 अक्षर हैं.

3 – नबी मुहम्मद भूल जाता था —

“जिद बिन साबित ने कहा कि, जिस समय कुरान की आयतें जमा की जा रही थी, तो रसूल सूरा अहजाब 33 की आयतें भूल गए थे. जो लिखने से रह गयी. बुखारी -जिल्द 4 किताब 52 हदीस 60.

“इब्राहिम ने कहा की रसूल को सारी आयतें याद नहीं थी, वह भूल जाते जाते थे. बुखारी -जिल्द 6 किताब 60 हदीस 468.

“आयशा ने कहा कि रसूल की याददाश्त कमजोर थी. वह सौ आयातों से साठ आयतें भूल जाते थे. उनको एक आदमी बताता था कि कौन सी आयत किस जगह होनी चाहिए. बुखारी -जिल्द 6 किताब 61 हदीस 558.

मुहम्मद ने यहूदियों की किताबों में देखा था कि तौरेत में व्यभिचार की सजा “रज्म” लिखी है. इसलिए वह कुरआन में भी यही लिखवाना चाहता था. यह बात हदीसों से साबित होती है –

4 -रज्म की सजा तौरेत (बाइबिल) में है —

“उमर ने कहा कि रसूल ने रज्म की आयत तौरेत में देखी थी. क्योंकि व्यभिचार की सजा तौरेत में रज्म लिखी है. बुखारी -जिल्द 8 किताब 82 हदीस 809.

बाइबिल में रज्म के बारे में यह लिखा है –

“यदि कोई व्यभिचार करे, या दूसरे कि स्त्री के साथ सोये, तो वह स्त्री और पुरुष दोनों को पत्थर मर कर मर डाला जाये. और नगर के बाहर के फाटक के पास उन पर पत्थरवाह किया जाये. व्यवस्था 22 आयत 21 से 23.

व्यभिचारी और व्यभिचारिणी निश्चय मारे जाएँ. पुराना नियम – लेवी 20 :10.

5 – मुहम्मद ने रज्म की आयतें बनायी थीं —

“आयशा ने कहा कि रसूल ने रज्म यानी पत्थर से मरने की सजा की आयातों एक कागज के तुकडे पर लिखवा कर रख ली थी. वह इन आयातों को “रजः कबीरः” कहते थे. और कुरान में जुड़वाना चाहते थे. बुखारी -जिल्द 6 किताब 60 हदीस 285.

“इब्ने अब्बास ने कहा कि, रसूल चाहते थे कि, जिना करने वालों को “रज्म” की सजा देना उचित होगा. और वह इन आयातों को कुरान में शामिल कराना चाहते थे. बुखारी -जिल्द 6 किताब 61 हदीस 514.

“उमर बिन खत्ताब ने कहा कि, रसूल चाहते थे कि, कुरान में रज्म की वह आयतें जोड़ दी जाएँ, जो उन्होंने तौरेत (bible old testament) में देखी थीं. बुखारी -जिल्द 8 किताब 86 हदीस 9 और बुखारी -जिल्द 4 किताब 82 हदीस 820.

6 – रज्म की आयतें खो गयीं —

“आयशा ने कबूल किया कि रज्म की जो आयतें थी, वह मेरी गलती से खो गयी थी. और उसके साथ दूसरी आयतें भी थीं जो खो गयी थी” –

बुखारी -जिल्द 8 किताब 52 हदीस 299.

“सौदा ने कहा कि रज्म कि आयतें खो गयी थी, और खोजने पर भी नहीं मिली. बुखारी -जिल्द 3 किताब 34 हदीस 421.

“इकरिमा ने कहा कि, रज्म की आयतें कुरान में जुड़वाने के लिए रसूल ने एक कागज पर लिखवा कर रखी थी लेकिन बाद में वह आयतें खो गयी. बुखारी -जिल्द 9 किताब 93 हदीस 613.

“आयशा ने कहा कि, रज्म की आयतें और आयत ऱजअत दौनों आयतें लिखी गयी थी लेकिन वह खो गयी थी” – बुखारी-जिल्द 8 किताब 82 हदीस 824. और बुखारी -जिल्द 8 किताब 82 हदीस 842.

“खुजैमा ने कहा की, जब कुरआन को जमा किया जा रहा था, तो रज्म की आयतिं को लिखने पर ध्यान नहीं रखा गया. और वह आयतें कुरान में शामिल नहीं हो सकीं. बुखारी -जिल्द 4 किताब 56 हदीस 829.

“अम्र बिन मैमून ने कहा की, जब उमर कुरआन की आयातों को जमा कर रहे थे तो, लोगों से बोले की, ऐसा लगता है क़ि कुरान की कुछ आयतें खो गयी हैं, या गायब हो गयी हैं. बुखारी- जिल्द 6 किताब 61 हदीस 529.

साद बिन अबी वक्कास ने कहा क़ि, आयशा ने कहा क़ि, जब रसूल ने अपना कुरता उतारा तो उसकी बाँहों से रज्म क़ि आयतें गिर गयी थीं , और मैंने धयान नहीं रखा, बुखारी -जिल्द 2 किताब 23 हदीस 413.

7 – आयतें कहाँ गयीं —

“अल तबरी ने कहा के, कुरान की सूरा अहजाब (सूरा संख्या 33) आयत 23 के बाद की और आयतें भी थी जो खो गयी, और खोजने पर भी नहीं मिली. बुखारी – जिल्द 4 किताब 52 हदीस 62.

“ज़ैद बिन साबित ने कहा क़ि, जब मैं कुरान की सभी आयतें जमा कर रहा था, तो कुरान की सूर अहजाब की बहुत सी आयतें नहीं मिली. वह खो गयी थी. बुखारी -जिल्द 4 किताब 52 हदीस 52 हदीस 60.

8 – बकरी कुरआन खा गयी —

“सौदा (मुहम्मद की पत्नी) ने कहा कि, रज्म की आयातों के साथ जितनी भी आयतें कागजों पर (पत्तों) पर लिखी रही थीं, वह नहीं मिली . पता चला कि वह आयतें दो बकरियों ने खा लिया था. जो अचानक घर में आ गयी थी. बुखारी – जिल्द 3 किताब 34 हदीस 421.

“आयशा ने कहा कि, रसूल ने रज्म की आयतों के साथ जो आयतें रखने को दी थीं, उनको मैंने तकिये के निचे रख दिया था. वह नीचे गिर गयी थीं, उसी वक्त दो बकरियां घर ने घुस गई और वह आयतें खा गई, सुन्नन इब्ने माजा – किताब निकाह – हदीस 1934.

9 -बकरियां 200 आयतें खा गयीं —

“अनस बिन मालिक ने कहा कि, बकरियां कुरान की 200 आयतें खा गयी थी. मुस्लिम – किताब 4 हदीस १३३७.

“बकरियां 200 आयतें खा गयी थीं, जिनमे सुरा अहजाब की रज्म की आयतें भी थी. सूरा अहजाब में सूरा बकरा के बराबर आयतें थीं”.

बुखारी -जिल्द 4 किताब 54 हदीस 522.

10 -कुरान फिर से लिखा गया —

“अनस बिन मालिक ने कहा कि “हुदैफा बिन यमन” उस्मान के पास गया और बोला कि, लोग कुरान को अलग अलग 6 प्रकार से पढ़ा रहे हैं जिनमें काफी अंतर है. हरेक प्रान्त में कुरान की अपनी अपनी प्रतियाँ है. जो एक दूसरे से अलग हैं, उस्मान ने जिद बिन साबित, अब्दुल्ला बिन जुबैर, और सईद बिन अल आस से कहा की कुरआन की सभी प्रतियोंको जमा करवाओ. जिसके पास भी कुरान का कोई हिस्सा या आयत मिले मेरे पास लाओ. फिर उस्मान ने आदेश दिया कि कुरान को उसी प्रति के अनुसार कुरेश के कबीले की बोली में दोबारा लिखो. और कुरान में वही आयतें रहने दो जो हफ्शा (मुहम्मद की पत्नी) की प्रति में हैं. जो रसूल हफ्शा के पास रख देते थे. फिर उस्मान ने कहा क़ि इसके आलावा कुरान के जो भी हिस्से किसी पास मिलें, उनको जला डालो. अनस ने कहा क़ि इसके कारण कुरान की सूरा अहजाब की 215 आयतें कम हो गयी थीं”. — बुखारी -जिल्द 6 किताब 61 हदीस 514.

कुछ अंग्रेजी भाषाओं में से जानकारी।

YES, QURAN IS CURRUPTED, HERE THE PROOF FROM ISLAMIC HADITH,WITH ONLINE WEBSITE .
Surah 15:9 “We have, without doubt, sent down the Message; and We will assuredly guard it.

क्या क़ुरान CURRUPTED है ?

NOW THE BOMB!

(1) . “Hudhaifa was afraid of their differences in the recitation of the Quran…
Uthman sent to every Muslim province one copy of what they had copied,
and ordered that all the other Quran materials, whether written in fragmentary
manuscripts or whole copies, be burnt. (Hadith, Vol. 6, Book 61, #510).
So here we have Uthman saying I’ll burn the word of God and I’ll decide just

what should be in the Book.
(2). Allah sent Muhammad (saw) with the Truth and revealed the Holy Book to him, and among what Allah revealed, was the Verse of the Rajam (the stoning of married persons, male and female, who commit adultery) and we did recite this Verse and understood and memorized it. Allah’s Apostle (saw) did carry out the punishment of stoning and so did we after him. I am afraid that after a long time has passed, somebody will say, ‘By Allah, we do not find the Verse of the Rajam in Allah’s Book’, and thus they will go astray by leaving an obligation which Allah has revealed.
(Sahih al-Bukhari, Vol. 8, p.539)
LOST VERSES
VERSES OF RAMAJAN ?

(3). Abdullah b. ‘Abbas reported that ‘Umar b. Khattab sat on the pulpit of Allah’s Messenger (may peace be upon him) and said: Verily Allah sent Muhammad (may peace be upon him) with truth and He sent down the Book upon him, and the verse of stoning was included in what was sent down to him. We recited it, retained it in our memory and understood it. Allah’s Messenger (may peace be upon him) awarded the punishment of stoning to death (to the married adulterer and adulteress) and, after him, we also awarded the punishment of stoning, I am afraid that with the lapse of time, the people (may forget it) and may say: We do not find the punishment of stoning in the Book of Allah, and thus go astray by abandoning this duty prescribed by Allah. stoning is a duty laid down in Allah’s Book for married men and women who commit adultery when proof is established, or it there is pregnancy, or a confession. (  Sahih Muslim 17:4194 )

http://www.usc.edu/org/cmje/religious-texts/hadith/muslim/017-smt.php#017.4194

(4). QURAN VERSES EATEN BY SHEEP ? (भेड़ खा गयी क़ुरान)

It was narrated that ‘Aishah said: “The Verse of stoning and of breastfeeding an adult ten times was revealed, and the paper was with me under my pillow. When the Messenger of Allah died, we were preoccupied with his death, and a tame sheep came in and ate it.” (Hasan)

Ibn Majah 3:9:1944 )


http://www.webcitation.org/query?url=http://sunnah.com/ibnmajah/9&date=2014-01-14

(5). DURING the battle of Yamama,

Narrated Zaid bin Thabit Al-Ansari: who was one of those who used to write the Divine Revelation: Abu Bakr sent for me after the (heavy) casualties among the warriors (of the battle) of Yamama (where a great number of Qurra’ were killed). ‘Umar was present with Abu Bakr who said, ‘Umar has come to me and said, The people have suffered heavy casualties on the day of (the battle of) Yamama, and I am afraid that there will be more casualties among the Qurra’ (those who know the Qur’an by heart) at other battle-fields, whereby a large part of the Qur’an may be lost, unless you collect it. And I am of the opinion that you should collect the Qur’an.” Abu Bakr added, “I said to ‘Umar, ‘How can I do something which Allah’s Apostle has not done?’ ‘Umar said (to me), ‘By Allah, it is (really) a good thing.’ So ‘Umar kept on pressing, trying to persuade me to accept his proposal, till Allah opened my bosom for it and I had the same opinion as ‘Umar.” (Zaid bin Thabit added:) Umar was sitting with him (Abu Bakr) and was not speaking. me). “You are a wise young man and we do not suspect you (of telling lies or of forgetfulness): and you used to write the Divine Inspiration for Allah’s Apostle. Therefore, look for the Qur’an and collect it (in one manuscript). ” By Allah, if he (Abu Bakr) had ordered me to shift one of the mountains (from its place) it would not have been harder for me than what he had ordered me concerning the collection of the Qur’an. I said to both of them, “How dare you do a thing which the Prophet has not done?” Abu Bakr said, “By Allah, it is (really) a good thing. So I kept on arguing with him about it till Allah opened my bosom for that which He had opened the bosoms of Abu Bakr and Umar. So I started locating Quranic material and collecting it from parchments, scapula, leaf-stalks of date palms and from the memories of men (who knew it by heart). I found with Khuzaima two Verses of Surat-at-Tauba which I had not found with anybody else, (and they were):– “Verily there has come to you an Apostle (Muhammad) from amongst yourselves. It grieves him that you should receive any injury or difficulty He (Muhammad) is ardently anxious over you (to be rightly guided)” (9.128) The manuscript on which the Quran was collected, remained with Abu Bakr till Allah took him unto Him, and then with ‘Umar till Allah took him unto Him, and finally it remained with Hafsa, Umar’s daughter.( Sahih Bukhari 6:60:201)

WEBSITE ONLINE ,

http://www.searchtruth.com/book_display.php?book=60&translator=1&start=200

(6). Volume 9, Book 89, Number 301:

Narrated Zaid bin Thabit:

Abu Bakr sent for me owing to the large number of casualties in the battle of Al-Yamama, while ‘Umar was sitting with him. Abu Bakr said (to me), ‘Umar has come to my and said, ‘A great number of Qaris of the Holy Quran were killed on the day of the battle of Al-Yamama, and I am afraid that the casualties among the Qaris of the Quran may increase on other battle-fields whereby a large part of the Quran may be lost. Therefore I consider it advisable that you (Abu Bakr) should have the Qur’an collected.’ I said, ‘How dare I do something which Allah’s Apostle did not do?’ ‘Umar said, By Allah, it is something beneficial.’ ‘Umar kept on pressing me for that till Allah opened my chest for that for which He had opened the chest of ‘Umar and I had in that matter, the same opinion as ‘Umar had.” Abu Bakr then said to me (Zaid), “You are a wise young man and we do not have any suspicion about you, and you used to write the Divine Inspiration for Allah’s Apostle. So you should search for the fragmentary scripts of the Quran and collect it (in one Book).” Zaid further said: By Allah, if Abu Bakr had ordered me to shift a mountain among the mountains from one place to another it would not have been heavier for me than this ordering me to collect the Qur’an. Then I said (to ‘Umar and Abu Bakr), “How can you do something which Allah’s Apostle did not do?” Abu Bakr said, “By Allah, it is something beneficial.” Zaid added: So he (Abu Bakr) kept on pressing me for that until Allah opened my chest for that for which He had opened the chests of Abu Bakr and ‘Umar, and I had in that matter, the same opinion as theirs.

So I started compiling the Quran by collecting it from the leafless stalks of the date-palm tree and from the pieces of leather and hides and from the stones, and from the chests of men (who had memorized the Quran). I found the last verses of Sirat-at-Tauba: (“Verily there has come unto you an Apostle (Muhammad) from amongst yourselves–‘ (9.128-129) ) from Khuzaima or Abi Khuzaima and I added to it the rest of the Sura. The manuscripts of the Quran remained with Abu Bakr till Allah took him unto Him. Then it remained with ‘Umar till Allah took him unto Him, and then with Hafsa bint ‘Umar.

( SAHIH BUKHARI 9:89:301  )

http://www.usc.edu/org/cmje/religious-texts/hadith/bukhari/089-sbt.php#009.089.301

(7). Volume 6, Book 61, Number 509:

Narrated Zaid bin Thabit:

Abu Bakr As-Siddiq sent for me when the people! of Yamama had been killed (i.e., a number of the Prophet’s Companions who fought against Musailama). (I went to him) and found ‘Umar bin Al-Khattab sitting with him. Abu Bakr then said (to me), “Umar has come to me and said: “Casualties were heavy among the Qurra’ of the! Qur’an (i.e. those who knew the Quran by heart) on the day of the Battle of Yalmama, and I am afraid that more heavy casualties may take place among the Qurra’ on other battlefields, whereby a large part of the Qur’an may be lost. Therefore I suggest, you (Abu Bakr) order that the Qur’an be collected.” I said to ‘Umar, “How can you do something which Allah’s Apostle did not do?” ‘Umar said, “By Allah, that is a good project. “Umar kept on urging me to accept his proposal till Allah opened my chest for it and I began to realize the good in the idea which ‘Umar had realized.” Then Abu Bakr said (to me). ‘You are a wise young man and we do not have any suspicion about you, and you used to write the Divine Inspiration for Allah’s Apostle. So you should search for (the fragmentary scripts of) the Qur’an and collect it in one book).” By Allah If they had ordered me to shift one of the mountains, it would not have been heavier for me than this ordering me to collect the Qur’an. Then I said to Abu Bakr, “How will you do something which Allah’s Apostle did not do?” Abu Bakr replied, “By Allah, it is a good project.” Abu Bakr kept on urging me to accept his idea until Allah opened my chest for what He had opened the chests of Abu Bakr and ‘Umar. So I started looking for the Qur’an and collecting it from (what was written on) palmed stalks, thin white stones and also from the men who knew it by heart, till I found the last Verse of Surat At-Tauba (Repentance) with Abi Khuzaima Al-Ansari, and I did not find it with anybody other than him. The Verse is:

‘Verily there has come unto you an Apostle (Muhammad) from amongst yourselves. It grieves him that you should receive any injury or difficulty..(till the end of Surat-Baraa’ (At-Tauba) (9.128-129) Then the complete manuscripts (copy) of the Qur’an remained with Abu Bakr till he died, then with ‘Umar till the end of his life, and then with Hafsa, the daughter of ‘Umar.

(  SAHIH BUKHARI 6:61:509)

http://www.usc.edu/org/cmje/religious-texts/hadith/bukhari/061-sbt.php#006.061.509

#Faishal Ahmed (U.P.)

भले ही मुझे आप लोग इस्लाम का दुश्मन मानें पर एक बात तो आपको मानना ही पड़ेगा की मैं इंसानियत का दोस्त जरूर बन गया हूँ।

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3 COMMENTS

  1. You all are so funny. You have no guts to debate with a learned Scholar so put cases on him and force him out of the country. Internet Zero, that’s what you are. There was no need for QURAN if the VEDAS had not been corrupted. Now no use banging your head when you yourself agree that your Scriptures have been corrupted.

  2. Raj Hyderabadi is actual author this post he is writing these post on name Faishal Ahmed to make people non-believers in Quran & prophet. I am 100%. confirmed. Allah will not forgive these people and punish them in eternal hell fire. They Questioned authenticity of Quran which is a greatest sin according to prophet too.

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