पिछड़े मुस्लिमों की सहायता के उपाय

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“दलित तो दलित होता है, चाहे वो हिन्दू हो या मुसलमान… सब दलितों को आरक्षण मिलना चाहिए… उनकी भलाई के बारे में हमने नहीं सोचा तो कल सड़कों पर खून बहेगा.” ऐसे कुछ विचार श्री रामदेव जी, जो कि भारत स्वाभिमान ट्रस्ट के नेता हैं, ने अभी कुछ दिन पहले मुसलमानों के एक समूह में खड़े होकर व्यक्त किये हैं. श्री रामदेव जी ने इस समूह में यह मांग की कि ‘अल्पसंख्यक’ दलितों को भी अनुसूचित जाति और जनजाति में शामिल किया जाए.

हठयोग के धुरंधर प्रचारक ने प्रतिज्ञा कर ली है कि मुसलमानों के हक़ की आवाज को मौलानाओं से ज्यादा अब वो उठाएंगे. पर उनकी इस घोषणा ने उनके समर्थकों और विरोधियों दोनों को ही दोराहे पर ला खड़ा किया है. दलित मुसलमानों को न्याय न मिलने पर सड़कों पर खून खराबे की भविष्यवाणी ने जहां एक तरफ राष्ट्रवादी गुटों में हलचल मचा दी है वहीं दूसरी तरफ ‘अल्पसंख्यकों’ के अधिकारों के लिए दिन रात एक करने वाले दलों की भी नींद उड़ा दी है! क्योंकि ऐसी भविष्यवाणी तो अल्पसंख्यक प्रेम के लिए मशहूर कांग्रेस ने तब भी नहीं की थी जब उसने उत्तर प्रदेश चुनाव से पहले मुसलमानों को ओबीसी कोटे में अलग से कोटा दिया था!

आज के दिन केवल हिन्दू, सिख, और बौद्ध ही संविधान के अनुच्छेद ३४१ के तहत अनुसूचित जाति और जनजाति के अंतर्गत आरक्षण पाते हैं. जो भी आदमी/संगठन (दलित) मुसलमानों की पीड़ा से दुखी है, हम उनका सम्मान करते हैं. पर साथ ही हम यह भी घोषणा करते हैं कि मुसलमान और ईसाई धर्मों को अनुसूचित जाति/जनजाति में शामिल करने की कोई भी मांग पूरी तरह देश, इस्लाम, ईसाई, और हिन्दू धर्मों के विरुद्ध है और इतना ख़तरा पैदा कर सकती है जितना आज़ादी से पहले हजार साल तक भारत पर हमला करने वाले विदेशी भी नहीं कर सके.

याद रहे कि भारत में लगभग ५०% मुसलमानों को ओबीसी कोटे के तहत पहले ही आरक्षण मिलता है. पर सच्चर कमेटी ने पाया कि इस आरक्षण के बावजूद भी ‘ओबीसी मुस्लिम’ अपने ‘ओबीसी गैर मुस्लिमों’ से प्रतियोगिता में पिछड़ जाते हैं. इसलिए मुसलमानों के लिए ओबीसी कोटे में भी अलग से ४.५% कोटा बना दिया गया है जिसे १५% तक बढाने की मांग चल रही है. यही नहीं, तमिलनाडु, आन्ध्र, कर्नाटक, और बिहार जैसे राज्यों में मुसलमान इससे भी ज्यादा आरक्षण लेते हैं. और यह आरक्षण उनको मिलने वाले ‘अल्पसंख्यक विशेष अधिकार’ से अलग हैं! भारत में रहने वाला ‘अल्पसंख्यक’ मुस्लिम समुदाय यहाँ इतने अधिकार पाता है कि जितने मुस्लिम देशों में रहने वाले बहुसंख्यक मुस्लिम भी नहीं पाते. 

खैर, जो भी (दलित) मुसलमानों के दुःख से वास्तव में दुखी हैं उनके लिए हम कुछ सुझाव देते हैं. हमने ये सुझाव बड़े सरल रखे हैं ताकि इन पर अमल करने में कोई देरी और मुश्किल न हो. इसके बाद हम वो कारण सामने रखेंगे जिनकी वजह से अनुच्छेद ३४१ में मुस्लिम और ईसाई मतों को शामिल करना देश के लिए घातक सिद्ध होता है.

श्री रामदेव जी को ५ सूत्रीय कार्यक्रम - मुसलमानों और ख़ास तौर पर ‘दलित’ मुसलमानों की सहायता के उपाय

न केवल श्री रामदेव जी, बल्कि हर एक वो नेता जिनके दिलों में अगड़े और पिछड़े मुसलमानों के लिए कुछ करने की तड़प है और जिनको लगता है कि ‘अल्पसंख्यक’, ‘ओबीसी’ आदि कोटों में शामिल करने के बावजूद भी मुसलमान भाई दबे कुचले हुए हैं, ऐसे सज्जनों के लिए यहाँ बड़े सरल सूत्र सुझाए जा रहे हैं. (यदि इन सुझावों को पहले ही अमल में लाया जा चुका है तो अग्निवीर इसका स्वागत करता है और साथ ही अनुरोध करता है कि इस विषय में विस्तार से औपचारिक घोषणा करें.) पर उससे पहले कुछ बातों का उल्लेख जरुरी है.

(दलित) मुस्लिम का पिछड़ापन केवल पैसों की तंगी के कारण नहीं है. बल्कि समाज के दूसरे तबकों से विश्वास, बराबरी, और सम्मान की कमी ज्यादा बड़े कारण हैं. इसलिए पिछड़े तबके के लिए काम करने वाले किसी भी संत महात्मा के लिए यह जरुरी है कि वो इन मामलों में खुद एक उदाहरण सामने रखे.

इसलिए देश के बड़े संगठन और महत्त्वपूर्ण लोगों जैसे भारत स्वाभिमान ट्रस्ट, पतंजलि योगपीठ, श्री रामदेव जी, श्री मुलायम सिंह यादव जी, श्री राहुल गांधी जी आदि का यह दायित्त्व बनता है कि पिछड़े मुसलमानों/अल्पसंख्यकों को बराबरी और विश्वास दिलाकर खुद एक मिसाल पेश करें ताकि बाकी लोग भी प्रेरणा ले सकें. अल्पसंख्यक/पिछड़ा अल्पसंख्यक प्रेम को सार्थक करने के लिए अग्निवीर इन महानुभावों को पांच सूत्रीय कार्यक्रम देता है और यह विश्वास दिलाता है कि वह खुद इस मसले में तन मन धन से सहयोग करेगा.

१. श्री रामदेव जी यह वचन दें कि उनकी कम्पनियों और ट्रस्टों के खर्च का ७५% केवल दलितों के विकास, शिक्षा, और रोजगार पर खर्च होगा, खासकर (दलित) मुस्लिमों के विकास पर.

२. श्री रामदेव जी की हर कंपनी, ट्रस्ट, और राजनैतिक या सामाजिक दलों की कमान (दलित) मुसलमानों के हाथ में होगी. इन दलों और कम्पनियों के प्रमुख, वक्ता, और योजनाकार दलित मुसलमान होंगे.

३. उनकी सब पत्रिकाओं और पुस्तकों का सम्पादन दलित मुस्लिम ही करें. जिससे दुनिया वाले यह देख सकें कि काबिलियत केवल अगड़े गैर मुसलमानों के हाथ की ही जागीर नहीं है.

४. उनकी सब कम्पनियों, ट्रस्टों, आश्रमों में खाना बनाने से लेकर रसोई का सारा काम दलित मुसलमान ही करें. इससे दुनिया में छूत अछूत की मूर्खता के खिलाफ कड़ा सन्देश जाएगा.

५. श्री रामदेव जी इस बात से आहत हैं कि अक्सर लोग कहते हैं कि सब आतंकवादी मुसलमान होते हैं. इस बात को वह पूरी तरह झूठ समझते हैं. अब इस बात को दुनिया में साबित करने के लिए उनको चाहिए कि अपनी सुरक्षा में लगे सब जवानों को ऐसे सुरक्षाकर्मियों से बदल दें जो पांच बार के नमाजी हों, जो चेहरे पर दाढ़ी रखें, और जिसके माथे पर नमाज का निशान हो. ऐसा करते ही इस्लाम के बारे में लोगों की गलत धारणा मिट जायेगी. केवल श्री रामदेव जी ही नहीं बल्कि वो सब नेता जिनका दिल ‘मजहब नहीं सिखाता आपस में बैर रखना’ के तराने गाता है, उन सबको यह करना चाहिए.

खासकर इन सब महानुभावों को चाहिए कि व्यक्तिगत सुरक्षा में लगे सब जवान वही लोग हों जो सामने आकर खुद को कट्टर मुसलमान कहते हों. जरा सोचिये, जब सब बड़े नेताओं की व्यक्तिगत जेड सुरक्षा कट्टर मुसलमानों के हाथ में होगी तो फिर कौन माई का लाल इस्लाम को आतंकवाद से जोड़ने की हिम्मत कर सकेगा?

(यहाँ तक कि सिखों को भी कुछ लोगों की कारस्तानी के कारण आतंकवाद से जोड़ा गया. पर क्योंकि सिख सेना, पुलिस, और हर सुरक्षा के विभाग में बड़ी संख्या में मिलते हैं, इस कारण कोई सिख मत को आतंकवाद से नहीं जोड़ सका और आज भी सिख जाति एक देशभक्त और वीर समूह के रूप में देश में जानी जाती है)

कितने दुःख की बात है कि पाकिस्तान जैसे कट्टरपंथी देश में भी वहां के नेता किसी कट्टर दाढ़ी रखे पांच बार के नमाजी मुसलमान को अपनी व्यक्तिगत सुरक्षा के लिए नहीं रखते. पर भारत के नेताओं और खासकर श्री रामदेव जी के पास यह सिद्ध करने का सुनहरा मौक़ा है कि मुसलमानों का आतंक से कोई लेना देना नहीं है, बस इसके लिए अपनी सुरक्षा के लिए ऐसे मुसलमान भाइयों को चुन लें. बड़े दुर्भाग्य की बात है कि ‘मजहब नहीं सिखाता आपस में बैर रखना’ की दिन रात रट लगाने वाले नेता एक ख़ास मजहब के लोगों को अपनी व्यक्तिगत सुरक्षा में कभी नहीं लगने देते. हमें आशा है कि श्री रामदेव जी मनसा वाचा कर्मणा एक होकर सच्चे ‘अल्पसंख्यक’ हितैषी सिद्ध होंगे.
यह कदम ‘दलित मुसलमानों’ के लिए न केवल बराबरी का पैगाम लाएगा बल्कि उनके लिए रोजगार भी पैदा करेगा जो कि हर ‘अल्पसंख्यक’ हितैषी का सपना है.

इन पांच बिन्दुओं पर अग्निवीर को श्री रामदेव जी और अन्य ‘दलित’ मुस्लिम हितैषी नेताओं की प्रतिक्रिया की प्रतीक्षा है. अग्निवीर तन मन धन से उन सब नेताओं का सहयोग करेगा जो इन पांच बातों को व्यवहार/अमल में उतारेंगे (यह कोई मायने नहीं रखता की अग्निवीर का इन मुद्दों पर निजी मत क्या है. किन्तु जो किसी भी मुद्दे का समर्थन करते हैं, उनकी इमानदारी तो केवल कर्मों से ही झलकती है, बातों से नहीं. अग्निवीर तो इस इमानदारी का कायल है, चाहे वैचारिक मतभेद क्यूँ न हों).

आगे के लेख में हम उन कारणों पर बात करेंगे जिनकी वजह से मुसलमानों और ईसाइयों को आरक्षण देना देश द्रोह है और हर धर्म का अपमान है.

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Comments

  1. Truth Seeker says

    @Agniveer
    Sir, we should not take Ramdev words seriously. He is only victim of some misguidance otherwise his intention is very sacred & patriotic. I think it would have been better if some scholar like you to go to him and advise him how to lead further. Supporting of reservation on religion based is totally wrong & dangerous for country to fight against corruption & corrupt Government.

    • says

      Truth Seeker, We wrote to him and BST, PYP. However the replies we receive seem to indicate that they perceive this as personal attack and not as an objective issue related to nationalism. They are perhaps blind worshippers of their role model, and we worship one Supreme Lord as Perfect One. They have called us traitor, prostitutes, agent of Sonia and what not. We dont care about these adjectives as we are used to such praises since inception of Agniveer Mission from those who admire the same ideology that Sri Ramdevji admires.

      With such advisers surrounding the Hathayoga guru, it seems that more blunders are in pipeline. I wish Rajiv Dixitji was alive! Perhaps the only intellectual in this entire team. Such serious missions of nationalism do not just require intent, but much more competence. And to gain competence, humility is first prerequisite. If you have assumed that ‘Baba Vaakyam Brahma Vaakyam’, that will only lead to Talibanization.

      We do indeed want to help Sri Ramdevji, but it seems that is not feasible going by the fact that our concerns are being construed as ego-battle. Under such circumstances, we can only prefer to focus on where our inner voice drives and leaving rest on Him. But yes, the incidents since Sri Ramdevji’s address in Deoband till date increasingly indicate that this movement would take us away from our vision of Ram Rajya. There seems to be a general lack of intellectual depth, responsibility and firmness on fundamental principles that are necessary prerequisite for this. However we are not writing them off totally. We sincerely pray that they see sensibility in what we have written, learn the virtue of humility as essence of Yoga, and learn to discuss objectively without raising personal rhetorics.

      Often personality-driven movement ware quick to rise but fail because the personality-centric culture erodes possibilities of anyone except blind-bhakts joining. Their constant praises inflates the ego of the founder and gradually the movement sinks into intellectual bankruptcy. Like Talibanis, they would abuse and condemn anyone who differs even with noble intentions. Like the monkey who destroyed bird’s nest who advised him to build a house to prevent getting drenched in rain.

      That is why we at Agniveer are attempting to develop a movement that is principles driven and not personality-focussed. That does mean short-term challenges and resisting the lure of quick publicity, money etc. But we believe that would be much sustainable in longer term. Meanwhile, if a personality-oriented missions wants to shed the old skin to get principles-oriented, we are more than glad to assist. After all, all that would remain with us is our sanskaars. Everything else would evaporate for us in few years with death. That includes our petty ego.

      • Vinod says

        अग्निवीर जी ,
        में भ्रमित हूँ आपके इस रूप से ! में ये मानता था की आप रामदेव जी से भी अधिक उर्जावान हो सकते वेद व्यवस्था स्थापित करने के लिए | मेरा ये मानना हे जो वेदों को मानता हे वो हिंदू को जनता तो हे मगर मानता नहीं हे | जो अपने आपको हिंदू कहता हे वो पहले सनातनी हे आर्य हे और उससे भी पहले वेदान्ती हे | एक परिवार में असमानता को समान करने के लिए दिए गए सुझाव को अंतरजातीय असमानता के रूप में विश्लेषित करके आप वेदों और मनु के मूल धर्म, समान न्याय व्यवस्था का अपमान तो नहीं कर रहे ?

  2. Satyen says

    Agniveer jee, this type of response was expected from BST and PYPT. I am sure though it will have hardly any impact on the Vedic people who work just for Lok Kalyan indifferent to these denouncements. However, the vscuum of Rajiv Dikshit jee should be filled by any Aenlightened Agniveer family member who is a mixture of honey and the ayurvedic medicine. Usually a patient wouldn’t take the medicine that is not accordance to his/her taste habits. In this case, honey is added to the medicine to make the mixture palatable to the patient. So, anybody willing to administer this medicine must be equipped with sweet voice, patience and correct advice in order to change the course of action of Ramdev jee. Please appoint two suitable people for this cause as it is also critical for the success of the Shuddhi movement you have initiated. It may take some time but it’s worth the investment of time.

    Not only this Ramdeo jee, but also other important babas should be contacted for Agniveer cause, so that corrective actions could be taken before it’s too late. Inspiring other influencial minds should be the part of the strategy among others. Just give it a thought and this crisis will wane after showing us the light. Every crisis comes with tonnes of opportunities.

    Sadrisham chestate swasyaah, Prakriteh jyaanvaanapi
    Prakritim yaanti bhutaani, Nigraham kim karishyati

    Everybody even the wise, behaves as per his/her nature (as a result of previous birth’s actions). Just admonishing won’t bear fruits.

    Charaivati, Charaivati ….

    • says

      We have started a movement to unite different Hindu sects in Bengal. That has been a great success so far and we have formally launched it as a united front. It was possible because we found Bengalis to be open to ideas, humble and forthcoming for such causes. We now have a common stand for Hindu solidarity, prevention of cow-slaughter and illegal infiltration. The Law Minister of Bengal has invited the front for discussions. We hope the same trend is continued elsewhere inspired by Bengal.

      In case of Ramdevji and BST, we feel emotions are running too high clouding reasons. Perhaps they will take some time to be able to appreciate intent and content of Agniveer in objective manner. Till then, let them focus on their agenda and we focus on ours. We do believe that it is never late if what you do is solely guided by inner voice. To us, no movement, organization or person is more impactful than the Supreme Lord who guides all of us from within.

      Ans yes, in every obstacle lies an opportunity. Even this situation is a wonderful opportunity. And we are committed to do our best in most honest egoless manner. In fact, whatever we have done so far is also guided by a clear-cut strategy with a clear-cut goal inspired by Vedas. Hope we have been able to provide hints to the wise.

      • Satyen says

        Agniveer Mahodayah,
        Bhavataam prayasen, ati sukhprad anukarneeyashch samacharo bangdeshat! The sunrise in the east will remove all the darkness of of our nation.
        Kotishah Pranaam

    • O P Shukla says

      First of all I SALUTE YOU and YOUR MISSION.Since I can not type in HINDI, I am writing in ENGLISH. I remember fully well that in one its judgements THE HON’BLE Supreme Court of India has rules that fundamental/basic character of our constitution can not be altered/amended.Obviouly all reservations provided/to be provided other than to SC/ST are potentially unlawful and uncostitutional.Further reservations to SC/ST was provided for 20 years only.Perpetuating it for any reason is again ultra vires.THERE IS A NEED TO RAISE THIS ISSUE IN THE SUPRENE COURT BY MEANS OF A PIL.Will any body come forward.We can not expect any thing good fron any of our political parties who only aim to weaken and devide HINDUS and rule the NATION.ONCE upon a time HINDUs were spread from Kashyap ( CASPIAN ) sea toCambodia,Indonesia. Today we have shanked to a few states of DEVIDED INDIA.Perhaps our future generations will not be fortunate enough to die as HINDUs.GOD SAVE US

  3. Ravinder Nath Watts says

    SHUDDHI MOVEMENT;
    The name given to this movement is from the point of view of Hinduism while it a” call back home”for all those who had been forced to accept Islam or Christianity or were just lured because of their adherence to greed or for the fear of their lives. All of the people cannot become Haqeeqat Rai or Sahebzadeh ‘s of Guru Gobind Singh. But whosoever had been converted should come back and flow with our stream which is not inconducible. The approach should be
    coordinated, cooperative, having patience, tolerance, and above all must be pleasing. “Come home” dear fellow citizens you are Amrit Putra and are not suffering from sin or fear should be the call to our fellow citizens. The Door of Arya Samaj, or Sanatan Dharma or any other Vedic Dharma Sambandhit mat, or matantar, belief or Panth, or Sampradaya. We have no other caste we are one creed our opinions may divulge but we all convulge on one Vedic thought that is one point of spectrum. Pandit Vats California.

    • Amit Kumar says

      Dear Agniveer,
      I amvery happy to see your efforts to save hindu religion. I would like to request you to please start your programs and events in southern India part and tribal part to save hindusim.
      Your are doing great effort.

  4. JITENDRA KRISHNA says

    islaamiyon ko pahle hi hamne paakistaan va baangladesh ke saath afganistaan va kai saare anya sthan
    ….
    apne priya bharat varsh ke tukde karke diye hain unhe ab bhi aarakshan dene kaa arth hoga naya bantvara bharat ke aur tukde honge

  5. Vinod says

    यहाँ पर भी जाती की ही बात हो रही हे | वेदों में जाती व्यवस्था के लिए कोई स्थान नहीं हे मेरे भाईयो | हिंदू को नहीं वेदों को बचाना हे | हिंदू नाम हमारा नहीं हे बल्कि विदेशियों ने इस देश के एक भाग का नामकरण किया था | हिंदू पर नहीं सनातनी पर गर्व करो |

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