लोट् लकार अभ्यास

भू धातु, लोट् लकार
भवतु* भवताम् भवन्तु
भव* भवतम् भवत
भवानि भवाव भवाम
*भवतात् (विकल्प से)

शब्दकोश :
~ ~ ~ ~ ~
‘लोभी’ के पर्यायवाची शब्द –
१) गृध्नुः
२) गर्धनः
३) लुब्धः
४) अभिलाषुकः
५) तृष्णक्

‘अत्यन्त लोभी’ –
१) लोलुपः
२) लोलुभः

उच्छृङ्खल व्यक्ति के दो नाम-
१) अविनीतः
२) समुद्धतः

मतवाले व्यक्ति के चार नाम –
१) मत्तः
२) शौण्डः
३) उत्कटः
४) क्षीबः

सभी शब्द पुँल्लिंग।
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वाक्य अभ्यास :
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वह लोभी वैद्य मेरे पास नहीं होना चाहिए।
= सः गृध्नुः भिषक् मम समीपे मा भवतु।
वे दोनों लोभी पुरुष कार्यालय में न हों।
= तौ गर्धनौ पुरुषौ कार्यालये न भवताम्।
जब मैं यहाँ होऊँ तब वे लोभी यहाँ न हों।
= यदा अहम् अत्र भवानि तदा ते लुब्धाः अत्र न भवन्तु।
तुम लोभी मत बनो।
= त्वम् अभिलाषुकः मा भव।
धन से मतवाले मत होओ।
= धनेन मत्तः मा भव।
तुम दोनों महालोभियों को तो महालोभियों के बीच ही होना चाहिए।
= युवां लोलुपौ तु लोलुभानां मध्ये एव भवतम्।
तुम सब प्रसन्नता से मतवाले मत होओ।
= यूयं प्रसन्नतया उत्कटाः मा भवत।
हे भगवान् ! मैं आपकी कथा का लोभी होऊँ।
= हे भगवन्! अहं भवतः कथायाः लोलुपः भवानि।
मैं आपके सौन्दर्य का लोलुप होऊँ।
= अहं भवतः सौन्दर्यस्य लोलुभः भवानि।
हम दोनों धन के लोभी न हों।
= आवां धनस्य अभिलाषुकौ न भवाव।
धन पाकर हम सब मतवाले न हों।
= धनं लब्ध्वा वयं शौण्डाः न भवाम।
ज्ञान से उच्छृङ्खल न हों।
= ज्ञानेन उद्धताः न भवाम।
वे मतवाले हमारे पास कभी न हों।
= ते क्षीबाः अस्माकं समीपे कदापि न भवन्तु ।
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श्लोक :
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त्यज* दुर्जन-संसर्गं
भज* साधु-समागमम्।
कुरु* पुण्यम् अहोरात्रं
स्मर* नित्यम् अनित्यताम्॥
दुष्ट व्यक्तियों का संसर्ग त्यागो, सज्जनों का संग करो। रात-दिन पुण्यकार्य करो (और) निरन्तर (संसार की) अनित्यता का स्मरण करो।
इस श्लोक के * चिह्न वाले क्रियापद लोट् लकार मध्यमपुरुष एकवचन के हैं।

॥ शिवोऽवतु ॥
#अग्निवीर #Agniveer #অগ্নিবীর #અગ્નિવીર #Agniveersanskrit #Revivingsanskrit
– श्यामकिशोर मिश्र

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