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ये सारे द्युतिमान पिंड जो भ्रमण गगन में करते हैं।
इन से शांति मिले प्रभु हमको विनय यही हम करते हैं॥
अंतरिक्ष दे हमें शांति को पृथिवी पर हम पाएं शांति ।
जल से हमको शांति मिले प्रभु ओषधियाँ दे हमको शांति॥

शांति दान दे वनस्पति सब मानव हित सुखदायक हों ।
देव गणों की कृपा रहे प्रभु शुभ सुख शांति प्रदायक हों ॥
अखिल विश्व में व्याप्त ब्रह्म भी हमको शांति सदा ही दे।
ये सब हों कल्याण प्रदाता इन से सबको शांति मिले ॥

शांति शांति ही शांति मिले प्रभु सारे जीव शांति पाएं ।
भौतिक दुःख से छूट जाएं सब प्राणिमात्र सुख को पाएं ॥
दैविक दुःख का शमन करो प्रभु दैहिक दुःख सब होवें शांति।
सबका मंगल सबका शुभ हो शांति शांति हो शांतिः शांति ॥

रचयिता – श्री चिंता मणि वर्मा (साहित्य रत्न ,B.Sc(Phys.))
संरक्षक
आर्य सत्संग मंडल ,मांडले ,म्यांमा (बर्मा)
email: [email protected]

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Agniveer aims to establish a culture of enlightened living that aims to maximize bliss for maximum. To achieve this, Agniveer believes in certain principles: 1. Entire humanity is one single family irrespective of religion, region, caste, gender or any other artificial discriminant. 2. All our actions must be conducted with utmost responsibility towards the world. 3. Human beings are not chemical reactions that will extinguish one day. More than wealth, they need respect, dignity and justice. 4. One must constantly strive to strengthen the good and decimate the bad. 5. Principles and values far exceed any other wealth in world 6. Love all, hate none
  • आज हर कोई चाहता है विश्व में शांति स्थापित हो। सारा जग अर्थात विश्व एक परिवार हो सारे तत्व हमें शांति प्रदान करे पर फिर भी हमें शांति क्यों नहीं मिलती , कहा है शांति , हमने आकाश ,पहाड़ ,रिश्तोमे सभी जगह शांति ढूंढी पर मिली नहीं। केवल प्रार्थना करते रहे,आज तक शांति के लिए विश्वस्तरीय सम्बेलन हुए फिर भी पूर्ण रूप से हमने शांति क्यो नहीं पायी ,शांति का दाता तो केवल एक परमात्मा है। शान्ति कही भी ढुंढ़नेसे नहीं मिलेगी क्योकि शान्ति तो गले का हार है बस उसे अन्तर्मुख हो महसूस करना है और आत्मा का परमात्मासे योग लगाकर ही शान्ति मिल सकती है , अगर हम शांत है तो दुनिया शांत है सारे तत्व शांत है। तत्वोको भी अशान्त करने वाले (अशुद्ध करने वाले ) हम ही है अगर दुनियामे शांति चाहते हो तो स्व परिवर्तन से विश्व परिवर्तन होना जरुरी है।