शाहजहां से पूर्व ताज का उल्लेख

70. एक केन्द्रीय महल के तौर पर ताज के इतिहास ने कई उतार-चढ़ाव देखें हैं। मुहम्मद गज़नी और उस के बाद आने वाले हर मुस्लिम आक्रान्ता की क्रूर नज़र ताज पर पड़ी, जिन्होंने ताज को लूटा-खसोटा और अपवित्र किया। परन्तु बीच-बीच में ताज वापस हिन्दू हाथों में भी जाता रहा और हर मुस्लिम आक्रमण के बाद हिन्दुओं ने एक शिव मंदिर के रूप में ताज की पवित्रता को वापस स्थापित किया। लेकिन शाहजहां वो आखिरी मुस्लिम लूटेरा था जिसने तेजोमहालय का अपहरण कर सदा के लिए उसकी पवित्रता भंग कर दी।

71. विन्सेंट स्मिथ अपनी पुस्तक ‘अकबर द ग्रेट मुग़ल’ में लिखता है कि ‘बाबर की आतंकी जेहादी जिन्दगी का अन्त आगरा में उद्यान महल में 1630 को हुआ’।यह उद्यान महल कोई और नहीं बल्कि ताजमहल ही है।

72. बाबर की बेटी गुलबदन बेग़म ने ‘हुमायूँ नामा’ नामक इतिहास लिखा है। जिसमें वह ताज का उल्लेख एक रहस्यमयी महल के रूप में करती है।

73. बाबर स्वयं अपने संस्मरणों में ताज के बारे में लिखता है कि इब्राहीम लोदी द्वारा कब्ज़ा किया गया एक ऐसा महल जिसमें एक केन्द्रीय अष्टकोणी कक्ष और चारों कोनों में चार स्तंभ हैं। यह सभी ऐतिहासिक सन्दर्भ ताज को शाहजहां से भी सौ वर्ष पूर्व का घोषित करते हैं।

74. ताज का अहाता कई सौ ग़ज तक चारों तरफ़ फैला हुआ है। नदी के आर-पार तक उसके टूटे-फूटे अवशेष देखे जा सकते हैं। वहां स्नान और नौका बाँधने के घाट इत्यादि बने हुए थे। विक्टोरिया बाग़ के बाहरी हिस्से में उसकी लताओं से ढकीं हुई प्राचीन लम्बी दीवार बलखाती जा रही है, जिसके अंत में लाल पत्थर से अष्टकोणा छत्र बना हुआ है। शाहजहां द्वारामहज एक कब्र के लिए इतने विस्तृत भूभाग वाली भव्य इमारत का निर्माण करने की बात गले नहीं उतरती।

75. ताज खासतौर से यदि मुमताज को दफ़नाने के लिए ही बनाया गया था, तो उसमें अन्य कब्रें नहीं होनी चाहिए थीं। परन्तु ताज महल परिसर में कई कब्रें हैं। विशेषतः पूर्वी और दक्षिणी हिस्से वाली गुम्बददार इमारतों में।

76. दक्षिणी दिशा में ताजगंज दरवाजे के दूसरी ओर की दो गुम्बददार इमारतों में सरहंदी बेगम, फतेहपुरी बेगम और एक नौकरानी सातुन्निसा खानम की कब्रें हैं। बेगमों और बांदी को इस तरह बराबरी का दफ़न स्थान देना तभी समझा जा सकता है जबकि बेगम का दर्जा कम कर दिया गया हो और नौकरानी का बढ़ा दिया गया हो। लेकिन क्योंकि शाहजहां ने ताज का निर्माण नहीं किया था बल्कि जबरन हड़पा था इसलिए अपने बाप-दादाओं अनुसरण करते हुए एक हिन्दू राजमंदिर को लूटकर एक सामान्य मुस्लिम कब्रिस्तान में बदलना ही उसका मकसद था।जिसके लिए जहाँ ख़ाली जगह मिली उसे वहीँ दफना दिया गया। अतः बेगमें जिस खाली स्थान में दफनाई गईं, वैसे ही समान स्थान पर बांदी को भी दफना दिया।

77. मुमताज से शादी करने से पहले और बाद में भी शाहजहां ने कई निकाह किए थे। अतः मुमताज की मृत्यु के बाद उसके लिए इतना अद्भुत मकबरा बनाए जाने का कारण समझ में नहीं आता।

78. मुमताज जन्म से सामान्य लड़की थी, किसी सुल्तान या बादशाह की बेटी नहीं। इसलिए वह इस तरह के भव्य दफ़न की हकदार नहीं थी।

79. मुमताज की मुत्यु बुरहानपुर में हुई थी, जो कि आगरा से 600 मील की दूरी पर स्थित है। जहाँ उसकी कब्र ज्यों की त्यों बरकरार है। इसलिए उसके नाम से जो दो कब्रें ताज में उभारी गई हैं – दोनों नकली हैं, जिनमें शिवलिंग ही दबे हुए हैं।

80. शाहजहां ने मुमताज के जाली दफ़न का दिखावा इसलिए किया ताकि वह अपने खूंखार सिपाहियों को ताज के अन्दर भेजकर वहां की सारी संपत्ति लूटवाकर अपना खज़ाना भर सके। शाहजहां का दरबारी अभिलेख बादशाहनामा भी दबे शब्दों से इसकी पुष्टि करता है। जिसमें लिखा है कि ‘मुमताज़ का शव कब्र से खोदकर बुरहानपुर से आगरा लाया गया और उसे अगले साल दफनाया गया।’ बादशाहनामा जैसे दरबारी दस्तावेज में दफ़न की सही तारीख के स्थान पर इस तरह अस्पष्ट तिथि लिखना ही इस बात का सबूत है कि किसी तथ्य को छुपाने की कोशिश की जा रही थी।

Original English article is available here: TAJ MAHAL IS A SHIVA TEMPLE – 100 EVIDENCES (PART 10)

From: Works of P.N. Oak

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