वास्तव में वेद किसे माना जाए, इस पर कई तरह के मत हैं. यहां हम इस भ्रम को दूर करने का प्रयास करेंगे. वैदिक साहित्य में सम्मिलित होने वाली पुस्तकें:

१. वेद मंत्र संहिताएँ – ऋग्, यजुः, साम, अथर्व.

२. प्रत्येक मंत्र संहिता के ब्राह्मण.

३. आरण्यक.

४. उपनिषद (असल में वेद, ब्राह्मण और आरण्यक का ही भाग).

५. उपवेद (प्रत्येक मंत्र संहिता का एक उपवेद).

वास्तव में केवल मंत्र संहिताएँ ही वेद हैं. अन्य दूसरी पुस्तकें जैसे ब्राह्मण, आरण्यक, उपनिषद, ६ दर्शन, गीता इत्यादि ऋषियों द्वारा लिखी गई हैं. यह सब मनुष्यों की रचनाएँ हैं, परमात्मा की नहीं. अत: जहां तक यह सब वेद के अनुकूल हो, वहीं तक समझना और अपनाना चाहिए.

प्रश्न. कात्यायन ऋषि के अनुसार तो ब्राह्मण भी ईश्वरीय हैं तब आप ब्राह्मणों को वेदों का भाग क्यों नहीं मानते?

उत्तर.  १. ब्राहमण ग्रंथों को इतिहास, पुराण, कल्प, गाथा और नाराशंसी भी कहते हैं. इन में ऋषियों ने वेद मन्त्रों की व्याख्याएँ की हैं. इसलिए ये ऋषियों की रचनाएँ हैं ईश्वर की नहीं.

२.शुक्ल यजुर्वेद के कात्यायन प्रतिज्ञा परिशिष्ट को छोड़कर (कई विद्वान कात्यायन को इस का लेखक नहीं मानते) अन्य कोई भी ग्रन्थ ब्राह्मणों को वेदों का भाग नहीं कहता.

३. इसी तरह, कृष्ण यजुर्वेद के श्रौत सूत्र भी मन्त्र और ब्राहमण को एक बताते हैं. किन्तु कृष्ण यजुर्वेद में ही मन्त्र और ब्राहमण सम्मिलित हैं. अत: यह विचार केवल उसी ग्रन्थ के लिए संगत हो सकता है. जैसे ‘ धातु’ शब्द का अर्थ पाणिनि व्याकरण में – ‘ मूल’ , पदार्थ विज्ञान में ‘धातु’ (metal) और आयुर्वेद में जो शरीर को धारण करे या बनाये रखे – रस, रक्त, मांस, मेद, अस्थि, मज्जा, वीर्य और ओज होता है. ऋग्वेद, शुक्ल यजुर्वेद और सामवेद की किसी शाखा में ब्राह्मणों के वेद होने का प्रमाण नहीं मिलता.

४. वेद ईश्वर का शाश्वत ज्ञान हैं. उन में कोई इतिहास नहीं है. पर ब्राहमण ग्रंथों में ऐतिहासिक व्यक्तियों का वर्णन और इतिहास मिलता है.

५. वैदिक साहित्य के सभी प्रमुख ग्रन्थ ऋग्वेद, यजुर्वेद,सामवेद और अथर्ववेद की मन्त्र संहिताओं को ही वेद मानते हैं.

वेद :

ऋग १०.९०.३, यजु ३१.७, अथर्व १९.६.१३, अथर्व १०.७.२०, यजु ३५.५, अथर्व १.१०.२३, ऋग ४.५८.३,यजु १७.९ १( निरुक्त के अनुसार १३.६ ), अथर्व १५.६.९ ,अथर्व १५.६.८, अथर्व ११.७.२४

उपनिषद् :
बृहदारण्यक उपनिषद २.४.१०, १.२.५, छान्दोग्य उपनिषद् ७.१.२, मुण्डक १.१.५, नृसिंहपूर्वतपाणि, छान्दोग्य ७.७.१, तैत्तरीय १.१, तैत्तरीय २.३

ब्राह्मण:
शतपथ ब्राह्मण ११.५.८, गोपथ पूर्व २.१६, गोपथ १.१.२९

महाभारत:
द्रोणपर्व ५१.२२, शांतिपर्व २३५.१, वनपर्व १८७.१४, २१५.२२, सभापर्व ११.३१

स्मृति:

मनुस्मृति : १.२३

पुराण :

पद्मा ५.२.५०, हरिवंश, विष्णु पुराण १.२२.८२, ५.१.३६, ब्रह्मवैवर्त १४.६४

अन्य:
महाभाष्य पाश पाशणिक,कथक संहिता ४०.७,अथर्ववेद सायन भाष्य १९.९.१२,बृहदारण्यवार्तिकसार (२.४) सायन,सर्वानुक्रमणिभूमिका,रामायण ३.२८

इत्यादि.शंकराचार्य ने भी चारों मन्त्र संहिताओं को ही वेद माना है – “चतुर्विध मंत्रजातं  ” (शंकराचार्य बृहदारण्यक भाष्य २ .४ .१ ० )

६. ब्राह्मण ग्रन्थ स्वयं भी वेद होने की घोषणा नहीं करते .

७. शतपथ ब्राह्मण के अनुसार वेदों में कुल ८.६४ लाख शब्द हैं.यदि ब्राह्मणों को भी शामिल किया जाता, तो यह संख्या कहीं अधिक होती.

८. केवल मन्त्र ही जटा, माला, शिखा, रेखा, ध्वज, दंड, रथ और घन पाठ की विधियों से सुरक्षित किए गए हैं. ब्राह्मण ग्रंथों की सुरक्षा का ऐसा कोई उपाय नहीं है.

९. केवल मन्त्रों के लिए ही स्वर भेद और मात्राओं का उपयोग किया जाता है. ब्राह्मणों के लिए नहीं.

१०. प्रत्येक मन्त्र का अपना विशिष्ट ऋषि, देवता, छंद और स्वर है. ब्राह्मण ग्रंथों में ऐसा नहीं है.

११. यजु: प्रतिशाख्य में कहा गया है कि मन्त्रों से पूर्व ‘ओम’ और ब्राह्मण श्लोकों से पूर्व ‘अथ’ बोला जाना चाहिए. इसी तरह की बात ऐतरेय ब्राह्मण में भी कही गयी है.

१२. ब्राह्मणों में स्वयं उनके लेखकों की जानकारी मिलती है. और मन्त्रों की व्याख्या करते हुए कई स्थानों पर कहा है “नत्र  तिरोहितमिवस्ति” – हमने सरल भागों को छोड़ कर केवल कठिन भागों की ही व्याख्या की है.

प्रश्न. पुराणों को ब्राह्मण कैसे कहा जा सकता है जब कि पुराणों का अर्थ को वेद व्यास के बनाये १८ पुराणों से है?

उत्तर. यह एक बहुत ही गलत धारणा है. पुराण का अर्थ पुरातन या पुराना है और यह नए पुराण तो बहुत आधुनिक समय में लिखे गए हैं.

तैत्तरीय आरण्यक २.९ और आश्वलायन गृह्यसूत्र ३.३.१ में स्पष्ट वर्णित है कि ब्राह्मण ही कल्प, गाथा, पुराण, इतिहास या नाराशंसी कहे जाते हैं. आचार्य शंकर भी बृहदारण्यक उपनिषद २.४.१० के भाष्य में यही कहते हैं.

तैत्तरीय आरण्यक ८.२१ की व्याख्या में सायण का भी यही मत है. काफ़ी प्राचीन माने जाने वाले शतपथ ब्राह्मण(३.४.३.१३) अश्वमेध यज्ञ के ९ वें दिन पुराणों को सुनने का विधान करते हैं. अब यदि पुराणों से मतलब नए ब्रह्मवैवर्त आदि पुराणों से है, तो श्री राम और श्री कृष्ण आदि ने अश्वमेध यज्ञ के ९ वें दिन किस का श्रवण किया था? वेद व्यास के जन्म के बहुत पहले ही ब्राह्मण ग्रंथ मौजूद थे. इन नए पुराणों को झूठे ही वेद व्यास पर थोपा गया है. ब्रह्मवैवर्त पुराण को पढने के बाद तो उसे योग दर्शन पर भाष्य करने वाले ऋषि की रचना मानना संभव ही नहीं है.

प्रश्न. वेदों में इतिहास भी है – जैसे यजुर्वेद ३.६२ में जमदग्नि और कश्यप ऋषियों के नाम मिलते हैं. कई वैदिक मंत्रों में ऐतिहासिक व्यक्तियों का भी उल्लेख है.

उत्तर. इन से भ्रमित होने की आवश्यकता नहीं है. वेदों में आए जमदग्नि और कश्यप शब्द ऐतिहासिक पुरुष नहीं हैं. शतपथ के अनुसार जमदग्नि का अर्थ आंखें तथा कश्यप शब्द का अर्थ प्राण या जीवनीय शक्ति है.और वेदों में यही अर्थ प्रयुक्त हुआ है.

इसी तरह, वेदों में आए हुए सभी नाम गुणवाचक हैं. बाद में मनुष्यों ने इन शब्दों को नाम के रूप में अपना लिया. जैसे, महाभारत में आए हुए लाल और कृष्ण – आडवाणी नहीं हो सकते और शंकराचार्य द्वारा वर्णित ‘माया’  का मतलब आज की मायावती से नहीं है. ऐसा ही वेदों में आये शब्दों के साथ भी है.

प्रश्न. वेदों की शाखाएं क्या हैं? वेदों की ११३१ शाखाएं बतलाई जाती हैं, जो बहुत सी लुप्त हो गई हैं, तब यह कैसे माना जाए कि वेद मूल स्वरुप में ही हैं?

उत्तर. वेदों की शाखाओं का तात्पर्य मूल वेद संहिताओं से नहीं है. वेदों को समझने, उनके अध्ययन आदि तथा वेदों की व्याख्या करने के लिए शाखाएं बनाई गई हैं. समय – समय पर प्रचलित प्रणालियों के अनुसार मन्त्रों के अर्थ सरल करने के लिये शाखाएं मूल मन्त्रों में परिवर्तन करती रहती हैं. किसी यज्ञ विशेष के लिए या अन्य किन्ही कारणों से कई शाखाएं मूल मंत्रों के क्रम को आगे- पीछे भी करती हैं. इसी तरह कुछ शाखाओं में मंत्र तथा ब्राह्मण ग्रंथों का भाग मिला दिया गया है.

मूल चारों वेद संहिताएँ  – अपौरुषेय हैं. वेदों की शाखाएं तथा ब्राह्मण ग्रंथ मनुष्य कृत हैं. उन्हें वहीं तक विश्वासयोग्य माना जा सकता है जहां तक वे वेदों के अनुकूल हैं. मूल मंत्र संहिताओं का परम्परा से जतन किया गया है और विद्वानों ने भी भाष्य उन पर ही किया है.

प्रश्न. अन्य ग्रंथ  – उपनिषद, उपवेद,गीता इत्यादि क्या ईश्वरीय नहीं हैं?

उत्तर. इस का उत्तर बहुत कुछ पहले भी दिया जा चुका है. यह सब हमारे महान पूर्वजों – ऋषियों द्वारा निर्मित महान ग्रंथ हैं पर यह भी ईश्वरीय रचना वेदों की बराबरी नहीं कर सकते.

यदि इन ग्रंथों की रचना ईश्वरीय होती तो यह वेदों की ही तरह अद्वितीय रक्षा पद्धति से युक्त होते. पर वेदों के अलावा अन्य किसी भी ग्रंथ में यह लक्षण नहीं दिखता.

अत: इन ग्रंथों में भी जो बातें वेदों के विपरीत हैं उन्हें मान्य नहीं किया जा सकता क्योंकि ईश्वरीय ज्ञान सर्वोपरि है. यह बात विश्व की सभी पुस्तकों पर लागू होती है. हमारी संस्कृति के सभी ग्रंथ वेदों को ही सत्य का अंतिम प्रमाण मानते हैं.

प्रश्न.  वेदों में तो केवल कर्म कांड और ईश्वर पूजा का ही विधान है. क्या दर्शन तथा अन्य व्यवहारिक ज्ञान के लिए हमें दूसरे ग्रंथों की आवश्यकता नहीं है ?

उत्तर. ये झूठी बातें वेदों को न पढने वाले लोगों ने फ़ैला रखी हैं. हमारी संस्कृति के सभी महान ग्रंथकार अपनी रचना को वेदों पर आधारित ही बताते हैं. वे वेदों को ही सब सत्य विद्या का मूल मानते हैं.

उपनिषद ,गीता जैसे सभी दार्शनिक ग्रंथों का उद्गम भी वेद ही हैं. यह सभी ग्रंथ वेद और सत्य को समझने के लिए ही बनाये गए और इन ग्रंथों में ऐसी कोई बात नहीं है जो वेदों में पहले से ही मौजूद नहीं हो. जैसे कि हम पहले चर्चा कर चुके हैं – वेद परम प्रमाण हैं और अन्य ग्रंथ तो उस तक पहुंचने की सीढियां मात्र हैं – इसलिए हमें यह ध्यान रखना चाहिए कि कहीं कोई सीढ़ी हमें वेदों से दूर तो नहीं ले जा रही.

वेद एकमात्र सर्वत्र व्यापक ईश्वर का ही बखान करते हैं और शाश्वत ज्ञान की निधि होने से उन में कहीं कोई कर्म कांड नहीं है. अपने स्वार्थ को सिद्ध करने के लिए ही पथभ्रष्ट लोगों ने वेदों के विषय में गलत धारणाएं फैलाईं हैं.यह हमारा परम कर्तव्य है कि हम इन सभी पूर्वाग्रहों से ऊपर उठकर – वेद और उसके सत्य उद्देश्य का प्रचार करें.

सत्यमेव जयते!

अनुवादक- आर्यबाला

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74 Comments on "वेद क्या हैं?"

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ganga

Om shanti

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[…] This post is also available in Hindi at http://agniveer.com/what-are-vedas-hi/ […]

rajesh mani tripathi

1-हिन्द शब्द का प्रयोग कब से सुरु हुवा
2-इस्लाम ,बाइबिल तथा हिन्दू धर्म में मुख्यतः बिभेद है

surender

send me four vedas at 439 sector28 gurgaon

om prakash tiwari

@ raj hyd
rshi to pahale se he zyani the . phir nirakaar ne kyu aur kaise sunaya. usme bhi itne abhugh bhasa me. agar ye manav ke klayan ke liye the to inke bhasa saral kyu nahi the.

rajk.hyd
shri om prakash ji , rishi koi redimed nahi bante hai uske liye koshish karni hoti hai ! jin vyaktiyo ne gambhirta se samadhi avstha me rahe unke samajhne yogy star ki bahsha me gyan [ved] mila tha ! baad me un manro ki vykhya ki gayi jo- jo vyakhya… Read more »
akash palash

sir
aap ke anusar eeshwar nirakar hai matlab uske shareer nahi hai tau fir wo ved kaise likh sakte hai please explain me

raj.hyd
ved likhe nahi gye the, unko shruti kaha gaya tha artahat sunkar janana 1 bahut bad me ved shreshth manushyo ne likhe the 1 ! aaj bhi rediyo se samachaar sune hi jate hai mobail se baat bhi suna jata hai ! gyan ki shuruaat sunne se huyi thi n… Read more »
kamal

Sir…mene aap ka post padha bohat a6a laga…par question hai..kaha jata hai ki ved ab nahi bach hai sirf ku6a s
mantra ke bahek. kya ah baat sahi hai? ab vedo me milabat kardiya gya hai .

urmila sharma

क्या वेदों को आज भी माना जाता है? कैसे ?

amit kumar

sir

mai ye jaanna chahata hoon ki asli ved kaha par hai , aur kya un par ab bhi research chalti hai.

aayush

om bur bua sua ha tasy vitur vrdeyam

saman irshad ansari

sir my question is would you like to tak/debut with zakir naik in an open challenge about quran and vedic religion in the light of science?

raj.hyd
jab ham zakir ji se e- mail ke maadhyam se apne parshn rakhte hai to varsho ho jate hai vah uska javab bhi nahi dete hai ?agar aap hamare parshno ka uttar zakir ji ya kisi any muslim vidvan se dilva sake to ham apke abhari rahenge ! dekhe quran… Read more »
Sabka Dost

Bhai ispe to kabhi maine gour hi nahi kia tha :O waise kaafi aayatein padh chuka hun ……. light ki speed tak nikal di gayi hai inke dawara jo ki khoj bin karne pe manusmirit ka mantra nikla

Bhavesh Merja
जीवात्मा की कुल संख्या का ज्ञान मनुष्य को नहीं हो सकता – अल्पज्ञ होने से । केवल सर्वज्ञ ईश्वर ही जानता है । अतः ईश्वर की दृष्टि से जीवात्माओं की संख्या सान्त है, और मनुष्य की दृष्टि से असान्त या अनंत या अज्ञात है । जीवात्मा अनादि-अनुत्पन्न- अविनाशी होने से… Read more »
Ajay

Bhagavat Geeta or Vedo me likha he ki Atma(Spirit) Amar he
na to vo janm leti he or nato vo marati he.
lekin puri duniya me population to badhati jati he to fir
vo Atma (Spirit) kaha se aati he?

harish

aatma sabhi jeevo mai hoti hai…sabhi jeevo ki sankhya insaan count nahi kar sakta aur dusre jeevo se atmaye aati hai….

Ravindra kumar chaudhary

kya achhi achhi batein batai gayi duniya ka sukh bhakti ras me hai

riyasat ahmad khan

bhai ye sawal to ic web site ko padhne ke baad mene pucha tha kyoki issi me likha he ki geeta manav nirmit he mujhe hindu dharm ka ziyada gyan nahi he
ref. 1st pera me hi likha he.
agar eesa nahi to fir sach kya he

Madhukar
Ahmad bhai@ upar article me likha he ki Shrrmad Bhagwad Geeta ka udgam ( origin) Ved hain…..aur mene kaha k Shreemad Bhagwad Geeta me Ved ka saransh he…..kiya yeh dono bato ka meaning ek nahi hui? Although Shrremad bhagwad Geeta me ved k bato ka ullekh he, parantu us me… Read more »
Ankur
@madhukar : kuch samay purva kuch prashn kiye the maine aapse parantu aapne un sabka uttar nahi diya, shri krishn ke iswar hone ke bare mein, kripya unka uttar dena ka kasth karen. jis prakar se aap geta ke vachno ka prayog karke swayam geeta ko shri krishn ke iswarbswaroop… Read more »
Madhukar
Ankur bhai…Plz once again let me knw which question i am supposed to answer u, if i knw it, i will try to answer, otherwise others can help us in getting your answer…..I guess u mean to ask y did God revealed the true knowledge only at the time of… Read more »
Sanatan Dharma
@ Madhukar ____________he who among the mortals, knw me as unborn, beginning less and the Lord of all worlds, is undeceived and liberated frm sins________ But Krishna said he takes birth then how can he be called unborn? If one is born he can not be unborn and unborn can… Read more »
Jay Arya

hello please go through all articles on vedas and hinduism then ask questions

Ankur

@Madhukar: The question raised are here

http://agniveer.com/what-are-vedas-hi/#comment-26525

Sanatan Dharma

@Madhukar
_______________Aur waise bhi Shree Krishan toh Bhagwan ka avtaar hain____________
Bhagwan Ajanma hai ya janm lene wala hai? Janm lene ka qya arth hai?

Madhukar

Sanatan dhatma@ one of the verse frm Shreemad Bhagwad Geeta : 10.3: he who among the mortals, knw me as unborn, beginning less and the Lord of all worlds, is undeceived and liberated frm sins .

Madhukar

Sanatan dhatma@ one of yhe verse frm Shreemad Bhagwad Geeta : 10.3: he who among the mortals, knw me as unborn, beginning less and the Lord of all worlds, is undeceived and liberated frm sins .

Sanatan Dharma

@Madhukar
Shrikrishan se pahle koun Ishawr tha?

मोहित मलिक \'आर्य\'
मोहित मलिक \'आर्य\'

For sanatan dharm -श्री कृष्ण भी सुबह चार बजे उठकर गायत्री मंत्र का जाप किया करते थे ! क्यों
उन्हे तो सभी ईश्वर मानते है फ़िर ईश्वर ने गीता मे क्यों बताया की वो भी जप करते थे.
ईश्वर निराकार है .

Vishal Kumar

Geeta is adulterated book. Needs to be scrutinized intellectually,

Madhukar
sanatan dharma@ bhai aapne jo question poocha he, meri samajh me woh valid nahi he..kyunki bhagwan toh ek he hain, samay se pehle aur samay k baad bhi….woh toh kaal ke pare hain, woh toh ajanma he….samay toh materialistic world ki property he, bhagwan to almighty he…isliye yeh poochna ki… Read more »
Madhukar

Aur haan, Shree Krishna ne yeh bhi ujagar
kiya he ki woh hi parampita he, jo k is
SAMAY manav roop me maanav k samaksh
upasthith he!

Madhukar
Ahmad bhai, Shreemad Bhagwadgita Sakshat bhram swaroop (Shree Krishn) k kanth se utkrisht hui he…..isliye isko song of God bhi bolte hain….isme Ishwar ne sansaar ka sabse anmol gyaan manav ko diya he…..isme ved ka saar he..yeh gyan Ishwar ne manavta ki utpatti pe bhi diya tha, kintu samay k… Read more »
riyasat ahmad khan
vedo k alawa baki granth manav nirmit he ? (intrasting) bhagwat geeta ko to log shree krishn ji ki vani k rop me mante he agar ye manav nirmit he to fir ise bhagwaan ki vani k roop me kiyo mante he? shaleenta se jawab deejiye agar puchne me mujhse… Read more »
Preyasi Arya
ॐ!ॐ!ॐ!ॐ!ॐ! अपनी नापाक कुरान की सुरक्षा ये मतान्ध मुल्ले तो कर नहीँ पाये क्योँकि मुसलमानोँ को तोहफे के रूप मेँ प्राचीन कुरान के सारे धृष्टताओँ को झुठलाते हुए एक नयी कुरान नाजिल हो चुकी है। जिसका नाम है “अल फुरकान”। जिसे दुबई मेँ प्राथमिक शिक्षा वाले बच्चोँ को पढ़ाई भी… Read more »
anti-agni
@priyasi. ved k barein mein kiya sidh karsakte ho ki yeh ishwar krit h? Al furqan likhne se kiya hota h? Aise to koi bhi likhde lekin kiya tumhein maloom h ki Quran nein kiya khas h? Aur al furqan is challenge ko kahan tak poora karta h. eik baar… Read more »
Sanatan Dharma
@anti-agni Please let me know why do you think Quran is given by God? Which is THE knowledge in Quran not in Veda? How worshiping God / Allah not enough without believing & reciting Mohammed name all 5 times in a day? Who will be the consultant/ADVISOR of Allah from… Read more »
Msg
Agniveer, thr r many things in kuran which are not taught in ved. For example, it dont contains many things like hating and killing ppl who dnt beleive in hinduism, it dnt give any materialistic pleasures as reward to spirit (which dnt feel physical pleasure) aftr this life, it dnt… Read more »
Vinay Arya

Dear Sushil

puri jankari ke baad hi apman janak shabd likhe.aap bahut bhole hain.sach ko swikariye.aarya samaj ladki ko jalane waala nahi apitu jalati hui ladkiyo ko bachane waala samaj hai.tumhe kuch bhi pata nahi.thodi mehnat to karo!

sushil
kiyo dharam ka parchar kar rahe ho ? arya smaj vidhya mandir me maine shiksha lee hai. fir bhi yahi kahunga ki qyan prapti ke liye vedo ko padna kaha tak uchit hai ? hamara desh dharam- nirpeksh hai jisme kisi be dharam ke parchar ki manayee hai lakin fir… Read more »
Kamal

Dear Agniveer

Can you please reply to madhukar ? I also have similar questions.

Thanks

Ankur
@Kamal/Madhukar: In that case why would God not reveal the same at the time of first knowledge impart, why would he let people for Milena to be on a shorter bliss path and be ignorant of the ultimate truth, and only reveal it to Arjuna on the field of kurukhshetra… Read more »
Madhukar
Dear Ankur, ur query is valid that y did Lord Krishna gave this holy preaching to Arjun many years after the mankind existed. Please refer shlok 4.1,4.2 to find your answer. Lord Krishna speaks that he gave this knowledge to sun who gave it to first man- Manu. Manu further… Read more »
Ankur

@Madhukar
You should read the Veda.You can order it from the store.

kamal
Dear Ankurji Thanks for the reply. Few more questions need your help 1. Agree with you but now thought comes into my mind that may be knowledge was revealed earlier also but mankind couldn’t preserve it. So lord krishna came to give the knowledge again. 2. In Bhagwat geeta lord… Read more »
Ankur
Dear Kamal, I am just a seeker and always try to do path correction as and when required, and that is what has brought me to where i am in life and i would expect that as long as i exist i am always refining myself and moving further close… Read more »
raj.hyd

yah” sarve bhavantu sukhin ……..:” ka vaky kis granth ka hai uska prman hamko chahiye tha! kya koi vaidik vidvan batla sakenge ?

shyam

sir you are doing very good job………..

Madhukar
Agniveer, I strongly believe in Shreemad bhagwad Geeta. Now my query is: In Shreemad Bhagwad Geeta, the absolute truth is revealed by God. All the things stated are spiritually perfect. There is no point in denying it frm any angle. But it openly declares that Ved are not the ultimate… Read more »
suheb
@Sampath kumar . I also beleave bhagwat geeta my friend. But krishna had said clearly in Geeta that I and you have got many birth i know that but you do not know. Arjun asked to krishna you are my guru tell me what is right for me because you… Read more »
dr vivek arya
वेदों की विषय में प्रचलित कुछ भ्रांतियों का निवारण डॉ विवेक आर्य वेदों की विषय में कुछ ऐसी भ्रांतियां भी प्रचारित करी गयी हैं जो पाठकों को वेदों के विषय में शंका उत्पन्न कर भ्रम की स्थिति उत्पन्न कर देती हैं. कुछ भ्रांतियों के जनक सायण, महीधर आदि के भाष्य… Read more »
पण्डित मृत्युंजय पाण्डेय
पण्डित मृत्युंजय पाण्डेय

बहुत ही सरल भाषा में सुंदरता के साथ वेदों के ज्ञान का वर्णन किया इसके लिये आप धन्यवाद के पात्र हे. आप जैसे विद्वान को कोटि शह प्रणाम

mayank

Can someone help me in fixing the wikipedia page regarding Swami Dayanad’s contribution

http://en.wikipedia.org/wiki/Rigveda, section “Hindu revivalism”

madhu

Isse pehle hamara pratham kartavy banta hai ki hum pe gaye apradh ke liye hum nyay maange…..uske baad hi hum prachar shuru kare….

shubh kaamnaye.

Santosh Kumar Yadav
This is for your kind Information that the Most Powerfull and Real Gayatri Mantra of Holy Vedas is …. Real Gayatri Mantra ” Om Stuta Maya Varda Vedmaataa Prachodayantam Pavmani Dwijanam Awyuh Praanam .Prajam Pasum Kirtim Dravinam Brahmavarchasam, Mahyam Datva Vrajat Brahma Lokam ” (Atharva Ved) The Boon -giving Veda-Mother… Read more »
"सर्वे भवन्तु सुखिनः"
—–ॐॐॐॐॐ—– श्री अग्निवीर जी! प्रणमाम्यहम्‌! आपके समस्त लेखोँ से प्रेरित होकर मेरा वर्तमान अब स्वर्गमय होने की ओर अग्रसर है। आपको सहृदयेन धन्यवाद्‌! महामानव, आप कहते हैँ कि उपनिषद्‌ कृत्रिम रचनायेँ हैँ तो कृपया इस बात का प्रत्युत्तर देने का कष्ट करेँ- “लोग कहते हैँ कि यजुर्वेद के ही 40… Read more »
DHERENDRA PRATAP SINGH DUBEY
DHERENDRA PRATAP SINGH DUBEY
veda me bahut hi high level ka gyan code ke roop me likha gaya hai……kahte hai jab swayam bramha ji..ne manusyo ko veda diya tha to har ek veda ko padne me 1000 saal lag rahe the….manishiyo ke aagrah par bramha ne sanchhipt..short…kar diya…taki har ek veda ke liye 25… Read more »
dr vivek arya
http://agniveerfans.wordpress.com/2011/09/01/dayanand-vedas-6/ क्या वेदों में वर्णित सोमरस के रूप में शराब (alcohol) अथवा अन्य मादक पद्यार्थ के ग्रहण करने का वर्णन हैं? डॉ विवेक आर्य पाश्चात्य विद्वानों ने वेदों में सोम रस की तुलना एक जड़ी बूटी से की हैं जिसको ग्रहण करने से नशा हो जाता हैं. वैदिक ऋषि सोम… Read more »
P.C. Shrimali
very good article. This is real prachar of Vedas / Arya samaj 90% population of the world is ignorant about Vedas, is it not the duty of God to make this knowledge available to the mankind. I think, till the next birth of earth, this knowledge will not be given.… Read more »
kewal pandita
@ P.C. Shrimali says: “I think, till the next birth of earth, this knowledge will not be given. Why this knowledge is given once only…during starting of the life on the earth.” vedas are not gonna walk and talk to you and say hello do you want to grasp me… Read more »
Aatmik bharat

मै वैदिक साहित्य के बारे में जानने के लिए गूगल और विकी का सहारा लिया, जिसमे इस लेख का केवल प्रश्न वाला हिस्सा मिला, उत्तर वाले हिस्से से परिचित कराने के लिए धन्यवाद.

Sachin
Gyan Vedo mai hai ya nahin mujhe nahin pata, kyunki wo smajne aasan nahin, aur shayad isliyen hi wo aise banaye gaye ki koi bhi, i mean koi bhi use samajh na sake, aur for jise jaise explain karna ho wo kar sake….definitely inhe kisi parmatama ne nahin likha balki… Read more »
DHERENDRA PRATAP SINGH DUBEY
DHERENDRA PRATAP SINGH DUBEY
veda me bahut hi high level ka gyan code ke roop me likha gaya hai……kahte hai jab swayam bramha ji..ne manusyo ko veda diya tha to har ek veda ko padne me 1000 saal lag rahe the….manishiyo ke aagrah par bramha ne sanchhipt..short…kar diya…taki har ek veda ke liye 25… Read more »
गोपी कृष्ण गढ़वाल
मैंने ऋग्वेद का प्रथम भाग पढना आरम्भ किया परन्तु समझने में कठिनाई हो रही है, कुछ बातें जैसे ऋषि मुनियों का ये कहना की “सोमरस” इन्द्र देव को पुष्ट करता है जो की किसी महर्षि ने अपने हाथों से मींज कर बनाया है. अब इस “सोमरस” की क्या व्याख्या की… Read more »
DHERENDRA PRATAP SINGH DUBEY
DHERENDRA PRATAP SINGH DUBEY
veda me bahut hi high level ka gyan code ke roop me likha gaya hai……kahte hai jab swayam bramha ji..ne manusyo ko veda diya tha to har ek veda ko padne me 1000 saal lag rahe the….manishiyo ke aagrah par bramha ne sanchhipt..short…kar diya…taki har ek veda ke liye 25… Read more »
DHERENDRA PRATAP SINGH DUBEY
DHERENDRA PRATAP SINGH DUBEY

soma ras koi bhoutik pey nahi…yah bramhandiya urga…energy hai…

pawan

कृपया, पहले निरुक्त तथा निघंटु का अधययन करें.

dr vivek arya
क्या वेदों में वर्णित सोमरस के रूप में शराब (alcohol) अथवा अन्य मादक पद्यार्थ के ग्रहण करने का वर्णन हैं? http://agniveerfans.wordpress.com/2011/09/01/dayanand-vedas-6/ डॉ विवेक आर्य पाश्चात्य विद्वानों ने वेदों में सोम रस की तुलना एक जड़ी बूटी से की हैं जिसको ग्रहण करने से नशा हो जाता हैं. वैदिक ऋषि सोम… Read more »
RAMESH ARYA

kripya krke Rigved ke dashm mandal m aaye shbd jese Jua…shrab se bchne ke nirdesh aadi baton pe prkash daliye…..kya ye buraiyan pahle se vidhman thi ? kripya margdrsn kren…..m ek Vedbhkt hu…..

kewal pandita
problem hai ki ved prose mein nahin poetry mein likhe gae hain, vedon me use hui sanskrit aam bolchaal waali sanskrit nahin hai, iska sirf matlab dhoondana padta hai. for example, gaana le lete hain, “suraj hua madham chaand jalne laga” literally is line ka koi matlab nahin hai, magar… Read more »
saket jha

mitro…,
aap sab hindi me b vedo ko padh sakte h, uske liye aap http://www.vedpuran.net se download kijiye…..

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