मालेगांव बम धमाके आठ वर्ष पश्चात, हिंदू आतंकवाद और भगवा असहिष्णुता की लहर के बाद, पिगरेल्स् ( भारत के छद्म उदारवादी ) के दिमागी तटों पर एक नई लहर का तडाका आकर लगा है। वह यह है कि हिंदू आतंकवाद का कोई अस्तित्व ही नहीं है।

एन आई ए ने मालेगांव पर अपने ताजा अन्वेषण में यह बात स्वीकारी है कि साध्वी प्रज्ञा ठाकुर का इस में कोई हाथ नहीं है। इस केस में उनके खिलाफ लगाया गया मकोका हटा लिया गया है।
अब भारत की पिगरेल् गैंग को कुछ गंभीर सवालों के जवाब देने होंगे –

ऑऊल गांधी को यह बताना होगा कि हिंदू आतंकवाद, इस्लामी आतंकवाद से अधिक खतरनाक कैसे है?

पिग्विजय सिंह को जवाब देना होगा कि 26/11 और मालेगांव, आर एस एस की साजिश कैसे हुई? जैसा कि दावा उसने महेश भट के साथ एक मंच पर किया था? ( महेश भट – उस राहुल भट का पिता जो 26/11 के मास्टरमाइंड डेविड हेडली का दोस्त और उसका मेजबान था )

पी. चिदंबरम और सुशीला कुमारी शिंदे को यह बताना होगा कि क्यों सारी एटी एस और सरकारी मशीनरी का उपयोग हिंदू आतंकवाद जैसी निराधार चीज को जबरदस्ती प्रमाणित करने में किया गया, जबकि असली इस्लामिक आतंकवादी योजनाबद्ध तरीके से मुंबई, पुणे, जयपुर, कश्मीर, हैद्राबाद और संपूर्ण भारत में हमले कर रहे थे?

दरखा बट को अपने टिव् ट में यह और जोडना होगा कि वह सिर्फ भगवा आतंकवाद पर ही क्यों चिल्लाती है? परन्तु इस्लामी आतंकवाद के बारे में कुछ क्यों नहीं कहती?

Barkha

 

 

 

 

समुद्रीका घोस्ट को यह बताना होगा कि उसे सिर्फ इंटरनेट हिंदू जैसे शब्द क्यों सूझते हैं? इंटरनेट मुस्लिम कयों नहीं?

Sagarika Ghose

 

 

 

राजदीप परदेसाई भगवा आतंकियों की माताओं को ही क्यों गाली देता है? परन्तु, जेहादियों की अम्मांओं को कुछ कहने की जुर्रत नहीं कर पाता?

Rajdeep abusing

 

 

 

 

 

 

नीतिश कुमार उर्फ इशरत के अब्बू को यह बताना पडेगा कि क्यों वह लश्कर की आतंकी इशरत जहान को बचाता रहा और प्रज्ञा ठाकुर पर हमले करता रहा? क्या ये इसलिए है कयोंकि इशरत के पास आई एस आई मार्किंग थी और प्रज्ञा ठाकुर के पास नहीं?

मनमोहन सिंह को यह बताना पडेगा कि अंतरराष्ट्रीय परषदों में जहां आपने काल्पनिक हिन्दू आतंक का चित्रण किया और भारत में हुए हमलों में उनका हाथ बताया और इस तरह पाकिस्तान, आई एस आई, लश्कर, आईएम और जैश को क्लीन चिट दे दी, सिर्फ इसलिए कयों कि आप में हिम्मत ही नहीं थी असली अपराधी – जेहादियों को पकडने की। इसलिए आपने हिंदू आतंकवाद पर झूठा कबूलनामा दिया। क्या इससे आतंकवाद के मुद्दे पर पाकिस्तान पर हमारी पकड ढीली नहीं हुई है? इसकी क्षतिपूर्ति कैसे होगी?

मानवाधिकारवादी ( या दानवाधिकारवादी कहूं? ) जो भारत में मुस्लिमों पर अत्याचार और निर्दोष मुस्लिमों को बिना अपराध ही जेल में ठूंसने पर विलाप करते रहते हैं, वे अचानक कोमा में क्यों चले गये? प्रज्ञा ठाकुर पर क्यों कोई कुछ नहीं बोलता?

प्रज्ञा ठाकुर को अपने जीवन के जो अनमोल वर्ष नाहक ही गंवाने पडे और जो अत्याचार उन्हें सहना पडा उसकी भरपाई के लिए वे क्या कर रहे हैं? दानवाधिकारवादी इस पर क्या प्रायश्चित करना चाहेंगे?

क्या वे यह स्वीकार करेंगे कि वे लोग मानवता के सबसे बडे शत्रु हैं और कठोर से कठोर दंड के भागी हैं?

बस, अब बहुत हुआ।
अब समय आ गया है कि हम खलनायकों को सूद समेत बदला चुकाएं

– वाशी शर्मा

वाशी शर्मा एक सम्माननीय वैज्ञानिक हैं। अंतराष्ट्रीय स्तर पर उनके कई शोध पत्र प्रकाशित हो चुके हैं। उन्होंने आईआईटी बाॅम्बे से डाक्टरेट की उपाधी प्राप्त की है। वे नवीन एवं नवीकरणीय उर्जा मंत्रालय में वैज्ञानिक हैं। वे एन आई टी जयपुर में पढाते हैं। कान्सन्ट्रेटर ऑप्टीक्स में उन्हें महारत हासिल है। सौर उर्जा के उत्तम तरीके से उपयोग पर वह काम करते हैं।

For original article in English, visit Hindu Terror, Sadhvi Pragya, and pseudo-liberals? – 9 Questions by IITian

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