(दलित) मुस्लिम/ईसाई आरक्षण क्यों देशद्रोह है?

हम अपने पिछले लेख में सुझाए गए पांच सूत्रीय कार्यक्रम पर श्री रामदेव जी और दूसरे नेताओं की रजामंदी की प्रतीक्षा कर ही रहे थे कि हमें श्री रामदेव जी का लिखा हुआ पत्र मिला. यह पत्र हमारे उन विचारों के जवाब में आया है कि जिसमें हमने (दलित) मुस्लिमों के लिए आरक्षण को देशद्रोह करार दिया था. पर इस पत्र ने अब और ज्यादा संशय पैदा कर दिए हैं. क्योंकि अपने पहले बयान के उलट श्री रामदेव जी ने इस पत्र में धर्म या जाति के आधार पर किसी भी तरह के आरक्षण को ही सिरे से खारिज कर दिया है! इसमें उन्होंने कहा है कि आरक्षण केवल आर्थिक स्थिति के आधार पर होना चाहिए. पाठक उनके इस पत्र को यहाँ पढ़ सकते हैं. अनुच्छेद ३४१ पर श्री रामदेव जी के विचार.

अब इन दो परस्पर विरोधी बयानों के बाद यह जरुरी हो जाता है कि श्री रामदेव जी सामने आकर इस मुद्दे पर अपनी स्थिति दो टूक शब्दों में स्पष्ट करें और जनता में फैल रहे अविश्वास और संशय की स्थिति को ख़त्म करें. यहाँ पर व्यक्तिगत मान अपमान का कोई महत्त्व ही नहीं है क्योंकि जब बात माता और मातृभूमि के विषय में होती है तब कोई बड़ा छोटा नहीं देखा जाता.

अब हम उन कारणों को गिनाएंगे जिनकी वजह से मुस्लिम और ईसाई धर्मों को अनुच्छेद ३४१ में शामिल करना बहुत खतरनाक और देशद्रोह है. अग्निवीर सब देशभक्तों से अपील करता है कि ऐसी मांगों का खुल कर विरोध करें.

इस्लाम और ईसाई धर्मों का अपमान

१. मुसलमान और ईसाई अपने अपने धर्मों का प्रचार करते हुए यह बात स्पष्ट करते हैं कि सब मुसलमान बराबर हैं और सब ईसाई बराबर हैं. मुसलमानों और ईसाइयों में अगड़ा या पिछड़ा का भेद करना गैर इस्लामी और ईसाईयत के विरुद्ध है. समानता की यह बांसुरी बार बार मुस्लिम और ईसाई धर्मगुरुओं द्वारा बजाई जाती है. ऐसे में अनुच्छेद ३४१ में मुसलमानों और ईसाइयों को ‘पिछड़ा’ बताकर आरक्षण देना इन धर्मों के मूल सिद्धांतों पर हमला है और इन्हें ख़त्म करने की साजिश है. कोई इमाम या पादरी यह कभी नहीं मान सकता कि मुसलमान और ईसाई भी ‘अगड़े’ या ‘पिछड़े’ होते हैं. अब सवाल उठता है कि जब खुद मुस्लिम धर्मगुरु मुसलमानों में ‘पिछड़े’ जैसे किसी भी तबके के होने से इनकार करते हैं तो फिर औरों को क्या पड़ी है कि इस अस्तित्त्वहीन पिछड़े तबके के अधिकारों की आवाज बुलंद करें?

इस तरह अनुच्छेद ३४१ में ‘अल्पसंख्यक’ समुदाय के धर्मों को पिछड़ी जाति में शामिल करना इन ‘महान’ अल्पसंख्यक धर्मों का अपमान है और पूरी तरह गैर संवैधानिक है. और भारत जैसे धर्मनिरपेक्ष और सर्व धर्म समभाव रखने वाले देशों में ऐसे किसी भी कदम को मंजूरी नहीं दी जा सकती जो हमारे अल्पसंख्यक समुदाय के लोगों के धार्मिक जज्बातों को ठेस पहुंचाएं.

हाँ एक बात हो सकती है कि पूरे के पूरे मुसलमान और ईसाइयों को ही अनुच्छेद ३४१ के तहत आरक्षण मिल जाए. यह बड़ा ही अच्छा होगा. पर फिर बेचारे हिन्दुओं का क्या कसूर है? उनको भी ३४१ में शामिल कर लिया जाए तो क्या नुकसान है? इस तरह हम सब लोगों को अनुच्छेद ३४१ के लाभ मिलेंगे! वैसे भी इस देश में नेता और अभिनेता को छोड़ कर ऐसा कौन है जो पिछड़ा और कुचला हुआ नहीं है?

पर अगर ऐसा माना जाए कि इस्लाम और ईसाईयत भी अगड़े और पिछड़े के भेदभाव करते हैं तो सवाल उठता है कि भेदभाव और जात पात का नाम आते ही सब स्कूल कालेजों की किताबों में केवल हिन्दू धर्म को ही क्यों कोसा जाता है? बजाये इसके कि जात पात और भेदभाव को हिन्दुओं की ऐतिहासिक परम्पराओं से सिद्ध किया जाए और फिर उन्हें कोसा जाए, ऐसा क्यों न किया जाए कि सब धर्मों में फैले जात पात के भेदभाव के खिलाफ आवाज उठाई जाए? क्यों न इस्लामी जाति प्रथा पर किताबों में अध्याय जोड़े जाएँ और लोगों को बताया जाए कि किस किस महापुरुष ने मुसलमानों में फैली इस प्रथा के खिलाफ आवाज उठाई?

जब किसी मुसलमान या ईसाई से पूछा जाता है कि उसका धर्म हिन्दू धर्म से अच्छा क्यों है तो अपने सीने को गर्व से फुलाता हुआ वह कहता है कि हिन्दू धर्म की तरह उसके धर्म में जाति व्यवस्था का भेदभाव नहीं है. पर दूसरी तरफ ‘पिछड़े’ मुसलमानों के लिए आरक्षण मांगते समय यह गर्व न जाने कहाँ चला जाता है? क्या यह दोहरा चरित्र नहीं है?

कुछ सयाने बड़ी चतुरता से इस्लाम और ईसाई धर्मों के जात पात के भेदभाव का ठीकरा भी हिन्दू धर्म पर ही फोड़ देते हैं और कहते हैं कि इन धर्मों ने यह सब हिन्दू धर्म से ही सीखा है. जब ऐसे चतुर सयानों से पूछा जाता है कि क्या हिन्दू धर्म ईसाई और इस्लाम धर्मों का मूल है, तो ये भाग खड़े होते हैं! क्योंकि मीठा मीठा तो ये गड़प कर जाते हैं और कड़वा कड़वा थू थू करते हैं! दुनिया की हर अच्छाई ये दूसरे धर्मों की किताबों से निकाल लाते हैं और सब बुराइयां हिन्दू धर्म के सिर पर डाल देते हैं. हम यह सिद्ध कर सकते हैं कि इस्लाम और ईसाईयत के अधिकतर सिद्धांत, रीति रिवाज सब हिन्दू धर्म से लिए गए हैं. (उदाहरण के लिए, इस्लामी संगीत, क्राइस्ट की कहानी (कृष्ण का अपभ्रंश), इस्लामी मूर्ति कला, इस्लामी भवन निर्माण, मूर्ति की परिक्रमा (हज)…). भारत में शिक्षा के क्षेत्र में इस घोर हिन्दू विरोधी मानसिकता ने, जो हर बुराई की जड़ को हिन्दू धर्म में ही खोज लेती है पर हर धर्म में इसकी अच्छी शिक्षाओं के प्रभाव पर आँखें मूँद लेती है, भारत को सर्वनाश और धर्मान्धता के कगार पर खड़ा कर दिया है.

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हम श्री रामदेव जी से आग्रह करेंगे कि पाठ्यक्रम की पुस्तकों में मौजूद इस जहर को ख़त्म करने के लिए अपनी उर्जा और धन लगाएं. हम इसमें तन मन धन से उनके साथ खड़े होंगे. पर (दलित) मुसलमानों को आरक्षण देने जैसी किसी भी सस्ती लोकप्रिय मांग में हम उनके विरोध में ही खड़े होंगे क्योंकि यह मांग गैर मुस्लिम, हिन्दू द्रोही और देशद्रोही है.

किसी को दोहरे लाभ और किसी को एक भी नहीं

२. भारत में ‘अल्पसंख्यक’ होना किसी वरदान से कम नहीं. कहीं विशेष ‘अल्पसंख्यक’ अधिकार, तो कहीं ‘अल्पसंख्यकों के लिए छूट’, कहीं ‘अल्पसंख्यक प्राथमिकताएं’ तो कहीं ‘अल्पसंख्यक सहायता निधि’. इसके साथ ही ओबीसी कोटे में विशेष ‘अल्पसंख्यक’ आरक्षण भी भारत के अल्पसंख्यक समुदाय को प्राप्त हैं. ऐसे में अनुच्छेद ३४१ में उन्हें शामिल करना जहां उनके लिए दोहरे लाभ लेकर आता है वहीं दूसरी तरफ एक गरीब बहुसंख्यक, जिसको कोई आरक्षण नहीं मिलता, को दोहरी मार मारता है. ऐसे में यह जरुरी हो जाता है कि आरक्षण संबंधी किसी भी मांग को करने से पहले यह निश्चय हो जाए कि किसी को भी ‘अल्पसंख्यक’ और ‘अनुसूचित जाति/जनजाति’ दोनों के लाभ एक साथ न मिल सकें.

पिछड़ेपन को उसकी जड़ों से काटना होगा

३. अनुच्छेद ३४१ का उद्देश्य कुछ समय के लिए एक काम चलाऊ व्यवस्था करना था ताकि इतने समय में देश को जात पात की बीमारी से मुक्त किया जा सके और सबको बराबरी के अवसर दिए जा सकें. पर इस देश में मनुष्यों को केवल वोटों का गुच्छा समझा गया और इसकी वजह से यह अनुच्छेद आज तक भी लागू है. अमेरिका जैसे देशों में भी यह समस्या गंभीर थी पर उन्होंने इसका समाधान किसी आरक्षण के लोलीपोप देकर नहीं किया बल्कि सामने आकर इसका मुकाबला किया और इसे ख़त्म किया. इसलिए बजाये इसके कि जात पात के मैदान में दिन ब दिन और खिलाड़ी उतारे जाएँ और योग्यता को रद्दी की टोकरी में फेंका जाए, जोर इस बात पर होना चाहिए कि शिक्षा और अवसर हर गरीब के दरवाजे पर कैसे पहुंचे. (दलित) मुसलमान प्रेमियों को यह याद रखना चाहिए कि दलित और गरीब समानार्थक नहीं होते.

देश में आज कोई इसलिए पिछड़ा नहीं है कि आज भी किसी और ने उसको पिछड़ा रहने पर मजबूर कर रखा है. मुद्दा केवल सही संसाधन और अवसर मिलने का है जो दूसरों की योग्यता को टक्कर देने लायक योग्यता पैदा करते हैं. इसलिए मांग नौकरियों में आरक्षण की नहीं बल्कि नौकरियों के योग्य बनने के लिए जरुरी संसाधन और अवसरों के एक समान बंटवारे की होनी चाहिए. और यह मांग किसी जाति या धर्म के लिए नहीं बल्कि हर गरीब के लिए होनी चाहिए.

क्या डॉ ए पी जे अब्दुल कलाम देश के बड़े वैज्ञानिक और फिर राष्ट्रपति नहीं बने? क्या कभी उन्हें जाति आरक्षण या अल्पसंख्यक प्रमाण पत्र की जरुरत पड़ी? हम उनके जैसे एपीजे और क्यों नहीं पैदा कर सकते?

अनैतिक धर्मांतरण का खतरा

४. मुसलमानों और ईसाइयों को अनुच्छेद ३४१ में शामिल करने का मतलब है एक पूरी हिन्दू जनसँख्या से हाथ धो बैठना. और वह दिन दूर नहीं होगा कि जब हिन्दू अपने ही देश में अल्पसंख्यक बन जायेंगे. यह कोई ढकी छुपी बात नहीं है कि इस्लाम और ईसाई धर्मान्तरक/तबलीगी सम्प्रदाय हैं. इनका अंतिम उद्देश्य दुनिया को मुसलमान/ईसाई बनाना है. किसी गैर मुसलमान या गैर ईसाई को मुसलमान या ईसाई बनाना इन धर्मों में स्वर्ग की सीढ़ी माना जाता है. यही कारण है कि देश में हजारों ऐसे समर्पित धर्मान्तारक गुट/तबलीगी जमात सक्रिय हैं जो कुछ भी करके भोले हिन्दुओं को ईसाई और मुसलमान बनाने में जुटे हैं. जिस किसी को यकीन न हो तो जाकर केरल, बंगाल, असम, मिजोरम, नागालैंड, मणिपुर आदि राज्यों के आज की हिन्दू जनसँख्या के आंकड़े और २० साल पहले के आंकड़े पढ़ ले.

यूरोप और अरब देशों से अरबों डॉलर भारत में हर साल हिन्दुओं के धर्मांतरण के लिए भेजे जाते हैं. और ये डॉलर अपना काम कर भी रहे हैं.

हिन्दुओं को ईसाई और मुसलमान बनाने के लिए ऐसे गुट हर जगह सक्रिय हैं. अगर यकीन न आये तो किसी भी पास के चर्च या मस्जिद में जाकर बस इतना कहो कि आप धर्म बदलना चाहते हो. और आप देखोगे कि कुछ ही मिनटों में रीति रिवाज से लेकर कानूनी कागज़ तक के सारे काम पूरे हो चुके होंगे. अब आप किसी मंदिर में जाना और कहना कि आप हिन्दू होना चाहते हो. वहां का पुजारी पहले तो कुछ समझ ही नहीं सकेगा और फिर आपको वकील से मिलने की सलाह देगा. ऐसा इसलिए है कि हिन्दुओं का उद्देश्य कभी भी धर्मांतरण करना नहीं रहा. और कुछ थोडा बहुत जो अभी कुछ समय से आपने सुना होगा वो तबलीगी गुटों के कारनामों की जवाबी कार्रवाई ज्यादा थी. हिन्दू धर्म धार्मिक आजादी में यकीन रखता है और इसलिए बाकी मजहबों की तरह दूसरे धर्मों के लोगों को जहन्नम/नर्क की धमकी नहीं देता.

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आज के दिन भारत धर्मांतरण करवाने वाले तबलीगी गुटों को बहुत आकर्षित करता है. इसका बड़ा कारण हिन्दुओं का खुलापन है जो वो धर्म के मामलों में रखते हैं. हिन्दू जनसँख्या में किसी भी तरह की कमी न केवल हिन्दुओं को ले डूबेगी बल्कि पूरी दुनिया को प्रभावित करेगी क्योंकि भारत की भौगोलिक स्थिति और जनसँख्या को कोई भी देश नजरअंदाज नहीं कर सकता. हिन्दुओं को छोड़कर भारत के पश्चिम में दुनिया पहले ही मुसलमान और ईसाई गुटों में बँट चुकी है. और इस जनसँख्या का ईसाईकरण और इस्लामीकरण तलवार की ताकत पर कैसे हुआ, इसके किस्से यूरोप और एशिया के इतिहास के पन्ने पन्ने पर दर्ज हैं.

ईसाई मिशनरी पहले ही भारत के सब आदिवासी क्षेत्रों और कम विकसित जगहों पर जबरदस्त धर्मांतरण कर चुके हैं और कुछ ही दशकों में इन जगहों की हिन्दू जनसँख्या पर बड़ा झपट्टा मार चुके हैं. पर हिन्दुओं के धर्मांतरण के इतने भीषण प्रयासों के बीच अनुच्छेद ३४१ इन तबलीगी गुटों के काम में सबसे बड़ा रोड़ा है. अनुच्छेद ३४१ क्योंकि गैर हिन्दू पर लागू नहीं होता, इसलिए वे लोग जो हिन्दू से ईसाई बन चुके हैं, वे भी सरकारी कागजों में खुद को हिन्दू ही लिखते हैं. इसलिए सरकारी आंकड़ों में ईसाई जनसँख्या असली से बहुत कम रहती है.

वहीँ दूसरी तरफ मुस्लिम तबलीगी जोशीले ‘गजवा ए हिंद’ (भारत पर कब्जा) नाम की एक भविष्यवाणी में यकीन रखते हैं जिसके अनुसार ईसा मसीह दोबारा जिन्दा होंगे उस दिन जिस दिन भारत इस्लामी देश बन जाएगा. इस भविष्यवाणी को पूरा करने के लिए उन्हें भारत के हिन्दुओं को मुसलमान बनाना जरुरी है. पर धार्मिक कट्टरता के चलते ऐसे लोग कभी किसी नए मुसलमान (जो हिन्दू से मुसलमान बना हो) को सरकारी कागजों में हिन्दू लिखने की इजाजत नहीं दे सकते. क्योंकि ऐसा करना इस्लामी शरियत के विद्वानों के अनुसार हराम है. इस कारण इतनी कोशिशों के बावजूद भी मुसलमानों की जनसंख्या वृद्धि का मुख्य कारण जन्म दर (जो सब धर्मों में सबसे ज्यादा है) ही रहता है. पर अगर अनुच्छेद ३४१ में मुसलमानों को शामिल कर लिया गया तो भोले पिछड़े हिन्दुओं के इस्लामीकरण को कोई नहीं रोक पायेगा.

यहाँ यह याद रहे कि हम हिन्दुओं की किसी १ या २% की नहीं बल्कि २५% जनसँख्या की बात कर रहे हैं जो अनुसूचित जाति/जनजाति के अंतर्गत आती है.

अग्निवीर को भेजे गए अपने पत्र में श्री रामदेव जी ने लिखा है कि वो किसी भी तरह के अनैतिक या बलपूर्वक किये गए धर्मांतरण के खिलाफ हैं और उस पर पाबंदी की मांग करते हैं. पर वह यह स्पष्ट करने में नाकाम रहे कि नैतिक और अनैतिक धर्मांतरण की कसौटी क्या हैं? क्या कोई पादरी या पीर अगर किसी की बीमारी ठीक करता है या चमत्कार कर देता है और फिर उसका धर्म बदलता है तो यह नैतिक है या अनैतिक? अग्निवीर ने अभी हाल ही में १०,००० से ज्यादा लोगों की हिन्दू धर्म में वापसी कराई है और बहुत से दलित मुसलमान और ईसाइयों को वैदिक संस्कार सिखाकर ब्राह्मण बनाया है. पर बहुत से तबलीगी गुट अग्निवीर के खिलाफ लामबंद हो गए हैं क्योंकि उनको उन्हीं की औषधि का सेवन अग्निवीर से पहले और किसी ने इतनी बड़ी मात्रा में नहीं कराया था. खैर, हम श्री रामदेव जी से यही जानना चाहेंगे कि वे अग्निवीर द्वारा कराई गयी शुद्धियों के बारे में क्या सोचते हैं?

बात यह है कि जिस देश में किसी को अपने धर्म का पालन करने की आजादी है तो उसे फैलाने की भी आजादी है. जिस तरह अग्निवीर वेदों को और श्री रामदेव जी हठयोग को फैलाने में स्वतंत्र हैं, उसी तरह कोई पादरी या इमाम भी यहाँ ईसाइयत या इस्लाम फ़ैलाने में स्वतंत्र हैं. और ऐसा कोई तरीका नहीं जिससे हम इनमें से किसी को भी अनैतिक कह सकें भले ही हम उनके विचारों से पूरे ही असहमत क्यों न हों. उदाहरण के लिए सउदी अरब में अग्निवीर, स्वामी विवेकानंद, या कोई पादरी अपने काम के लिए वहां मुश्किल में पड़ सकता है और जैसे अमेरिका में गंभीर रोगों के लिए बिना परीक्षण की दवाई और नुस्खे बेचने पर श्री रामदेव जी को गंभीर कानूनी परिणाम भुगतने पड़ते. असल में ये काम सही हैं या गलत, इन बातों पर बहस हो सकती है और इन सब पर हम सबकी अलग अलग राय हो सकती है. इस तरह नैतिकता या अनैतिकता के पैमाने हर व्यक्ति/स्थान के लिए अलग होते हैं. और फिर जब बात धर्म के फैलाने की हो तो नैतिकता-अनैतिकता की कठिनाई और भी बढ़ जाती है.

उदाहरण के लिए, जरा गौर करें कि अब से डेढ़ हजार साल पहले तक १००% हिन्दू/बौद्ध भारतीय उपमहाद्वीप आज के दिन ३५% मुस्लिम-ईसाई कैसे बन गया? क्या इस्लाम और ईसाईयत को फैलाने में गौरी, गजनी और बाबर आदि ‘संतों’ ने नैतिकता का सहारा लिया था? क्या भारत के पिछले हजार साल का इतिहास अनैतिक और बर्बर धर्मांतरण से नहीं भरा हुआ? अगर हाँ तो आज अचानक नैतिकता को बीच में लाकर क्या इन लोगों को वापस लाने के सारे प्रयास बंद कर दिए जाएँ? अगर नहीं तो क्या किया जाए? क्या नैतिकता-अनैतिकता के नाम पर हर बार ठगे जाने का एकाधिकार इस देश में शांतिप्रिय बहुसंख्यकों को ही है? आखिर धर्मांतरण के क्षेत्र में नैतिकता-अनैतिकता के पैमाने क्या हैं?  

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जो भी हो, ऐसी कोई भी मांग रद्दी की टोकरी में फेंके जाने योग्य है जिससे इस देश के शांतिप्रिय बहुसंख्यकों की जनसँख्या को ज़रा सा भी खतरा हो. और जब तक धर्मांतरण के खतरे इस देश में मंडरा रहे हैं, तब तक ऐसी कोई भी मांग देश विरोधी ही रहेगी.

देश के सब बड़े और प्रभावशाली नेताओं को ध्यान रखना चाहिए कि इतने संवेदनशील मुद्दे पर बिना किसी ठोस तर्क, प्रमाण, और शोध के मुंह नहीं खोलना चाहिए. सस्ती वाहवाही बटोरने के और भी तरीके हो सकते हैं. उसके लिए पूरे देश को मजहबी जूनून की आग में झोंक देना ठीक नहीं. मूर्खता की कोई सीमा नहीं होती. कल कोई भारतीय सेना में भी धार्मिक आरक्षण मांगने लगेगा तब क्या होगा?

संत महात्माओं के लिए देश सर्वोपरि होना चाहिए, और खासकर सन्यासी जिसके आदर्श स्वामी दयानंद जैसे ऊंचे महापुरुष हों, उससे इस तरह की बातों की कभी आशा नहीं की जा सकती. हमें आशा है कि श्री रामदेव जी इस विषय पर शीघ्र ही अपने पक्ष को ठीक करेंगे क्योंकि सन्यासी का धर्म सत्य है, वह असत्य पर टिक कर नहीं बैठ सकता.

बड़ी जनसँख्या को खतरा

५. भारत सरकार के जनसँख्या आंकड़ों के अनुसार ईसाई ‘दलितों’ की संख्या देश में केवल ०.७५% है और मुसलमान ‘दलितों’ की संख्या तो बस ०.१३% है.

इस तरह यदि अनुच्छेद ३४१ में ‘दलित’ मुसलमान और ईसाइयों को शामिल भी किया जाए तो भी इनकी कुल संख्या भारत में १% से भी कम है! ज़रा सोचिये, १% से भी कम संख्या के लिए २५% जनसँख्या को खतरे में डालना कहाँ की बुद्धिमानी है?

मजे की बात यह है कि अल्पसंख्यक प्रेम की होड़ में सबसे आगे रहने वाली कांग्रेस ने भी कभी यह मुद्दा नहीं उठाया था. काले धन पर कांग्रेस को झाड़ने वाले मित्र यह ध्यान रखें कि अस्तित्त्व पर ख़तरा काले धन से ज्यादा बड़ा मुद्दा है. हम चाहते हैं कि श्री रामदेव जी एक बार सामने आकर अपने अनुच्छेद ३४१ संबंधी शब्द वापस ले लें और फिर काले धन की लड़ाई पूरे जोश के साथ चालू रखें.

दलित शब्द अपमानजनक है. गरीब हर जाति और धर्म में है

६. वास्तव में दलित तो एक अपमानजनक शब्द है जो हमारे संविधान में भी कहीं नहीं मिलता. कुछ लोग जो ठोस तथ्य और तर्क से बात न करके अक्सर मुहावरों और हल्की फुल्की बातों से ही काम चलाना जानते हैं वो दलित और गरीब को एक ही समझते हैं. दलित का मतलब गरीब या गरीब का मतलब दलित नहीं होता! अमीर लोग तथाकथित नीची जातियों में भी मिलते हैं और भूख से मरने वालों में तथाकथित ऊंची जाति के लोग भी होते हैं. तो इसलिए अगर आरक्षण देना भी है तो केवल आर्थिक आधार पर होना चाहिए धार्मिक आधार पर नहीं. श्री रामदेव जी ने अपने पत्र में इस बात को स्वीकार किया है. हम आशा करते हैं कि वो अब अनुच्छेद ३४१ संबंधी अपने बयान को वापस ले लेंगे.

मुस्लिम पिछड़ापन अंतर्राष्ट्रीय समस्या है. उसकी जड़ तक जाने की जरुरत है.

७. मुसलमानों की बहुत बड़ी संख्या को ओबीसी के तहत पहले ही आरक्षण मिलता है. पर सच्चर कमेटी ने पाया कि इस आरक्षण के बावजूद भी ‘ओबीसी मुस्लिम’ अपने ‘ओबीसी गैर मुस्लिमों’ से प्रतियोगिता में पिछड़ जाते हैं. और यह केवल भारत का ही हाल नहीं है. पूरी दुनिया में ही मुस्लिम समुदाय शिक्षा और आर्थिक क्षेत्र में सबसे पिछड़ा हुआ है. यह हाल वहां और भी खराब है जहाँ मुस्लिम समुदाय बहुसंख्यक है. मानव अधिकार उल्लंघन की घटनाएं  सबसे ज्यादा इन्हीं देशों में होती हैं. इससे यह पता चलता है कि मुस्लिम पिछड़ेपन की जड़ें नौकरियों में कमी के कारण नहीं बल्कि और गहरी और बुनियादी हैं.

यह सच है कि सब मुसलमान आतंकवादी नहीं होते. यह भी सच है कि मुसलमानों में ऐसे देशभक्त भी पैदा हुए हैं जिन पर हम सब को गर्व है जैसे अशफाकुल्ला खान, हाकिम सूरी, अब्दुल हमीद, ए पी जे आदि. पर यह भी एक कड़वी सच्चाई है कि दुनिया के ९९% खूंखार आतंकवादी खुद को इस्लाम का मुजाहिद/लड़ाका/गाजी कहते हैं.

अब सच्चे (दलित) मुसलमान हितैषियों को चाहिए कि समस्याओं के इन मूल बिन्दुओं का समाधान करें बजाये इसके कि सस्ती और हल्की किस्म की बातें करके अपना वोट बैंक बढाने की कोशिश करें. क्योंकि इस तरह की बातें केवल उन लोगों के ही पक्ष में जाती हैं जिन्होंने इस्लाम का अपहरण कर लिया है और जो सीधे सादे लोगों को इन गैर जरुरी मांगों के लिए उकसाते हैं और समाज में नफरत फैलाते हैं.

इससे अगले लेख में हम देखेंगे कि सामाजिक बराबरी लाने के लिए क्या क्या किया जा सकता है.

यह लेख इस श्रृंखला में दूसरा है. पहले लेख को पढने के लिए यहाँ जाइए. For English, visit here.

 

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82 Comments on "दलित मुस्लिमों को आरक्षण??"

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riyasat ahmad khan
riyasat ahmad khan
3 years 8 months ago
bhai kuran shareef me saf likha he kisi bhi musalman ko dusre musalman se jati rang etc k aadhar par badaii hasil nahi per agar virodha bhaas he to ye insano ki galti he aap islam ko isme dosh nahi de sakte nikah k liye muslim ko azadi he ki… Read more »
raj.hyd
raj.hyd
3 years 8 months ago
jo jatiya pichdgayi vah apne karmo se pichdi fir vah apne karmo se age bhi badh jayengi fir mdad kisiliye ? agar muslim sab barabar hote to batlaiye kitne sunni m,uslim shiya masjid me jakar namaz padhte hai kitne sunni muslimapni kanyao ka nikah shiya muslim se karte hai aur… Read more »
riyasat ahmad khan
riyasat ahmad khan
3 years 8 months ago
musalmano me islami tor par sabhi barabar he par hum me bhi kai alag alag upjaniya hoti he kuran shreef me is kazikr he “koi bhi musalman kisi dusre musalman se jat rang jagah etc. k adhar par bada ya chota nahi he par ye fark banaya gaya he taki… Read more »
Rohit Sarsar
Rohit Sarsar
4 years 2 months ago
अग्निवीर के इस मंच पर उपस्थित सभी विद्वानों से हमारा अनुरोध है कि हमारे द्वारा उपर्युक्त वर्णित सभी प्रकार के तथ्यों व तर्कों के समर्थन/विरोध में अपने-अपने विचार व दृष्टिकोण यहाँ प्रस्तुत करे, ताकि भविष्य में वेदों व धर्म से परिपूर्ण समाज की स्थापना की पृष्ठभूमि तैयार की जा सके… Read more »
Rohit Sarsar
Rohit Sarsar
4 years 2 months ago
उपर्युक्त घटना को यदि हम सत्य माने, तो हमें यह भी मानना होगा कि 1000 वर्षों से लेकर अब तक भारत में हिंदुओं व हिंदू धर्म के साथ जो-जो अमानवीय घटनाएँ हुई, उन सब का कारण वीरभद्र को शिव जी द्वारा दिया गया वरदान था। न वीरभद्र को शिव जी… Read more »
Rohit Sarsar
Rohit Sarsar
4 years 2 months ago

फिर उदयपुर के शिशोदिया वंश वाले राजा होंगे । वह ३५ वर्ष तक राज करेंगे, फिर अजमेर का पीर उठेगा तत्पश्चात् तुवर और तुवर के पीछे कठोर वंश का राजा होकर वह धर्मनीति की स्थापना करेगा ।”

Rohit Sarsar
Rohit Sarsar
4 years 2 months ago
इसका वर्णन कवि चंद्र ने निम्न प्रकार से किया है — “इस समय जो यह शिला फट गई थी, य़ह अस्सी हाथ लम्बी, पच्चीस हाथ चौड़ी और दस हाथ मोटी थी । इस शिला के नीचे एक गुफा थी । उस गुफा से रूद्राक्ष की माला धारण किये, हाथ में… Read more »
Rohit Sarsar
Rohit Sarsar
4 years 2 months ago
जब मोहम्मद गौरी दूसरी बार फौज लेकर आया तो पृथ्वीराज ने चित्तोड़ के राजा समरसिंह से सहायता माँगी । समरसिंह पृथ्वीराज का मित्र था । समरसिंह ने कहलवा भेजा कि वह दिल्ली के लिये रवाना हो रहे हैं । जब समरसिंह दिल्ली पहुँचे तब महाराज पृथ्वीराज अपने महलों से बाहर… Read more »
Rohit Sarsar
Rohit Sarsar
4 years 2 months ago
इस प्रकार, जब हम भारत के प्राचीन इतिहास पर एक विहंगम दृष्टि डालते हैं तब पाते है कि यह पराजयों, घुटने टेकने, निराशा और विवशता की एक लम्बी मगर दुःखदायी दास्तान है, जिसके लिए काफी हद तक खुद भारतीय ही दोषी थे। दर असल असली दोष था उनका धर्म, जिसने… Read more »
Rohit Sarsar
Rohit Sarsar
4 years 2 months ago
इस्लाम धर्म ने अपने अनुयायियों को प्रेरित किया, उत्साहित किया और उनके हौसले बुलंद रखे। जब हम मुस्लिम इतिहास पर दृष्टिपात करते हैं तो पाते हैं कि हजरत मुहम्मद की मृत्यु के केवल 10 साल बाद के समय में कबायली मुसलमानों ने अरब में अपना साम्राज्य स्थापित कर लिया था… Read more »
Rohit Sarsar
Rohit Sarsar
4 years 2 months ago
जैसे उदाहरण ऊपर दिए गए हैं, वैसे शायद इतिहास के पृष्ठों से और भी इकट्ठे किए जा सकें, लेकिन सारे इतिहास में शायद ऐसा उदाहरण एक भी न मिले, जिसमें किसी युद्ध में बंदी बने राजा ने मुस्लिम विजेताओं की कैद से छूटने के बाद फिर से शक्ति-संग्रह कर के… Read more »
Rohit Sarsar
Rohit Sarsar
4 years 2 months ago
इन उदाहरणों से स्पष्ट है कि हिंदू-सैनिक मुसलमानों का पलड़ा जरा सा भी भारी होता देख कर सिर पर पैर रख कर भाग जाते थे या मुकाबला करने की अपेक्षा वे अपने अंधेरे भविष्य को अपनी ओर सरकता महसूस कर के निराशा से भर कर आत्मघात पर उतारू हो जाते… Read more »
Rohit Sarsar
Rohit Sarsar
4 years 2 months ago
300 साल बाद जब मुगल सेना को लेकर बाबर ने उत्तर भारत पर हमला किया, तब भी हिंदू सेना मे उसी तरह का आचरण किया, जैसा उसके पूर्ववर्तीं कर चुके थे। मार्च 1527 ई० में मेवाड़ के राणा सांगा की पराजय के बाद केवल एक राजपूत शत्ति बची थी —… Read more »
Rohit Sarsar
Rohit Sarsar
4 years 2 months ago
इससे 28 वर्ष बाद के एक अन्य युद्ध को ले। 1018 ई० में महमूद गजनवी ने मथुरा के राजा कुलचन्द पर हमला किया। कुलचन्द बहुत शक्तिशाली राजा था, जिसने इस हमले से पहले के वर्षों में अनेक हिंदू राजाओं को पराजित किया था। उसकी राजधानी बहुत सशक्त, धनधान्यपूर्ण एवं अनेक… Read more »
Rohit Sarsar
Rohit Sarsar
4 years 2 months ago
991 ई० में सुबुक्तगीन ने हिंदू राजा जयपाल पर हमला किया, जिसका पंजाब के एक बड़े भाग के अलावा अफगानिस्तान के कुछ भाग पर भी राज था। लंघम नामक स्थान पर दोनों सेनाओं में टक्कर हुई। शुरू में ही सुबुक्तगीन का पलड़ा भारी हो गया। इस पर हिंदू सैनिक मैदान… Read more »
Rohit Sarsar
Rohit Sarsar
4 years 2 months ago
मुस्लिम सैनिक जान हथेली पर रख कर इसलिए लड़ता था कि इस्लाम के लिए शहीद होने पर उसे उन्नति मिलेगी, वह पुरस्कृत होगा। हिंदू सैनिक अपने को इसलिए मरवा-कटवा लेता था कि कहीं वह बंदी न बन जाए और अपने हिंदू धर्म में अछूत का सा निंदनीय व नारकीय जीवन… Read more »
Rohit Sarsar
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4 years 2 months ago
उपर्युक्त धर्म सम्बन्धी नियमों को पढ़ने के उपरान्त आइये अब हमारे हिंदू इतिहास पर नजर डाले —– 1527 ईसवी में जब राणा सांगा की शक्ति के विषय में तरह-तरह की कहानियाँ और मुसलमानों की पराजय के विषय में मुहम्मद शरीफ नामक ज्योतिषी की भविष्यवाणी सुन कर बाबर की सेना का… Read more »
Rohit Sarsar
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4 years 2 months ago
राज महोदय धर्म परिवर्तन के उपरांत हिंदू-मुस्लिम विवाह का उदाहरण जो आपने प्रस्तुत किया, यह कोई नयी घटना नहीं है, ऐसे बहुत से उदाहरण दिये जा सकते हैं, जिसमें मुस्लिम सम्प्रदाय के अनुयायियों ने हिंदू लड़कियों से विवाह किया व बाद में तलाक दिया है, इस के विस्तृत अध्ययन हेतु… Read more »
Rohit Sarsar
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4 years 2 months ago
ध्यान देने योग्य एक और बात यह भी है कि इन धर्म ग्रंथों में ‘विधर्मी सम्पर्क से दूषित’ हिंदुओं के लिए तो निर्धारित समय सीमा में शुद्धिकरण की व्यवस्था है, परंतु दूषित हिंदुओं की संततियों हेतु किसी प्रकार के शुद्धिकरण का उल्लेख नहीं मिलता है व समय-सीमा की समाप्ति पर… Read more »
Rohit Sarsar
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4 years 2 months ago
उपर्युक्त धर्म-सम्बन्धी नियमों को अध्ययन करने के उपरान्त जो तथ्य हमारे समक्ष प्रस्तुत होता है, वह यह है कि हिंदू धर्म में शुद्धता को बहुत अधिक महत्व दिया गया है। बात चाहे नाना प्रकार के व्रतों द्वारा ‘विधर्मी सम्पर्क से दूषित’ हिंदुओं के शुद्धिकरण की हो (जिसमें भी शुद्धिकरणोपरांत सामाजिक… Read more »
Rohit Sarsar
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4 years 2 months ago
यहाँ यह बताने की जरूरत नहीं है कि हर हिंदू को यह पूरी तरह स्पष्ट था कि आक्रमणकारी मुसलमान उन्हें पकड़े जाने पर बुरी तरह जलील करेंगे, उन्हें दास बनाएंगे या आगे बेच देंगे, उनसे अपनी जूठन उठवाएंगे और उसे खिलवाएंगे भी। इस बात का तो कोई पागलपन की सीमा… Read more »
Rohit Sarsar
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4 years 2 months ago

प्रायश्चित-विवेक (लेखक का समय 1375/1440 ई०) में कहा गया है :

“चार वर्ष बीत जाने पर मृत्यु ही पवित्र कर सकती है। (पृ० 456)

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4 years 2 months ago
अर्थात् जब लोग म्लेच्छों, चाण्डालों एवं दस्युओं (डाकुओं) द्वारा बलात् दास बना लिए जायें और उनसे गन्दे काम कराये जायें – यथा गो आदि पशुओं की हत्या, म्लेच्छों द्वारा छोड़ी गई जूठन को साफ करना, उनका जूठा खाना, गधे, ऊंट एवं गावों में मिलने वाले सुअर का माँस खाना, म्लेच्छों… Read more »
Rohit Sarsar
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4 years 2 months ago
चाण्डालानां सहस्रैस्तु सूरिभिस्तत्त्वदर्शिभिः, एको हि यवनः प्रोक्तो न नीचो यवनात्परः। (पं० शिवदत्त सत्ती शर्मा रचित “शुद्धि विवेचन” 1914 ई० के पृ० 10 पर उद्धृत) अर्थात् तत्वों को जानने वाले विद्वानों ने कहा है कि यवन 1000 चाण्डालों के समान होता है। यवन से नीच और कोई हो ही नहीं सकता।… Read more »
Rohit Sarsar
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4 years 2 months ago
शुद्धि भी जाति के अनुसार ——- म्लेच्छैर्हृतानां चौरेवां कान्तारेषु प्रवासिनाम्, भुक्तवा भक्ष्यमभक्षयं वा क्षुधार्तेन भयेन वा। 45 पुनः प्राप्य स्वकं देशं चातुर्वर्णस्य निष्कृतिः, कृच्छ्रमेव चरेद् विप्रः तदर्धं क्षत्रियः चरेत् पादोनं च चरेद् वैश्यः शूद्रः पादेन शुध्यति। 46 (देवल स्मृति) अर्थात् जब म्लेच्छों या आक्रमणकारियों, चोरों या जंगलियों द्वारा अपहृत व्यक्ति… Read more »
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Rohit Sarsar
4 years 2 months ago
यदि बिना विवश किए अथवा सहमति से व्यक्ति म्लेच्छों के साथ रहता हुआ भी वर्जित आचार और खान-पान के मामले में उन से अलग रहा हो तो वह कृच्छ्र व्रत करे। (विधान : प्रथम तीन दिनों में दिन में एक बार भोजन करना, अगले तीन दिनों में केवल रात्री में… Read more »
Rohit Sarsar
Rohit Sarsar
4 years 2 months ago
नीचे इस विषय में धर्मशास्त्रों के कुछ कथन प्रस्तुत है —— देवल स्मृति (रचनाकाल 600 ई० से 900 ई० में कहीं) का कहना है : गृहीतो यो बलान् म्लेछैः पंच षट् सप्त वा समाः, दशादि विंशतिं यावतस्य शुद्धिर्विधियते। (53) प्रजापत्यद्वयं तस्य शुद्धिरेषा विधीयते, अतः परं नास्ति शुद्धिः कृच्छ्रमेव सहोषिते। (54)… Read more »
Rohit Sarsar
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4 years 2 months ago
अलबेरूनी ने ये बाते न तो कल्पना के सहारे लिखी है और न किसी दुराग्रहवश। हिंदी के प्रतिष्ठित लेखक और भूतपूर्व क्रांतिकारी यशपाल ने भी अपने उपन्यास “झूठा सच” में यही दर्शाया है। उसे पढ़ने पर पता चलता है कि 1947 के काले और साम्प्रदायिकता के घातक विष से भरे… Read more »
Rohit Sarsar
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4 years 2 months ago
कठोर प्रायश्चित्त ——- अलबेरूनी अपने यात्रा विवरणों में अन्यत्र लिखता है, “मैंने कई बार सुना है कि जब मुस्लिम देशों से हिंदू दास भाग कर अपने देश और धर्म में वापस जाते हैं, तब हिंदू उन्हें प्रायश्चित्त के रूप में उपवास करने का आदेश करते हैं, फिर वे उन्हें गाय… Read more »
Rohit Sarsar
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4 years 2 months ago
अलबेरूनी ने हिंदू धर्म के इस छुईमुई पर टिप्पणी करते हुए 11 वीं शताब्दी में लिखा था — “जो वस्तु किसी विदेशी के जल या अग्नि को छू जाए, उसे भी वे (हिंदू) भ्रष्ट समझते हैं…… इस के अतिरिक्त उन्हें कभी इस बात की इच्छा ही नहीं होती कि जो… Read more »
Rohit Sarsar
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4 years 2 months ago
बात कुछ अटपटी सी लग सकती है, लेकिन है बिल्कुल सच्ची कि हिंदू सैनिक हिंदू धर्म के प्रति अटूट विश्वास के कारण टूटा। दुनिया में सब जगह जब युद्धबंदी शत्रु के यहां से वापस आता है तो उस देश के लोग, उसके वंश और कबीले के लोग, उसके मित्र और… Read more »
Rohit Sarsar
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4 years 2 months ago
असल में हिंदू सैनिक मुस्लिम आक्रमणकारियों के विरुद्ध कभी जी जान से लड़ा ही नहीं, पूरे मन से कभी डटा ही नहीं। वह सदा चिंतित मन से और अंधे भविष्य की मनहूस छाया से ग्रस्त हो कर यंत्रचालित सा ही लड़ा। इसका कारण क्या था ? मुस्लिम इतिहासकारों ने इस… Read more »
Rohit Sarsar
Rohit Sarsar
4 years 2 months ago
“मुसलमान सैनिक लड़ता था तो उत्साह से और मरता था तो आशा और संतोष के साथ। लेकिन हिंदू सैनिक लड़ता था चिंताग्रस्त होकर और मरता था मजबूर होकर, अछूत का सा निंदित जीवन जीने की यातना से बचने के प्रयास में।” ऐसे में हिंदू लोग मुसलमानों के मुकाबले में टिक… Read more »
Rohit Sarsar
Rohit Sarsar
4 years 2 months ago
राज महोदय, देर से कमेंट करने हेतु क्षमा, आपका यह विचार कि मुस्लिम व ईसाई को हिंदू धर्म में सम्मलित करने वाले धर्म परिवर्तन के मार्ग को प्रशस्त करने वाली उस पतली गली को क्यों बंद किया जाए, के संदर्भ में हमारे विचार इस प्रकार है —— मुसलमान व ईसाई… Read more »
raj.hyd
raj.hyd
4 years 2 months ago
paramadarniy sri rohit ji, ham apke lagbhag sabhi vicharo se sahamat hai , durbhagyvash jinko age badhkar samaj ka uddhar karna tha vah apas me ladne me agrsar hai ! fir samaj ka kya hoga sarkari partiya janta ke vot ki lalchi hai vah apna samikaran banane me talleen hai… Read more »
Rohit Sarsar
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4 years 2 months ago
इसलिए मेरा सभी हिंदू भाईयों और बहनों से निवेदन है कि जब तक सरकार जनसंख्याँ पर रोक लगाने की दृष्टि से कानून पास नहीं करती, तब तक आप लोग परिवार नियोजन के फेर में न पड़े और जितने अधिक बच्चे पैदा कर सकते हैं, करिये। खिलाने वाला, रोटी और रोजी… Read more »
Rohit Sarsar
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4 years 2 months ago
अब यदि बात हिंदुओं की संख्या बढ़ाने की ही है तो उस हेतु परिवार नियोजन का ही कुछ समय के लिए त्याग कर दिया जाना उचित है। परिवार नियोजन — यह सरकार का और भारत के मुसलमानों का हिंदुओं के विरुद्ध जबरदस्त षड़यंत्र है, परिवार नियोजन से मतलब है –… Read more »
Rohit Sarsar
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4 years 2 months ago
जब उस व्यक्ति के सगे-सम्बंधी ही मात्र संस्थाओं द्वारा शुद्घिकृत हुए लोग रह जाएंगे तो मूल हिंदू जाति से उन लोगों का मेल जोल व रिश्ता-नाता कहाँ बढ़ा ? ऐसे व्यक्ति क्या मात्र शुद्धिकरण करवाने वाली संस्थाओं पर ही निर्भर नहीं रह जाएंगे ? परंतु ये सब तो तब होगा… Read more »
Rohit Sarsar
Rohit Sarsar
4 years 2 months ago
चौथी बात, चलिए श्रीमान् आपके द्वारा बताए गए उस विकल्प को भी मान लेते हैं कि हिंदू धर्म में वापस आने पर उन लोगों का विवाह परस्पर रजामंदी से करवा दिया जाये, परंतु उसके पश्चात् क्या ? परस्पर विवाह करवा-करवा कर हम शुद्धिकरण द्वारा आए हुए हिंदुओं का एक अलग… Read more »
Rohit Sarsar
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4 years 2 months ago
ूसरी बात, चलो मान लिया कि वर्तमान के मुस्लिमों व ईसाइयों ने अपने हिंदू पुरखों पर तरस खाकर अथवा अपना जमीर जाग जाने पर हिंदुत्व स्वीकार कर लिया और पुनः अपने बरसों पुराने भाईयों के बीच हिंदू समाज में चले आए, परंतु यहाँ वापसी करने पर हम उन्हें क्या दे… Read more »
Rohit Sarsar
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4 years 2 months ago
राज महोदय, सर्वप्रथम तो कमेंट करने हेतु धन्यवाद, आपके द्वारा दिया जाने वाला तर्क की उन 500 लोगों का आपस में ही विवाह करवा दिया जाना बिल्कुल हमारी आशानुरूप ही है, बल्कि हमने तो वह जगह ही इसलिए बनाई है कि जवाब देने के लिए एक जगह की छूट तो… Read more »
Rohit Sarsar
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4 years 2 months ago
सारा संसार हिंदू धर्म को गले लगा लेगा, इसका आलिंगन करेगा, बड़े प्रेम से और श्रद्धा भाव के साथ, किंतु अपने समाज में जो अशुद्धियाँ है, उनका पहले शुद्धिकरण कर लो। दूसरों का शुद्धिकरण करने की बात भूल जाओ। यह धोबी है, यह भंगी है, यह चमार है, यह तेली… Read more »
raj.hyd
raj.hyd
4 years 2 months ago
manniy sri rahul ji “rasta band hargij mat kijiye ” balki apna” homvark” karte huye isko karte chaliye apni kamiyan bhi dur kijiye ,apne adivasi bandhu ko apna banaiye unki samasya dur kijiye ” apna apna kahane vale apna pan hai apnane me ,apne pan se apnate yadi apne hi… Read more »
Rohit Sarsar
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4 years 2 months ago
हमारी संस्कृति, हमारा धर्म, हमारा चिंतन, हमारा विचार, हमारे वेद, हमारे उपनिषद्, हमारे शास्त्र, हमारी गीता और रामायण, हमारे पुराणों की पोथियाँ और हमारे संतों की जीवनियाँ इतने गहन व परिपूर्ण है कि इनमें से किसी एक का भी मुकाबला करने के लिए और इनमें से किसी एक को पूरा… Read more »
Rohit Sarsar
Rohit Sarsar
4 years 2 months ago
हमारा धर्म पूर्ण है। हमारा धर्म केवल कब्रिस्तान और शमशान तक सीमित नहीं, बल्कि मरने के पश्चात् आत्मा का पुनर्जन्म होता है। आत्मा नया जन्म कहाँ लेगी, उसे कैसा शरीर मिलेगा, उसे माँ बाप कैसे मिलेंगे, उसको बुद्धि कैसी मिलेगी, उसको परिस्थितियाँ कैसी प्राप्त होगी, उसका विकास कितना होगा, उसको… Read more »
Rohit Sarsar
Rohit Sarsar
4 years 2 months ago
सन् 1947 में हमें अपनी आजादी मिली और आज 64 वर्ष गुजर चुके हैं। इसके बावजूद इस कांग्रेस पार्टी की सरकार को अक्ल नहीं आई ताकि ये हिंदुओं का अन्य धर्मों में धर्मान्तरण बन्द कर दे, पाबन्दी लगा दे। आज इस बात की बड़ी आवश्यकता है कि धर्म परिवर्तन करवाने… Read more »
Rohit Sarsar
Rohit Sarsar
4 years 2 months ago
आज के हमारे आनन्द, महानन्द, चिन्मयानन्द और पाखण्डा नन्द इनको खुजली मची है। समाज से पैसे लेकर बड़े-बड़े आश्रम बनाते हैं और फिर वहाँ महन्त बनकर अपनी गद्दी जमाते हैं और फिर इन आश्रमों में व्यभिचार का व्यवसाय चालू होता है। वहाँ राजनीति खेली जाती है और न जाने क्या-क्या… Read more »
Rohit Sarsar
Rohit Sarsar
4 years 2 months ago
इस प्रकार से ये शुद्धिकरण में संलग्न संस्थाएँ अपना समय, अपनी शक्ति और समाज का पैसा नष्ट कर रहे हैं। आज हमें शुद्धिकरण के चक्कर में न पड़कर हमारे समाज के लाखों लोग जो अपना धर्म परिवर्तन कर रहे हैं, उनको धर्म परिवर्तन से रोकने की आवश्यकता है। मेरा और… Read more »
Rohit Sarsar
Rohit Sarsar
4 years 2 months ago
को जो किसी जमाने में हिंदू थे, उनका धर्म परिवर्तन करके हिंदू धर्म में लाना। यह बन्दरों की तरह से नकल करने का काम कुछ हिंदू संस्थाओं ने आरम्भ किया है। यह बहुत गलत है। हमारे शास्त्र कहते हैं, “मैं स्वयं ही अशुद्ध हूँ, मुझमें अशुद्धियों का सागर समाया हुआ… Read more »
raj.hyd
raj.hyd
4 years 2 months ago
manniy sri rohit ji , apki bat saty hai sabse pahale apne bhartiy samaj ka shuddhi karan hona chahiye apni kuritiya bhi dur karni chahaiye fir bhi muslim v isai ka shuddhikaran bhi hote rahana chahiye varna yah parampara bhi band ho jayegi! swami shrddha nand ji ne usko kafi… Read more »
Rohit Sarsar
Rohit Sarsar
4 years 2 months ago
“अग्निवीर ने अभी हाल ही में १०,००० से ज्यादा लोगों की हिन्दू धर्म में वापसी कराई है और बहुत से दलित मुसलमान और ईसाइयों को वैदिक संस्कार सिखाकर ब्राह्मण बनाया है.” धर्म परिवर्तन —- भारत में विदेशी धर्म के ठेकेदारों ने लूट मचा रखी है, पहले तो यहाँ मुसलमान लोग… Read more »
Ravinder Nath Watts
Ravinder Nath Watts
4 years 2 months ago
If somebody pleads to make changes in Quran, it is termed as blasphemy. But when the question castes come to get a quota the muslims get ready to make a practical change in it. Why then the question of Fatwa does not arise? This opportunist attitude is seen by Allah… Read more »
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