Satyarth Prakash (Hindi)

For a long time, the Hindi version of Satyarth Prakash (Light of Truth) was not available on web. The existing version was in image format making the file heavy and unsuitable for reading. We have managed to bring forth an editable Hindi version in pdf format. The original file is uploaded on scribd.com. Kindly read this carefully and understand the essence of Vedic Dharma.

Accept the truth and reject the false!

http://agniveer.com/wp-content/uploads/2010/09/satyarth_prakash_opt4.pdf

http://www.scribd.com/doc/37535668/Satyarth-Prakash-Light-of-Truth

Satyarth Prakash – Light of Truth

Note: For serious study and reference purpose, we strongly recommend a hard copy of Satyarth Prakash published by Ram Lal Kapoor Trust, Sonipat (Ajmeri Shatabdi Edition) edited by Pt Yudhishthir Meemansak.

To understand the essence of Vedic Dharma, please review Vedic Religion in brief.

Introduction to Vedas (Hindi)

Introduction to Vedas (Hindi)

The 4 Vedas Complete (Hindi)

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Comments

  1. bhavesh merja says

    Agniveerji, by uploading SP & RBB Hindi versions on this web you have really done a very important job. Congratulations !
    May I know these books are edited by whom ?
    = Bhavesh

  2. vikram says

    many many thanks for this
    i could not get hold of the hardcopy
    and i had been looking for this for a long time

    thanks again

  3. Mayank Goyal says

    Please Post Pages no. 71,72. They are missing from both; Pdf as well online version

  4. Pragnesh says

    Hello/…can you plz tell me how can i get original copy of satyarth Prakash.
    You can contact me on 9979730876.

  5. says

    Dear Sir,

    I am speechless after reading this book. Thanks so much for providing such a change of education level to us. Thanks Swami Dayanand ji. regards,
    Narender

  6. says

    this boook has changed my life… has changed my attitude towards life…
    nothing else to say it has just taken me out the dirt and stupidity i was living since years!!

    dhanya dhanya rishi dayanand !! aur dhanya hai unki satyarth prakash!

    • Truth Seeker says

      @Krishna
      Brother I would like to ask as I have been attending several Tulsi Ramayan Katha programmes. Tulsi Das written many good things & addressed Ram as a follower of Veda like
      “श्रुति पथ पालक धर्म धुरंधर”
      “Shruti Path Palak Dharm Durandhar”
      But somewhere he goes against Veda when he says Rama is incarnation of supreme spirit/God. Why such blunder he has done which is very against Veda & somewhere in Uttar Kand he is mentioning a Crow (Kak-bhusandi) narrating story of Rama to bird Garud. & people believe in all this & scholar of Ramayan preach such stupid things proudly before the gathering.

      • says

        इस पर मेरा विचार यह है की चूँकि तुलसीदास जी के समय में पाप कर्म बहुत अधिक फ़ैल चूका था और लोग पहले से अन्धविश्वासो की रुढियों में जकड़े पढ़े थे तो ऐसी स्थिथि में दो ही रास्ते होते हैं .. या तो पूर्ण विद्रोह करके केवल और केवल जो सत्य है उसीका प्रतिपादन कर दिया जाए और झूठ या पाखंड को सिरे से नकार दिया जाए जैसे की ऋषि दयानंद ने किया था .. इसका प्रभाव शुरुआत में कम लोगो पर पड़ता है लेकिन स्थायी होता है जैसे आज भी ऋषि दयानद की सत्यार्थ प्रकाश उतनी ही सही है जितनी उनके समय में थी (न की रामचरितमानस की भांति जो अब के समय में कपोलकल्पित लगती हैं , तुलसीदास जी के समय में शायद सत्य प्रतीत होती हो ) … या फिर दूजा रास्ता जो तुलसीदास जी ने अपनाया वो ये है की जनता को उसकी मान्यताओं का तो विरोध न करना अपितु उसीकी भाषा में बाकियों का विरोध किये बिना आदर्श क्या है वो बता देना .. अर्थात केवल सत्य का प्रतिपादन कर देना .. किन्तु असत्य या पाखंड की उपेक्षा कर देनी अथवा पूरी तरह से नकारना नहीं … इसका प्रभाव शीघ्र पड़ता है और बहुत अधिक लोगो पर पड़ता .. (जैसे रामचरितमानस ने आज घर घर में जगह बना ली है उस भांति लेकिन सत्यार्थ प्रकाश को बहुत उसकी अपेक्षा कम ही लोग जानते हैं )लेकिन ये स्थायी नहीं होता और इसके दूरगामी प्रभाव भयंकर ही होते है जैसे अब एक भारी ज्ञानियों की फौज जो केवल रामचरितमानस को कंठस्त कर लेने से ही स्वयं को ग्यानी मानने लगते हैं , और रामचरित मानस की चौपयिओं को प्रमाण की भांति समझते है |
        और फिर ये भी ध्यान देने योग्य है की उस समय में अधिकतर राजा श्री कृष्ण और गोपियों की झूठी कथाओं का आश्रय ले कर राग रंग में फँस कर प्रजा का , धर्मं का और राष्ट्र का रक्षण करने के अपने उतरदायित्व से विमुख हो रहे थे| तो संभवत: गोस्वामी जी ने सत्य रामायण कथा का आश्रय लेकर रामचरितमानस में राम का आदर्श चरित्र गढ़ कर समाज के सामने रखा जिस से की आदर्श राजा , आदर्श पुत्र , आदर्श पति ,आदर्श भाई के गुण स्पष्ट हो सके | ये भी ध्यान देने योग्य है गोस्वामी जी ने लोकहित की कई बातें श्री राम और भाइयो के मुख से कहलवाई हैं .. जैसे …
        “||धीरज, धर्म, मित्र आते नारी ….
        आपद काल परखिये चारी ||”
        फिर तुलसीदास जी ने संभवत: जान भूजकर रामचरितमानस संस्कृत में न लिख कर ,हिंदी में लिखी है क्यूंकि संभवत: वो इसे ज्ञानियों के चर्चा का विषय न बना कर…

        • says

          फिर तुलसीदास जी ने संभवत: जान भूजकर रामचरितमानस संस्कृत में न लिख कर ,हिंदी में लिखी है क्यूंकि संभवत: वो इसे ज्ञानियों के चर्चा का विषय न बना कर ,जन साधाराण जो संस्कृत नहीं जानता उसीके लिए रची है | और जो सब चमत्कारों की बातें हैं वो जरूर उन्होंने ने लोगो के शीघ्र विशवास ले आयें इसके लिए जोड़ दी होंगी ….
          काग भुसुंडी ऋषि का नाम भी हो सकता है | इसीलिए मानस को ज्ञान की पुस्तक न मान कर एक नेतिक बोध की पुस्तक मान लेना ही उचित है |

          —————ॐ ——–

          • GOD IS GREAT says

            तुलसीदास एक योगी थे। अपने ग्रंथ रामचरितमानस से पूर्व उन्होने घटरामायण नामक पुस्तक लिखी थी। उसमें रामजीवन का सत्य समझाने का प्रयास किया था। किंतु उस समय में अन्धविश्वास इतना बड़ा हुआ था कि तुलसीदास का विरोध हुआ। तुलसीदास को कई मित्रो ने कहा था कि रामायण संस्कृत में लिखो लेकिन वह नही माने अत: कई विद्वान उनके पहले से ही शत्रु हो गए थे। तो तुलसीदास को अपना ग्रंथ जलाना पड़ गया। आज बहुत ढूंढने के बाद भी विद्वान उसके प्रारम्भ के पाँच पृष्ठ ही ढूंढ पाए है।

            घटरामायण के पश्चात तुलसीदास ने अपने गुरु के आदेशानुसार रामचरितमानस लिखी। उसमें लोगो को बहलाने के लिए चमत्कार डाल दिए। अब प्रश्न उठता है – क्या वह वास्तव में रामायण है? उत्तर — नही।

            तुलसीदास तो स्पष्ट रुप से लिखते है कि उन्होने रामचरितमानस में वही डाला है जो वाल्मीकी, पुराण, वेदग्रंथ आदि तथा विद्वानो से विचार विमर्श करने के बाद उन्हे उपयुक्त लगा। अर्थात रामायण में कुछ ऐसा भी है जो तुलसीदास को अच्छा नही लगा और उन्होने नही डाला। अत: वह सम्पूर्ण रामायण नही।

            रामायण में कई कहावते है और मुहावरे भी। उसमें नैतिकता का बहुत ज्ञान है और कुछ लोक आदर्श की बाते भी है जैसे –

            बड़े भाग मानुष तन पावा। सुर दुर्लभ सद्ग्रंथन गावा। साधन धाम मोक्ष कर द्वारा। पाई न जेहि परलोक सँवारा।
            अर्थात मनुष्य बनके परलोक सँवारना आवश्यक है। अन्यथा मनुष्य बनने का लाभ नही। मनुष्य की बुद्धि सर्वाधिक विकसित होने के कारण वही योनि आनन्द के योग्य है – यह तो लगभग सभी मानते है।

            कहे हनुमान विपत्ति प्रभु सोई। जब तव भजन सुमिरन न होई॥
            अर्थात परमेश्वर को भूलना एकमात्र विपत्ति है। यही बात गुरु नानक ने भी स्वीकारी है – नानक दुखिया सब संसारा। सुखनी सोई जो नाम सँवारा॥

            अत: रामचरितमानस एक नैतिक धर्मग्रंथ है – रामायण का ज्ञान नही।

          • Truth Seeker says

            Namaste Brother “God Is Great”
            You seem to be great scholar. Tulsi Das Ji written many Goods / Morals which should be adopted by all through portraying character of Rama. But it is Tulsi Das who is responsible to some extent for propagating polytheism in Hinduism. He got the all writing stuff from Purans. He shown many places Rama is lord of lord Shiva. How can be lord of lord if he writes there is no difference between Shiva & Rama. Rama is above all & all three God Brahma, Vishnu & Mahesh worship of him. Through this he shown Shiva, Vishnu, Brahma are different not name one God as Veda preach. On Other place he shown Rama was worshiping Shiva. He shown idol worship in his Ramcharit Manas where at one place Sita Mata was going to worship Goddess “Bhawani” before wedding ceremony. But it is Tulsi Das who written “Sati” or Bhawani could not recognize Rama in spite of being Goddess. As per Tulsi Das sun stood motionless for one month on the occasion of Rama Birth. But As you know it is earth rotation around the sun. At one place he writes Hanuman had taken the sun in his mouth in his childhood (Bal Samay Ravi Bhaksh Liyo tab Tino Lok Bhayo Andhkar). There are many scientific errors in his writing. I must believe if we talk about man made scriptures it is “Satyarath Parkash” the greatest man made scripture for mankind in the history of last five thousand years which cannot be challenged logically by anybody. But you know very well how many Hindu have “Satyarath Parkash” in their homes.

          • GOD IS GREAT says

            Truth Seeker!

            नमस्कार भ्राता!

            सर्वप्रथम मैं कोई विद्वान नही हु – जो कुछ है वह तो कुछ योगियो से वार्ता के पश्चात है। रही बात तुलसीदास की तो मात्र वही दोषी नही बल्कि उनके समय की भी है। मान लिजिए – आपने सत्य बताने के लिए पुस्तक लिखी परंतु तथाकथित पण्डितो ने आपको डराया और आपको अपना ग्रंथ जलाना पड़ गया – आपकी क्या मनोदशा होगी? वही तुलसीदास की हो गई होगी – अत: केवल उनकी त्रुति नही।

            ब्रह्मा, विष्णु, महेश वही है जो वेदो ने कहे है – एक ईश्वर के कई नाम। तुलसीदास उसी सत्य को प्रतिपादित करना चाहते थे लेकिन तरीका विचित्र चुना। देखे – शिव का उल्लेख ऐसा किया — सेवक स्वामी सखा सिय पी के। अर्थात शिव राम के सेवक, स्वामी, सखा है। अन्य स्थान पर यह लिखा है — रामद्रोही शिवभक्त शिवद्रोही रामदास। ते नर करई कल्पभर घोर नरक में वास॥ उत्तरकांड के अनुसार राम ने कहा – औरउ एक गुपित मत सबही कहउ कर जोरि। शंकर भजन बिना नर भगति न पावहि मोरि॥ विष्णु के मुख से नारद मुनि को कहलवा दिया – जेहि पर कृपा न करहि पुरारी। सो न पाव मुनि भगति हमारी॥ अर्थात विष्णु / राम की भक्ति के लिए शिवकृपा / शिवभजन आवश्यक है। किंतु इन वाक्यो ने मनुष्यो को सत्य के निकट लाने के बजाय संविभ्रमित कर दिया।

            रही बात सीता द्वारा मूर्ति पूजा की तथा सती द्वारा राम की परिक्षा लेने की, सूर्य के रुकने की अथवा हनुमानजी द्वारा उसे भक्षण लेने की तो वह सब कितना सत्य है यह तो परमेश्वर ही जाने। अत: योगियो ने रामायण का रहस्य जानना चाहा है। उदाहरणार्थ – हनुमान बन्दर नही है बल्कि साधनासम्पन्न विशेष नर (एक महान योगी) है। राम अर्थात आनन्दमार्ग के पथिक है परमात्मा नही। लंका अर्थात कांचन कामिनी कीर्ति से सम्पन्न अज्ञान की जननी माया जहाँ मैँने ब्रह्म को जाना है ऐसा मिथ्या अहंकार अर्थात ब्राह्मण कुलोत्पन्न राक्षस रावण राज करता है। जो भी हो — रामायण का सत्य जानना उतना सरल नही है जितना लगता है।

            अब बात करते है सत्यार्थ प्रकाश की। आपको पता है कि सतीशचन्द गुप्ता नामके एक प्राणी ने सत्यार्थ प्रकाश की समीक्षा लिख डाली है। आप अंतर्जाल पर देख ले – अधिकांश आपको गम्भीर तथ्य प्रतीत होगा पर जब आप तह तक जाऐंगे और अनुसन्धान ( Research ) करेंगे तब आप पायेंगे कि वह गप्प है और व्यंग्य भी। एक बार विचार आता है कि उसे उत्तर दे दु पर फिर विचार आता है कि मूर्ख के समक्ष विद्वान बनने का क्या लाभ? आप…

          • GOD IS GREAT says

            अब बात करते है सत्यार्थ प्रकाश की। आपको पता है कि सतीशचन्द गुप्ता नामके एक प्राणी ने सत्यार्थ प्रकाश की समीक्षा लिख डाली है। आप अंतर्जाल पर देख ले – अधिकांश आपको गम्भीर तथ्य प्रतीत होगा पर जब आप तह तक जाऐंगे और अनुसन्धान ( Research ) करेंगे तब आप पायेंगे कि वह गप्प है और व्यंग्य भी। एक बार विचार आता है कि उसे उत्तर दे दु पर फिर विचार आता है कि मूर्ख के समक्ष विद्वान बनने का क्या लाभ? आप स्वयं देखकर निर्णय करे कि क्या वह वास्तव में स्वयं तर्कसंमत है?

            http://www.scribd.com/doc/57004318/Satyarth-Prakash-Sameeksha-II-Edition

            धन्यवाद !

        • Truth Seeker says

          @GOD IS GREAT
          When you have shown me link of Mr. Satish Chander Gupta refutation, I thought probably today I would get answer of fundamental Questions which makes me bore by posting here time to time before Muslims. How can you say it is refutation if he does not provide the answer of very basic questions like:-
          1. What was Allah doing before this creation?
          2. How does Allah allocate the souls to new born? Someone borne rich, healthy others are poor & handicapped without committing any sin in their present life.
          3. Whom did Allah address when he starts the Quran (I begin this book) In the name of God, the Compassionate, the Merciful.” Or Who is Allah of Allah here?
          4. Whom did Allah address (Kun) ” Be” to create the universe?
          5. How does Allah get happy by animal sacrifice?
          6. Who feel pain in animals if they do not have soul as per Satish Chander Gupta refutation?
          As per Satish Chander Gupta there is no difference between cow dung & latrine. As per Satish Chander Gupta meat eating is very good. Why do they (Islam) hate cannibalism if we talk scientifically & as per logic of eating of animals flesh? Satish Chander Gupta looking too dumb that at one place he gives reference of Maharishi Quote “ God, Soul, matter are eternal. If Mahirshi Dayanand already said these entities are eternal & as per previous deed soul gets the body & sanskar. There does not arise question of first universe and last universe as Satish Chander Gupta said there must be any starting of universe. God chose the best souls to impart knowledge of Veda as per their previous deed in the inception of universe. Where is partiality? As per Satish Chander Gupta smoke comes out from pollution, factories, smoking are same as smoke comes out from Yajna. Why do not they understand if there is something negative/injurious gas, there must have been system to get positive/beneficial gas or remove the effect of injurious gases from environment? Look here Importance of Yajna. http://vedmandir.com/node/102
          If you find anything concrete in his…

          • GOD IS GREAT says

            Truth Seeker

            Namaskaar Brother!

            He is not mentioning any answer to what Swami Dayanand said. He just says — जो मनुष्य पक्षपाती होता है, वह अपने असत्य को भी सत्य और दूसरे विरोधी मत वाले के सत्य को भी असत्य सिद्ध करने के लिए प्रवृत्त होता है। इसीलिए वह सत्य मत को प्राप्त नही हो सकता।
            = “स्वामी दयानन्द सरस्वती”

            Interestingly, he is using this sentence against Swami Dayanand himself. Another entity doing its best to insult Swami Dayanand. See, the views:

            http://vinekdubey.blogspot.in/2011/12/blog-post_683.html

            I mailed him from where he got Vedas translated. He hasn’t replied yet. He also believes in authenticity of Puranas and defends them. Go to post number 9838. (The above post is 683. So, just replace 683 with 9838 in above link.) The biggest blunder he does is: replaces Bhavishya Puran with Brahmaand Puran.

            Now, coming back to Satish Chand Gupta, he assumes that scientists don’t follow vegetarianism. Albert Einstein was a born non vegan. But he became a vegan and then see his views. He happily praises veg diet. Other than Einstein, following were vegans:
            Isaac Newton
            Carl Lewis
            George Wald
            Plato
            Henry David Thoreau
            Ralph Waldo Emerson
            Buddha
            William Wordsworth
            Chandrasekhar Venkat Raman
            Leonardo Da Vinci (He buyed a cage full of chickens and set all of them free. Such a love for veg diet.)
            Srinivasa Ramanujam
            Nichola Tesla
            George Bernard Shaw
            Chandrashekhar Subrahmaniam
            Rabindranaath Tagore
            Thomas Alva Edison
            Benjamin Franklin
            Steve Jobs
            Confucius
            Charles Darwin
            Pythagoras
            Socrates
            Henry Ford
            Aryabhata
            Brahmagupta
            Varahamihira
            Kalpana Chawla
            Voltaire
            Mark Twain
            Henry Ford
            Arthur Schopenhauer
            Martin Luther
            etc… These are only some among 800 other champions. Now, who does not call these as standards? Almost everyone is influenced by at least some of these.

            Now, comes the question – why lions and others are carnivores? Well, nature has a systematic working. It made trees to support vegetarianism and herbivores to feed on it. Carnivores are there to…

          • GOD IS GREAT says

            Now, comes the question – why lions and others are carnivores? Well, nature has a systematic working. It made trees to support vegetarianism and herbivores to feed on it. Carnivores are there to feed on herbivore. A lion eats up antelope, zebra, deers, stag etc. Rarely a lion eats another lion. Hence certain balance is maintained. The physique and structure of a lion supports carnivorism so there is nothing wrong in that.

            But then comes a human somewhere… He hunts lion / tigers for his greed and deforests for his need. The ecological balance is made to disappear. Perhaps natural catastrophe is the only answer Nature has now. Some critics / poets say – ATOM BOMB IS AN INVENTION TO END UP EVERY OTHER INVENTION. . In the same manner, I feel – Humans are the living beings to end up every other living being. Had read a story in childhood:

            When GOD finished creation, trees were unhappy with animals as they hit them so, trees prayed GOD to remove animals. GOD agreed. Now, human task was simpler as they cut trees in a better manner. Trees were afraid and told GOD to restore the animals back on Earth. GOD agreed. Now, animals hated trees and said – O GOD, remove these trees as they create hindrances on our path. GOD agreed and now, humans proved fatal for animals. Animals prayed to GOD to restore trees. Perhaps that’s why scientists say – NON Humans have underdeveloped brain. Both animals and trees should have prayed to GOD to remove humans. That would have been better. What do you say ??

            देख तेरे संसार की हालत क्या हो गई भगवान। कितना बदल गया इनसान॥ चाँद न बदला सूर्य न बदला न बदला आसमान लेकिन इनसान बन गया शैतान॥

          • Truth Seeker says

            @God is Great
            Namaste Brother
            _________He just says — जो मनुष्य पक्षपाती होता है, वह अपने असत्य को भी सत्य और दूसरे विरोधी मत वाले के सत्य को भी असत्य सिद्ध करने के लिए प्रवृत्त होता है। इसीलिए वह सत्य मत को प्राप्त नही हो सकता।
            = “स्वामी दयानन्द सरस्वती”
            Interestingly, he is using this sentence against Swami Dayanand himself.______________
            How this Swami Dayanand’s quote can be applied on Dayanand Ji himself? __”दूसरे विरोधी मत वाले के सत्य को भी असत्य सिद्ध करने के लिए प्रवृत्त होता है।”__ If Islam / Quran is true but Dayanand Ji was partial that is why he was finding faults in Quran & he raised many questions in “Satyarth Parkash” for Islam in its 14th Chapter. Why are Islamic scholars not answering of Swami Dayanand’s queries logically and scientifically & proves him wrong. They have written many books on the name of “Satyarth Parkash” refutation but they nowhere give answer of Dayanand queries. If you do not have answer of my allegations / queries you have no right to call me partial. Mr. Satish Chander Gupta should apply this on himself.
            http://agniveer.com/2037/satyarth-prakash/#comment-80934

          • GOD IS GREAT says

            Namaskaar Truth Seeker brother!

            Yes, I agree with you that he is a total fraud. The heights is: he defends Islamic invaders and raises a question: If Islamic invaders really attacked India, how come Hindus were defeated if it is proven that were in majority. By saying that Mughals invaded India is same as saying that Hindus were cowards.

            He goes on saying that Indian anti – Mughal history is a propaganda. So, history is “Saampradaayik”. He adds up that Britishers wanted Hindus to be enemies of Muslims. So, being anti Muslim is same as supporting British. I guess, he is a name changed Muslim. Just to hide his truth from getting exposed – he puts a small tagline — I don’t support Muslims but want to quit superstition which made us coward. (NOTE: If he really wanted to quit superstitions, he must have chosen some logical method.) If you know answer of his allegation, post it here.

            Anyways, just found excellent link. (Masterpeice by a Mastermind)

            http://www.archive.org/details/HindiBooksOfP.n.Oak

            Go to left frame (“View the book” section) where you will find some hyperlinks. Click on every pdf link there and enjoy.

            Pass the word. Thanks

      • Truth Seeker says

        @krishna
        brother, you are correct, Tulsi Das glorified Rama so that people can adopt her character like he said
        कोटिन्ह यज रामह कीन्हा
        Kotinah yaj Ramah kinha (Rama had done krors of Yaj)
        But somewhere he said
        कलियुग न जप न ताप न यज
        कलियुग केवल नाम आधार
        Such scripture is creating problem for our society & misleading the masses. Whenever I discussed the matter with scholars they said In Kaliyug you can not read Veda. In Kalyug, only Ramayan which can provide you Moksha. And in this impact people following idol worship, God incarnation theory, & they call all the stupid acts “Leela of God” like Krishna enjoying with gals, it is Leela of God, Rama willingly let kidnapped her wife Sita to perform his leela, God will come to save us, A monster Hirnyaksh stole the earth & god Vishnu came in form of Varha incarnation to fight with monster, Ravana was ten headed, Hanuman was a monkey, Bhagwat Katha listening providing Mokash just in six days, Sage used to live thousand of years, Viswamitra done tap more than 60 thousand years, Laxman was incarnation of Shesh Nag, Ravan was a great devotee of God & to give him Moksha God had taken form of human. All stupid story leading to darkness to our future generation.
        I requested several time to AGniveer to translate the article on Vedic God series in Hindi so that we can distribute them in scholars and common masses and all mis-conception/superstitions can be removed or discussed.

        • says

          yea! i am going to try to translate those articles in hindi … as my next articles on aryabhajans.com while though it would take time but still i think i would be able to do atleast one article per week… i will try doing so this week!

      • Mohinder Singh Malik says

        Because Tulsidas ji was a human being, there is always probability of mistakes in humans system and books. it proves that Tulsidas ji was not God, his book can’t have SAMPURANA KNOWLEDGE. It is only possible in God’s System and books VEDAS. Thanks

  7. Kapil Purushottam says

    achha,ye batao ,One is God or God is one,
    apni soch mat batao Islam kia bolta he ye batao

  8. Kapil Purushottam says

    achha,ye batao ,One is God or God is one,
    apni soch mat batao Islam kia bolta he ye batao

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