वेद नारी को अत्यंत महत्वपूर्ण, गरिमामय, उच्च स्थान प्रदान करते हैं| वेदों में स्त्रियों की शिक्षा- दीक्षा, शील, गुण, कर्तव्य, अधिकार और सामाजिक भूमिका का जो सुन्दर वर्णन पाया जाता है, वैसा संसार के अन्य किसी धर्मग्रंथ में नहीं है| वेद उन्हें घर की सम्राज्ञी कहते हैं और देश की शासक, पृथ्वी की सम्राज्ञी तक बनने का अधिकार देते हैं|

वेदों में स्त्री यज्ञीय है अर्थात् यज्ञ समान पूजनीय| वेदों में नारी को ज्ञान देने वाली, सुख – समृद्धि लाने वाली, विशेष तेज वाली, देवी, विदुषी, सरस्वती, इन्द्राणी, उषा- जो सबको जगाती है इत्यादि अनेक आदर सूचक नाम दिए गए हैं|

वेदों में स्त्रियों पर किसी प्रकार का प्रतिबन्ध नहीं है – उसे सदा विजयिनी कहा गया है और उन के हर काम में सहयोग और प्रोत्साहन की बात कही गई है| वैदिक काल में नारी अध्यन- अध्यापन से लेकर रणक्षेत्र में भी जाती थी| जैसे कैकयी महाराज दशरथ के साथ युद्ध में गई थी| कन्या को अपना पति स्वयं चुनने का अधिकार देकर वेद पुरुष से एक कदम आगे ही रखते हैं|

अनेक ऋषिकाएं वेद मंत्रों की द्रष्टा हैं – अपाला, घोषा, सरस्वती, सर्पराज्ञी, सूर्या, सावित्री, अदिति- दाक्षायनी, लोपामुद्रा, विश्ववारा, आत्रेयी आदि |

तथापि, जिन्होनें वेदों के दर्शन भी नहीं किए, ऐसे कुछ रीढ़ की हड्डी विहीन बुद्धिवादियों ने इस देश की सभ्यता, संस्कृति को नष्ट – भ्रष्ट करने का जो अभियान चला रखा है – उसके तहत वेदों में नारी की अवमानना का ढ़ोल पीटते रहते हैं |

आइए, वेदों में नारी के स्वरुप की झलक इन मंत्रों में देखें –

अथर्ववेद ११.५.१८

ब्रह्मचर्य सूक्त के इस मंत्र में कन्याओं के लिए भी ब्रह्मचर्य और विद्या ग्रहण करने के बाद ही विवाह करने के लिए कहा गया है |  यह सूक्त लड़कों के समान ही कन्याओं की शिक्षा को भी विशेष महत्त्व देता है |

कन्याएं ब्रह्मचर्य के सेवन से पूर्ण विदुषी और युवती होकर ही विवाह करें |

अथर्ववेद १४.१.६

माता- पिता अपनी कन्या को पति के घर जाते समय बुद्धीमत्ता और विद्याबल का उपहार दें | वे उसे ज्ञान का दहेज़ दें |

जब कन्याएं बाहरी उपकरणों को छोड़ कर, भीतरी विद्या बल से चैतन्य स्वभाव और पदार्थों को दिव्य दृष्टि से देखने वाली और आकाश और भूमि से सुवर्ण आदि प्राप्त करने – कराने वाली हो तब सुयोग्य पति से विवाह करे |

अथर्ववेद १४.१.२०

हे पत्नी !  हमें ज्ञान का उपदेश कर |

वधू अपनी विद्वत्ता और शुभ गुणों से पति के घर में सब को प्रसन्न कर दे |

अथर्ववेद ७.४६.३

पति को संपत्ति कमाने के तरीके बता |

संतानों को पालने वाली, निश्चित ज्ञान वाली, सह्त्रों स्तुति वाली और चारों ओर प्रभाव डालने वाली स्त्री, तुम ऐश्वर्य पाती हो | हे सुयोग्य पति की पत्नी, अपने पति को संपत्ति के लिए आगे बढ़ाओ |

अथर्ववेद ७.४७.१

हे स्त्री ! तुम सभी कर्मों को जानती हो |

हे स्त्री !  तुम हमें ऐश्वर्य और समृद्धि दो |

अथर्ववेद ७.४७.२

तुम सब कुछ जानने वाली हमें धन – धान्य से समर्थ कर दो |

हे स्त्री ! तुम हमारे धन और समृद्धि को बढ़ाओ |

अथर्ववेद ७.४८.२

तुम हमें बुद्धि से धन दो |

विदुषी, सम्माननीय, विचारशील, प्रसन्नचित्त पत्नी संपत्ति की रक्षा और वृद्धि करती है और घर में सुख़ लाती है |

अथर्ववेद १४.१.६४

हे स्त्री ! तुम हमारे घर की प्रत्येक दिशा में ब्रह्म अर्थात् वैदिक ज्ञान का प्रयोग करो |

हे वधू ! विद्वानों के घर में पहुंच कर कल्याणकारिणी और सुखदायिनी होकर तुम विराजमान हो |

अथर्ववेद २.३६.५

हे वधू ! तुम ऐश्वर्य की नौका पर चढ़ो और अपने पति को जो कि तुमने स्वयं पसंद किया है, संसार – सागर के पार पहुंचा दो |

हे वधू ! ऐश्वर्य कि अटूट नाव पर चढ़ और अपने पति को सफ़लता के तट पर ले चल |

अथर्ववेद १.१४.३

हे वर ! यह वधू तुम्हारे कुल की रक्षा करने वाली है |

हे वर !  यह कन्या तुम्हारे कुल की रक्षा करने वाली है | यह बहुत काल तक तुम्हारे घर में निवास करे और बुद्धिमत्ता के बीज बोये |

अथर्ववेद २.३६.३

यह वधू पति के घर जा कर रानी बने और वहां प्रकाशित हो |

अथर्ववेद ११.१.१७

ये स्त्रियां शुद्ध, पवित्र और यज्ञीय ( यज्ञ समान पूजनीय ) हैं, ये प्रजा, पशु और अन्न देतीं हैं |

यह स्त्रियां शुद्ध स्वभाव वाली, पवित्र आचरण वाली, पूजनीय, सेवा योग्य, शुभ चरित्र वाली और विद्वत्तापूर्ण हैं | यह समाज को प्रजा, पशु और सुख़ पहुँचाती हैं |

अथर्ववेद १२.१.२५

हे मातृभूमि ! कन्याओं में जो तेज होता है, वह हमें दो |

स्त्रियों में जो सेवनीय ऐश्वर्य और कांति है, हे भूमि ! उस के साथ हमें भी मिला |

अथर्ववेद  १२.२.३१

स्त्रियां कभी दुख से रोयें नहीं, इन्हें निरोग रखा जाए और रत्न, आभूषण इत्यादि पहनने को दिए जाएं |

अथर्ववेद १४.१.२०

हे वधू ! तुम पति के घर में जा कर गृहपत्नी और सब को वश में रखने वाली बनों |

अथर्ववेद १४.१.५०

हे पत्नी ! अपने सौभाग्य के लिए मैं तेरा हाथ पकड़ता हूं |

अथर्ववेद १४.२ .२६

हे वधू ! तुम कल्याण करने वाली हो और घरों को उद्देश्य तक पहुंचाने वाली हो |

अथर्ववेद  १४.२.७१

हे पत्नी ! मैं ज्ञानवान हूं तू भी ज्ञानवती है, मैं सामवेद हूं तो तू ऋग्वेद है |

अथर्ववेद १४.२.७४

यह वधू विराट अर्थात् चमकने वाली है, इस ने सब को जीत लिया है |

यह वधू बड़े ऐश्वर्य वाली और पुरुषार्थिनी हो |

अथर्ववेद  ७.३८.४ और १२.३.५२

सभा और समिति में जा कर स्त्रियां भाग लें और अपने विचार प्रकट करें |

ऋग्वेद १०.८५.७

माता- पिता अपनी कन्या को पति के घर जाते समय बुद्धिमत्ता और विद्याबल उपहार में दें | माता- पिता को चाहिए कि वे अपनी कन्या को दहेज़ भी दें तो वह ज्ञान का दहेज़ हो |

ऋग्वेद ३.३१.१

पुत्रों की ही भांति पुत्री भी अपने पिता की संपत्ति में समान रूप से उत्तराधिकारी है |

ऋग्वेद   १० .१ .५९

एक गृहपत्नी प्रात :  काल उठते ही अपने उद् गार  कहती है –

” यह सूर्य उदय हुआ है, इस के साथ ही मेरा सौभाग्य भी ऊँचा चढ़ निकला है |  मैं अपने घर और समाज की ध्वजा हूं , उस की मस्तक हूं  | मैं भारी व्यख्यात्री हूं | मेरे पुत्र  शत्रु -विजयी हैं | मेरी पुत्री संसार में चमकती है | मैं स्वयं दुश्मनों को जीतने वाली हूं | मेरे पति का असीम यश है |  मैंने  वह  त्याग किया है जिससे इन्द्र (सम्राट ) विजय पता है |  मुझेभी विजय मिली है | मैंने अपने शत्रु  नि:शेष कर दिए हैं | ”

वह सूर्य ऊपर आ गया है और मेरा सौभाग्य भी ऊँचा हो गया है  | मैं जानती हूं , अपने प्रतिस्पर्धियों को जीतकर  मैंने पति के प्रेम को फ़िर से पा लिया है |

मैं प्रतीक हूं , मैं शिर हूं , मैं सबसे प्रमुख  हूं और अब मैं कहती हूं कि  मेरी इच्छा के अनुसार ही मेरा पति आचरण करे |   प्रतिस्पर्धी मेरा कोई नहीं है |

मेरे पुत्र मेरे शत्रुओं को नष्ट करने वाले हैं , मेरी पुत्री रानी है , मैं विजयशील हूं  | मेरे और मेरे पति के प्रेम की व्यापक प्रसिद्धि है |

ओ प्रबुद्ध  ! मैंने उस अर्ध्य को अर्पण किया है , जो सबसे अधिक उदाहरणीय है और इस तरह मैं सबसे अधिक प्रसिद्ध और सामर्थ्यवान हो गई हूं  | मैंने स्वयं को  अपने प्रतिस्पर्धियों से मुक्त कर लिया है |

मैं प्रतिस्पर्धियों से मुक्त हो कर, अब प्रतिस्पर्धियों की विध्वंसक हूं और विजेता हूं  | मैंने दूसरों का वैभव ऐसे हर लिया है जैसे की वह न टिक पाने वाले कमजोर बांध हों | मैंने मेरे प्रतिस्पर्धियों पर विजय प्राप्त कर ली है | जिससे मैं इस नायक और उस की प्रजा पर यथेष्ट शासन चला सकती हूं  |

इस मंत्र की ऋषिका और देवता दोनों हो शची हैं  | शची  इन्द्राणी है, शची  स्वयं में राज्य की सम्राज्ञी है ( जैसे कि कोई महिला प्रधानमंत्री या राष्ट्राध्यक्ष हो ) | उस के पुत्र – पुत्री भी राज्य के लिए समर्पित हैं |

ऋग्वेद  १.१६४.४१

ऐसे निर्मल मन वाली स्त्री जिसका मन एक पारदर्शी स्फटिक जैसे परिशुद्ध जल की तरह हो वह एक वेद,  दो वेद या चार वेद , आयुर्वेद, धनुर्वेद, गांधर्ववेद , अर्थवेद इत्यादि के साथ ही छ वेदांगों – शिक्षा, कल्प, व्याकरण, निरुक्त, ज्योतिष और छंद : को प्राप्त करे और इस वैविध्यपूर्ण  ज्ञान को अन्यों को भी दे |

हे स्त्री पुरुषों ! जो एक वेद का अभ्यास करने वाली वा दो वेद जिसने अभ्यास किए वा चार वेदों  की पढ़ने वाली वा चार वेद  और चार उपवेदों की शिक्षा से युक्त वा चार वेद, चार उपवेद और व्याकरण आदि  शिक्षा युक्त, अतिशय कर के  विद्याओं  में प्रसिद्ध होती और असंख्यात अक्षरों वाली होती हुई सब से उत्तम, आकाश के समान व्याप्त निश्चल परमात्मा के निमित्त प्रयत्न करती है और गौ स्वर्ण  युक्त विदुषी स्त्रियों को शब्द कराती अर्थात् जल के समान निर्मल वचनों को छांटती अर्थात् अविद्यादी दोषों को अलग करती हुई वह संसार के लिए अत्यंत सुख करने वाली होती है |

ऋग्वेद     १०.८५.४६

स्त्री को परिवार और पत्नी की महत्वपूर्ण भूमिका में चित्रित किया गया है | इसी तरह, वेद स्त्री की सामाजिक, प्रशासकीय और राष्ट्र की सम्राज्ञी के रूप का वर्णन भी करते हैं |

ऋग्वेद  के कई सूक्त उषा का देवता के रूप में वर्णन करते हैं और इस उषा को एक आदर्श स्त्री के रूप में माना गया है | कृपया पं श्रीपाद दामोदर सातवलेकर द्वारा लिखित  ” उषा देवता “,  ऋग्वेद का सुबोध भाष्य  देखें |

सारांश   (पृ १२१ – १४७ ) –

१. स्त्रियां  वीर हों | (  पृ १२२, १२८)

२. स्त्रियां सुविज्ञ हों | ( पृ १२२)

३. स्त्रियां यशस्वी हों | (पृ   १२३)

४. स्त्रियां रथ पर सवारी करें |  ( पृ  १२३)

५. स्त्रियां विदुषी हों | (  पृ १२३)

६. स्त्रियां संपदा शाली  और धनाढ्य हों | ( पृ  १२५)

७.स्त्रियां बुद्धिमती और ज्ञानवती हों |  ( पृ  १२६)

८. स्त्रियां परिवार ,समाज की रक्षक हों और सेना में जाएं | (पृ   १३४, १३६ )

९. स्त्रियां तेजोमयी हों |  ( पृ  १३७)

१०.स्त्रियां धन-धान्य और वैभव देने वाली हों |  ( पृ   १४१-१४६)

यजुर्वेद २०.९

स्त्री  और पुरुष दोनों को शासक चुने जाने का समान अधिकार है |

यजुर्वेद १७.४५

स्त्रियों की भी सेना हो | स्त्रियों को युद्ध में भाग लेने के लिए प्रोत्साहित करें |

यजुर्वेद १०.२६

शासकों की स्त्रियां अन्यों को राजनीति की शिक्षा दें | जैसे राजा, लोगों का न्याय करते हैं  वैसे ही रानी भी  न्याय करने वाली हों |

 

संदर्भ सूची :  

  1. मेरा धर्म,  प्रियव्रत वेदवाचस्पतिप्रकाशन  मंदिर , गुरुकुल  कांगड़ी विश्विद्यालय , हरिद्वार 
  2. Book: Rgveda Samhita, Vol XIII, Swami Satya Prakash Saraswati & Satyakam Vidyalankar,Ved Pratishthana, New Delhi
  3. उषा  देवता ”  ऋग्वेद  का  सुबोध  भाष्यपं  श्री पाद दामोदर सातवलेकरस्वाध्याय मंडल, औंध 
  4. अथर्ववेद-हिंदी भाष्य भाग १ – २, क्षेमकरणदास त्रिवेदी, सार्वदेशिक आर्य  प्रतिनिधि  सभा, दिल्ली 
  5. अथर्ववेद का सुबोध  भाष्य  ( अध्याय ७ –१०) श्रीपाद दामोदर सातवलेकर
  6. ऋग्वेद भाष्यम, भाग III , स्वामी दयानंद सरस्वती , वैदिक यन्त्रालय
  7. वागंभृणीय, डा. प्रियंवदा वेदभार

 

अनुवादक- आर्यबाला

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19 COMMENTS

  1. क्या `नियोग´ की व्यवस्था ईश्वर ने दी है?
    हालाँकि उन्होंने लोगों को दुर्गुणों से दूर रहने की नसीहत करके समाज का कुछ भला किया है लेकिन विधवा औरत और विधुर मर्द को अपने जीवन साथी की मौत के बाद पुनर्विवाह करने से वेदों के आधार पर रोक दिया है और बिना दोबारा विवाह किये ही दोनों को `नियोग´ द्वारा सन्तान उत्पन्न करने की व्यवस्था दी है। इस सम्बंध में सत्यार्थप्रकाश के चतुर्थसमुल्लास में पृष्‍ठ संख्या 73 से 81 तक पूरे 9 पृष्‍ठों में वेदमन्त्रों सहित पूर्ण विवरण दिया गया है। स्वामीजी के अनुसार एक विधवा स्त्री बच्चे पैदा करने के लिए वेदानुसार दस पुरूषों के साथ `नियोग´ कर सकती है और ऐसे ही एक विधुर मर्द भी दस स्त्रियों के साथ `नियोग´ कर सकता है। बल्कि यदि पति बच्चा पैदा करने के लायक़ न हो तो पत्नि अपने पति की इजाज़त से उसके जीते जी भी अन्य पुरूष से `नियोग´ कर सकती है। स्वामी जी को इसमें कोई पाप नज़र नहीं आता।
    (28) क्या वाक़ई ईश्वर ऐसी व्यवस्था देगा जिसे मानने के लिए खुद वेद प्रचारक ही तैयार नहीं हैं?
    ऐसा लगता है कि या तो वेदों में क्षेपक हो गया है या फिर `नियोग´ की वैदिक व्यवस्था किसी विशेष काल के लिए थी, सदा के लिए नहीं थी । ईश्वर की ओर से सदा के लिए किसी अन्य व्यवस्था का भेजा जाना अभीष्ट था। कौन सी व्यवस्था? पुनर्विवाह की व्यवस्था।
    जी हाँ, केवल पुनर्विवाह के द्वारा ही विधवा और विधुर दोनों की समस्या का सम्मानजनक हल संभव है। ईश्वर ने क़ुरआन में यही व्यवस्था दी है।
    क्या कोई मूर्ख व्यक्ति चतुर और निपुण हो सकता है?
    (29) इसी प्रकार हालाँकि स्वामी जी ने शूद्रों को भी थोड़ी बहुत राहत पहुंचाई है लेकिन फिर भी उन्हें अन्य वर्णों से नीच ही माना है। दयानन्द जी खुद भी `शूद्र´ और उसके कार्य को लेकर भ्रमित हैं। उदाहरणार्थ – सत्यार्थप्रकाश, पृष्‍ठ 50 पर `निर्बुद्धि और मूर्ख का नाम शूद्र´ बताते हैं और पृष्‍ठ 73 पर `शूद्र को सब सेवाओं में चतुर, पाक विद्या में निपुण´ भी बताते हैं। क्या कोई मूर्ख व्यक्ति, चतुर और निपुण हो सकता है? क्या बुद्धि और कला कौशल से युक्त होते ही उसका `वर्ण´ नहीं बदल जायेगा?
    (30) क्या ऊंचनीच को मानते हुए भेदभाव रहित प्रेमपूर्ण, समरस और उन्नति के समान अवसर देने वाला समाज बना पाना संभव है?

    • adarniy shri jay kumar ji, niyog ki vyvastha “aapatkal “ke liye hai ! jo mahilaye banjh hoya purush napunsak ho aur yah la ilaj ho jaye tab ke liye hai aaj to ilaj bahuto ka ho jata hai isliye aaj niyog ki jarurat nahi hai !
      pahale abadi bahut kam thi aur dharti bahut jyada thi us dharti ki rakshake liye aur sampaptti adi ki raksha ke liye santano ki jyada jarurat thi aaj abadi bahut jyada hai har parivar ko adhiktam 1- ya 2 santan honi chahiye isliye 10 bachho ki baat aj ke samay ke anu kul bhi nahi kahi jayegi ! kya aapne bahut se hoshyar chaprasi nahi dekhe majdur nahi dekhe unko bhi to shudr hi kaha jayega ! jiske paas apne kary ki nipurnta ho lekinpadha likha n ho usko aap kya kahenge ! bahut se log padhne se bhi nahi padh pate jaise koi art saide ka vyakti vignyan ki baat samajhn eme smarth hota hai vaise hi bahut se majdur adi bhi M.B.A. adi ka gyan samajne me asmarth hote hai ! chikitskiy gayan samjhne me asmarth rahate hai ! unko ap shudr kah sakte hai ! shudr bhi nafarat ke yogy hargij nahi hai vah apn e kary ka pandity rakhta hai ! kushalta rakhta hai ! fir bhi uski ek shreni to hai hi !
      jo vidvan hai usko to sabhi achha hai kahenge vah sansar ke kisi bhi kone me sammaan prapt kar sakta hai !

    • Tum maha murkh ho vo shlok bato jaha shudra ki gaan vaan bataya hai sirf varnan kar do me tumhare kadam chuniya…. My no is……. Waiting for your ans

  2. And Ashish it clearly looks you did not search Google. In fact you just typed any thing and every thing false to degrade the reputation of Hinduism.
    So be careful next time not any Hindu is as stupid to ask this type of question.
    Every Hindu Has Ramayan and Geeta in their home which gives many of this kind of answer.
    If you are Muslim then avoid to this and respect our books and religion otherwise lot of things can come from Quraan.

  3. Ashish
    There was nothing like artificial insemenation in anciant time as I clear above. Read that. and the process of embryo transplant was risky to its and mothers life. So need much expertise and have less popularity.

    every sage does not knew every thing so could treat himself or his wife in every manner.

    Now First of All Under stand when we feel trouble we share it with our parents or if they are not available or it is hard problem then with God. And all know God is almighty and everything for all of us that is why women whether it is Sage wife, common or queen or even all that time or today pray to God even today many of us do it for our big problems or even same problem as your question then simultaneously we also look for treatment.

    I would also clear here Sages that time was working also as Doctor (Vaidh) They were not greedy they did not charge fees because in our Granth it is mentioned that sages can not demand fees more then the capability of yajman so many times they done it free as sewa bhav . but patient give them according to their capability. Medicine was made from plant so they was also almost free.

    Now see other fact that there were so many sages and all with their own different knowledge and capability.

    there are so many mantras for santan prapti but not every sage knew.

    That is why sage Vashisht send Raja Dashrath to Rishyasring because he was expert in that.

    He started Putra kameshthi yagya request / Pray to God for santan also on other hand see it as he given medicine as a doctor to queens but before it he pray to god as anciant Ayurveda doctor used to do. See even today many pregnancy problem can be rectified with just medicine.

    And Bhagwan Parshuram Killed Fightable kshatriya and kshatriya who fight with him not there children.

    and prostitution was not in vedic kaal that time they were called Nartaki and they just produce the dancing art for the smae they were known.

  4. This is a myth that Hindu women used to intercourse with sage or with others or use there semen to get pregnant. because these all are against Dharam.

    This is against Dharam not only for Ladies but for their Husband also for Sages (Who worshiped for Moksh). Did you ever think their husband allowed them for this? Today men Murder women for this reason that time would they allow?

    Think, In Hindu Dharam, Adoption & Multiple marriage were provisions.

    Our granth also says if king has no son or daughter then praja uski Aulad hai or Uske marne per praja ya koi bhi rishtedar uska sanskar kar use gati dila sakta hai.

    Read the Garud Puran again.

    Then where this question Stands ? Only a cheap less knowledged Muslim can ask these kind of cheap question.

    Hindu Aurat Dharam Per hi chala karti thi or chalti hai. It is a common sense and we all Hindu have very good example in our study and in home.

    Everyone Remember Mata Sita who did not come with Hanuman ji Because she did not want to touch Per-Purush this is even when Hanuman G used to say her Mata and She Used to Say him Putra.

    Remeber Rani Padmini and others ladies who burnt them selves because they did not want to be seen and touch by Per-Purush.

    Remember Rani Laxmi Bai She Adopted a son

  5. This is a myth that Hindu women used to intercourse with sage or with others or use there semen to get pregnant. because these all are against Dharam.
    This is against Dharam not only for Ladies but for their Husband also for Sages (Who worshiped for Moksh). Did you ever think their husband allowed them for this? Today men Murder women for this reason that time would they allow?
    Think, In Hindu Dharam, Adoption & Multiple marriage were provisions.
    Our granth also says if king has no son or daughter then praja uski Aulad hai or Uske marne per praja ya koi bhi rishtedar uska sanskar kar use gati dila sakta hai. .
    Read the Garud Puran again.
    Then where this question Stands ? Only a cheap less knowledged Muslim can ask these kind of cheap question.
    Hindu Aurat Dharam Per hi chala karti thi or chalti hai. It is a common sense and we all Hindu have very good example in our study and in home.
    Everyone Remember Mata Sita who did not come with Hanuman ji Because she did not want to touch Per-Purush this is even when Hanuman G used to say her Mata and She Used to Say him Putra.
    Remeber Rani Padmini and others ladies who burnt them selves because they did not want to be seen and touch by Per-Purush. Remember Rani Laxmi Bai She Adopted a son
    Sages that time was working also as Doctor (Vaidh) They were not greedy they did not charge fees because in our Granth it is clear that sages can not demand fees more then the capability of yajman. So patient give them according to their capablity. Medicine was made from plant so they was also almost free. Now see other fact there are so many mantras for santan prapti but not every sage knew. That is why sage Vashisht send Raja Dashrath to Rishyasring because he was expert in that. He started yagya request God for santan also on other hand see it as he given medicine as a doctor to queens but before it he pray to God as anciant Ayurveda doctor used to do. Even if you see today many pregnancy problem can be rectified with just medicines

  6. Niyog is kind of yoga. And by the time when these Veda, Purana was written; That time Sage were teachers, scientist, Doctor etc.. they explained each and every thing of Veda, Purana to their students with good examples, also they train them to fight, yoga, But may be you know it is human psychology that if you say something to someone now, every time words changes as time & person changes. The same happen with our Granths these are very old and every person changes its meaning as they understand because from a long time (1000 years or more) we lost many of our good teacher/ Sages due to effect of outsiders attack. this also given a little loss on our culture. But any how I try to answer as you said niyog so in ancient time there was nothing like transplant of semens to any lady.but yes because of science and yoga a lady can transplant her embryo to other lady you will find its example as Balram in Mahabharata because he transplanted by Devki to Rohini (in Jail) before birth. Yes it is possible science because now a days a man can get pragnent and in more ancient time Bhagwan shree Shiv Ji transplant elephent head on a human body that is Bhagawan Shree Ganesh. So that time science yoga was much higher then today.

  7. Niyog is kind of yoga. And by the time when these Veda, Purana was written; That time Sage were teachers, scientist, Doctor etc.. they explained each and every thing of Veda, Purana to their students with good examples, also they train them to fight, yoga, But may be you know it is human psychology that if you say something to someone now, every time words changes as time & person changes. The same happen with our Granths these are very old and every person changes its meaning as they understand because from a long time (1000 years or more) we lost many of our good teacher/ Sages due to effect of outsiders attack. this also given a little loss on our culture. But any how I try to answer as you said niyog so in ancient time there was nothing like transplant of semens to any lady.but yes because of science and yoga a lady can transplant her embryo to other lady you will find its example as Balram in Mahabharata because he transplanted by Devki to Rohini (in Jail) before birth. Yes it is possible science because now a days a man can get pragnent and in more ancient time Bhagwan shree Shiv Ji transplant elephent head on a human body that is Bhagawan Shree Ganesh. So understand that time science and yoga was much higher then today.

    In Hinduism every person is free to worship their lord to fulfill their need because they are our father or Mother (Twameva Mata Cha pita Twemeva, Twameva Bandhus cha sakah Twameva, Twameva Vidya Dravinam Twameva,Twameva Sarvam Mam Deva Deva) so if we need help / Solutions from our parents then what is the problem and where it is wrong.

    From ancient time women are called Devi in Hinduism because they follow Dharam and they even did not think about other person then how can they intercourse with them. They never.did that

    Remember Mata Sita who did not come with Hanuman G from lanka because she never want to touch Per-Purush even Hanuman G used to say her Mata also she said him Putra.
    and Rani Padmini who burnt herself with many ladies

  8. इस्में कोई संदेह नही कि हमारी प्राचीन सभ्यता एवं संस्कृति में नारी को न केवल पुरुष के समान अधिकार प्राप्त थे,
    नारी को बड़े ही आदर और सम्मान का दर्जा प्राप्त था. विचार करें नारी के प्रति दृस्टिकोण में बदलाव के क्या
    कारण हो सकते हैं?

  9. Agniveer ji pls niyog ke baare me ek clear article dijiye ki kya ved me niyog karne ki permission hai.Maine apki web site se ek rig ved download ki thi usme niyog karne ki permission di hai.lekin aapne women in hinduism me likha hai ki ved me niyog hai hi nahi.Aur apki website se maine manusmriti bhi download ki usme bhi niyog karne ki permission di hai.Please clear kijiye ki kya santan prapti ke liye ek patni aur ek vidhwa apni izzat aur pavitrta ke saath ramjhauta kar sakti hai , aur kya ek patni apne pati ke jiteji apne pativrata dharma ko bhulkar kisi aur aadmi ke saath sambhandh bana sakti hai vo bhi sirf isliye ki uske pati me sirf ek chhoti si sharirik kami ke karan.Maine to aap hi ke ek article me padha tha ki insan jab bhi vipatti me ho to use apna dharma nahi bhulna chahiye to fir ek aurat apni patni hone ka dharm kaise bhul sakti hai aur kisi paraye mard ke saath sambhog kaise kar sakti hai.Aise to ved strii samman me khud ko galat saabit kar raha hai.

    • OM Ashish

      Vedic Kaal mein Pati Patni ka sambandh sahrerik nahi tha,Santan Prapti ke liye hi woh Sahririk Sambandh Stapith karte thai.Anyatha nahi.

      Niyog ek bahut pavitra vidhi hai.
      Now a days you can see when women is not able to produce kid due to omptence of men,they go to Dr and get seminal fluid of some other men or get artifical embryonic transplant in their womb to get baby.This is being done in western nations and some places in india.

      This is basically Niyog….In Vedic Times..ancient sages were like scientists and they used to artificially inseminate women with their sperm which was of highest Quality due to their meditation power.They user to artificially inseminate by using some ancient technique.

      People think that they are doing intercourse.This is wrong.During the process it was considered that women will not get disturbed else insemination can go wrong or effect child.Now a days also during artificial insemination women is advised to be calm and should be worry free.Same happened during that time.

      It is artificial insemination doe by only few people during ancient time.

      OM

      • Thnks for this article.
        Lekin agniveer ne to kaha tha ki ved me niyog hai hi nahi.
        Aapne akhri me likha hai “this was done by few people” iska matlab baki aurte kisi aur ke saath physical hoti thi kyoki sages jada fees lete honge?

        Aur agar pehle artificial insemenation hote the to rishi aur unki patniya santan prapti ke liye bhagvan ki tapasya kyo karte the .for eg. Sri Ram ke pita dashrath ne putra prapti ke liye putrakaamesthi yagya kyo karwaya tha ?aur markande rishi ke mata pita ne putra prapti ke liye shiv ki tapasya kyo ki thi?

        Kya sharab aur jua ki shuruat india me hui thi.
        Agniveer ke article me ek prostitute ka zikr hai jiska naam JABLA tha .agar vedic kaal me aurto ki izat hoti thi to JABLA prostitute kaise bani.

        Parshuram ne jab 21 baar kshatriyon ka naash kar diya tha to fir unka vansh aage kaise badha. Maine google pe padha tha ki kshatriyon ki widhvao ne rishi se najayaz sambhand banaye the.kya yeh sach hai.

        Kya widhva ko dusri shaadi karne ki anumati hai kyonki garuda purana me aisa nhi hai usme likha hai ki shaadi se pehle agar uska hone vala pati mar jaye to vo santan prapti ke liye apne devar ke saath intercourse kar sakti hai. Lekin dusri shaadi nai.aur jaha tak mai janta hu to apne pati ke alava kisi aur ke saath aisa karna paap hai aur mere mommy ne mujhe bataya tha ki devar -bhabhi ka rishta maa-bete k rishta hota hai.

        Kya sabhi purano ki rachna vedvyas ne ki thi.
        Mahabharat me adultery ya ashlilta jaisa kuch hai kya?

        Kya brahmano ko apni pasand ki ladki/ladke se shadi nahi karni chahiye?

  10. @All Hindu & Muslim Brothers
    Here is a question which was asked to world’s Greatest Islamic Scholar e.i. http://satyagni.com/fatwa-online/ Are all satisfied with the answer given by this Great Islamic Preacher?
    Q. can women still be right hand possessions or willing slaves?
    Ans. ” Salam. Lahaul wila Kuvvat illa billa. Who is this person inspired by Satan to ask this? Women were never to be made slaves or concubines. Anyone who advocated so was himself Satan. Prophet Rehman (SAW) writes in his Hadith Noor e Haq (Light of Truth) that every woman other than your wife is like your mother. Then who the hell someone make other women as slaves? Where is it written? All those books and perverts that suggest slavery of women deserve to be burnt in public. Allah will show His wrath on those who even think of such heinous crimes. Fear Allah and repent for that how you even thought of asking such disgusting question. Repent before it is late and Allah is most merciful. And Allah knows the best! “

  11. Vedas truly place women on very high pedestal.

    unlike quran and bible vedas dont discriminate and/or dont have gender discrimination

  12. श्रीमत परमहंस अग्निवीराचार्य्य सरस्वती जी महाराज की वेबसाइट में एक और अति उत्तम लेख ! हम जैसे तुच्छ प्राणीयों पर अत्यंत दया करके ज्ञान की बौछार हो रही है.

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