भारत में आज अनेक संकट छाये हुए हैं – भ्रष्टाचार, आतंकवाद, कट्टरवाद, धर्मांतरण, नैतिक अध : पतन, अशिक्षा, चरमरायी हुई स्वास्थ्य व्यवस्था, सफ़ाई की समस्या वगैरह – वगैरह | पर इन सभी से ज्यादा भयावह है – जन्मना जातिवाद और लिंग भेद | क्योंकि यह दो मूलभूत समस्याएँ ही बाकी समस्याओं को पनपने में मदद करती हैं | यह दो प्रश्न ही हमारे भूत और वर्तमान की समस्त आपदाओं का मुख्य कारण हैं |  इन को मूल से ही नष्ट नहीं किया तो हमारा उज्जवल भविष्य सिर्फ़ एक सपना बनकर रह जाएगा क्योंकि एक समृद्ध और समर्थ समाज का अस्तित्व जाति प्रथा और लिंग भेद के साथ नहीं हो सकता |

यह भी गौर किया जाना चाहिए कि जाति भेद और लिंग भेद केवल हिन्दू समाज की ही समस्याएँ नहीं हैं किन्तु यह दोनों सांस्कृतिक समस्याएँ हैं | लिंग भेद सदियों से वैश्विक समस्या रही है और जाति भेद दक्षिण एशिया में पनपी हुई, सभी धर्मों और समाजों को छूती हुई समस्या है | चूँकि हिन्दुत्व सबसे प्राचीन संस्कृति और सभी धर्मों का आदिस्रोत है, इसी पर व्यवस्था को भ्रष्ट करने का आक्षेप मढ़ा जाता है | यदि इन दो कुप्रथाओं को हम ढोते रहते हैं तो समाज इतना दुर्बल हो जाएगा कि विभिन्न सम्प्रदायों और फिरकों में बिखरता रहेगा जिससे देश कमजोर होगा और टूटेगा |

अपनी कमजोरी और विकृतियों के बारे में हमने इतिहास से कोई शिक्षा नहीं ली है |  आज की तारीख़ में भी कुछ शिक्षित और बुद्धिवादी कहे जाने वाले लोग इन दो कुप्रथाओं का समर्थन करते हैं – यह आश्चर्य की बात है |  जन्म से ही ऊँचेपन का भाव इतना हावी है कि वह किसी समझदार को भी पागल बना दे | इस वैचारिक संक्रमण से ग्रस्त कुछ लोग आज हिन्दुत्व के विद्वानों और नेतागणों में  भी गिने जा रहे हैं | अनजान बनकर यह लोग इन कुप्रथाओं का समर्थन करने के लिए प्राचीन शास्त्रों का हवाला देते हैं जिस में समाज व्यवस्था देनेवाली प्राचीनतम मनुस्मृति को सबसे अधिक केंद्र बनाया जाता है | वेदों को भी इस कुटिलता में फंसाया गया, जिसका खंडन हम  http://agniveer.com/series/caste-series/ में कर चुके हैं |

मनुस्मृति जो सृष्टि में नीति और धर्म ( कानून) का निर्धारण करने वाला सबसे पहला ग्रंथ माना गया है उस को घोर जाति प्रथा को बढ़ावा देने वाला भी बताया जा रहा है |आज स्थिति यह है कि मनुस्मृति वैदिक संस्कृति की सबसे अधिक विवादित पुस्तकों में है | पूरा का पूरा दलित आन्दोलन ‘ मनुवाद ‘ के विरोध पर ही खड़ा हुआ है |

मनु जाति प्रथा के समर्थकों के नायक हैं तो दलित नेताओं ने उन्हें खलनायक के सांचे में ढाल रखा है | पिछड़े तबकों के प्रति प्यार का दिखावा कर स्वार्थ की रोटियां सेकने के लिए ही अग्निवेश और मायावती जैसे बहुत से लोगों द्वारा मनुस्मृति जलाई जाती रही है | अपनी विकृत भावनाओं को पूरा करने के लिए नीची जातियों पर अत्याचार करने वाले, एक सींग वाले विद्वान राक्षस के रूप में भी मनु को चित्रित किया गया है | हिन्दुत्व और वेदों को गालियां देने वाले कथित सुधारवादियों के लिए तो मनुस्मृति एक पसंदीदा साधन बन गया है| विधर्मी वायरस पीढ़ियों से हिन्दुओं के धर्मांतरण में इससे फ़ायदा उठाते आए हैं जो आज भी जारी है | ध्यान देने वाली बात यह है कि मनु की निंदा करने वाले इन लोगों ने मनुस्मृति को कभी गंभीरता से पढ़ा भी है कि नहीं |

दूसरी ओर जातीय घमंड में चूर और उच्चता में अकड़े हुए लोगों के लिए मनुस्मृति एक ऐसा धार्मिक ग्रंथ है जो उन्हें एक विशिष्ट वर्ग में नहीं जन्में लोगों के प्रति सही व्यवहार नहीं करने का अधिकार और अनुमति देता है| ऐसे लोग मनुस्मृति से कुछ एक गलत और भ्रष्ट श्लोकों का हवाला देकर जातिप्रथा को उचित बताते हैं पर स्वयं की अनुकूलता और स्वार्थ के लिए यह भूलते हैं कि वह जो कह रहे हैं उसे के बिलकुल विपरीत अनेक श्लोक हैं |

इन दोनों शक्तियों के बीच संघर्ष ने आज भारत में निचले स्तर की राजनीति को जन्म दिया है |भारतवर्ष पर लगातार पिछले हजार वर्षों से होते आ रहे आक्रमणों के लिए भी यही जिम्मेदार है| सदियों तक नरपिशाच,गोहत्यारे और पापियों से यह पावन धरती शासित रही| यह अतार्किक जातिप्रथा ही १९४७ में हमारे देश के बंटवारे का प्रमुख कारण रही है| कभी विश्वगुरु और चक्रवर्ती सम्राटों का यह देश था | आज भी हम में असीम क्षमता और बुद्धि धन है फ़िर भी हम समृद्धि और सामर्थ्य की ओर अपने देश को नहीं ले जा पाए और निर्बल और निराधार खड़े हैं – इस का प्रमुख कारण यह मलिन जाति प्रथा है| इसलिए मनुस्मृति की सही परिपेक्ष्य में जाँच – परख़ अत्यंत आवश्यक हो जाती है |


मनुस्मृति पर लगाये जाने वाले तीन मुख्य आक्षेप :

१. मनु ने जन्म के आधार पर जातिप्रथा का निर्माण किया |

२. मनु ने शूद्रों के लिए कठोर दंड का विधान किया और ऊँची जाति खासकर ब्राह्मणों के लिए विशेष प्रावधान रखे |

३. मनु नारी का विरोधी था और उनका तिरस्कार करता था | उसने स्त्रियों के लिए पुरुषों से कम अधिकार का विधान किया |

आइये अब मनुस्मृति के साक्ष्यों पर ही हम इन आक्षेपों की समीक्षा करें | इस लेख में हम पहले आरोप – मनु द्वारा जन्म आधारित जाति प्रथा के निर्माण पर विचार करेंगे |

पाठकों से निवेदन है कि वे http://agniveer.com/series/caste-series/को पढ़ें ताकि ब्राह्मण, क्षत्रिय, वैश्य और शूद्र के सही अर्थों को समझ सकें|

मनुस्मृति और जाति व्यवस्था : 

मनुस्मृति उस काल की है जब जन्मना जाति व्यवस्था के विचार का भी कोई अस्तित्व नहीं था | अत: मनुस्मृति जन्मना समाज व्यवस्था का कहीं भी समर्थन नहीं करती | महर्षि मनु ने मनुष्य के गुण- कर्म – स्वभाव पर आधारित समाज व्यवस्था की रचना कर के वेदों में परमात्मा द्वारा दिए गए आदेश का ही पालन किया है (देखें – ऋग्वेद-१०.१०.११-१२, यजुर्वेद-३१.१०-११, अथर्ववेद-१९.६.५-६) |

यह वर्ण व्यवस्था है | वर्ण शब्द “वृञ” धातु से बनता है जिसका मतलब है चयन या चुनना और सामान्यत: प्रयुक्त शब्द वरण भी यही अर्थ रखता है | जैसे वर अर्थात् कन्या द्वारा चुना गया पति, जिससे पता चलता है कि वैदिक व्यवस्था कन्या को अपना पति चुनने का पूर्ण अधिकार देती है |

मनुस्मृति में वर्ण व्यवस्था को ही बताया गया है और जाति व्यवस्था को नहीं इसका सबसे बड़ा प्रमाण यह है कि मनुस्मृति के प्रथम अध्याय में कहीं भी जाति या गोत्र शब्द ही नहीं है  बल्कि वहां चार वर्णों की उत्पत्ति का वर्णन है | यदि जाति या गोत्र का इतना ही महत्त्व होता तो मनु इसका उल्लेख अवश्य करते कि कौनसी जाति ब्राह्मणों से संबंधित है, कौनसी क्षत्रियों से, कौनसी वैश्यों और शूद्रों से |

इस का मतलब हुआ कि स्वयं को जन्म से ब्राह्मण या उच्च जाति का मानने वालों के पास इसका कोई प्रमाण नहीं है | ज्यादा से ज्यादा वे इतना बता सकते हैं कि कुछ पीढ़ियों पहले से उनके पूर्वज स्वयं को ऊँची जाति का कहलाते आए हैं | ऐसा कोई प्रमाण नहीं है कि सभ्यता के आरंभ से ही यह लोग ऊँची जाति के थे | जब वह यह साबित नहीं कर सकते तो उनको यह कहने का क्या अधिकार है कि आज जिन्हें जन्मना शूद्र माना जाता है, वह कुछ पीढ़ियों पहले ब्राह्मण नहीं थे ? और स्वयं जो अपने को ऊँची जाति का कहते हैं वे कुछ पीढ़ियों पहले शूद्र नहीं थे ?

मनुस्मृति ३.१०९ में साफ़ कहा है कि अपने गोत्र या कुल की दुहाई देकर भोजन करने वाले को स्वयं का उगलकर खाने वाला माना जाए | अतः मनुस्मृति के अनुसार जो जन्मना ब्राह्मण या ऊँची जाति वाले अपने गोत्र या वंश का हवाला देकर स्वयं को बड़ा कहते हैं और मान-सम्मान की अपेक्षा रखते हैं उन्हें तिरस्कृत किया जाना चाहिए |

मनुस्मृति २. १३६: धनी होना, बांधव होना, आयु में बड़े होना, श्रेष्ठ कर्म का होना और विद्वत्ता यह पाँच सम्मान के उत्तरोत्तर मानदंड हैं | इन में कहीं भी कुल, जाति, गोत्र या वंश को सम्मान का मानदंड नहीं माना गया है |


वर्णों में परिवर्तन : 

मनुस्मृति १०.६५: ब्राह्मण शूद्र बन सकता और शूद्र ब्राह्मण हो सकता है | इसी प्रकार क्षत्रिय और वैश्य भी अपने वर्ण बदल सकते हैं |

मनुस्मृति ९.३३५: शरीर और मन से शुद्ध- पवित्र रहने वाला, उत्कृष्ट लोगों के सानिध्य में रहने वाला, मधुरभाषी, अहंकार से रहित, अपने से उत्कृष्ट वर्ण वालों की सेवा करने वाला शूद्र भी उत्तम ब्रह्म जन्म और द्विज वर्ण को प्राप्त कर लेता है |

मनुस्मृति के अनेक श्लोक कहते हैं कि उच्च वर्ण का व्यक्ति भी यदि श्रेष्ट कर्म नहीं करता, तो शूद्र (अशिक्षित) बन जाता है |

उदाहरण- 

२.१०३: जो मनुष्य नित्य प्रात: और सांय ईश्वर आराधना नहीं करता उसको शूद्र समझना चाहिए |

२.१७२: जब तक व्यक्ति वेदों की शिक्षाओं में दीक्षित नहीं होता वह शूद्र के ही समान है |

४.२४५ : ब्राह्मण- वर्णस्थ व्यक्ति श्रेष्ट – अति श्रेष्ट व्यक्तियों का संग करते हुए और नीच- नीचतर  व्यक्तिओं का संग छोड़कर अधिक श्रेष्ट बनता जाता है | इसके विपरीत आचरण से पतित होकर वह शूद्र बन जाता है | अतः स्पष्ट है कि ब्राह्मण उत्तम कर्म करने वाले विद्वान व्यक्ति को कहते हैं और शूद्र का अर्थ अशिक्षित व्यक्ति है | इसका, किसी भी तरह जन्म से कोई सम्बन्ध नहीं है |

२.१६८: जो ब्राह्मण,क्षत्रिय या वैश्य वेदों का अध्ययन और पालन छोड़कर अन्य विषयों में ही परिश्रम करता है, वह शूद्र बन जाता है | और उसकी आने वाली पीढ़ियों को भी वेदों के ज्ञान से वंचित होना पड़ता है | अतः मनुस्मृति के अनुसार तो आज भारत में कुछ अपवादों को छोड़कर बाकी सारे लोग जो भ्रष्टाचार, जातिवाद, स्वार्थ साधना, अन्धविश्वास, विवेकहीनता, लिंग-भेद, चापलूसी, अनैतिकता इत्यादि में लिप्त हैं – वे सभी शूद्र हैं |

२ .१२६: भले ही कोई ब्राह्मण हो, लेकिन अगर वह अभिवादन का शिष्टता से उत्तर देना नहीं जानता तो वह शूद्र (अशिक्षित व्यक्ति) ही है |

शूद्र भी पढ़ा सकते हैं :

शूद्र भले ही अशिक्षित हों तब भी उनसे कौशल और उनका विशेष ज्ञान प्राप्त किया जाना चाहिए |

२.२३८: अपने से न्यून व्यक्ति से भी विद्या को ग्रहण करना चाहिए और नीच कुल में जन्मी उत्तम स्त्री को भी पत्नी के रूप में स्वीकार कर लेना चाहिए|

२.२४१ : आवश्यकता पड़ने पर अ-ब्राह्मण से भी विद्या प्राप्त की जा सकती है और शिष्यों को पढ़ाने के दायित्व का पालन वह गुरु जब तक निर्देश दिया गया हो तब तक करे |

ब्राह्मणत्व का आधार कर्म :

मनु की वर्ण व्यवस्था जन्म से ही कोई वर्ण नहीं मानती | मनुस्मृति के अनुसार माता- पिता को बच्चों के बाल्यकाल में ही उनकी रूचि और प्रवृत्ति को पहचान कर ब्राह्मण, क्षत्रिय या वैश्य वर्ण का ज्ञान और प्रशिक्षण प्राप्त करने के लिए भेज देना चाहिए |

कई ब्राह्मण माता – पिता अपने बच्चों को ब्राह्मण ही बनाना चाहते हैं परंतु इस के लिए व्यक्ति में ब्रह्मणोचित गुण, कर्म,स्वभाव का होना अति आवश्यक है| ब्राह्मण वर्ण में जन्म लेने मात्र से या ब्राह्मणत्व का प्रशिक्षण किसी गुरुकुल में प्राप्त कर लेने से ही कोई ब्राह्मण नहीं बन जाता, जब तक कि उसकी योग्यता, ज्ञान और कर्म ब्रह्मणोचित न हों |

२.१५७ : जैसे लकड़ी से बना हाथी और चमड़े का बनाया हुआ हरिण सिर्फ़ नाम के लिए ही हाथी और हरिण कहे जाते हैं वैसे ही बिना पढ़ा ब्राह्मण मात्र नाम का ही ब्राह्मण होता है |

२.२८: पढने-पढ़ाने से, चिंतन-मनन करने से, ब्रह्मचर्य, अनुशासन, सत्यभाषण आदि व्रतों का पालन करने से, परोपकार आदि सत्कर्म करने से, वेद, विज्ञान आदि पढने से, कर्तव्य का पालन करने से, दान करने से और आदर्शों के प्रति समर्पित रहने से मनुष्य का यह शरीर ब्राह्मण किया जाता है |

शिक्षा ही वास्तविक जन्म  :

मनु के अनुसार मनुष्य का वास्तविक जन्म विद्या प्राप्ति के उपरांत ही होता है | जन्मतः प्रत्येक मनुष्य शूद्र या अशिक्षित है | ज्ञान और संस्कारों से स्वयं को परिष्कृत कर योग्यता हासिल कर लेने पर ही उसका दूसरा जन्म होता है और वह द्विज कहलाता है | शिक्षा प्राप्ति में असमर्थ रहने वाले शूद्र ही रह जाते हैं |

यह पूर्णत: गुणवत्ता पर आधारित व्यवस्था है, इसका शारीरिक जन्म या अनुवांशिकता से कोई लेना-देना नहीं है|

२.१४८ : वेदों में पारंगत आचार्य द्वारा शिष्य को गायत्री मंत्र की दीक्षा देने के उपरांत ही उसका वास्तविक मनुष्य जन्म होता है | यह जन्म मृत्यु और विनाश से रहित होता है |ज्ञानरुपी जन्म में दीक्षित होकर मनुष्य मुक्ति को प्राप्त कर लेता है| यही मनुष्य का वास्तविक उद्देश्य है| सुशिक्षा के बिना मनुष्य ‘ मनुष्य’ नहीं बनता|

इसलिए ब्राह्मण, क्षत्रिय, वैश्य होने की बात तो छोडो जब तक मनुष्य अच्छी तरह शिक्षित नहीं होगा तब तक उसे मनुष्य भी नहीं माना जाएगा |

२.१४६ : जन्म देने वाले पिता से ज्ञान देने वाला आचार्य रूप पिता ही अधिक बड़ा और माननीय है, आचार्य द्वारा प्रदान किया गया ज्ञान मुक्ति तक साथ देता हैं | पिताद्वारा प्राप्त शरीर तो इस जन्म के साथ ही नष्ट हो जाता है|

२.१४७ :  माता- पिता से उत्पन्न संतति का माता के गर्भ से प्राप्त जन्म साधारण जन्म है| वास्तविक जन्म तो शिक्षा पूर्ण कर लेने के उपरांत ही होता है|

अत: अपनी श्रेष्टता साबित करने के लिए कुल का नाम आगे धरना मनु के अनुसार अत्यंत मूर्खतापूर्ण कृत्य है | अपने कुल का नाम आगे रखने की बजाए व्यक्ति यह दिखा दे कि वह कितना शिक्षित है तो बेहतर होगा |

१०.४: ब्राह्मण, क्षत्रिय और वैश्य, ये तीन वर्ण विद्याध्ययन से दूसरा जन्म प्राप्त करते हैं | विद्याध्ययन न कर पाने वाला शूद्र, चौथा वर्ण है | इन चार वर्णों के अतिरिक्त आर्यों में या श्रेष्ट मनुष्यों में पांचवा कोई वर्ण नहीं है |

इस का मतलब है कि अगर कोई अपनी शिक्षा पूर्ण नहीं कर पाया तो वह दुष्ट नहीं हो जाता | उस के कृत्य यदि भले हैं तो वह अच्छा इन्सान कहा जाएगा | और अगर वह शिक्षा भी पूरी कर ले तो वह भी द्विज गिना जाएगा | अत: शूद्र मात्र एक विशेषण है, किसी जाति विशेष का नाम नहीं |

‘नीच’ कुल में जन्में व्यक्ति का तिरस्कार नहीं :   

किसी व्यक्ति का जन्म यदि ऐसे कुल में हुआ हो, जो समाज में आर्थिक या अन्य दृष्टी से पनप न पाया हो तो उस व्यक्ति को केवल कुल के कारण पिछड़ना न पड़े और वह अपनी प्रगति से वंचित न रह जाए, इसके लिए भी महर्षि मनु ने नियम निर्धारित किए हैं |

४.१४१: अपंग, अशिक्षित, बड़ी आयु वाले, रूप और धन से रहित या निचले कुल वाले, इन को आदर और / या अधिकार से वंचित न करें | क्योंकि यह किसी व्यक्ति की परख के मापदण्ड नहीं हैं|

प्राचीन इतिहास में वर्ण परिवर्तन के उदाहरण :

ब्राह्मण, क्षत्रिय,वैश्य और शूद्र वर्ण की सैद्धांतिक अवधारणा गुणों के आधार पर है, जन्म के आधार पर नहीं | यह बात सिर्फ़ कहने के लिए ही नहीं है, प्राचीन समय में इस का व्यवहार में चलन था | जब से इस गुणों पर आधारित वैज्ञानिक व्यवस्था को हमारे दिग्भ्रमित पुरखों ने मूर्खतापूर्ण जन्मना व्यवस्था में बदला है, तब से ही हम पर आफत आ पड़ी है जिस का सामना आज भी कर रहें हैं|

 वर्ण परिवर्तन के कुछ उदाहरण – 

(a) ऐतरेय ऋषि दास अथवा अपराधी के पुत्र थे | परन्तु उच्च कोटि के ब्राह्मण बने और उन्होंने ऐतरेय ब्राह्मण और ऐतरेय उपनिषद की रचना की | ऋग्वेद को समझने के लिए ऐतरेय ब्राह्मण अतिशय आवश्यक माना जाता है |

(b) ऐलूष ऋषि दासी पुत्र थे | जुआरी और हीन चरित्र भी थे | परन्तु बाद में उन्होंने अध्ययन किया और ऋग्वेद पर अनुसन्धान करके अनेक अविष्कार किये |ऋषियों ने उन्हें आमंत्रित कर के आचार्य पद पर आसीन  किया | (ऐतरेय ब्राह्मण २.१९)

(c) सत्यकाम जाबाल गणिका (वेश्या) के पुत्र थे परन्तु वे ब्राह्मणत्व को प्राप्त हुए  |

(d) राजा दक्ष के पुत्र पृषध शूद्र हो गए थे, प्रायश्चित स्वरुप तपस्या करके उन्होंने मोक्ष प्राप्त किया | (विष्णु पुराण ४.१.१४)
अगर उत्तर रामायण की मिथ्या कथा के अनुसार शूद्रों के लिए तपस्या करना मना होता तो पृषध ये कैसे कर पाए?

(e) राजा नेदिष्ट के पुत्र नाभाग वैश्य हुए | पुनः इनके कई पुत्रों ने क्षत्रिय वर्ण अपनाया | (विष्णु पुराण ४.१.१३)

(f) धृष्ट नाभाग के पुत्र थे परन्तु ब्राह्मण हुए और उनके पुत्र ने क्षत्रिय वर्ण अपनाया | (विष्णु पुराण ४.२.२)

(g) आगे उन्हींके वंश में पुनः कुछ ब्राह्मण हुए | (विष्णु पुराण ४.२.२)

(h) भागवत के अनुसार राजपुत्र अग्निवेश्य ब्राह्मण हुए |

(i) विष्णुपुराण और भागवत के अनुसार रथोतर क्षत्रिय से ब्राह्मण बने |

(j) हारित क्षत्रियपुत्र से ब्राह्मण हुए | (विष्णु पुराण ४.३.५)

(k) क्षत्रियकुल में जन्में शौनक ने ब्राह्मणत्व प्राप्त किया | (विष्णु पुराण ४.८.१) वायु, विष्णु और हरिवंश पुराण कहते हैं कि शौनक ऋषि के पुत्र कर्म भेद से ब्राह्मण, क्षत्रिय, वैश्य और शूद्र वर्ण के हुए| इसी प्रकार गृत्समद, गृत्समति और वीतहव्य के उदाहरण हैं |

(l) मातंग चांडालपुत्र से ब्राह्मण बने |

(m) ऋषि पुलस्त्य का पौत्र रावण अपने कर्मों से राक्षस बना |

(n) राजा रघु का पुत्र प्रवृद्ध राक्षस हुआ |

(o) त्रिशंकु राजा होते हुए भी कर्मों से चांडाल बन गए थे |

(p) विश्वामित्र के पुत्रों ने शूद्र वर्ण अपनाया | विश्वामित्र स्वयं क्षत्रिय थे परन्तु बाद उन्होंने ब्राह्मणत्व को प्राप्त किया |

(q) विदुर दासी पुत्र थे | तथापि वे ब्राह्मण हुए और उन्होंने हस्तिनापुर साम्राज्य का मंत्री पद सुशोभित किया |

(r) वत्स शूद्र कुल में उत्पन्न होकर भी ऋषि बने (ऐतरेय ब्राह्मण २.१९) |

(s) मनुस्मृति के प्रक्षिप्त श्लोकों से भी पता चलता है कि कुछ क्षत्रिय जातियां, शूद्र बन गईं | वर्ण परिवर्तन की साक्षी देने वाले यह श्लोक मनुस्मृति में बहुत बाद के काल में मिलाए गए हैं | इन परिवर्तित जातियों के नाम हैं – पौण्ड्रक, औड्र, द्रविड, कम्बोज, यवन, शक, पारद, पल्हव, चीन, किरात, दरद, खश |

(t) महाभारत अनुसन्धान पर्व (३५.१७-१८) इसी सूची में कई अन्य नामों को भी शामिल करता है – मेकल, लाट, कान्वशिरा, शौण्डिक, दार्व, चौर, शबर, बर्बर|

(u) आज भी ब्राह्मण, क्षत्रिय, वैश्य और दलितों में समान गोत्र मिलते हैं | इस से पता चलता है कि यह सब एक ही पूर्वज, एक ही कुल की संतान हैं | लेकिन कालांतर में वर्ण व्यवस्था गड़बड़ा गई और यह लोग अनेक जातियों में बंट गए |

शूद्रों  के प्रति आदर :

मनु परम मानवीय थे| वे जानते थे कि सभी शूद्र जानबूझ कर शिक्षा की उपेक्षा नहीं कर सकते | जो किसी भी कारण से जीवन के प्रथम पर्व में ज्ञान और शिक्षा से वंचित रह गया हो, उसे जीवन भर इसकी सज़ा न भुगतनी पड़े इसलिए वे समाज में शूद्रों के लिए उचित सम्मान का विधान करते हैं | उन्होंने शूद्रों के प्रति कभी अपमान सूचक शब्दों का प्रयोग नहीं किया, बल्कि मनुस्मृति में कई स्थानों पर शूद्रों के लिए अत्यंत सम्मानजनक शब्द आए हैं |

मनु की दृष्टी में ज्ञान और शिक्षा के अभाव में शूद्र समाज का सबसे अबोध घटक है, जो परिस्थितिवश भटक सकता है | अत: वे समाज को उसके प्रति अधिक सहृदयता और सहानुभूति रखने को कहते हैं |

कुछ और उदात्त उदाहरण देखें –

३.११२: शूद्र या वैश्य के अतिथि रूप में आ जाने पर, परिवार उन्हें सम्मान सहित भोजन कराए |

३.११६: अपने सेवकों (शूद्रों) को पहले भोजन कराने के बाद ही दंपत्ति भोजन करें |

२.१३७: धन, बंधू, कुल, आयु, कर्म, श्रेष्ट विद्या से संपन्न व्यक्तियों के होते हुए भी वृद्ध शूद्र को पहले सम्मान दिया जाना चाहिए |

मनुस्मृति वेदों पर आधारित :

वेदों को छोड़कर अन्य कोई ग्रंथ मिलावटों से बचा नहीं है | वेद प्रक्षेपों से कैसे अछूते रहे, जानने के लिए ‘ वेदों में परिवर्तन क्यों नहीं हो सकता ? ‘ पढ़ें | वेद ईश्वरीय ज्ञान है और सभी विद्याएँ उसी से निकली हैं | उन्हीं को आधार मानकर ऋषियों ने अन्य ग्रंथ बनाए|  वेदों का स्थान और प्रमाणिकता सबसे ऊपर है और उनके रक्षण से ही आगे भी जगत में नए सृजन संभव हैं | अत: अन्य सभी ग्रंथ स्मृति, ब्राह्मण, महाभारत, रामायण, गीता, उपनिषद, आयुर्वेद, नीतिशास्त्र, दर्शन इत्यादि को परखने की कसौटी वेद ही हैं | और जहां तक वे  वेदानुकूल हैं वहीं तक मान्य हैं |

मनु भी वेदों को ही धर्म का मूल मानते हैं (२.८-२.११)

२.८: विद्वान मनुष्य को अपने ज्ञान चक्षुओं से सब कुछ वेदों के अनुसार परखते हुए, कर्तव्य का पालन करना चाहिए |

इस से साफ़ है कि मनु के विचार, उनकी मूल रचना वेदानुकूल ही है और मनुस्मृति में वेद विरुद्ध मिलने वाली मान्यताएं प्रक्षिप्त मानी जानी चाहियें |

शूद्रों को भी वेद पढने और वैदिक संस्कार करने का अधिकार :

वेद में ईश्वर कहता है कि मेरा ज्ञान सबके लिए समान है चाहे पुरुष हो या नारी, ब्राह्मण हो या शूद्र सबको वेद पढने और यज्ञ करने का अधिकार है |

देखें – यजुर्वेद २६.१, ऋग्वेद १०.५३.४, निरुक्त ३.८  इत्यादि और  http://agniveer.com/series/caste-series/ |

और मनुस्मृति भी यही कहती है | मनु ने शूद्रों को उपनयन ( विद्या आरंभ ) से वंचित नहीं रखा है | इसके विपरीत उपनयन से इंकार करने वाला ही शूद्र कहलाता है |

वेदों के ही अनुसार मनु शासकों के लिए विधान करते हैं कि वे शूद्रों का वेतन और भत्ता किसी भी परिस्थिति में न काटें ( ७.१२-१२६, ८.२१६) |

संक्षेप में – 

मनु को जन्मना जाति – व्यवस्था का जनक मानना निराधार है | इसके विपरीत मनु मनुष्य की पहचान में जन्म या कुल की सख्त उपेक्षा करते हैं | मनु की वर्ण व्यवस्था पूरी तरह गुणवत्ता पर टिकी हुई है |

प्रत्येक मनुष्य में चारों वर्ण हैं – ब्राह्मण, क्षत्रिय, वैश्य और शूद्र | मनु ने ऐसा प्रयत्न किया है कि प्रत्येक मनुष्य में विद्यमान जो सबसे सशक्त वर्ण है – जैसे किसी में ब्राह्मणत्व ज्यादा है, किसी में क्षत्रियत्व, इत्यादि का विकास हो और यह विकास पूरे समाज के विकास में सहायक हो |

अगले लेखों में हम मनु पर थोपे गए अन्य आरोप जैसे शूद्रों के लिए कठोर दंड विधान तथा स्त्री विरोधी होने की सच्चाई को जानेंगे |

लेकिन मनु पाखंडी और आचरणहीनों के लिए क्या कहते हैं, यह भी देख लेते हैं –

४.३०: पाखंडी, गलत आचरण वाले, छली – कपटी, धूर्त, दुराग्रही, झूठ बोलने वाले लोगों का सत्कार वाणी मात्र से भी न करना चाहिए |

जन्मना जाति व्यवस्था को मान्य करने की प्रथा एक सभ्य समाज के लिए कलंक है और अत्यंत छल-कपट वाली, विकृत और झूठी व्यवस्था है | वेद और मनु को मानने वालों को इस घिनौनी प्रथा का सशक्त प्रतिकार करना चाहिए | शब्दों में भी उसके प्रति अच्छा भाव रखना मनु के अनुसार घृणित कृत्य है |

प्रश्न : मनुस्मृति से ऐसे सैंकड़ों श्लोक दिए जा सकते हैं, जिन्हें जन्मना जातिवाद और लिंग-भेद के समर्थन में पेश किया जाता है | क्या आप बतायेंगे कि इन सब को कैसे प्रक्षिप्त माना जाए ? 

अग्निवीर: यही तो सोचने वाली बात है कि मनुस्मृति में जन्मना जातिवाद के विरोधी और समर्थक दोनों तरह के श्लोक कैसे हैं ? इस का मतलब मनुस्मृति का गहरे से अध्ययन और परीक्षण किए जाने की आवश्यता है | जो हम अगले लेख में करेंगे, अभी संक्षेप में देखते हैं –

आज  मिलने वाली मनुस्मृति में बड़ी मात्रा में मनमाने प्रक्षेप पाए जाते हैं, जो बहुत बाद के काल में मिलाए गए | वर्तमान मनुस्मृति लगभग आधी नकली है| सिर्फ़ मनुस्मृति ही प्रक्षिप्त नहीं है | वेदों को छोड़ कर जो अपनी अद्भुत स्वर और पाठ रक्षण पद्धतियों के कारण आज भी अपने मूल स्वरुप में है, लगभग अन्य सभी सम्प्रदायों के ग्रंथों में स्वाभाविकता से परिवर्तन, मिलावट या हटावट की जा सकती है | जिनमें रामायण, महाभारत, बाइबल, कुरान इत्यादि भी शामिल हैं | भविष्य पुराण में तो मिलावट का सिलसिला छपाई के आने तक चलता रहा |

आज रामायण के तीन संस्करण मिलते हैं – १. दाक्षिणात्य २. पश्चिमोत्तरीय ३. गौडीय और यह तीनों ही भिन्न हैं |  गीता प्रेस, गोरखपुर ने भी रामायण के कई सर्ग प्रक्षिप्त नाम से चिन्हित किए हैं | कई विद्वान बालकाण्ड और उत्तरकाण्ड के अधिकांश भाग को प्रक्षिप्त मानते हैं |

महाभारत  भी अत्यधिक प्रक्षिप्त हो चुका ग्रंथ है | गरुड़ पुराण ( ब्रह्मकांड १.५४ ) में कहा गया है कि कलियुग के इस समय में धूर्त स्वयं को ब्राह्मण बताकर महाभारत में से कुछ श्लोकों को निकाल रहे हैं और नए श्लोक बना कर डाल रहे हैं |

महाभारत का शांतिपर्व (२६५.९,४) स्वयं कह रहा है कि वैदिक ग्रंथ स्पष्ट रूप से शराब, मछली, मांस का निषेध करते हैं | इन सब को धूर्तों ने प्रचलित कर दिया है, जिन्होंने कपट से ऐसे श्लोक बनाकर शास्त्रों में मिला दिए हैं |

मूल बाइबल जिसे कभी किसी ने देखा हो वह आज अस्तित्व में ही नहीं है | हमने उसके अनुवाद के अनुवाद के अनुवाद ही देखे हैं |

कुरान भी मुहम्मद के उपदेशों की परिवर्तित आवृत्ति ही है, ऐसा कहा जाता है | देखें –http://satyagni.com/3118/miracle-islam/

इसलिए इस में कोई आश्चर्य नहीं होना चाहिए कि मनुस्मृति जो सामाजिक व्यवस्थाओं पर सबसे प्राचीन ग्रंथ है उसमें भी अनेक परिवर्तन किए गए हों | यह सम्भावना अधिक इसलिए है कि मनुस्मृति सर्व साधारण के दैनिक जीवन को, पूरे समाज को और राष्ट्र की राजनीति को प्रभावित करने वाला ग्रंथ रहा है | यदि देखा जाए तो सदियों तक वह एक प्रकार से मनुष्य जाति का संविधान ही रहा है | इसलिए धूर्तों और मक्कारों के लिए मनु स्मृति में प्रक्षेप करने के बहुत सारे प्रलोभन थे |

मनुस्मृति का पुनरावलोकन करने पर चार प्रकार के प्रक्षेप दिखायी देते हैं – विस्तार करने के लिए, स्वप्रयोजन की सिद्धी के लिए, अतिश्योक्ति या बढ़ा- चढ़ा कर बताने के लिए, दूषित करने के लिए| अधिकतर प्रक्षेप सीधे- सीधे दिख ही रहें हैं |

डा. सुरेन्द्र कुमार ने मनु स्मृति का विस्तृत और गहन अध्ययन किया है | जिसमें प्रत्येक श्लोक का भिन्न- भिन्न रीतियों से परीक्षण और पृथक्करण किया है ताकि प्रक्षिप्त श्लोकों को अलग से जांचा जा सके | उन्होंने मनुस्मृति के २६८५ में से १४७१ श्लोक प्रक्षिप्त पाए हैं |

प्रक्षेपों का वर्गीकरण वे इस प्रकार करते हैं –

– विषय से बाहर की कोई बात हो |

– संदर्भ से विपरीत हो या विभिन्न हो |

– पहले जो कहा गया, उसके विरुद्ध हो या पूर्वापार सम्बन्ध न हो |

– पुनरावर्तन हो |

– भाषा की विभिन्न शैली और प्रयोग हो |

– वेद विरुद्ध हो |

इसे और अच्छी तरह से समझने के लिए, मनुस्मृति के गहन और निष्पक्ष अध्ययन के लिए डा. सुरेन्द्र कुमार द्वारा लिखित मनुस्मृति (प्रकाशित-आर्ष साहित्य प्रचार ट्रस्ट,दिल्ली)  अवश्य पढ़ें |

डा.सुरेन्द्र कुमार ही नहीं बल्कि बहुत से पाश्चात्य विद्वान जैसे मैकडोनल, कीथ, बुलहर इत्यादि भी मनुस्मृति में मिलावट मानते हैं |

डा. अम्बेडकर भी प्राचीन ग्रंथों में मिलावट स्वीकार करते हैं | वे रामायण, महाभारत, गीता, पुराण और वेदों तक में भी प्रक्षेप मानते हैं |

मनुस्मृति के परस्पर विरोधी, असंगत श्लोकों को उन्होंने कई स्थानों पर दिखाया भी है | वे जानते थे कि मनुस्मृति में कहां -कहां प्रक्षेप हैं | लेकिन वे जानबूझ कर इन श्लोकों को प्रक्षिप्त कहने से बचते रहे क्योंकि उन्हें अपना मतलब सिद्ध करना था | उनके इस पक्षपाती व्यवहार ने उन्हें दलितों का नायक जरूर बना दिया | इस तरह मनुविरोध को बढ़ावा देकर उन्होंने अपना और कई लोगों का राजनीतिक हित साधा | उनकी इस मतान्धता ने समाज में विद्वेष का ज़हर ही घोला है और एक सच्चे नायक मनु को सदा के लिए खलनायक बना दिया |

इसी तरह स्वामी अग्निवेश जो अपने आप को आर्यसमाजी बताते हैं, अपनी अनुकूलता के लिए ही यह भूलते हैं कि महर्षि दयानंद ने जो समाज की रचना का सपना देखा था वह महर्षि मनु की वर्ण व्यवस्था के अनुसार ही था | और उन्होंने प्रक्षिप्त हिस्सों को छोड़ कर अपने ग्रंथों में सर्वाधिक प्रमाण (५१४ श्लोक) मनुस्मृति से दिए हैं | स्वामी अग्निवेश ने भी सिर्फ़ राजनीतिक प्रसिद्धि पाने के लिये ही मनुस्मृति का दहन किया |

निष्कर्ष  :

मनुस्मृति में बहुत अधिक मात्रा में मिलावट हुई है | परंतु इस मिलावट को आसानी से पहचानकर अलग किया जा सकता है | प्रक्षेपण रहित मूल मनुस्मृति अत्युत्तम कृति है, जिसकी गुण -कर्म- स्वभाव आधारित व्यवस्था मनुष्य और समाज को बहुत ऊँचा उठाने वाली है |

मूल मनुस्मृति वेदों की मान्यताओं पर आधारित है |

आज मनुस्मृति का विरोध उनके द्वारा किया जा रहा है जिन्होंने मनुस्मृति को कभी गंभीरता से पढ़ा नहीं और केवल वोट बैंक की राजनीति के चलते विरोध कर रहे हैं |

सही मनुवाद जन्मना जाति प्रथा को पूरी तरह नकारता है और इसका पक्ष लेने वाले के लिए कठोर दण्ड का विधान करता है | जो लोग बाकी लोगों से सभी मायनों में समान हैं, उनके लिए, सही मनुवाद ” दलित ” शब्द के प्रयोग के ख़िलाफ़ है |

आइए, हम सब जन्म जातिवाद को समूल नष्ट कर, वास्तविक मनुवाद की गुणों पर आधारित कर्मणा वर्ण व्यवस्था को लाकर मानवता और राष्ट्र का रक्षण करें|

महर्षि मनु जाति, जन्म, लिंग, क्षेत्र, मत- सम्प्रदाय, इत्यादि सबसे मुक्त सत्य धर्म का पालन करने के लिए कहते हैं –

८.१७: इस संसार में एक धर्म ही साथ चलता है और सब पदार्थ और साथी शरीर के नाश के साथ ही नाश को प्राप्त होते हैं, सब का साथ छूट जाता है – परंतु धर्म का साथ कभी नहीं छूटता |

संदर्भ- डा. सुरेन्द्र कुमार, पं.गंगाप्रसाद उपाध्याय और स्वामी दयानंद सरस्वती के कार्य |

अनुवादक- आर्यबाला

Original post in English is available at http://agniveer.com/manu-smriti-and-shudras/

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Yet another biochemical reaction attempting to prove that there is more to life than what was destined in first moment of big bang. In other words, am trying to find meaning in life and world despite the meaninglessness that the Hawkings and Dawkins would want us to believe in! I am an alumnus of IIT-IIM and hence try to find my humble ways to repay for the most wonderful educational experience that my nation gifted me with.

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230 Comments on "मनुस्मृति और जाति व्यवस्था"

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amit rajput
amit rajput
1 month 16 days ago

पंडिटो ने अपने बच्चो का भविष्य बनाने के लए इसे फिर से अपने हिसाब से लिख दिया था

जय श्री राम
जय श्री राम
5 months 5 days ago
सच में देखा जाये तो वर्ण नाम की कोई चीज है नहीं ये साले धनी लोग का बनाया है जो गरीब लोगो वो नीच समझते हैं ये बताओ की माया वती ने इतना पैसा बना लिया किया वो दलितों में बाट रही है जवकि वो दलित के नाम पे दलितों… Read more »
Anil
Anil
5 months 27 days ago
These statements are made only to create awareness and urge for true religion and to seek nearness to God and not to cause any hurt. Those who are satisfied need not take it seriously and may like to continue with their beliefs. True Lord when find a jiva fit ,… Read more »
Anil
Anil
5 months 27 days ago
Even teachings of Jesus are far far higher and truly spiritual. I don’t understand how Muslims claim Jesus to be a prophet of God and accept just opposite teachings of Muhammad true and from Allah an Arabic word of God. Just like Hindus , Muslims too don’t understand true religion.… Read more »
Anil
Anil
5 months 27 days ago
The fact is Hindus use Dharma only for debate and entertainment. They have stopped practicing it since thousands of Years and since generations are interested in only listening stories of Ramayana, Mahabharata, Bhagwat etc and their chapters and consider such and other outwardly activities as religions. They have forgotten to… Read more »
jpc
jpc
6 months 16 days ago

Agnivir’s comments on Great Dr Ambedkar is rubbish . You don’t know anything about dharma..you may know Hinduism . Islam. Chrisnity. But u donot know about dharma. Dr Ambedkar wrote about dharma…Brhaman means free ka Tattu..

sandip barde
sandip barde
6 months 25 days ago

जिसने शिक्षा दि हि नही कया ऊस गरू को गरूदक्षिणा मागणे का हक है या फिर है तो ऊस गूरू ने एसी चीज कयू नही मागीं जो बाकी शिष्यो से मागां करते वह सब ऊस गूरू को मील जाता जो एक राजपूत्र देता कयो की एकलव्य एक राजपूत्र था।

Rohidas
Rohidas
7 months 5 days ago
और जो मतलबी होने का जो आरोप लगया है तो जा के पुना कररा पढो खुद अपने समाज का भला न देख कर गांधी जि का अनशन तोडा अगर ओ स्वार्थी होते तो गांधी जि को मरने देते थे न लेकिन उन्होने इसे किय्या क्या वही आप हि का हिंदू… Read more »
Rohidas
Rohidas
7 months 6 days ago
आज तक मै हिंदू महार करके था कि उस ये सोच के कि बाबा साहब ने जो धर्म व्सिकरा [email protected] समय अलग था लेकिन आज का आप का लेख मे जो आप ने उनके उपर इल्जाम लगये ओ पड कर साहि लग रहा कि बाबा साहब ने अचा किया हिंदू… Read more »
Rohidas
Rohidas
7 months 7 days ago
और जो आप का हिंदू धर्म है न उनके लिये भि उंका बहुत बढा योगदान है शायद आप ने उंकै बारे मे आप को मालूमनही जब उन्होने जब धर्म स्विकर्ने की बात कि तब मुस्लिम और क्रिसचन धर्म वालो ने अन्हे आमंत्रित किया लेकिन उनोने अपना हर धर्म का समज… Read more »
Rohidas
Rohidas
7 months 7 days ago
उन्होने जो समाज के लिये किया इतना बडा सविधान दिया वो जहर हैसच तो ये है कि आप को उसका इतना देश के लिये किया हुवा दिखता नही ईससे पता चलता है है कि आप जैसे लोग ही अपने मन गड़न बाते बतके हिंदु धर्म को और भि बदनाम कर… Read more »
Sanjay Kumar Singh
Sanjay Kumar Singh
26 days 20 hours ago

samvidhan ka nirman kaise hua pahle padho fir bako

Rohidas
Rohidas
7 months 7 days ago
अग्निवीर साहब आप कि 21वि सदि कि मनुस्मुती पड़ के अछा लगा लेकिन एक बात बताओ आप ने जो इल्जाम लगये बाबा साहब पर जो इल्जाम लगये वो पका आप के 21वे सदी के स्मुती के तरह जुटे है कि बाबा साहब ने रज्नेतिक हित और अपने स्वार्थ के लिये… Read more »
Ek anaary.....
Ek anaary.....
8 months 3 days ago

Ye post likhne wala brahman to manu ka bhi baap nikla ye is post me hi brahman ko shreshth or shudra ko nich bata raha he or hume chutiya bana raha he….
Par ab teri daal nahi galne wali Rss wale….

RAVI
RAVI
8 months 9 days ago
ye sab faltu ki bakwas hai , ek din aisa ayega jab VED aur purah HINDU DHARAM ki history mit jayegi , Kyunki HARRAPPA aur MOHAN JODRO ke log he SUDROH ke ancestors hai , INDUS VALLEY SUDRA ki thi , SUDROH ki hai aur aage anneh wale waqt mein… Read more »
gajendra banjariya
gajendra banjariya
9 months 10 days ago
sambuk rishi ki hatya ram ne sirf is liye ki thi ki o shudro ko gyan de raha tha…………………aklavya ko gyan nahi diya gaya kiyo ki o shudra tha……………………karna ko is liye aapmanit hona padta tha kiyo ki uska palan shudra ne kiya tha…………….esi bahot si gatna hai enka jimmedar… Read more »
rajk.hyd
rajk.hyd
9 months 9 days ago
saath me yah bhi sochiye ki ravidas ji ko sant bhi sabne mana hai aur valmiki ji ne ramayan bhi likhi hai jisko sbhi sabut ke taur par mante hai! shambuk ka vahd kyo hua usko valmiki ramaayn ki buniyad me dekhiye ! ramji raja the kuch karan ho sakte… Read more »
rajk.hyd
rajk.hyd
9 months 15 days ago
shri vishnu ji aap palaynavadita ka parichay mat dijiye usse bhi koi labh nahi hoga! iis palayan vadita ke kaaran apna desh gulam raha buddh ji mahavir ji nanak ji kabir ji sur das tulsi daas ji adi bhi isi kalyug me janm liya hai! isliye kalyug ko dosh dekar… Read more »
Vishnu
Vishnu
9 months 17 days ago
कर्म करने से किसी का वर्ण नहीं बदल जाता है ये सब कलयुग का प्रभाव है जो लोग इस तरह की बात कर रहे है हं अगर किसी व्यक्ति में दूसरे वर्ण के लक्षण दिखाई देते है तो वहां ये समझना चहिए कि वह व्यक्ति उसी वर्ण के व्यक्ति की… Read more »
Man Singh
Man Singh
8 months 19 days ago
Mr Vishnu you are totally wrong. Shivpuran/Vidhyeshwara Samhita/pranavpanchakharmantra chapter17 shloka 50 to 56 Shudra can become vaishya by chanting 5 lack Aumnanah Shivaya Vaishya further chanting same becomes a Khsatriya Khsatriya further chants the same number become Brahmin and a Bramin if further chants same number of mantra gets Moksha.… Read more »
Vishnu
Vishnu
9 months 17 days ago
कर्म अगर नीचे वर्ण के योग्य हो तो कोइ नीचे वर्ण का नही हो जाता उसको भटका हुआ या भ्रष्ट कह सकते है भगवान राम ने आरण्यकाण्ड मे स्वयं कहा है अगर ब्राम्हण शास्त्रों को नहीं भी जानता फिर भी वह श्रेष्ठ है पूजनीय है हं शास्त्रों को जनने वाले… Read more »
rajk.hyd
rajk.hyd
9 months 17 days ago
shri vishnu ji har insan ka janm stri ki yoni se hua hai aur ap kahate hai ki char sthiti s e hua apki bat galat hai ! charmkaar vyakti hote huye bhi sant ravi daas kaise ho gaye? valmiki ji ramayan ke rachnakar kaise ho gaye? ambedkar ji gyani… Read more »
Vishnu
Vishnu
9 months 16 days ago
Aur gyani usko kahte hai jiske paas adhyatm ka marmik gyan hota hai raidas ke guru the ramanand jo ki bramhan the ramanand ke saanidya me rahne se hi raidas ko adhyatm ka ek simit gyan hua tha aur valmiki ki jahan tak baat hai wo suru me karm kharab… Read more »
rajk.hyd
rajk.hyd
9 months 16 days ago
shri vishnu ji , jab buddh ji ne kabhi ved hi nahi padhe to uska gyan bhi kaise ho sakta tha ap ke paas is bat ka kya praman hai ki buddh ji ved virodhi nahi the aap buddh ji ka darshan to padhiye unhone ishvar ko bhi kabhi nahi… Read more »
Vishnu
Vishnu
9 months 15 days ago
Bura mat maniye ga apko adhyatm ka bahut kam gyan aur Jo hai bhi WO galat hai aur aap jaise kai log hai Jo marm ko nahi samajh pate hai isme unka bhi kuch khas dos nahi ye kalyug ka prabhav hai Jo log is tarah ki buddi rakhte hai… Read more »
Vishnu
Vishnu
9 months 16 days ago
Aap ka kahena poorn rup se galat hai aap ko sayad pata nahi hai ki budh purnima manai jati hai aur bhud ke avtar ka lekh bhagwat mahapuran jaise mahan granth me hai aur jo is samya char se adhik jatiyaan dikhai de rahi hai wo unhi char me se… Read more »
rajk.hyd
rajk.hyd
9 months 16 days ago
shri vishnu ji ap adhure jaavb dene ki koshsh karate hai jab bhagvat maha puran me buddh ji ke avtar ka jikar hai to adhikansh hindu mandiro me buddh purnima kyo nahi manayi jati hai ! raamj aur krishn ji aur shiv ratri ki tarah un eke janm divas par… Read more »
Vishnu
Vishnu
9 months 15 days ago
Lagta hai aapne mera lekh thik se padha nahi warna aap is tarah ki baat nahi karte aur agar padha bhi hai to uska sahi arth nahi samjha hai aur samjhenge bhi kaise ye Sab marm ki baatein isko samajhana itna asan nahi hai agar itna asan hota to aaj… Read more »
Vishnu
Vishnu
9 months 16 days ago
Aap ka kahena poorn rup se galat hai aap ko sayad pata nahi hai ki budh purnima manai jati hai aur bhud ke avtar ka lekh bhagwat mahapuran jaise mahan granth me hai aur jo is samya char se adhik jatiyaan dikhai de rahi hai wo unhi char me se… Read more »
Vishnu
Vishnu
9 months 16 days ago
Jahan baat janm ki to kalp ke suruat me sabhi ki utpatti bramha ke alag alag sthan se hoti hai stri ke yoni se nahi uske baad stri ke yoni se janm ki prakriya chalti hai ye sab param marm param gyan ki baat hai isko aaj ke samaya ka… Read more »
gulab singh
9 months 29 days ago

logo se suna to esa tha ki janm hote hi uski cast tay thi sayad esi liye sudra etna peeche rah gaya tha or aj bhi peeche hai me puchta hu ki yadi pahle cast na thi to aj ye lakho cast kaha se a gai .

rajk.hyd
rajk.hyd
9 months 22 days ago
pahale jati kahan thi ? dekhiye – aj raghu, dilip dashrath lakshaman, bahart shatrughn sita kaushalya kekaiyi manthara janak janki kumbh karan sulochna meghnaath raavan vibhishan, bali sugriv balraam bhim yudhishthir nakul karn duryodhan shakuni vidur kunti dhrit rashtr pandu , draupadi basudev devki yashoda , kabir daas sur daas… Read more »
santosh
santosh
10 months 2 days ago

dalit kon hai? jo aaj bhi hindu dharm ko manta hai wo dalit hai…hamare samaj ne 1954 me Dr. Babasaheb k sath buddhist dharm ka svikar kiya. jo dharm insaan ko insaan nahi samajhtha use tyaag dena chahiye…Jai bhim….

Akash jatav
11 months 13 days ago
to ap ye khena cha rahe he ki jo kuch aj kal ho raha he wo manusmariti ke hesab se nahi ho raha he or ap khe rahe he ki ( baba sahab) ne jo savedhan banaya wo galt he usme sansodan kon karta he kiya hum log karte he… Read more »
raj.hyd
raj.hyd
11 months 13 days ago
desh me aj bhi 36% abadi apna nan nahi ikhpati vah kisj bhi jati ka ho usko shudr kaha jayega ! shudr koi gali nahi hai ! jitne bhi majdur hai vah kis bhi jati kejitebichaprasi adi adeshpalan karnevale ho vah sa shudr kahe jate hai ! ambedkar ji ka… Read more »
ashwani
ashwani
11 months 15 days ago

mera ek request h sbi logo se ye jeev hatya band kro bhagwan ne hme khane k lhe kya kya ni dia h to janvar ku khate h kya janwar ho gae ho . Aur ye pap h masum jevo ki hatya krna ye bnd kro aur shakahari bn

ashwani
ashwani
11 months 15 days ago
yar ek bt pair ki juti pair me thik lagti h sar pe nhi jiska jis kul me janm hua usi ki karm k ansurar chalo ek kahani sunata hu agar pasnd ae to coment dena ek din ek admi ne pucha ki sb insano ka ank nak khun mans… Read more »
raj.hyd
raj.hyd
11 months 15 days ago
janm se sabhi murkh hote hai jo jitna vidya ka vikas karta hai vah utna hi safal ho pata hai ! jati janm se nahi balki karM se hai mansmriti ko aap padh sakte hai ! ANE K BRAHAMAN PARIVAR ME JANM LENE VALE BHI MANS KHATE HAI AUR CHAPARASI… Read more »
raj.hyd
raj.hyd
11 months 16 days ago
desh ke sabhivargo ka ka jyada vot unhone prapt kiyahai aur bahan mayavati ji ne ape bal par samaj ke sabhi vargo se vot lakear bahumat lekar satt me a chuki hai ! samaj me badlav hai lekin ashanukul nahi hai ! uski gati ati dhimi hai desh hajar saal… Read more »
Akash jatav
11 months 16 days ago
manta hu ap jo khe rahe he wo sab thik he to ye to bata hi sakte he ap mujko ki jab sab manusye ek saman hi nahi he manusmariti me to ye saccha garnth kaha se ho gaya ab jab ye dharm mushi bat me pad gaya he tab… Read more »
raj.hyd
raj.hyd
11 months 16 days ago
adarniy shri akash jo, ambedkar ji ka jivan atulniy sa raha hai kheto me palne vale bachhe ne itni taraki ki hai jo samany vya kti nahi karpate hai un dino me dalio ko hey drishti se dekha jata tha pratikul pristhiti me taraki karna aur bhi mushkil hota hai… Read more »
Akash jatav
11 months 17 days ago

Raj bhai apko kuch nahi apta bhai ager kuch janna he to hum se cont.. karo ( 09873603438) or neeraj bhai koyi galat nahi khe rahe he jo khe rahe he thik khe rahe he ( jat bheem jay bharat) jay mulnevsi

raj.hyd
raj.hyd
11 months 17 days ago
SHRI AKASH JI apko isi sarvajanik manch se batchit karne me kya taklif hai apko jo shikayat ho sabke same rakhiye ! manusmriti me milavt ho chuki hai surbhagt yse svarthi savarn bandhu un milavato ko niklate ha isi liyeap sab ko kuch shikayat ho jati hai vishuddh manusmriti namse… Read more »
Neeraj
11 months 18 days ago
Manu Esmirti Manavta Ke liye thik Granth nahi thik granth to ow hai samuchit world ke log mane Example: Dr. Ambedkar ji ne Bharat ke hi nahi World ke log mante hai Ese kahte mahan or Pabitra Granth Jo Manav or Manav ke Bich mai Samta, sutantra, Niy yeavam Bhai… Read more »
raj.hyd
raj.hyd
11 months 18 days ago

neeraj ji apne shayd manu smriti padhi nahi hai pahale uusko padhiye fir baat kijiye beshak us granth me kuch milavti bat hai fir bhi kulmilkar vaha achha granth hai !

Akash jarav
11 months 23 days ago
Dekho mere bhaio ap logo ko kuch jayada geyan he mager hum apko ek bat batana chahege ki ( shuder) ek suyad jat he or rahege hume garve he hum (hum shuder he) mager ap logo ko jo bolna he wo bol lo jes din hum log ek ho gaye… Read more »
pardeep
pardeep
1 year 18 days ago
aap log aj ye clarify kyo kr rahe ho ke manu ne bahut kuch acha likha hai. Me btata hu, kyuki aj dalits sachai jaan gaye hai, aur hinduism ko thukra rahe hai. Agar sb ko ek brabar smjhte ho to jao jalao un logo ko aur unke pariwaro ko… Read more »
raj.hyd
raj.hyd
1 year 18 days ago
jinho ne dalit bastiyo ko jalaya hai vah manu ji k e karan nahi jalaya tha ! mnu ji ki kitab to ajkal koi padhta bhi nahi hai ! unki galat mansikta thi unko dandit karvaiye n ki unki bhi bastiya jalvaiye ! badle ka badla lena sahi tarika nahi… Read more »
sam
sam
1 year 1 month ago
INDIA IS SUCH A COUNTRY WHERE ONLY GODS ARE FOUND IN QUANTITY BUT UNABLE TO FIGHT ON BORDER CAUSE THEY CAN ADVICE TO FIGHT LIKE BRAHMINS , THEY DO NOT FIGHT BUT THEY MAKE PEOPLE TO FIGHT , DIVIDE AND RULE IS THEIR POLICY RAMAYANA AND MAHABHARAT IS JUST A… Read more »
satish
satish
1 year 1 month ago

manusmurti ab tak ka sabse gandhha book hai.

raj.hyd
raj.hyd
1 year 1 month ago

manusmriti ek achha granth hai
usme kuch milavat muglo ke zamane meho gayi thi usko hatakar ya vishuddh manusmrti padhenge to koi vishesh shikatayt nahi milegi

एक दलित
एक दलित
1 year 5 months ago
यदि उस समय बाल्मिकि,वेदव्यास रुपी ‘Stan Lee’ होता और राम, कृष्ण, लक्क्ष्मण, सीता इत्यादि रुपी पात्रों की जगह ‘Marvel’ के सभी पात्रों की रचना करता तो आज सभी Superman और spiderman की पूजा करते । इतिहास गवाह है की मुगलो और ब्रिटिश को छोडकर ब्राम्हण शुद्रो के पीछे पडे रहे… Read more »
raj.hyd
raj.hyd
1 year 5 months ago
baba ambedkar ji bhi yogyta ke hisab se brahman the / aur unka vivah bhi janmjat brahman kanya se huya tha yogyta se pahale bhi aaur aaj bhi koi brahman ho sakta hai koi bhi sanyasi bhi ho sakta hai aur koi bhi guru ho skata hai jaise sant ravudaas… Read more »
munish kumar
1 year 7 months ago

good

bablloo
bablloo
1 year 5 months ago
Is desh ka beda garg agar kisi ne kiya hai to wo BRAHMIN ne kiya hai. Kiya shudra ko mandir me jane ka adhikar tha ? kiya Education ka adhikar tha, kiya vote ka adhikar tha. gaon ke ander aane nahi dita jata tha to ye adhikar kahan se milte… Read more »
raj.hyd
raj.hyd
1 year 5 months ago
manu ji ne jati nahi banayai unhone karma nusaar samaj ka vargikaran kiya vah a j bhi hai aur age bhi rahega duniya ke har desh me hai jo buddhi se jyada kaamkarte hai vah brahman hai jo samaj va desh ki raksha karte hai hai vah kshatriy hai aur… Read more »
anku
anku
9 months 28 days ago

tune kabhi kisi bhramin ko foge ya police dekha h bhramin bas ek kam kar sakta h bo h haram kha sakta h q uss par ek ke alaba koi dusra aata h nhi

Sachin
Sachin
2 months 15 days ago

Shrimant Bajirao Peshwa ek kuleen, saraswat bramin the….wo Maratha samrajya k Senaapati the(Bramhin hone k baad bhi). unhe bahot peeda sehni padi apne he jaati se…..anyway the point is not all Brahmins were wrong. the situation matters

rajk.hyd
rajk.hyd
9 months 22 days ago

anek chaprasi aapko janmjat brahman parivar se mil jayenge ! rat ko watchmain ki bhumika vale bhi mil jayenge, bahut se majdur bhi mil jayenge
jab bhukh lagti hai tab janmana jati kaam nahi ati hai jo kam mil jaye usi ko svikar karna hota hai !

raj.hyd
raj.hyd
1 year 5 months ago

rahegi
aapki yahbaat saty hai jo samaj me aguvaai karte hai vahi achhe n ho to samaj aur deshb ka beda gark avshy hoga vah kaam nakli brahman kahe jan e valo ne khub kiya hai !

jayesh sarpate
jayesh sarpate
1 year 11 months ago
purane salo me kya hua ye sochne se pehle jo hath me jindgi hai uske bare me sochna chahiye. koi kuch likh jata hai to hum gadhe hai jo uspe sekdo sal amal karte hai bhagwan ne hame brain kyu diya hai. sabse badi insaniyat hoti hai na koi dharm… Read more »
jalwan
jalwan
1 year 10 months ago

hniduism- aryadhrma-vaidicdharma-sanatandharma-brahmandharma is sanctified form of religious racism under cover of dharm==karma==varna by vested interests

santosh kamble.w.nagar.pune
santosh kamble.w.nagar.pune
2 years 18 days ago

dr.sanjiv..1Jan.1818 Bhimakoregav.pune.maharashtra.bhul gaye kya.ise yad rakhakar likha karo…..jay mulnivasi.

Dhanashree pawar
Dhanashree pawar
2 years 4 months ago

Sir…aaj tak , manusmriti ke bare me sunane me aya tha ki wo jatiwad ka samarthan karti hai..lekin meri ek friend ne bataya tha ki manusmriti me bohotsi aisi bate hai jiska aadhar dharm hai…aap ki is article se bohot jankari prapt hui…dhanyawad….

chitranshu
chitranshu
2 years 5 months ago

MAI SAMJHTA HUN KI INSAANIYAT HI SABKUCHH HAI.

Vishwas Gokhale
Vishwas Gokhale
2 years 5 months ago
If you are going to compare the text of manuslriti with modern day constitutuions of european countries . It should be compared with the comparable period with each country. Itf you consider the manusmriti period it dates back to about 3000 to 5000 yreas. That is much before Ramayana and… Read more »
jalwan
jalwan
2 years 5 months ago
change is nature. any one not agreeing to it shall be wrong. manu was a man if his write up irrespective of time is found unjustified y should not be brunt throught the country as burnt by the greatest indian by baba shaheb. say i gokhale go to uk/ usa/… Read more »
jalwan
jalwan
2 years 6 months ago
none is high or low, all r equal. if any one says no that means he tells lies n whosoever tells lies HE IS NOT ASAL. the articale says there is noing like surname so statement of name ambedkar given by brahman teaher does not convince the goodness of brahman… Read more »
bhushan shirsath
bhushan shirsath
2 years 9 months ago

manusmriti is my foot……………………………………………………………………………………………………………………………..

Ajay kumar
Ajay kumar
2 years 11 months ago
Aur waise bhi agar Brahma ji hai to unko is sansar ki kamiya nazar nahi aati hai ki awtar le kar isko sahi kare sirf updesh dete hai ki geete chp-18 slok no-66 “ki hey jagatwasi sare sansar ko chhod kar mere saran me aao mai tumhe sbhi papo se… Read more »
जय श्री राम
जय श्री राम
5 months 5 days ago
अजय तुम ये बताओ की तुम किस धर्म के हो उसके बाद तेरा इतिहास बताता हूँ दुनिया में जितना धर्म है आज सब हिन्दू धर्म से ही निकला है चाहे वो बुद्ध महावीर हो और मुहम्मद जीसस के पिता किस धर्म के थे ये कियू नहीं बताता है उनके ठेकेदार… Read more »
जय श्री राम
जय श्री राम
5 months 5 days ago
अजय तुम ये बताओ की तुम किस धर्म के हो उसके बाद तेरा इतिहास बताता हूँ दुनिया में जितना धर्म है आज सब हिन्दू धर्म से ही निकला है चाहे वो बुद्ध महावीर हो और मुहम्मद जीसस के पिता किस धर्म के थे ये कियू नहीं बताता है उनके ठेकेदार… Read more »
Madhu
Madhu
2 years 11 months ago
Ajay ji Brahmaji ek naam hai shrushtikartha ka.Aap ko swantantrata hai unhe kisi bhi naam se sambodit karne ka. Unka kaarya tha shrushti banana jo unhone kiya.Shrushti ko sahi tarah chalana tho hamara(manav) kaarya hai. Aap har shlok ya mantra ko gambhirtha se lenge unmei he ulje rahenge. Jo shlok… Read more »
Ajay kumar
Ajay kumar
2 years 11 months ago
aur ha ek bat aur angrezo ne hame nahi bata .hum pahle se bate the hindu dharam ke karan .itihas gawah hai .jaha tak bat pineal gland ki hai to aap ke shiva linga(jo nirjeew hai )aur aur pineal gland se koi connection nahi hai .Aur gar aap shiva ke… Read more »
Madhu
Madhu
2 years 11 months ago

My bhi thi wahi kehraha hoon sabhi ke paas yeh teesri aankh hai.Pineal gland sabhi mei hain. Aap apne dono aankho khe madhya aur brain ke madhya mei Pineal Gland paaya jaata hai. Teesri aankh e metaphor hai naki dono aankhon ki tarah.

Ajay kumar
Ajay kumar
2 years 11 months ago
ok sorry for name calling .pahli bat ved ko manne ya na manne ki subidha nahi di gayi hai .Aur ha agar aap apne aap ko hindu kahte hai too aap ko majbooran manna padega. Aur agar aap ko lagta hai ki ved geeta mahabharat alag hai to aap ko… Read more »
Madhu
Madhu
2 years 11 months ago
Ved ko manne ya na manne ki suvidha di gayi hai.Aur nahin dhi gayi(aap ke anusar) tho common sense banta hai ki apna swantantrata ka upayog kare. Agar aap Ved, Gita aur Mahabharat ko ek he maante hai tho aap apni knowledge badaye mujhe gyaan dene ki aavashyaktha nahi. My… Read more »
Ajay kumar
Ajay kumar
2 years 11 months ago
madhu ji aap question ka jawab nahi de rahi hai .kyu?Ya to aap dar rahi ho .ya phir knowledge nahi hai . Aap ke hisab se varna vyastha apni life ji chuka aur ab aap manti hai ki yah galat hai ya nahi manna chahiye .whatever. Phir aap bhool jati… Read more »
Madhu
Madhu
2 years 11 months ago
Aur ek baat kehna chaahta hoon.In the last 1000 years our scriptures were deliberately distorted. Let me give you one example. In 1815 a British officer(or employee) named William Ward called Shiva Linga as symbol of Phallus without quoting any sources.And it stuck from then on.Even now more than 95%… Read more »
Madhu
Madhu
2 years 11 months ago
Aap mera uttar dhyaan se ek aur bar pade. Maine kaha tha uski aavahyaktha nahi hey. Woh apna karya kar chooka hai.Isiliye maine kaha tha wah 4 guna hum sabhi me dikha saktha hoon. Aur aap name calling par na jaye tho uttam hoga. My Ved ko pramaan maanta hoon.… Read more »
Ajay kumar
Ajay kumar
2 years 11 months ago

Raj ji chaliye aap mujhe sudhariye . Mai bhi dekhna chahta hu ki aap ko hindu dharam ne kitna sudhara hai aap ko .

raj.hyd
raj.hyd
2 years 11 months ago
manniy shri ajay ji , “dusre ke saath vahi vyavhar kijiyebjo apne liye bhi pasand aye” yahi ek matr sutr hai manvta ka aur dharmikta ka bhi ! jo chijapko galat lagti ho uska acharan mat kijiye vahi acharan kijiye jo sabka bhala kare aur saath me apka bhi bhala… Read more »
Ajay kumar
Ajay kumar
2 years 11 months ago
Aap caste ke factor ko chhod deejiye.hindu dharma ke manne wale hindu dharma ko kis astar par sahi mante hai chahe wo scientifically .socially .cosmologically .evidence any . is dharam me afwaho ki koi seema nahi hai .jitna bol do utna ho gaya .likne wale ke pass thoda sa bhi… Read more »
raj.hyd
raj.hyd
2 years 11 months ago

manniy sri ajay ji, apki shikayat jayaj hai ab iska sudhar arambh kar dijiye ! kya aap iski shuruat karna chahwnge?

Madhu
Madhu
2 years 11 months ago
Arey bhai aap is website ke articles ko pehle tho pado.Phir apna raay dhey. Hindu dharma athwa Sanatana Dharma me aap ko poori swantantratha hai ki aap apni mann chahey Ramayan,Mahabharat,Gita,etc ki rachana kar sakthe hai. Kya aap apni Bible,Quran aadi likh sakthe hai? Nahi naa. Sanatana Dharma is “Suggestive”… Read more »
Ajay kumar
Ajay kumar
2 years 11 months ago
Madhu ji aap ne mere sawal ka jab nahi diya .Maine article ke topic ko padha hai uske bad hi jawab diya hai .Aap mujhe padhna sikha rahi hai .waise bhi aap Hindu dharma aur sanatan dharm ko ek bata rahi ho athwa laga kar .jo bilkul hi galat hai… Read more »
Madhu
Madhu
2 years 11 months ago
Ajay ji mujhe poori swantatrata hai ki my Hindu dharma aur Sanatana Dharma ko ek hi maan kar chaloo ya dho alag alag maarg samajh kar chaloo. Mera vichaar mei Varna vyavastha apni jeevan jheechuka hey.Ab uski aavashyaktha nahi hey. My aapko 4 varna ek he vyakthi mei dikha saktha… Read more »
Ajay kumar
Ajay kumar
2 years 11 months ago
Mahusmriti ke manne walo dosto kya aap mere ek sawal ka jab denge.Aap kahte hai ki india me caste janma ke adhar par na hokar karma ke aadhar par hota hai .Aur agar aap ko lagta hai ki bad me kuch logo ke dwara is me pariwartan kar ke caste… Read more »
Madhu
Madhu
2 years 11 months ago
This is my take,though I may be wrong. For example a Brahmin teaches whatever he/she learned to their family and this family teaches to its family and so on.At some point it became being born in Brahmins’ family one will become a brahmin as it was defacto understood that born… Read more »
Anil Dadwal
Anil Dadwal
3 years 4 days ago

Mr. Aap ke diye huye expmple dekhe.. Kya ap logo ko foolish ya bekuf samjhte ho ? Ravan ko ap rakshash bol rhe ho.. Kya mai jaan sketa hu ram ne Shambukh Rishi ko kyu mara ?

Madhu
Madhu
3 years 1 day ago

We call people like Ravan as Asur and Rakshas because they kept slaves or Harem or both.
Coming to Shambukh nothing like what you mentioned has happened.

हिमांक बर्वे
हिमांक बर्वे
3 years 1 month ago

बहुत ही बढ़िया काम किया है अपने “अग्नी वीर”…

manisha
3 years 1 month ago

exilent

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