पिछले कुछ समय से इन्टरनेट पर हिंदू धर्म के सम्बन्ध में जेहादी बमबारी जारी है. कभी वेद और पुराणों में मुहम्मद का नाम तो कभी महाभारत और मनुस्मृति में माँस का विधान, ज़ाकिर नाइक और उनके समर्पित मुजाहिदीन इस काम को बखूबी निभा रहे हैं. परन्तु अभी एक आश्चर्यजनक बात सामने आई है. जिन वेदों और पुराणों में ज़ाकिर नाइक को मुहम्मद दीख पड़ा था उन्हीं में अब उन्हें गलतियाँ दिखने लगी हैं! जी हाँ! कुन फयकुन कह कर झटपट दुनिया बनाने वाले, पत्थर में से ऊँटनी निकालने वाले, बिना पिता के मरियम को पुत्र देने वाले, चाँद के दो टुकड़े कर देने वाले, आसमान को अदृश्य खम्बों की छत मानने वाले, आसमान की खाल उतारने वाले, दर्याओं को चीरने वाले, सातवें आसमान पर सिंहासन पर विराजमान अल्लाह के बन्दों अर्थात मुसलमान बंधुओं का अब यह विश्वास है कि धर्म को विज्ञान की कसौटी पर भी खरा होना चाहिए! इस हेतु से कि ऊपर लिखित कुरआन के विज्ञान के सामने वेदों की क्या हैसियत है, “वेदों में वैज्ञानिक गलतियाँ” शीर्षक से बहुत से लेख लिखे जा रहे हैं. वैसे इन लेखों की सत्यता उतनी ही प्रामाणिक है जितने प्रामाणिक कुरआन में “विज्ञान” के दावे! यदि कुन फयकुन कह कर मक्खी की टांग भी बन सके, बिना पुरुष के ही मुस्लिम माताएं बच्चे जना करें, पत्थर में से ऊँटनी तो क्या मच्छर भी निकल पड़े तो यह माना जा सकता है कि वेद विज्ञान विरुद्ध हैं कि जिनमें इतने ऊंचे स्तर की विद्या ही नहीं! परन्तु आज तक कुरआन में वर्णित इस विज्ञान के दीदार (दर्शन) असल जिंदगी में मुस्लिम भाइयों को छोड़ कर किसी को न हो सके.

खैर, अब एक एक करके उन दावों की पोल खोलते हैं जो जेहादी अक्सर वेदों के विरुद्ध किया करते हैं. हम पहले “जेहादी दावा” नाम से वेद मन्त्र के वो अर्थ देंगे जो जेहादी विद्वान करते हैं और फिर उसके नीचे मन्त्र के वास्तविक अर्थ अग्निवीर शीर्षक से देंगे. (जिहादियों द्वारा लिखे मूल लेख की प्रति यहाँ देखें:

Scientific Errors in Hinduism

१. पृथ्वी स्थिर है!

१. जेहादी दावा

वेदों के अनुसार पृथ्वी स्थिर है और ऐसा कई स्थान पर है. कुछ उदाहरण नीचे दिए जाते हैं

हे मनुष्य! जिसने इस कांपती हुई पृथ्वी को स्थिर किया है वह इंद्र है. [ऋग्वेद २/१२/१२]

अग्निवीर

वास्तविक अर्थ: सूर्य की सप्तरश्मियों का, वर्षा करने वाले बादलों का, बहने वाली वायु का, जीवन के लिए आवश्यक जलाशयों का, हमारे जीवन यापन हेतु समायोजन करने वाला इंद्र (ईश्वर) हमें सफलता देता है.

इस मंत्र में स्थिर पृथ्वी जैसा कुछ भी नहीं है.

२. जेहादी दावा

वह ईश्वर जिसने इस पृथ्वी को स्थायित्त्व प्रदान किया. [यजुर्वेद ३२/६]

अग्निवीर

दुर्भाग्य से महाविद्वान जेहादी लेखक को स्थिरता और स्थायित्व में भेद नहीं पता. भौतिक विज्ञान के “जड़त्त्व के नियम” (Law of Inertia) अनुसार कोई वस्तु चाहे रुकी हुई हो चाहे चलती हुई, अगर संतुलन में है तो उसको स्थायी कहते हैं. स्थायित्व का अर्थ गतिहीनता नहीं है.

बताते चलें कि यह मन्त्र हिंदुओं में रोज पढ़ा जाता है जिसका अर्थ है: हम उस परमेश्वर को अपने विचार और कर्म समर्पित कर दें जो सब सूर्य आदि प्रकाशमान लोकों, पृथ्वी, नक्षत्र और सम्पूर्ण ब्रह्माण्ड को स्थायित्व प्रदान करता है कि जिससे सब प्राणी सुखी हों और मोक्ष को प्राप्त हो पूर्ण आनंद को भोगें.

मन्त्र में बहुत स्पष्ट है कि उस सूर्य को भी स्थायी कहा गया है जो प्रत्यक्ष चलता हुआ दिखाई देता है. अतः मन्त्र में स्थायित्व का अर्थ गति हीनता नहीं हो सकता.

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३. जेहादी दावा

इन्द्र उस फैली हुई पृथ्वी की रक्षा करता है जो स्थिर है और कई रूप वाली है. [अथर्ववेद १२/१/११]

अग्निवीर

यह मन्त्र अथर्ववेद के प्रसिद्ध भूमि सूक्त का है जो सब देशभक्तों के अंदर देश पर मर मिटने की भावनाओं का मूल स्रोत है. परन्तु जैसा सबको विदित है कि देशभक्ति और वफादारी जेहादियों के लिए सदा ही दूर की कौड़ी रही है, इस बार भी ऐसा ही निकला. इस मन्त्र में जेहादियों को स्थिर पृथ्वी दीख पड़ी! अब इसका वास्तविक अर्थ देखिये

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हे पृथ्वी! तू हिम से ढके पर्वतों, घने वनों, वर्षा, भोजन आदि को धारण करने वाली है कि जिससे में सदा प्रसन्नचित्त, रक्षित और पोषित होता हूँ. तू वह सब कुछ देती है जिससे मैं ऐश्वर्यों का स्वामी होता हूँ. अगला मन्त्र कहता है- हे पृथ्वी! तू मेरी माता है और मैं तेरा पुत्र हूँ! हम सब शुद्ध हों और अपने शुभ कर्मों से तेरा ऋण चुकाएं.

४. जेहादी दावा

हम सब फैली हुई स्थिर पृथ्वी पर चलें. [अथर्ववेद १२/१/१७]

अग्निवीर

वास्तविक अर्थ: हम सब इस पृथ्वी पर आवागमन करें जो हमें धन, सम्पन्नता, पोषण, औषधि आदि से तृप्त करती है. यह हमें आश्रय देती है.

इस मन्त्र में महाविद्वान जेहादी ने “ध्रुव” शब्द देखा और बस “स्थिर” शब्द दे मारा! उसको इतना पता ही न चला कि मन्त्र में यह शब्द आश्रय देने के लिए आया है न कि खुद के स्थिर होने के लिए!

इन सबके उलट वेद में बहुत से मन्त्र हैं जिनमें पृथ्वी के गतिमान होने का स्पष्ट वर्णन है. जैसे

ऋग्वेद १०.२२.१४- यह पृथ्वी विना हाथ और पैर के भी आगे बढती जाती है. यह सूर्य के चारों ओर परिक्रमा करती है.

ऋग्वेद १०.१४९.१- सूर्य ने पृथ्वी और अन्य ग्रहों को अपने आकर्षण में ऐसे बांधा है जैसे घोड़ों को साधने वाला अश्व शिक्षक नए शिक्षित घोड़ों को उनकी लगाम से अपने चारों ओर घुमाता है.

यजुर्वेद ३३.४३- सूर्य अपने सह पिंडों जैसे पृथ्वी को अपने आकर्षण में बाँधे अपनी ही परिधि में घूमता है.

ऋग्वेद १.३५.९- सूर्य अपनी परिधि में इस प्रकार घूमता है कि उसके आकर्षण में बंधे पृथ्वी और अन्य पिंड आपस में कभी नहीं टकराते.

ऋग्वेद १.१६४.१३- सूर्य अपनी परिधि में घूमता है जो स्वयं भी चलायमान है. पृथ्वी और अन्य गृह सूर्य के चारों ओर इसलिए घुमते हैं क्योंकि सूर्य उनसे भारी है.

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२. सूर्य पृथ्वी के चारों ओर घूमता है

५. जेहादी दावा

सूर्य प्रकाशमान है और सब मनुष्यों को जानता है, इसलिए उसके घोड़े उसे आकाश में ले जाते हैं कि जिससे वह विश्व को देख सके. [ऋग्वेद १/५०/१]

अग्निवीर

यह मन्त्र भी हिंदुओं के रोज की प्रार्थना का भाग है. इसका अर्थ है-

जिस प्रकार सूर्य की किरणें विश्व को देखने योग्य बनाती हैं, उसी प्रकार सब सज्जनों को उचित है कि वे अपने शुभ गुणों और कर्मों से श्रेष्ठता का प्रचार करें.

इस मन्त्र में कहीं घोड़ा नहीं आता और न ही सूर्य कहीं पृथ्वी के चारों ओर घूमा है!

६. जेहादी दावा

हे प्रकाशित सूर्य, सात घोड़ों वाले हरित नाम का एक रथ तुझे आकाश में ले जाता है. [ऋग्वेद १/५०/८]

अग्निवीर

वास्तविक अर्थ- जिस प्रकार सूर्य की सप्त रश्मियाँ इसके प्रकाश को दूर दूर तक पहुंचाती हैं उसी प्रकार तुम वेदों के सात प्रकार के छंदों को समझो.

इस मन्त्र से सूर्य का गतिमान होना समझा जा सकता है पर फिर रश्मियों का घोड़ों से कैसे सम्बन्ध रहेगा? क्योंकि किरणें तो सूर्य के चारों ओर निकलती हैं, केवल सूर्य के चलने की दिशा में नहीं, तो फिर किरणें सूर्य के घोड़े के समान कैसे होंगी? वेद तो सूर्य को गतिमान मानता ही है और इसी प्रकार कोई भी पिंड गतिमान होता है. परन्तु इस मन्त्र या किसी और में भी सूर्य का पृथ्वी के चारों ओर गति का कोई वर्णन नहीं है. वेद के अनुसार सूर्य की अपनी अलग परिधि है जिसमें वह घूमता है. [देखें ऋग्वेद १.३५.९]

७. जेहादी दावा

हे मनुष्य, सूर्य जो सबसे आकर्षक है, वह अपने स्वर्ण रथ पर सवार होकर पृथ्वी के चक्कर काटता है और पृथ्वी का अन्धकार दूर करता है. [यजुर्वेद ३३/४३]

अग्निवीर

वास्तविक अर्थ: सूर्य अपने आकर्षण से अन्य पिंडों को धारण करता हुआ अपनी परिधि में घूमता रहता है.

इस मन्त्र की बात को खगोल विज्ञानी भी स्वीकार करते हैं. खगोलशास्त्र विषय का आधार भी ऐसे तथ्य ही हैं. वास्तव में जेहादी विज्ञान में खगोलशास्त्र का वर्णन न होने के कारण उनके महाविद्वान इन मन्त्रों पर ही प्रश्न उठाने लगे हैं!

८. जेहादी दावा

बैल ने आकाश को धारण किया है. [यजुर्वेद ४.३०]

अग्निवीर

महाविद्वान जेहादी ने मन्त्र में वृषभ शब्द देखा और इसको बैल बनाने पर तुल गया! परन्तु संस्कृत भाषा से बेखबर जेहादी को यह पता नहीं कि “वृषभ” के यौगिक अर्थ “शक्तिशाली”, “सामर्थ्यवान” और “उत्तम” हैं. रूढ़ी अर्थों में बैल को वृषभ कहा जाता है क्योंकि बैल कृषि क्षेत्र में शक्ति का प्रतीक है.

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वास्तविक अर्थ- हे सर्वशक्तिमान परमेश्वर! आप समस्त ब्रह्माण्ड में रम रहे हो. पृथ्वी की उत्पत्ति और पालन पोषण, सूर्य की स्थिरता, समस्त आकाशस्थ पिंडों और आकाश की व्यवस्था करने वाले हो, तथा एक आदर्श राजा की भांति सबको नियम में रखते हो. यह तो आपका स्वभाव ही है.

९. जेहादी दावा

बैल ने आकाश को धारण किया है. [यजुर्वेद १४.५]

अग्निवीर

इस मन्त्र में कोई शब्द ऐसा नहीं जिसका अर्थ बैल किया जा सके. यह मन्त्र पत्नी के कर्तव्यों पर प्रकाश डालता है.

वास्तविक अर्थ- हे पत्नी! तू अपने पति को सुख देने वाली हो और सदैव उत्तम कर्मों को करने वाली हो. तू अत्यंत बुद्धिमती हो और सदैव अपनी विद्या को सूर्य के समान बढाने वाली हो. तू सबको सूर्य के समान सुख देने वाली हो जैसे वह भोजन, प्रकाश और शुद्धता प्रदान करने वाला है. तू सबको जल के समान तृप्त करने वाली हो. तू सब ओर ज्ञान का प्रकाश करने वाली हो.

लगता यह है कि स्त्रियों को पशुओं व वस्तुओं की भांति उपयोग करने वाले जेहादियों से यह मन्त्र सहन ही नहीं हुआ!

३. अन्य कुछ आक्षेप

१०. जेहादी दावे और अग्निवीर का उत्तर

कई और दावे पुराणों को लेकर किये जाते हैं और सिद्ध करने की कोशिश की जाती है कि हिंदू धर्म अवैज्ञानिक है. परन्तु ध्यान रखना चाहिए कि पुराण धर्म के सम्बन्ध में प्रमाण नहीं हैं. केवल वेद ही अपौरुषेय (ईश्वरीय) हैं और हम यह दिखा चुके हैं कि जेहादियों ने वेदों को अवैज्ञानिक बता कर अपनी ही अज्ञानता सिद्ध की है. जहां तक पुराणों का प्रश्न है तो उनमें मुहम्मद, अकबर, विक्टोरिया आदि के किस्से भी मिलते हैं जो इस बात का प्रमाण हैं कि ये उन्नीसवीं शताब्दी तक लिखे गए हैं और विदेशी आक्रान्ताओं के शासन काल में बलपूर्वक लिखवाये गए हैं. अतः पुराणों के बारे में इस प्रकार की बातें मिल भी जाएँ तो आश्चर्य नहीं और इनसे हिंदू धर्म का सम्बन्ध भी नहीं. तो भी हमें अंदेशा है कि महाविद्वान जिहादियों ने वैसी ही मूर्खता दिखाई होगी जैसी कि उन्होंने मुहम्मद को भविष्य पुराण में वर्णित एक राक्षस बताने में दिखाई थी! इसको यहाँ पर देखें. http://agniveer.com/479/prophet-puran/

११. जिहादी दावा – सूर्य और आँख

वेद/पुराण सूर्य को नग्न आँखों से देखने का सुझाव देते हैं. वेद और पुराण यह कहते हैं कि हिंदुओं को सूर्य भगवान कि पूजा करनी चाहिए, और यदि तुम रोज सुबह सूर्य को देखोगे तो तुम्हारी आँखें तेज होंगी. इस तरह बहुत से हिंदू यह पूजा करते हैं पर आँखें तेज होने के बजाय, भारत में विश्व के सर्वाधिक नेत्रहीन लोग रहते हैं (पच्चीस लाख). सूर्य की पूजा करने के पीछे कोई वैज्ञानिक सत्य नहीं है और उल्टा वैज्ञानिक और डॉक्टर नग्न आँखों से सूर्य को देखने से मना करते हैं. अब कौन सत्य पर है, वैज्ञानिक या हिंदू धर्मग्रन्थ? आप निर्णय करें!

अग्निवीर

१. महाविद्वान जेहादी बस प्रमाण देना भूल गए कि सूर्य की पूजा करना वेद में कहाँ लिखा है!

२. हाँ, उगते सूर्य को देखना एक प्राकृतिक चिकित्सा है. आज तक दुनिया में कोई ऐसा व्यक्ति नहीं हुआ जो सूर्योदय या सूर्यास्त देखकर नेत्रहीन या कमजोर नेत्र हो गया हो. अधिक जानकारी के लिए देखें Solar observing and Eye Safety http://mintaka.sdsu.edu/GF/vision/Galileo.html

३. वैसे पाकिस्तान में अंधापन भारत से अधिक फैला हुआ है! WHO के रिपोर्ट पढ़ें.

१२. जेहादी दावा – गाय

वेद कहते हैं कि गाय पवित्र है और उसकी पूजा करनी चाहिए. (ब्राह्मण कहते हैं कि गाय के गोबर की राख में औषधीय गुण होते हैं). परन्तु पश्चिम जर्मनी की एक जानी मानी परीक्षण प्रयोगशाला में शोध हुआ तो यह बात झूठी पायी गयी.

अग्निवीर

१. हाँ! वेद स्पष्ट घोषणा करते हैं कि गाय मनुष्य मात्र के लिए अत्यंत मूल्यवान है और जो अपने जिव्हा के थोड़े से स्वाद के लिए इसे मारते हैं वे धूर्त हैं. एक गाय चाहे दूध न भी देती हो तो भी वह वातावरण के लिए मरी हुई गाय से सदैव अच्छी है. गाय के सब उत्पाद जैसे दूध, गोबर, मूत्र आदि शरीर और वातावरण पर लाभदायक प्रभाव डालते हैं. बुद्धिमान लोग केवल गोपालन करके भी अपना जीवन अच्छी प्रकार से निर्वाह कर सकते हैं.

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२. वैसे क्या कोई जेहादी यह बताएगा कि पश्चिम जर्मनी कि उस प्रयोगशाला का नाम क्या है जहाँ गाय के गोबर की राख का परीक्षण किया गया था? ऐसा इसलिए क्योंकि पश्चिम जर्मनी सन १९९० से अस्तित्त्व में नहीं है! यह ऐसा ही है जैसे डॉक्टर जाकिर नाइक कैलीफोर्निया के किसी अनपढ़ किसान के परीक्षणों का प्रमाण देकर हलाल माँस का बचाव करते हैं.

३. गाय का गोबर कई लाभों के साथ साथ ईंट बनाने में भी उपयोगी सिद्ध हुआ है. केवल गोमूत्र पर ही चार अन्तर्राष्ट्रीय पेटेंट (अमेरिका और यूरोप) हमारी जानकारी में हैं. गूगल पर cow urine patent डालकर देखें, और अधिक जानकारी प्राप्त करें.

४. इस तरह ठीक ही है कि हिंदू गाय को माता के सामान महत्वपूर्ण समझते हैं.

अब इससे पहले कि यह लेख समाप्त करें, कुछ बिंदु उठाने आवश्यक हैं.

क. विज्ञान न केवल हिंदुओं की पुस्तकों में है बल्कि उनकी संस्कृति के आधार में भी ओतप्रोत है. यहाँ तक कि सामान्य से सामान्य रीति रिवाज, जो अंधविश्वासों और विदेशी प्रभाव में पुते हुए हैं, भी वैज्ञानिक सिद्धांतों पर आधारित हैं. हाथ जोड़कर नमस्ते, स्त्रियों की चूड़ी और कुंडल, प्रातःकाल अधिक जल पीना जिसे उषापान कहते हैं, माँस का त्याग, एक पत्नी/पति वाद, प्राणायाम, ध्यान, व्यायाम, झूठा न खाना, कई बार हाथ धोना, और अंगों को भली प्रकार से धोकर स्वच्छ रखना जिससे खतना आदि कराने की आवश्यकता ही न पड़े, इत्यादि सब बातें वैज्ञानिक हैं.

ख. इसीलिये एक आम पढ़ा लिखा हिंदू वैज्ञानिक और बौद्धिक माहौल में अच्छे से सामंजस्य बैठाकर आगे बढ़ जाता है.

ग. अब जरा इस्लाम का हाल देखें. पूरी दुनिया में आज पचास से अधिक इस्लामिक देश हैं. क्या किसी एक ने भी कोई बड़ा वैज्ञानिक, शोधकर्ता या व्यवसायी पैदा किया? आज तक केवल एक मुस्लिम वैज्ञानिक हुआ है जिसका नाम यहाँ लिया जा सकता है- पाकिस्तान के नोबल पुरस्कार विजेता डॉ अब्दुस सलाम. परन्तु उन्हें भी पाकिस्तान से काफ़िर कह कर बाहर खदेड़ दिया गया क्योंकि वो एक कादियानी थे. आज कोई भी ज़ाकिर नाइक कभी अब्दुस सलाम का नाम भी नहीं लेगा भले ही वह इस्लाम को विज्ञान का आधार बताता रहे! जब अब्दुस सलाम मरे तो उनकी कब्र पर “पहला मुस्लिम नोबेल पुरस्कार विजेता” लिखा गया. पर मुल्लाईयत के दबाव में पाकिस्तानी सरकार ने “मुस्लिम” शब्द हटा दिया. अब वहाँ “पहला नोबेल पुरस्कार विजेता” लिखा है!

नीचे पकिस्तान के प्रसिद्ध मुस्लिम विद्वान और लेखक हसन निसार की वीडियो देखें जिसमें वो बड़ी बेबाकी से मुसलमान उम्मत की बौद्धिक क्षमताओं पर सवाल उठाते हैं. उन्होंने इस बात को कई बार जोर देकर कहा कि सदियों से एक बड़ा दिमाग भी मुसलमानों ने पैदा नहीं किया और उस पर भी वे अपने आप को सबसे अच्छा समझते हैं और यही प्रवृत्ति उनको और अधिक अन्धकार में ले जा रही है.

अब हिंदुओं से इसकी तुलना कीजिये. बहुत कमियों के बाद भी आज वो हर जगह पर अच्छे स्थान और पदों पर होते हैं. मानव सभ्यता के आरम्भ से इस संस्कृति ने एक से बढ़कर एक हीरे मानवता को दिए हैं और आज भी दे रही है. इसका एकमात्र कारण यहाँ की सभ्यता का आधार वैज्ञानिक होना है. यह प्रकट है कि जहाँ स्वतंत्रता के बाद पाकिस्तान अपने ही बोझ से टूटा जा रहा है वहीँ भारत उसकी तुलना में बहुत आगे है बावजूद इसके कि यहाँ के धूर्त राजनेता केवल अपना स्वार्थ साधते हुए अल्पसंख्यक तुष्टिकरण की नीति को ही राजनीति समझते हैं.

हम उन सबसे, जिन्हें गैर मुस्लिमों खासकर हिंदुओं से नफरत करना ही सिखाया गया है, कहेंगे कि एक बार ठन्डे दिमाग से इस पर विचार करें. अग्निवीर पर वेदों से सम्बंधित लेख पढ़ें. सबसे आवश्यक बात यह जान लें कि वे बाहर किसी देश से आये लुटेरों की संतान नहीं हैं. वे तो सदा से भारत देश में रहने वाले अपने हिंदू पूर्वजों का ही खून हैं. वेद किसी हिंदू की जागीर नहीं, तुम्हारे भी हैं क्योंकि तुम्हारे पूर्वज इन्ही वेदों का पाठ करके तृप्त होते थे. अब अपने ही खून के भाइयों से झगडा बंद करो और वापस अपने घर अर्थात वैदिक धर्म में आ जाओ, आपका स्वागत होगा.

This article is also available in English at http://agniveer.com/3050/scientific-errors-in-hinduism/

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370 Comments on "हिन्दू धर्म में वैज्ञानिक गलतियाँ"

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surendra

॥ जय श्री सांवलिया सेठ ॥ आज के दर्शन
http://www.shreesanwaliyaji.com/blog/daily-darshan/sanwaliya-seth-darshan-14-10-2016

Jatin
प्रिय मित्रो हिन्दू धर्म के बारेमे सदियों पहले संस्कृत में लिखा गया मुस्लिम धर्म कुरान पाण्डुलिपि में लिखा गया था ईसाई का बाइबिल पहले हिब्रू और ग्रीक में लिखा गया था जो पढ़ते है वो हमारे आपने भाषा में हमें किसी ने भासान्तर करके दिया है उसके बाद एक के… Read more »
Charanjit
It is ridiculous to look for science in faith books.Faith books are for spiritual life,and science books for the physical world.One can bend the meanings in religious books to support one position or the other.But it is a futile effort.It is degrading to religious books to find and ascribe meanings… Read more »
TIGER SHAIKH
Agar kisi karan is dunya main koi nas aajaye aur kuch bache bache aur woh bade hokar apki tarah spiderman aur superman ki story se unko ishwar man lenge unke hath spiderman aur superman ki kitab lag gaye to.kya logo ko ghuma fira story sunate ho koi tathy nahi aur… Read more »
TIGER SHAIKH
Agniveer sache ho to is mantra ko kah do gult hai waise ap to itna translation ko ghumakar apni laal k chakkar main ho bhai plz sach jaroori apki laal kuch kam nahi aayegi ap dekho u tube par balbir singh aur us jaise kitne jo apjaiso k bahkave main… Read more »
TIGER SHAIKH
Hasmaleh allahu akbar. illalh illale lailaha illalah. mohmed rath parast mohamadur rasulullah. lailaha harne papan illalah pram paidam tujo chahe sowarg jhape nam mohamadem……Agniver sahab Alo upnishad ka hinduscripture ka mantra hai ab aur bhi jo apne ko bada gyani bata rahe hai jara translation kar bata do agar ek… Read more »
radhaeykrishna
bolne me jadi kar di prathvi sthir ha ye chahe jehadi keh raha ha ya agniveer agar ved aisa keh rahe ha to sahi keh rahe ha sthir ka arth ha santulit sambhalna jo ki indra kata ha indra ko devtao ka raja kaha jata ha jal,tez,vayu,agni inhi ke kara… Read more »
amit
is Sexual morality ka koi jabab hai.. In the Vedas one finds matters relating to seduction, incest, abortion, conjugal infidelity, deception, and robbery as well. Prostitution was common and the prostitutes were called warrangnas. There are some very obscene passages in the Vedas. For example in Rig Veda read the… Read more »
radhaeykrishna
saraswati is not a daughter of brahmah she is a shaktiswaroopa who never be created nor be destroyed says laws of conservation of mass or ved first. Svayambhuva Manu(narayan avtar) is the real father of saraswati.narayan is older than brahmah because brahmah is came out from from narayan navel lotus… Read more »
amit
The popular belief is that Lord Brahma produced the Vedas. He is said to have established sexual relationship with his daughter Saraswati The story is also found in Mahabharat. It may have come from Greece where goddess Medusa was similarly ravished by god Poseidon. story of Pandu, the father of… Read more »
radhaeykrishna
saraswati is not a daughter of brahmah she is a shaktiswaroopa who never be created nor be destroyed says laws of conservation of mass or ved first. Svayambhuva Manu(narayan avtar) is the real father of saraswati.narayan is older than brahmah because brahmah is came out from from narayan navel lotus… Read more »
radhaeykrishna
wo kahani jhuthi ha jo aisa keh rahi ha kyoki itihas me kai log aye jinhone vedo ke sath chhedkhani ki ha isliye hum achhi chizo ko hi sahi man sakte ha galt ko nahi bhala bhagwan khada khad anyay dekhega kuch karega nahi are jab vo karta ha to… Read more »
sandeep
sirf aapke gyaan ke liye anyatha mujhe is bakwas me padne ka koi saukh nahi hai….. suraj ke ghoomne ka matlam 4 law of motion se hai sayad aapne iske baare me suna bhi nahi hoga. is law ke tahat brammaad ki sabi cheeje gatimaan hai….. suraj ke prathvi ke… Read more »
radhaeykrishna

me tumhari baat se puri tarah se sehmat hu mene sabse uper apna comment likha ha

SANDEEP
KYA KAHU TERE BAARE ME BAS ITNA KI TUM SABSE BADE CHUTIA HO VED,PURAN,QURAN sir padne ya chaar line yaad karne se kuchh nahi hota unka sahi sahi matlab bhi pata hona chahiye kya aapko pata hai ki quran me likha hai ki nawaj nahi padhna chahiye fir bhi 5… Read more »
raj.hyd

adarniy shri sandeep ji, aap quran ki vah aayat batalaye jisme namaz n-padhane ko kaha gaya hai ! aur ham batalayenge ki namaz padhne ko kaha gaya ha i !

ratnakar

ese log hindu dharm ke pakke dushman hen , aap log lakh kosis karle, ek din hinduon ki ginati ungalion par karne like rahjayegi 50% hindu to nischit roop se ye dharm chhodne ko majboor hojayenge.

radhaeykrishna

soch le kya pata tu bhi pehle koi hindu ho

ratnakar
contd……. चिमना राम जाट उसमे से फसल लेगा और मूल रकम का ब्याज़ नहीं लिया जायेगा ,बाद में जब भी दलित बस्ता राम सक्षम होगा तो वह अपनी जमीन गिरवी से छुडवा लेगा .बस्ताराम जब इस स्थिति में आया कि वह मूल रकम दे कर अपनी जमीन छुडवा सकें ,तब… Read more »
ratnakar
डांगावास : दलित हत्याओं की प्रयोगशाला …………………………………………………. नागौर जिले की तहसील मेड़ता सिटी का निकटवर्ती गाँव है डांगावास ,जहाँ पर 150 दलित परिवार निवास करते है और यहाँ 1600 परिवार जाट समुदाय के है ,तहसील मुख्यालय से मात्र 2 किलोमीटर दुरी पर स्थित है डांगावास ,..जी हाँ ,यह वही डांगावास… Read more »
ratnakar
taja ghatana rasthan ki he. aap log sudhar ki baaten karte rahoge aur ye los samaj me aag lagate. halat hazaron saal me bhi nahi sudhar payenge. log ese hi sapane dekhte chale jayenge:- राजस्थान का नागौर जिला दलितों की कब्रगाह बनता जा रहा है राजस्थान की राजधानी जयपुर से… Read more »
ratnakar
Bhai raj hyd ji! Aapko ek baat bataun ki aajkal jabse modi sarkar aayee he tab se in pakhandi dharm guruon ne jyada ulte seede bayan dena shuru kadiye hen aur isi ke reaction me sirfire mullaon ne bh asi hi bayan baji kar rahe he jisase samaj ka mahaul… Read more »
raj.hyd

aapki thik baat hai jo hamne anubhav kiya vah hamne pesh kiya aur jo ape anubhav kiya hai vah apne pesh kiya hai ! nisandeh halat bahut jyada kharab hai
fir bhi sab kuch thik hoga

ratnakar
Contd…… क्या सभी जातियां कैदी नहीं हैं? क्या रामचरित मानस, गीता , महाभारत, पुराण, मनुस्मृति जेल मैनुअल नहीं हैं? जिसमें केवल जाति के नाम पर ब्राह्मण को प्रतिष्ठा ही प्रतिष्ठा और सभी जातियों को कैदी की तरह अपमान ही अपमान लिखा है. जेल में घुसते ही कैदी जेल के अधीन… Read more »
rajesh
Sorry Sir , lekin aapane hindu dharm ki kitabokothik se padha nahi.. goon-karm-swabhavanusar char varn hai, Bramhan, kshatriya, vaish aur shudra * jo Brahma arthat Eshwar aur Ved ko janata hai aur unka prachar karta hai vah “Brahman” hai… *shat aur aapattise samaj aur desh ki raksha karnewale “kshatriya” hai…… Read more »
raj.hyd
pramadarniy shri ratnakar ji, aaj apne deshme karib 35 % abadi nagaro me raahti hai vah abadi kafi had ak pakahdi brahman ke jaal se mukt hai 1 jaise jaise shiskha ka vikas hoga pakahndi brahmano ka astiv bhi samapt ho jayega nagaro me janmjat brahman chaprasi adi ki naukari… Read more »
ratnakar
Bhai raj hyd ji! Hindu dharm ke prati aapka nazariye aashavadi zaroor he, lekin ek baat yaad rakhen ki pakhandi brahmano ne hindu samaj ko buri tarah se apne jaal me fasa rakha he. Shayad ya to aapko hakikat maloom nahi he ya aap janate hue apani ankhe band kiye… Read more »
ratnakar
contd:- जिसे मनु स्मृति में बताया गया है इसलिए इसे तुझे मानना ही पड़ेगा यह ही तेरा धर्म है। पंडिताईन- ठीक है पंडित जी, मैं भी आज से आपकी की तरह ढोंग किया करूँगी और बच्चों को भी यही सिखाऊँगी। पंडित जी (कान में फुसफुसा कर) – अरे, मुझे मालूम… Read more »
ratnakar
Example deken:- छुआछूत का खोखलापन एक दिन पंडित को प्यास लगी, संयोगवश घर में पानी नही था इसलिए पंडिताईन पडोस से पानी ले आई I पानी पीकर पंडित जी ने पूछा…. पंडित जी – कहाँ से लायी हो बहुत ठंडा पानी है I पंडिताईन- पडोस के कुम्हार के घर से… Read more »
rupesh kumar

bhai iska koi shlok bhi to likho ki kitane number per tune yah padha hai

ratnakar
Bhai raj hyd ji saval ye nahi ki kisane kab kitni aur kyon milavat ki. asli mudda ye he ki ye is milavat asaliyat ke karan aaj jo halat samaj me dikh rahe hen une down caste vale door karenge ya high caste wale. akhir is hindu dhrm ka suddhikaran… Read more »
sam
ratnakar bhai ..me aap ki bat se agree hun ki chuwachut nahi honi chahiye yeh galat hain ..samaj me galat sandesh pahuchati hain …mere anusar casr system he nahi hona chahiye .. koi sanatni hain bus sanatni hona chahiye per humare village me jo puzari hain wo by cast brahman… Read more »
raj.hyd
adarniy sri ratnakar ji ary samaj ke manch me sabhi dalit bandhu ja sakte hai aur vidya ka gyan lekar vidvan ban sakte hai ! pujari bhi ban sakte hai aur apne pair tak chula sakte hai tatha kathit savano se bhi chula sakte hai hindu samaj me bhi anek… Read more »
raj.hyd
aapko pata hu hai k apna deshhajar saal tak gulam aha hai mugal shasko ne ape sahityo memilavat bhi karva di anek kitabe nayi bui ayi jaise allaopnoshad, manusmriti me achhi bate hai pesh ki gayi hai fir bhi usme bahut si bate milavat ke rup me pesh hai durbhagy… Read more »
ratnakar
raj. hyd. ji Aapne jo samajhdar hindu logon se chand brahmano dwara kabjaye gaye mandiron ka vahiskar karne ki appeal ki aur un dhongi brahmanon ko is tarah se hidu dharm ke patan ke liye responsible mana usake liye sadhubad, lekin aapne jis manusmrati ka naam liya he in saari… Read more »
raj.hyd
adarniy shri ratnakar ji , samaj me jo apne ko jyada samajhdaar hone ka daava karate hai, jab vahi buraiyo ko rokne me kamjor sabit ho ya vahi buraiyo me shamil rahe to unko dosh kyo nahi diya jayega! nishchit rup se uske liye samaj ke vidvan aur jo apneko… Read more »
ratnakar
Is website par oopar mene dekha he apane hindu log isai aur muslim dharm ke logon se vagas karate he lekin kabhi ye bhi soch he ki ye dono dharm duniya ke sabse adhik deshon me fele hen kyonki unme sabhi ko barabari ka darza mila hua he, jabki hindu… Read more »
ratnakar

raj. hyd. ji yadi aap yeh sahi maanate hen ki dharm ka labh 100% logonko milana chahiye to phir in ponga panditon ko kaun samjhyega ki mandiron ko chhode aur kisi aur jaati ke vidwano ko vahan manage karne de. kya aap koi upay batayenge?

raj.hyd
adarniy sri ratnakar ji, aaj ke jo dharm kahalaye jate hai vah vastav me dharm hi nahi hai ! “dusare ke saath vahi karo jo apne liye bhi pasand aye ” yahi sutr hai manvta ka aur dharmika bhi ! jinse aap naraj hotehaiunhone hi bahut sal pahale manusmriti 6/92… Read more »
bsahai
Agniveer bhai ji kya kabhi aapne ye gaur kiya he ki aaj america, france, japan jese viksit desh jo hamse sekaron saal aage hein, kya unhone ye tarakki unake ved purano aur dharm ke dwara ki he ya apne desh ke sangathit naagrikon kee ekta aur unaki kshamata ke bal… Read more »
bsr
Agniveer bhai mene aaj teen article is website par post kiye the jinme mene apne priya hindu dharm me prachlit us hakikat vyabastha ki jhalak matr pesh ki thi, jo buri tarah se sad chukihe aur jo hindu dharm ko aage nahi badne derahi. Mene pahle hi bola the ki… Read more »
rohit
Kya insan bhgawan ko bana sakta hai kya agar jo insan bhagwan ko apnay haat say banakar pooka karta hai hai to bhagwan say bada insaan hai lakin may is baat say sahamat nahi hota q ki bhagwaan apnay aap may vishal insann pathhar say nahi bana sakta hum log… Read more »
Ratnakar

Continued from last :-

ki shadiyan karna shuroo nahin karenge.
Bina vastavik badlao ke khali ved purano ke geet ga ga kar hindu dharm ke prasar ki baat karana kori beimani he aur aapaki mehnat ka hinuon ko 1% bhi faida nahi mil paayega.
RATNAKAR
Hindu dharm ka real well wisher.

raj.hyd
ratnakar ji @a pki yah baat saty hai ki 100% hinduo ka bahla hona chahiye ! bahla bhi vahi utha sakenge jinki ruchi hogi ! ruchi kiis ki bhi ho sakti hai ! dharm ka theka sirf janmjaat brahano ka nahi hai ! sabhi usse labh utha sakte hai jo… Read more »
Ratnakar
Sachchai hamesha kadui hoti hai. Agnivir bhai apne is web par ved purano ki itani tariff ki he ki yeh spasht nahi hoparah ki isase aap vastav me kisaka bhala karna chahte he, Hindu dharm ka, Hinduon ka ya Hindustan ka? Bharat desh me jitani hinduon ki avadi he usame… Read more »
ratnakar
mere khayal me hindu ek dharm nahi balki dher sari jatiyon ka collection he jiske antargat high caste ke logon ko maan sammaan dene aur down caste ke logon ko beizzat karane ka adhikar milata he.yahi vajah he ki hindu dharm bharat me hi nahi felpaya, jabaki bodh dharm bharat… Read more »
raj.hyd
parama drniy shri arunesh ji , pahali baat ham ya koi bhi ishvar ke ansh nahi hai ! agar ansh hote to ishvar ke gun bhi ham sab me hote jo nahi hai jaise ham sab nasha karte hai jhuth bolte hai ek chintee ka nirman bhi nahi kar sakte… Read more »
KishanSinghParrmar Pandavvanshi

Hindu dharmnatan dharm he is se musalman ke vidvan bhaybhit hote ja rahe he. Bharat bhumi toh swayam bhagwan vishu ne 24 bar janm liye

VANDEBHARAT MATRAM

raj.hyd
vishnu se sirf 24 baar hi aapke hisaab se kyo janm liya ? iske baad bhi apna hindu samaj gulam kyo raha jab gulami ka daur hajaar saal tak chal raha tha tab janm kyo nahi liya ? karodo hindu muslim kyo ban gaye kyo desh ka vibhajan hua
Arunesh
Adarniya Raj Ji Namaskaar !!! Aapki post dekhi to man hua ki kuch prativaad kar liya jaaye. Aapki soch ek rationalist ki soch hai, jiske liye aapko sadhuvaad. Kintu, rationalist ke saath ek problem hoti hai aur wo yah ki wo uplabdh aur sidh ho chuke pramanon par hi baat… Read more »
Arunesh
aap jaise dayavaan aur dharmaatma logo ki vajah se kaalima badhne ki gati dheemi hai. kyonki pruthvi par resources simit hain aur manav ke man ke andar ki khurafaten asimit, kaalima badhti hi jaayegi. Yug bhi isi kaalima ki maatra ke hisaab se badal jaate hain. Satyug – Pure Gold… Read more »
arunesh
Ishvar ke ansh shri Raj ji, namaste ! aapne wo hi baate kahi jo tark-buddhi se ki jaati hain. yadi aap ko manushy aur ishvar me bhed lagta hai to aap galat hain. manushy ya koi bhi jeev ishvar ho sakta hai. Ishvar ek shakti ka naam hai aur wo… Read more »
raj.hyd
paramadarniy shri arunesh ji , sadar saprem namaste ! hamare drishtikon se ishvar ke janm ka vichar hi galat hai saty tino kalo me ek tarah ka hi hota hai ! ishvar ke janm lene kibaat hi laghuta aur kamjori sabit hoti hai ! janm lene ke liye mata pita… Read more »
truth always prevais
@Abdu Rasul…LORD SHIVA has himself narrated the “Benefits of Urine Therapy” to MOTHER PARVATI which has been referred in the ancient book “DAMMAR TANTRA” in Vedas. In Ancient Books and VEDAS Urine is referred as “SHIVAMBU” (Auto Urine) meaning Water of SHIVA. Urine Therapy is the ancient method of treatment.… Read more »
Krishnarao

Truth will prevail, still not providing the quote, the name of the practicing Hindu translator, the publisher, and which Hindu group supports that translation of the Vedas. Coward.

truth always prevails
truth always prevails
URINE IS A POTENT REMEDY AND DRINK OF THE GOD Atharva Veda 6.44.3 Thou art the urine of Rudra, the navel of amrita (ambrosia)… मूत्र [Mutr] = Urine. Refer Panini’s Ashtadhyayi Vol III, Ch 2.56. V.S. Apte’s dictionary [The Students English-Sanskrit Dictionary, By V.S. Apte, p.445] Here Mutr (Urine) is… Read more »
Krishnarao
Bible tells you to drink your own urine: “15 Drink water from your own cistern, flowing water from your own well. ” (Proverb: 5:15) Bible tells you to eat your own poop: “”And thou shalt eat it as barley cakes, and thou shalt bake it with dung that cometh out… Read more »
truth always prevails
truth always prevails
@krisna Rao… Bhai bible aisa kahi nahi likha, aur west aur Arab me koi mutr nai peeta, han India ki ayurveda aur baba ramdev ke video aap YouTube me dekhe jisme cow ke mutr ko kai beemariyon ki dawa batayi gayi hai, aur morar ji Desai cow ka mutr peete… Read more »
Krishnarao

truth always prevails says, English. I don’t know Hindi.

Krishnarao
Truth will prevail, i quoted the lines fron the bible translated by practicing christains that tell you to drink your own urine and even eat your own poo. Go look at it. Yet you did not give me a translation by a practicing Hindu from the Vedas that say we… Read more »
truth always prevails
truth always prevails
There are no verses in Bible, Torah or Quran which advocate about drinking pee of camel or cows. But, in Veda there are lot of instances where you will find cow’s urine and faeces are panacea for treating various disease. You can find various videos on YouTube where urine of… Read more »
Krishnarao
truth always prevails says, Again the verses you speak of from other sources are useless, let’s talk about the one from the Veda: Here is what it actually says: Rudrasya Mutramasyamrtasya Nabhih. Visanaka Nama Va Asi Pitrnam Muladutthita Vatikrtanasani. English Translation: ” You are the shower of the cloud, you… Read more »
Krishnarao

The muslims in the arab world still drink camel urine as a way of treatment. And in the West they use horse urine as a way of treatment. These are facts.

Abdu Rasul

@Krishnarao

_______________muslims in the arab world still drink camel urine as a way of treatment_______________

What is the shame. in this if they consume camel urine to treat the disease. If camel urine helps to cure certain disease they should be glorified to find treatment of any certain disease.

Krishnarao

And some small minority of Hindus claim the same thing about cow urine. What’s the difference. And in the West, they used the same claim about horse urine. I heard all the claims. save it.

AJAY KUMAR

kya yahi dharm hai

raj.hyd

manusmriti 6/92 me dharm ke lakshan batlaye gaye hi vah sabhi gun vachak hai inko samajhiye

rahul

right

rahu

very good

Arjun
Dekh bhai hindu dharm.me jo likha h wo ik ik bat sahi h. Jin musalmano ki bat karte ho kuch samay pahle tak unka astitwa hi nahi tha wo to koi ik koi lagal mar gaya ik pahad par jisko tum apna bhagwan mante ho .. hindu dharm ka to… Read more »
manoj

sab log apni apni ray batate hai use sudhar te to nahi

raj.hyd

sudharne vale sudharte bhi hai
beshak sudharna bahut jaruri bhi hai

amol
i likemuslim dharm kyo ki mera isa manna hai ki eh dharm me babil aur kuran ke kuch vachane sem hai wah ise 1)muslim me burkha pehana jata hai aur christioan me bhi shadi ke doran safed burkha pehana jata hai 2) marne ke bad jamin me dafhanaya jata hai… Read more »
raj.hyd
islam aur isaiyat koi dharm nahi hai ! dharm ka sambndh dayaa se hota hai jo dono me nahi hai ! duniya koi bhi kisi bhi samuday me paida ho jaye usko sirf manvata ko apnana chahiye yani “dusre ke saath vah i vyavhaar karo jo apne liye bhi pasand… Read more »
raj.hyd
shav ko dafnana galat hai usko bijli ki mashin me dahan karvana chahiye kyoki jamin is desh me bahut kam hai aur jamin bahut kimti bhi hoti hai ! uska sahi upyog ho isai mahilaye sirf vivah me safed kapde jyada pahankar vivah karvari hai usko burka kadapi nahi kaha… Read more »
Tarique Kamal

AAP ME ITNI HIMMAT HAI PUBLIC DEBATE KA TO IRF SE CONTACT KREN MHI HOTA HAI TO MUJHE BOLE SARA ARANGEMENT KARWA DENGE JGAH AAP TAI KREN TIME IRF WALE TAI KRENGE.

sam

kabhi bhi kahi bhi kar sakte hi bedate jahan aap chaho

raj.hyd
aap koi bhi din tay kar lijiye ham quran par bahas karne ko taiyaar hai hamari sirf ek shart hai ki sari bahas shanti purvak honi chajiye aur sunne vale bhi shant rahe ! ky aap bahas karvane ki himmat rakhte hai jara zakir ji ya any kiis islami visdvan… Read more »
Tarique Kamal
Har koi ko apni bat rakhne ki azadi hai par aam bhole bhale aur kam parhi likhe hinduao ko murkh bna na Brahmins ka ye khel hazaro sal se chala arha hai. Pahle ye bten ki Vedas ko parhne ka huq kisko hai aur chune ka huq kisko hai aur… Read more »
raj.hyd
adarniy raiq ji samajik paristhitiya badalti rahati hai rajkiy vyavsthaye bhi badalti rahati hai aaj koi stri ya dalit varg ka vyakti ved adi padh sakta hai kuch bate afvah bhi ho sakti hai. kya aapka buta hai ki aap zakir ji se hamari bahas karva de ? ham sirf… Read more »
raj.hyd
adarniy shri rehan ji jab quran hi ” mul ki bhul “hai tab any pustke padhne ki bhi vishesh jarurat nahi hai aap batalaye jin kitabo ka ap jikar kar rahe hai vah kab se quran se badi ho gayi aur kab se hadiso se badi ho gayi ! islam… Read more »
raj.hyd
kabhi alisina ka fethfreedam.com me jakar islam ki asliyat jan ne ki taklif kar lijiyega aur sochiye ga ki vah islam ki alochna karne ko kyo majbur hua? padhe likhe samajhdaar manvta vadi muslimo ko bhi islam ki alochnakarne ki pahal karni chahiye aur quran ki sangati bhi tatkal chod… Read more »
Kapil

Hindu dharma sanatn dharma he.
yah kab start hua kisi ko nahi pata,to iska END bhi asambhav he.jay hind

sysed shanawaz ali
Bahane ke lawdo sab ko malum hia ki muslan aur kurna ki ma ka bhosada hia .. sali rand ke samana hia kuran ..phir bhi tum itane pavitra dharam par awaz utha rahe ho ..salo alla tumhe kabhi maaf nahi karega….. khuda ki kasam koi sahi dharam hai to woh… Read more »
raj.hyd

aap aapni baat bagair gaali ke bhi pesh kar sakte the ! jisko aapne pasand nahi kiya !

Akanksha

Raj ji
Aapko pata hain Isaai dharm ke prophet/devadoot ka astitv nahi tha. Kuch logone rajaniti karane ke lie usaka nirman kiya. Unaka jo dharm granth hain bible wah bhi dusare dharmik kahaniyon ka mishran hain. Jis god ka astitv nahi hain, usiki puja kar rahe hain.

raj.hyd
ati sammanit shri arunesh ji yah bat apki thik hai sirf sanatan dharm hi[andhvishvas rahit vala ] sachha dharm hai baki koi dharm hi nahi hai durbhagy se apne dharmik vidvano ne bahut badi bhul kar di jo apne alava bhi islam isauyat bauddh jain adi ko dharm man liya… Read more »
raj.hyd
manniy aknksha ji , bibal bhi anek tarah ki hai , aur isaiyo me bhuat se alag alag samudaay hai kuch isa ko khuda ka beta mante hai koi dev dut aur koi svayam ishvar ko hi ishvar bhi kah dete hai bibal ka pahala pej kholiye usme likha hai… Read more »
divyaraj
ek dost ne muzse ye sawal pucha tha whatsup pe, lekin muze iska answer pta ny tha, bcoz i m a christian, bhaiyo plz aap log btaoge muze plz सवाल है जो बहुत हि सोचने लायक है, जैसे कि – 1:- सभी देवी देअवताओ ने भारत मे हि जन्म क्यो… Read more »
Arunesh
@Divyaraj, … Devi aur Devta parmeshvar ki shaktiyon ka prakati-karan hain. Bhaarat desh me bhakti-maarg bahut purana hai. Bhakt use kahte hain jisne apne prem se nirakaar ishvar ko us bhakt ki iccha ke anusaar rup dhaaran karne par vivash kar diya ho !! Isliye jitne bhi devi aur devtaon… Read more »
raj.hyd
mananiy shri arunesh ji ! jara sochiye ki bhakt kabhi ishvar se bada ho sakta hai kya ishvarkobaadhy kar sakta haijo badhy ho jaye vah ishvar kabhi nahi ho sakta us bhakt ko prati pal svanso ke maadhyam se jivan bhi ishvar hi deta hai ! fir kaun bada hua… Read more »
Manish bharti

mai to kahna hu indian sambidhan ko hi dharma granth man le isi me sabka shath aur bikash hai (verman ek dusre ke dharm me gota lagate rah jaoge

Arunesh
Shriman Raj Ji – aapka sochna taarkik hai kintu adhyatm ke rahasyon ko aap tark-buddhi se nahi jaan sakte. Bus itna hi kah kar is vishay par main samvaad band karna chahoonga. Asha karta hoon ki aap Gyaan ke maarg se Kaivalya pad tak pahuch paayenge. Kintu gyaan ka panth… Read more »
raj.hyd

manniy shri arunesh ji adhaytmik rahasyo me bhi saty ka, tark ka samavesh hona chahjye ! varna koi bhi adhyatmik rahasyo ke nam par galat baat bhi pesh kar sakta ha i !

raj.hyd
jinhone yah prashn pucha tha unse aap yah bhi puch sakte hai ki aaj ke dharm samajhne vale sabhi asia me hi kyo j huye yurop africa adi me kyo nahi huye jaise islam isaai yahudee adi ! apne desh me jinko devi devta kaha jata hai vah sab kalpit… Read more »
Arunesh
@Adarniya Raj Sir,…. Kis aadhar par aap Devi-devtaon ko kapol kalpana kah rahe hain? Yadi wo aapki adhyatmik jnaan ki pahunch se baahar hain to wo aapke liye kapol kalpana ho sakte hain, anyatha aur koi karan nahi hai. Aap kisi bhi ek rishi ka naam batayen jisne ishvar ke… Read more »
raj.hyd
parama darniy shri arunesh ji , agar ishvar saakaar hota to simit bhi hota jo simit hota to itna bada brahmand ka nirmata kaise ho sakta tha isliye ishvar sirf nirakar” hi” hai ! agar ishvar sakaar hota to ham sabake sharir mata ji ke “garbh”me itane vaigyanik dhang se… Read more »
raj.hyd
ishvar ka ek bahut bada gun gyan ka bhi hai fir ishvar ko buddhi se kyo n jaana jaye ? ishvar ka ssambandhbuddhi se tark se kyo nahi kaha jaye ? ham sabko gyan ishvafr se hi milta hai! itna bada brahmand gyan ka hi shrot hai ! isi se… Read more »
raj.hyd
us shatpath brahman me kalpit devi devta duraga ganesh sarasvati laksh mi adi ka jikar bhu nahi hai asal me devta kaun hai? jo sabko de vah “devta” aur jo le vah” levta ” jaise apradhi varg kuch n kuch lete hai isliye unko levta bhi kaha ja skata hai… Read more »
VINOD PARMAR
ishvar ne do tarah ke prani banaye he , (1) MASAHARI (2) SHAKAHARI , do no prani ke sharir ki rachna ishvar ne alag alag ki he aur janm se hi alag tarike khane pine ke he. jaise MASHAHARI prani hamesha chaat (LICKING) kar pani piye ga, aur SHAKAHARI ghut… Read more »
raj.hyd
parama darniy shri arunesh ji , ishvar sirf nirkaar hai agar sakarv hota to vah” simit” ho jata jo shakti nirkaar me hoti hai vah sakaar me nahi ho sakti hai agar sakaar hota to batlaiye vah sakaar kis rup me hai kya bhukh, dard , bukhaar gandh , vayu,… Read more »
Manish bharti

raj bhai bilkul sahi bat aap ne batayi ki , ishwar sirf nirkar log mante hi nahi this yug me ek naya granth ki rachan ho jisame sabko saman samman ho aur shath ho jai bheem jai bhart

Arunesh
Shrimaan Raj ji, dard, bhukh, pyass, khushi ityaadi ko bhi Rup me Badla ja sakta hai!! Ye sab vyakti kee abhivyakti me parilakshit hote hai.. Inka rup vyakti ke chehre par ubhare bhaavon pe dekha jaa sakta hai. INKA ROOP YAHI HAI. Isi prakaar ishvar ka bhi rup prakat hota… Read more »
Arunesh
@Raj.Hyd Sir, aapki reply aaj dekhi…. aap yah batayen ki ishvar ko buddhi pahchaanti hai ya aatma pahchanti hai ? Agar buddhi pahchaanti hai to usne use Nirakar kyon bol diya? Nirakar bolne ke liye to alp-buddhi ki bhi jaroorat nahi hai… aur shunya buddhi to us ishvar ko anupasthit… Read more »
Arunesh
Shrimaan Raj Ji, aapki tippani ke liye dhanyavaad. yah aapse kisne kah diya ki agar isvar saakar rup me hoga to simit hoga? simit aur asimit hamaare dvait buddhi ke lakshan hain. sochiye ki is pure brahmaand me ishvar ki shakti hai jise ham apni indriyon ki simit kshamta se… Read more »
raj.hyd

paramdarniy ssri arunesh ji aap kuch udaharan dijiye jo sakaar ho aur asimit bhi ho ! jal bhi sakaar hota hai! agar ishvar sakaar hota to aaj bhi hota vah sakar ishvar apki nigah me kaun hai ?

Arunesh
Sriman raj ji, namste! yah pura brahmand jisko ham nahi dekh paa rahe hain wo bhi saakaar hi hai. Ya wo sab anant brahmand jinhe ham apni buddhi aur indriyon se nahi jaan sakte, wo bhi saakar hi hai. Saakar hone ke saath saath wo asimit bhi hai. udaharan ke… Read more »
raj.hyd
bhukh dard pyas adi ka rup nahi hota balki abhivyakti [bhavna][ahasaas] jarur mil sakti hai ! ishvar kya hai sirf ek chetan shakti ka nam hai 1 vah samras hai kahi ati jati nahi hai ! ek smaan hai kisi vishesh me kam jyada nahi hai! dil me atma hoti… Read more »
raj.hyd
paramadarniy shri anuresh ji bramhand kitna bhi vishaltam ho tab bhi vah simit hi rahega bhale hi vah pura n bhi dikhlaai de kyoki netro ki bhi dekhne ki ek sima hoti hai, netr halka sa tinka bhi nahi dekh pate apne netr bhi nahi dekh pate hai , ishvar… Read more »
Arunesh
.. ya kam hoga to gun kam hoga. Wo ishvar ek chhote se chhote anu me bhi apni sampurna shakti aur gunon ke saath viraajmaan hai. aapne yah bhi kaha ki paani saakar hota hai…… sahi bhi aur galat bhi… sahi isliye ki use jab kisi patra me rakhte hain… Read more »
Arunesh
…. jiske baare me koi nahi jaanta aur kewal naam hi rakha hai to use aap koi bhi rup rang ya aakar denge to wohi uski pahchaan ho jaayegi. fir aap usko nirakar bole ya saakar aap ki drushti hai. ishvar ke baare me aisa hi hai. Use kewal naam… Read more »
VINIT TRIPATHI

Manta hu ki Hindu Dharm me Vigayanik Dristy Kon se kuch Galtiya h ! Magar Sanatan Dharm kya h ?

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