वेद और शूद्र

This article is also available in English at http://agniveer.com/821/vedas-and-shudra/

वेदों के बारे में फैलाई गई भ्रांतियों में से एक यह भी है कि वे ब्राह्मणवादी ग्रंथ हैं और शूद्रों के साथ अन्याय करते हैं | हिन्दू/सनातन/वैदिक धर्म का मुखौटा बने जातिवाद की जड़ भी वेदों में बताई जा रही है और इन्हीं विषैले विचारों पर दलित आन्दोलन इस देश में चलाया जा रहा है |

परंतु, इस से बड़ा असत्य और कोई नहीं है | इस श्रृंखला में हम इस मिथ्या मान्यता को खंडित करते हुए, वेद तथा संबंधित अन्य ग्रंथों से स्थापित करेंगे कि –

१.चारों वर्णों का और विशेषतया शूद्र का वह अर्थ है ही नहीं, जो मैकाले के मानसपुत्र दुष्प्रचारित करते रहते हैं |

२.वैदिक जीवन पद्धति सब मानवों को समान अवसर प्रदान करती है तथा जन्म- आधारित भेदभाव की कोई गुंजाइश नहीं रखती |

३.वेद ही एकमात्र ऐसा ग्रंथ है जो सर्वोच्च गुणवत्ता स्थापित करने के साथ ही सभी के लिए समान अवसरों की बात कहता हो | जिसके बारे में आज के मानवतावादी तो सोच भी नहीं सकते |

आइए, सबसे पहले कुछ उपासना मंत्रों से जानें कि वेद शूद्र के बारे में क्या कहते हैं  –

 

यजुर्वेद १८ | ४८

हे भगवन!  हमारे ब्राह्मणों में, क्षत्रियों में, वैश्यों में तथा शूद्रों में ज्ञान की ज्योति दीजिये | मुझे भी वही ज्योति प्रदान कीजिये ताकि मैं सत्य के दर्शन कर सकूं |

यजुर्वेद २० | १७

जो अपराध हमने गाँव, जंगल या सभा में किए हों, जो अपराध हमने इन्द्रियों में किए हों, जो अपराध हमने शूद्रों में और वैश्यों में किए हों और जो अपराध हमने धर्म में किए हों, कृपया उसे क्षमा कीजिये और हमें अपराध की प्रवृत्ति से छुडाइए |

यजुर्वेद २६ | २

हे मनुष्यों ! जैसे मैं ईश्वर इस वेद ज्ञान को पक्षपात के बिना मनुष्यमात्र के लिए उपदेश करता हूं, इसी प्रकार आप सब भी इस ज्ञान को ब्राह्मण, क्षत्रिय, शूद्र,वैश्य, स्त्रियों के लिए तथा जो अत्यन्त पतित हैं उनके भी कल्याण के लिये दो | विद्वान और धनिक मेरा त्याग न करें |

अथर्ववेद १९ | ३२ | ८

हे ईश्वर !  मुझे ब्राह्मण, क्षत्रिय, शूद्र और वैश्य सभी का प्रिय बनाइए | मैं सभी से प्रसंशित होऊं |

अथर्ववेद १९ | ६२ | १

सभी श्रेष्ट मनुष्य मुझे पसंद करें | मुझे विद्वान, ब्राह्मणों, क्षत्रियों, शूद्रों, वैश्यों और जो भी मुझे देखे उसका प्रियपात्र बनाओ |

इन वैदिक प्रार्थनाओं से विदित होता है कि –

-वेद में ब्राह्मण, क्षत्रिय, वैश्य और शूद्र चारों वर्ण समान माने गए हैं |

 -सब के लिए समान प्रार्थना है तथा सबको बराबर सम्मान दिया गया है |

 -और सभी अपराधों से छूटने के लिए की गई प्रार्थनाओं में शूद्र के साथ किए गए अपराध भी शामिल हैं |

 -वेद के ज्ञान का प्रकाश समभाव रूप से सभी को देने का उपदेश है |

-यहां ध्यान देने योग्य है कि इन मंत्रों में शूद्र शब्द वैश्य से पहले आया है,अतः स्पष्ट है कि न तो शूद्रों का स्थान अंतिम है और ना ही उन्हें कम महत्त्व दिया गया है |

इस से सिद्ध होता है कि वेदों में शूद्रों का स्थान अन्य वर्णों की ही भांति आदरणीय है और उन्हें उच्च सम्मान प्राप्त है |

 

यह कहना कि वेदों में शूद्र का अर्थ कोई ऐसी जाति या समुदाय है जिससे भेदभाव बरता जाए  –  पूर्णतया निराधार है |

 

अगले लेखों में हम शूद्र के पर्यायवाची समझ लिए गए दास, दस्यु और अनार्य शब्दों की चर्चा करेंगे |

 

अनुवादक: आर्यबाला

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Comments

  1. Truth Seeker says

    @AGNIVEER
    BAHUT HI SUNDER but I think First priority should be Hindi translation of Article Series
    on Vedic God. Eradication of caste-system will not be a hard nut to crack
    when people will understand true concept of God.

    • says

      @ Truthseeker. It is both ways. In fact understanding of true concept of God demands not only knowledge but practice and mastery of Yoga. We all represent different phases of that understanding. But if caste system be dented, and intellectuals start rejecting those texts which support casteism, than understanding of God becomes much simpler from remaining texts. After all Vedas state that unless we consider entire humanity as one family – we cannot understand the truth. And eradication of caste system seems to be easiest nut to crack at this juncture, if we are willing to put same level of actions that were put by Swami Shradhanand etc not many decades ago.
      Admin

  2. raj.hyd says

    jab kisi bhi vyakti ke pair chukar uska samman kiya jata hai ,aur usse ashirvad liya jata hai tab pair ko shudr ki sangya kyo di jati hai! kya agar pair me kanta ya koi takleef hogi tab kya pureshareer ko takleef nahi hogai kya pair ki takleefko dimag vanchit rah sakta hai ? usi tarah se samaj ke sabhi vyakti ek dusre ka dard samajhe tabhi sara samuday pragati kar sakega ! bhala karo ;bhala karo bhagvan ,sab ka bhla karo ,koi n ho jag me dukhiyari , jab yah bhavna sabhi ke dimag v dil hogi tab matbhed hote huye bhi “manbhed “nahi ho sakenge !

    • jitendrakumar says

      as per vedas kshudra is not that who can born in kshudras house,kshudra is that who are illiteracy,un educated,and who are going to against of nature that person should be kshudra,if he is born at pandit home or kshtriya home that is the kshudra,and example ,like valmiki muni he is kshudra but after he became bhrahm rishi,,then,,vasishth muni he born in vaishyas home but he became a bhrahm rishi,then vishwamitra he born as kshtriya after that he becam a bhrahm rishi,,,,so that mince person has make his self as per his karma not on his born…..,

  3. Sandeep says

    नमस्कार दोस्तो,
    मैंने आप सभी के विचार पढे़ और अच्छा लगा । मेरे विचार से जाति प्रथा को हमारे आज के समाज में जीवित रखने वाले राजनितज्ञ है जो हम सब को बेवकुफ बनाकर अपना उल्लू सीधा कर रहे हैं और सब से ज्यादा कसूरवार हम सब हैं जो उनके हाथों उल्लू बन रहें हैं । राजनितज्ञ हमें बटाना चाहते हैं ताकि हम कभी एक न हो सकें क्योकिं अगर हम एक हो गये तो उन सब की कुर्सियां चली जाएगी और सबसे महत्वापूर्ण यह कि हम अपने अधिकारों जैसे कि अच्छी एवं सस्ती शिक्षा, रोजगार के साधन, आर्थिक सुरक्षा, उच्च स्तर का जीवन की मांग न करने लगें जिन्हे पाकर हमारी सोचने-समझने की समक्षता बढेगी और जागरूकता आएगीं । इसलिए राजनितज्ञ चाहते है कि शिक्षा को महंगे से महंगा करो ताकि हममें जागृति न आ सके और बची हुई कसर हमें जाति धर्म जैसे मसलों में लडाकर पूरा करते है इसलिए दोस्‍तों मेरी आप सभी से अर्ज है कि उस एकता को बढावा दो जिसे असफाक उला खान, भगत सिहँ, राम प्रसाद बिसमिल, सुभाष चन्द्रि बोस जैसे शहीदों ने भारत को आजाद कराने के समय बनाई थी

    • ashok kumar says

      Yadi barn bhed nahi hota to 1000 salo she shudro ko shiksha she banchit nahi kiya jata.
      Naga sadhu banane ke liye bhraman Kshatriya baisya ki hi anumati nahi hoti.
      Shudro ko mandir me Jane se nahi Roma jata.
      Etc.

  4. says

    me us ved ko nhi manuga jisme sudra or brahman ki bat ho inshaniyat bhi koi chij hoti he ek pagal ne likkhha sab usi ke pichhe bhag khade huye kyu apki budhhi or meri budhhi kya kam nhi karti jo kisi ki bhi bat mann lu

  5. jalwan says

    People talk wise while behave otherwise .God known as brahman which name cunningly kept for own caste and being guru not allowing othrs to read/ wite and to do sadhna with the help of kings as case of shambuk ,eklavya ,karna and so on, history is full of such discrimations which even still continueing. Thus forcing India/bharat/aryavart/jambudweep ( lion shaped )to break into pieces and convert to

    budhism,jainism,cristinity,islam,shikhism.It is guru who shows the mirror to the society.like father like son .Boasting never helps. How long befooling shall continue. If brahmin,akshtriy.vais sudra are equal let only 1 PERCENT intercaste marriges take place every month,you shall within 1 year INDIA SHALL BE GREATEST NATION as dr b r ambedkar ELECTED the greatet indian after 60 years BAPU GHANHI died in 1948

  6. som says

    People talk wise while behave otherwise .God known as brahman which name cunningly kept for own caste and being guru not allowing othrs to read/ wite and to do sadhna with the help of kings as case of shambuk ,eklavya ,karna and so on, history is full of such discrimations which even still continueing. Thus forcing India/bharat/aryavart/jambudweep ( lion shaped )to break into pieces and convert to

    budhism,jainism,cristinity,islam,shikhism.It is guru who shows the mirror to the society.like father like son .Boasting never helps. How long befooling shall continue. If brahmin,akshtriy.vais sudra are equal let only 1 PERCENT intercaste marriges take place every month,you shall within 1 year INDIA SHALL BE GREATEST NATION as dr b r ambedkar ELECTED the greatet indian after 60 years BAPU GHANHI died in 1948

  7. khemchand jatav says

    kya aap batayege ki kya aap ki pas vedo ki kya mool kitab hai aap ne ye sab jan buj kar hindu dharam ko mahan banane ke liye nahi likha hai
    aap ke pas sabot kya hai jo bhi aap ne likha hai vahi sach hai. aaj bhi gavao mai or sharo mai jati wada hota brahaman vishye kshtriyae sc st ki jatyo mai shadi nahi karte hai or sab vedo ki hi bat karte hai
    iska matlab yoye ki tum bas juthi bato ko sach karne ki kosis kar rahe ho

    • raj.hyd says

      adarniy sri khemchand ji kya apne ved padhe hai ?
      apko kisibhi purani ary samajme padhne ko mil sakte hai
      , sarvdeshik ary partinidhi sabha ram lila maidan ke samne asfali road diili se aap mangva bhi sakte hai . aap bhi vedo ka gyan pakar brahman bhi bansakte hai purohit vala kary bhi kar sakte hai ary samaj me aise bahut se aise vyakti hai jo nimn jati me paida hokar bhi ved ke vidvan bane hai aur purohit vaala kary bhi kar sakte hai !
      bhartiy samaj me to manshari, nashe baaj bhi hai tab kya unko ved ke anukul acharan karne vala mana ja sakta hai !

      • Siddharth says

        Mere dosto iss post ke baare main kehne ke liye bahut kuch baate hai lekin sirf thoda hi likhunga

        Kya manusmruti main 4 warni ke baare main yeh nahi kaha gaya hai ki brahman bramha ke sir(buddhi) se paida huwe hai, kshatriya baahu(haath) se, vaishya maandi(jaang) se paida huwe hai, aur shudra bramha ke pair(paaw) se paida huwe hai ?
        Ji yeh likha huwa hai, maine aur hum sab ne padha bhi hai aur sab iss baat ko jaante hai,

        toh mujhe yeh batao ki aap keh rahe hai ki ved bramhan aur shudra main bhedbhaw nahi karte hai toh yeh kya hai ? Ved likhit hai toh isme ulta kar dete bramhan ko pair(paaw) main se paida karwate aur shudra ko dimaag(sir,buddhi) se… bramhano ko sir(dimaag, buddhi) aur shudro ko pair(paaw) se hi kyu paida karwaya vedo main ? Aur ab aap kahenge ki yeh to jo hua tha woh likhit hai, toh mere dosto iska matlab yahi hua ki vedo main hi bhedbhaw ki sikhaai di gayi hai,
        Aur sabse badi baat, ye hai ki agar bramhan aur shudra tatha dusre warno main koi bhedbhaw ya antar hi nahi hai toh yeh warna nirmaan karne ki jarurat hi kya thi… batao ? Vedo main agar in dono warno ko samaan hi maana gaya hota to nirmiti hi nahi hui hoti… example. Madhya pradesh aur maharashtra 1960 ke.pehale ek.hi rajya the lekin uske baad alag alag ho gaye. Kyu ??? Kyonki hindi bhashik madhya pradesh main chale gaye aur marathi bhaashik maharashtra main chale gaye… dono alag huwe kyu ki woh assal main alag hi they vicharo se, bhasha se… sirf jameen se nahi huwe the… woh bhi 1960 main ho gaye alag alag rajya… madhya pradesh aur maharashtra…Toh iska matlab yahi hai ki alag hai toh hai… vedo main diya hai bhedbhaw karna aur iska matlab aapki post galat hai… maine sirf ek.hi baat rakhi hai… aur bahut kuchh hai sacchai batane jaisi vedo ke baare main… krupaya aap hi thik se ved-puran padhe aur jhuthi post man kare… vedo main assal.main bhedbhaw hi hai warna dosto…
        4 warn nirmaan karne ki jarurat hi kya thi ?Warn ka matlab hi hota h k jaati k adhar…

  8. RAJESH says

    Ved read karne se hame sacche ka pata chalta hi ki VED JAISE PAVITRA GRANTH ME KISI BHI VARNA KE BARE ME BILKUL SAHI LIKHA HI….SABHI KO VED READ KARNA ……….

  9. dev says

    क्या सही में वेदों में ऐसा लिखा हैं? या फिर ऐसे मंत्र बाद में अंतरभूत किये गये हैं? मान लेते हैं की वेद सही हैं तो फिर हिंदू धर्म के शंकराचार्य समानता बढाने के लिए क्यों आगे नही आ रहे हैं। क्यों इतनी जातियता गांवो शहरों में आज भी दिखाई देती हैं? डॉ. बाबासाहब आंबेडकर जैसे महापुरुष को क्यो आपनी सारी जिंदगी हिंदू धर्म के जातीवाद के विरोध में लढते लढते खर्च करनी पडी? बुध्द को क्यों समानता, बंधुता, स्वतंत्रता, सत्य, अहिंसा, करुणा, मैत्रि की शिक्षा देनी पडी? कोई ऐसी शिक्षा तभी दे सकता हैं जहा समानता नही, बंधुता नही, स्वतंत्रता नही, झूठ का बोलबाला हो, हिंसा का अतिरेक हो, दया करुणा मैत्रीभाव का अभाव हो या मानवता से अधिक वर्ण या जाती को महत्त्व दिया हो। क्यों लोगोने धर्मांतरन किये? क्यों धर्मो की संख्या भारत में सब से अधिक हैं? पहले वैदीक / हिंदू धर्म या व्यवस्था में कोई दोष होगा इसलिए तो इतने धर्म पैदा हुए। आज भी निचली जातीवालो की हलात इतनी जानवरो जैसी क्यों हैं? और उंची जातीवाले उनपर आज भी इतना जुल्म कौन से धर्मग्रंथ कि अधार पर करते हैं? इसका कारण क्या अग्निवेशजी हैं?

    • JALWAN says

      guru ravidas said – lakha aaye lakha turgaye tere warge raje , mahalan vich kabuter bolen band pade darwaje . u must have heared news – yamuna express way i10 car tyre brused 5 person of a family died . anyone if hopes god will come n protect him/her from odds of life / nature is wrong . big fish eats the smaller , is law of nature none can avoid except himself/herself . shihkshit bano , sangharsh karo n sangthit raho . if so then u shall win . in jan2010 threre was a judgement of supreme court of india pertaining to a bhill woman harassed by so called high caste stating that 95% indians as immigrants as how the native of the land can be harassed n passed the sentence to the so called high caste persons . in fact none is high or low but here might is right. how yuvraj is correct stating mae bhe to brahman hun whereas as per mausmarti brahman woman married to sudra the child shall be CHANDAL . IF SO , THEN BRAHMAN WOMAN MARRIED OTHER THEN HINDU , THE CHILD MUST BE MAHACHANDAL WHO IF MARRIED TO OUT OF INDIAN RACE THE CHILD SHALL BE PARAMCHANDAL . now either of two manusmarti or yuvraj is wrong . badayun girls were dalits- shakyas who were the kings but because of jungal raj /might is right it happens . SO none is high or low by birth the deeds make so.

  10. Tushar says

    ज्ञान में ब्रम्हण हूँ।
    रणभूमि प्रर क्षत्रिय हूँ।
    व्यवस्था में वैश्य हूँ।
    सेवा में शुद्र हूँ।
    अतं: में हिन्दू हूँ।

  11. shivani says

    Mujhe ye to n pta ki ved kisne likha puran kisne likha h kya esme likhi bte shi h m n pta m bs etna janti hu ki hum us parmatma k bnde h jinhone m bs ek bhasha sikhai ti prem ki insaniyat ki jb manu es dharti p aye unki koi jati n ti bs pyar k jati ti ye hindu dharm aesa h jaha jati pati h esi karan se hum log ek n h m bs etna kahna chahugihum god n jo man m aye kre jb god n ek dunia bnai ek jesa rup dia to soch kyo aesi h hum log hi hai jo jati pati ko bata h ao hum sb god k aye marf pr chale apni dil k sune aur pyar kre insaniyat dikbaye jb hum bdlege to dunia bdlegi

    • raj.hyd says

      bahan shivani ji., dharm ka ek hi sutr hai” dusre ke saath vahi vyavhaar kijiye jo apne liye bhi pasand aye ” yah sutr duniy ake har desh k me har samudaay me saman rup se lagu kiya ja skata hai usko vyapkata se sabhi ko s vikaar karna chahiye

  12. Valmiki Dharmdas Atwal says

    Mafi chata huin lekh ke vichar achhe hai parantu Loard Maikale ko doshi batakar sirf apne ko sahi sabit nahi kiya ja sakega, angrejo ne desh ko barbad avashy kiya parntu aur kisi ka ho na ho par daliton ka bhala avasay kiya unhone pahlibar dalito ko samanta ka adhikari mankar unhe saman adhikar paradan kiye. Angrejo ke aagman se pehlie hi desh main brahamanvad ke karana shudron ki isthiti bad se bhi badttar thi. Doshi sirf Brahmani sabhyata hai, aur koi nahi.

  13. Siddharth says

    Mere dosto iss post ke baare main kehne ke liye bahut kuch baate hai lekin sirf thoda hi likhunga

    Kya manusmruti main 4 warni ke baare main yeh nahi kaha gaya hai ki brahman bramha ke sir(buddhi) se paida huwe hai, kshatriya baahu(haath) se, vaishya maandi(jaang) se paida huwe hai, aur shudra bramha ke pair(paaw) se paida huwe hai ?
    Ji yeh likha huwa hai, maine aur hum sab ne padha bhi hai aur sab iss baat ko jaante hai,

    toh mujhe yeh batao ki aap keh rahe hai ki ved bramhan aur shudra main bhedbhaw nahi karte hai toh yeh kya hai ? Ved likhit hai toh isme ulta kar dete bramhan ko pair(paaw) main se paida karwate aur shudra ko dimaag(sir,buddhi) se… bramhano ko sir(dimaag, buddhi) aur shudro ko pair(paaw) se hi kyu paida karwaya vedo main ? Aur ab aap kahenge ki yeh to jo hua tha woh likhit hai, toh mere dosto iska matlab yahi hua ki vedo main hi bhedbhaw ki sikhaai di gayi hai,
    Aur sabse badi baat, ye hai ki agar bramhan aur shudra tatha dusre warno main koi bhedbhaw ya antar hi nahi hai toh yeh warna nirmaan karne ki jarurat hi kya thi… batao ? Vedo main agar in dono warno ko samaan hi maana gaya hota to nirmiti hi nahi hui hoti… example. Madhya pradesh aur maharashtra 1960 ke.pehale ek.hi rajya the lekin uske baad alag alag ho gaye. Kyu ??? Kyonki hindi bhashik madhya pradesh main chale gaye aur marathi bhaashik maharashtra main chale gaye… dono alag huwe kyu ki woh assal main alag hi they vicharo se, bhasha se… sirf jameen se nahi huwe the… woh bhi 1960 main ho gaye alag alag rajya… madhya pradesh aur maharashtra…Toh iska matlab yahi hai ki alag hai toh hai… vedo main diya hai bhedbhaw karna aur iska matlab aapki post galat hai… maine sirf ek.hi baat rakhi hai… aur bahut kuchh hai sacchai batane jaisi vedo ke baare main… krupaya aap hi thik se ved-puran padhe aur jhuthi post man kare… vedo main assal.main bhedbhaw hi hai warna dosto…
    4 warn nirmaan karne ki jarurat hi kya thi ?Warn ka matlab hi hota h k jaati k adhar…

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