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ब्राह्मण कौन है ?

जाति प्रथा के बारे में सबसे हँसी की बात ये है कि जन्म आधारित जातिप्रथा अस्पष्ट और निराधार कथाओं पर आधारित हैं. आज ऐसा कोई भी तरीका मौजूद नहीं जिससे इस बात का पता चल सके कि आज के तथाकथित ब्राह्मणों के पूर्वज भी वास्तविक ब्राह्मण ही थे. विभिन्न गोत्र और ऋषि नाम को जोड़ने के बाद भी आज कोई भी तरीका मौजूद नहीं है जिससे कि उनके दावे की परख की जा सके.

जैसे हम पहले भी काफी उदाहरण दे चुके हैं की वैदिक समय / प्राचीन भारत में एक वर्ण का आदमी अपना वर्ण बदल सकता था. कृपया पढ़ें;

http://agniveer.com/caste-system/

अगर हम ये कहें कि आज का  ब्राह्मण [जाति / जन्म आधारित ] शूद्र से भी ख़राब है क्योंकि ब्राह्मण 1000 साल पहले चंडाल के घर में पैदा हुआ था, हमारे इस दावे को नकारने का साहस कोई भला कैसे कर सकता है ? अगर आप ये कहें कि ये ब्राह्मण परिवार भरद्वाज  गोत्र का है तो  हम इस दावे की परख के लिए उसके DNA टेस्ट  की मांग  करेंगे. और किसी  DNA टेस्ट के अभाव में तथाकथित ऊँची जाति का दावा करना कुछ और नहीं मानसिक दिवालियापन और खोखला दावा ही है.

क्षत्रिय कौन है ?

ऐसा माना जाता है कि परशुराम ने जमीन से कई बार सभी क्षत्रियों का सफाया कर डाला था. स्वाभाविक तौर पर इसीलिए आज के क्षत्रिय और कुछ भी हों पर जन्म के क्षत्रिय नहीं हो सकते! 

अगर हम राजपूतों की वंशावली देखें ये सभी इन तीन  वंशों से सम्बन्ध रखने का दावा करते हैं – 1. सूर्यवंशी जो कि सूर्य / सूरज से निकले, 2. चंद्रवंशी जो कि चंद्रमा / चाँद से निकले, और 3. अग्निकुल जो कि अग्नि से निकले.  बहुत ही सीधी सी बात है कि इनमे में से कोई भी सूर्य / सूरज या चंद्रमा / चाँद से जमीन पर नहीं आया. अग्निकुल विचार की उत्पत्ति भी अभी अभी ही की है. किवदंतियों / कहानियों के हिसाब से अग्निकुल की उत्पत्ति / जन्म आग से उस समय हुआ जब परशुराम ने सभी क्षत्रियों / राजपूतों का जमीन से सफाया कर दिया था. बहुत से राजपूत वंशों में आज भी ऐसा शक / भ्रम है कि उनकी  उत्पत्ति / जन्म;  सूर्यवंशी, चंद्रवंशी, अग्निकुल इन वंशो में से किस वंश से  हुई है.

स्वाभाविक तौर से इन दंतकथाओं का जिक्र / वर्णन किसी भी प्राचीन वैदिक पुस्तक / ग्रन्थ में नही मिलता. जिसका सीधा सीधा मतलब ये हुआ कि जिन लोगों ने शौर्य / सेना का पेशा अपनाया वो लोग ही समय समय पर राजपूत के नाम से जाने गए.

अग्निसंकल्प

राष्ट्रभक्ति और धर्मरक्षा के लिए प्रेरित करती कविताओं का संग्रह More info →

ऊँची जाति के लोग चंडाल हो सकते हैं

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अगर तथाकथित ऊँची जाति के लोग ये दावा  कर सकते हैं कि दूसरे आदमी तथाकथित छोटी जाति के हैं तो हम भी ये दावा कर सकते  हैं कि ये तथाकथित छोटी जाति के लोग ही असली ब्रह्मण, क्षत्रिय और वैश्य हैं. और ये ऊँची जाति के लोग असल में चांडालों की औलादें हैं जिन्होंने शताब्दियों पहले सत्ता पर कब्ज़ा कर लिया था और सारा इतिहास मिटा / बदल दिया था. आज के उपलब्ध इतिहास को अगर हम इन कुछ तथाकथित ऊँची जाति के लोगों की उत्पत्ति / जन्म की  चमत्कारी कहानियों के सन्दर्भ में देखें तो हमारे दावे की और भी पुष्टि हो जाती है.

अबअगर किसी जन्मगत ब्राह्मणवादी को हमारी ऊपर लिखी बातों से बेईज्ज़ती महसूस होती है तो उसका भी किसी आदमी को तथाकथित छोटी जाति का कहना अगर ज्यादा नहीं तो कम बेईज्ज़ती की बात नहीं है.

हम लोगों में से म्लेच्छकौन है ?

इतिहास से साफ़ साफ़ पता लगता है कि यूनानी, हूण, शक, मंगोल आदि इनके सत्ता पर काबिज़ होने के समय में भारतीय समाज में सम्मिलित होते रहे हैं. इनमे से कुछों ने तो लम्बे समय तक भारत के कुछ हिस्सों पर राज भी किया है और इसीलिए आज ये बता पाना बहुत मुश्किल है कि हममे से कौन  यूनानी, हूण, शक, मंगोल आदि आदि हैं!  ये सारी बातें वैदिक विचारधारा – एक मानवता – एक जाति से पूरी तरह से मेल खाती है लेकिन जन्म आधारित जातिप्रथा को पूरी तरह से उखाड़ देती हैं क्योंकि उन लोगो के लिए म्लेच्छ इन तथाकथित 4 जातियों से भी निम्न हैं.


जाति निर्धारण के तरीके की खोज में

आप ये बात तो भूल ही जाओ कि क्या वेदों ने जातिप्रथा को सहारा दिया है या फिर नकारा है ? ये सारी बातें दूसरे दर्जे की हैं. जैसा कि हम सब देख चुके हैं कि असल में वेद” तो जन्म आधारित जातिप्रथा और लिंग भेद के ख्याल के ही खिलाफ हैं. कृपया देखें  http://agniveer.com/vedas-caste-discrimination/. इन सारी बातों से भी ज्यादा जरूरी बात ये है कि हमारे में से किसी के पास भी ऐसा कोई तरीका नहीं है कि हम सिर्फ वंशावली के आधार पर ये निश्चित कर सकें कि वेदों कि उत्पत्ति के समय से हममे से कौन ऊँची जाति का है और कौन नीची जाति का. अगर हम लोगों के स्वयं घोषित और खोखले दावों की बातों को छोड़ दें तो किसी भी व्यक्ति के जाति के दावों को विचारणीय रूप से देखने का कोई भी कारण हमारे पास नहीं है.

इसलिए अगर वेदजन्म आधारित जातिप्रथा को उचित मानते तो वेदों में हमें किसी व्यक्ति की जाति निर्धारण करने का भरोसेमंद तरीका भी मिलना चाहिए था. ऐसे किसी  भरोसेमंद तरीके की गैरहाजिरी में जन्म आधारित जातिप्रथा के दावे औंधे मुंह गिर पड़ते हैं.

इसी वज़ह से ज्यादा से ज्यादा कोई भी आदमी सिर्फ ये बहस कर सकता है कि हो सकता है की वेदों की उत्पत्ति के समय पर जातिप्रथा प्रसांगिक रही हो, पर आज की तारीख में जातिप्रथा का कोई भी मतलब नहीं रह जाता.

हालाँकि हमारा विचार ये है कि, जो कि सिर्फ वैदिक विचारधारा और तर्क पर आधारित है, जातिप्रथा कभी भी प्रसांगिक रही ही नहीं और जातिप्रथा वैदिक विचारधारा को बिगाड़ कर दिखाया जाना वाला रूप है. और ये विकृति हमारे समाज को सबसे महंगी विकृति साबित हुई  जिसने कि हमसे हमारा सारा का सारा गर्व, शक्ति और भविष्य छीन लिया है.

नाम में क्या रखा है ?

कृपया ये बात भी ध्यान में रखें की गोत्र प्रयोग करने की प्रथा सिर्फ कुछ ही शताब्दियों पुरानी है. आपको किसी भी प्राचीन साहित्य में ‘राम सूर्यवंशी’ और ‘कृष्ण यादव’ जैसे शब्द नहीं मिलेंगे. आज के समय में भी एक बहुत बड़ी गिनती के लोगों ने अपने गाँव, पेशा और शहर के ऊपर अपना गोत्र रख लिया है. दक्षिण भारत के लोग मूलत: अपने पिता के नाम के साथ अपने गाँव आदि का नाम प्रयोग करते हैं. आज की तारीख में शायद ही ऐसे कोई गोत्र हैं जो वेदों की उत्पत्ति के समय से चले आ रहे हों.

प्राचीन समाज गोत्र के प्रयोग को हमेशा ही हतोत्साहित किया करता था. उस समय लोगों की इज्ज़त सिर्फ उनके गुण, कर्म और स्वाभाव को  देखकर की जाती थी न कि उनकी जन्म लेने की मोहर पर.  ना तो लोगों को किसी जाति प्रमाण पत्र की जरूरत थी और ना ही लोगों का दूर दराज़ की जगहों पर जाने में मनाही थी जैसा कि हिन्दुओं के दुर्भाग्य के दिनों में हुआ करता था. इसीलिए किसी की जाति की पुष्टि करने के लिए किसी के पास कोई भी तरीका ही नहीं था . किसी आदमी की प्रतिभा / गुण ही उसकी एकमात्र जाति हुआ करती थी. हाँ ये भी सच है कि कुछ स्वार्थी लोगों की वज़ह से समय के साथ साथ  विकृतियाँ आती चली गयीं. और आज हम देखते हैं कि राजनीति और बॉलीवुड भी जातिगत हो चुके हैं. और इसमें  कोई भी शक की गुंजाईश नहीं है कि स्वार्थी लोगों की वज़ह से ही दुष्टता से भरी इस जातिप्रथा को मजबूती मिली. इन सबके बावजूद जातिप्रथा की नींव और पुष्टि हमेशा से ही पूर्णरूप से गलत रही है.

अगर कोई भी ये दावा करता है कि शर्मा ब्राहमणों के द्वारा प्रयोग किया जाने वाला गोत्र है, तो यह विवादास्पत है क्योंकि महाभारत और रामायण के काल में लोग इसका अनिवार्य रूप से प्रयोग करते थे, इस बात का कोई प्रमाण नहीं. तो हम ज्यादा से ज्यादा ये मान सकते हैं कि हम किसी को भी शर्मा ब्राह्मण सिर्फ इसीलिए मानते हैं क्योंकि वो लोग शर्मा ब्राह्मण गोत्र का प्रयोग करते हैं. ये भी हो सकता है कि उसके दादा और पड़दादा ने भी शर्मा ब्राह्मण गोत्र का प्रयोग किया हो. लेकिन अगर एक चंडाल भी शर्मा ब्राह्मण गोत्र का प्रयोग करने लगता है और उसकी औलादें भी ऐसा ही करती हैं तो फिर आप ये कैसे बता सकते हो कि वो आदमी चंडाल है या फिर ब्राह्मण? आपको सिर्फ और सिर्फ हमारे दावों पर ही भरोसा करना पड़ेगा. कोई भी तथाकथित जातिगत ब्राह्मण यह बात नहीं करता कि वो असल में एक चंडाल के वंश से भी हो सकता है, क्योंकि सिर्फ ब्राहमणहोने से उसे इतने विशेष अधिकार और खास फायदे मिले हुए हैं.

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Series: Vedic Self-Help, Book 1
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मध्य युग के बाहरी हमले

पश्चिम और मध्य एशिया के उन्मादी कबीलों के द्वारा हजार साल के हमलों से शहरों के शहरों ने बलात्कार का मंज़र देखा. भारत के इस  सबसे काले और अन्धकार भरे काल में स्त्रियाँ ही हमेशा से हमलों का मुख्य निशाना रही हैं. जब भी कासिम, तैमूर, ग़ज़नी और गौरी जैसे लुटेरों ने हमला किया तो इन्होने ये सुनिश्चित किया कि एक भी घर ऐसा ना हो की जिसकी स्त्रियों का उसके सिपाहियों ने बलात्कार ना किया हो. खुद दिल्ली को ही कई बार लूटा और बर्बाद किया गया.  उत्तर और पश्चमी भारत का मध्य एशिया से आने वाला रास्ता इस अत्याचार को सदियों से झेलता रहा है. भगवान् करे कि ऐसे बुरे दिन किसी भी समाज को ना देखने पड़ें. लेकिन हमारे पूर्वजों ने तो इसके साक्षात् दर्शन किये हैं. अब आप ही बताइए कि ऐसे पीड़ित व्यक्तियों के बच्चों को तथाकथित जातिप्रथा के हिसाब से “जाति से बहिष्कृत” लोगों के सिवाय और क्या नाम दे सकते हैं ? लेकिन तसल्ली कि बात ये है कि ऐसी कोई बात नहीं है.

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हमारे ऋषियों को ये पता था कि विषम हालातों में स्त्रियाँ ही ज्यादा असुरक्षित होती हैं. इसीलिए उन्होंने “मनु स्मृति” में कहा कि ” एक स्त्री चाहे कितनी भी पतित हो, अगर उसका पति उत्कृष्ट है तो वो भी उत्कृष्ट बन सकती है. लेकिन पति को हमेशा ही ये सुनिश्चित करना चाहिए कि वो पतित ना हो.

ये ही वो आदेश था जिसने पुरुषों को स्त्रियों की गरिमा की रक्षा करने के लिए प्रेरित किया और  भगवन ना करे, अगर फिर से कुछ ऐसा होता है तो पुरुष फिर से ऐसी स्त्री को अपना लेंगे और अपने एक नए जीवन की शुरुआत करेंगे. विधवाएं दुबारा से शादी करेंगी और बलात्कार की शिकार पीड़ित स्त्रियों का घर बस पायेगा. अगर ऐसा ना हुआ होता तो हमलावरों के कुछ हमलों के बाद से हम “जाति से बहिष्कृत” लोगों का समाज बन चुके होते.

निश्चित तौर से, उसके बाद वाले काल में स्त्री गरिमा और धर्म के नाम पर विधवा और बलात्कार की शिकार स्त्रियों के पास सिर्फ मौत, यातना और वेश्यावृति का ही रास्ता बचा. इस बेवकूफी ने हमें पहले से भी ज्यादा नपुंसक बना दिया.

कुछ जन्म आधारित तथाकथित ऊँची-जातियों के ठेकेदार इस बात को उचित ठहरा सकते हैं कि बलात्कार की शिकार स्त्रियाँ ही “जाति से बहिष्कृत” हो जाती हैं. अगर ऐसा है तो हम सिर्फ इतना ही कहेंगे कि ये विकृति की हद्द है.

बाकी अगले भाग में  http://agniveer.com/the-reality-of-caste-system-2/ आप पढ़ सकते हैं.

[कृपया ध्यान दें –  यह लेख मुख्य: रूप से उस विचारधारा के लोगो पर  पर केन्द्रित है जो जन्मआधारित जातिगत भेदभाव  का पक्ष लेते हैं. इसीलिए सभी लोगों से प्रार्थना है कि हमारी समीक्षा को केवल इस घृणास्पद प्रथा और ऐसी घृणास्पद प्रथा  के सरंक्षक, पोषक और समर्थकों के सन्दर्भ  में देखा जाए  न कि किसी व्यक्ति, समाज और जाति के सन्दर्भ  में. अग्निवीर हर किस्म के जातिवाद को आतंकवाद का सबसे ख़राब और घृणित  रूप मानता है और ऐसी घृणास्पद प्रथा  के सरंक्षक, पोषक और समर्थकों को दस्यु. बाकी हम सब लोग, चाहे वो इंसान के द्वारा स्वार्थवश बनाई गयी तथाकथित छोटी जाति या ऊंची जाति का हो, एक परिवार,  एक जाति, एक नस्ल के ही हैं. हम अपने पाठकों से निवेदन करते हैं कि वो ये न समझेंकि इस लेख को वैदिक विचारधारा “वसुधैव कुटुम्बकम” के विपरीत किसी व्यक्ति या वर्ग विशेष के लिए लिखा गया है. ]

जाति प्रथा  से जुड़े हुए  कुछ ऐसे तथ्य जिनके बारे में हमें पता होना चाहिए और जिनके बारे में हम सोचें:

कृपया इसे लेख को आप हमारी श्रृंखला की एक कड़ी के रूप में ही पढ़े और विशेषत: लेख,  http://agniveer.com/vedas-caste-discrimination/

 

This article is also available in English here http://agniveer.com/the-reality-of-caste-system/

 

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170 COMMENTS

  1. Sab bakwas likha hai kon hai ye pagal bevkoof jo man m aaya likh diya .
    Phle vishunu puran pdo usme diya h k parshuram ne jin kshatriyo ka nash kiya tha bo yadav kshatriye the pr bo khtm nhi ho paaye the fir aage chl ke usi yadav kshatriye vansh m shri krishna ka janm hua tha or unke aage ki generayion aaj bi hai yha or bhi hai… Bakawass km kiya kro

  2. Agar kuchh badlana hai to shuruvat khud se karni padti hai… history ka chhodo …jativad galat hai isko khtam kare..
    Lekin kare kon ?????

  3. जिस महापुरुष ने अपने ग्रंथों को रखने के लिए ‘राजगृह’ जैसा विशाल भवन बनवाया था, उसी ने २५ दिसंबर १९२७ के दिन एक पुस्तक जला दी थी. आखिर क्यों?

    जिस महापुरुष के पास लगभग तीस हज़ार से भी अधिक मूल्य की निजी पुस्तकें थीं, उसी ने एक दिन एक पुस्तक जला दी थी. आखिर क्यों?

    जिस महापुरुष का पुस्तक-प्रेम संसार के अनेक विद्वानों के लिए नहीं, अनेक पुस्तक-प्रकाशकों और विक्रेताओं तक के लिए आश्चर्य का विषय था, उसी ने एक दिन एक पुस्तक जला दी थी. आखिर क्यों?

    उस पुस्तक का नाम क्या था?

    उसका नाम था ‘मनु-स्मृति’. आइये हम जाने कि वह क्यों जलाई गयी?

    इस पुस्तक में ऐसा हलाहल विष भरा है कि जिसके चलते इस देश में कभी राष्ट्रीय एकीकरण का पौधा कभी पुष्पित और पल्लवित नहीं हो सकता!

    वैसे तों इस पुस्तक में सृष्टि की उत्पत्ति की जानकारी भी दी गयी है लेकिन असलियत यह सब अज्ञानी मन के तुतलाने से अधिक कुछ भी नहीं हैं.

    मनु स्मृति की इतने बढ़-चढ कर ज्ञान की डींगे बघारी गयी है उसका असली उद्देश्य जातिवाद का निर्माण और स्त्री को निंदनीय तथा निम्न बताना भर है. इसमे निहित आदेश निर्लज्जता से ब्राह्मणों के हित में हैं.

    कहने वाले तो कहते हैं कि मनुस्मृति और उसकी आज्ञाएं कब कि मर चुकी हैं, अब गड़े मुर्दे उखाडने से क्या फायदा?

    लेकिन सच पूछे कि क्या वाकई मनुस्मृति मर चुकी है.

    ऐसा नहीं हैं, आज भी विश्वविद्यालयों में मनुस्मृति पाठ्यपुस्तक के रूप में पढाई जाती है. जयपुर हाईकोर्ट के परिसर में आज भी मनु की मूर्ति भारत के संविधान को चिढ़ाते स्थित है.

    यूँ तो आज नये नए कानून बन गए हैं परन्तु दुःख कि बात है कि आज भी वास्तव में हम मनु स्मृति से ही संचालित हो रहे हैं.न जाने हम कब इस कब्र से बाहर निकलेंगे.

    प्रश्न है कि डॉ बाबासाहेब आम्बेडकर ने आखिर यही पुस्तक क्यों जलाई?

    इसका उत्तर साफ़ है कि जिस कारण महात्मा गाँधी ने अनगिनत विदेशी कपड़े जलवाये थे. धर्मशास्त्र माने जाने वाले इस कुकृत्य को नष्ट करने के लिए क्या इसे जलाना अनिवार्य नहीं था?

    कहने वाले कहते हैं कि आज मनुस्मृति को कौन जानता और मानता है, इसलिए अब मनु स्मृति पर हाथ धो कर पड़ने से क्या फायदा- यह एक मरे हुए सांप को मारना है. हमारा कहना है कि कई सांप इतने जहरीले होते हैं कि उन्हें सिर्फ मारना ही पर्याप्त नहीं समझा जाता बल्कि उसके मृत शरीर से निकला जहर किसी को हानि न पहुंचा दे इसलिए उसे जलाना भी पड़ता है.

    वैसे मनु स्मृति जैसी घटिया किताब कि तुलना बेचारे सांप से करना मुझे अच्छा नहीं लग रहा. बेचारे सांप तों यूँ ही बदनाम हैं, और अधिकाँश तों यूँ ही मार दिए जाते हैं. फिर भी सांप के काटने से एकाध आदमी ही मरता हैं जबकि मनु स्मृति जैसे ग्रन्थ तों दीर्घकाल तक पूरे समाज को डस लेते हैं. क्या ऐसे कृतियों की अंत्येष्टि यथासंभव किया जाना अनिवार्य नहीं हैं?

    वैसे मनुस्मृति के अलावा भी हिंदुओं की तमाम स्मृतियाँ और ग्रन्थ में शूद्रों (आज के ओबीसी और दलित) तथा महिलाओं को हेय दृष्टि से देखते हुए उन्हें ताडन का अधिकारी बताती है. बाबासाहेब ने १९२७ में जो मनुस्मृति जलाई थी वह अकेली एक पुस्तक से घृणा होने के कारण नहीं, बल्कि इसे अन्य तमाम स्मृतियों और किताबों का प्रतिनिधि ग्रन्थ मानकर की थी. लेकिन आश्चर्य तो इस बात का है कि भारत सरकार आज तक इस राष्ट्र-विरोधी किताब पर प्रतिबन्ध लगाकर इसे जब्त नहीं कर रही.

    मनुवादी व्यवस्था और शुद्र

    मनुवादी अथवा ब्राह्मणवादी व्यवस्था के अधीन रामचरित मानस , व्यास स्मृति और मनु स्मृति प्रमाणित करती है कि भारत का समस्त पिछड़ा वर्ग एवं अछूत वर्ग शूद्र और अतिशूद्र कहलाता है जैसे कि तेली , कुम्हार , चाण्डाल , भील , कोल , कल्हार , बढई , नाई , ग्वाल , बनिया , किरात , कायस्थ , भंगी , सुनार इत्यादि । मनुविधान अर्थात मनुस्मृति में उक्त शूद्रों के लिए मनु भगवान द्वारा उच्च संस्कारी कानून बनाये गए हैं जिनको पढ़ कर उनका अनुसरण करने से उक्त समाज के सभी लोगों का उद्धार हो जायेगा और हमारा भारत पुनः सोने की चिड़िया बन जायेगा । आपके समक्ष मनु भगवान के अमृतमयी क़ानूनी वचन पेश हैं –
    -जिस देश का राजा शूद्र अर्थात पिछड़े वर्ग का हो , उस देश में ब्राह्मण निवास न करें क्योंकि शूद्रों को राजा बनने का अधिकार नही है ।
    -राजा प्रातःकाल उठकर तीनों वेदों के ज्ञाता और विद्वान ब्राह्मणों की सेवा करें और उनके कहने के अनुसार कार्य करें ।
    -जिस राजा के यहाँ शूद्र न्यायाधीश होता है उस राजा का देश कीचड़ में धँसी हुई गाय की भांति दुःख पाता है ।
    -ब्राह्मण की सम्पत्ति राजा द्वारा कभी भी नही ली जानी चाहिए , यह एक निश्चित नियम है , मर्यादा है , लेकिन अन्य जाति के व्यक्तियों की सम्पत्ति उनके उत्तराधिकारियों के न रहने पर राजा ले सकता है ।
    -नीच वर्ण का जो मनुष्य

    • ye sahi kaha gaya h ki ja chudra naya karta ho जिस राजा के यहाँ शूद्र न्यायाधीश होता है उस राजा का देश कीचड़ में धँसी हुई गाय की भांति दुःख पाता है ।

    • जो अपने बाप को छोड़कर पडोसी को अपना बाप कहता हो उसका ज्ञान कैसा होगा यह आपसे सिखने की जरुरत नहीं है विदेशियों की शिक्षा प्राप्त डरपोक कायर मैंने आंबेडकर जैसा कही नहीं देखा जहा तक मई जानतहुँ मनुस्मृतिके बारे में मेरे हिसाब से आपने एक भी शालीन भाषा का प्रोग नहीं किया इसलिए जैसे को तैसा मेरे एक भी सवाल का जवाब जिस किसी आंबेडकर के नाजायज औलाद में दम है दे कर दिखाए आंबेडकर के डरपोक और दलाल होने का प्रमाण मई दूंगा जिस कोर्ट में बुलाना है जहा बुलाना है मेरा नाम शैलेष कुमार ९५९४०२३२१३ मनुस्मृति जैसा संविधान आंबेडकर का बाप, भी नहीं बना सकता कॉपी भी सवाल हो कॉल कर सकते है या व्हाट्सप्प कर सकते है यह मेरा अपना लिखा है कही से कॉपी पेस्ट नहीं है अगर सच में आंबेडकर की औलाद है तो जवाब देना

      60 साल में 99 संशोधन भारतीय संविधान में करने पड़े ऐसा दुनिया के किस संविधान में नहीं हुआ है ऐसा तभी संभव है जब कोई बहुत बड़ी (कमी ) खराबी हो इस बात को कोई भी झुटला नहीं सकता की भारत का संविधान दुनिया का सबसे घटिया संविधान है हम बड़े गर्व से कहते है की भारत का संविधान अमेडकर की देंन है यह कहना बिलकुल गलत है नेहरू को तो अपनी योग्यता पर भी विश्वास नहीं था इसलिए वो संविधान का प्रारूप एक ब्रिटिश विद्वान सर ईवोर जैनिन से करवाना चाहता था लेकिन गाँधी जी के विरोध पर उसने ६ कार्य करनी समिति का गठन किया और अपनी इस कमिटी के माध्यम से किया और वि. येन . राओ ने २७ अक्टूबर १९४७ को भारत के संविधान का प्रारंभिक प्रारूप रखा जिसमे ४४३ अनुच्छेद और १३ अनुसूचियाँ थी बाद में इसी पर डिबेट हुआ संविधान सभा के लिए नेहरू द्वारा जिन ६ कार्यकारिणी समितियों का गठन किया गया था उसमे 1)असफ अली ,2) के.एम्. मुंशी ,3) के. टी. शाह, 4) के. शांताराम,5) हुमायु कबीर, 6) डी. आर .गाडगीळ ये सभी लोगो ने संविधान को बनाया और उसके बाद जो संविधान निकलकर आया वो आंबेडकर की नहीं नेहरू की देंन थी आंबेडकर को बाद में दिया गया फाइनल शेप देने के लिए
      मुर्ख लोग कहते है की हमारे संविधान में बड़े बड़े देशो से बड़ी बड़ी चीजे ले ली गयी जरा देखिये क्या लिया पहला हमने हमारा पार्लिअमेंटरी सिस्टम ब्रिटेन से लिया गया जिसके हम गुलाम थे ,
      दूसरा मौलिक अधिकार , संविधान की सर्वोच्चता , संघवाद में उपराष्ट्रपति ,वित्तीय आपदा ,ये सब हमने अमेरिका के संविधान से लिया और अमेरिका का संविधान क्या है ब्रिटिशर्स जिसने जाकर वह से स्पेनिस लोगो को भगा दिया था और यूरोपियन ने जाकर वह पर कब्ज़ा कर लिया था ये ब्रिटेन का ही उपनिवेश तो था अमेरिका ब्रिटिश मानसिकता के लोगो ने ही तो स्पेनिस लोगो को भगा दिया था अमेरिका का वास्तविक मूलनिवासी जो की रेड इंडियन है वो आज भी अमेरिका में नहीं है
      तीसरा कनाडा ब्रिटिश उपनिवेश चौथा आयरलैंड ब्रिटिश उपनिवेश , ऑस्ट्रेलिया ब्रिटिश उपनिवेश , पश्चिम जर्मन ब्रिटिश उपनिवेश हमने क्या बहार से ले लिया हमने सब कुछ वही से लिया जैसा की ब्रिटिश की सरकार चाहती थी रही भारत के संविधान के अंदर की बात तो
      दुनिया के सबसे ख़राब संविधान पर सवाल मैं संविधान की दुहाई देने वाले कानून के दलालो से पूंछता हु जिसके पास संविधान का ज्यादा ज्ञान हो वो जवाब दे /
      १) संविधान के किस आर्टिकल में भारत को राष्ट्र कहकर सम्बोधित किया गया है ? नहीं किया गया तो क्यों ?
      २) हमारे भारतीय संविधान का लीगल फाॅर्स (विधिक शक्ति) कहाँ /क्या है ?
      ३) भारत को डोमिनियन स्टेट कहा गया है संविधान में तो भारत किसका डोमिनियन स्टेट है ?
      ४) अगर हम सच में आजाद है तो भारतीय संविधान के अनुच्छेद ३३३ के तहत आज भी हमारे लोकसभा में दो अंग्रेजो को रखने की बाध्यता क्यों है ? अर्थात दो अंग्रेज सांसद राष्ट्रपति नामित करेगा (रखेगा ) क्यों ?
      ५) भारतीय संविधान के किस आर्टिकल में राजनैतिक पार्टियों के गठन का प्रावधान है ?
      ६) कॉमन वेल्थ कंट्री में जैसे श्रीलंका , पाकिस्तान , ब्रिटैन में हाई कमिश्स्नेर ( HIGH COMMISSIONOR ) पोस्ट करते है और जापान , रूस , चीन, में राजदूत (AMBESSDOR ) पोस्ट करते है क्यों ?
      ७) नागरिकता अधिनियम सेक्शन १०/११ के अनुसार कोम्मोंवेल्थ कंट्री का कोई भी नागरिक उस नागरिकता के आधार पर भारत के अंदर कामनवेल्थ कंट्री की नागरिकता रखता है क्यों ? क्यों आज तक भारत के संविधान में नागरिक शब्द को डिफाइन (परिभाषित ) नहीं किया गया ?
      ८) जनरल क्लॉज़ेज़ एक्ट का सेक्शन ३ सब क्लॉज़ ६ के अनुसार भारत के अंदर जहा भी केंद्र सर्कार के कानून लागु होंगे वो सभी ब्रिटिश उपनिवेश के अंतर्गत मन जायेगा क्यों ?
      ९) संसद का सदस्य होने के लिए कुछ तो है की आदमी आदमी पागल नहीं होना चाहिए दिवालिया नहीं होना चाहिए भारत का नागरिक होना चाहिए कोई योग्यता होनी चाहिए लेकिन मंत्री होने की कोई योग्यता नहीं है ,कोई क्वालिफिकेशन नहीं है क्यों ?
      १०) भारतीय संविधान की अनुसूची ८ में जिन २२ भारतीय भाषाओ का उल्लेख है उसमे अंग्रेजी भाषा कही नहीं है फिर भी सारे सरकारी कामकाज और कानूनी करवाई अंग्रेजी में क्यों होते है ?
      ११) एक और सवाल हमारा ये देश संविधान से चलता है या संवैधानिक विधि से चलता है ?
      क्युकी संविधान के अंदर बहुत सी ऐसी चीजे नहीं है जो हमारे देश की सर्कार को चला रही है
      12) जैसे मंत्री का त्यागपत्र मुझे यह बताये की संविधान के किस अनुच्छेद में मंत्री के त्यागपत्र देने का अधिकार है ?
      13) जैसे की बिना सदन की सदस्यता के प्रधानमंत्री बना देना किस अनुच्छेद में यह है ?
      14) जैसे की मंत्री का सदन के अंदर बैठकर मत देना लेजिस्लेचर अलग है एग्जीक्यूटिव अलग है इसकी खिचड़ी कैसे बना दी जाती है कंस्टीटूशन में कहा PROVISION है की मंत्री सदन के अंदर बैठकर सांसदों के साथ मत देगा और बिल पास करेगा ?
      15) जैसे की न्यायमूर्ति और न्ययाधिपतियो में लॉ मिनिस्टर (कानून मंत्री ) का हस्तक्षेप जब जुडिशरी (न्याय व्यवस्था) इंडिपेंडेंट (स्वतंत्र) है तो राष्ट्रपति और सी. जी. आयी. मिलकर के न्यायाधीशों की नियुक्ति कर रहे है कंस्टीटूशन में क्लियर कट प्रोविजन है तो प्रधानमंत्री और कानूनमंत्री हाउस फाइल जाने की जरुरत क्यों पड़ती है? अप्प्रूवाल के लिए इसका सीधा मतलब है कार्यपालिका के आधीन न्यायपालिका को रखना चाहते है
      16) जैसे की हमारे यहाँ दो बार उप प्रधानमंत्री हुए है कंस्टीटूशन में कहा प्रोविजन है की उप प्रधानमंत्री का पद होगा और उसके लिए भी आदमी रखा जायेगा ?
      17) जैसे नेता विरोधी दल कहा है भाई संविधान में ?
      18) अल्पमत पे सर्कार को गिरा देना कहा संविधान में ऐसा प्रोविजन है? की बहुमत वाली सर्कार बनाएगा उसके लिए चुनाव होंगे और अल्पमत हो जाता है तो १ वोट के आभाव में सर्कार गिरा दी जाएगी
      19) जैसे शून्यकालीन सत्र को चलना शून्यकालीन सत्र का प्रोविजन कहा संविधान में है ?
      20) जैसे की सांसदों के वेतन और भत्ते का निर्धारण स्वयं सांसद करेंगे का प्रोविजन कहा संविधान में है ?
      यह तो कुछ भी नहीं अभी तो और भी कई सवाल है पहले इतना ही काफी है

  4. सबसे पहले अपने दिमाग को जांच लो फिर हिन्दुओ के बारे में लिखना समझ आया अपने पिता जी से पूछ जाकर की तू हिन्दू ही है न भड़वा साला

    • भाई अखिल सिंह जी, आपकी मीठी वाणी, उच्च स्तरीय भाषा संवाद, सभ्यक व सुसंकृत बोली को नमन! हिंदुत्व का नाम बहुत अच्छी उचाईयों तक ले जा रहे हो भाई|

      मेरी ओर से आपको साधूवाद|

  5. Jati pratha ek sachhai hai…..hindu dhram janam pe aadharait hai….HINDU hone k liea hindu kul mai hi janam lena padta hai………or jati to sachhai hai bhagwan RAM chhatriya they…or bhagwan shri krishna ek Gawaal……mahabharat, Ramayan or gita mai bhi jati pratha ka warnan hai…….or ye pura system janam ke base par aadharit hai……..even Ohio university ki theory(LEADERS ARE BORN THEY CANNOT BE CREATED) bhi isi pe based hai……ha or ek baat DHARAM PE KABHI SAWAAL NAHI UTHATE……..jaise daily routine follow karte hai waise hi dharam ko follow karna chayihea……….or upper aap ne jo bakwas lihka hai wo manipulated history padhane ka natija hai………

  6. JAATI KA MATLAB SIRF OR SIRF अहंकार (EGO) SE HAI,,, KISKO JAAT PE KISIKO PARIVAR PE KISIKO APNE BACHO PE,SHARIR PAR , BEAUTY PAR, BUDDHI PAR, JINKO अहंकार HAI JAATI SIRF UNKI KE LIYE HAI,,,, ITIHAS KUCH OR THA USE MITA KAR ,TOD MARODKAR BADLA JA CHUKA HAI. ME APNI BAAT KARU TO KARAM SE VASYA HUN KATHAN SE BRAHMAN OR साहसी HU TO ME KSHATRIYA HUN,,, TO ISME JAAT KAHA SE AYI,,, HAMARI QUALITY HI HAMARI JAAT HAI. DHARAM NAHI JAAT BADLO, MATLAB EGO KO DUR KARO KHUD SE ,, HAM SAB EK HI GOD KE BACHE HE

  7. jatiwad ke name se logo me matbhed sabse pahle aata h log apne aapko aalg aalg jati ka batata h or kahta hum ese h lekin wesa bilkul nahi h agar history dekhe to hum sab ek hi insan ki den h jo bahut pahle ho chuka h jese jese jansankhya badi wese hi bantwara hota chala gaya or apne aapko ko aalg aalg jati ka batane lag gaye

  8. brahman of 10yrs n akshtriya of 100yrs stand to each other in relation of father n son ; but between those two the brahman is father sudra can’t marry a girl from outside caste but brahman can marry in other 3castes also in addition to his own caste , similarly akshtriya n vaisya r allowed to marry in girls from lower than their own castes beside their own caste . IF 100 BRAHMANS BEG THE COW ( OF HIM ) THE GODS HAVE SAID , SHE, VERILY , BELONGS TO WHO IS LEARNED
    .

  9. hello me bs itna bolna chahti hu ki cast ko le kr bohot hi mazak banaya jata h aj ke tym so ap log sab casts ko khtam karo baki ke jo rull h like kisi ne bola reserbation ko leke to vo khud sab khatam ho jayega jab sab equll ho jyga. mene sab ki bate to ni. padhi ku6 logo ki padhi h nd logoko bohot problem h shudro se.

  10. Mene 1 jain ki laoundry dekhi, Brahman ko wine pite ,vaishya ka hair cutting saloon dekha ,Non wege khate dekha,unchi jati ke ladko ko nichi jati ki ladki ke sath sote dekha, Agrawal Spa & Bueaty Parlour dekha , Thakur ko interest khate dekha, dhanwan ko nirdhan ki majburi ka fayda uthate hue dekha.
    AB AAP SAB MILKAR INKI JATI BATA DIJIYE

    • JAATI KA MATLAB SIRF OR SIRF अहंकार (EGO) SE HAI,,, KISKO JAAT PE KISIKO PARIVAR PE KISIKO APNE BACHO PE,SHARIR PAR , BEAUTY PAR, BUDDHI PAR, JINKO अहंकार HAI JAATI SIRF UNKI KE LIYE HAI,,,, ITIHAS KUCH OR THA USE MITA KAR ,TOD MARODKAR BADLA JA CHUKA HAI. ME APNI BAAT KARU TO KARAM SE VASYA HUN KATHAN SE BRAHMAN OR साहसी HU TO ME KSHATRIYA HUN,,, TO ISME JAAT KAHA SE AYI,,, HAMARI QUALITY HI HAMARI JAAT HAI. DHARAM NAHI JAAT BADLO

  11. hiii…..
    aap sahi kahe rahe hai.
    i agree with you.
    waise bhi insan ko chot lag ne se lal rang ka khoon hi to nikalta hai .
    phir chahe vo kisi bhi jati ka kyu na ho …
    par hai to insan hiii….

  12. Shi hAi insaan pad likh k bhi gawaar h . cast system hona hi nhi chahiye. Chamaro se dosti kr lega kha pee lega lekin agr baat ho shadi ki toh dosti gai bhaad m. Had h kb badlenge log. Soch ko badlo toh aane wali garnation badlegi warna. BAs ladaiya hi hogi. Khte h hum Ek h kha se ek h jati vaad kbhi nhi badlega. Bhagwaan ne khubsurat chiz banai insaan jo apna acha bura khud soch sakta h lakin jhuti izaat ka dava karta h. I hate those people jo aisi soch rakt

  13. Etna hi hai to Reservation kya mag rehe ho jati ke nam pe sare log barabri me raho Sarkari job me Jati kyo dekhate ho Reservation ke samay to koi Brahman Ya Chatri Ye to nahi kahta hai ki ham Camar hai, Reservation ke time to sare bade chude ho ke kahte to ki tum chote jat ke ho. ————————

  14. Dosto maine ap sabhi ki baate padi hai app ki baato se app ki shoch pata chalti hai ki app kaisa shochate hai. Aaj mai bhi kuch kahna chahta hu ki log apni baat ko jaati ko lekar kahte hai app log mahapursho ke naam se apni baat kahte hai. Lekin mai kishi jaati y darm (religion) ka nahi hu meri jaati bharti (Indian) mera darm Indian.

    Hamare india ki aabadi (1.328746079 billion) ar jisme (683537793 millions) mails and (636685570 millions) female.

    Dosto ab app bataye ki kitane aise log hai jo jaati ke baare me shochate hai jiski aabadi jahir si baat hai millions me hogi

    Mera bharat desh vikashsheel desh hai kyoki bharat ke log desh ke baare me nahi jaati ar darm ko lekar baat kahte hai ar shochate hai

    Hamara padosi desh chaina teji se viksit ho rha hai app sabhi jaante hai ki bacche bacche ko ye pata ki kaun sa mobile chainies hai per use ye nahi pata ki chaina kya hai ar kaha hai ye viksit ki ak pehchan hai.

    Japan ashia ka ak desh hai jo app sabhi jaante hai ki wo desh viksit hai kya app ko pata hai ki Japan ki aabadi kitani hai
    (12.5647889)millions aisi kaun si baat hai waha ke logo me.

    Aaj mai app sabhi ko batana chahta hu ki Kyo.
    Kyoki india ki 40% aabadi (mail) SARAB (smoking) me dubi rahti hai kyoki SARAB ki dukan 24 hours khuli milti hai kyoki SARAB pilane jitani ejjat milti utani mithai (sweet) khilane se nahi milti ar kuch log jaati ar darm ke baare me shochate hai isliye Hamara india vikash kar raha hai

    Hamare padosi desh Hong Kong, Singapore etc. 21 sadi me viksit ho chuke hai jis desh ki aabadi kam se kam hai

    Dosto jaati ar darm ke baare me nahi india ke baare me shocho.

  15. जाति प्रथा वास्तव में एक षड्यन्त्र है जिसका लाभ समाज के वर्ग विशेष के लोग आज भी उठा रहे हैं I

  16. jb brahmno ne sb mita diya to saalo tumhe ye sb kaise pta chla.. Dusri baat brahmn parsuram ki aulad h ,. Konse ved pd gya.. Aaya ved purano wala

  17. saabas mere hindu
    bhiayo yahi aasah thi aapse ki ek dusre ko nicha dikhne ki.
    aur mene ek baat aur padi is blog comment m ki history utha
    k dekh lo .
    me sabhi jatiyo k logo se nivedan karta hu ki apna gyan mt
    bato aapke aadhe aadhure gyan se jatipat badhega. aur koi
    bhi insaan aapne karya aur karm se mahan banta h
    Example
    maharana pratap apne karya va karm se mahan the wo the to
    kshtriya sisodhiya vansh k chundawat pr wo sirf mahana
    prtap naam se jane jate h na ki mahana pratap singh
    chundwat
    Example
    raavan bhi ek mahan aur sabse gyani pandit tha wo brahman
    vansh ka tha aur wo bhi raava. naam se jana jata h na ki
    raavan pandit
    me bas aapko yahi batana chahta hu ki koi bhi insaan apne
    karya se mahan hota h na ki jati va dharm se aur mere sabhi
    jatiyo k bhaiyo se niveda. h ki aapas m lade nahi ek sath rahe

  18. Aap sabhi log Jati pati ko chhodkar sirf Hindu ki bat kare , varna phir hamara desh gulam hoga , aur koi Mugal sashan karega , aur jab wo sashan karega to sirf ye hi dekhega ki aap sab sirf hindu hai , aur wo ishi ke anushat julm karega , isliye abhi bhi wakt hai ki Sab Hindu ek ho jao Jay Hindu .

  19. Sharam ati hai esay desh par jo dusre (Cast) ke admi ko bolne nahin deta/kuch likhne nahin deta, gali deta hai, how can he thought to write…?, instead of helping him to share true knowledge (if you had…which no upper cast here is having in this forum), you guys are scolding,that too his family, shame full, I wish to Shiva..you guys don’t earn respect till sun and moon are there so called upper cast Indians, dharma shall never prosperous with upper cast people.

    You guys have deeply hurted my sentiments with my religion…Cowards.

    Wish Agniveer to continue his work now more deeply, his gens has not allowed to scold back.

  20. ये दोष इस पेज को लिखने वाले का भी नही है क्योंकि वह खुद नीच जाति का है ओर उससे ब्राह्मण जाति का सम्मान किया नही जाता जो देवता भी किया करते है और झूठा पेज बना कर अपने दावे लोगो पर थोप रहा है । जो कि इसके सात जन्म पर्यन्त भी सिद्ध नही होने वाला ।

  21. hiii friend…
    kon si jamane ki bat karte ho..bhul kyu ni jate ye Sab..hum sabhi ne apna mind esi jatiyo m lagaya hai…tabhi hamara desh duniya ke develope countryo m se piche h kyu??

    samay ke sath sab kuch badal jata h…..
    kuch kr kr dekho yr….

  22. ish desh me bhahman nahi tha lekin dushare desh se akar, ish desh ke itihash me samil hogaye awar apna aap ko uch jati manane lage, lekin ish desh ka pahla raja kawn tha koi bhahman nahi bata sakta, ham mante he ki uch nich jati he par uch nich kisako kahna chahiye sayad aap ko pata nahi, uch jati inshan he awar nich jati Janwar kyu ki janwar na samajh hota he awar apna aap me larte jagarte he, awar inshan jo samajh dar he o nahi ishi liye uch jati ise mante he ham, ye bhi mante he ki inshan me bhi uch nich ke bat he, to lekin jo jhamajh dar he o uch jati he awar jo na samajh he o nich jati he, ish desh me bhrahman jati ka bhed rakhate he, lekin unko pata nahi, jishe nich samajhte he oshi ke sahre jiye he Awar bhikh lete lete thora rupya ho gaya to apne aap ko raja manane lage he, lekin bhrahman jat me shiyar he awar ham rajput sher he, ak tarap se bar ho ak tarap se chhat ho tum log

  23. Agr ap ko itihs ka pta nhi h to kyu kuchh bhi bol dete ho or likh dete ho ap se nhi puchha kisi ne ki asli brahmn kon h or nakli kon h, pahle dharm grntho ko dekh lo pdh lo fir kuchh kahane ki himmt krna

      • To Asli Chota Jat wo Jiske mathe per likha ho ki wo chota jat ka hai tavi usko Sarkari nokri me Reservation melega

      • Aare sale bk chod purani kathao se tujhko samj nahi a raha hai kya abe ye batao bagwan kya kisi ko certificate bheja ki kaha paida huye ho kya dharm h ur kya jat hai tumhari ye sab purane samy se chale a raha hai ur ye baat yaad rako chor ko chor kahoge to vo chedh jaega ur emandar ko emandar kahoge to vo aur prasanna hoga is liye tujhe jalan badi caste walo itna samman q milta hai

      • Abe ek baat ur tere mathe par likha hai ki tu ensaan hai iska mtlab tu ek suwar ya haiwan ya fir chandal bhi ho sakta hai sanjeev newar

    • Bhai koi pandit nhi h ok na koi sab innsan h bs or god k liye sab ak samaan h tum sab lo jo jat pat ko mante ho sab jaanwer ho bs jin ko in sab se jada kucch nhi ata ok

  24. “अधजल गागरी छलकट जाय” भगवान से प्रार्थना करे की वे आपकी मूर्खता दूर करके सद्बुद्धि दे वे बड़े दयालु हे तुम पर ज़रूर दया करेगे. नित्या स्नना किया करे ओर अच्छे लोगो की संगत करे जिस से एसए मूर्खता पूर्ण विचार ना आए. भगवान मूर्खो का भी भला करते हे . अच्छी पुस्तके पढ़े . अंत मे आपके ब्लॉग के बारे मे कहना चाहूगा यह बहुत ही घटिया ब्लॉग हे मूर्खता पूर्ण हरकते यहा आम हे . मेरा कॉमेंट पढ़ने के लिए धनयवाद . भगवान तुम्हे सद्बुद्धि दे .

    • ishvar se prarthana karne se sad buddhi nahi milti hai varna raam ji bhi raavan ke liye sadbuddhi kar lete sad buddhi ke liye svayam koshish karni hoti hai

  25. मूर्ख हे आप पोस्ट की भाषा से अज्ञान झलक रहा हे . क्षत्रियो की बात करते हो तो बतता हू श्री परशुराम जी ने पृथ्वी को क्षत्रिय विहीन किया था परन्तु उन्होने किसी स्त्री की हत्या नही की थी ओर जो भी गर्भ मे थे उन्ही से आगे का वंश चला.
    और आपका साइन्स का ज्ञान तो मूर्खता से भी परे हे. यहा विजय कुमार राई जी ने अच्छी विवेचना के ही . “आप के हिसाब से महिलाओ का तो कोई गोत्र ही नहीं होता तो पति के गोत्र की वो कैसे हो गए ।आप ने कभी किसी बच्चे को अपनी मा के परिवार से मिलते नहीं देखा क्या।आप को ये मालूम है की नहीं की महिला ही बच्चे को म्ट डीएनए देती है पिता नहीं देता।और बिना म्ट डीएनए के आप एक इंच भी बढ़ और एक मिनट जी भी नहीं सकते ।आप मर्दवादी बात न करे ।आप बहुत जानते हसि तो ये बताये की मेल पहले आया की फीमेल।अगर ब्रह्मा पहले आये और वो सबको जन्म दिया और ब्रह्मा पुरुष थे और वो बच्चा पैदा कर सकते थे तो उन्हें औरत कुए बनाया।आज तक आप ने किसी पुरुष को बच्चा जनमते देखा है।आप अमीबा को देखिये उसमे मेल नहीं होता।ट्रीज में कोई अलग से मेल फीमेल नहीं होता।ये प्रकृति की खूबसूरती है की उसने फीमेल का थोडा काम मेल को दे दिया है तो इसका मतलब ये नहीं की बच्चा केवल मेल का हो गया।नेचर का काम नए रचना करना है।और अपनी रचना को कंटिन्यू करना है।बहुत लिविंग बीइंग में तो मेल होता ही नहीं।मेल स्पर्म पैदा करता है और फीमेल एग।तो ट्रीज तो खुद ही सब कर लेते है । तो उनके बारे में आप का क्या कहना है ।एनिमल्स में बच्चे हमेशा माँ के होते है ।माँ के साथ ही रहते है।बच्चा माँ का होता है ।पिता केवल हेल्पिंग हैण्ड होता है।उसका अधिकारी नहीं।आज के समाया प्रॉपर्टी पिता के पा है इस लेया मर्दवादी कानून है न की आप ही सोल अथॉरिटी है।”
    आपका ज्ञान कॉमिक किताबो से प्रभावित ज़्यादा ल्गता हे . आप केवल यहा अपना ब्राह्मण द्रोह प्रदर्शित कर रहे हे . पर कुतर्क के दम पर भला कब सच्चाई को ढूँढ सकते हे . और आप एसा करके केवल जातिवाद को बढ़ावा दे रहे हे . यह बहुत ही मूर्खता पूर्ण कर्म हे तो ज़रूर आप चाहे पैदा किसी भी कुल मे हुए हो पर करमो से सुद्ृता झलक रही हे . अगर आप उच्च कुल मे पैदा हुए हे तो डी एन ए जाँच करवाए ज़रूर आप किसी सुद्ृा से उत्पन्न हे ओर अपने परिवार मे किसी के कू कर्म का फल हे. तो जातिवाद ना फेलाए अपनी ज्ञान को पहले विकसित करे…

    • Duniya Mangle par jane ki baat kar rahi hai aur aap log sirf apas me hi baad vivad kar rahe hai Thodi to sarm aani chahiye aap logo ko , kya koi Muslim aapas me aise vivad karta hai , Bas ye socho ki hum sab HINDU hai agar apka koi hindu bhai aishi galti karta hai to use pyar se samjhao na ki gali se Jai Hindu . Jay Sanatan .

  26. I would like to say to Agniveer.com that i think if you have made this portal on which basis, there are no person literate on your portal?
    One way you accepting that parshuram has made many times earth without Kshatriya.Who told you this story that person never told you that Parashuram only killed young Kshatriya not Childrens or UNBORNE Childrens.Read something deep & write then somebody against.
    People has mad caste or name for identify their work after some times their Childrens adopted theirs elders works that is it.
    If we call a yoga guru a kasai then what will we call kasai to identify him?
    Now this time no body is small & big if i will ask you
    TODAY BRAHMAN & KSHATRIYA ARE MORE SUFFERING THEN WHAT WILL YOU DO??
    If every body start to ask why we call to our father?We can also call son to him?There is any DNA evidence you have for call only father.
    We call because it is easy to identify our nearest person in crowd.
    Now you are only asking Brahman & Kshatriya,Once ask to Muslim That how can they say that they are Muslim I sure they will come to your home & give you real DNA to you.
    They also take your DNA test ?
    Stop doing all this things which hearts to anyone.Our law says that you can not blame to everyone if there are mistake of few persons.Do some social activity which will help real poor peoples.

    Sanjay

  27. As given by your article we are agree with that there is no bramhan, kshatriya,Vaishya or shoodra from birth.God has not done any difference between his creatures.either he has not done any differences between human,animal,birds or water being.We all human being given name to animal,birds or fishes.We can not prove by DNA or any evidence who can prove that the name we are calling is right but we use it & know that all is right.Because it makes our life easy?
    For your kind information all cost was divided by their work not by birth after some time it was merge in birth because of their son & grandson adopt his father & forefathers work.It happens because of they got information from father & forefather traditionally as today happens a businessman son a businessman,a doctor son a doctor.Same thing happened in history also who were brave they called Kshatriya.A s dear dear you are talking about DNA you can check DNA of a Brahman Kshatriya & other Cast your will definitely get answer.A Kshatriya blood DNA will be availability of more attack germ in comparison of Brahman.You can be also Brahman by your work
    Can you leave to eat meat ?Can you start doing worship everyday 8 hours?Can you beg food to others Whole life ?
    Some has done this work so they called Brahman after that their children s adopted their work so they also called Brahman If i reuest to you that if you are question on their birth then Can you show me evidence like DNA off their forefathers.Because we never ask you about your forefathers that what they were & what you are because we do not have any evidence but i am sure that you have some evidence so you have questioned like that?
    What will call you about today AARAKSHAN systems ? Can you raise voice against this no! Because of you are
    also one of them.This facility was poor people but what?
    Who has started this & why?
    The people using this facility they have evidence of their cast?Or if my dear Article writer has some evidence please mail me.

  28. The biggest evil in Indian society is caste system. It needs to be eradicated completely. This evil had been one of the main reason that India remained slave for thousand years. It has divided country in every possible way and therefore Indian are never united. Removal of caste system will be like cleaning of your house from dirt. Politics is the biggest dirt place that plays all the tricks to keep the caste system alive so that people remain divided and they can keep fooling the public. Indians, clean your house and make sure you do not display your caste tag anywhere no matter whatever caste you belongs. There should not be any reservation based on caste system, rather should be based on financial condition of family. It is high time that everyone of us take pledge and remove this evil from our society.

  29. Ved me likha hai ki brahman kabhi bhooka ni mrta ,, aur tu chahta hai pta krna kon asli brahman nahi hai to uski arthik isthiti dekh lena ,,, yadi bhooka mr raha hai to brahman nahi teri caste ka hoga aur hme to arakshan se koi farak ni pdta kyuki bhooke aaj bhi tumhi mr rahe ho

    THE BRAHMANS NOBUDDY CAN BEAT THEM jay parshuram

    • Pravin bhai Agar koi apne marg se bhatke , to hamara kartwaye hai ki hum use saantisaanti se sahi disha me laye na ki bhatke huye ko aur bhatkay yahi to ek brahm gyan ka janm hua aur wo hi pandit kahlay , athart hum sab ek hi ki to santan hai . Om namah Shivay .

  30. bhai jat pat sab juti hai par insaniyat ko kon jutla skta hai. or rahi bat hindu muslim sikh or isai ya koi b dharm sabi k khoon ka rang lal hota haikya kabi suna ki muslim ka khoon kala ya fir hindu ka khoon bangani hota hai
    shabi ko sari chije ek shaman mili hai parkarti se “{sirf 2.5 JATIYA HAI PURI DARTI PAR 1 ADAMI,2 ORAT,OR 3 HIJDE}”

  31. bhai sahab namaskar, kaise hai aap..?
    aap ka lekh ‘Adh jal gagri chhalkat jaye’ kahawat ka satik udhaharan hai.Bina pramanit tatthyo par adharit lekh pr mai koi bhi comments nahi dunga.kyoki is lekh ka meri najaro me koi mahatv nahi hai.
    Bas mai itna kahna chahunga ki agar aap me yogyta aur chhamta hai to aage aa kr apne samaj ko saasan dwara milne wali bhikh(Aarakshan) ka virodh kare.Aapka samaj jb tk is tarah ki bhikh ka sahara lekar jiwan yapan karti rahegi,aap kabhi bhi samaj me hamare barabar ka sthan prapt nahi kr payenge.
    Sirf bolne matra se kuchh nahi hota khud ko sabit karne ke liye usi tarah ke karm karne padte hai.aur karm karna apke bas ki baat nahi hai.
    Khud ko sabit karne ka ak prayas kariye aur milne wale Aarakshan ka virodh kariye.

    • arkshan ke virodh se pahale sadiyo purani janmana jati avchak chinho ka virodh hona chahiye ! avasthi tivari gupta singh adi ka aupyog kyokiya jay kya apne purvaj inaka upyog karate the ?
      dekhe dilip aj raghu dashrath bharat shatrughn raavan, vibhishan meghnath kumbhkaran sulochna kaikeyi manthara kaishlya a parashuraam balram duryodhan karn yudhisthir bhim arju aadi inka anukaran vishesh rup se savarn samaj kahalane ka dava karne vala kyo nahi karta hai araksahn to 60 saal sehi mil raha hai yah to kai sadiyo se chal raha hai !

  32. सबको मेरा नमस्कार

    जैसा की इस ब्लॉग को पूरा पढ़ने के बाद साफ़ तौर पर पूरे भारत की स्थिति का अंदाजा हो जाता है।
    मै भी एक ब्राह्मण हूँ और अगर किसी को मेरी बात से असहमति हो तो शौक से मुझे गाली या किसी और की जाति की निंदा करके, अपशब्द लिख के अपनी जाति या धर्म का परिचय आसानी से करा सकते है।
    हम सब के अंदर एक दुसरे से खुद को श्रेष्ठ दिखाने का बड़ा शौक है
    1) ब्राह्मण की निंदा करने वाले इस बात का जवाब दो
    की जिस आधे अधूरे ज्ञान के बल पर उसकी निंदा करते हो उस ज्ञान को उत्पन्न करने वाले कौन थे(मैं नहीं मानता की ज्ञान आसमान से उतरा है), तुम्हारे दर्शन का विकास किन मूल पुस्तकों से हुआ है। 100 प्रतिशत ना सही पर 70 प्रतिशत उसके उत्पादक ब्राह्मण बर्ग था।
    इस वर्तमान समाज संरचना को हम अल्पविकसित रूप से मौर्या युग से देख रहे है, इसको बनाने वाला कौन था? इस ज्ञान का संवर्धन और विकास सबसे अधिक किसने किया था? किसी और वर्ग के दो हज़ार ईसा पूर्व आप किसका नाम ले सकते हो?
    इस सवाल का जवाब कभी सोचा है की ब्राह्मण ही निति निर्माता और बड़े बड़े राजाओं का सलाहकार क्यों होता था, भगवान् राम ने सदैव विप्रों को क्यों सम्मान दिया?
    सोचोगे कहा से जब तुम्हारा ज्ञान ही मौलिक नहीं है तो मस्तिस्क कैसे शुभ बिचार रख सकता है।
    इस वर्ग कुछ गलतियां थीं जो आज आरक्षण का समर्थन करते है ये उन्ही गलतियों का नतीजा हैं ,
    सदियों पहले ब्राह्मणों ने यही गलती की थी अपने पूर्वजों के अर्जित ज्ञान और सम्मान को अपनी संपत्ति समझ कर उसी का अपमान किया, और मिलने वाले सम्मान को ज्ञान की देन ना समझ के जाति की देन समझा और नतीजा उनका पतन हुआ। समाज में कई कुरीतियां कहते है ब्रह्मानो ने शुरू की तो दूसरी सभी जातियां उन्हें रोक क्यों नहीं रही काहे आप उन कुरीतियों का पालन करते हो ख़त्म करो।
    ब्राह्मणों की बुराई करनी होगी तो भी बुराई का सामान वेद और स्मृतियों से ही पाओगे।
    कौन है यहाँ जो वेदों को पढ़के बैठा है ये ब्लॉग चलाने वाले
    वेद पढ़के मस्तिस्क में किसी के लिए विरोध पैदा हो तो समझ लो आप ने वेद पढ़ा ही नहीं।
    कौन सा वेद पढ़ा है आपने और कितना भारत का इतिहास पढ़ा है?
    मुझे नहीं लगता अपने से अर्जित करने वाले का ज्ञान इस तरह का होता है ये सीधा सा समाज को बांटना है।
    इससे किसी को लाभ नहीं होगा सिवाय हानि के ।
    मैं कतई नहीं मानता की…

  33. ab sbne itna sb bola h hmare baare me to do char lines hm bhi to likh he skte h-ki dhanya ho aap sbhi log…choti si baat ki sb ku6h to cheen liya h hmara sarkari naukri me to aap ka adhikar or pdhai k ksetra me to aap age ho gye ho..kyu ruko bta rhe h…vo is liye ki hr yojna aap ko milti h admishn bhi aapka free me hota h..yha tk ki sarkari naukri k forms tk bhi hm log ko dugne rate pr milte h…hm genral cast wale koi dheeru bhai ambani ki aulad nai h…hm to chahte h ki tm sb hme apne brabr mano…or srkar se kh do ki hme bhi aap he k rate me siksha de…tbhi jo pdh nhi paa rha h vo aaj chat ka thela lga rha h ya sbji bech rha h….or hmara itihas janna h to koi ved puran pdhne ki jrurt nai h aap ko bta de rhe h ki hm #saptrishi k vanshj h or aap #manu k tbhi hmme antr h….jai shree raam..+
    shubham pandit

    • shri shubham ji jiske paas pandity n ho usko pandit kyo kaha jaye?
      kaun kiska vanshaj hai iska koi vishesh muly nahi hai ! manu ji aur sapt rishi me koi vishesh antar bhi nahi hai ! samanta ki shuruaat bhi apne ko jo svarn kahalana pasand karate hai unko oor se bahut jayda jaruri hai !
      jiske paas anubhav hota hai usko naukari bhi jaldi mil jati hai kyoki sabhi ko kary karvan eke liye anubhav bhi chaiye !

  34. ब्राह्मणों से आज पूरे भारत मे सबसे ज्यादा नफ़रत कोई करता है तो वो कोई मुस्लिम या ईसाई सिख पारसी नहीँ खुद हिन्दु ही करता आइये जाने क्यो ।
    सविंधान प्रदत्त प्रतिनिधित्व के अधिकार का विरोध केवल ब्राह्मण करता है नाकि कोई मुस्लिम पारसी सिख जैन ईसाई
    सविंधान का विरोध मतलब राष्ट्र का विरोध लेकिन ब्राह्मणों पर कोई देश द्रोह की कार्यवाही नहीँ होती क्योंकि न्याय पालिका मे पुरा कब्जा इन मनुवादियो का है।
    दस साल के ब्राह्मण को साठ सत्तर साल के मनुष्य से श्रेष्ठ बताया जाता है केवल जन्म के कारण।
    ब्राह्मणों ने इस देश के लोगों का बोद्धिक बिकास हजारो साल से रोके रखा ।
    ब्राह्मण शिक्षा देता था क्षत्रिय लेता था ये ब्राह्मण का सबसे घृणित कार्य था।
    इस देश मे पहली बार सभी लोगो के लिए शिक्षा के दरवाज़े अग्रेजी हुकूमत ने खोला ।
    अग्रेजो के रायबहादुर (मुखबीर)भी केवल ब्राह्मण होता था।
    मनुष्यों को छूत अछूत मे बाट कर अपने आप को धृतता पुर्वक श्रेष्ठ बना रहा ।
    ब्राह्मणों ने इस देश की स्त्रीयो पर सबसे ज्यादा अत्याचार किया
    देवदासी बनाने से लेकर विधवा आश्रम सब ब्राह्मण ने अपनी अय्यासी के लिए निर्माण किया जो स्त्री विरोधी स्वभाव की थी उन्हें सती प्रथा बनाकर मार डाला ।
    ब्राह्मणों ने कपोल कल्पित काल्पनिक देवताओं की भरमार लगा दी इस देश मे ।
    दरअसल ब्राह्मण यहाँ के मुलनिवासी है ही नहीँ । यह ब्राह्मण इब्राहिम के वशंज है जो युरेशियन है यहाँ लुटपाट के इरादे से ही आये थे।

  35. अगर ब्राहम्ण पहले से श्रेष्ठ था तो क्यों किसी को प्रमाण की आवशयकता होती है श्रेष्ठता है तो झूठ से दुनिया को भ्रमित क्यो करते हो बाबा साहब के विचार और तर्क कर यह कहा कि मैं भी देवी देवता जैसे झूठे भ्रम में नही रहूंगा जो भी करूंगा अपनी इच्छा से अच्छा बुरा महसूस कर हरि इच्छा नही मानूंगा । जय भीम जी

    • Jat ,pat puchhe na koi jo hari ko bhaje so hari ka hoi ,duniya chaand par ,mangle pe chali gaee aur aaj bhi aap log jaati me pade hai , Inhi sab ki wajah se to hum log hazaro saal se gulam the aaj phir se ushi ko dohraya ja raha hai , are dusre mulk bale to yahi chahte hai ki kab inme takrav yani fut pade aur hum sasan kare , Jay Hind . Hum sab ek ki hi santan hai .

  36. Namaste…
    Caste ek esa point h jesme bhas kbi khtm ni ho skti…
    May ek bhramin ho….par maine ek raiger se shadi ki h…toh en logo ke sth jo pahale se jo hota aa raha h wo bhut bura h..hme sb ko uski kam se janna chaheye…
    Par es ka mtlb yh ni ki bhramin khrb h..ya gen category khrb h..hr samaj me ache log b h or bure b..
    Toh may apse yahi boluge ki kise b caste ko galat bolne se koi ucha ni hoga…khud ko sabit krne se hoga…

    • ambedkar ji ka vivah bhi ek brahman mahila se hua tha aur babu jagjivanram ji ka vivah janmjat brahman kanya rukmani ji se hua tha fir bhi vah apni janmana jati ke hi kahalaye gaye tab apki jati kyo badal gayi !
      parcheen kaal me janmana jati ki tamange nahi hote the yani sair nem nahi lagaye jate the yah sab maha bharat yuddh ke bahut baad me chaloo huye dharmik mathadhish bhi inke viruddh kuch bolte bhi nahi hai mukhy chij karm hai har varg me achhe bure hote hai koi brahmaan hokar bure kary kare usko bahut jyada bura kaha jayega jaise koi vakil ya kanun ka jyada gyata agar koi kanun todane ko bada apradh kare to bhi yahi baat uske liye bhi kahi jayegi agar koi raja kisi kanya se rep kare to uski jyada badnami bhi avasahy hogi aur usjo jyada kadi saja bhi milti thi !

  37. Continued…
    Hame b pata hai ki madhya kaal k upper class bhatake apne maarg se kintu iska arth ye nhi hai ki ap sabhi ko ek jaisa kahe…
    Yadi koi apne purvaj/ Gotra ko yaad rakhta hai to usme galat kuchh nhi hai…
    Haa yadi koi dushkritya kare to phir wo chahe koi b ho kisi b caste ka ho Ya religion ka ho sabhi k liye saja ek jaisi ho yahi Ved b kahte hai…
    Ab yadi ap Ved ko manate to shayad chandaal jaise shabdo ka prayog nhi karte. ..
    Aur rahi baat Reservation quota ki to shayad Dr. AMBEDKAR b chahte the ki kewal 6 saal hi rahe uske baad na rahe…
    To phir use aj tak kyu rakha hua hai???
    Aj to kai Brahmin below poverty line me jeevan bita rahe hai..?
    Abhi b bharat ka sanvidhaan yadi unhe Brahmin hi kahta hai to wo kya kare???
    Ab yadi ap ye kaho ki shaadi kare wo kisi aur jaati ki kanya se to b Brahmin ya kisi upper class ko kya milega???
    Caste system to phir b chalega…
    Wo b ladko k aadhaar par hi…
    To kisi b upper class ko kya milega kisi aur kanya se shaadi karke…
    Phir b wo aj k bharat me upper class hi kahlaayega…
    Ab apko b pata hai ki kanyao ki koi jaati nhi hoti aisa hamare purvaj sada kahte the…
    Aur science ka b yahi manana hai ki Unme koi differentiation nhi hai…
    So bhai mai bas apse yahi kahta hu ki bias mat ho ap kisi k liye…
    Jab tak jaativaad nhi mitega tab tak jaati ka hai bahut mushkil hai…
    Ved kya kahte hai wo hame b pata hai but ye article 100 me se 101 taka bekaar hai….
    Abhi tak k article chahe wo caste system ya kisi b cheej ka ho koi galat dhang se nhi tha lekin ye article apki mentality saaf saaf dikhata hai…
    Dhanyawaad

    • vivah adi me gotr batlana aur baat hai ,mishra adi ka” tamnaga” latkana do alag alag baat hai !
      ambedkar ji ne10 saal ke liye arakshan hone ka anuman rakha tha lekin vot ki rajniti aur tatha kathit savarn vargo ke atyachar ke kaaran yah age bhi chal raha hai abhi pichle ravivaar ki raat ki baat hai ratlam ke ek gram me ek dalit dulhe ke ghodi me baithne ke karan us par pattharbaji savarn varg ne kiya kisi dalit ko ghodi me baithne ka adhikaar kyo nahi hai ? us dulhe ko pagadi ke bajaye helmet pahan kar police ki suraksha me apni barat nikalne ko majbur hona pada !
      batlaiye is tarah ke julm kab rukenge azadi ke 68 saal baad bhi iase galat karnam e kyohote rahate hai ?
      jinhone ek ved padhe nahi samjhe nahi dekhe nahi vah bhi vedi likhte hai aisa hi haal dube, dvivedi, trivedi, chturvediyo ka bhi yahi haal hai ! agnihoti likhte hai lekin kabhi agnihotr[havan , yagy ] apne jivan me nahi karte hai ! aise “nakali ” tamange dhone se kya labh hai?
      aaj kai karod savarn kahalaye jane vale nashe baaz aur manshari, bahubali apradhi aadi hai ! fir bhi apne ko any vargo se shreshth kahalaye ja pasand karte hai ?

      • Raj ji..
        Mai ye nhi manata hu ki Mishra adi ka tamaga lagana galat hai Kyuki jo koi b Mishra ka tamaga lagata hai Un sabhi ki soch ek jaisi ho..
        Surname se kuchh nhi hota hai.. Sanskaar kya mile ho use chahe wo kisi b varn ka ho wo jyaada mahatva rakhta hai.
        Maine b ye news dekhi thi muje b peeda hui.
        Jinhone ye kiya wo galat hai bahut hi jyaada galat hai chahe wo kisi b varn ka kyu naa ho.
        Mere Maata pita b brahmin hai kintu do Dalit parivaar k bachho ko apne paise se education dete hai aur muje yahi Sanskaar diye hai ki ek din mai b usko sudharu jo galti madhya kaal k hamaare purvajo ne kiya tha…
        Swarn varg hi jimmedaar tha jis k kaaran bharat desh me Buddhist aur Jainism dharm aaya…
        Sikh dharam se hamara kuch nhi hai…
        Mai apko ye nhi kahta hu ki ap aise logo ko kuchh mat kaho jo galat karte hai kintu unhe Swarn varg ka kah kar dikhana aj b jaativaad ko badhava hi degi…
        Waise logo ko gadhe ya kuchh b kaho jo galat karte hai phir wo chahe koi b ho kisi b varn ka kyu na ho?
        Jaativaad ko badhava mat do kyuki apko b pata hai raajneeti k kaaran jo log jaativaad jivit rakhe hai waise logo tak hi use seemit rakho..
        Kyuki apko b pata hi hai ki ham sab sabse pahle bhai hai…
        Aur Sabhi ko ek disha me dekhna hoga ki ham kaise apne purvajo ki sanskriti jeevit rakhe na ki 2500 saal pahle ke Swarn varg ko yaad rakhe…
        Kyu naa unse pahle k Varn vyavastha par dhyaan de…
        Muje bas is article par apatti hai Kyuki is article me kisi ek k Gotra ko chandaal kahkar nishana banaya gaya hai parshuram ka udaharan dekar galat dhang se bataya to maine apni baat rakhi…
        Maine bas yahi kaha hai ki koi b Swarn varg ka vyakti ise pasand nhi karega kyuki is article se achhi baat nhi rakh paaye agniveer ji..
        Baat yahi hoti lekin use achhe dhang se sahi tarike se pesh karte to baat alag hoti..
        Mai bas yahi kahta hu raj ji ki dhyaan se socho aur is article ko padho aur dekho ki ye article duriya badhaane ka kam kar rahi hai ya nhi..
        Is tarah se vedic religion bahut…

      • adarniy shri vijay ji , aap ape purvajo ka itihas dekhiye, aj, dilip, raghu, dashrath, lakshaman, bharat, shatrughn, kaikeyi manthara sita, sushila, janak ,janki sulochna, ravan, vibhishan kumbhkaran meghnath paarshuram,dron duryodhanshakuni yudhishthir balram arjun yashoda kunti rukmani basudev, kabir das surdas tulsi daas, hariyana ke vanshilal devi lal, bahjan laal, jhansi ki ra ni lakshmibaai adi n jane kitne naam apko ginaye jime jati vachak”tamnaga ” lagane ka tarika nahi apnaya gaya hai yah mishra adi madhykaal me chalu huya hai!
        hamne karib 40 saal pahale apne nam ke saath jativachak bodh ko tyahg diya hai sanyog se samajik taur par hamko bhi ek janmana brahman parivar me janm lene ko majbur hona pada ! lekin hamko us parivar me janm lene ka katai garv nahi hai ham sirf manv hi rah sake itna hi paryapt hai
        sansar sirf do bhago me banta hua hai ek shreshth aur dusra nimnata grahan karne vale !
        shreshtha me bhi me bhay ut se vargikaran sambhav aha brahaman vaisjhy kshatriy shudr h un vachak hai n aki janmana jativachak ? dusre artho me jo buddhi se jyada kary kare vah brahman hai jaise chikitsak injiniar, adhyapak vakil adi
        jo vyapar kare vah vaishy
        jo sena- police adi me jakar samaj ki raksha kare vah kshatriy
        aur jo majduri karne layak ho aur sharirik shram kare vah shudr hai
        shu dr bhi hey hargij nahi hai 1
        samaj me jo apne ko jyada shreshth hone ka daava karte hai jaise” savarn” unka sab se pahala kartavy hota haui ki vah apna sudhar kare aur samaj ko saty ka rasta acharan si dikhlaye taki apna samaj achhe raste par chal sake ! durbahgy se hajar sal ki gulami , desh ka vibhajan aur kai lakh insano ki hatya bhi apne samaj ko achhe raste par chalne ki raah nahi dikhla saki hai
        andh vishas kuriti adi se apna samaj bahut jakda hua hai ! usko chodne ki paramavashykata aaj hai !
        ham sab apne naam ke sath koi gun vahak shabd jod sakte hai apne pita ya mata ji ka nam laga sakte hai jaise nagar muhalle ka nam…

      • Adarniya Sri Raj ji,
        Yahi mai b kah raha hu…
        Jaha tak tamga lagane ki baat hai to mai apko vishwaas dilata hu ki jis din ye Voto ki raajneeti band ho jaayegi us din mai Prasannata se chhod dunga….
        Kintu yadi koi ye kahe ki chandaal aur kya kya…
        To mai kabhi jab chandaal jaisi pravritti nhi apnai to mai kaise ho sakta hu…..
        Aur ye kahna DNA aur pata nhi kya kya???
        Is baat par apatti hai…
        Dhanyawaad….

      • Dur hai….
        Aur Haa ap ne bahut achhi baat kahi ki kai brahmin b aj k din me maasahaari hai ab ap hi soch sakte hai ki aise logo ko mai b kuchh nhi kah sakta…
        Kyuki apko b pata hai ki wo brahmino k dharm k hi virudhh hai…
        Ab mai to unhe Brahmin nhi kahta hu…
        Aur koi b brahmin Un jaise logo ko brahmin nhi kahega….
        Aur jaha tak rahi baat gyaan ki to wo b 1100 saal se ashikshit hai….
        Unme se kai ko to vedo ke baare me pata hi nhi hai lekin jab unhe pata chalega to avashya wo vedo ko punah maanege kyuki brahmino ki deshbhakti par koi prashnchinha nhi utha sakta wo unhe bhul jaate hai jo desh se alag ho gaye bhale hi kyu na wo hamare hi bhai the…
        Kyuki jo dharam se gaya wo karam k maarg se gaya…
        Dhanyawaad…..

  38. Pahli baat to ye hai ki…
    Ye baat satya hai ki jaati janam k aadhaar par nhi hona chahiye…
    Aur isme b koi do raay nhi hai ki lekhak ne kewal upper class ko galat prakar se ek soch k anusaar hi taarget kiya…
    Pahli baat parshuram ne kshatriyo ka naash kiya us dharti se ye baat kewal Ramayan me hi milti hai aur apko b pata hai ki Ramayan Valmiki ji ne likhu thi jo Brahman parivaar me nhi janme the…..
    Phir b sabhi ki Ashtha hai Ram k jeevan ka anusaran karna na ki in baato par dhyaan dena…
    To parshuram ka udaharan dena galat hai….
    Kyuki kisi b kshtriya ya brahmin ka koi lena dena nhi hai.
    Ab aa hate hai Janam se jati k baat par to ap ko shaayad is baat ka gyaan nhi hai Jis tarah aj ap south k bhai bahno ko dekhte ho Thik usi prakar pura bharat tha kisi samay….
    Logo k surname nhi hote the…
    Ab apko Brahmins k Gotra k anusaar chalne ka Uttar dena chahta hu ki kyu wo Gotra k anusaar chale?
    Kyuki maine b yahi sochta tha…
    To maine science ka Sahara liya tab pata chala ki wo gyaani to sadev hi the…..
    Brahmin ghar me mai b janma hu…
    To maine bachpan se hi dekha hai ki kewal Ladke hi Gotra follow karte hai matlab yadi koi Ladka kahta hai ki uska Gotra Gautam hai to usse pata chalta hai ki uska purvaj rishi Gautam hai lekin Koi ladki yadi usi ghar ki hai to wo ye nhi kah sakti ki wo usi Gotra ki hai wo apne pati k Gotra se hi khud ko batayegi. ..
    To science b manata hai ki Ladka tab paida hota hai jab X aur Y milte hai Y aisa hai jo ki ek Adami se hi apne bete ko jaata hai matlab jab beta paida hota hai to X aurat se Aur Y adami se milta hai…
    Aur jab Ladki paida hoti hai to uske maa Baap dono se hi X aur X gun milte hai to Ladki paida hoti hai matlab ye ki Ladka hi kah sakta hai ki wo is Gotra ka hai..
    Arthat uska purvaj ye hai…
    Ab rahi baat ki brahmino ko Samajh thi to ham kya kare?
    To DNA Test ki baat karne se pahle apko science ka b gyaan lena chahiye tha kyuki jo koi b apna Gotra batata hai wo science k anusaar b galat nhi hai…

    • Manniya vinay mishra ji ap ne bhi mana ki sanskaar heridity mai nhi jate,yahi baat swami vivekanand ne bhi kahi thi ki caste birth mai nhi jati.,sirf rang roop jata hai…jo ki puri tarah.isliye so jo apne ko mishra gotra istemaal ker apne ko bhramhin keh rhe hai wo galat hai kyuki apke kisi purvaj ne jo acche karm kiye uske karan wo Brahmin kahelaye unke wo gun aa gaye ye maan ker apne ko Brahmin manna galat hai..ar waise bhi unke janam k baad kitni peediya aayi hai..gene mutation bhi hota rehta hai…agar kuch aaya hogs toh sirf physical qualities aayi hongi baki kuch nhi ar is baat pe gussa hona jayaz nhi joki aap ho rhe the,ar ap bramhin tabhi kehlayege jab aap waise karm kare jaise aap k parents ker rhe hai pada ker kisi ko,werna ap bhramhin nhi honge,ap Brahmin apne karm se honge na ki apne kisi purvaj k karmo k karan,baki apka apne ko upper class manna sirf ek jo ki apko janm se society ke karan psychology mai gus jane k karan hai.apko ek natural aptitude mila hai society k nazar mai bramhin pariwaar mai janam lene k karan,iska bahot jyada fark padta hai,psychology is everything..isliye ap acche karm ker bhramhin bane,ar ha varna ek hi janam mai kai baar badalta hai,apke karmo k hisab se jaisa pehle hota tha…ek hi janam mai kai baar,isliye ek baar k acche karm k karan bhi apne ko upper class manna andere mai jeena hai..ar ha ap kya ye gotra k jhamele mai pad gaye hai iska jikra tak vedo mai nhi hai,ye samaik kuritiya hai jo madhya kalin bharat varsh se aayi ,ar ye kya majak hai ki y chromosome ko hi jati le jane wala kaha gaya hai,x mai kya fafundi lagi hoti hai,ladka ho ya ladki ,male k x ya y chromosome per depend kerta hai,dono mai sirf sex k quality ka hi anter hota hai…ye sochna ki male ka y jati le jata hai galat hai khud soch k dekho ye sirf samaj ne niyam bana diye hai dono sirf saririk gun hi le jate hai na ki unka nature ya sanskaar…ar tunhare saache purwajo ar tunhare aane tak kai baar mutation hua hoga ,……

      • Continued…toh apke mai kitne changes asyw ap khud sochw dikkat ye hai ki admi kabhi girna nhi chahta bhale hi uske laya nhi ho…ha ye sach hai admi ko hamesha accha banne ki hi sochni chahiye per bina proof k apne ko shrestra maan abhimaan kerna galat hai jo ap ker rhe hai ,sirf mishra sir name honekhone karan iska padne wale per galat asar padta hai…sacchayi ko dil se apnana chahiye ar logo mai pyar baatna chahiye wahi saccha Brahmin hai werna nhi…ar waise bhi pehle sir name nhi hote the ar log sir name badalte bhi the,,,toh isse surname k basis per kehna sab galat hai…gotra .votra sab bekaar ki baate hai …..ye sirf barbaad hi kerta hai ar hindu daram mai intercaste marriage bhi allow tha toh kaun kya hai jaana asambhav hai ,ar hum sabko iski charcha chod equality lane kisochni chaiye kyuki tark se tark milta hai,ar pyaar se pyar …..law of polarity..

    • lagta hai aap ne jayada science padh li hai…आप के हिसाब से महिलाओ का तो कोई गोत्र ही नहीं होता तो पति के गोत्र की वो कैसे हो गए ।आप ने कभी किसी बच्चे को अपनी मा के परिवार से मिलते नहीं देखा क्या।आप को ये मालूम है की नहीं की महिला ही बच्चे को mt डीएनए देती है पिता नहीं देता।और बिना mt डीएनए के आप एक इंच भी बढ़ और एक मिनट जी भी नहीं सकते ।आप मर्दवादी बात न करे ।आप बहुत जानते हसि तो ये बताये की मेल पहले आया की फीमेल।अगर ब्रह्मा पहले आये और वो सबको जन्म दिया और ब्रह्मा पुरुष थे और वो बच्चा पैदा कर सकते थे तो उन्हें औरत कुए बनाया।आज तक आप ने किसी पुरुष को बच्चा जनमते देखा है।आप अमीबा को देखिये उसमे मेल नहीं होता।ट्रीज में कोई अलग से मेल फीमेल नहीं होता।ये प्रकृति की खूबसूरती है की उसने फीमेल का थोडा काम मेल को दे दिया है तो इसका मतलब ये नहीं की बच्चा केवल मेल का हो गया।नेचर का काम नए रचना करना है।और अपनी रचना को कंटिन्यू करना है।बहुत लिविंग बीइंग में तो मेल होता ही नहीं।मेल स्पर्म पैदा करता है और फीमेल एग।तो ट्रीज तो खुद ही सब कर लेते है । तो उनके बारे में आप का क्या कहना है ।एनिमल्स में बच्चे हमेशा माँ के होते है ।माँ के साथ ही रहते है।बच्चा माँ का होता है ।पिता केवल हेल्पिंग हैण्ड होता है।उसका अधिकारी नहीं।आज के समाया प्रॉपर्टी पिता के पा है इस लेया मर्दवादी कानून है न की आप ही सोल अथॉरिटी है।

  39. MOHADAY DNA TEST TO AP APNA KARWAIYE KYUKI AAP BHI EK BRAHMAN KI HI PAIDAISH LAG RAHE HAI . AAPKE PITA JAROOR BRAHMAN RAHE HONGE . KYUKI BRAHMANO KE BARE ME APKI DILCHASPI AUR AAPKE DWARA PADHE GAYE GRANTHON KE GYAN KO PRANAM KARTA HU. AUR HA BRAHMANO KE ITIHAS KO DEKHO INKA ITIHAS KABHI DAKUO CHORO KA NAHI APITU TAPASWIYO AUR MANISHIYO KA RAHA HAI. CHAMAR AUR ANAY SUDRON KI TARAH LUTERON ASHABHYON KA NAHI RAHA HAI.

    • dube tuzhe nahi pata ki arya yani brahmin central urasia se bharat aaye aur aane ke bad yaha chori loot paat balatkar hinsa apharan kiya jatio ka nirmaan kiya brahmano ki hi vajah se is desh ka beda gark ho gaya sabse nechi kaum brahmano ki hai is sansar me. gadho vigyan me manaw ka karmik vikas nahi pada hai kya pahale prithvi fir jal, ekkosikiye bahukosikiye fir machali magarmach limar banar orangutan fir manusya ye karmik parvartan hai aaj jo manaw hai vo viksit manaw prajaati hai aadimanaw ka mukhya bhojan kya tha kaccha manse e alag baat hai sabhatao ka nirmaan hone ke bad insaan haiwan ban gaya chutiye kahi ke pagal hai dube aur tera vanse.

  40. Dosto aj ka samay badal chuka hai, upar maine bahut lekh padhe kuch logon ka kahana hai ki insaan janm se hi jatiwadak hota hai aur anuvanshikta jati me aham bhoomika nibhati hai.

    aaj ka samay wo hai ki ek neechi jaati ka vyakti bhi ek unchi jaati vyakti se paise ke adhaar par har kaam karwa sakta hai to us samay uske bramhin ya kshatriy hone ka koi wazood nahi rah jaat, dokhadhadi, chori, balatkaar aise bahut udharan hai jo aapko dekhne ko milenge jinme bramhin, kshatri ya vaishya shaamil hote hai tab wo kaun si jaati ke raha jaate hai.

  41. समाज में बुराइयों को दूर करने के दृष्टिगत आपके भाव सराहनीय है सा।

  42. in fact brahmin-brahman-bram-atma-soul-self is every living being human–animal-bird-insect. durwasa hot tempered person one can’t control anger, hates n thinks ill of others has not realised brahman is not brahmin biological father of karna changed form of bhoura entered in chauli of dancing urvasi who rubbed her braws to through out the insect/bhoura/durwasa fallen on her feet, everybody laughed at him seeing his seat vacant. pitiable he cursed her to be donkey. vasisht’s all sons were killed in enemity with vishvamitra vasishat’s son claiming superiority of being brahman boy was eaten by the cursed raja. no one was left except his pregnant daughter-in-law who delivered son named parasara met fisherwoman born vyas from whom- dhritrastra, pandu,vidur. brahman can marry in all varna son brahman wife shall get 4, son from akshtriya wife 3, son from vaish wife 2, son from sudra wife 1share to attract brahmin woman who prefered strong sudra for sexual enjoyment beside brahmins had prevelages in plenty thus always favour castism let the nation go to hell. there were no remarriges for brahmin women as they used to run away or fall in adaltary so widow marriges n intercaste marriges r taking place. there is no truth of family/father name which only known to mother not ahilya but atri cursed indra bore yonis on his bdy y parsuram killed his mother woman need strong partner for sexual satisfaction not mantras prefrably sudras warrior invader resulting birth of chandal castism is nonsence as a sudra having son from brahman wife called chandal half brahman is lower than the son from akshtriya wife.called khatri half akshtriya is this brahmism n castism not folly of manu n brahmans still crying shamelssly inastead of repenting on illwill none is sperior r inferior all strike together like bros for glory n prowess (rig ved 5:60:5) what caste satyakama radheya kauntikeya kartikeya aiyapa ? caste is by charrecter/deeds whether thought speach act not by birth

  43. There are hundreds of possibilities when it comes to
    adventure; equally bountiful are the options for relaxation.
    The internet is the best place to start, and if youre reading this, youre on the right
    track. You can travel through the national park having huge areas that consist of lush plants
    and floodplains and thick forests and grass.

  44. Namaste pathikaryji !
    Aap ne jis prakar se answer diye hai ve dekh ke mujhe bahut santosh hai.
    Jab bhi koi jati ki baat karta hai to mera dil jal jata hai aur mujhe samajh nhi aata ki mai inhe kaise samjhau par aapke answer dene ke tarike se mujhe bahut rahat mili hai. Mujhe sach me lagta hai ki mujhe mere asli bhai mil gaye hai. AAP logo ko dekhkar mujhe abhimaan hota hai ki mere bhai itna accha kaam itni acchi tarah se kar rahe hai.
    THANK YOU … 🙂

  45. Brahman-jo sanskriti ,dharm,niti ,puja,archana aur desh sheva ko hamesha dekhe.Jo Daan Le Aur Daan de.
    Kshtriya-jo sabki raksha apne pran de kar kre.Jo desh ke Liye Mar Mit sake.
    Vaishya-Jo Hamesha Desh Ki AArthik Sthiti ko sambhale.
    Shudra:-Jo Mehnat Krke Samaj Ko anya de sake,immarat kadi kr sake,desh ka vikas kr sake.

    Agr Vyakti Inme Se Aisa Ho To Kha Pe Jaatipat Hogi.
    Aur Gotra Praanali Vyavahik Sambandho Ke liye he.

  46. MAINE YADAV KUL ME JANM LIYA….PAR APNI SHAAADI MAINE BRAHMAN KUL KI LADKI SE KI HAI………… MERE FAISLE PAR AAP SAB LOG APNA REPLY JARUR KARE …….. I M WAITING……. UR REPLY……

    • apne ek janmana brahman parivar ki kanya se vivah kiya hai ! vah achha hai ya bura, yah to tab batlaya jayega jab aap kya karte hai? aur ap dono ki shiksha kahaan tak hai ! apke saath judav bhi tabhi ho sakega jab apke siddhant kya hai v karm kya hai ? samaj ke liye aap kya karne ki iccha karte hai aur uske liye kitna samay de sakenge ? vaise bhi shri jagjivan raam ji v shri ambedkar ji ne bhi janmana brahman parivar ki kanyao se vivah kiya tha var v vadhu ke gun karm aur svabhav jarur milne chahiye vah ane samuday me ho ya dusre samuday se ho ?

  47. MAI MANU JI KE BAAD AGAR KISI KO DIL SE FALLOW KARTA HOO TO LOHIA JI KO ……. AGAR KABHI MUJHE MAUKA MILA TO MERE LIYE MANU AUR LOHIA JI KE SIDDHANT HI SARVOPARI RAHENGE MAINE JO HIMMAT DIKHAYEE HAI ………BAHOT SE LOG ISKE KHILAAF THE…..PAR MERE FATHER NE AUR GHAR KE SABHI MEMBER NE AUR MERI WIFE KE GHARWALON NE SUPPORT KIYA……….MAI YAHI CHAHTA HOO KI KASH MUJHE SIRF 100 FRIEND JO KI MERI SOCH KO SUPPORT KARTE HO…………. MUJHE BAS UNKA SAATH CHAHIYE MAI POORI DUNIA KO EK MASSAGE DENA CHAHTA HOO KI WO MANU JI KE BATAYE RASTE PE CHALE TO SARI DUNIA ME KHUSHIAN HI HONGI,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,

  48. Maine Maunusmriti ko pada …. jab ispe bahot hi jyada bahas hone lagi thi…. padne ke baad se mai Manusmriti ko bahut hi jyada dil se manane laga hooo……… jab meri shadi ki baat mere gharwale aaj ke jamane ke hisab se karne jaaa rahe the…….to Maine mana kar diya…..Maine fir apni pasand ki ladki se ……..(.meri wife ………….
    jo ki janmse Brahman hai aur mai janm se Yadav hoo)……. shadi ki wo bhi pooori Vedic Ree ti se Mandir me ……aur pooori tarah se bina koi len den ke…..aaj hum dono khush hain…… aur mere ghar wale bhi….i proud of our culture……..i proud of OUR MANU….

    • #Jay_bheem…

      Aap mujse bade he so jya to nahi kaunga par itna jarur kahunga ki Aap jis manusmruti pe bharosa kar rahe he vahi manu… ke hisab se hamare #Dalit samaj ko padhaneka adhikar nahi ….
      usi manu …ke hishab se hame mandir me pravesh nahi milata tha or ushi manu … ke vajhase hamare kai purvajo ki jan gayi he …
      or ushi manu…ke vajah se strio ko unke hak nahi milte the …

      LEKIN KOI BAT NAHI AP LOGO NE JO ITANE ARSO SE MEHNAT KARE KIYA THA VO SAB HAMRE
      #DR.B.R.AMBEDKAR ne AKELEHI SAB KHATAM KAR DIYA……

      and now ………….#chirag

      #####JAY_BHEEM… …. … ….

      • apa ko dharm granta ka dyan nahi hai aour aap jane bhi nahi chahate kyuki bahamanoke bareme aisa pehalaya hai ki ve dalitonko bahut kasta diya hai, brahaman ke bare me dosh dene se pehale teek tarah se dharm granth padiye badme dosh de dijiye

  49. कहते है की ज्ञान मनुष्य को वैचारिक प्रकाश देता है जिससे वो सत्य और असत्य का भेद समझ सके सनातन/वैदिक धर्म के पालक जाने अनजाने इस बात को भूल जाते हैं की वेद पुराण गीता रामायण महाभारत उपनिषद किसी भी स्थल पर जन्माधारित जाती व्यवस्था का समर्थन नहीं करता है कर्मो के अधर पर व्यक्ति को देव और असुरो का उल्लेख इन ग्रंथो में मिलता है फिर हम किस पुरातन भेद की बात करते हैं मुझे दुःख होता जब सनातन/वैदिक/हिन्दू आपस में जाती आधारित व्यवस्था के सम्बन्ध में बहस करते समय सामायिक राजनातिक पूर्वाग्रह से ग्रस्त हो जाते हैं जाती व्यवस्था के विरोधियो ने जाती व्यवस्था के आधार पर “लाभ” पाने की अनुग्रह तो हर बार की किन्तु सही मायने में जाती व्यवस्था को ख़त्म करने के लिए कभी नहीं कहा जो की सनातन/वैदिक/हिन्दू धर्म के भविष्य के लिए उत्तम नहीं है

  50. महोदय! आप म्लेच्छोँ की बात करते हैँ कि ब्राह्मण द्रोह से उनको क्या हुआ? हम आपसे ये पूछना चाहते हैँ कि क्या भूमि मेँ पतित हुए को भी और अधिक अधःपतन की जरुरत है?
    वैदिक धर्म रुपी राज सिँहासन से पतित हो जाना ही एक म्लेच्छ का विनाश है।
    ये पूछने पर कि क्या द्वापरादि की भाँति कलियुग मेँ भी आप ब्राह्मण द्रोही को शीघ्र ही दण्ड देँगे? तब भगवान कृष्ण ने कहा था कि हे देवि! कलयुग मेँ मैँ समय बन कर आऊँगा! और एक एक अपराधी का हिसाब करुँगा!
    अब जरा गौर करो-
    एक म्लेच्छजीव एक कब्र मेँ युगान्त तक पडा रहे, जिसे युगान्त मेँ प्रलय के समय ही अपनी मुक्ति की आशा हो!
    मित्र! इससे बडा और क्या दण्ड हो सकता है? जरा सोचिये!
    अधिक समाधान के लिये SMSकर सकते हैँ-8439341437

  51. विनेक दुबे जी नमस्कार में आपसे ये पूछना चाहता हूँ की क्या हुआ कश्मीर में पंडितों पर दानवी अत्याचार करने वाल मुल्लों का कुछ नहीं न बल्कि हमारी इन्कमटेक्स की रकम से मौज उड़ाते हैं क्या हुआ उन मुसलमानों का जिन्होंने गांधी के मरने के बाद ४ घंटे में ही पुंडे में रह रहे २००० पंडितों को मर कर चील गिद्धों के खाने के लिए छोड़ दिया खैर चलो छोड़ो वैसे तो में पंडितों की बहुत इज्ज़त करता हूँ पर वो पंडित मुझे किसी घमंडी रावन से कम नहीं लगता जो खुद को ही सबसे बड़ा बताता है ओउर खुद मायावती की सफाई कर्मी की टीम में भारती होकर मेरे पुरे सहर की सफाई करता है वो भी मुह पर रुमाल बाँध के –राम राम

    • jati bhed hamara banaya hua hai sistam chalane ke lia jab rajtantr tha aj praja tantra hai Jabki jati karm adharit honichahia our jati bhed nahi kyo ki sab jati ka manusy sare kam krta hai pahle aisa nahi tha

    • विनेक दुबे जी, जन्म तो सब का ज़हरीले कीचड़ से ही होता है, कभी किसी नवजात शिशु को माँ का वह कीचड़ खिला कर देखना, यदि वह कुछ ही देर में तड़प तड़प न मर जाए तो कहना| गाय भैंस के जनन के समय भी यही सतर्कता बरती जाति है कि कहीं गाय/भैंस अपना जेर ना खा ले, वरना मृत्यु निश्चित है| अब उसी जेर से जन्म व्यक्ति पवित्र, पावन व उच्च कैसे हो सकता है?

      व्यक्ति अपनी सोच, शिक्षा एवं कर्मों से होता है, परन्तु जिनके मन, वचन और करम में ही हिंसा, जाति-पांति का विचार पनप रहा है वे तो कदापि उच्च नहीं हो सकते, हाँ वे हिंसक, निंदनीय, कामी, क्रोधी, विकारी व बलात्कारी अवश्य हो सकत हैं|

  52. आप ब्राह्मण द्रोही है और सिर्फ़ ब्राह्मणो मे दोष ही देखते है जैसे की अनार्य समाजी दया आनन्द देखता था वो भी जब मरा को अकाल मौत ही मरा सभी ब्राह्मण द्रोही इसी तरह मरा करते है । और रही जन्म से जन्म से जाती की बात तो जन्म्से ही जाती मानी जा सकती है क्युन्कि जो जैसा कर्म करता है उसके वंश मे उसी तरह के अनुवान्शिक गुणो का विकास होता जाता है । आप मनुष्यो एमे जातियो का सारा दोष ब्राहम्णो को देते है । तो फ़िर सभी जीवो मे भी कर्मो आदि की भिन्न्ता के कारण एक ही जीव की अनेक जातिया है जीव तो जीव पेड़-पौधो मे भी अनेक जातिया है । जातिया अनुवान्शिक गुणो के आधार पर व इकसित होती है । और एक बात ब्राह्मण को करोडो वर्षो से है और जिसने भी ब्राह्मणो के अस्तित्व को मिताना चाहा उसका पुरा वंश ही मिट गया है । आप भी प्रयास करके देख लो ।

    • bramhano ka astitv apne ap mit raha hai ! agar brahman achhe hote to ved kyo lupt saman huye hite jara apne ko bhi dekh lijiye kya apne charo ved kabhi oadhe hai ya kitni apki pidhiuya gujar gayi hongi jinhone ved nahi padhe honge ? yahdesh kyo guilam hua ? kya kabhi apna dharm ki pustak me hindu shabd milta hai tab brahmano ne kyo nahi pratikar kiya ? jara pahale purvjo ke nam bhi dekh lijiye aj ,dilip,dashrath, bharat, shatrughan, raavan, vibhishan, meghnath, kumbhkaran, sita, kaikeyi, manthra , kaushalya , yudhishthir bhim arjun balram shakuni duryodhan dhritrashtr, kunti, karn, kans shishupal mira bai surdas, tulsidas, jhansi ki lakshami bai, adi n jane kitne log the jinhone janmana jativachak chinho ka pryog nahi kiya ! lekin aaj ke samay me yah ho raha hai aur ap bhi iska pryog karne se nahi chukte hai ! kya yah jhutha ahankar nahi hai jiske pas pandity ka gyaan n ho vah apne ko kyo pandit kahalaye? aj ke samay me kai laakh brahman parivar me janm lene vale chaprasi , majdoor aur chote mote mehnat vala kary kar rahe hai bahan mayavati ji ke charan chune ke liye anek brahman v vaishy ,aur kshatriy parivar me janm lene vale taraste hai akhir kyo ? aaj agar brahman yogy hote to vah sharab ande mans adi ka sevan nahi karte hai , balki samaj ke any manushyo ko rokte ! samaj me ek prbhavshali bhumika pesh karte jo nahi kar rahe hai ! pandit parivar me janm lekar bhi agar koi brahman vala kary nahi karta hai to doshi kaun hai ? is par atmmanthan ki avshyakta hai ? ary samaj ko gali dene se pandito ka bhala kabhi nahi ho payega ! agar brahman samaj sahi hota to arysamaj ka janm hi nahi ho pata ? ary samaj to svayam maut ke kagar par hai usko gali dekar bhi ap kya karenge ? isliye samaj ke hit me yahi rahega ki brahman samaj svaya apna “kayakalp ” ki disha me badhe ! yogyta kisi ki mohtaj nahi hoti ? jo yogy honge vah svat: age nikal jayenge ? aaj se sankalp lijiye ki kisi bhi brahmanparivar me koi mans ande machli,sharab any koi nashile padarth, sigret bidi tambaku, paan masala adi ka sevan nahi karega 1 mahilao se badchalni nahi karega , jisse samaj ke any manushy apko dekh kar ,apke prerna shrot bane rahe ! kya yahsahas brahman samaj kahalane vala kar sakega ? dalit samaj ko apna bana sakega muslim v isaiyo ko fir se apne vaidik sanatan dharm ki diksha de sakega ?

      • Wah Raj ji kya bat kahi hai , wahi to mai kahna chahta hu , ki Hum apne sanskar se jane jaye pahchane jaye , taki hame kud hi pandit kahe , aur hamara to Sanatan dharm hi tyag ,blidan , prem , kartbay ,udarta , aur propkar ke liye pahchana jata hai , yahi to hamare jine ki kala hai .aur abhi hi to hamare paas pryapt samay hai , logo ko jodne ke liye , naki aapas me hi batne ke liye , Yahi to sare neta aur dusre desh chahte hai ki ye aapas me laday aur hum ander ghuse . Jay hind .

    • dube ji kya agar apke vanshsaj or aap ke pariwar ke log aap ko nahi batate ki aap brahmin ho to aap kabhi jan pate …. aaj jo bhartiya ,sindh sabhyta ka nash huaa iske jimmedar kon he ? hinduo me jati wad kyu? or kaise aai? vedik kal me to jati ka ullekh nahi he fir aap kon hote ho brahmin or sudra bolne wale apne ko ek surda ki jagah rakho fir samjho

    • Muze sab samaz aaya par ye baat ki parsuram ne dharti se kshatriya gayab kar diye aap baat kar rahe ho ved ki usme muze bata do kaha likha hai ye sab rahi baat ramayan ki vo to mixer hai jisme juth add kar diya ye baat apko bhi pta hai fir apna pakas rakhne ke liye kyu juth ka sahara lete ho mai aapke har kaam ki sarahna karta hn bus just advise ke liye ki puranik baaton ka sahara mat lo

    • Jab tumko ye pata hai ki pao pnay je adhar par karm ke anusar janan lete hai to ye dab bato ko jante huye v brahaman pap kyo kar rahe hai kya bo b kshudro me janam lene k liye.

  53. Dr. Deepak Kumar says :
    “So my suggestion for you that first study the authentic books to remove the caste system but do not blame general categories”.

    My response :-
    1. “with respect to you Mr. kumar, since u have taken so much pain to express ur opinion on this page, can i request u to be kind enough to share ur “secret world of sacred scriptures” which u call “authentic books” so that the entire world can come to know about the authenticity of those books. even otherwise, u have a right to differ and we respect ur difference of opinion.

    2. Dr. Deepak, try to see the larger picture here. the article focuses on the issue that “1. caste system must be eradicated, 2. caste is man-made and it has no divine sanction, 3. Vedas dont support caste system, 4. there is no way to find out today that since the inception of vedas any person has “retained” his “original” caste”

    NOW YOU ARE welcome to rebut and reply to these points in detail with reference of ur so-called” authentic scriptures.

    i hope n trust that u have understood the purport f the article and i advise u to read this series of 3 article and than form ur opinion otherwise u may be a victim of “premature opinion”.
    may we all work towards eradicating this evil from our society

  54. Dr. Deepk u say :-
    “Some of your views are good but unauthentic and rest of your views with some political issues issues”.

    My response :-
    “it is most basic to point out before we take ur comments seriously that which part of the articles appealed to you and which part of the article u failed to understand so that u had to term them ‘unauthentic’. dont make general comments and think beofre u say coz, we assure that we have good reply for all ur questions provided you ask some intelligent question”.

  55. Dr. Deepak Kumar,

    U say :-
    “I have different views on your this study because i am working on the old religious scriptures and according to that study you have no absolute knowledge”.

    my response :-
    “in the entire reply u have very “conveniently” forgot / skipped to mention the “names” of so called “scriptures” which u claim that u have been studying for quite some time now. secondly, no intelligent person can “assume / presume” that we have not worked our studies. May be, its you who needs to do your “home work” until u tell us the “secret names” of the “scriptures” which have “enlightened you. Kindly note that on the page AGNIVEER only “VEDAS” are considered to be authentic. So, u r advised to quote from VEDAS, if u can, otherwise we would assume that whatever you have stated here is without any basis.”

  56. i have different views on your this study because i am working on the old religious scriptures and according to that study you have no absolute knowledge . Some of your views are good but unauthentic and rest of your views with some political issues issues. So my suggestion for you that first study the authentic books to remove the caste system but do not blame general categories. let me tell you a thing that in some states from a long time the power in the hand of the persons of schedule caste not in the hand of the persons of unreserved category. So analyse all these figures and then first blame such powerful scheduled caste persons that what are they doing for the welfare of own groups and have they provide any facility for the persons of unreserved category? My submission to you that write for the benefit for all to remove such discrimination in a liberal way as a social reformer not as a polluter of harmony between innocent people of the country. So spread the light of education not through vitiated politics in society if you have to ability to understand things in a right manner as you want to do.

    • Sir, jatiwad samaj ko upvargo me baat kar samoohik vikas ko niyantrit karne ki ek matr vavastha se adhik kuch bhi nahi,
      Vedo me jatiy vibhajan ka aadhar karm tha.
      Uttarvadic kaal me jise janm man liya gaya.
      Aur aaj ke samay me bade rajnitik mudde ke karan esme chedchad nahi ki ja rahi hai.
      Vastav me punrgathan ke liye aandolan ki jaroorat hai.
      And we WILL be do it .
      Aur ye kshanik aaveg nahi, UP me teem taiar ki ja rahi hai bas sahi sankhya aur sahi vakt ka intzar hai.
      RANJAN PANDEY.

    • Ap itana Brahman virodhi knyo ban rahe h. Ved air Purana to ap badal nahi sakate . yadi AAP Hindu h to sachai AAP ko manani hi padegi. Rahi baat jati ki to aap ko malum hi hoga manushya me anuvanshik lakshan PAYE jate h aur aj v Brahman apane purvajo ki Tarah tej tarrak hote h ye alag bat h ki arakshan ke daura unake paratibha ko roka ja raha h .arakshan nahi rahata to aap khud samajh jaate k ye vahi Brahman h . ltihas gavah hai Mangal panday ajad brahman the air ham unake vansaj

      • adarniy shri pravin ji , raavan, kans adi me anuvanshik gun kyo samapt ho gaye the ! vidvan ko apni partibha d ikhlane ke liye koi arakshan ki jarurat nahi hoti ambedkar ji kabirdas ji ravi daas ji bhi bagair aakshan ke samaj ke liye amuly rahe hai , jab apnadeshbhajar saal tak gulam raha tha tab to koi arakshan vyavstha nahi thi? uska doshi kaun tha?
        kyo nahi apne ko brahaman kahale ne vale samaj ko jagrat karke gulami se shighr mukt kyo nahi ho gaye ? gulam j hi kyo huye ?

      • Shayad aapne dr. Bhimrao ambedkar ke baare main nahi padha ek baar padh lo sari galatfahmi door ho jayegi….

      • This is not a fact what wroted there.. Note parshuram ne kshtriye ka nash kiya lekin ishtriyo ko nahin Okey.. AAj aap jaat ko nahin mante feer jati dekh ke arakshan kyun ?

        Rahi baat ravan ki to he was good Scholar and he know everything never try to done what he want independently he has forced to sita for acceptance but he was waiting for her positive response..

        I Like his character. Now you just check your DNA..

        Also note our indian womens are ready to jump on fire what you are talking about.. I think your mother was raped by mughal DNA Product..

      • Hahaha
        Inshan jaati se nahi karma se jaana jata hai…. Magal Pandey ek sipahi they ek deshbhakt me roop me jaane jaate hai. Na ki bramhan…. Samjh . Tenaliram

      • Bhai Chobe ji sayad apko or pta nhi ki harmonso k bi adan prdan ho chuka tha dhn unhi logo ko mila jinhone angrejo or mullo se apni maa bahino ko chudwaya or brahaman to khubsurat hote hi the aj unka rng vi bdl gya h ye mante ho ik kahavat h ki kala pndit gora chamar apne bap ke nhi hote kya koi kala tumhare riletion me nhi h he to use pndit man ne se inkar kr do pta lg jyga vo safai me tumse bda pndit niklega yesa hi rajputo me he jo asli the jngal bhag gye lodhi rajput bn gye or bi brnsankr olade rajput bn gyi jinhone muslimo ko ldki di jmidar bn gye jodha akbr udaharad h kya unke smaj ko bahiskirit kiya gya nhi n ye hi hm gurjaro ki riject h jo rajput bn gye hm fir gurjar ho gye vo tomar chohan bn gye jo hmare gotr h hmne unhe samil nhi kiya ik gane me radika ji k bolna suna hoga me gujri tu gwala me gori tu kala mera tera jod nhi

      • Bhai tum sach mai chutiye ho….bilkul…tum hare dimag mai jitni gandagi bhari hai usse tum gatiya aadmi se badker ar kuch nhi ho..mer jaao tum…caste birth base per nhi hota…wo heredity mai nhi jata..swami vivekanand hi ne either letter mai likha hai…kisi pujari ko banaras k..ar rahi baat rang roop sirf wahi jata hai heridity mai ….ar gora hona ya sunder hona is baat k karan hai ki unki psychology acchi rahi long term se hi unhone arro KO daba k banaya …jaise acchi life style se her model sunder lgne lagta hai chehre pe nilhar aa jata …sab psychological effect hai …long term ka tum khud apne pe test ker k dekh lo…werna pehle k daba diye gaye logo ki tarah mental pressure jhelte hue jiyo phir dhup mai kaam karo ar samaj se bhedbhao jhelo…sari gora pan apne aap jhad jayega …..abhi nhi toh kuch Saakashvili mai jarur…kuch pidi mai toh jarur ,,,,,,because ur body is nothing but reflection of ur mental state …samjhe ar tum vivekanand se bade nhi ho balki unke sammne khade hone layak nhi ho …wo jitna jante the ar padhe utna tumhari puste nhi padi hongi…granth ….isliye social media per raita na failao….tum atakwadi se kam nhi ho ….kyuki tumhare jaise log logo ko baatte hai …..no ki raksaso ka kaam hota hai …..

      • jodaa rajputo ki beti nhi thiii uski parvarish rajput family mein hue thi wo ek dassi ki beti thiii uski maa mahal mein kaam krti thi aur jb jodaa hue toh wo rona lgi ab isse shadi kon kraga tb rani ne usse kha ki wo jodaa ki shaadi rajputana family mein krvayagi aur akbar ki bhi parvarish rajputana family mein hue thi issliya usse shadi krvayi thiii

      • Taniya ji agar history nahi malum ho to apne aap history ko tod marod ke nahi kahna chahiye duniya janti hai ki akber kon tha aur uski parvaris kaise huee , ager nahi malum hai to Maharana pratap serial dekhiye , sab samajh me aa jayega , aur ye bhi yaad rakhiye ki abhi bhi jitne bhi jagirdar aur raja bache unhone uss samay Muglo ki ya britis ki adhinta savikar kar liya tha aur apno ke sath hi gaddari kiya , Ye to Itihas bhi gawah hai ager bhivisan nahi hota to Rawan bhi nahi mara jata .

      • bhai sabko pata he ki jaat or gujar rajput ki dasi putr he jinka baap rajput or ma muslim the kyuki rajput ke liye ma or baap rajput hune chaiye

      • Pravin bhai Agar koi apne marg se bhatke , to hamara kartwaye hai ki hum use saantisaanti se sahi disha me laye na ki bhatke huye ko aur bhatkay yahi to ek brahm gyan ka janm hua aur wo hi pandit kahlay , athart hum sab ek hi ki to santan hai . Om namah Shivay .

      • Bhai Isme Naya Kya Pahle Sosad Savarno ne Kiya Ab Nimn Varno ko Mauka Mila Hai To Wo To Karenge Hi …..Aur Rahi Baat Arakshan Ki arakshan ne kisi ko nahi roka…aaj bhi kai dalit aur backward, General seat mein beat karte hai ..bhai human brain kisi ke DNA pe depend nahi karta wo atmosphere pe Depend karta hai…agar savrn bhi 40% number pate hai tu kuch dalit aur pikshade bhi 82% Number pate hai kuch exams mein to rona band karo aur mehnat karo….Brother Karm Karo Aise Pachado mein dimag na kharab karo kyunki agar apne vedo ko padha hai ya suna hai to inshaan jaisa karm karta hai usko uska waisa hi fal milta hai….so .

      • Bhai sahab agar sub ko mauka mila hain to sub kyon nahi kartein kuchh kyon
        iska mmatlab hain ki subbb ke paas nahi hain dimag ar pahle bhi nahi tha.

      • Lekh me prarambhik charan KO punh padhe.

        Yah lekh Brahman virodhi nhi hai balki us vichardhara ke viruddh hai Jo jatiya bhed bhav ki sankirn mansikta se grasit hai.
        Chahe vah kisi bhi varna /jati ki hi kyo na ho. Yah mat bhuliye ki dr. Ambedkar ke andolit karne par ek Brahman ne bhi dharma grantho ke havan ka mahan Karya kiya tha .
        Rhi bat vidwata ki to ek shudra KO avasar milte hi pura bharat unke Gyan par adharit ho gya jise samvidhan kahate hai.or is mahan vyaktitwa KO vishwa dr.bhimraw ambedkar me Nam se janta hai.
        Prerit karne ke liye dhanyawad .

      • Bhai sahab agar aap aisa sochate hain to mujhe lagta hain na abedkarji ke pahle koi sudra is kabil tha aur na ambedkarji ke baad,
        Aur rahi ambedkarji ki baat to jis chees ka credit wo le rahe hain wo chij nathuuram godase ne likkhi thi shayad aap ko ye pata hi na ho.
        Aur shayad aap log ye kahna chahtein hain ki pahle aadami ko maro phir medicine do sub kuchh pehle jaisaa ho jayega,pahle ladki ka repp karo phir shadi ka prstav do.Bhai sahab agar main apke bare main ulti sidhi baat likhu aur kahon ki please dil pe mat lena to aap kya karenge
        Jyada dimag mat lagao samjhe achhcha nahi soch saaktein to bura bhi mat sochon.
        aaj chhoti cast se jyada bramhan aur kshatiriya garib hain aur shoshan bhi unhi ka ho raha hain shayad aap ko wo chij nahi dikhati kyonki aap kud hi shudra hain aur shoodron ka pachhachh le rahe hain nhi to bramhan aur kshatriyan kka naam nahi aata.pahle khud ko suudharon phir sammaj sudharane nikalo.

      • sir mai bhi dr ambedkar ka bahut respect karta hu .lekin dr ambedkar ko samvidhan sabha ka adhyas banane wale bhi tatha kathit ucch jati ke hindu the ..bhimrao mahaar ko ambedkar banane wala bhi ek bhrahman professor hi tha ..dr ambedkar ko education ke liye europe bhejne wala bhi gayakwaad rajput raja tha ..uss samay aagar chahte to ucch jati ke log dr sahab ko nahi bhi banate to dalit kuchh nahi karsakte the …rahi bat dalit ko dabane ki to ..uss samay ka mahol hi aisaa tha ..log kabilo mai simte hue the..uss samay koi ucch jati ke logo ka sasan nahi tha ..kabhi mugal ..kabhi angrez sasak the ..phir bhi hamare purvajo ki galti thi jo unhone ..chhuwa chhut apnaya ..issi galti ke liye aaraksan lagu kiya taki sab aarthik roop se barabar aa jaye ..lekin aaj aaraksan ko rajnitik hatiyar ke tor par use kiya ja raha hai ….asli dalit aaj bhi dalit hi hai ..desh azad hote hi jo uska pahla laabh mila wo dalito ko aaraksan ke roop mai …baki logo tab gulami mai the unhone jamin jaydad mugal ya angrejo se laad kar li thi …

      • sabse pehle to apko he samajhna jaruri hai ki aisi samsya paida hi kyo hui?logo KO arakshan ki jarurat kyo padi?hamara desh gulam kyo bana? Kisi bhi desh ke abadi aur barbadi k pic he sabse bada hath siksha ka hota hai. aur yeh to ap jant hi honge ki padhne air padhane ka adhikar to keval barah-mano ko hi tha to agar unhone apni jimmedari sahi se nibhai hoti to hamare desh ki aisi stithi hoti hi nahi . bharat me turki aye Francis I aye mughal aye air antatah angrej .aisa hua hi kyo agar brahmin s ne logo KO sahi siksha do hoti rajao KO sahi se rajtantra sikhaya hota to an ham gulam bante na hamar samaj me asamanata failti .an rahi arakshan ki bat to agar ap ek survey karate hai to ap KO har sarkari naukriyo me 80% se jyada Brahman hi milenge. arakshan KO sahi fayda to arakshit varg KO mil hi nahi pata hai .DR. Ambedkar ne samvidhan me keval 10 varsho me liye arakshan ka pravidhan rakha ta Vo bhi apke priya gandhiji air kayi Brahman netao ki sahmati par lekin yeah an take keval is I liye lagu hai kyoki pichda varg abhibhi pichda hai .kyonki ap ke jaise
        Kai general log farji sc st ya obc banke arakshan ka fayda uthate hai.air jaha take baudhik chamta ki bat hai to apki bat bilkul kutarkiy hai .gautam Buddha gair Brahman the .sent ravidas ,kabirdas,jyotiba phule ,air Dr.ambedkar jaise vishva vikhyat vidvan shudra jati se the

      • Maaf karna par aap ki agyaanta aap k vicharo se saaf jalkti hai .

        Brahamn shbad ka sandhi viched karoge to sara matlab hi saaf ho jaayega .

        Brahamn shabd ka sandhi Viched hai

        Brham + Ann

        Brham = Gyaan
        Ann = Anusaran karna

        matlab ki jo vyakti Gyaan ka Anusaran karta hai Vahi Brahman hota hai .

        Ab swaal ye ki konsa gyaan ?
        Mere Hindu Bhaiyo jo Vedo aur puraano k Gyaan ka Anusarn karta hai vahi Brhman hota hai kisi Brhman kul main janm lene wala Brhman nahi hota.

        Rahi baat jaati ki to main bata du ki
        Brahman , Vesyy , Shkatriya , aur Shudra jaati nai balki Varn hai .

        Varno ki vyavastha kyo ki gayi ?

        Taaki varn Sankar Utpan na ho aur yeh science k mutabik sahi bhi hai.

      • Arakshan ko ham chhod sakte hai kya Brahman samaj ko chhod sakta apni kma me kha sakta hai samaj ko lutna chhod sakta hai.am private sector me arkshan nahi hai to vha kitna Brahman bad hai sabko dikhata hai. Mene B.E.me85%mark prapt kiye am bar mp top raja magar private companyo ko mujh me yogita nahi dikhti sabki mere sath me Brahman jinka55%-60%hai sab achhi companyo me hai.arakshan chhodne me bad yahi ham gov.sector ka ho jayega .

    • Muze sab samaz aaya par ye baat ki parsuram ne dharti se kshatriya gayab kar diye aap baat kar rahe ho ved ki usme muze bata do kaha likha hai ye sab rahi baat ramayan ki vo to mixer hai jisme juth add kar diya ye baat apko bhi pta hai fir apna pakas rakhne ke liye kyu juth ka sahara lete ho mai aapke har kaam ki sarahna karta hn bus just advise ke liye ki puranik baaton ka sahara mat lo

      • anyone goes against wish or spoils game or is hurdle of a hunter/chaser or planner gets killed like akhtriyas ( 21 times ), swami dayanand , mahatma gandhi , harsa vardhana and made out caste like sant gyaneshwar . during time of v . p . singh p . m . anti mandal commission only 12-15 % made non sense against 85-88% population of the country by burning innocent persons like GOSWAMI who being ATI PICHHDA were beneficiaries like that of mr. present p. m. narendar modi ,even they did not accept GOSWAMI TULSI DASS as brahman though maharishi bamiki was being sudra was accepted who wrote RAMAYANA respectively . everybody seems against castes outwardly but not earnestly , they r cheaters only against representation of every segment of the society . caste is integral part of hindu n can only be eliminated by sowing seeds of love to harvest crop of peace ie by inter caste marriages encouragement in the society

      • आज के जमाने मे सभी लोग सुद्र है .
        ना वेद का ज्ञान है, दया हींन है, किशी की रक्षा भी नही क्रर सकता, अपने लाभ के किए कुश भी कर सकता है, अपने आप को श्रेथ कहना छोड़ दो , और श्रेथ बनाना सॅरू करो.
        पिताजी का नाम स्कूल तक ठीक लगता है बाद मे तो अपना है नाम BOLD बनाते हो तो ही है तो वॅल्यू है.

      • shukla ji e sab rajakiya vyaktiyone pehalaya hai ki brahaman jat ki log nichi jat ke logonko bahut takalif diya hai isiliye ye sab use manake hame galiya aour hamare bareme dosha utha te hai. in dusare jat walonko puran veda adi pata nahi our jo thoda pata hai isiliye rajakiya vyaktiyone apne swarth ke liye veda puran sab joot hai batate hai isaliye app inko galiya mat do ye sab dharm ke dyan se nadan hai

      • Bhai sahab Mahabharat phir se padho.Parshuram ne Kshatriyon ko mara tha bachchon ko nahi na hi ajaname bachchon ko?
        Itna confuse kyon ho?
        Kahin padha tha kya ki bachchon ko bhi mara tha?

      • Abe to kutte ki pillo parshuram kiya yahi intezar karta rahta tha, yeh bache bade honge tab inhe marunga. agar sabhi bache bade hote hi maar diye to phir pet me kaise rah gaye dusri teesri pidhi baad. waha kaun bache paida kar aaye. KIya bacho ko woh bada hone par kahta tha ki bache paida kar tab mai tujhe marunga. salo apna dimag tum logo ne maar diya hai.

      • to kiya parshuram bacho ke paida hone ka intezar kar raha tha, kab bache paida honge kab me unhe marunga. chalo bache paida hone par maar diye, uske baad kiya dusri teesri pidhi chhatriyo ki bacho ne paida ki thi. dimag me bhusa bhara hai kiya.

      • Aap khashtiya hain to aapko Khshtriyo ke bare me likha gya bura laga lekin baki sab sahi. Lekin jo Barhamin ke bare me likha gya wo aapko bura kyu nahi laga. ???

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