जाति प्रथा की सच्चाई – 1

Purpose-of-creation-in-Hinduism

This article is written by Arya Pathik- an Agniveer Patron- who got inspired by Agniveer’s article series on caste system and especially http://agniveer.com/5277/the-reality-of-caste-system/

[कृपया ध्यान दें -  यह लेख मुख्य: रूप से उस विचारधारा के लोगो पर  पर केन्द्रित हैजो जन्मआधारित जातिगत भेदभाव  का पक्ष लेते हैं. इसीलिए सभी लोगों से प्रार्थनाहै कि हमारी समीक्षा को केवल इस घृणास्पद प्रथा और ऐसी घृणास्पद प्रथा  के सरंक्षक, पोषक और समर्थकों के सन्दर्भ  में देखा जाए  न कि किसी व्यक्ति, समाज और जाति के सन्दर्भ  में. अग्निवीर हर किस्म के जातिवाद को आतंकवाद का सबसे ख़राब और घृणित  रूप मानता है और ऐसी घृणास्पद प्रथा  के सरंक्षक, पोषक और समर्थकों को दस्यु. बाकी हम सब लोग, चाहे वो इंसान के द्वारा स्वार्थवश बनाई गयी तथाकथित छोटी जाति या ऊंची जाति का हो, एक परिवार,  एक जाति, एक नस्ल के ही हैं. हम अपने पाठकों से निवेदन करते हैं कि वो ये न समझेंकि इस लेख को वैदिक विचारधारा "वसुधैव कुटुम्बकम" के विपरीत किसीव्यक्ति या वर्ग विशेष के लिए लिखा गया है. ]

जाति प्रथा  से जुड़े हुए  कुछ ऐसे तथ्य जिनके बारे में हमें पता होना चाहिए और जिनके बारे में हम सोचें:

कृपया इसे लेख को आप हमारी श्रृंखला की एक कड़ी के रूप में ही पढ़े और विशेषत: लेख,  http://agniveer.com/5276/vedas-caste-discrimination/

 

ब्राह्मण कौन है ?

 

जाति प्रथा के बारे में सबसे हँसी की बात ये है कि जन्म आधारित जातिप्रथा अस्पष्ट और निराधार कथाओं पर आधारित हैं. आज ऐसा कोई भी तरीका मौजूद नहीं जिससे इस बात का पता चल सके कि आज के तथाकथित ब्राह्मणों के पूर्वज भी वास्तविक ब्राह्मण ही थे. विभिन्न गोत्र और ऋषि नाम को जोड़ने के बाद भी आज कोई भी तरीका मौजूद नहीं है जिससे कि उनके दावे की परख की जा सके.

जैसे हम पहले भी काफी उदाहरण दे चुके हैं की वैदिक समय / प्राचीन भारत में एक वर्ण का आदमी अपना वर्ण बदल सकता था. कृपया पढ़ें;

http://agniveer.com/888/caste-system/

अगर हम ये कहें कि आज का  ब्राह्मण [जाति / जन्म आधारित ] शूद्र से भी ख़राब है क्योंकि ब्राह्मण 1000 साल पहले चंडाल के घर में पैदा हुआ था, हमारे इस दावे को नकारने का साहस कोई भला कैसे कर सकता है ? अगर आप ये कहें कि ये ब्राह्मण परिवार भरद्वाज  गोत्र का है तो  हम इस दावे की परख के लिए उसके DNA टेस्ट  की मांग  करेंगे. और किसी  DNA टेस्ट के अभाव में तथाकथित ऊँची जाति का दावा करना कुछ और नहीं मानसिक दिवालियापन और खोखला दावा ही है.

 

क्षत्रिय कौन है ?

 

ऐसा माना जाता है कि परशुराम ने जमीन से कई बार सभी क्षत्रियों का सफाया कर डाला था. स्वाभाविक तौर पर इसीलिए आज के क्षत्रिय और कुछ भी हों पर जन्म के क्षत्रिय नहीं हो सकते! 

अगर हम राजपूतों की वंशावली देखें ये सभी इन तीन  वंशों से सम्बन्ध रखने का दावा करते हैं – 1. सूर्यवंशी जो कि सूर्य / सूरज से निकले, 2. चंद्रवंशी जो कि चंद्रमा / चाँद से निकले, और 3. अग्निकुल जो कि अग्नि से निकले.  बहुत ही सीधी सी बात है कि इनमे में से कोई भी सूर्य / सूरज या चंद्रमा / चाँद से जमीन पर नहीं आया. अग्निकुल विचार की उत्पत्ति भी अभी अभी ही की है. किवदंतियों / कहानियों के हिसाब से अग्निकुल की उत्पत्ति / जन्म आग से उस समय हुआ जब परशुराम ने सभी क्षत्रियों / राजपूतों का जमीन से सफाया कर दिया था. बहुत से राजपूत वंशों में आज भी ऐसा शक / भ्रम है कि उनकी  उत्पत्ति / जन्म;  सूर्यवंशी, चंद्रवंशी, अग्निकुल इन वंशो में से किस वंश से  हुई है.

स्वाभाविक तौर से इन दंतकथाओं का जिक्र / वर्णन किसी भी प्राचीन वैदिक पुस्तक / ग्रन्थ में नही मिलता. जिसका सीधा सीधा मतलब ये हुआ कि जिन लोगों ने शौर्य / सेना का पेशा अपनाया वो लोग ही समय समय पर राजपूत के नाम से जाने गए.

 

ऊँची जाति के लोग चंडाल हो सकते हैं

 

अगर तथाकथित ऊँची जाति के लोग ये दावा  कर सकते हैं कि दूसरे आदमी तथाकथित छोटी जाति के हैं तो हम भी ये दावा कर सकते  हैं कि ये तथाकथित छोटी जाति के लोग ही असली ब्रह्मण, क्षत्रिय और वैश्य हैं. और ये ऊँची जाति के लोग असल में चांडालों की औलादें हैं जिन्होंने शताब्दियों पहले सत्ता पर कब्ज़ा कर लिया था और सारा इतिहास मिटा / बदल दिया था. आज के उपलब्ध इतिहास को अगर हम इन कुछ तथाकथित ऊँची जाति के लोगों की उत्पत्ति / जन्म की  चमत्कारी कहानियों के सन्दर्भ में देखें तो हमारे दावे की और भी पुष्टि हो जाती है.

अबअगर किसी जन्मगत ब्राह्मणवादी को हमारी ऊपर लिखी बातों से बेईज्ज़ती महसूस होती है तो उसका भीकिसी आदमी को तथाकथित छोटी जाति का कहना अगर ज्यादा नहीं तोकम बेईज्ज़ती की बात नहीं है.

 

हम लोगों में से म्लेच्छकौन है ?

 

इतिहास से साफ़ साफ़ पता लगता है कि यूनानी, हूण, शक, मंगोल आदि इनके सत्ता पर काबिज़ होने के समय में भारतीय समाज में सम्मिलित होते रहे हैं. इनमे से कुछों ने तो लम्बे समय तक भारत के कुछ हिस्सों पर राज भी किया है और इसीलिए आज ये बता पाना बहुत मुश्किल है कि हममे से कौन  यूनानी, हूण, शक, मंगोल आदि आदि हैं!  ये सारी बातें वैदिक विचारधारा – एक मानवता – एक जाति से पूरी तरह से मेल खाती है लेकिन जन्म आधारित जातिप्रथा को पूरी तरह से उखाड़ देती हैं क्योंकि उन लोगो के लिए म्लेच्छ इन तथाकथित 4 जातियों से भी निम्न हैं.


जाति निर्धारण के तरीके की खोज में

 

आप ये बात तो भूल ही जाओ कि क्या वेदों ने जातिप्रथा को सहारा दिया है या फिर नकारा है ? ये सारी बातें दूसरे दर्जे की हैं. जैसा कि हम सब देख चुके हैं कि असल में वेद” तो जन्म आधारित जातिप्रथा और लिंग भेद के ख्याल के ही खिलाफ हैं. कृपया देखें  http://agniveer.com/5276/vedas-caste-discrimination/. इन सारी बातों से भी ज्यादा जरूरी बात ये है कि हमारे में से किसी के पास भी ऐसा कोई तरीका नहीं है कि हम सिर्फ वंशावली के आधार पर ये निश्चित कर सकें कि वेदों कि उत्पत्ति के समय से हममे से कौन ऊँची जाति का है और कौन नीची जाति का. अगर हम लोगों के स्वयं घोषित और खोखले दावों की बातों को छोड़ दें तो किसी भी व्यक्ति के जाति के दावों को विचारणीय रूप से देखने का कोई भी कारण हमारे पास नहीं है.

इसलिए अगर वेदजन्म आधारित जातिप्रथा को उचित मानते तो वेदों में हमें किसी व्यक्ति की जाति निर्धारण करने का भरोसेमंद तरीका भी मिलना चाहिए था. ऐसे किसी  भरोसेमंद तरीके की गैरहाजिरी में जन्म आधारित जातिप्रथा के दावे औंधे मुंह गिर पड़ते हैं.

इसी वज़ह से ज्यादा से ज्यादा कोई भी आदमी सिर्फ ये बहस कर सकता है कि हो सकता है की वेदों की उत्पत्ति के समय पर जातिप्रथा प्रसांगिक रही हो, पर आज की तारीख में जातिप्रथा का कोई भी मतलब नहीं रह जाता.

हालाँकि हमारा विचार ये है कि, जो कि सिर्फ वैदिक विचारधारा और तर्क पर आधारित है, जातिप्रथा कभी भी प्रसांगिक रही ही नहीं और जातिप्रथा वैदिक विचारधारा को बिगाड़ कर दिखाया जाना वाला रूप है. और ये विकृति हमारे समाज को सबसे महंगी विकृति साबित हुई  जिसने कि हमसे हमारा सारा का सारा गर्व, शक्ति और भविष्य छीन लिया है.

 

नाम में क्या रखा है ?

 

कृपया ये बात भी ध्यान में रखें की गोत्र प्रयोग करने की प्रथा सिर्फ कुछ ही शताब्दियों पुरानी है. आपको किसी भी प्राचीन साहित्य में ‘राम सूर्यवंशी’ और ‘कृष्ण यादव’ जैसे शब्द नहीं मिलेंगे. आज के समय में भी एक बहुत बड़ी गिनती के लोगों ने अपने गाँव, पेशा और शहर के ऊपर अपना गोत्र रख लिया है. दक्षिण भारत के लोग मूलत: अपने पिता के नाम के साथ अपने गाँव आदि का नाम प्रयोग करते हैं. आज की तारीख में शायद ही ऐसे कोई गोत्र हैं जो वेदों की उत्पत्ति के समय से चले आ रहे हों.

प्राचीन समाज गोत्र के प्रयोग को हमेशा ही हतोत्साहितकिया करता था. उस समय लोगों की इज्ज़त सिर्फ उनके गुण, कर्म और स्वाभाव को  देखकर की जाती थी न कि उनकी जन्म लेने की मोहर पर.  ना तो लोगों को किसी जाति प्रमाण पत्र की जरूरत थी और ना ही लोगों का दूर दराज़ की जगहों पर जाने में मनाही थी जैसा कि हिन्दुओं के दुर्भाग्य के दिनों में हुआ करता था. इसीलिए किसी की जाति की पुष्टि करने के लिए किसी के पास कोई भी तरीका ही नहीं था . किसी आदमी की प्रतिभा / गुण ही उसकी एकमात्र जाति हुआ करती थी. हाँ ये भी सच है कि कुछ स्वार्थी लोगों की वज़ह से समय के साथ साथ  विकृतियाँ आती चली गयीं. और आज हम देखते हैं कि राजनीति और बॉलीवुड भी जातिगत हो चुके हैं. और इसमें  कोई भी शक की गुंजाईश नहीं है कि स्वार्थी लोगों की वज़ह से ही दुष्टता से भरी इस जातिप्रथा को मजबूती मिली. इन सबके बावजूद जातिप्रथा की नींव और पुष्टि हमेशा से ही पूर्णरूप से गलत रही है.

अगर कोई भी ये दावा करता है कि शर्मा ब्राहमणों के द्वारा प्रयोग किया जाने वाला गोत्र है, तो यह विवादास्पत है क्योंकि महाभारत और रामायण के काल में लोग इसका अनिवार्य रूप से प्रयोग करते थे, इस बात का कोई प्रमाण नहीं. तो हम ज्यादा से ज्यादा ये मान सकते हैं कि हम किसी को भी शर्मा ब्राह्मण सिर्फ इसीलिए मानते हैं क्योंकि वो लोग शर्मा ब्राह्मण गोत्र का प्रयोग करते हैं. ये भी हो सकता है कि उसके दादा और पड़दादा ने भी शर्मा ब्राह्मण गोत्र का प्रयोग किया हो. लेकिन अगर एक चंडाल भी शर्मा ब्राह्मण गोत्र का प्रयोग करने लगता है और उसकी औलादें भी ऐसा ही करती हैं तो फिर आप ये कैसे बता सकते हो कि वो आदमी चंडाल है या फिर ब्राह्मण? आपको सिर्फ और सिर्फ हमारे दावों पर ही भरोसा करना पड़ेगा. कोई भी तथाकथित जातिगत ब्राह्मण यह बात नहीं करता कि वो असल में एक चंडाल के वंश से भी हो सकता है, क्योंकि सिर्फ ब्राहमणहोने से उसे इतने विशेष अधिकार और खास फायदे मिले हुए हैं.

 

मध्य युग के बाहरी हमले

 

पश्चिम और मध्य एशिया के उन्मादी कबीलों के द्वारा हजार साल के हमलों से शहरों के शहरों ने बलात्कार का मंज़र देखा. भारत के इस  सबसे काले और अन्धकार भरे काल में स्त्रियाँ ही हमेशा से हमलों का मुख्य निशाना रही हैं. जब भी कासिम, तैमूर, ग़ज़नी और गौरी जैसे लुटेरों ने हमला किया तो इन्होने ये सुनिश्चित किया कि एक भी घर ऐसा ना हो की जिसकी स्त्रियों का उसके सिपाहियों ने बलात्कार ना किया हो. खुद दिल्ली को ही कई बार लूटा और बर्बाद किया गया.  उत्तर और पश्चमी भारत का मध्य एशिया से आने वाला रास्ता इस अत्याचार को सदियों से झेलता रहा है. भगवान् करे कि ऐसे बुरे दिन किसी भी समाज को ना देखने पड़ें. लेकिन हमारे पूर्वजों ने तो इसके साक्षात् दर्शन किये हैं. अब आप ही बताइए कि ऐसे पीड़ित व्यक्तियों के बच्चों को तथाकथित जातिप्रथा के हिसाब से “जाति से बहिष्कृत” लोगों के सिवाय और क्या नाम दे सकते हैं ? लेकिन तसल्ली कि बात ये है कि ऐसी कोई बात नहीं है.

हमारे ऋषियों को ये पता था कि विषम हालातों में स्त्रियाँ ही ज्यादा असुरक्षित होती हैं. इसीलिए उन्होंने “मनु स्मृति” में कहा कि ” एक स्त्री चाहे कितनी भी पतित हो, अगर उसका पति उत्कृष्ट है तो वो भी उत्कृष्ट बन सकती है. लेकिन पति को हमेशा ही ये सुनिश्चित करना चाहिए कि वो पतित ना हो.

ये ही वो आदेश था जिसने पुरुषों को स्त्रियों की गरिमा की रक्षा करने के लिए प्रेरित किया और  भगवन ना करे, अगर फिर से कुछ ऐसा होता है तो पुरुष फिर से ऐसी स्त्री को अपना लेंगे और अपने एक नए जीवन की शुरुआत करेंगे. विधवाएं दुबारा से शादी करेंगी और बलात्कार की शिकार पीड़ित स्त्रियों का घर बस पायेगा. अगर ऐसा ना हुआ होता तो हमलावरों के कुछ हमलों के बाद से हम “जाति से बहिष्कृत” लोगों का समाज बन चुके होते.

निश्चित तौर से, उसके बाद वाले काल में स्त्री गरिमा और धर्म के नाम पर विधवा और बलात्कार की शिकार स्त्रियों के पास सिर्फ मौत, यातना और वेश्यावृति का ही रास्ता बचा. इस बेवकूफी ने हमें पहले से भी ज्यादा नपुंसक बना दिया.

कुछ जन्म आधारित तथाकथित ऊँची-जातियों के ठेकेदार इस बात को उचित ठहरा सकते हैं कि बलात्कार की शिकार स्त्रियाँ ही “जाति से बहिष्कृत” हो जाती हैं. अगर ऐसा है तो हम सिर्फ इतना ही कहेंगे कि ये विकृति की हद्द है.

बाकी अगले भाग में  http://agniveer.com/5415/reality-of-caste-system-2/ आप पढ़ सकते हैं.

 

This article is also available in English here http://agniveer.com/5277/the-reality-of-caste-system/  

The 4 Vedas Complete (English)

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Comments

  1. Dr Deepak Kumar says

    i have different views on your this study because i am working on the old religious scriptures and according to that study you have no absolute knowledge . Some of your views are good but unauthentic and rest of your views with some political issues issues. So my suggestion for you that first study the authentic books to remove the caste system but do not blame general categories. let me tell you a thing that in some states from a long time the power in the hand of the persons of schedule caste not in the hand of the persons of unreserved category. So analyse all these figures and then first blame such powerful scheduled caste persons that what are they doing for the welfare of own groups and have they provide any facility for the persons of unreserved category? My submission to you that write for the benefit for all to remove such discrimination in a liberal way as a social reformer not as a polluter of harmony between innocent people of the country. So spread the light of education not through vitiated politics in society if you have to ability to understand things in a right manner as you want to do.

  2. pathikarya says

    Dr. Deepak Kumar,

    U say :-
    “I have different views on your this study because i am working on the old religious scriptures and according to that study you have no absolute knowledge”.

    my response :-
    “in the entire reply u have very “conveniently” forgot / skipped to mention the “names” of so called “scriptures” which u claim that u have been studying for quite some time now. secondly, no intelligent person can “assume / presume” that we have not worked our studies. May be, its you who needs to do your “home work” until u tell us the “secret names” of the “scriptures” which have “enlightened you. Kindly note that on the page AGNIVEER only “VEDAS” are considered to be authentic. So, u r advised to quote from VEDAS, if u can, otherwise we would assume that whatever you have stated here is without any basis.”

  3. pathikarya says

    Dr. Deepk u say :-
    “Some of your views are good but unauthentic and rest of your views with some political issues issues”.

    My response :-
    “it is most basic to point out before we take ur comments seriously that which part of the articles appealed to you and which part of the article u failed to understand so that u had to term them ‘unauthentic’. dont make general comments and think beofre u say coz, we assure that we have good reply for all ur questions provided you ask some intelligent question”.

  4. pathikarya says

    Dr. Deepak Kumar says :
    “So my suggestion for you that first study the authentic books to remove the caste system but do not blame general categories”.

    My response :-
    1. “with respect to you Mr. kumar, since u have taken so much pain to express ur opinion on this page, can i request u to be kind enough to share ur “secret world of sacred scriptures” which u call “authentic books” so that the entire world can come to know about the authenticity of those books. even otherwise, u have a right to differ and we respect ur difference of opinion.

    2. Dr. Deepak, try to see the larger picture here. the article focuses on the issue that “1. caste system must be eradicated, 2. caste is man-made and it has no divine sanction, 3. Vedas dont support caste system, 4. there is no way to find out today that since the inception of vedas any person has “retained” his “original” caste”

    NOW YOU ARE welcome to rebut and reply to these points in detail with reference of ur so-called” authentic scriptures.

    i hope n trust that u have understood the purport f the article and i advise u to read this series of 3 article and than form ur opinion otherwise u may be a victim of “premature opinion”.
    may we all work towards eradicating this evil from our society

  5. विनेक दुबे says

    आप ब्राह्मण द्रोही है और सिर्फ़ ब्राह्मणो मे दोष ही देखते है जैसे की अनार्य समाजी दया आनन्द देखता था वो भी जब मरा को अकाल मौत ही मरा सभी ब्राह्मण द्रोही इसी तरह मरा करते है । और रही जन्म से जन्म से जाती की बात तो जन्म्से ही जाती मानी जा सकती है क्युन्कि जो जैसा कर्म करता है उसके वंश मे उसी तरह के अनुवान्शिक गुणो का विकास होता जाता है । आप मनुष्यो एमे जातियो का सारा दोष ब्राहम्णो को देते है । तो फ़िर सभी जीवो मे भी कर्मो आदि की भिन्न्ता के कारण एक ही जीव की अनेक जातिया है जीव तो जीव पेड़-पौधो मे भी अनेक जातिया है । जातिया अनुवान्शिक गुणो के आधार पर व इकसित होती है । और एक बात ब्राह्मण को करोडो वर्षो से है और जिसने भी ब्राह्मणो के अस्तित्व को मिताना चाहा उसका पुरा वंश ही मिट गया है । आप भी प्रयास करके देख लो ।

    • raj.hyd says

      bramhano ka astitv apne ap mit raha hai ! agar brahman achhe hote to ved kyo lupt saman huye hite jara apne ko bhi dekh lijiye kya apne charo ved kabhi oadhe hai ya kitni apki pidhiuya gujar gayi hongi jinhone ved nahi padhe honge ? yahdesh kyo guilam hua ? kya kabhi apna dharm ki pustak me hindu shabd milta hai tab brahmano ne kyo nahi pratikar kiya ? jara pahale purvjo ke nam bhi dekh lijiye aj ,dilip,dashrath, bharat, shatrughan, raavan, vibhishan, meghnath, kumbhkaran, sita, kaikeyi, manthra , kaushalya , yudhishthir bhim arjun balram shakuni duryodhan dhritrashtr, kunti, karn, kans shishupal mira bai surdas, tulsidas, jhansi ki lakshami bai, adi n jane kitne log the jinhone janmana jativachak chinho ka pryog nahi kiya ! lekin aaj ke samay me yah ho raha hai aur ap bhi iska pryog karne se nahi chukte hai ! kya yah jhutha ahankar nahi hai jiske pas pandity ka gyaan n ho vah apne ko kyo pandit kahalaye? aj ke samay me kai laakh brahman parivar me janm lene vale chaprasi , majdoor aur chote mote mehnat vala kary kar rahe hai bahan mayavati ji ke charan chune ke liye anek brahman v vaishy ,aur kshatriy parivar me janm lene vale taraste hai akhir kyo ? aaj agar brahman yogy hote to vah sharab ande mans adi ka sevan nahi karte hai , balki samaj ke any manushyo ko rokte ! samaj me ek prbhavshali bhumika pesh karte jo nahi kar rahe hai ! pandit parivar me janm lekar bhi agar koi brahman vala kary nahi karta hai to doshi kaun hai ? is par atmmanthan ki avshyakta hai ? ary samaj ko gali dene se pandito ka bhala kabhi nahi ho payega ! agar brahman samaj sahi hota to arysamaj ka janm hi nahi ho pata ? ary samaj to svayam maut ke kagar par hai usko gali dekar bhi ap kya karenge ? isliye samaj ke hit me yahi rahega ki brahman samaj svaya apna “kayakalp ” ki disha me badhe ! yogyta kisi ki mohtaj nahi hoti ? jo yogy honge vah svat: age nikal jayenge ? aaj se sankalp lijiye ki kisi bhi brahmanparivar me koi mans ande machli,sharab any koi nashile padarth, sigret bidi tambaku, paan masala adi ka sevan nahi karega 1 mahilao se badchalni nahi karega , jisse samaj ke any manushy apko dekh kar ,apke prerna shrot bane rahe ! kya yahsahas brahman samaj kahalane vala kar sakega ? dalit samaj ko apna bana sakega muslim v isaiyo ko fir se apne vaidik sanatan dharm ki diksha de sakega ?

    • says

      dube ji kya agar apke vanshsaj or aap ke pariwar ke log aap ko nahi batate ki aap brahmin ho to aap kabhi jan pate …. aaj jo bhartiya ,sindh sabhyta ka nash huaa iske jimmedar kon he ? hinduo me jati wad kyu? or kaise aai? vedik kal me to jati ka ullekh nahi he fir aap kon hote ho brahmin or sudra bolne wale apne ko ek surda ki jagah rakho fir samjho

    • vijaysingh says

      Muze sab samaz aaya par ye baat ki parsuram ne dharti se kshatriya gayab kar diye aap baat kar rahe ho ved ki usme muze bata do kaha likha hai ye sab rahi baat ramayan ki vo to mixer hai jisme juth add kar diya ye baat apko bhi pta hai fir apna pakas rakhne ke liye kyu juth ka sahara lete ho mai aapke har kaam ki sarahna karta hn bus just advise ke liye ki puranik baaton ka sahara mat lo

  6. says

    विनेक दुबे जी नमस्कार में आपसे ये पूछना चाहता हूँ की क्या हुआ कश्मीर में पंडितों पर दानवी अत्याचार करने वाल मुल्लों का कुछ नहीं न बल्कि हमारी इन्कमटेक्स की रकम से मौज उड़ाते हैं क्या हुआ उन मुसलमानों का जिन्होंने गांधी के मरने के बाद ४ घंटे में ही पुंडे में रह रहे २००० पंडितों को मर कर चील गिद्धों के खाने के लिए छोड़ दिया खैर चलो छोड़ो वैसे तो में पंडितों की बहुत इज्ज़त करता हूँ पर वो पंडित मुझे किसी घमंडी रावन से कम नहीं लगता जो खुद को ही सबसे बड़ा बताता है ओउर खुद मायावती की सफाई कर्मी की टीम में भारती होकर मेरे पुरे सहर की सफाई करता है वो भी मुह पर रुमाल बाँध के –राम राम

  7. SATYAM says

    महोदय! आप म्लेच्छोँ की बात करते हैँ कि ब्राह्मण द्रोह से उनको क्या हुआ? हम आपसे ये पूछना चाहते हैँ कि क्या भूमि मेँ पतित हुए को भी और अधिक अधःपतन की जरुरत है?
    वैदिक धर्म रुपी राज सिँहासन से पतित हो जाना ही एक म्लेच्छ का विनाश है।
    ये पूछने पर कि क्या द्वापरादि की भाँति कलियुग मेँ भी आप ब्राह्मण द्रोही को शीघ्र ही दण्ड देँगे? तब भगवान कृष्ण ने कहा था कि हे देवि! कलयुग मेँ मैँ समय बन कर आऊँगा! और एक एक अपराधी का हिसाब करुँगा!
    अब जरा गौर करो-
    एक म्लेच्छजीव एक कब्र मेँ युगान्त तक पडा रहे, जिसे युगान्त मेँ प्रलय के समय ही अपनी मुक्ति की आशा हो!
    मित्र! इससे बडा और क्या दण्ड हो सकता है? जरा सोचिये!
    अधिक समाधान के लिये SMSकर सकते हैँ-8439341437

  8. Shailendra Singh says

    कहते है की ज्ञान मनुष्य को वैचारिक प्रकाश देता है जिससे वो सत्य और असत्य का भेद समझ सके सनातन/वैदिक धर्म के पालक जाने अनजाने इस बात को भूल जाते हैं की वेद पुराण गीता रामायण महाभारत उपनिषद किसी भी स्थल पर जन्माधारित जाती व्यवस्था का समर्थन नहीं करता है कर्मो के अधर पर व्यक्ति को देव और असुरो का उल्लेख इन ग्रंथो में मिलता है फिर हम किस पुरातन भेद की बात करते हैं मुझे दुःख होता जब सनातन/वैदिक/हिन्दू आपस में जाती आधारित व्यवस्था के सम्बन्ध में बहस करते समय सामायिक राजनातिक पूर्वाग्रह से ग्रस्त हो जाते हैं जाती व्यवस्था के विरोधियो ने जाती व्यवस्था के आधार पर “लाभ” पाने की अनुग्रह तो हर बार की किन्तु सही मायने में जाती व्यवस्था को ख़त्म करने के लिए कभी नहीं कहा जो की सनातन/वैदिक/हिन्दू धर्म के भविष्य के लिए उत्तम नहीं है

  9. Anshuman Yadav says

    Maine Maunusmriti ko pada …. jab ispe bahot hi jyada bahas hone lagi thi…. padne ke baad se mai Manusmriti ko bahut hi jyada dil se manane laga hooo……… jab meri shadi ki baat mere gharwale aaj ke jamane ke hisab se karne jaaa rahe the…….to Maine mana kar diya…..Maine fir apni pasand ki ladki se ……..(.meri wife ………….
    jo ki janmse Brahman hai aur mai janm se Yadav hoo)……. shadi ki wo bhi pooori Vedic Ree ti se Mandir me ……aur pooori tarah se bina koi len den ke…..aaj hum dono khush hain…… aur mere ghar wale bhi….i proud of our culture……..i proud of OUR MANU….

  10. Anshuman Yadav says

    MAI MANU JI KE BAAD AGAR KISI KO DIL SE FALLOW KARTA HOO TO LOHIA JI KO ……. AGAR KABHI MUJHE MAUKA MILA TO MERE LIYE MANU AUR LOHIA JI KE SIDDHANT HI SARVOPARI RAHENGE MAINE JO HIMMAT DIKHAYEE HAI ………BAHOT SE LOG ISKE KHILAAF THE…..PAR MERE FATHER NE AUR GHAR KE SABHI MEMBER NE AUR MERI WIFE KE GHARWALON NE SUPPORT KIYA……….MAI YAHI CHAHTA HOO KI KASH MUJHE SIRF 100 FRIEND JO KI MERI SOCH KO SUPPORT KARTE HO…………. MUJHE BAS UNKA SAATH CHAHIYE MAI POORI DUNIA KO EK MASSAGE DENA CHAHTA HOO KI WO MANU JI KE BATAYE RASTE PE CHALE TO SARI DUNIA ME KHUSHIAN HI HONGI,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,

  11. Anshuman Yadav says

    MAINE YADAV KUL ME JANM LIYA….PAR APNI SHAAADI MAINE BRAHMAN KUL KI LADKI SE KI HAI………… MERE FAISLE PAR AAP SAB LOG APNA REPLY JARUR KARE …….. I M WAITING……. UR REPLY……

    • raj.hyd says

      apne ek janmana brahman parivar ki kanya se vivah kiya hai ! vah achha hai ya bura, yah to tab batlaya jayega jab aap kya karte hai? aur ap dono ki shiksha kahaan tak hai ! apke saath judav bhi tabhi ho sakega jab apke siddhant kya hai v karm kya hai ? samaj ke liye aap kya karne ki iccha karte hai aur uske liye kitna samay de sakenge ? vaise bhi shri jagjivan raam ji v shri ambedkar ji ne bhi janmana brahman parivar ki kanyao se vivah kiya tha var v vadhu ke gun karm aur svabhav jarur milne chahiye vah ane samuday me ho ya dusre samuday se ho ?

  12. deepak says

    Brahman-jo sanskriti ,dharm,niti ,puja,archana aur desh sheva ko hamesha dekhe.Jo Daan Le Aur Daan de.
    Kshtriya-jo sabki raksha apne pran de kar kre.Jo desh ke Liye Mar Mit sake.
    Vaishya-Jo Hamesha Desh Ki AArthik Sthiti ko sambhale.
    Shudra:-Jo Mehnat Krke Samaj Ko anya de sake,immarat kadi kr sake,desh ka vikas kr sake.

    Agr Vyakti Inme Se Aisa Ho To Kha Pe Jaatipat Hogi.
    Aur Gotra Praanali Vyavahik Sambandho Ke liye he.

  13. santosh says

    Namaste pathikaryji !
    Aap ne jis prakar se answer diye hai ve dekh ke mujhe bahut santosh hai.
    Jab bhi koi jati ki baat karta hai to mera dil jal jata hai aur mujhe samajh nhi aata ki mai inhe kaise samjhau par aapke answer dene ke tarike se mujhe bahut rahat mili hai. Mujhe sach me lagta hai ki mujhe mere asli bhai mil gaye hai. AAP logo ko dekhkar mujhe abhimaan hota hai ki mere bhai itna accha kaam itni acchi tarah se kar rahe hai.
    THANK YOU … :-)

  14. says

    There are hundreds of possibilities when it comes to
    adventure; equally bountiful are the options for relaxation.
    The internet is the best place to start, and if youre reading this, youre on the right
    track. You can travel through the national park having huge areas that consist of lush plants
    and floodplains and thick forests and grass.

  15. jalwan says

    in fact brahmin-brahman-bram-atma-soul-self is every living being human–animal-bird-insect. durwasa hot tempered person one can’t control anger, hates n thinks ill of others has not realised brahman is not brahmin biological father of karna changed form of bhoura entered in chauli of dancing urvasi who rubbed her braws to through out the insect/bhoura/durwasa fallen on her feet, everybody laughed at him seeing his seat vacant. pitiable he cursed her to be donkey. vasisht’s all sons were killed in enemity with vishvamitra vasishat’s son claiming superiority of being brahman boy was eaten by the cursed raja. no one was left except his pregnant daughter-in-law who delivered son named parasara met fisherwoman born vyas from whom- dhritrastra, pandu,vidur. brahman can marry in all varna son brahman wife shall get 4, son from akshtriya wife 3, son from vaish wife 2, son from sudra wife 1share to attract brahmin woman who prefered strong sudra for sexual enjoyment beside brahmins had prevelages in plenty thus always favour castism let the nation go to hell. there were no remarriges for brahmin women as they used to run away or fall in adaltary so widow marriges n intercaste marriges r taking place. there is no truth of family/father name which only known to mother not ahilya but atri cursed indra bore yonis on his bdy y parsuram killed his mother woman need strong partner for sexual satisfaction not mantras prefrably sudras warrior invader resulting birth of chandal castism is nonsence as a sudra having son from brahman wife called chandal half brahman is lower than the son from akshtriya wife.called khatri half akshtriya is this brahmism n castism not folly of manu n brahmans still crying shamelssly inastead of repenting on illwill none is sperior r inferior all strike together like bros for glory n prowess (rig ved 5:60:5) what caste satyakama radheya kauntikeya kartikeya aiyapa ? caste is by charrecter/deeds whether thought speach act not by birth

  16. vijaysingh says

    Muze sab samaz aaya par ye baat ki parsuram ne dharti se kshatriya gayab kar diye aap baat kar rahe ho ved ki usme muze bata do kaha likha hai ye sab rahi baat ramayan ki vo to mixer hai jisme juth add kar diya ye baat apko bhi pta hai fir apna pakas rakhne ke liye kyu juth ka sahara lete ho mai aapke har kaam ki sarahna karta hn bus just advise ke liye ki puranik baaton ka sahara mat lo

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