“वह तेजस्वियों का तेज, बलियों का बल, ज्ञानियों का ज्ञान, मुनियों का तप, कवियों का रस, ऋषियों का गाम्भीर्य और बालक की हंसी में विराजमान है। ऋषि के मन्त्र गान और बालक की निष्कपट हंसी उसे एक जैसे ही प्रिय हैं। वह शब्द नहीं भाव पढता है, होंठ नहीं हृदय देखता है, वह मंदिर में नहीं, मस्जिद में नहीं, प्रेम करने वाले के हृदय में रहता है। बुद्धिमानों की बुद्धियों के लिए वह पहेली है पर एक निष्कपट मासूम को वह सदा उपलब्ध है। वह कुछ अलग ही है। पैसे से वह मिलता नहीं और प्रेम रखने वालों को कभी छोड़ता नहीं। उसे डरने वाले पसंद नहीं, प्रेम करने वाले पसंद हैं। वह ईश्वर है, सबसे अलग पर सबमें रहता है।

यही वैदिक हिन्दू धर्म है। इसी धर्म पर हमें गर्व है।”

टिपण्णी : यहाँ ‘ईश्वर’ से हमारा तात्पर्य है “परम सत्ता ” न कि ‘देवता’ । ‘देवता’ एक अलग शब्द है जिसका अशुद्ध प्रयोग अधिकतर ‘परमसत्ता’ के लिए कर लिया जाता है। हालाँकि ईश्वर भी एक ‘देवता’ है। कोई भी पदार्थ – जड़ व चेतन – जो कि हमारे लिए उपयोगी हो व सहायक हो, उसे ‘देवता’ कहा जाता है । किन्तु उसका अर्थ यह नहीं है कि हर कोई ऐसी सत्ता ईश्वर है और उसकी उपासना की जाये । कोई भ्रम न हो इसलिए इस लेख में हम ‘ईश्वर’ शब्द का प्रयोग करेंगे ।

वह परम पुरुष जो निस्वार्थता का प्रतीक है, जो सारे संसार को नियंत्रण में रखता है , हर जगह मौजूद है और सब देवताओं का भी देवता है , एक मात्र वही सुख देने वाला है । जो उसे नहीं समझते वो दुःख में डूबे रहते हैं, और जो उसे अनुभव कर लेते हैं, मुक्ति सुख को पाते हैं । (ऋग्वेद 1.164.39)

प्रश्न : वेदों में कितने ईश्वर हैं ? हमने सुना है कि वेदों में अनेक ईश्वर हैं ।

उत्तर : आपने गलत स्थानों से सुना है । वेदों में स्पष्ट कहा है कि एक और केवल एक ईश्वर है । और वेद में एक भी ऐसा मंत्र नहीं है जिसका कि यह अर्थ निकाला जा सके कि ईश्वर अनेक हैं । और सिर्फ इतना ही नहीं वेद इस बात का भी खंडन करते हैं कि आपके और ईश्वर के बीच में अभिकर्ता (एजेंट) की तरह काम करने के लिए पैगम्बर, मसीहा या अवतार की जरूरत होती है ।

मोटे तौर पर यदि समानता देखी जाये तो :

इस्लाम में शहादा का जो पहला भाग है उसे लिया जाये : ला इलाहा इल्लल्लाह (सिर्फ और सिर्फ एक अल्लाह के सिवाय कोई और ईश्वर नहीं है ) और दूसरे भाग को छोड़ दिया जाये : मुहम्मदुर रसूलल्लाह (मुहम्मद अल्लाह का पैगम्बर है ), तो यह वैदिक ईश्वर की ही मान्यता के समान है ।

इस्लाम में अल्लाह को छोड़कर और किसी को भी पूजना शिर्क (सबसे बड़ा पाप ) माना जाता है । अगर इसी मान्यता को और आगे देखें और अल्लाह के सिवाय और किसी मुहम्मद या गब्रेइल को मानाने से इंकार कर दें तो आप वेदों के अनुसार महापाप से बच जायेंगे ।

प्रश्न: वेदों में वर्णित विभिन्न देवताओं या ईश्वरों के बारे में आप क्या कहेंगे ? 33 करोड़ देवताओं के बारे में क्या?

उत्तर:

1. जैसा कि पहले भी कहा जा चुका है जो पदार्थ हमारे लिए उपयोगी होते हैं वो देवता कहलाते हैं । लेकिन वेदों में ऐसा कहीं नहीं कहा गया कि हमे उनकी उपासना करनी चाहिए । ईश्वर देवताओं का भी देवता है और इसीलिए वह महादेव कहलाता है , सिर्फ और सिर्फ उसी की ही उपासना करनी चाहिए ।

2. वेदों में 33 कोटि का अर्थ 33 करोड़ नहीं बल्कि 33 प्रकार (संस्कृत में कोटि शब्द का अर्थ प्रकार होता है) के देवता हैं । और ये शतपथ ब्राह्मण में बहुत ही स्पष्टतः वर्णित किये गए हैं, जो कि इस प्रकार है :

8 वसु (पृथ्वी, जल, वायु , अग्नि, आकाश, सूर्य, चन्द्रमा, नक्षत्र ), जिनमे सारा संसार निवास करता है ।

10 जीवनी शक्तियां अर्थात प्राण (प्राण, अपान, व्यान, उदान, समान, नाग, कूर्म, कृकल, देवदत्त , धनञ्जय ), ये तथा 1 जीव ये ग्यारह रूद्र कहलाते हैं

12 आदित्य अर्थात वर्ष के 12 महीने

1 विद्युत् जो कि हमारे लिए अत्यधिक उपयोगी है

1 यज्ञ अर्थात मनुष्यों के द्वारा निरंतर किये जाने वाले निस्वार्थ कर्म ।

शतपथ ब्राहमण के 14 वें कांड के अनुसार इन 33 देवताओं का स्वामी महादेव ही एकमात्र उपासनीय है । 33 देवताओं का विषय अपने आप में ही शोध का विषय है जिसे समझने के लिए सम्यक गहन अध्ययन की आवश्यकता है । लेकिन फिर भी वैदिक शास्त्रों में इतना तो स्पष्ट वर्णित है कि ये देवता ईश्वर नहीं हैं और इसलिए इनकी उपासना नहीं करनी चाहिए ।

3. ईश्वर अनंत गुणों वाला है । अज्ञानी लोग अपनी अज्ञानतावश उसके विभिन्न गुणों को विभिन्न ईश्वर मान लेते हैं ।

4. ऐसी शंकाओं के निराकरण के लिए वेदों में अनेक मंत्र हैं जो ये स्पष्ट करते हैं कि सिर्फ और सिर्फ एक ही ईश्वर है और उसके साथ हमारा सम्पर्क कराने के लिए कोई सहायक, पैगम्बर, मसीहा, अभिकर्ता (एजेंट) नहीं होता है ।

यह सारा संसार एक और मात्र एक ईश्वर से पूर्णतः आच्छादित और नियंत्रित है । इसलिए कभी भी अन्याय से किसी के धन की प्राप्ति की इच्छा नहीं करनी चाहिए अपितु न्यायपूर्ण आचरण के द्वारा ईश्वर के आनंद को भोगना चाहिए । आखिर वही सब सुखों का देने वाला है ।यजुर्वेद 40.1

ऋग्वेद 10.48.1

एक मात्र ईश्वर ही सर्वव्यापक और सारे संसार का नियंता है । वही सब विजयों का दाता और सारे संसार का मूल कारण है । सब जीवों को ईश्वर को ऐसे ही पुकारना चाहिए जैसे एक बच्चा अपने पिता को पुकारता है । वही एक मात्र सब जीवों का पालन पोषण करता और सब सुखों का देने वाला है ।

ऋग्वेद 10.48.5

ईश्वर सारे संसार का प्रकाशक है । वह कभी पराजित नहीं होता और न ही कभी मृत्यु को प्राप्त होता है । वह संसार का बनाने वाला है । सभी जीवों को ज्ञान प्राप्ति के लिए तथा उसके अनुसार कर्म करके सुख की प्राप्ति के लिए प्रयत्न करना चाहिए । उन्हें ईश्वर की मित्रता से कभी अलग नहीं होना चाहिए ।

ऋग्वेद 10.49.1

केवल एक ईश्वर ही सत्य की प्राप्ति के लिए प्रयत्न करने वालों को सत्य ज्ञान का देने वाला है । वही ज्ञान की वृद्धि करने वाला और धार्मिक मनुष्यों को श्रेष्ठ कार्यों में प्रवृत्त करने वाला है । वही एकमात्र इस सारे संसार का रचयिता और नियंता है । इसलिए कभी भी उस एक ईश्वर को छोड़कर और किसी की भी उपासना नहीं करनी चाहिए ।

यजुर्वेद 13.4

सारे संसार का एक और मात्र एक ही निर्माता और नियंता है । एक वही पृथ्वी, आकाश और सूर्यादि लोकों का धारण करने वाला है । वह स्वयं सुखस्वरूप है । एक मात्र वही हमारे लिए उपासनीय है ।

अथर्ववेद 13.4.16-21

वह न दो हैं, न ही तीन, न ही चार, न ही पाँच, न ही छः, न ही सात, न ही आठ, न ही नौ , और न ही दस हैं । इसके विपरीत वह सिर्फ और सिर्फ एक ही है । उसके सिवाय और कोई ईश्वर नहीं है । सब देवता उसमे निवास करते हैं और उसी से नियंत्रित होते हैं । इसलिए केवल उसी की उपासना करनी चाहिए और किसी की नहीं ।

अथर्ववेद 10.7.38

मात्र एक ईश्वर ही सबसे महान है और उपासना करने के योग्य है । वही समस्त ज्ञान और क्रियाओं का आधार है ।

यजुर्वेद 32.11

ईश्वर संसार के कण-कण में व्याप्त है । कोई भी स्थान उससे खाली नहीं है । वह स्वयंभू है और अपने कर्मों को करने के लिए उसे किसी सहायक, पैगम्बर, मसीहा या अवतार की जरुरत नहीं होती । जो जीव उसका अनुभव कर लेते हैं वो उसके बंधनरहित मोक्ष सुख को भोगते हैं ।

वेदों में ऐसे असंख्य मंत्र हैं जो कि एक और मात्र एक ईश्वर का वर्णन करते हैं और हमें अन्य किसी अवतार, पैगम्बर या मसीहा की शरण में जाये बिना सीधे ईश्वर की उपासना का निर्देश देते हैं।

प्रश्न: आप ईश्वर के अस्तित्व को कैसे सिद्ध करते हैं ?

उत्तर: प्रत्यक्ष और अप्रत्यक्ष प्रमाणों के द्वारा ।

प्रश्न: लेकिन ईश्वर में प्रत्यक्ष प्रमाण नहीं घट सकता, तब फिर आप उसके अस्तित्व को कैसे सिद्ध करेंगे ?

उत्तर:

1. प्रमाण का अर्थ होता है ज्ञानेन्द्रियों के द्वारा स्पष्ट रूप से जाना गया निर्भ्रांत ज्ञान । परन्तु यहाँ पर ध्यान देने की बात यह है कि ज्ञानेन्द्रियों से गुणों का प्रत्यक्ष होता है गुणी का नहीं ।

उदाहरण के लिए जब आप इस लेख को पढ़ते हैं तो आपको अग्निवीर के होने का ज्ञान नहीं होता बल्कि पर्दे (कंप्यूटर की स्क्रीन ) पर कुछ आकृतियाँ दिखाई देती हैं जिन्हें आप स्वयं समझकर कुछ अर्थ निकालते हैं । और फिर आप इस निष्कर्ष पर पहुँचते हैं कि इस लेख को लिखने वाला कोई न कोई तो जरूर होगा और फिर आप दावा करते हैं कि आपके पास अग्निवीर के होने का प्रमाण है । यह “अप्रत्यक्ष” प्रमाण है हालाँकि यह “प्रत्यक्ष” प्रतीत होता है ।

ठीक इसी तरह पूरी सृष्टि, जिसे कि हम, उसके गुणों को अपनी ज्ञानेन्द्रियों से ग्रहण करके, अनुभव करते हैं, ईश्वर के अस्तित्व की ओर संकेत करती है ।

2. जब किसी इन्द्रिय गृहीत विषय से हम किसी पदार्थ का सीधा सम्बन्ध जोड़ पाते हैं, तो हम उसके “प्रत्यक्ष प्रमाणित” के होने का दावा करते हैं । उदहारण के लिए जब आप आम खाते हैं तो मिठास का अनुभव करते हैं और उस मिठास को अपने खाए हुए आम से जोड़ देते हैं । यहाँ महत्वपूर्ण यह है कि आप ऐसा प्रत्यक्ष प्रमाण केवल उस इन्द्रिय से जोड़ सकते हैं जिसे कि आपने उस विषय का अनुभव करने के लिए प्रयोग किया है ।

इस प्रकार पूर्वोक्त उदहारण में आम का ‘प्रत्यक्ष’ ‘कान’ से नहीं कर सकते, बल्कि ‘जीभ’, ‘नाक’ या ‘आँखों’ से ही कर सकते हैं ।

हालाँकि समझने में सरलता हो इसलिए हम इसे ‘प्रत्यक्ष प्रमाण’ कह रहे हैं लेकिन वास्तव में यह भी ‘अप्रत्यक्ष प्रमाण’ ही है।

अब क्यूंकि ईश्वर सबसे सूक्ष्म पदार्थ है इसलिए स्थूल इन्द्रियों ‘आँख’, ‘नाक’, ‘कान’, ‘जीभ’ और ‘त्वचा’ से उसका प्रत्यक्ष असंभव है । जैसे की हम सर्वोच्च क्षमता वाले सूक्ष्मदर्शी के होते हुए भी अत्यंत सूक्ष्म कणों को नहीं देख सकते, अत्यंत लघु तथा अत्यंत उच्च आवृत्ति की तरंगों को नहीं सुन सकते, प्रत्येक अणु के स्पर्श का अनुभव नहीं कर सकते ।

दुसरे शब्दों में कहें तो जैसे हम कानों से आम का प्रत्यक्ष नहीं कर सकते और यहाँ तक की किसी भी इन्द्रिय से अत्यंत सूक्ष्म कणों को नहीं अनुभव कर सकते, ठीक ऐसे ही ईश्वर को भी क्सिसिं स्थूल और क्षुद्र इन्द्रियों से प्रत्यक्ष करना असंभव है ।

3. एक मात्र इन्द्रिय जिससे ईश्वर का अनुभव होता है वह है मन । जब मन पूर्णतः नियंत्रण में होता है और किसी भी प्रकार के अनैच्छिक विघ्नों (जैसे कि हर समय मन में आने वाले विभिन्न प्रकार के विचार ) से दूर होता है और जब अध्ययन और अभ्यास के द्वारा ईश्वर के गुणों का सम्यक ज्ञान हो जाता है तब बुद्धि से ईश्वर का प्रत्यक्ष ज्ञान ठीक उसी प्रकार होता है जैसे कि आम का अनुभव उसके स्वाद से ।

यही जीवन का लक्ष्य है और इसी के लिए योगी विभिन्न प्रकार के उपायों से मन को नियंत्रण में करने का प्रयास करता है । इन उपायों में से कुछ इस प्रकार हैं: अहिंसा, सत्य की खोज, सद्भाव, सबके सुख के लिए प्रयास, उच्च चरित्र, अन्याय के विरुद्ध लड़ना, एकता के लिए प्रयास इत्यादि ।

4. एक प्रकार से देखा जाये तो अपने दैनिक जीवन में भी हमे इश्वर के होने के प्रत्यक्ष संकेत मिलते हैं । जब भी कभी हम चोरी, क्रूरता धोखा आदि किसी बुरे काम को करने की शुरुआत करते हैं तभी हमे अपने अन्दर से एक भय, लज्जा या शंका के रूप में एक अनुभूति होती है । और जब हम दूसरों की सहायता करना आदि शुभ कर्म करते हैं तब निर्भयता, आनंद , संतोष, और उत्साह का अनुभव, ये सब ईश्वर के होने का प्रत्यक्ष संकेत है ।
यह ‘अंतरात्मा की आवाज़’ ईश्वर की ओर से है । अधिकतर हम अपनी मूर्खतापूर्ण प्रवृत्तियों के छद्म आनंददायी गीतों के शोर से दबाकर इस आवाज़ को सुनने की क्षमता को कम कर देते हैं । लेकिन जब कभी हम अपेक्षाकृत शांत होते हैं तब हम सभी इस ‘अंतरात्मा की आवाज़’ की तीव्रता को बढ़ा हुआ अनुभव करते हैं ।

5. और जब आत्मा अपने आप को इन मानसिक विक्षोभों/हलचलों/तरंगों से छुड़ाकर इन छाद्मआनंददायी गीतों की दुनिया से दूर कर लेता है तब वह स्वयं तथा ईश्वर दोनों का प्रत्यक्ष अनुभव कर पाता है ।

इस प्रकार प्रत्यक्ष तथा अप्रत्यक्ष दोनों प्रकार के प्रमाणों से ईश्वर के होने का उतना ही स्पष्ट अनुभव होता है जितना कि उन सब पदार्थों के होने का जिन्हें की हम स्थूल इन्द्रियों के द्वारा अनुभव करते हैं ।

प्रश्न- ईश्वर कहाँ रहता है ?

उत्तर-

(1) ईश्वर सर्वव्यापक है अर्थात सब जगह रहता है । यदि वह किसी विशेष स्थान जैसे किसी आसमान या किसी विशेष सिंहासन पर रहता तो फिर वह सर्वज्ञ, सर्वशक्तिमान, सबका उत्पादक, नियंत्रक और विनाश करने वाला नहीं हो सकता । आप जिस स्थान पर नहीं हैं उस स्थान पर आप कोई भी क्रिया कैसे कर सकते हैं ?

(2) यदि आप यह कहते हैं कि ईश्वर एक ही स्थान पर रहकर सारे संसार को इसी प्रकार नियंत्रण में रखता है जैसे कि सूर्य आकाश में एक ही स्थान पर रहकर सारे संसार को प्रकाशित करता है या जैसे हम रिमोट कण्ट्रोल का प्रयोग टी वी देखने के लिए करते हैं, तो आपका यह तर्क अनुपयुक्त है । क्यूंकि सूर्य का पृथ्वी को प्रकाशित करना और रिमोट कण्ट्रोल से टी वी चलना ये दोनों ही तरंगो के आकाश में संचरण के द्वारा होते हैं । हम उसे रिमोट कण्ट्रोल सिर्फ इसलिए कहते हैं क्यूंकि हम उन तरंगों को देख नहीं सकते। इसलिए ईश्वर का किसी भी चीज को नियंत्रित करना खुद ये सिद्ध करता है कि ईश्वर उस चीज में है ।

(3) यदि ईश्वर सर्वशक्तिमान है तो वह स्वयं को छोटी सी जगह में करके क्यूँ रखेगा ? तो ईश्वर जायेगा । ईसाई कहते हैं कि गॉड चौथे आसमान है और कहते हैं कि अल्लाह पर है । और उनके अनुयायी अपने आपको सही करने के लिए आपस में लड़ते रहते हैं । क्या इसका मतलब ये न समझा जाये कि अल्लाह और गॉड अलग अलग आसमानों में इसलिए रहते हैं कि कहीं वो भी अपने क्रोधी अनुयायियों की न लग जाएँ ?

वास्तव में ये एकदम बच्चों जैसी बातें हैं । जब ईश्वर सर्वशक्तिमान और सरे संसार को नियंत्रण में रखता है तो फिर कोई कारण नहीं है कि वह खुद को किसी छोटी सी जगह में सीमित कर के रखे । और अगर ऐसा है तो फिर उसे सर्वशक्तिमान नहीं कहा जा सकता ।

प्रश्न- तो क्या इसका यह अर्थ हुआ कि ईश्वर अपवित्र वस्तुओं जैसे कि मदिरा, मल और मूत्र में भी रहता है ?

उत्तर-

(1) पूरा संसार ईश्वर में है । क्यूंकि ईश्वर इन सब के बाहर भी है लेकिन ईश्वर के बाहर कुछ नहीं है । इसलिए संसार में सब कुछ ईश्वर से अभिव्याप्त है । मोटे तौर पर अगर इसकी समानता देखी जाये तो हम सब ईश्वर के अन्दर वैसे ही हैं जैसे कि जल से भरे बर्तन में कपडा । उस कपडे के अन्दर बाहर हर ओर जल ही जल है । उस कपडे का कोई भाग ऐसा नहीं है जो जल से भीगा न हो लेकिन उस कपडे के बाहर भी हर ओर जल ही जल है ।

(2) कोई वस्तु हमारे लिए स्वच्छ या अस्वच्छ है यह इस बात पर निर्भर करता है कि हमारे लिए उस वस्तु की क्या उपयोगिता है । जिस आम का स्वाद हमको इतना प्रिय होता है वह जिन परमाणुओं से बनता है वही परमाणु जब अलग अलग हो जाते हैं और अन्य पदार्थों के साथ क्रिया करके मल का रूप ले लेते हैं तो वही हमारे लिए अपवित्र हो जाते हैं । वास्तव में ये सब प्राकृतिक कणों के योग से बने भिन्न भिन्न सम्मिश्रण ही हैं । हम सब का इस संसार में होने का कुछ उद्देश्य है, हम हर चीज को उस उद्देश्य की तरफ़ बढ़ने की दृष्टि से देखते हैं और कुछ को स्वीकार करते हैं जो कि उस उद्देश्य के अनुकूल हों और बाकि सब को छोड़ते चले जाते हैं । जो हम छोड़ते हैं वो सब हमारे लिए अपवित्र / बेकार होता है, और जो हम स्वीकार करते हैं मात्र वही हमारे लिए उपयोगी होता है । लेकिन ईश्वर के लिए इस संसार का ऐसा कोई उपयोग नहीं है, इसलिए उसके लिए कुछ अपवित्र नहीं है । इसके ठीक विपरीत उसका प्रयोजन हम सबको न्यायपूर्वक मुक्ति सुख का देना है, इसलिए पूरी सृष्टि में कोई भी वस्तु उसके लिए अस्पृश्य नहीं है ।

(3) दूसरी तरह से अगर समानता देखी जाये तो ईश्वर कोई ऐसे समाजसेवी की तरह नहीं है जो कि अपने वालानुकूलित कार्यालय में बैठकर योजनायें बनाना तो पसंद करता है लेकिन उन मलिन बस्तियों में जाने से गुरेज करता है जहाँ कि समाज-सेवा की वास्तविक आवश्यकता है । इसके विपरीत ईश्वर संसार के सबसे अपवित्र पदार्थ में भी रहकर उसे हमारे लाभ के लिए नियंत्रित करता है ।

(4) क्यूंकि एक मात्र वही शुद्ध्स्वरूप है इसलिए उसके हर वस्तु में होने और हर वस्तु के उसमे होने के बावजूद भी वह सबसे भिन्न और पृथक है ।

प्रश्न- क्या ईश्वर दयालु और न्यायकारी है ?

उत्तर- हाँ! वह दया और न्याय का साक्षात् उदहारण है ।

प्रश्न- लेकिन यह दोनों गुण तो एक दुसरे के विपरीत हैं । दया का अर्थ है किसी का अपराध क्षमा कर देना और न्याय का अर्थ है अपराधी को दंड देना । ये दोनों गुण एक साथ कैसे हो सकते हैं ?

उत्तर- दया और न्याय वास्तव में एक ही हैं । क्यूंकि दोनों का उद्देश्य एक ही है ।

(1) दया का अर्थ अपराधी को क्षमा कर देना नहीं है । क्यूंकि अगर ऐसा हो तो बहुत से निर्दोष लोगों के प्रति अत्याचार होगा । इसलिए जब तक अपराधी के साथ न्याय नहीं किया जायेगा तब तक निर्दोष लोगों पर दया नहीं हो सकती । और अपराधी को क्षमा करना, यह अपराधी के प्रति भी दया नहीं होगी क्यूंकि ऐसा करने से उसे आगे अपराध करने के लिए बढ़ावा मिलेगा। उदाहरण के लिए, अगर एक डाकू को बिना दंड दिए छोड़ दिया जाये तो वह अनेक निर्दोषों को हानि पहुंचाएगा । किन्तु यदि उसे कारगर में रखा जाये तो इससे वह न सिर्फ दूसरों को हानि पहुँचाने से रुकेगा बल्कि उसे खुद को सुधारने का एक मौका मिलेगा और वह आगे अपराध नहीं कर पायेगा । इसलिए न्याय में ही सबके प्रति दया निहित है ।

(2) वास्तव में दया इश्वर का उद्देश्य है और न्याय उस उद्देश्य को पूरा करने का तरीका है । जब इश्वर किसी अपराधी को दंड देता है तो वास्तव में वह उसे आगे और अपराध करने से रोकता है । और निर्दोषों की उनके अत्याचारों से रक्षा करता है । इस प्रकार न्याय का मुख्य उद्देश्य सबके प्रति दया करना है ।

(3) वेदों के अनुसार और जो कुछ हम संसार में देखते हैं उसके अनुसार भी दुःख का मूल कारण अज्ञान है, यही अज्ञान दुष्कर्मों को जन्म देता है जिन्हें की हम अपराध कहते हैं । इस्ल्ये जब कोई जीव दुष्कर्म करता है तो ईश्वर उसकी दुष्कर्म करने की स्वतंत्रता को बाधित कर देता है और उसे अपनी अज्ञानता और दुखों को दूर करने का मौका देता है ।

(4) माफ़ी मांग लेने भर से ईश्वर अपराधों को क्षमा नहीं कर देता । पापों और अपराधों का मूल कारण अज्ञानता का होना है और जब तक वो नहीं मिट जाता तब तक जीव कई जन्मों तक निरंतर अपने अच्छे और बुरे कर्मों के फल को भोगता रहता है । और इस सब न्याय का उद्देश्य जीव के प्रति दया करना है जिससे की वह परम आनंद को भोग सके ।

प्रश्न- तो क्या इसका अर्थ ये है कि ईश्वर मेरे पापों को कभी भी क्षमा नहीं करेगा ? इससे तो इस्लाम और ईसाइयत अच्छे हैं। वहां अगर मैं अपने अपराध क़ुबूल कर लूं या माफ़ी मांग लूं तो मेरे पिछले सारे गुनाहों के दस्तावेज नष्ट कर दिए जाते हैं और मुझे नए सिरे से जीने का अवसर मिल जाता है ।

उत्तर –

(1) ईश्वर तुम्हारे पापों को वास्तव में क्षमा तो करता है । ईश्वर की माफ़ी तुम्हारे कर्मों का न्यायपूर्वक फल देने में ही निहित है न कि पिछले कर्मों के दस्तावेज नष्ट कर देने में ।

(2) अगर वह तुम्हारे गुनाहों के दस्तावेज नष्ट कर दे तो यह उसका तुम्हारे प्रति घोर अन्याय और क्रूरता होगी । यह ऐसा ही होगा जैसे कि तुम्हे तुम्हारी वर्तमान कक्षा की योग्यता प्राप्त किये बिना ही अगली कक्षा के लिए प्रोन्नत कर देना । ऐसा करके वह तुमसे जुड़े हुए अन्य व्यक्तियों के साथ भी अन्याय करेगा।

(3) क्षमा करने का अर्थ होता है एक नया अवसर देना न कि 100% अंक दे देना जबकि आप 0 की पात्रता रखते हों । और ईश्वर यही करता है । और याद रखिये कि योग्यता का बढ़ना कोई एक पल में नहीं हो जाता, और न ही माफ़ी मांग लेने से योग्यता बढ़ जाती है । इसके लिए लम्बे समय तक समर्पण के साथ अभ्यास करना पड़ता है । केवल प्रमादी व्यक्ति ही बिना पूरा अध्ययन किये 100% अंक लेने के तरीके खोजते हैं ।

(4) यह दुर्भाग्य की बात है कि जो लोग ईश्वर से अपराध क्षमा कराने के नाम पर लोगों को अपने मत/ सम्प्रदायों की ओर आकर्षित करते हैं वो खुद को और दूसरों को बेवकूफ बना रहे हैं। मान लीजिये किसी को मधुमेह की समस्या है क्या वह माफ़ी मांगने से ठीक हो सकती है ? जब एक शारीरिक समस्या का उपचार करने के लिए माफ़ी मांगना पर्याप्त नहीं है तो फिर मन जो कि मनुष्य को ज्ञात संसार का सबसे जटिल तंत्र है उसका उपचार मात्र एक माफ़ी मांग लेने से कैसे हो सकता है ।

(5) वास्तव में इनके सिद्धांतों में एक स्पष्ट त्रुटि/दोष है और वो ये है कि ये सिर्फ एक जन्म में विश्वास रखते हैं पुनर्जन्म में नहीं । इसलिए वो लोगों को आकर्षित करने के लिए ईश्वर तक पहुँचने के झूठे तरीके गढ़ना चाहते हैं। और अगर कोई उनकी बात न माने तो उसे नरक की झूठी कहानियां सुनाकर डराते हैं। अपने लेख Is God testing us? के द्वारा हम पहले ही एक जन्म वाली अवधारणा की खामियों को उजागर कर चुके हैं ।

(6) वैदिक दर्शन अधिक सहज, वास्तविकता के अनुरूप और तार्किक है । उसमे न कोई नरक है जहाँ माँ के समान प्रेम करने वाला ईश्वर आपको हमेशा के लिए आग में जलने के लिए डाल देगा और न ही वो आपको अपने प्रयासों के द्वारा अपनी योग्यता बढाने और अपनी योग्यता के अनुरूप उपलब्धियां प्राप्त करने के अवसरों से वंचित करेगा । आप खुद ही देह्खिये की क्या अधिक संतोषप्रद होगा:
(अ) आपको सर्वोच्च अंक दिलाने वाला झूठा अंकपत्र, जबकि आप जानते हैं की वास्तव में आपको 0 प्राप्त हुआ है ।
(ब) दिन रात कठिन परिश्रम करके प्राप्त किये गए सर्वोच्च अंक, जबकि आप जानते हैं कि आपने विषय में विशेषज्ञता अर्जित करने के लिए अपनी ओर से अधिकतम प्रयास किया ।

इसलिए वेदों में सफलता के लिए कोई आसान या कठिन रास्ते नहीं हैं वहां तो केवल एक ही सही मार्ग है ! और सफलता उन सबसे अधिक संतोष दायक है जो कि इन छद्म आसान रास्तों पर चलने से प्राप्त होता हुआ प्रतीत होता है ।

The-Vedic-God

प्रश्न- ईश्वर साकार है या निराकार ?
उत्तर- वेदों के अनुसार और सामान्य समझ के आधार पर भी ईश्वर निराकार है ।

(1) अगर वो साकार है तो हर जगह नहीं हो सकता । क्यूंकि आकार वाली वस्तु की अपनी कोई न कोई तो परिसीमा होती है । इसलिए अगर वो साकार होगा तो वह उस परिसीमा के बाहर नहीं होगा ।

(2) हम ईश्वर के आकार को देख पायें यह यह तभी संभव है जब कि वह स्थूल हो। क्यूँकि प्रकाश को परावर्तित करने वाले पदार्थों से सूक्ष्म पदार्थों को देखा नहीं जा सकता । किन्तु वेदों में ईश्वर को स्पष्ट रूप से सूक्ष्मतम, छिद्रों से रहित तथा एकरस कहा है (यजुर्वेद 40.8) । इसलिए ईश्वर साकार नहीं हो सकता ।

(3) ईश्वर साकार है तो इसका अर्थ है कि उसका आकार किसी ने बनाया है । लेकिन ये कैसे हो सकता है क्यूंकि उसीने तो सबको बनाया है तो उससे पहले तो कोई था ही नहीं तो फिर उसे कोई कैसे बना सकता है । और अगर ये कहें कि उसने खुद अपना आकार बनाया तो इसका अर्थ हुआ कि उसके पहले वो निराकार था ।

(4) और अगर आप ये कहें की ईश्वर साकार और निराकार दोनों है तो यह तो कैसे भी संभव नहीं है क्यूंकि ये दोनों गुण एक ही पदार्थ में नहीं हो सकते ।

(5) और अगर आप ये कहें कि ईश्वर समय समय पर दिव्य रूप धारण करता है तो कृपया ये भी बता दें कि किसका दिव्य रूप लेता है क्यूंकि अगर कहें कि ईश्वर मनुष्य का दिव्य रूप धारण करता है तो आप ईश्वरीय परमाणु और अनीश्वरीय परमाणु की सीमा कैसे निर्धारित करेंगे ? और क्यूंकि ईश्वर सर्वत्र एकरस (एक समान ) है तो फिर हम मानवीय- ईश्वर और शेष संसार में अंतर कैसे करें ? और यदि हर जगह एक ही ईश्वर है तो फिर हम सीमा कैसे देख रहे हैं ?

(6) वास्तव में जो मानव शरीर हम देख रहे हैं ये द्रव्य और ऊर्जा का शेष संसार के साथ निरंतर स्थानान्तरण है । किसी परमाणु विशेष के लिए यह निश्चित रूप से नहीं कहा जा सकता कि ये मानव शरीर का है या शेष संसार का । इसलिए मानवीय-ईश्वर के शरीर तक को अलग नहीं किया जा सकता। उदहारण के लिए, क्या उसके थूक, मल, मूत्र, पसीना आदि भी दिव्य होंगे ?

(7) वेदों में कहीं पर भी साकार ईश्वर की अवधारणा नहीं है । और फिर ऐसा कोई काम नहीं है जो की ईश्वर बिना शरीर के न कर सके और जिसके लिए कि उसे शरीर में आने की आवश्यकता हो ।

(8) जिन्हें हम ईश्वर के दिव्य रूप मानते हैं जैसे कि राम और कृष्ण, वास्तव में वो दिव्य प्रेरणा से कर्म करने वाले थे । याद कीजिये कि हमने ‘अंतरात्मा की आवाज़’ के बारे में बात की थी । ये महापुरुष ईश्वर भक्ति तथा पवित्र मन का साक्षात् उदहारण थे । इसलिए साधारण व्यक्तियों की दृष्टि में वे स्वयं ही ईश्वर थे । किन्तु वेद, ईश्वर के अतिरिक्त अन्य किसी की भी उपासना का निषेध करते हैं । इसलिए बजाय उनकी पूजा करने के, हमे अपने जीवन में उनके आदर्शों का अनुकरण करना चाहिए, यही उनके प्रति हमारी सच्ची श्रद्धांजलि होगी । यह महापुरुषों का अनुकरण वेदानुकूल है और इसका विवरण The power of Now! – Know Vedas. में दिया गया है ।

(9) यदि ईश्वर अवतार लेता और उन अवतारों की पूजा से मुक्ति हो जाती तो वेदों में इस विषय का विस्तृत वर्णन अवश्य ही होता। लेकिन वेद में ऐसे किसी विषय का संकेत तक नहीं है ।

प्रश्न- तो इसका यह अर्थ है की राम, कृष्ण, दुर्गा और लक्ष्मी के मंदिर और इनकी पूजा करना सब गलत है ?
उत्तर- इसे समझने के लिए उदहारण के तौर पर किसी दूर दराज के गाँव में रहने वाली एक माता को देखिये जिसके बेटे को सांप ने काट लिया है। वो अपने बच्चे की जान बचाने के लिए झाड़-फूँक कराने के लिए किसी पास ही के के पास जाती है । आप उसे सही कहेंगे या गलत ? आज के समय में अधिकतर ईश्वर भक्त चाहे वो हिन्दू हों, मुस्लिम हों , ईसाई हों या फिर कोई भी हों, इसी प्रकार के हैं । उनकी भावनाएं सच्ची हैं और सम्मान के योग्य हैं । लेकिन अज्ञानतावश वो ईश्वर भक्ति का गलत रास्ता चुन लेते हैं । इसका स्पष्ट पता इस बात से ही चल जाता है कि यहाँ तक कि वेदों के बारे में जानने वाले व्यक्ति ही विरले हैं । फिर भी कम से कम हिन्दू तो हैं ही जो कि इनको सर्वोच्च मानते हैं ।

अपने पूर्ववर्ती महापुरुषों के प्रति हमारी सच्ची श्रद्धांजलि यही हो सकती हैं कि हम उनके गुणों को आत्मसात करके उनके अनुसार शुभ कर्म करें । उदहारण के लिए, हम सब ओर फैले भ्रष्टाचार, आतंकवाद और अनैतिकता आदि रावणों को देखते हैं । यदि हम न्यायपूर्वक इनका प्रतिकार करने के लिए एकजुट हो जाएँ तो यह श्री राम का सच्चा गुणगान होगा । इसी प्रकार श्री कृष्णा, दुर्गा, हनुमान आदि के लिए भी । मैं जीवन भर श्री हनुमान जी का प्रशंसक रहा हूँ और उनका गुणगान करने का मेरा तरीका ये है कि मैं अपना उच्च नैतिक चरित्र बनाये रखूँ और अपने शरीर को स्वस्थ और शक्तिशाली बनाने के लिए प्रयास करूँ जिससे कि मैं समाज की सेवा कर सकूं । हनुमान जी की पूजा करने का मतलब ही क्या है अगर हमारा शरीर कमजोर हो और पेट ख़राब और फिर भी हम उसमे भारी लड्डू भरते जाएँ ! हालाँकि पूजा करने के इन सब तरीकोण के पीछे जो उद्देश्य है वह वास्तव में सरहानीय हैं और हम किसी भी संप्रदाय के भक्तों की पवित्र भावनाओं पर नतमस्तक हैं, किन्तु हमारी कामना है कि सब ईश्वर भक्त पूजा करने का एक ही तरीका अपना लें वही जो कि श्री राम और श्री कृष्ण ने अपने जीवन में अपनाया था ।

प्रश्न- क्या ईश्वर सर्वशक्तिमान है ?
उत्तर- हाँ, वह सर्वशक्तिमान है । लेकिन इसका यह अर्थ नहीं है कि वह जो चाहे वो कर सकता है । अपनी इच्छा से कुछ भी करते जाना तो अनुशासनहीनता का संकेत है । इसके विपरीत ईश्वर तो सबसे अधिक अनुशासनपूर्ण है । सर्वशक्तिमत्ता का अर्थ यह है की उसे अपने कर्तव्य कर्मों – सृष्टि की उतपत्ति, स्थिति और प्रलय , को करने के लिए अन्य किसी की सहायता की आवश्यकता नहीं होती । वह स्वयं ही अपने सब कर्त्तव्य कर्मों को करने में समर्थ है ।

लेकिन वह केवल अपने कर्तव्य कर्मों को ही करता है । उदाहरण के लिए, वह दूसरा ईश्वर बनाकर खुद को नहीं मार सकता । वह खुद को मूर्ख नहीं बना सकता । वह चोरी, डकैती अदि नहीं कर सकता ।

प्रश्न- क्या ईश्वर का कोई आदि (आरम्भ) है ?

उत्तर- ईश्वर का न कोई आदि है और न ही कोई अंत । वह हमेशा से था , है और हमेशा रहेगा । और उसके सभी गुण हमेशा एक समान रहते हैं ।
जीव और प्रकृति अन्य दो अनादि , अनंत वस्तुएं हैं ।

प्रश्न- ईश्वर क्या चाहता है ?

उत्तर- ईश्वर सब जीवों के लिए सुख चाहता है और वह चाहता है कि जीव उस सुख के लिए प्रयास करके अपनी योग्यता के आधार पर उसे प्राप्त करें ।

प्रश्न- क्या हमें ईश्वर की उपासना करनी चाहिए ? और क्यूँ ? आखिर वो हमे कभी माफ़ नहीं करता !

उत्तर- हाँ हमें ईश्वर की उपासना करनी चाहिए और एकमात्र वही उपासनीय है । ये ठीक है की ईश्वर की उपासना करने से आपको कोई उत्तीर्णता का प्रमाणपत्र यूं ही नहीं मिल जायेगा यदि आप वास्तव में अनुत्तीर्ण हुए हैं । केवल आलसी और धोखेबाज लोग ही सफलता के लिये ऐसे अनैतिक उपायों का सहारा लेते हैं ।

ईश्वर की स्तुति के लाभ और ही हैं :

अ) ईश्वर की स्तुति करने से हम उसे और उसकी रची सृष्टि को अधिक अच्छे से समझ पाते हैं ।
ब) ईश्वर की स्तुति करने से हम उसके गुणों को अधिक अच्छे से समझकर अपने जीवन में धारण कर पाते हैं।
स) ईश्वर की स्तुति करने से हम ‘अन्तरात्मा की आवाज़’ को अधिक अच्छे से सुन पाते हैं और उसका निरंतर तथा स्पष्ट मार्गदर्शन प्राप्त कर पाते हैं ।
द) ईश्वर की स्तुति करने से हमारी अविद्या का नाश होता है, शक्ति प्राप्त होती है और हम जीवन की कठिनतम चुनौतियों का सामना दृढ आत्मविश्वास के साथ सहजता से कर पाते हैं ।
इ ) अंततः हम अविद्या को पूर्ण रूप से हटाने में सक्षम हो जाते हैं और मुक्ति के परम आनंद को प्राप्त करते हैं ।

यहाँ यह ध्यान देने योग्य है कि स्तुति का अर्थ मंत्रोच्चारण या मन को विचारशून्य करना नहीं है । यह तो कर्म, ज्ञान और उपासना के द्वारा ज्ञान को आत्मसात करने की क्रियात्मक रीति है । इसे हम बाद में विस्तारपूर्वक बताएँगे । अभी के लिए आप How to worship? का अध्ययन कर सकते हैं ।

प्रश्न- जब ईश्वर के अंग और ज्ञानेन्द्रियाँ नहीं है तो फिर वो अपने कर्मों को कैसे करता है ?

उत्तर- उसकी क्रियाएं जो कि अत्यंत सूक्ष्म स्तर पर होती हैं उन्हें करने के लिए उसे इन्द्रियों की आवश्यकता नहीं होती । वह अपनी स्वाभाविक शक्ति से उन्हें करता है । वह बिना आँखों के देखता है क्यूंकि उसकी आँखें आकाश में प्रत्येक बिंदु पर हैं, उसके चरण नहीं है फिर भी वह सबसे तेज है, उसके कान नहीं हैं फिर भी वह सब कुछ सुनता है । वह सब कुछ जानता है फिर भी सबके पूर्ण प्रज्ञान से परे है । यह श्लोक उपनिषद् में आता है । ईशोपनिषद भी इसका विस्तृत वर्णन करता है ।

प्रश्न- क्या ईश्वर को सीमायें ज्ञात हैं ?
उत्तर- ईश्वर सर्वज्ञ है। इसका अर्थ है कि जो कुछ भी सत्य है वह सब जानता है । क्यूंकि ईश्वर असीमित है इसलिए वह जानता है की वह असीमित है । यदि ईश्वर अपनी सीमाओं को जानने का प्रयास करेगा जो कि हैं ही नहीं तब तो वो अज्ञानी हो जायेगा ।

प्रश्न- ईश्वर सगुण है या निर्गुण ?
उत्तर- दोनों। यदि ईश्वर के दया, न्याय, उत्पत्ति, स्थिति आदि गुणों की बात करें तो वह सगुण है । लेकिन यदि उन गुणों की बात करें जो कि उसमे नहीं है जैसे कि मूर्खता, क्रोध, छल , जन्म, मृत्यु आदि, तो ईश्वर निर्गुण है । यह अंतर केवल शब्दगत है ।

प्रश्न- कृपया ईश्वर के मुख्य गुणों को संक्षेप में बताएं ।
उत्तर- उसके गुण अनंत हैं और शब्दों में वर्णन नहीं किये जा सकते । फिर भी कुछ मुख्या गुण इस प्रकार हैं :

1. उसका अस्तित्व है ।
2. वह चेतन है ।
3. वह सब सुखों और आनंद का स्रोत है ।
4. वह निराकार है ।
5. वह अपरिवर्तनीय है ।
6. वह सर्वशक्तिमान है ।
7. वह न्यायकारी है ।
8. वह दयालु है ।
9. वह अजन्मा है ।
10.वह कभी मृत्यु को प्राप्त नहीं होता ।
11. वह अनंत है ।
12. वह सर्वव्यापक है ।
13. वह सब से रहित है ।
14. उसका देश अथवा काल की अपेक्षा से कोई आदि अथवा अंत नहीं है ।
15. वह अनुपम है ।
16. वह संपूर्ण सृष्टि का पालन करता है ।
17. वह सृष्टि की उत्पत्ति करता है ।
18. वह सब कुछ जानता है।
19. उसका कभी क्षय नहीं होता, वह सदैव परिपूर्ण है ।
20. उसको किसी का भय नहीं है ।
21. वह शुद्धस्वरूप है ।
22. उसके कोई अभिकर्ता (एजेंट) नहीं है । उसका सभी जीवों के साथ सीधा सम्बन्ध है।

एक मात्र वही उपासना करने के योग्य है, अन्य किसी की सहायता के बिना।

यही एक मात्र विपत्तियों को दूर करने और सुख को पाने का पथ है ।

This translation has been contributed by one of our sisters. Original post in English is available at http://agniveer.com/vedic-god/. This post is also available in Gujarati at http://agniveer.com/the-vedic-god-gu/*

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265 COMMENTS

  1. shri krishan hi puran parmatmaa par barhmaa hai wa hi sab kuj hai aap bramaavarvat puran pada main kuj nahi kaho ga yeh hi nirakar ishwar sawroop hai inmaa vishu shiv barhmaa main kio anter nahi hai inhona nirakar sa akar roop parpat kiya taki ki hum inko jaan sakaa yaha tak ki ya hamar beech bi aata hai jab bi darti par julam hota hai yah hi jyoti hai main kio tark nahi karna chata hindu darm sab sa pahala darm hai is main hi sara darmo ki utpati hui hai jaisa sankrit si sari lang nikli hai

  2. Hi
    Main yeh janna chahta hu ki jab shrishti ki rachna Brahma ne ki hai to sabhi devi devta rishi muni yogi aadi keval Bharat me hi kyu hue. Ye Islam air Christian dharm aadi videsh kyu hue.
    Please koi mujhe reply de

    • भारत ऐसा अविनाशी खंड है , जहाँ स्वयं भगवान का अवतरण होता है ,गर्भ से जन्म नही होता है या न कोई अवतार लेते है बल्कि मनुष्य तन का आधार लेते है जिसे भगवान स्वयं ब्रम्हा नाम रखते है , कलियुग में पतित आत्माओं को परमात्मा दिव्य ज्ञान ( श्रीमत ) ब्रम्हा तन का आधार ( माध्यम ) ले के देते है , कलियुग के अंत में भगवान की श्रीमत द्वारा आत्माओं मे फिरसे अच्छे संस्कार भरे जाते है ,जो आत्माए योगबल से फिर सारी शक्तियां प्राप्त कर ( दिव्य गुणों को धारण कर ) फ़िर से सतयुग मे दिव्यात्मा ( देवता ) के रूप में जन्म लेते है , सतयुग को कहा जाता है, स्वर्ग, नई दुनिया (बहिश्त),पैराडाइस धरती पर, सतयुगमे सिर्फ ९ लाख आत्माये जन्म लेती है , त्रेता युग तक उन दिव्य आत्माओं की संख्या ३३ करोड़ तक पहुँचती है , यहाँ के समय तक आनेवाली आत्माए देवता कहलाती है जो दिव्य गुणों वाली श्रेष्ठ आत्माए है वह भी सिर्फ भारत में जन्म लेती है ( इसलिए भारत में ३३ करोड़ देवी – देवता का गायन है ) सबसे पहले परमात्मा ने ब्रम्हा द्वारा सतयुग में अर्थात भारत में ही स्वर्ग की स्थापना की है , अन्य किसी भी खंड पर नहीं । आदि सनातन हिन्दू देवी – देवता धर्म सबसे पुराना धर्म है परन्तु पुनर्जन्म लेते -लेते और विकारो मे गिरने के कारण तथा पतित होने के कारण सिर्फ हिन्दू कहलाने लगे, ( यहाँ धर्म अर्थात दिव्य गुणों की धारणा करने वाले ) जहा स्वयं परमात्मा का अवतरण होता है और दिव्य गुणों वाली आत्माओं का जन्म होता है उस धरती को आज हम भारत माता ( वन्दे मातरम) कहते है बाकी सारे पृथ्वी पर किसी भी देश को माँ का संबोधन नहीं करते है इसलिये भारत पहले सोने की चिड़िया था कहते थे, हिन्दू धर्म सबसे पुराना होने से इसके संस्थापक स्वयं भगवान हैं यह हम भूल गए है बाकि अन्य धर्म अलग – अलग खंड पर अलग – अलग धर्म संस्थापक द्वारा स्थापित हुए , जैसे आज से लगभग २५०० वर्ष पहले इब्राहिम ने इस्लाम धर्म स्थापित किया ,लगभग २२५० वर्ष पूर्व महात्मा गौतम बुद्ध ने बौद्ध धर्म स्थापित किया , लगभग २००० वर्ष पूर्व ईसा ने ईसाई धर्म स्थापित किया ,१५०० वर्ष पूर्व शंकराचार्य ने कर्म- सन्यास सम्प्रदाय स्थापन किया और कोई १४०० वर्ष पूर्व मुहमद पैंगबर जी ने मुसलमान धर्म स्थापित किया , इसी प्रकार अन्य आत्माए भी अपने पूर्व जन्म के संस्कार अनुसार उन धर्म में आती गई , आज अनेक भाषाएँ तथा…

  3. रश्न- कृपया ईश्वर के मुख्य गुणों को संक्षेप में बताएं ।
    उत्तर- उसके गुण अनंत हैं और शब्दों में वर्णन नहीं किये जा सकते । फिर भी कुछ मुख्या गुण इस प्रकार हैं :

    1. उसका अस्तित्व है ।
    2. वह चेतन है ।
    3. वह सब सुखों और आनंद का स्रोत है ।
    4. वह निराकार है ।
    5. वह अपरिवर्तनीय है ।
    6. वह सर्वशक्तिमान है ।
    7. वह न्यायकारी है ।
    8. वह दयालु है ।
    9. वह अजन्मा है ।
    10.वह कभी मृत्यु को प्राप्त नहीं होता ।
    11. वह अनंत है ।
    12. वह सर्वव्यापक है ।
    13. वह सब से रहित है ।
    14. उसका देश अथवा काल की अपेक्षा से कोई आदि अथवा अंत नहीं है ।
    15. वह अनुपम है ।
    16. वह संपूर्ण सृष्टि का पालन करता है ।
    17. वह सृष्टि की उत्पत्ति करता है ।
    18. वह सब कुछ जानता है।
    19. उसका कभी क्षय नहीं होता, वह सदैव परिपूर्ण है ।
    20. उसको किसी का भय नहीं है ।
    21. वह शुद्धस्वरूप है ।
    22. उसके कोई अभिकर्ता (एजेंट) नहीं है । उसका सभी जीवों के साथ सीधा सम्बन्ध है।

    question—-Iswar hai kon . Wo aadmi hai ya aurat hai .ya fir koi aur. Usne humhe racha hai par kyo.
    kyo hume iswar ki aaradhana karni chahiye . ye to ek swarth ka rista ho gya ki hum uski aaradhana kare aur wo humhe uska fal de. Kyo usne ye le ne dene ka chhakkr chalaya………..

    • @Umakant

      Good question……these answers are not provided by any religion

      I have read the answer of Agniveer……and I must say I was unsatisfied….though I didn’t expect a satisfactory answer to this question

      The answer to your question cannot be answered by either the vedas or Agniveer or anybody else…..only ishwar (if there is one) can answer this

      Unfortunately Arjun had that chance with Lord krishna…..he didn’t do it

      Nachiketa had that oppurtunity……..he however used it ask about OM instead

      • It’s answer is Adwait. Non-duality. God wishes to experience himself by creating duality in his own mind. Duality is just illusion.

    • आदरणीय अग्नीवीरजी ,
      सबसे महत्वपूर्ण बात यह है की, आत्मा का (Soul ,रूह, ) कोई धर्म नहीं होता है , शरीर का धर्म होता है ,धर्म के रिवाज से मृत शरीर जलाया या दफनाया जाता है, जब आत्मा शरीर धारण करती है और आत्मा को किसी परिवार या व्यक्ति से पिछले जन्म का हिसाब किताब ( लेंन देंन ) के कारण उसे उस धर्म या परिवार मे जन्म लेना पड़ता है , आत्मा जिस धर्म में पैदा होती है उसी धर्म का संस्कार उस आत्मा में बचपन से ही पड जाता है, इसीकारण वह अन्य धर्म की बाते आसानी से स्वीकार नहीं कर पाता है , ईश्वर ने इस सृष्टी नाटक रंग मच पर समय – समय पर आज जितने भी धर्म सस्थापक ( पैगम्बर ) भेजे उन्होंने मनुष्य को कैसा सुखमय जीवन जीना चाहिए,उन नैतिक मूल्योंकी पालना करने की हमें शिक्षा दी ,उन को जीवन में धारण करना ही धर्म का नाम है , हर कोई धर्म ने अच्छी ही शिक्षा दी है, और वह धर्म की शिक्षाये उस समय के काल और स्थान अनुसार थी, साथ -साथ ईश्वर का परिचय भी दिया गया परन्तु सब ने ईश्वर को पूर्ण रीति से नहीं जाना , जैसे चार सूरदास (दृष्टी हीन ) को हाथी के अलग -अलग अंग पर खड़ा किया और कहा गया की, हाथी कैसा है,जो हाथी के पुंछ के पास था उसने कहा की, हाथी साफ जैसा है , जो हाथी के कान के पास था उसने कहा की हाथी सूफ जैसा है,जो हाथी के पाँव के पास था उसने कहा की हाथी स्तंभ जैसा है ,जो हाथी के सूंड के पास था उसने कहा की हाथी पेड़ जैसा है ,सभी ने अपने अपने स्पर्श अनुभव से ठीक कहा लेकिन सबकी बाते मिलकर हाथी का आकार पूर्ण होता था ,ठीक उसी प्रकार सब धर्म की बाते सुनकर ही हम परमात्मा को अच्छी तरह जान सकते है ,
      सर्व धर्माणी परित्यजेत् मामेकं शरणम व्रज -गीता अ. १८,श्लोक ६६ अर्थात ईश्वर ने ज्ञान अर्जन करने वाले हम सभी अर्जुन ( पार्थ अर्थात पृथ्वीपर पैदा हुए सभी पृथ्वी पुत्र) को उद्देश देते हुए कहा की , सब धर्म और धर्म की एवं शास्त्र, की बाते छोड़ उसमे तेरा समय जायेगा ,अब मै स्वयं सब शास्त्र का सार सुनाता हु , तू मेरे शरण में आ I
      माम् च यो ऽ व्यभिचारेण भक्तियोगेन सेवते I
      स गुणांसमतिर्येता नब्रह्मभुयाय कल्पते I I २६ I I गीता अ. १४
      जो केवल मेरी ही अव्यभिचारी भक्ति करता है (अव्यभिचारी अर्थात केवल एक परमात्माकी ,व्यभिचारी अर्थात सभी देवताओं की ) वह प्रकृति के ( माया से )भी पार होकर वह ब्रम्हस्तर प्राप्त होनेमें…

      • समर्थ है I
        आज हमें जरुरत है की, हर मजहब की बातों को गहनता से समझ उसके सार (एसेन्स ) को समझ ,ज्ञान को जीवन में धारण करे ,ईश्वर ने हमें सबसे बड़ा उपहार दिया है बुद्धि इस बड़े ज्ञानसागर में डुबकी लगाकर गहराई में उतरकर खोजे तो हमें ज्ञान मोती सहज ही प्राप्त होंगे ,मूल बात यह है की ,क्या परमात्मा सर्वज्ञ है और सर्वव्यापी है ?जिसे हम ईश्वर , अल्लाह परमात्मा, गॉड ,सुप्रीम सोल ,ऑलमाइटी अथॉरिटी,निराकारी ,निर्विकारी,अभोक्ता,जन्म -मरण रहित मुल बीज रूप, सर्व शक्तिमान ,ज्ञान सागर ,प्रेम सागर ,आनंद सागर सुख सागर ,शांति सागर, ग्रेट ग्रेट ग्रैंडफादर कहते है, सर्वमे व्याप्त अर्थात कण कण में भगवान हर चीज में भगवान , हम उसे इसीकारण एक का अनेक भगवान कर दिया है उसके अवतार मानने लगे है ,वराह ,कुर्म, मत्स्य, नरसिंह क्या ईश्वर जानवरो के अवतार लेते है ,फिर हमने जिसकी मदत मिली या डर लगा उसे ईश्वर मान लिया या ईश्वर के पास बिठा दिया जैसे हाथी ,सिह ,सॉफ ,बैल ,चूहा ,सूर्य तारे ,चाँद को भी ईश्वर माना ,हम भक्ति में इतने गिरते गए की, हम गुरु, माता -पिता,धर्म सस्थापक , पेड़,पत्थर ,आदि को भी ईश्वर समझ लिया फिर तो 27 नक्षत्र ,आदि को भी ईश्वर समझने लगे हम उस एक को भूल गए और ईश्वर को अनेकता में ला दिया यही सबसे बड़ी भूल है की, हमने उसे सर्वव्यापी बना दिया और हर चीज में उसे ठोक दिया ,अब आप कहे यह उसकी महिमा है की ग्लानि क्या परमात्मा पेड़ के हर पत्ते को भी हिलाते रहता है , जिसमे चेतना है ,उसको दूसरा कोई काम नहीं है, सब जड़ चेतन में ईश्वर है , अगर वह सबमे रहे तो उसका अपना स्वतंत्र अस्तित्व कहा रहा, परमात्माका स्वतंत्र स्वरुप अर्थात अतिसुष्म ज्योतिर्बिंदु है लेकिन सर्वशक्तिमान भी है ,
        कविं पुराण मनुशसितारमणो रनियांसमनुस्मरेधः I
        सर्वस्य धातारमचिन्त्यरूपमादित्यवर्ण तमसः परस्तात I I ९ I I गीता अध्याय ८
        अर्थात ,मै सर्वज्ञ हूँ जो मुझे सभी जानते है ,सारे धरतीपर मेरा अनुशासन है मै अणु से भी अति सुष्म ज्योतिर्बिंदु हुँ, जो मै सबका पालनहार हुँ मेरा स्वरुप बुद्धि के तर्क से बाहर है ,मैं सूर्य के समान तेजोमय हूँ (यहाँ सूर्य समान कहा है अर्थात सूर्य नहीं पर सूर्य की रौशनी जैसा प्रकाशमय हूँ ) , मै इस अंधकार रूपी प्रकृति से भी परे हूँ , इसका हि ध्यान मनुष्य ने करना चाहिये I
        हम आत्माए महान काम करके वाले…

      • महात्मा ,दिव्या गुणों वाले दिव्यात्मा ,पुण्य कर्म करने वाले पुण्यात्मा , देने वाले देवता ,या पाप कर्म करने वाले पापात्मा ,दॄष्टात्मा बन सकते है लेकिन परमात्मा नहीं ,परमात्मा तो केवल एक की ही महिमा है ,आत्मा सो परमात्मा कहना भी गलत है , आत्मा और परमात्मा की महिमा अलग है, ततत्व असि – छान्दोग्योपनिषद – अर्थात ,वह तुम हो या अहंब्रम्हाश्मि – बृहदारण्यकोपनिषद अर्थात मै ही ब्रम्ह हुँ ,( यह गलत नहीं है ) ,वह तुम हो अर्थात सतयुग में तुम ने अच्छे कर्म कर १६ कला संपूर्ण देवता बने थे फिर जन्म-जन्म विकारों मे कलियुग तक आते- आते गिरते गए ,अब अच्छा पुरुषार्थ कर फिर से तुम्हे देवता बनना है जो पहले तूम ही थे यह बात परमात्मा ने आत्मा को कही है I जब आत्मा अपनी योग साधना से दिव्य दॄष्टि द्वारा परमात्मा का साक्षात्कार कर लेता है तब आत्मा सब बन्धनोंसे मुकत अनुभव करती है अर्थात विश्व बंधुत्व की भावना जागती है Iॐ सर्वे भवन्तु सुखिनः
        सर्वे सन्तु निरामयाः ।
        सर्वे भद्राणि पश्यन्तु
        मा कश्चिद्दुःखभाग्भवेत् ।
        ॐ शान्तिः शान्तिः शान्तिः ॥
        अर्थात
        1: Om, May All become Happy,
        2: May All be Free from Illness.
        3: May All See what is Auspicious,
        4: May no one Suffer.
        5: Om Peace, Peace, Peace. सारा संसार ही मेरा परिवार है अब मुझमें में और इस ब्रम्ह में कोई अंतर नहीं है परमात्माके दिव्य गुण आनेसे एक ऐसी स्थितिः को अहंब्रम्हाश्मि कहा जाता है

        एक आत्मा / परमात्मा अलग- अलग चीज में कैसे रह सकती है ( दो शरीर में एक आत्मा कैसे हो सकती है अगर एक में रहे तो दूसरा शरीर मृत हो जायेगा सब में एक ही सोल / सुप्रीम सोल नहीं रह सकती है या चेतन नहीं रख सकती है परमात्मा के अधीन संसार है ,संसार में परमात्मा नहीं
        प्रकृति स्वामवष्टभ्य विसृजामि पुनः पुनः I
        भूतग्राममिमं कृत्स्नमवशप्रकृतवर्शात् I I 8I I गीता अध्याय ११
        सारी सृष्टि मेरे अधीन है मेरे संकल्प मात्र से सारी सृष्टि मै निर्माण करता हु और मेरे ही संकल्प से मैं अंतिम समय में सृष्टि का संहार करता हुँ , सारा संसार ही परमात्मा कैसे हो सकता है , फिर संसार का विनाश याने स्वयं का विनाश हूआ ,यदि ईश्वर किसी चीज को नियंत्रित करता है तो यह कैसे सिद्ध हो सकता है की ईश्वर स्वयं उस चीज में है अगर मान ले की मै कार को अपने नियंत्रण में चलाता हू तो वह जड़ कार…

      • मै थोड़ी हु या मै कार हु यह कहना गलत है , ईश्वर सर्व शक्तिमान होकर भी अति सूक्ष्म ज्योतिर्बिंदु है हम आत्माए भी अति सूक्ष्म र्बिंदु है पर दोनों के क्वॉलिटी में फर्क है अगर केमिकल भाषा में कहे कैल्सियम का एक छोटा अणु और यूरेनियम का एक छोटा अणु दोनों सूक्ष्म है पर दोनों की अनुरेणु की संरचना अलग है एक यूरेनियम का सूक्ष्म अणु में विनाशकारी पावर भरी है जो कैल्सियम के अणु में इतनी नहीं है आपने कहा की,अगर ईश्वर आसमाँ में है तो वह ऊपर से सब कारोबार या क्रिया कैसे कर सकते है (यहाँ सवाल यह उठता है आपने परमात्माको स्थूल रूप दे दिया है ) अगर वह शरीरी है तो नामुनकिन है पर परमात्मा तो अशरीरी है सुप्रीम सोल है, आत्मा प्रकाश की गति से भी अति तीव्र गति से भ्रमण करती है क्योकि उसको अपना द्रव्यमान बहुत ही कम है ,

        आइन्स्टाइन के सापेक्षता के सिद्धांत (Theories of relativity) ने प्रकाश के वेग को अधिकतम सीमा के रूप में बताया है , इसके ऊपर किसी की गति हो नहीं सकती है,मुक्त अवकाशमे प्रकाश की गति 3 x 10^8 m per sec.है तेज से तेज रॉकेट की गति 2 x 10^4 m per sec बना सकते है इलेक्ट्रान जैसे बहुत छोटे कण ही प्रकाश की गति तक पहुँचने वाले वेग से घूमते है यदि एैसा हो तो आत्माओं को परमधाम से पृथ्वी पर आने में संभवतः सैकड़ो वर्ष लग जायेंगे किन्तु व्यवहार में यह तथ्य नहीं है, अगर कोई ऑब्जेक्ट प्रकाश की गति से भी तीव्र प्रवास करना चाहती है तो उसे इंफिनिटी एनर्जी की आवश्यकता होगी ,परन्तु सुप्रीम सोल के अंदर इंफिनिटी एनर्जी है ,वह तो ऑब्जेक्ट नहीं है वह आधिभौतिक सत्ता है ,आत्माएं , फोटोनों या प्रकाश की अपेक्षा अधिक वेग से यात्रा करती है वे १ सेकंड के खरब वे भाग में कही भी पहुंच सकती है , (The Heisenberg Uncertainty Principle allows these virtual particles to move faster than light.- According to the mass-energy equivalence formula E = mc2, an object travelling at c would have infinite mass and would therefore require an infinite amount of energy to reach c.
        Now Professor Jim Hill and Dr Barry Cox in the University’s School of Mathematical Sciences have developed a new way to extend Einstein’s sums to understand how faster than light movement can be possible.)_
        आज कुछ भौतिकविद यह कह रहे है…

    • ma baap kon he? hm unki respect q krte he? Hme wo sbse pyaare q he?
      coz unhone hme jnm diya, paala posa. khilaya pilaya. ungli pkdkr chlna shikhaya.
      usi trh allah ne hmare liye snsar bnaya, khane pine ki cheeje duniya me bnayi. ma baap srf apne bchcho ko khilate he lekin allah pahaado me chlrhi chiti ko b khilata he. jis trh hm ma baap ki baate maane awche se pdhe likhe to wo hme jo mango wo dete he sari facilities provyd krte he usi trh allah b uski manne wale ko apne reham se nwaz deta he.

  4. 33
    देवी और देवताओं के कुल के अन्य बहुत से देवी-देवता हैं: सभी की संख्या मिलकर भी 33 करोड़ नहीं होती, लाख भी नहीं होती और हजार भी नहीं। वर्तमान में इनकी पूजा होती है।
    *शिव-सती : सती ही पार्वती है और वहीं दुर्गा है। उसी के नौ रूप हैं। वही दस महाविद्या है। शिव ही रुद्र हैं और हनुमानजी जैसे उनके कई अंशावतार भी हैं।
    *विष्णु-लक्ष्मी : विष्णु के 24 अवतार हैं। वहीं राम है और वही कृष्ण भी। बुद्ध भी वही है और नर-नारायण भी वही है। विष्णु जिस शेषनाग पर सोते हैं वही नाग देवता भिन्न-भिन्न रूपों में अवतार लेते हैं। लक्ष्मण और बलराम उन्हीं के अवतार हैं।
    *ब्रह्मा-सरस्वती : ब्रह्मा को प्रजापति कहा जाता है। उनके मानसपुत्रों के पुत्रों में कश्यप ऋषि हुए जिनकी कई पत्नियां थी। उन्हीं से इस धरती पर पशु, पक्षी और नर-वानर आदि प्रजातियों का जन्म हुआ। चूंकि वह हमारे जन्मदाता हैं इसलिए ब्रह्मा को प्रजापिता भी कहा जाता है।
    निष्कर्ष : आपने देखा की 12 आदित्यों में से ही एक विष्णु और 11 रुद्रों में से ही एक शिव और ब्रह्मा को ही प्राजापति कहा गया है। 8 वसु भी दक्षकन्या वसु के पुत्र थे जिनके पिता कष्यप ऋषि थे और 11 रुद्रों के ‍पिता भी कश्यप ऋषि थे। रुद्रों की माता का नाम सुरभि था।

    आप् वाता सक्ते हेँ iswar k baad kaun he jo dayalu aur krupalu he ……aap nehin bata sakte kyun ki aap unke khilap he

    • shatpath brahman granth 14-5-7-4 me sirf 33 devta kahe gaye hai usme sury dharti jal pavan chandr buddh brahaspati mangal shukr shani i grah adi hai saal ke 12 maah bhi devta hai aur yah sabhi devta apujy hai
      sirf ishvar ki hi upasna karne yogy hai jo yah sab devta hai unko bhi ishvar ne hi banaya hai
      tab vah ishvar se bade harguij nahi ho sakte hai
      isliye sirf ishvar hi pujy hai !

      • Manine kab kaha ki iswar ki puja nehin hoti …maine sirf 33 koti devta ka ullekh dia he ……..aap mujhe ek baat bataiye ..ved ko iswar ne khud likh k dia ya phir wo sirf kaha he aur likha koi aur he …..mujhe iss baat ki uttar den pehle….aur kya isawar ko palan har srusti karta aur binash karta kaha jata he …agar haan kehenhe toh jis pap ki nadi me allha duba hua he aise hin ved ki iswar v dub jayega ….100% …….pehle mujhe iski zawab do phir me aapko bataunga

      • adarniy shri raam ji aapne durga adi ka hi naam liya hai jo hamari drishti me kalpit hai unak kabhi astitv nahi raha hai
        buddh ji to ved virodhi aur ishvar virodhi bhi the tab unko vishnu ka avtaar kaise kaha ja sakta hai
        hamari samajh me sansaar banan e ke baad 4 yogy vyaktiyo ne samaadhi avastha me jakar jo unko gyan aatmsaat hua usko ishvariy gyan kah diya gaya hai ! ved ka ek arth hai gyan
        ishvar ke asankhy gun hai usi me palan karta srishti ko sthir karta aur vinash karta bhi hai ! yh sansaar asankhy baar bana aur mita hai age bhi banega aur mitega bhee
        jaise ishvar nadi aur ananat hai usi t arah se uske sabhi gun bhi anadi aur ananat hain

  5. *8 वसु : आप, ध्रुव, सोम, धर, अनिल, अनल, प्रत्यूष और प्रभाष।
    *12 आदित्य : अंशुमान, अर्यमन, इंद्र, त्वष्टा, धातु, पर्जन्य, पूषा, भग, मित्र, वरुण, वैवस्वत और विष्णु।
    *11 रुद्र : मनु, मन्यु, शिव, महत, ऋतुध्वज, महिनस, उम्रतेरस, काल, वामदेव, भव और धृत-ध्वज ये 11 रुद्र देव हैं। इनके पुराणों में अलग अलग नाम मिलते हैं।
    *2 अश्विनी कुमार : अश्विनीकुमार त्वष्टा की पुत्री प्रभा नाम की स्त्री से उत्पन्न सूर्य के दो पुत्र हैं। ये आयुर्वेद के आदि आचार्य माने जाते

    अब जानिए क्षेत्रवार देवताओं के नाम:-
    1.
    आकाश के देवता अर्थात स्व: (स्वर्ग):- सूर्य, वरुण, मित्र, पूषन, विष्णु, उषा, अपांनपात, सविता, त्रिप, विंवस्वत, आदिंत्यगण, अश्विनद्वय आदि।

    2.
    अंतरिक्ष के देवता अर्थात भूव: (अंतरिक्ष):- पर्जन्य, वायु, इंद्र, मरुत, रुद्र, मातरिश्वन्, त्रिप्रआप्त्य, अज एकपाद, आप, अहितर्बुध्न्य।

    3.
    पृथ्वी के देवता अर्थात भू: (धरती):- पृथ्वी, उषा, अग्नि, सोम, बृहस्पति, नद‍ियां आदि।
    अज एकपाद’ और ‘अहितर्बुध्न्य’ दोनों आधे पशु और आधे मानवरूप हैं। मरुतों की माता की ‘चितकबरी गाय’ है। एक इन्द्र की ‘वृषभ’ (बैल) के समान था। राजा बली भी इंद्र बन चुके हैं और रावण पुत्र मेघनाद ने भी इंद्रपद हासिल कर लिया था। इसके अलावा विश्वदेव, आर्यमन, तथा ‘ऋत’ नाम के भी देवता हैं। अर्यमनन पित्रों के देवता हैं, तो ऋत नैतिक व्यवस्था को कायम रखने वाले देवता।
    वेदों में हमें बहुत से देवताओं की स्तुति और प्रार्थना के मंत्र मिलते हैं। इनमें मुख्य-मुख्य देवता ये हैं: प्राकृतिक शक्तियां : अग्नि, वायु, इंद्र, वरुण, मित्र, मरुत, त्वष्टा, सोम, ऋभुः, द्यौः, पृथ्वी, सूर्य (आदित्य), बृहस्पति, वाक, काल, अन्न, वनस्पति, पर्वत, पर्जन्य, धेनु, पूषा, आपः, सविता, उषा, औषधि, अरण्य, ऋतु, त्वष्टा, श्रद्धा आदि।

    दिव्य शक्तियां : ब्रह्मा (प्रजापति), विष्णु (नारायण), शिव (रुद्र), अश्विनीकुमार, 12 आदित्य (इसमें से एक विष्णु है), यम, पितृ (अर्यमा), मृत्यु, श्रद्धा, शचि, दिति, अदिति, कश्यप, विश्वकर्मा, गायत्री, सावित्री, सती, सरस्वती, लक्ष्मी, आत्मा, बृहस्पति, शुक्राचार्य आदि।

    गायत्री मंत्र के 24 अक्षरों को 24 देवताओं संबंधित माना गया है। इस महामंत्र को 24 देवताओं का एवं संघ, समुच्चय या संयुक्त परिवार कह सकते हैं। इस मंत्र के जाप से 24 देवता जाग्रत हो उठते हैं।
    गायत्री के 24 अक्षरों में विद्यमान 24 देवताओं के नाम:-
    1.
    अग्नि
    2.
    प्रजापति
    3.
    चन्द्रमा
    4.
    ईशान
    5.
    सविता
    6.
    आदित्य
    7.
    बृहस्पति
    8.
    मित्रावरुण
    9.
    भग
    10.
    अर्यमा
    11.
    गणेश
    12.
    त्वष्टा
    13.
    पूषा
    14.
    इन्द्राग्नि
    15.
    वायु
    16.
    वामदेव
    17.
    मैत्रावरूण
    18.
    विश्वेदेवा
    19.
    मातृक
    20.
    विष्णु
    21.
    वसुगण
    22.
    रूद्रगण
    23.
    कुबेर
    24.
    अश्विनीकुमार।
    गायत्री ब्रह्मकल्प में देवताओं के नामों का उल्लेख इस तरह से किया गया है:-
    1-
    अग्नि, 2-वायु, 3-सूर्य, 4-कुबेर, 5-यम, 6-वरुण, 7-बृहस्पति, 8-पर्जन्य, 9-इन्द्र, 10-गन्धर्व, 11-प्रोष्ठ, 12-मित्रावरूण, 13-त्वष्टा, 14-वासव, 15-मरूत, 16-सोम, 17-अंगिरा, 18-विश्वेदेवा, 19-अश्विनीकुमार, 20-पूषा, 21-रूद्र, 22-विद्युत, 23-ब्रह्म, 24-अदिति ।

    • ishvar ke alava any koi pujniy nahi hai !
      devta kaun hai
      jo dete ho vah devta
      aur levta kaun hai jo samaj se bal purvak lete ho apardh karte ho vah levta
      jaise chor badmash rahazan dakait hatyare repisht adi ! thag dhokhebaaz aadi bi !

  6. apne jo 33 prakar devi devta ka ullekh diya he usme ek kam he ….aur aapne jo jo bataya he usme v galat he …..aap mujhe ek baat ye batayiye apne jo 12 aditya bataya usko hindi me mahina kehte hen matlab aditya ka matlab mahina he ye kahan ullekh he …..mujhe sanskrit tranlate dikhaiye aditya ka matlab mahina he ……….sanskrut me month ko masi ,mase ,masik ..kehte hen …..6 स्वर व्यंजन मात्रा सहित । इस शब्द का प्रयोग हिंदी में संज्ञा के रूप में किया जाता है और यह पुर्लिंग वर्ग में आता है । जिसकी उत्पत्ति संस्कृत भाषा से हुई है। …..aditi k 12 putra ko 12 aditya kaha geya he ..12 आदित्य : अंशुमान, अर्यमन, इंद्र, त्वष्टा, धातु, पर्जन्य, पूषा, भग, मित्र, वरुण, वैवस्वत और विष्णु। ……. …aapne 33 prakar. Devi devta ki galat ullekh dikhaya he …….33 prakar iss tarha he …ऐसी मान्यता है कि हिंदू देवी-देवताओं की संख्या 33 या 36 करोड़ है, लेकिन ये सच नहीं है। वेदों में देवताओं की संख्या 33 कोटी बताई गई है। कोटी का अर्थ प्रकार होता है जिसे लोगों ने या बताने वाले पंडित ने 33 करोड़ कर दिया। यह भ्रम आज तक जारी है। देवी और देवताओं को परमेश्वर ने प्रकाश से बनाया है और ये प्रमुख रूप से कुल 33 हैं। ये सभी ईश्वर के लिए संपूर्ण ब्रह्मांड में कार्य करते हैं।देवताओं की शक्ति और सामर्थ के बारे में वेद और पुराणों में उल्लेख मिलता है। हालांकि प्रमुख 33 देवताओं के अलावा भी अन्य कई देवदूत हैं जिनके अलग-अलग कार्य हैं और जो मानव जीवन को किसी न किसी रूप में प्रभावित करते हैं। इनमें से कई ऐसे देवता हैं ‍जो आधे पशु और आधे मानव रूप में हैं। आधे सर्प और आधे मानव रूप में हैं।पहले ये सभी देवी और देवता धरती पर निवास करते थे और अपनी शक्ति से कहीं भी आया-जाया करते थे। मानवों ने इन्हें प्रत्यक्ष रूप से देखा है और इन्हें देखकर ही इनके बारे में लिखा है। महाभारत काल तक ये देवता धरती पर रहते थे, लेकिन महाभारत काल के बाद सभी अंतरिक्ष में चले गए और कुछ सूक्ष्म रूप में धरती पर रहकर उन्हें जो कार्य सौंप रखा है वह करते हैं।तीन स्थान और 33 देवता : त्रिलोक्य के देवताओं के तीन स्थान नियुक्त है:- 1.पृथ्वी 2.वायु और 3.आकाश। प्रमुख 33 देवता ये हैं:- 12 आदित्य, 8 वसु, 11 रुद्र और इंद्र व प्रजापति को मिलाकर कुल तैतीस देवी और देवता होते हैं। प्रजापति ही ब्रह्मा है, 12 आदित्यों में से एक विष्णु है और 11 रुद्रों में से एक शिव है। कुछ विद्वान इंद्र और प्रजापति की जगह 2 अश्विन कुमारों को रखते हैं। उक्त सभी देवताओं को परमेश्वर ने अलग-अलग कार्य सौंप रखे हैं।अगले पन्ने पर जानिए सभी के नाम…

    • जब कलियुग में (स्वयं भगवान) परमात्म शक्ति मनुष्य बूढ़े तन का आधार ले आत्माओं को गीता सुनाती है और ब्रम्हा द्वारा ज्ञान देकर मनुष्य आत्माओ में अच्छे संस्कार भरकर नयी मनुष्य सृष्टी का निर्माण करते है , ईश्वर ही ब्रम्हा द्वारा स्थापना जिसे हम गार्डन ऑफ़ अल्लाह ,पैराडाइस, स्वर्गे ,गोल्डन AGE ,सतयुग कहते है,तब साधारण मनुष्य उसे पहचान नही पाते ,
      अवजानन्ति माम् मूढा मानुषी तनुमाश्रितम् ।
      परं भावम जानन्तो मय भुत महेश्वरम् ।.I अध्याय ९ ,श्लोक ११
      मनुष्य देह में जब मेरा अवतरण होता है तब मुर्ख लोग मुझे जानते नहीं उनको मेरे दिव्य स्वरुप का और मै सबका अधीश्वर हु इसका ज्ञान नही होता है , कृष्ण को तो सभी जानते है ,फिर कृष्ण एैसा क्यू कहेगा I गीता में सब से बड़ी भूल यह है की बाप (रचैता) Creator के जगह बच्चा (रचना) Creation का नाम डाल दिया है I त्रिमूर्ति शिव परमपिता परमात्मा शिव ( शिव अर्थात कल्याणकारी ) जिसका कभी नाम नहीं बदलता है जो सदा……शिव है, महेश है ,जिसे आकार न होने के कारण शिवलिंग के स्वरुप में पूजते है, जोतिर्लिंगम् के स्वरुप में पूजते है ( शंकर भी शिव का ध्यान करते हुए दिखाते है लेकिन सब ने शंकर और शिव को एक समझ लिया है ) वास्तव में शिव ज्ञान का सागर है, सुख का सागर है ,उसे किसी की ध्यान कर्र्ने की आवश्यकता नहीं न गुरु करने की, (गुरु वह करता है जो ज्ञान में लघु (छोटा ) है ) कॄष्ण के भी सांदीपनी गुरु थे, शिव सबका गुरु , सद्गुरु है सबकी सद्गति करनेवाला है ,वही अंतिम समय में विनाश के समय सबको ले जाता है इसलिए उसे कालो का काल महाकाल भि कहते हैं जो ब्रम्हा ,विष्णु शंकर द्वारा स्थापना ,पालना विनाश का कार्य करते है I

      • मनुष्य को ज्ञान की जरुरत तब पड़ती है जब वह अज्ञान अंधेरे मे हो ,गीता ज्ञान कुरुक्षेत्र में अर्थात मनुष्य की यह कर्म भूमि है , जो पहले आत्मभिमानी थी ( Soul Concious ) वह पुनर्जन्म लेते लेते देहाभिमान में ( Body Concious)आती गई और मनुष्य आत्माए विकार वश होते होते और भी पतित और दुखी बन पडी I सतयुग में २४ कैरट शुद्ध सोना थी ,जनम लेते लेते अब उसमे विकारो की खाद पड़ गयी है, अब परमात्म ज्ञान लेकर राजयोग की अग्नि ( ईश्वर की याद में रहकर ) से तपकर फिर से शुद्ध सोना बनना है इस धरती का विनाश होकर फिरसे नई दुनिया सत्ययुग (Paradise )स्थापित होगी जो केवल एक ईश्वर का कार्य है गीता ज्ञान आसुरी वृत्ति से ऊपर उठकर पूर्ण पुरुषोत्तम बनने के लिये यह ज्ञान देते है। मनुष्य की लड़ाई अपने सुक्ष्म विकारो से है ( जो स्थूल लड़ाई दिखाई है ) अच्छाई की लड़ाई (पांडवकी ) बुराई से (कौरव ) से है आज दुनियामे कौरव 100 ( बुराई के मार्गपर चलनेवाले ) अधिक है और पांडव 5 (अच्छाई के मार्गपर चलनेवाले कम है I ईश्वर कभी हिंसात्मक लड़ाई नहीं कराएँगे I

      • Gita me galati nehin he aapko samajhne ki galati he …..aap ek adhyaya ki sirf ek slok dikhaya he …..aapne ek hin padha thik se padho gita me parameswar kaun he

      • ishvar ke anek gun hai usi gun ke nam brahma vishnu mahesh[shiv ] adi hai
        jab shiv nirakaar hai tab uski murti kyo puji jaye kaun si murti jyoti svarup ho sakti hai !

      • आदरणीय राज जी, आपने ईश्वर के अनेक गुण कहे है, जिसमे परमात्मा का एक गुण भी है, शिव अर्थात कल्याणकारी ,शिव भी परमात्मा का गुणवाचक नाम है ,शिव अजन्मा ,अनादि ,निराकार होने से अभोक्ता है, निजानन्द,सत्चितानन्द ,ज्योतिर्स्वरूपम् है वही सुप्रीम पावर,ऑल्माइटी अथॉरिटी ,सदाशिव है, आत्माका हर जन्म में नाम बदलता है लेकिन शिव का नाम अजन्मा होने से नहीं बदलता है वह तो सदा….. शिव ही है ,वह ब्रम्हा ,विष्णु शंकर के भी रचैता है , ब्रम्हाद्वारा स्थापना।,विष्णुद्वारा पालना और शंकर द्वारा विनाश उसीका कार्य है ,वही सुखकर्ता,दुखहर्ता है, पुरानी दुनिया का विनाश तथा नई दुनिया की स्थापना उसी का काम है वही धरती पर स्वर्ग बनता है (गार्डन ऑफ़ अल्लाह ),पैराडाइस बनाने वाला भी वही है I पूजापाठ करनेवाले उसका सही अर्थ न समझने के कारण, उसका स्वरूप भी न समझने के कारण,पत्थर का शिवलिंग बना दिया है ,नहीं तो दूध ,जल ,फूल आदि किसपर चढ़ाएंगे I सोमनाथ ( ज्ञानरूपी सोमरस पिलाने वाले जिससे परमात्मा का सही परिचय प्राप्त होकर उसका नशा चढ़ जाये ) ,अमरनाथ , मनुष्यको अमर बनने का ज्ञान ( जिससे अकाल मृत्यु नहीं होती ) देनेवाले, भोलेभण्डारी ( ख़ुशी का भंडार भरपूर करने वाले ),मुक्तेश्वर ( मनुष्य की गति ,सत्गति करनेवाले )ओंकरेश्वर ( एक ओंकार स्वरप ), त्रम्बकेश्वर, त्रि अर्थात ब्रम्हा,विष्णु,शंकर के भी ईश्वर ,विश्वेश्वर (सारे विश्व का ईश्वर),महाकाल ,विनाश के समय सभी आत्माओंको एक साथ परमधाम ( निर्वाणधाम )में ले जाने वाला ,शिव है ,वही सत्य है ,सुन्दर है वही शिव है (सत्यम, शिवम, सुंदरम )केवल एक ईश्वर की महिमा है I
        ईश्वर की पूजा नहीं उसे स्मरण किया जाता है ,वह निराकार है तो उसे शरीर न होने के कारण पाव भी नहीं है फिर पूजा कैसी ,उसे स्मरण करना अर्थात याद करना,देहधारी से देहधारी की पूजा नहीं परमात्मा देहधारी नहीं है ,आत्मा ने देह धारण किया तो वह कर्मा बंधन में जरूर फसता है,परमात्मा जनम मृत्यु में न आने कारण बंधन मुक्त है,अपनेको आत्मा रूप में देख परमात्मा को याद करना (आत्माका परमात्मासे योग अर्थात जुड़ना ) परमात्माके निरंतर सदा याद में रहना (अजपाजाप) और अपने नित्य कर्म करते रहनेवाला ही कर्मयोगी है, ना कि, संसार की जिम्मेवारी छोड़ मन्दिरमे बैठे रहना ,और परमात्मा नाम का जाप करना ,वह पूजा, जाप, मंत्र, महिमा आदि भक्ति से…

      • प्रसंन्न नहीं होता वह तो अपने बताये गए मार्ग पर चलने वाले पर खुश होता है ,जब मोबाईल डिस्चार्ज होता है तो उसे मैं पावर सप्लाय के लिए कनेक्ट किया जाता है ठीक उसी प्रकार आत्मा की बैटरी जन्मजन्मांतर से डिस्चार्ज हो गई है अब उसे चार्ज करने के लिए परमात्मा से (सुपर पावर) योग (कनेक्शन )लगाना चाहिए
        शिव और शंकर में फर्क है ,उनके गुण ,कर्त्तव्य अलग है ,शिव है, परमधामवासी परमात्मा, शंकर है ,सुष्म वतनवासी देवता ,शिव है निराकारी ,शंकर है आकारी, शिव परमात्मा शंकरद्वारा विनाश करते है, शंकर एक तपस्वी स्वरुप दिखाया गया है ,उसे शिवलिंग के आगे तपश्या करते दिखाते है यहाँ शिव और शंकर में फरक है अगर शिव ही शंकर हो तो वह स्वतः सपूर्ण होने के कारण फिर ध्यान किसका करते है ( दुनियावाले नासमज के कारण कह देते है वह विष्णु का करते है ,कोई कहता राम का ,और राम फिर शिव का ध्यान करता है बस सर्किल पूरा कर देते है ) शंकर का स्वरुप देखो वह योगमुद्रा मे है , मस्तक पर चन्द्रमा जो योगी का शीतलता का प्रतिक है शरीर पर भस्म वैराग्यता का प्रतिक है सबसे मित्रता भी हो और न्यारा पन भी हो ,सबका प्यारा भी हो , त्रिनेत्री, तीन आखे वाला नहीं बल्कि त्रिकालज्ञानी जो भूत, भविष्य और वर्तमान की स्तिथी को जानकर जीवनमे आगे चलता हो, गलेमें सॉफ अर्थात विकारो पे जीत पाई हो, सर पर गंगा अर्थात परमात्मका शुद्ध ज्ञान की गंगा मुख से सदैव बहती हो ऐसा योगी परमात्माको प्रिय है I शिव और शंकर को एक दिखाकर परमात्मा की असली पहचान से वंचित कर दिया है I

      • param adarniy shri anand ji, ham aapki bahut si bato se sahamat hai !
        fir bhi kuch antar rakhne ke ichhuk hai shankar ki jo bat rakhi gayi hai vah bhi ek cartoon pratik ke rup me hai ! ishvar kabhi khsuh v naraj nahi hota kyoki dono vikaar hai
        karma nusaar nyay jarur karta hai!

      • @Ananad

        Sir, aap ke vichar brahmkumari sanstha se liye gaye hai aisa lagata hai? Braham Kumari santha ke anusar Ishwar sabhi jagah nahi. Wo bhi Islam ki tarah ishwar ko simit sthan par batate hai.

      • ishwr srv shktimaan he uska koi aakar nhi to jb wo srv shktimaan he to arsh yaani satve aasman se b sb kuch dekh or sun skta he. or jb wo hm mnushyo ko ese remote cntrl bnane or robert banane ka dimag de skta ho to socho uske pas kitni shkti or dimag hoga. ek mnushya phn k through kisi b jgh se sunne ki shkti de skta he to khud andaaza lgalo k khuda vha se kya nhi kr skta. usko kisi cheej me smane ki jrurt nhi wh apne ek ishare se sb bna b skti he or mita b.

    • आपका सवाल बहुत ही महत्त्वपूर्ण एवं सटीक है जिसका जबाब् देना भी इतना आसान नही है सबसे पहले मै गीता पर आधारित श्लोक से बताना चाहूंगा I
      इमं विवस्वते योगं प्रोक्तवानहमव्ययम I
      विवस्वान्मनवे प्राह मनुरिक्ष्वाक वे ऽ ब्रवी त II १ II अध्याय ४ ,श्लोक १
      अर्थात , यह गीता ज्ञान ( अविनाशी योग विद्या ) भगवांन ने पहले सूर्यदेव ( विवस्वान ) को दिया विवस्वान ने मनु को दिया मनुने इक्ष्वाकु को दिया I पर कहीं कहीं वर्णन मिलता है कृष्ण ने गीता अर्जुन को कुरुक्षेत्र युद्ध स्थल पर ५००० वर्ष पहले सुनाई I महाभारत युद्ध का इतिहास कुछ ४०० वर्ष ई.पू.से अधिक पुराना नही लगता, ( जिसका गीता ज्ञान से तालमेल नहीं बैठता है ) मोहनजोदड़ो ,हड़प्पा के जो पुरात्तव उत्खनन हुए है उनसे भारत का इतिहास करीब ३००० वर्ष पुराने तक चला गया है,वह जो लोग पत्थर ,ताम्र,कासे के हथियार इस्तेमाल करते थे लोहे के हथियार ६०० वर्ष ई.पू के बाद ही नियमित रूप से प्रयोग में आने लगे I

      • पुरातत्ववादी ,इतिहासकार ,अध्यात्मवादी के बीच काफी मतमतांतर है ,महाभारत युद्ध एवं गीता ज्ञान के बारेमे काफी सवाल खड़े होते है,जैसे-
        1.जब कोई गीता को पढता है तो सम्पूर्ण गीता को पढने में एक दिन से अधिक का समय लगता है फिर कृष्ण ने अर्जुन को पूरी गीता मात्र कुछ मिनटों में कैसे सुना दी ? –
        2. जब दोनों सेनाएं युद्ध के लिए तैयार थी और कृष्ण को अर्जुन के सिवाय कोई और देखने सुनने में सक्षम नहीं था तो दोनों तरफ से युद्ध आरम्भ क्यों नहीं किया गया ? प्रद्युम्न और भीष्म किस चीज की प्रतीक्षा कर रहे थे ?
        3. जब कृष्ण को उस समय सिर्फ अर्जुन ही देख सकता था तो युद्धक्षेत्र से काफी दूर राजमहल में संजय धृतराष्ट्र को गीता के उपदेश किस प्रकार सुना सकता था ?
        4. इतने कोलाहल भरे माहौल में जहाँ हजारो हाथी घोड़े चिंघाड़ रहे थे कोई शांति से प्रवचन कैसे दे सकता है और कोई उनको शांति के साथ सही तरह से कैसे सुन सकता है ?
        5. कृष्ण ने उपदेश दिए अर्जुन ने सुने ? दोनों में से लिखा किसी ने नहीं, किसी तीसरे ने उसको सुना नहीं फिर गीता लिखी किसने ?
        6. अगर किसी तीसरे व्यक्ति ने गीता सुनी भी तो उसको युद्धक्षेत्र में लिखा कैसे गया ?
        7. अगर गीता युद्ध के बाद लिखी गयी तो इतने सारे उपदेशो को कंठस्थ किसने किया ? इतने सारे उपदेशो को सुनकर याद रखकर बिलकुल वैसा ही कैसे लिखा जा सकता था ?
        8. अगर गीता के उपदेश इतने ही गोपनीय थे कि उनको सिर्फ अर्जुन ही सुन सके तो इन दोनों के बीच का वार्तालाप सार्वजानिक कैसे हुआ ?

      • 9. अगर गीता के उपदेश सभी लोगो के लिए उपयोगी थे तो कृष्ण को चाहिए था वो अपने उपदेश सभी युद्ध में हिस्सा लेने वाले सभी लोगो को सुनाता ताकि सभी लोगो का ह्रदय परिवर्तन हो सकता और इतने बड़े नरसंहार को टाला जा सकता । कृष्ण ने अपना विश्वरूप दर्शन देने के बाद भी अर्जुन ने कृष्ण को रथ चलाने को कहा होगा !
        10. अगर गीता के उपदेश उस समय सभी के लिए उपयोगी नहीं थे तो आज सभी के लिए कहते है I क्या गीता ज्ञान द्वापर युग में दिया गया ! यहा सवाल यह उठता है की भगवान का गीता ज्ञान केवल अर्जुन के लिए था या सारी मनुष्य जाती के लिए था, अगर गीता ज्ञान द्वापर में दिया तो भी मनुष्य का स्तर ऊपर उठाने के बजाय और भी पापाचार ,भ्रष्टाचार क्यों बढ़ते गया कलियुग में हम और दुखी हुए और भक्ति बढ़ी अब हम पेड़ ,पत्थर ,कच्छ,मत्स ,वाराह ,कण -कण मे उसे ढूंढने लगे फिर मिला नहीं तो आत्मा सो परमात्मा कहने लगे, कोई नेति नेति (हम नहीं जानते) कहने लगे अगर आत्मा ही परमात्मा होता तो उसे मंदिरोंमें पहाडोमे क्यों ढूढ़ते है ,कभी कहते है सर्वव्यापी है ,क्या परमात्मा हर अच्छी या बुरी चीज में भी है ,हर पशु पक्षी में है , अगर है तो ऊपर मुह या हाथ करके पुकारते क्यू है हर धर्मसस्थापक की ऊँगली ऊपर क्यू दिखाई है। अर्थात परमात्मा ऊपर परमधाम में निवास करता है ,और जब बहुत पाप बढ़ता है ,हम पुकारते है पतित पावन आओ हमें दुःखों से छुड़ाओ ,तब ईश्वर सब धर्म का विनाश और एक धर्म की स्थापना करते है।
        यदा यदा हि धर्मस्य ग्लानि भर्वती भारत।
        अभ्युत्थानम धर्मस्य तदात्मानं सृजाम्यहम।I ७
        परित्राणाय साधुंनाम् विनाशाय च दुष्कृताम।
        धर्म संस्थापनार्थाय संभवामि युगे युगे ।I ८ अध्याय ४ श्लोक ७

      • कृष्ण सत्ययुग का १६ कला सम्पन्न , अहिंसा परमोधर्म, सर्वगुणसम्पन्न , सर्वश्रेष्ठ राजकुमार यानि देवता था , ना कि परमात्मा ,कृष्ण का अर्थ है सांवला,परमात्मा सावला नहीं हो सकते , परमात्माकी महिमा अलग है ,परमात्मा तेजोमय ,जोतिर्स्वरूपम है I
        अल्लाह एक है , अल्लाह बेनियाज़ है , न उससे कोई पैदा हुआ ,न उसे किसी ने पैदा किया है ,न कोई उसका समकक्ष( हमसर ) है – कुरान सूरतुल इख्लास ११२
        जो वेदोने भी गायी है, अल्लाह ,परमात्मा ,ईश्वर, निराकार ,अजन्मा , अभोक्ता , जो गर्भसे जन्म नहीं लेता है वह सुप्रीम पावर है जिसे वेद , ज्योतिर्स्वरूपं कहते है, क्रिश्चन धर्म गॉड इस लाइट कहते है ,इस्लामी धर्म खुदा नूर कहते है शीख धर्म वाले एक ओंकार सतनाम कहते है, जिसे सभी धर्म वाले मानते है ,
        कृष्ण को सभी धर्म वाले नहीं मानते , सभी आत्माए पुनर्जन्म लेती है कृष्ण ने भी ८४ जन्म लिए है (सतयुग से कलियुग तक) ( परमात्मा सत्ययुग में नहीं आते, जहा सुख ही सुख है ) तो कलियुग के अंत में आते है जब आत्माए उसे पुकारती है वह भी कृष्ण के अंतिम जन्म में ,उस शरीर का आधार ले कर कलियुग के अंत मे भगवान गीता ज्ञान सभी आत्माओंको सुनाते है I ,कल्प सिर्फ ५००० साल का है सतयुग १२५० त्रेतायुग १२५० द्वापरयुग १२५० कलियुग १२५० यह ५००० साल का चक्र घुमता ही रहता है ( कलियुग ४,३२,००० वर्ष का, द्वापर ८,६४,००० वर्ष का, त्रेता युग १२,९६,००० वर्ष का तथा सतयुग १७,२८,००० वर्ष का इसका तालमेल अबकी जनसंख्या से नहीं लगता है ) भगवान कलियुग के अंत में मुक्ति जीवन्मुक्ति का ज्ञान देकर आत्माओं की सत्गति करता भगवान स्वयं , कृष्ण देवता के अर्थात आदिपुरुष (ADAM) जो स्वयंवर के बाद श्री नारायण ( याने विष्णु के चार हाथ दिखाए है अर्थात विष्णुजी के दो हाथ एवं लक्ष्मी जी के दो हाथ मनुष्य को कभी चार हाथ नहीं होते वह प्रतीकात्मक रुप है) बनते है उनके ८४ वे अंतिम मनुष्य तन (प्रजापिता ब्रम्हा) में प्रवेश कर कलियुग के अंत में गीता ज्ञान देते है । जो विष्णु के नाभि से ब्रम्हा निकले कहते है असल में श्री नारायण ही ८४ जनम के बाद ब्रम्हा बनते है , ईश्वरीय ज्ञान द्वारा फिरसे ब्रम्हा ही विष्णु बनते है ,ब्रम्हा को बूढ़ा दिखाया है और हाथोमे शास्र दिखाए है , श्री नारायण के हाथोमे शास्त्र नहीं वह तो चिर निद्रा में दिखाए है ,वहा शास्त्र की जरुरत नहीं…

  7. परंतु उस काल के बाद घोर अधर्म का युग कलियुग आनेवाला था, उस वक्त ब्राह्मणों के पास जो भयानक शक्तियाँ और विद्याएं थीं, उनका गलत उपयोग करके बिना उचित अनुचित का ध्यान किए दुष्ट व्यक्ति सीधे सादे गृहस्थों का जीना हराम कर देते, इसलिए कृष्ण ने महाभारत का युद्ध करवाया ताकि ये दिव्य अस्त्र शस्त्र उन ब्राह्मणों के साथ ही चले जाएँ, यही वजह है कि स्वयं कृष्ण ने युद्ध में हिस्सा नहीं लिया ताकि उनके हाथों किसी ब्राह्मण की हत्या न हो और वो ब्रह्महत्या के पाप के भागी न बनें शुद्ध एवं निष्पाप बने रहें ।

    • kaliyug kya hai ?
      ek samay ke pravah ka naam hai jaise chait baisakh maah fagun aadi
      vai se hi kalp manvantar satyug treta dvapar kaliyug hai
      dharm aaj bhi hai isi kalyug me shankarachary huye buddh huye mahavir adi bhi huye hai
      brahman aaj bhi hai lekin naam matr ke hi hai unme shreshth guno ka abhaav kusangati ke kaarn hua hai ! yuddh me ek paskh banana nishpaap nahi kaha ja sakta hai kyoki vah yuddh nahi rok paye aur vah ek paksh bhi bane is yuddh ke karan kai karod bachhe antah huye mahilaye vidhva huyi sirf 5 gram ke liye satta ke liye ! aur isi karan yah desh…

      • gulam raha n jane kitni pidhiya gulami jhelne ko majbur huyi apne samaaj ko andh vishvas – kuriti pakahndo se abtak mukti nahi mi saki kyoki mahabharat yuddh me achhe vidvaan maare ja chuke the anath ashaay nadaan bachhe apni marmarji karne ko majbur ho chuke the ! unke pas achha gyaan nahi tha ! desh ke raja apas me ladate rahe videshiyo n eunka laabh uthaya ! i sab ke mul doshi shri krishn ji ko diya ja sakata hai
        kyoki us samayvahi shreshth vidvan the vah tatakalin saamj ko sahi rasta samjahne me asfal ho gaye the

  8. ही निवास करते हैं, उससे ही निकलते हैं और प्रलयकाल के अंत में उसमें ही समा जाते हैं। कृष्ण ही सर्वगुणअवगुण संपन्न हैं इसलिए उन्हें ही पूर्णावतार माना जाता है जबकि ऐसा त्रिदेवों के साथ नहीं है, ब्रह्मा पूर्ण सत्व हैं, विष्णु रज गुण एवं शंकरजी तमोगुणी हैं, अर्थात ब्रह्मा कृष्ण की तरह नाच गान नहीं कर सकते विष्णु ने भी कहीं नहीं किया, शंकरजी भोले भाले हैं वो कृष्ण की तरह छलियों के साथ छल नहीं कर सकते, मतलब यह हुआ कि हर देव में कोई कमी है सिर्फ यही रूप एक ऐसा है जिसमें कुछ भी कम नहीं, चाहे गुण हो चाहे अवगुण। इसीसे साबित होता है कि यही परब्रह्म है और कोई नहीं। कृष्ण महाभारत का युद्ध रोक सकते थे परंतु

    • koi chij manane se saty nahi ho jati hai ! shri krishn ji bhi alpagy the ishvar ke avtaar nahi the ! kitne kamaal ki baayt haiu jo shri krishn ji k ishvarka avtaarmante hai vah yahnahi samajhaate ki shri krishn jikesamne duryodhan adi dabte nahi hai aur unke rishtedaar arjun kunti adi bhi unko ishvar nahi mante the unke samay me bhi ishvar unko nahi mana ja tha
      brahma vishnu shankar adi gun vachak naam hai vah sabhi ishvar ke naam hai !
      shri krishn ji ne mahaabharat yuddh rokne ki bharsak koshish jarur ki lekin unki asfalta ko inkaar nahi kya ja sakta aur us daag se unko vancit bhi

      • nahi kiya ja sakta hai ,
        shri krishn ji bhramh nahi balkii ek shreshth manushy jarur the ishvar ko janm maran ka dukh nahi hota hai ! ishvar ke hisse me koi dukh nahi hai ishvar anadi aur ananat hai n va h jan m leta haimaur n marta hai isliye ishvar ka avtaar vaad ka siddhant hi galat hai agar ishvar ka avtaar hota to aaj bhi avtaar hota aur yah desh gulam kyo hota hajara saal ki gulami kyojheli gayi ishvar ne us samay avtaar kyo nahi liya
        kalpit devtao ne apne bhakto ki raksha kyo nahi ki !
        shankar ka alag se astitv kabhi nahi raha hai

  9. किस तरह कार्य करना चाहिए, किस तरह जीवन व्यतीत करना चाहिए और इसके अलावा मनुष्य जीवन में काम आनेवाले विषयों का समावेश है, इस दौरान जो देवताओं द्वारा घटनाएँ घटित हुई उसे दर्ज किया गया है। आप देखो सिवाय कृष्ण के किसी भी देवता ने ये कभी नहीं कहा “अहम् ब्रह्मास्मि ” जिसका अर्थ ही यही है कि वही पूर्ण ब्रह्म है और कोई नहीं। कृष्ण ने जो विराट रूप दिखाया उसे आप ध्यान से देखें उसमें शंकर सहित हर देवताओं का मुँह है, जिसका सीधा अर्थ यही है कि सारे देवी देवता उसमें

    • devta kya hai vah koi chetan nahi hai shastro ke anusaar sirf 33 devta unko kaha jata hai jis se manushyo aur sabhi praniyo ko laabh milta hai jaise dharti ,sury vayu aadi ! aur yah sab jad hai ! chetan nahi hai !
      viraat rup nahi hota viraat vyakhya hoti hai !
      aham bramahasmi kahana hi galat hai ishvar jiv aur prakriti ke anu alag alag satta hai ishvar saty- chitt – anand- svarup hai !
      jiv sirf chitt- anand svarup hai usme saty ka ansh kam hai kyoki jiv galat kaam bhi karta hai aur jhuth ka acharan bhi karta hai
      aur prakriti sirf anand hai uske paas saty aur chitt [chetanta ]…

      • nahi hai !
        ishvar sarv shreshth hai isliye vah jiv aur prakriti ka bhi malik hai !
        “aham bramhasmi ” sirf vedanti kahate hai jo yatharth nahi hai unka aisa manana hai ki ishvar se hi jiv utpann huye aur prkriti bhi !
        agar ishvar se jiv aur prakriti ke anu utpann huye hote toishvarke sabhi gun un dono me hote jo hargij nahi hai ! isliye advait vaad, dvaitvaad ka siddhant galat hai sirf traitvaad hi thik hai ! aur vedanukul bhi hai

  10. सत्य है, , स्वयं ब्रह्मा को परब्रह्म परमेश्वर ने ही उत्पन्न किया, इस सृष्टि के निर्माण के लिए, जिस तरह एक बाप अपनी हर औलाद का पालन पोषण करता है परंतु उन्हें मृत्यु नहीं दे सकता ठीक उसी तरह परमेश्वर ने पालन का काम अपने जिम्मे लिया और सृष्टि के संहार का कार्य शंकर के हिस्से कर दिया, ताकि अपने ही अंश का संहार उसे न करना पड़े, वेद भी पूर्णरूपेण सही हैं बस हम उसे सही ढंग से समझने के बजाय अपने ढंग से उसका अर्थ निकालने लगते हैं, वेदों में तो वास्तव में मनुष्य जीवन किस तरह चलना चाहिए किस तरह रहना चाहिए, किस तरह कार्य करना चाहिए, किस तरह जीवन व्यतीत करना चाहिए

    • brahma ko parmeshvar ne utpann nahi kiya balki ishvar ka ek gunvachak naam brahma hai !
      har ek minat me karib 100 admi se jyada is sansaar me marte hai ! kya ishvar praan haran nahi karta hai? aur kai hajarckide makode jiv jantu pakshi janvar adi marte hai
      ishvar ke asankhy guno me se vishnu aur shiv bhi unhi ka gun vachak naam hai yah koi ishvar se alag nahi hai baaki aapki baat thik hai ki ved ka gyaan sabhi manav ke liye samaan rup se hai

  11. vah bevkuf to qurani allah hai jisne quran me is baat ka jikar kiya hai agar qurani allah satve asman me ek singhsan me majud nahi hai to muhammad ji ne kalpit meraz kyo ki thi vah sidhe kalpit qurani allah se quran ki sirf do ayate kyo laye the jo suarat bakar me shamil hai !
    kalpit jibrail farishta quran ki ayte kahan se lakar muhammad ji ko deta tha vah to batla dijiye !
    saath me yah bhi batal dijiye ki kalpit farishta asman se quran ki ayte kis tarike se lata tha uska vaahan kaun sa tha ! jhuth ko pakdana bahut asaan hota hai andh bhakt jarur nahi pakad pate hai !

  12. Gita gyan dene wala bhi krishna nahi Shiv hi hai. sabhi atmao ko jo amarkatha sunai vah gita hi hai .Mahabharat me jo ahisak ladai dikhai hai vah nahi hai . Gita sare gyan arjan karne wale arjun atmao k liye hai vah keval ek atma ka kalyan nahi balki sabhi atmao ka kalyan hetu gyan hai. Manush ki sacchi ladai Vikaro se hai .Vikaro ne hi hame dhukhi banaya hai hum en vikaro par kaise vijai paye ,kase purushottam bane uska gyan hai u se samaz dharna kar k hum sukhi ban sakte hai na ki gitapath karne se.gita me rachaita Shiv k jagah Rachana krishna ka naam dala hai .yah badi bhool hai .

    • kis shiv ki baat aap karte hai ? ishvar ke asankhy gun hai aur uske asnkhy naam bhi hai ! brahma vishnu shiv[mahesh] adi bhi ishvar ke gunvachak naam hai !
      jab geeta mahabharat ke yuddh ke maidan me arjun ke shnshay ko dur karne ko sunaai gayi the tab shiv ki baat kaise shamil ho sakti hai

      • Doaton ved sirf us bramha ki baat karta he Jo hame banaya he lekin gita us param bramha parameswar ki batt kehta he jisne bramha ko banaya he ….shree Krishna WO parameswar he jisne bramha ko banaya ..

        भगवद् गीता अध्याय: 8
        श्लोक 16

        श्लोक:
        आब्रह्मभुवनाल्लोकाः पुनरावर्तिनोऽर्जुन।
        मामुपेत्य तु कौन्तेय पुनर्जन्म न विद्यते॥

        भावार्थ:
        हे अर्जुन! ब्रह्मलोकपर्यंत सब लोक पुनरावर्ती हैं, परन्तु हे कुन्तीपुत्र! मुझको प्राप्त होकर पुनर्जन्म नहीं होता, क्योंकि मैं कालातीत हूँ और ये सब ब्रह्मादि के लोक काल द्वारा सीमित होने से अनित्य हैं
        ॥16॥

      • apke batalye shlok me bhi shiv ka jikar nahi hai ! brahma ko kisi ne nahi banaya hai baliki ishvar ka ek gunvachak nam brahma jarur hai ,
        yah updeshb bhi moksh ki baat kartavha ji ishvar ke guno ke sabs ejyada najdik ho jatahai vah janm- mrityu ke chakkar se anemk kalpo ke liye dur ho jata hia baad me uska janm fir se hota hai

  13. sabhi darma wale mane hai. Shiv janam na lene se karma bandhan se mukta hai Baki sabhi atmaye janam leti hai
    atmaka pach tatv k sharir me pravesh kiya to koi na koi karma hota hi hai aur atmaye punar janam lete lete endriya vah ho kar Karma bandhan me fasti hai ab karbandhan se koun Mukta kar sakta hai jo es jivan mrutyu k chakkar me na ho . Aaj sari Duniya kum adhik rup me Vikarome gir k dukhi hua hai .Ek Satya Shiv ko bhul alag alag dehdhari ko bhagwan man ne lage hai .Shiv arthat Kalyan kari sabhi atmaoko agyan andhere se nikal gyan prakash k aur le jate hai Shivratri ka mahatva yahi…

      • Sabhi ko shivratri parv par Hardik shubh kamnaye . Hum Krishna janmashstami ,Ram janmashtami, manate hai lekin Shiv janmashtami nahi Shivratri Manate Hai, yaha spsta hai Krishna ji, Ramji ne garbh se janam liya lekin Shiv ne nahi ,Hum Krishna devtai namha,Ram devtai namaha kahate hai lekin hum Shiv Parmatmay namha kahate hai Arthat Hum sabke sharir ka Pita alag -alag hai lekin Sabhi atmaoka Pita Param Atma Suprim Soul ,Almighty Authority keval ek Shiv hi hai.vah sare Aalum k Aalum panah Hai u se jotirswarup me, khuda noor k rup me, god is light k rup me ,Ek Onkar Satshree k rup me…

  14. Eshwar janam k chakkar me na aane k karan sabhi sukha aur dkukha se mukta hai Hum atmaye sharir dharan karne se endriya vash hokar kaam krodh ,lobh ,moh ,ahankar me aakar bure karma kar baithte hai .hum endriyo ko vash kar le to dukh nahi hoga .es k liye endriyajit banna pade.vah rasta bhagvadgita me hai . MANUSHYA EUM MANUSHYANAM KARAN BANDHAN MOKSHYO. bandan ya mukta hona yah khud hum manushya par nirdharit hai . agar rasta chahiye ho us k bataye marga par chalo nahi to bhukto..

  15. jivan bandh se chudane wala keval vah ek hai . hum u se patit pawan bhi kahate hai. u se yaad karne se arthat atma ka parmatma se yog lagane se hi hamari batari charge hoti hai aur yogagni se hi pap bhasma hote hai.
    murti ki pooja paath karne se nahi. pahle satyug me hum atmaye 24 carat sona thi ab janam janam k pap arthat alloy (vikari karma) mixed hone se sona impur ho gaya hai . hum kahte bhi hai Papatma,Punya atma ,Mahatma, devatma,pap sharir punya sharir nahi.

    • adarniy shri anand ji , paap bhasm nahi hote balki unko bhugatna jarur padta hai !
      ek bund jahar ka asar sharir me jarur padta hai aue ek bund dava ka asar bhi padta hai

  16. Sare Drama (film )ka raj eshwar hi janta hai . hum pichale janam ki smruti bhul jate hai .es me hamari bhalai bhi hai. Nahi to pichla dukkh yaad kar aur sahan nahi kar payenge .hum manushya es film ka keval Ek episode jante hai .shuru se na dekhne k karan hame hisab kitab ka pata nahi chalta aur hum Eshwar ko dosh dete hai.
    jo bhi hame sukha kaho ya dukha yah sab hamare karan hi prapta hote hai .vah nirakar, nirvikari hone se bandhan mukta hai .hum atmaye jevan bandh me hai .

  17. Adarniy shri thakur ji ,
    Eshwar ko Sukh karta Dukh Harta Kaha hai. vah kisi ko bhi dukha nahi deta hai. na sukh bhi .lekin agar insan neki k raste par chale.mansa, vacha, karmna kisi ko bhi dhukh na de, to Eshwar hame dukh k samay rasta batata. vah guide k rup me kisi na kisi swarup me madat mil jati hai .Hamare karmo ka hisab kitab accurate chalta hai. esme hamare pichale janam k acche bure karma aur vartman k bhi karma k hisab se accha ya bura fal milta hai.

  18. apne dilo dimag or tark shakti se is sansaar ko dekh sab samajh me aa jayega koi ved puran upnishad padhne ki koi jaroorat nahi. padegi
    Bhasha ya writing way par dhyan na deke tark par dhyan de .
    Or batayen me kahan tak galat or kahan tak sahi hoon

    • adarniy shri thakur ji , sury adi grah nakshatr adi ishvar dvara jarur niyantrit hai !
      lekin jiv nahi hai jiv ek alag svatarntr satta hai
      vah jaisa karega vaisa hi fal payga agar apke hisaab se ishvar dvara niyantrit jiv hai to jiv ke karmo ka fal ishvar ko milna chahiye ! jo nahi milta
      agar kisi ne hatya ki hai aur adalat me sabit ho jati hai to usko dandit kiya jata hai vah hatyara yah nahi kahata ki hamne apni ichha se hatya nahi ki balki ishvar ne hamse karvaai hai !

  19. na ho ki vo kis baat ka bhog hai.isse saaf saaf hai ki ye ek shakti hi joki sare sansaar ko apni ichha se niyantrit karti hi. iski marji ko koi pooja aaradhna ya kisi ki vinti nahi badal sakti.or na hi aaj tak ise kisi ne dekha hi. or rahi baat vedo ki ved bhi aapki or meri trah trah trah ke manushyon ne like hi apni apni anubhooti ke adhar par. jisne jaisa anubhav kya likh diya jo varshon pehle likha hi use kyon dekhte ho are manushyon thoda sa dhyan lagakar apne dilo dimag or tark shakti se is

  20. abhi kuchh dino pehle mera ladka ek durghatna me samapt ho gaya joki keval 6 saal ka tha vo do bhai the judva bhai jab mere bete ka dehant huaa to logo ne kaha ki pichhle janm me kuchh bura kiya hoga jiski saja mili hai. chalo mai maan leta hoon ki ye theek hai. lekin is hisaab se to mujhe eeshvar moorkh najar aata hi are jise saja di use itni chhoti umra me saja or karm dharm inka matlav tak bhi nahi pata to eisi saja or niyam ka kya fayda jisme bhogi ko ye bhi pata na ho ki vo kis baat ka bhog

  21. ise chek bhi kara sakte hi. mere anusar jo kuchh bhi is duniya me ghatit ho raha hi vo sab pehle se hi nishchit hi isme kisi ka koi yogdan nahi hi aur na kisi ka koi dosh.is sansaar ko ek shakti chala rahi hi. vo jo kuchh bhi karti hi keval apni ichha se karti hi. or doosri baat me aapko bata du na to is sansaar me koi paap karta hai or na koi punya jo kuchh bhi ham karte hi vo sab vo shakti hi karati hi to paap or punya ka savaal hi paida nahi hota. is baat ka bhi suboot mere paas hai abhi kuc

  22. kya insaf milega? chalo me uttar bhi khud hi bata deta hu ki nyay milega our bilkul milega. ye to tha aapke anusar. ab mere anusar suniye jo bhi mere nana ke sath huaa vo pehle se hi nishchit tha kyoki is ghatna ke baad mere nana ne paas ke gao me janm le liya. aur unhe apna pichhla janm poora yaad hai.aur vo janm lene ke baad apni parivar se milne bhi aye. aur unhone un logo ko bhi bataya jinhone unhe mara tha. maje ki baat ye hi ki ye khabar news par bhi ayi thi aap chahe to ise chek bhi kara

  23. guru ji namaskar.
                aaj me aapko ek kahani sunane vala hu jo ki ek sachhi kahani ye kahani hi jila bulandshahar gram shairiya post oocha gao uttar pradedh ki hi vaha mera nanihal hi us gao me mere nana ek baar raat ke samay apne khet par so rahe the kyoki khet me pani ja raha tha tabhi kuchh dushmano yani badmasho ne unhe mar dala. ab agar me apse poochoo ke kya vo log saja payenge is karm ki. vedon ke anusar kyoki apke anusar ye kaha gaya hi ki eeshvar nyay karta hi. to kya insaf…

  24. agar koi manushya es jaanam me chori karta hai aur use agla janam billi ka mile to bhi vah chori chori dudha piti rahe to yaha use apni saja ka ahsas kaha hai ,fir se galti kar rahi hai.arthat hamare 84 lakh yoni nahi hai aakhir shashra to manushya arthat dehdhari ne hi rache hai naki us shri shri bharga -jyoti, van- swarupam jyotirswarupam ne mat to keval ek shri ki hogi manushya mat nahi. shri shri ki mat yane shri bhagvad gita . ek hi bhagvanne gayee hui ,

  25. rachaita eshwar keval ek almighty authority hai vahi es dhara par punha swarga sthapan karta hai. aab yah dharti narka samaan bani hai kyoki har prakar ke dukkha hum dekh rahe hai aab dharti ki saphi jarur hone wali hai. aur esi dhara par swarga firse hoga na ki swarga uppar hai. manushya ki 84 lakh yoni bhi nahi hai .aam ke guthali se aam hi ugega na ki babul ka ped. hum manushya aatmaye maanush ka hi punarjanma leti hai. lekin hamare karma nusaar agla jaanam me aate hai aur vasa pad milta hai

  26. ladai to aab lagi hai .sushma ladai hum aatmaye hamare andar ke duguno se lad rahe hai .sari gita eshwar ne uttam se uttam purush banane ke liye kahi hai gita gyan keval ek arjun ko nahi par hum sare arjun gyan arjan karnewale hai.hum pandavoki durgun rupi kaurose hai. gita gyan keval padne aur sunane k liye naahi hai jivan me uski dharna karni hai. tabhi hum dukho sechhut sakte hai. krishna satyayug ka pahla prince hai jo 16 kala sampurna hai .jo racheita ki rachana hai..

  27. krishna yah nahi kah sakta sarva dharmani paritejet mamekam sharanam vraj -sare dharm ke vivado ko chodo shirf mere sharan me aao. agla slok hai yada yada hi dharma shya glani bharvati bharat………….jab jab dharma ki ati glani hoti hai tab mai aata hu..dharma ki aati glani ,sabhi aati dhukhi ab hai.aab use aana hai. agar krusna aya tha to fir bhi hum sabhi dharma ki glani karte karte etne niche gire q. mahabharat ki ladai hui nahi thi na 18 aukshan sena thi tab etni jansankya kaise hogi.

  28. hum eshwar use mane jise sabhi dharma wale mante ho keval ek dharma wale nahi. . hindu dharma wale eshwar ko jyotir swarupam mante hai .chritian dharma wale God is light kahate hai. islami khuda noor hai kahate hai. parasi agni ki pooja karte hai. nanak gi ne ek ungali upar uthai hai sai ne sabka malik ek kaha hai arthat param atma ek hai wah nirakar hai ajanma hai.. krishna ,ram eshwar nahi hai divya gun wale devta hai.
    Gita ek bhagwan ki srimat hai krisha ki nahi.

  29. Thik hai ..me gita se har din aapko kuch puchunga Jo ki ye sidhh karta hai k Krishna iswar hin the ….me aapse maafi chahta hun ..
    Ved se juda hua har baat puchunga ek v chodunga nehin

    • jis jagah ham ajkal rahate hai us sthan par ved hamare paas nahi hai isliye ham uska uttar thik se nahi de payenge !
      kaha jata ha ki gita ka gyan yuddh ke maidan me diya tha ! yuddh sthal par kuch bate badha chadha kar di jati hai taki apne paskhh ka manobal bahut jyada rahe!
      gita mahabharat ka ek ang hai !
      aajkal guru mata ji sab ti vi par subah 6 baj se 6.28 tak gita par hi bol rahi hai aap chahe to unki sngati sunne ke liye kar sakte hai ! dhayn rahe ham unke bhi vishesh bhakt…

  30. Par mera man keh raha hai aap gita path nehin kiya aap sirf ek mates ved se parichit hai(raj vai mera koi v baat aapko kast deneki udesya nehin ya phir insult karne ki me sirf aapne iswar ki satya k liye keh rehin hun ……..me aapse hath jodke kshyama v mangta hun yadi mere Karan aapko koi v kast hua ho ……aap sirf ved ka adhyan kia hai na?

  31. Kuch v ho iswar Jo koi v ho mera koi dukh nehin parantu mereliye shree ram shree Krishna hin mera iswar he mera janm ka prarambh se kisiko iswar mana hai toh ye dono hin he aur koi nehin aur meri jiban k ant tak ye dono hin mera iswar rehenge iskeliye iswar mujhe koi v saza de me swikar kar lunga ..shree ram mera atma shree Krishna mera pran in dono k bina iss sarir ka koi mulya nehin …..aapki jankari k liye dhanyabad iswar aapko khusrakhe ….

    • apke abhibhavko ne aapka naam ramshyam rakha hai isliye aap aisa agrh shayad kar rahe hai!
      agar parashuram rakhte to aap unko ishvarkahb dete ishvar ka avtaar unki bhi sanatan dharmkahata hai vah to ishvar virodhi buddh ko bhi ishvar ka avtaar man leta hai ! kya apki najar me “do ishvar hai “?
      aap jara sochiye ki raam ji aur shaym ji dono samapt ho chuke hai aur unke samay ke pahale yani dashrath ji basudev ji adi ko pratipal svaanso ke madhyam se jivan kaun de raha tha ? vahi aaj bhi…

      • Srimat Bhagvat Gita arthat keval ek shri shri Bhagwan ki gayi hui maat na ki manushya maat. shrimaat bhagvat gita krishna ki nahi hai vah to devta janam lene wala devta thahra. usne bhi us bharga (jyoti) vaan (swarupam) se divya guno ki shakti lekar 16 kala sampurna bana. vah satya yug ka pahla prince hai vaha dukha hota nahi na manushya bhagwan ko pukarte ki hame dukkho se chhudao .jaha bagwan swayam hai vaha dukkha nahi ho sakta hai.
        gita me hinsatmak ladai dikhai hai lekin aisa nahi hai.

  32. Nirakar iswar khud ko kisi na kisi Karan khud ko sakar banaya aur WO bramha Vishnu mahesh he ye me manta hun biswas he aur rahega …..shree Krishna iswar hin the aur ye sach he koi mane ya na mane ……Jo mandir dharti pe adi ant se he WO jhoot nehin ho sakta …… iswar aur allha ek nehin ye me nehin bed aur quran keh raha hai kyoun ki quran sirf musalmana k liye aur ved sari manusya k liye …..yakin na ho toh YouTube me pandit mahendrapal arya video search karen aur WO proof v dikhaye hen

      • Yadi Krishna iswar nehin toh phir aisa kyoun kaha ….
        Yada yada hin dharmasya glanir bhabati bharat avyuthanam adharmasya tadatman srujanyaham paritranayam sadhunam vinasaya cha dushkritam dharmasansthapnaya
        Sambhavami yuge yuge

      • yah unki”sirf” kamna thi ki jab jab dharm ki hani ho tab- tab ham janm lekar dharm ki sthapana kare ! kamna puri ho yah jaruri bhi nahi tha
        agar vah ishvar the to jab yah desh aur samaj hajar saal tak gulam raha tab vah ishvar bankar kyo nahi aye
        jab desh ka vibhajan hua tab vah ishvar bankar kyo nahi aye
        jab do baar vishv yuddh hua usme bharat bhi shamil tha tab vah ishvar ke rup me kyo nahi aye ? maha bhaart yuddh agar ruk gaya hota to apna hindu samajbarbaad nahi hota

  33. Yadi shree Krishna iswar nehin the toh WO jab dharti par aaye itne rakshas chah kar v kaise nehin mar paye ..aap Mahabharat shree Krishna Zara thik se dekhen aur soche …nirakar iswar ne khud ko sakar banaya he aur WO tridev hin he kisi na Karan WO khud ko sakar kiya ….Krishna janm nehin liya hai WO yog aur Maya k balse bachha banke Maa k samne the agar janm liya hotha toh kya devki ko pata nehin chalta ………yadi Krishna manab the toh aag unki sarir ko kyun jala ne se dargeya ……….

  34. Aur aap mujhe iss prasna ka uttar de ..
    Jab shree krishna khud ko iswar kaha aur apna biswa swaroop dekhaya tab kya nirakar iswar Krishna ko nehin rokte ki wo iswar na ho k khud ko iswar kaha kya nirakar iswar itna durbal the ki Krishna ko rokne ki sakti nehin ….yadi Krishna iswar nehin manab hai ..kya koi manab apne ek hath k ungli se ek parbat utha sakta hai agar Krishna iswar nehin hote toh jab chote the apne muh me baramhand kaise dikhaye apne Maaa ko …..Krishna iswar hin the…

    • yah kahaniya matr hai ! ki ek ungli se govardhan pahaad utha liya ya apne munh se pura bramhand dikha diya aadi ! isme lesh mattr sachhai nahi hai ! agar aap kisi ka katl bhi kar de to ishvar aapoi rokne nahi ayega yah uski durbalata ka pratik nahi apiti apko kisi bhi tarah ka karm karne ki chut hai ! ishvar koi bhi achha ya galat kaam karne se nahi rokta balki karmo ka fal jarur deta hai
      agar sri krishn ji ishvar hote to karodo vyaktiyo ko mahabharat yuddh me marnese rok sakte the !

      • agar shri krishn ji ishvar the to aaj kaun ishvar hai ? bagair sri krishn ji ke yah brahmand”vidhi purvak” kaise chal raha hai?
        jai aaj chal raha hai vaise hi shri krishn ij ke samay par bhi chal raha tha !
        ishvar ke niyam ek saman hote hai har samay saman roop se lagu rahate hai uske niyam badalte nahi hai

  35. Vai mera ye soch kya satya kya ho sakta hai Zara dhyan de ……………..jaisa ki aapne kaha agar nirakar iswar khud ko sakar banaye toh ho sakta hai …toh ye sach hai nirakar iswar ne khud ko kisi na kisi Karan sakar banaya aur wo khud ko 3 roop me sakar banaya bramha Vishnu aur mahesh ..ye 3 ek hin hai aap tridev ki koi v puran dekhen ye 3 khud ko ek hin kaha hai koi ek dusre se alag nehin bramha(srusti karta)Vishnu(palan karta)shiv(binashak) in 3 se hin bramhand juda hai …yugo yugo se ye

  36. Vai mera ye soch kya satya kya ho sakta hai Zara dhyan de ……………..jaisa ki aapne kaha agar nirakar iswar khud ko sakar banaye toh ho sakta hai …toh ye sach hai nirakar iswar ne khud ko kisi na kisi Karan sakar banaya aur wo khud ko 3 roop me sakar banaya bramha Vishnu aur mahesh ..ye 3 ek hin hai aap tridev ki koi v puran dekhen ye 3 khud ko ek hin kaha hai koi ek dusre se alag nehin bramha(srusti karta)Vishnu(palan karta)shiv(binashak) in 3 se hin bramhand juda hai …

  37. respected sir,
    MAIN YEH JAANANA CHAHTA HOON K HINDU HISTORY MEIN INSAAN KO DHARTI PAR BHEJNE WALE, USKI AAYU LIKHNE WALE, US K KARMON KA HISAB RAKHNE WALE AUR DHARTI PAR HI US KE PAAPON KA DAND DENE WALE DEVTAYON KE KYA NAAM HAI.

    • chaliye ham apki baat maan lete hai agar hamne sabko nahi likha to bahuto ko to avashy likha hai 1 hamara uddeshy kisiko narvous karna nahi hai, apitu samman ke saath varta karna jarur hota hai !

  38. @rai.hyd
    I don’t think I deserve to be respected by you. Muze nahi lagata hain ki aapko mera aadar ya paramaadar karane ki jarurat hain. Main aapase aayu aur gyan main bhi chhoti hun.
    Main aapase sahamat hun. Par main yah bhi kehna chahti hun jab manushya samajata hain ki paramatma sarw wyapi hain to wah karm yogi banata hain aur nishkaam karm karata hain. Usaki bhawana hoti hain- har jagah main hi hun. Everything is expansion of my ‘self’.

    • samman ke yogy Akanksha ji jab ajanabi se vishesh baat ki jati hai tab hamko uski umr ya gyaan se parichay to hota nahi hai fir bhi aga raap hamse choti bhi hai to samman se batchit to ki hi ja sakti hai anek log to gali galauj se bat arambh karte hai , jab vah hamari shaili samjhenge to unko bhi ek nasihat mil sakti hai !
      sabse badi dikkat is baat ki hai ki achhi bato ka vyapakta se parchaar nahi hota iske karan har vyakti apni manmarji se jo chahe karta rahata hai jo thik nahi hai

  39. @raj.hyd
    Aapane kaha- //ishvar sarvvyapak hai to vaj kan- kan me majud hai acche me bhi bure me bhi//
    Main bhi exactly yah maanati hun– Brahm satyam jagat mithyam. God is the only truth, the universe or diversity or multiplicity of selves is illusion.
    Kya aap bata sakate hain- maya aur mithya main kya difference hain ?
    Awaiting your reply….

    • pramadarniya aknksha ji , ham aapse kuch bato me ashamat hone ki anumati chahte hai
      brahm saty jagat mithya nahi apitu dono saty hai yah jagat karm karneke liye bana hai jo jaisa karega usko vaisa hi fal milega aagar jagat mithya hota to vyakti karm kyo karta ?
      janvar adi jarur koi vishesh karm nahi karte hai unko pichle karmo ko bhogna jarur padta hai ! ishwar bhi saty hai aur jeev aur yah prikrati bhi saty hai. agar prikrati saty n hoti to ham sabko sury se roshni kaise mil pati

      • [2] aur dharti se ann ,fal tarkaari adi bhi kaise mil pate ? isliye isko bhi saty kaha jayega !
        maya bahut din tak tikaaoo nahi hoti hainisliye kuch log us maya ke virodhi ho jayet ahai jab ki maya ki bhi sakht jarurat rahati hai isliye maya bhi saty hai jo mithya hai vah to mithya hi rahega uska paksh kaise liya ja sakta hai

  40. aapne kaha ishwar har jagah har aadanmi me hai ,,,tab to ye bhi sidh hota hai ki ishwar hatyare aur ek papi me bhi hai….to prashn ye uthata hai ki kya wahi ishwar pap bhi karwata hai…..

    • agar ishvar kahe ki tum bura kaam karo tab ishvar doshi hoga \
      , jeev [vyakti ] koi bhi kary karne me svatantr hai. ishvar sirf karmo ka fal deta hai.
      ishvar sarvvyapak hai to vaj kan- kan me majud hai achhe me bhi aur bure me bhi .

    • sara gyaan khoj ka vishay hai kuch “mool” bate ved me bhi mil sakti hai 1 agar khoj karne ke baad gyaan alag nikata hai to ved ki bate chodi bhi ja skati hai

    • isme likhna kya hai? jaise ravivaar somvaar manglvaar adi hote hai janvari adi maah hote hai vaise hi sat,treta adi yug hote hai !yah samay ke vibhajan ka ek tarika matr hai aur unke naam hai
      manu ji ne apne granth manusmriti ke 1/68-73 me iska ullekh kiya hai- jisme
      satyug 17 lakh 28 hajar varsh
      tretayug 12 lakh 96 hajar varsh
      dvapar yug 8 lakh 64 hajar varsh
      kaliyug sirf 4 lakh 32 hajar varsh ka hai

  41. vedo ke anusar jeevan kya h?
    kahte h insaan ko uske karmo ka phal yahin bhugtna padta h. phir bhi kabhi- kabhi yah dekha jata h ki ek insaan zindgi bhar acche kaam krta h, logo ka bhala krta h phir bhi wah dukhi rhta h aur jo log use dukh dete h unhe koi asar nhi padta. esa kyu h?

  42. ish purey vedic ishwar ke lesson se yeah baat nikalti hai ki ishwar ek hai aur baki sab devi devta kuch nahi na shiv na parvati na krishna ..yani ki hum festival na manye kyon ki sarey festival krishn ram aur shiv par aadharit hai..? plz answer me kyonki yeah sab bhagwan nahi hai

    • raam ji v sri krishn ji mahapurush the unka janm divas khushi se n manaiye aur unke “achhe ‘guno ko sabhi atmsaat bhi kare !tyoharo me sudhar ki disha chuniye dipavali me patakhe hargij mat chudaaiye karib 20 arab rupaye ke pathakhe dipavali me yah desh chudata hai ! is dhan ka achhe karyo me bhi lagaya ja sakata hai jaise garib bachho ki kitabe -kapi- pensil adi par, garib rogi ke liye ilaz adi par 1

    • yah thik hai ! ishwar ke yah tin bhi gun ha i brahma vishnu mahesh. jagat banana uska palan karna aur nasht bhi hona

  43. iska matlab bholenath ,maa durga ,krishan ,aur ram yeah bhagwan nahi hai???
    to hum hindu hokar koi festival na manaye

    • yahsab ishvar nahi hai durga to kalpnik hai saath me bhole naath bhi, khushiya manana bura nahi hai un me sudhar ki disha honi chahiye apvyay kyo kiiya jaye /

  44. BHAGWAN HE YA NAHI MARNE KE BAAD DEKH LENA FILHAL TO JIS HINDU DHARM ME
    JANM LIYA HE JIS HINDU NAAM SE PAHCHANE JATE HO USKI RAKSHA KARO USE AGE
    BADAO JARURAT PADNE PE AGE AAO SAMJO YAHI HINDU DHARM HE

  45. agni veer ji plz mery problem solve karo
    mein nasha mukti kendra mein thaa wahan bahut log they par do log mery pichey pad gaye
    ek ka naam saurabh jain thaa .usney kaha ki wo sai baba hai.wo sari desho ko shaktiya baat raha hai.usney kaha uskey dimag mein current dood raha hai.usney mujhey yeah table bataye
    monday tea shivji
    tuesday milk hanuman
    wednesday tea gutam buddha
    thursday water (no milk) maha guru (agar thursday ko milk piya to snake aa jayegye
    friday tea(jesus)
    saturday milk( allah)
    sunday (tea) sun
    monday again start with drinking tea
    usney kaha ki sarey log mar gaye hain aur wo ro raha hai.
    \/////////////////////////////////////////////
    dusra ladka mila uska naam suraj thaa
    wo bola ki mein bahoot dukhi hoon
    meiney kaha kyun
    wo bola ki mujhey bholey naath ne kaha ki suraj mein tumsey bahut pyaar karta hoon
    phir wo bola ki wo sahkti ka upasak hai
    aur apni maa ke saath sex karna chata hai
    phir bola ek raja thaa wo roj nabalig ladki pakad ke lata thaa ur unko rep karkey maar deta thaa //// uska kya karna chahiye?
    phir wo raat ko aaya bola ki wo mahakaal hai
    maha kaal kya hota hai
    baad mein bola tery marney ki baad hamara waqt ayega
    mujhey bola mujhko koi bhi gali de par bahen ka loda mat bolna(jiska ling kaam na karta ho)
    soory but yeah mery saath hooa hai
    mein usey maha kaal samajh bethaa hoon
    plz tell me ki wo kya thaa ////plz reply iam depressed.
    ……………………………………………………………………..
    god ka matalab bola genretor operator director

  46. मैने ये पूरा लेख पढा और लोगो के कमेंट भी पढे और नतीजा ये निकला कि,

    1. ईश्वर अभी भी एक अबूझ पहेली है । जिसको अब तक कोई जान नही पाया और कई लोग गलतफहमी मे है कि हमने जान लिया ।

    2. मनुष्य ईश्वर को जैसे देखना चाहता है उसे वो वैसे ही दिखाई देता है । उदहरण के तौर पे मुसलमानो के लिये वो अल्लाह है । ईसाईयो के लिये वो प्रभु यीशु । वैष्णव जनो के लिये भग्वान विष्णु ।शैवो के लिये भगवान शंकर । शाक्तो के लिये भगवती जगदम्बा इसी प्रकार बौद्ध,जैन,पारसी,बहाई,सबके अपने-अपने ईश्वर है और उनको पाने की विधिया है ।

    3. अगर भगवान राम और भगवान कृष्ण नही थे । राम सेतु और समुद्र के नीचे पाई गई द्वारका किसने बनाई ।

    4. ईश्वर के नाम पर झगडा करने वाले, तर्क-कुतर्क करने वाले, अपने को सही बता कर दुसरो को नीचा दिखाने वाले
    धर्म के नाम पर झगडा करने वाले सभी मुर्ख होते है ।

    क्योकि जाकि रही भावना जैसई प्रभु मुरत देखई तिह तैसई ।

    • sri krishn aur raam ji ke astitv ko kaun inkaar kar raha hai ? vah ishvar nahi is baat ka inkaar jarur hai ! agar vah ishvar hote to sita ji ko dhudhne ki jarurat nahi padti “antaryami ” gun hone ke karan vah svamev jaan jate ki sita ji kis sthan par hai !
      agar sri krishn ji ishvar hote to mahabharat yuddh bhi kyo hota ishvariy gun hone ke karan duryodhan grup tatkal “ishvar” sri krishn ki baat maan lete !
      ab ishvar ka apman nahi kaha jayega ?
      kya tatkalin manushy, mitr jan adi kya sri krishn ji ko ishvar mante the?
      fir aaj bhi unko ishvar kyo mana jaye ?

      • Raj vai ..shri ram khudko kabhi v iswar nehin kaha agar wo chahte raban ko ek chutki me mardete ..kyun ki wo iswar ho kar v ek manab roop me the WO jantethe agar wo khudko iswar manke manusya jesi nehin karte toh WO srusti k birudh hoga ..log aur itihaas kehta k sri ram manab ho kar v manab jaisa dukh kast nehin jhela…kya iswar swayang khud kiya hua manab ka niyam tod dete …..kuch na kuch rahasya he Jo manab nehin janta

  47. agar shree krishna bhagwan nhi hote to meera ki bhakti me shakti nhi hoti.or hm hindu jis dharti pe rhte hai.use dharti maa mante hai.or uski puja krte hai.kya woh paap hai.kya apni maa papa ko ishwar manna v aapk liya maha paap hai.mahabharat me krishna ne arjun ko bishwaroop dikhya hai.usme 33koti devi devta tha.woh woh v aapk liya jhut hoga.to aap yeh bolo ki murti puja kisne suru ki or avi bht se jagha me mandir hai.jo bht log shakti pith mante hai.or woh sach hai.mujhe bishwas hai hamare tara pith mandir me.aap kisi baat ko puri tarha se socho fir bolo.jai maa kali

    • adarniy sri sanjay ji mira ji ki shakti apni thi vah kah-i bhi istemal kar sakti thi , sri krishn ji ishvarnahi he ek yogy manushy jarur the ! 33 devta apujy hai undevtao me vayu bhi kahi jati hai,batlaiye vayu ki pooja kis tarike se koi bhi karta hai dharti ko mata ek samman ki drishti se kah diya jayta hai .kyoki usse upje ann fal adi ke sevan se ham sabhi jivit rahate hai dharti bhi apujy hai ! uska sahi tarike se istemal jarur hona chahiye varna kitni bhi pooja kar lo usse koi laabh nahi hon e ]vala hai

  48. yeh aap kya kahe rhe hai.shree krishna v ishwar hai.ram v ishwar hai.aap kaise bol rhe hai hme puja nhi krni chiyea.mujhe bishwas hai.aapko kuch pta nhi hai.isi liya aap bol rhe ho.

  49. sir agar ishwar yogtaa ke anusaar hisab ka sukh chahte hain to janam aadharit aarakshan to us yogta ko pahle hi khatam kar deta hai………..jaise eklavya ki baat ho ya Birth based reservations means jaati waad ki
    tokya ishwar ved me jaati waad ko nahi likha hai…….kya shudra aur brahman insaan ke banaye hain ….ved ya ishwar is ki charcha nahi karte

  50. Bahut achha karya aap kar rahe hain, par meri aapse ek winti hai ke aap Quran aur Weda ke bich me jo aur samanta hai use thora aur likhen. Ek side weda ke vers ko to doosri traf Quran ke vers ko uske chapter name, number and vers number ke sath. Aisa karne se misconception remove hoga aur communication gap bhi khatam hoga. Istrah universal brotherhood ka concept logon ke bich khul kar aayega.

    • adarniy shri tauseef aap batlaiye ki quran me kaun si baat maulik hai ! kaun si baat ved aur quran me samanta ho sakti hai ! keval ek ishwar se baat nahi chalati uske gun kaise hai us par bhi vichar kijiye ! kalpit farishte hure, gilme jannat jahannnum adi ko kaise svikar kiya jaye kaise ek”simit ” singhasan me virajmaan allah ko svikaar kiya jaye ? jo simit ho vah sarvshkimaan bhi kaise ho sakta hai kaise vah sare bramhand ko banane vala bhi ho sakta hai !

    • Dear Vinod, Namaste!

      manthrochaaran se aap pe aur samaaj pe acha prabhaav padtaa hai. jab manthra ka uccharan hota hai, aap ke tan me ek tarah ke positive energy aati hai jis se aap ke karm ache honge aur uske phal bhee achaa hoga.

      Dhanyawaad!

      • मन्त्र के उच्चारण से अधिक महत्त्वपूर्ण है – मन्त्र के अर्थ का ज्ञान करना तथा तदनुसार अपना व्यवहार करना या व्यवस्था निर्माण करनी ।
        भावेश मेरजा

  51. question :-iswar ak matra karta hai , uski ichha ke bina patta bhee nahi hilta , ye geeta ya kisi aur granth me kis slok me hai
    please send mail.
    regard
    Chaman Pal Singh

    • adarniy shri chaman ji ishwar v jeev alag- alag hai. ishvar ke kary alag hai aur jeev ke kary alag hai ,ishvar nyay karta hai
      jeev karm apni ichha se karta hai !
      ishwar karma ka fal deta hai ?
      ishwar kya hai?
      ishwar ek nirakaar chetan shakti ka naam hai !
      ishwar ki koi ichha nahi hoti!
      ishwar ko dukh sukh nahi hota !
      khush v naraj bhi nahi hota
      jeev koi bhi karm kar sakta hai vah karmkarne me purn svatantr hai . achhe ya bure karm kar sakta hai . karmfal bhogne me partantr hai !
      prakaritik vayu jab chalti hai tab sare patte hilte hai. koi ek patta bagairn hile nahi rah pata kyoki vah svatntr satta nahi hai ! jad padarth matr hai.

    • मन्त्र के उच्चारण से अधिक महत्त्वपूर्ण है – मन्त्र के अर्थ का ज्ञान करना तथा तदनुसार अपना व्यवहार करना या व्यवस्था निर्माण करनी ।
      भावेश मेरजा

    • ईश्वर भी कर्ता है और जीव भी चेतन होने से कर्ता है । अतः कई कार्य ईश्वर करते हैं और कई कार्य जीव करते हैं ।
      सर्वज्ञ होने से ईश्वर के कार्य सदैव पवित्र और विशुद्ध रूप से निष्काम ही होते हैं – जीवों के परोपकार के लिए ।
      जबकि जीवों के कर्म अच्छे भी होते हैं और बुरे भी – अल्पज्ञ होने से ।
      भावेश मेरजा

  52. MUJHE AATMAHATYA KARNI H, PICHLE 3 SALON ME LAG BHAG 3 NOKRIYA RESINE DE CHUKA HU. KISIBHI JOB ME TIK NAHI PA RAHA HUN. PICHLE 6 MAHINE SE GHAR PAR HI HU, ME SCHEDUL CAST KA HUN ISS LIYE MERI SHADI ME BHI ADCHANE AAI THI, AB ME 27 SAL KA GRADUATE HU, MERE MA BAAP MERI BEHEN SE HI PYAR KARTE H. BEROJGARI, MEHGAI, BHRSHTACHAR, CASTISAM, PARENTS KA BHEDBHAV IN SABHI VAJAHON SE ME AATMA HATYA KAR RAHA HU. MERA BHAGVAN PAR SE PURA VISHVAS UTH CHUKA H, IS DUNIYA ME BHAGVAN NAHI H, AAJ 25 OCT 2013 H, AAKHRI SALAM [email protected] PUNE, MAHARASHTA, INDIA.

    • adarniy shri s ji ! agar parivaar vale aur jahaan aap naukari karte the apko naukari chodni padi to jara yah bhi sochiye ki kahai apke svabhav me to galti nahi hai !
      aap hargiij himmat mat hariye aap koi bhi chota mota vyapar karna chalu kar dijiye1agar punji bilkul nahi hai to kahi se bhi neem ki datun banakar rel v bas addde me subah bechiye , imli todiye ,usko bechiye ! nar ho n nirash karo man ko kuch kaam karo kuch naam karo ! yah jivan dukh aur sukh ka mishran hai ! apka age chalkar vivah bhi ho jayega ! koi chinta mat kijiye ! atm hatya karna ek gunah hai agar usme aap jara sa bhi asfal raha gey to apko jel ki saja bhi mil sakti isliye aisa kadam bhul karke bhi mat uthaiye !nhaams eaap sampark kijiy ham apka utsahvardhan avashy karenge !

    • yaar mein to 31 saal ka hogya hoon aajtak sex nahi kiya ..aur shaadi bhi nahi ho rahi//par intejaa r ka phaal milega ..marna bekar ki baat hai

  53. Respected Sir /Guruji
    Namaskar

    First of all we congratulate to you and your team that you have answered that questions which are confusing every time “what should we do or what should we not do ” I am very very agree that ‘God is One’ this is universal truth. I am very sorry but a question puzzling me that Bhagwat Geetas shloks this words of God Krishna. How? because earlier we discussed that God is one and he is NIRAKAR then how this is Gods Speak. Please explain it will be very helpful to me to spiritually connect to God.

    Narayan.

    • AGNIKART.com पे जो भगवत गीता का अनुवाद भाष्य है उसे पढ़ें , सारे संदेह पूर्ण रूप से मिट जायेंगे .

  54. Adhiktar log maante hai ki Ishvar(god) hai . Wo use dekh nahi sakte lekin use mahsus kar sakte hai. Ab vastav me ishvar kaisa hai aur uske kya-kya gun hai ye kahna bada muskil hai. Wo koi aakar le sakta hai ya nahi ye kahna bhi muskil hai. Log apne anuman ke aadhar par tarah tarah se ishver ki vyakhya karte hai. Lekin ishver aparimit hai aur uske liye kuchh bhi asambhav nahi hai. Ved ishver ki vyakhya “NETI- NETI”(neither this nor that) kah kar karta hai.

    • ishvar ke liye bahut si chije asambhav si rahati hai ! jaise ishvar mar nahi sakta, nasht nahi ho sakta, uska janm bhi nahi ho sakta hamar- aapka anya kisi ka bachpana isi umr me vapas nahi kar sakta ! ishvar niyambaddh hai ! niyam ke praitukul kaise uska acharan ho sakta hai ? ishvar kya hai? ek chetan shakti ka naam ishvar hai !

  55. इस्लाम में शहादा का जो पहला भाग है उसे लिया जाये : ला इलाहा इल्लल्लाह (सिर्फ और सिर्फ एक अल्लाह के सिवाय कोई और ईश्वर नहीं है ) और दूसरे भाग को छोड़ दिया जाये : मुहम्मदुर रसूलल्लाह (मुहम्मद अल्लाह का पैगम्बर है ), तो यह वैदिक ईश्वर की ही मान्यता के समान है ।

    Dusre Bhag ko kuy chod de, ham ne kab Hajrat Muhammad Mustafa (Sallaho Alaihi Wasallam) Ko Khuda ya Ishawar Allah Ke barabar makam diya.

    Ye Islam ka pahala kalam hian. Is ka tarajam aapne takriban sahi kiya, magar samjhaya galat. Aisa kuy karate hia.(Allah ke siwa koi Mahbood(Pujniy Nahi) Aur Hajrat Muhammad Mustafa (Sallaho Alaihi Wasallam) Allah ke Rasul hain).

    गब्रेइल ye koin hain. Shayad Jibril Alaihissalam ke bara main bol rahin hain. jaise 33 Dewata hamari jarurat puri kartain waise hi “Jibril Alaihissalam” Allah ki wahi nabi tak lane kam kartain hai.

    To Hajrat Muhammad Mustafa (Sallaho Alaihi Wasallam) Allah ke Rasool Aur Bande hian thik hain. Is se aur clear hua.

    • quran me koi “ek ayat” aisi nahi hai jisme kalma ho ! kalma ko aur achha bhi banaya ja sakta hai ” la ilaha ilillah jarra- jarra rasul ullah” manushyo ko vyaktivadi kyo banay jaye gunvachak kyo n banaya jaye 1 farishto ka koi vajud nahi raha hai, yah sab kalpit bate hai ! quran me to yah bhi batlaya gaya hai, farishto ke saath koi manushyo ka giroh badkari[ homo] karna sambhav tha !dekhe quran 11/77-81 ! batlaiye quran ki ayte” kis tarike se , kis dhang se ” farishte late the ! qurani allah sidhe muhammad ji ko sandesh dene kuyo asfal the ! satve asman se farishte kaun si savari ka upyogkarte the !ab jab muahm d jimarchuke hai tan unkomuslim bandhu namaz ke dauran “durud ” bheje yah kyo avshayk hai ? agar ishvar ka gun rasool banane k hota to rasoolaaj bh v age bhibanaye jate kya ishvar ka koi gun samapt bhi ho sakta hai ? isliye rasool y nabi banaye jane ka gun ishvar ke paas n pahale tha aur aaj hai aur n kabhi age rahega !

      • j yeh bata tum jis ishwar ko mante ho voh kiyun majboor h ki tum oxygen par jivit ho? kiyun hum aise ishwar ko manein jisne aisa raj nahi banAAA ya jo munh se dekhta ho? kiyun tum ankhon se dekhne par majboor ho? kia ise ishwar ji majboori kaheinge ji ki tum do tangon wale ho aur janwar chaar?

      • APKO ISHVAR KI BANAYI HUYI HAVA 1 ANKH KE MAADHYAM SE DEKHNE KI SHAKTI AUR PAIR SE CHLNE KI SHAKTI ME TAKLIF KYA HAI? USME APKO APTTI KYA HAI VAH AAPATTI AAP JARUR BATLAYE !HAMKO FARISHTO KE MADHYAM SE SANDESH DNE ME TAKLIF HAI SAMBHAV HAI KI FARISHTE NE USKE SANDESH ME MILAVAT SAMBHAV HAI! jaise musa ko sandesh dene ka dava quran karti hai vaisa hi sandesh muahammd ji ko dene ka prayas ho sakta tha fir qurani allah ne do niyam kyo banaye ? yah niyam paraspar virodhi kyo hai ?

  56. Shree Agniveer G,
    Sadar pranaam, ho sakata hai ki mere sawal me koi galti ho, to ek agyaani samajh kar khama karen. Me ye jaanana chahata hun ki, yadi me uss parampita iswar ki sakar roop se apane anusaar jo bhi aaj din tak seekha hai usi taraha pooja karata hon to kya me sahi karata hun? kya mann men me uss ishwar ko koi aakar de kar usase samandh isthapit kar sakta hon? kya wo sakar roop me meri prarthna swikaar karega? mandiron me jo murtyan aur ling sthapit hain unka kya mahatv hai, krapaya margdarshan karen. Dhanyawaad

    • jab ishvar ka sakar roop nahi hota hai tab uskisakar aradhna bhi kaise ho sakehgi? jab ham aap kisi se varta karte hai tab kya avaj [svar ]sakar hota hai ? kya hava dard bhukh ki murti bansakti hai ? ishvar kya hai ek chetan shakti ka nam ishvar hai? jab bahut pahale manushy redio ke madhyam se sangeet gane, samachar adi sunte the tab us sangeet gane v saachar par dhay lage the ya redio par dhayn lagaya jata hai ! isliye murti ke madhyam se ishvar ki aaradhna nhai hoti hai balki us muriti ki puja hoti hai ! ishvar ki ardhn a ke liye gayatri mantr ka jaap, om ka jap ishvar ke guno ka dhayan adi lagaya jana chahiye !

      • Wind has no shape or form . But he can take, God is beyond earthly limits,. No one can not. We might not beyond our grasp, Under our 5 consciousness (senses) as we think, and understand. We can’t do anything out of it. We can worship of god, So God has revealed as simple and earthy. we can understand that. I THINK SO…..

      • aap glt bol rhe hai.aap yeh bolo murti puja kb se suru hua hai.to aap yeh kahe rhe ho 51 shakti path jhut hai. puri me jagennath ki puja v aapk liya paap hoga.jagennath mandir bhagwan krishna ne khud sapna me raja ko kaha ki tm hmri murti bnao or fir woh murti bna or.or woh mandir me jitne v log prasad khate hai woh km nhi hota. na he kabhi prasad nast hota hai.mujhe pura beshwas hai.apne aaradha pr.or aap ka bs chale to hindu dharm he nast kr de.or aapke jhuti baat hme mannya nhi or jo aap se inse puch rhe ho aapko murti puja krni chiya ya nhi.to woh aap apne mn se pucho.aap ka dil agar jo kahe wah kro.jai shree krishna

      • adarniy sri smith ji , yah sapne sachhe nahi hote sapne vali baat hi galat hai jo bhi padarth hoga vah bantn epar samapt bhi hoga ! muritipuja karib 2500 saal se hi hai paahle manushy dhyan karte the !
        kisi vishvaas se sachhi ka pata nahi lagaya ja sakta vishvas ko andh vishvas me badalte der nahi lagti hai isliye sabhi vishvaso ki janch honi chahiye

  57. hellboy ji, ishvar ko parpt nahi hona hai ! ishvar to har jagah vyapt hai ham ap bhi usse alagnahi hai ishvar ke kuch gun dharan karna hai, uske liye dhyan samadhi ka hi rasta hai baki any koi rasta nahi hai ! ishvar ki ardhna se kya labh ho sakta hai ! jab ham dhyan ki avstha me ishvar ke gun ki charcha apne man me karenge tab uske gun bhi dharan karne ki ichha bhi utpann ho sakegi ! achhi disha ka chunav sambhava hai jisse vyakti ka bhala hosakega jab ishvar ki koi murti nahi hai hai, tab koi kisi murti ki puja karega to jiski murti hai uske gun a sakenge ishvar ke kaise a sakenge ! agar koi sangati karni hai to uske gun bhi dharan karne hote hai ! uske niyam bhi manne hote hai aisa na hi hosakta ki mansikta kisiaur ki banaye aur rasta koi dusra chune ! usse pathbharshtta kahi jayegi munh me raamaurbala me kuch aur ! sanyasi ji ne thik nahi kaha hai ishvar ki vyavstha me bhed hai alag rachnaye hai kahi pahad hai kahi nadi nale hai koi apni yogyta se bahut age badhta hai aur koi bahut mehanat karne ke bavjud nimntam star par rahata hai ! agar koi namaz padhta hai tab uska dhyan bantata hai usko uthna baithna sir jhukane ka bhi dhayn rakhna padtahai jab koi maurtipuja karta hai tab usko jal arpit karna pushp arpit karna hath jodna adi par bhi dhyan bantna hota hai isliye sabse achha dhayn hai ya kisi mantr [arth sahit] jaap karna shreshth kaha jayega ! ek samay me man me ek hi vicharlana dhayan kaha jayega ! usi ka manana karna uske gun ko samajhna fir uska acharan hi shreshtam kah ajyega 1

    • bhai sahab…. chalo main aap ki sab baate maani ….mujhe ye batao….Jo Ishwar Nirgun Niraakar hain….uske gun kaise aayenge….kaise uske gun ko apanayege aur kaise us par dhyan lagayenge…. is akhal sakal brahmand ke kisi bhi kaun me charchara jiva jagat me sb ka aakaar, mitte se bane ghade ko banane waala ek kumhara hota hain uski tarh jagat karan yani ishwar ka awasiya hi akaar hoga. jo nirgun aur nikaar hain wo kaise kis chiz ki kalpana kar skta hain ya bana skta hain.???

      • hell boy ji, jo chij nitrakar hoti hai vah sakar nahi hoti , skara aur nirakar parspar virodhi baat hai ! nirakar me sakar ke mukable me bahut jyada shakti hoti hai 1 nirgun v sagun kya hai jaise ishvar kisi ka bachpana vapas nahi kar sakta 1 vah koi kary niyam viruddh nahi kar sakta , vah dissra ishvar nahi bansakta v svayam samapt bhi nahi ho sakta 1 in avguno ko nirgunta kah jayega jo ishvar ke asnakhy gun hai hai usko sagunta kahbjayega jaise dayaluta karm fal dene vala, srishti karta adi hamare apke sharir ek suksham atma hai jisse sara sharir chalta hai gatiman rahata ankhe kan munh dimag adi chalta rahata hai jab yahi” jara si” atma nikal jati hai tab manusy ya janvar adi ka sharir bhi do kaudi ka ho jata hai usko kuch hi ghante ke andar ghar se bahar kar diya jata hai, yah kamal hai sharir me atma ke hone aur n hone ka ! ishvar kya hai? ek chetan shakti ka naam ishvar hai! agar ishvar sakar hota to itna vishaltam brahmand banane ke liye usko usse bada vishaltam akar lena padta 1 jo sambhav nahi hai shakti andar se nirman karti hai ! jaise garbhka abchha andar se viksit hota hai pushpo me gandh andar se ati hai ! ek bij me vishaltam vriksh ki shkti chipi hoti hai vah bij ko todne par dikhlai nahi padti lekin jab usi bij ko dharti me daal diya jata hai aur us bij ke ko uchit jal- vayu aursur se urja, roshni milti hai tab vah apni shakti ko prakat karte huye ped badhata hai ! fal patti ful deta anek tarah kki ashsdhiya bhi deta hai ! iskiye mukhy chijnshakti hoti hai vah nirakar hoti hai , bij me shakti dikhlai nahi padti ! ishvar me chetana hai, isliye vah karmfal bhi deta hai!

  58. Bhai isey padhe ….

    According to Vedanta, spiritual truth is eternal and universal: no particular religion or sect can have a monopoly on it. The truth that Christ discovered is the same truth that was revealed to the sages of the Upanishads; it is the same truth that Krishna and Buddha taught as well. Gautama said that there were many Buddhas before him, and in the years to come there will be many more manifestations of God on earth.

    Is there a purpose in all this? Yes. First, every avatar has a specific message to impart to humanity: Muhammad taught equality and the brotherhood of humanity; Christ revealed the primacy of God’s love over the letter of the Law; Buddha rejected priestcraft and taught people to be lamps unto themselves; Krishna taught mental equanimity and detached action; Ramakrishna taught the ideal of the harmony of religions. Each incarnation has a message particular to the age in which he appears.

    The second reason why the avatar incarnates is to reestablish the one eternal religion—spiritual truth. While every avatar has specific teachings, all incarnations come to pour spiritual fire into a world sinking into religious mediocrity. No matter where the avatar appears on earth, the entire world is uplifted and regenerated by his advent.

    Does this mean that, according to Vedanta, God can be realized only through his personal aspect? No. Does this mean that Vedanta says that we must think of God as a person? No.

    What Vedanta says is that God can and does manifest through human form, and that, for most people, it is easier to meditate upon and love a God with form rather than a nebulous idea of infinite being, consciousness, and bliss. This, however, is a matter of temperament. Many people achieve spiritual growth through meditation upon the avatar; they are followers of the path of bhakti yoga. Yet for others this is entirely the wrong approach: those who are more intellectual than emotional may well achieve greater spiritual awareness through jnana yoga.

    • hell boy ji , yah kaun sa siddhant hua ki bharat me ishvarsvayam avtar liya aur any desho me kahi ishvar ka putr kaha gaya aur kahi rasul nabi bhejne ka dva kiya gya !inme kaun si bat saty mani jaye jab ki tino jhuthi bate hai !ishvar ki vyavstha atalhai usme kabhi badlav nahi ata jaise aaj bagair avtar ke yah duniya ishvar chala raha hai vaise arambh se hai 1 jab samaj me dharm ke acharan me hani hoti hai tab samaj me se kuch vyakti samaj ka netritav karte huye samaj ko disha dene ke liya age a jate hai jaise, ravi daas kabir daas, mira baai. nanak ji ambedkar ji viveka nand dayanand, aur aaj raam dev ravishankar ji adi 1 yah sab apni svat:prerna se age aa kar samaj ko disha diya karte hai 1 isme koi ishvar haath nahi hota hai !

      • Raj. hdy bhai sahab:

        ye teeno baat saty bhai….. isme koi shak nhi hain…. uski kripa hi hain jo ye dunia chal rhi hain. “Geeta , 4-8 me bhagwan shri krishan ne kaha jab jab dharm ki haani aur adharm ka badata hain tab tab dharm ki isthapana krne ke liye har yug me aata hun”. ab aap geeta ko maante ho ya nhi…..ye mai nh jaanta hun. Aur bhai aap jin Mahanubhootio ka naam le rhe ho wo sb bhi avatarwad se hi jude hain.

        Swami Shivananda, one of Ramakrishna’s disciples, said: “If God does not come down as a human being, how will human beings love him? That is why He comes to human beings as a human being. People can love Him as a father, mother, brother, friend—they can take any of these attitudes. And He comes to each in whatever form that person loves.”

        aur jitani meri samjh hain aur ved bhi kehta hain….. wo ek hain ….sirf ek. aur jo maine jaana hain ishwar niraakar nirgun brahm hain, parantu jab human form me aata hain wo sadaakaar sadgun brahm ho jata hain jaise bhagwan krishn, ram, shiv etc. etc.,

        aap kisi ki bhi pooja karlo end of the day aap us almighty god ko hi puj rhen honge…. aur bhagwan aap k aur meri tark vitark se kahin upper hain ved bhi kahete hain usey jaana nhi jaa skta hain, tark, bhakti, dhyan, ved etc. jaane ke marg ho skte hain.

        ab is tark vitark ko idhr hi viram dente hain “Om Namah Shivay”

      • hellboy ji , ap kah rahe hai ki tiino bate saty hai jabki yah paraspar virodhi hai ! beshak ishvar ke gun asankhy hai, aur manushy simit buddhi vala hai , usko pura koi bhi manushy nahi samajh sakta fir bhi uske kuch sidhant to jarur samjhe ja sakte hai ! sri krishn ji ne apni mnokamna pesh ki jab jab dharm ki hani ho tab ham dharm ki hani roke , lekin deh jab aneksadiyo tak gulam raha, dhamik kahe jane valo me mansahar nasha vyapt hone laga gulami ka jivanmajburan jhelna pada tabhi koibdharm ki raksha karne nahi saka ! mahavir ji buddh ji jaise anishvarvadi yo ka varchasv bhi hua f ir koi dharm ki raksha karne nahi saka desh ka vibhajan hua tab yah sthan rikt raha !a!ur aaj bhi rikt hai !ishvar ki aradhna sirf dhyan se samadhi adi se sambhava hai ! baki nahi jiski aap aradhna karenge vahi to apke dhyan me rahega ! kisi aur ki aradhna ishvar konkaise parpt ho sakegi ! agar apko shitalta chahiye to barf ke pas jana hi hoga !

      • bhai

        apne kaha ki ishwar ki ardhna krne se ishwar prapt hote hain, bhai ye baat saty hain but ye baat puri bhi hain……………. ishwari ki kisi bhi rup me aradhana krne se hi ishwar ki prapati hoti hain uski kripa milti hain…. Ishwar vishal me itna vishal hian aur suksham me atti suksham ki hum jaisa sadharan manusiya uski kalpan bhi nhi kr skta hain. is hi liye manuyash uske vibhin rupo me uski aradhana karta hain. Jab wo usey dunia k racheyata k rup me dekhta hain to wo brahma hota hain, jab paalak k rup me to Vishnu aur Ashubh ko shubh krne ya Mirtu se jeevan ke Rup me to wo Shiv ki ardhana karta hain, jaise hum log apne jeevan kabhi bhai hote hain kabhi baap, beta dost adi na jaane kitne role play krte hain phir end of the day hum wahi rhte hain na ..humari pahenchan to nhi change ho jati hain, Ushi parkar ram kaho krishan kaho ya kaho shiv….marne k baad ho aap ushi paas jaana hain …………. ye logo ka niji faisala hain ki wo uski kis rup me ardhana kare, aur bhai shitalta ke liye barf k nhi paani ke paas jaana padta hain kiu ki barf ki taasir garm hoti hain…. kabhi barf k hath me rkh kar dekhna kuch der me hath me jalane hoti hain. bhai rahi desh batware ki baat to bhai desho ka batwara…….. har yug me hota hain aaya ……..har desh me hota rha hain aur ye desho ka batwara humari aur aapki nazar me hua hain ishwar ke liye to hum jaise hi han, Final words:- bhai aap kuch bhi kaho dunia alag alag ke log hain wo alag avatara ya god ko ki aradhana krte hain………..phir unme ek hi chiz commen hain ishwar ki ardhana isey ko fark nhi padta hain ki mai murti pujta hun yaar ek ishwar ko maanata hun…. ek baar mujhe ek sanyasi ne kaha tha kabhi ki jo Bhagwan me bhed (chhota- bada, iska marg thik hain ya uska galt) krta hain wo murkh hain…ishwar kabhi bhed krna nhi sikhta hain.

  59. idhar dekh kar aisa lag rha hain ki log Ishwar ko jaanane me kitna busy hain……..sb Ishwar ko jaanate hain ….jo nhi jaanata hain wo bhi behas kar rha hain… sirf aur sirf tark aur vitark ho rha hain aur kuch nhi … jiska hal kuch nhi nikalega …. ye internet par faltu bakk-2 krne se badia apne bhagwan par dhyan lagao apne ander ….ishwar se sakshatkar ho jayega…… zindagi bahut chhoti hain ved aur kuran ke chakkar me…….barbad ho jayegi… bas ye jaan lo jis ki bhi puja ibadat karte ho usey sache dil se maano… aur haan puja, ardhana aur ibadat krna sb ka personal matter hain ……………agar koi murti pooja krta hain to usme kya galt hain……… apne ander dekho na ki dusare ke ander.

    mai ek murkh hun itna hi jaanta hun …………..na maine kbhi ved padha aur na kbhi kuran……… kiu ye sb mujhe confuse kr deti hain………. ek bolta hain ishwar ka koi aakar nhi hain aur phir ye bhi bolta hain ki wo apne singhasan par baitha hua hain…….. are jb kis ka koi aakar nhi hain to wo singhsan par kaise baithega bhai……….. haan ek baat jo sach hain ishwar saty hain…. aur ishwar hi apne bhakto ko bachane avater le kar aata hain……. vahi andhre me roshni dekhta hain….. agr ye baat galt lage to batao

    agar kisi ko meri baat buri lage…………….to mai isme kuch nhi kr stka hun 😛

    • hell boy ji, agar ishvar avtar lete hote to vahaaj kyo nahi lete batlaiye abtak kitne manushyo ke bich me ishvar m[ne avtar liya hai 1 agar ishvar apne bhakto ki raksha karte hi=otev to abhi uttraakhand me kyo nahi apne bhakto ko bacha liya ? karib 5000 se jyada[ sarkar ke anusar] kyo mar gaye! kumbh me bhi ilahabad me bhi kuch vyakti b hagdad me mar gaye the! jab kisi murti vishesh me ishvar hai hi nahi tab ishvar ki aradhna bhi kaise ho sakegi 1 kya bhukh dard hava adi ki murti bansakti hai tab ishvar ki murti kaise ban sakegi ? ishvar ki aradhna to to dhyan ke madhyam se hi ho sakti hai! ishvar ke jo niyam hpte vhai vah anadi kal se v ananat kal tak ek saman rahate hai! usme badlav kabhi nahi hota, agar ishvar ka avtar ki vyavstha hoti to aaj bhi koi n koi ishvar ka avtar avashy hota! kyo apna desh gulam hota v jab muglo ka julm ho raha tha, jab desh ka vibhajan ho raha tha jab vishv yuddh ho raha tha, tab ishvar ne avtar kyo nahi liya ? yahbishvar ka tathakathit avtar”sirf” apne desh me hi kyo hota hai kya sari dharti ishvar ki nahi hai fir any desho me ishvar ka avtar kyo nahi hota hai1 isliye ham kahana chahhenge ki ishvar ke avtar hone ki vyavstha hi nahi hai ! manushyo ka [jiv ka] avtar punarjanm ke madhyam se avashy hota hai

    • hell boy ji, agar ishvar avtar lete hote to vahaaj kyo nahi lete batlaiye abtak kitne manushyo ke bich me ishvar ne avtar liya hai 1 agar ishvar apne bhakto ki raksha karte hi=otev to abhi uttraakhand me kyo nahi apne bhakto ko bacha liya ? karib 5000 se jyada[ sarkar ke anusar] kyo mar gaye! kumbh me bhi ilahabad me bhi kuch vyakti b hagdad me mar gaye the! jab kisi murti vishesh me ishvar hai hi nahi tab ishvar ki aradhna bhi kaise ho sakegi 1 kya bhukh dard hava adi ki murti bansakti hai tab ishvar ki murti kaise ban sakegi ? ishvar ki aradhna to to dhyan ke madhyam se hi ho sakti hai! ishvar ke jo niyam hpte vhai vah anadi kal se v ananat kal tak ek saman rahate hai! usme badlav kabhi nahi hota, agar ishvar ka avtar ki vyavstha hoti to aaj bhi koi n koi ishvar ka avtar avashy hota! kyo apna desh gulam hota v jab muglo ka julm ho raha tha, jab desh ka vibhajan ho raha tha jab vishv yuddh ho raha tha, tab ishvar ne avtar kyo nahi liya ? yahbishvar ka tathakathit avtar”sirf” apne desh me hi kyo hota hai kya sari dharti ishvar ki nahi hai fir any desho me ishvar ka avtar kyo nahi hota hai1 isliye ham kahana chahhenge ki ishvar ke avtar hone ki vyavstha hi nahi hai ! manushyo ka [jiv ka] avtar punarjanm ke madhyam se avashy hota hai

      • @raj.hyd

        Bhai sahab… ishwar mere ya aapke kehne se to avater lenge nhi…..aur rhi uttarakhand me tabahi…..ki baat bhai wo manusya apne karmo ka dand bhugat rha hain….. agar ko ufaan maarti nadi me khud jaaye aur ye bole ki mera ishwar mujhe bacha lega….. wo murkh hain kiu ki wo khud ko vipatti me daal rha hain kedranath aur uske aas paas ke area me jo bhi hua wo sb hum log ka kiya dhara hain…. humne hi enviroment se chher chhad ki…. iska jo natija hua wo hum sab ke saamane hain…. aur ye jaruri nhi jb manushya vipda me hota hain bhagwan usey bachne swam aate hain… wo apne kisi aur madhyam se vipda ka samadhan krte hain…. aur rhi world war aur desh vibhazan ki …… baat ye dunia bhagwan manushy ko jivan jee aur apne jivan ka sadupyog krne ke liye di hain ab manushy swam ke pair par kulahdi maarta hain wo ishwar bhi kya kr skta hain…… Ishwar har jagah hain…. to kya wo murti me nhi ho skta hain??? bhai jara mujhe ye batao, kya koi hawa me dhyan laga skta hain mujhe batao…… usey kis chiz ka sahara to lena hi hota hain Chahe aap usey OM kaho yaa kis ishwar ki murti…. agar Ishwar sb jagah to Murti kiu nhi hain.? agr wo murti me nhi hain to wo sarvyapi kaise hua…..??? Ved Kehate hain Ishwar ke liye koi Pratima nhi hain …. but ved ye bhi kehta hain ki Ishwar pratima nhi hain…??? aur avter to ishwar har yug har desh kaal me leta aaya hain…..bhai…… ye adami ka pravarti hi hain jo shak karti hain…

      • hell boy ji, apki bahut si bate saty hai! bas, hamare v apke bich me avtarvad par jarur matbhed hai 1 batlaiye apke anusar sabse pahale ishvar ka avatar kab hua tha? jab bhi hua tha kya uske pahale jab vah avtar nahi hua, tab kya yah duniya nahi chal rahi thi ! fir ishvar ko avtar lene ki jaruat hi kya hai ? sath me yah bhi batlaiye is desh ke alava any kisi desh me ishvar ne avtar kab liya hai aur us manushy ka kaya naam tha ! apne samaj ke dharmik vidvano ne to anishvarvadi buddh ji ko avtar ghoshit kad iya kya ya hasyaspad baat nahi hai ki ishvar ne avtar liya aur usi ne ishvar ko hi nahi mana !

      • Raj. hyd:

        bhai sahab…….. ye to main nhi jaanta hun ki ishwar ne sab se pahale avatar kab lia but hindu mythology ke anusar……har yug me ishwar ne avter lia hain… chahe wo ram ho krishn ho ya, vishnu bhagwan ke sb avtar….!!! ishwar tbhi avatar leta hain jab manuyash jaati apne dharm path se vimukh ho jaati hain ……….aur usey saty ka marg dekhane k liye avtar lena hi padta hain. App kahe rhe ho bhai “”jab bhi hua tha kya uske pahale jab vah avtar nahi hua, tab kya yah duniya nahi chal rahi thi ! fir ishvar ko avtar lene ki jaruat hi kya hai ?”” ye dunia shuru se chal rhi hain………. agar ye dunia apne aap chal rhi hain to phir is dunia me kisi god, bhagwan aur ishwar ka astitav nhi rha jata hain……….hum sirf bhed chaal chal rhn hain. ye ved ye geeta, ye kuran bible sb jhut hain……….kapol kalpana hain……… god ek myth hain phir bhai. aur har dharm me avater hua hain Christianity me hi le lo…….. ishmasi ko ishwar ka putra bolte hain……… iska mtlb kya hua phir ishwar ki biwi bhi hain……. ya usne avatar lia??

  60. Aap log jitna bhi samjhao maan singh samjhne wale nahi lagte. aisa prateet hota hai ki mansingh sabkuchh
    jante hue b ap sab ko pareshaan kar rhe hai unhe achhi tarah maloom hai ki quran ki adhiktar bate patchne wali nahi hai. Aur Adhunik hindu gumrah ho gaya hai lekin unka veda abhi tak koi galat sidh nahi kar saka h
    manshingh ke 9 sawalo ka uttar to unhe khud maloom hai. unke kuchh sawal to adhunik hindu se hai jo vedoqt na hone se ham uska jawab q de ? aur jo vedo se uthe sawal hai uske liye ap ek baar phir se satyarth prakash pade .

  61. pehale to jitane bhi log kisi bhi web side per comiet karte hai orrganal id de saath baithe aur apni id banaye . . . is ko must karna hai bahut jaruri

  62. priy santosh ji nanak ji isa ji buddh ji mahavir ji ravidaas ji adi shankrachary adi ka koi vishesh guru nahi tha ! ishvar jab nirakar hai tab uske darshan bhi kaise ho sakte hai ishvar to mahasus kiya jata haijab ham sab svanso ke madhyam se partipal ishvar se jivan prapt karte hai yahi ishvar ko mahasus karne ka sabase bada karan bhi hai ishvar kan kan me hai uska gyan kan kan de raha hai bas lene vala jarur chahiye! ishvarne kisi ko apna ejent niyuktnahi kiya hai jo svayam gyani ban jay=te hai v iska adhikar rakhte hai vahi samaj ko shiksha dene ka kary bhi karne lagte hai

  63. aap ye kaise kah sakte hain ki, eeshwar ko janne ke liye kisi agent ki jarurat nahi hoti…? waise bhi Ram Charit Manas me kaha gaya hai ki ” Guru Bin Bhavnidhi Tarahi Na Koi, Jo Birancha Shankar Sam Hoi” aur tamam granth bata rahe hain ki parmatma ka darshan ees dharti par jab bhi kisi ko hua hai to Satguru (True Master) ke dwara hua hai. Arjun ko Krishna se, Meera ko Ravidas se, aur bhi jinhone ees gyan (Nirakar Eeshwar) ko paya, un sabne guru ke dwara hi paya. So, aise satguru Agent nahi balki khud manav ka roop lekar samay – samay par ees dharti par avtarit hokar apne nirakar roop ki jankari karata hai.

  64. Respected Sir,
    Truth is god and unlimited, we know by this uploading knowledge. Curiosity is why we rebirth and why we not remember previous birth. If rebirth is always will the why population to be increased in multiple manner ?

    • When we say that “Truth is God” its meaning is that God is All-knowing and His knowledge is always true, or God is a reality, a really existing substratum.
      Alternatively, we can also say that through truth or truthful life one can know Him.
      Rebirth provides opportunity to the individual soul to enjoy fruits of actions done in the previous lives and in the current life.
      Human being is both – Karma Yoni as well as Bhoh Yoni. Means in human life, the soul does fresh actions and also enjoys fruits of actions done in the previous human lives.
      All other Yonis except Human, are Bhog Yoni. They are just to enjoy fruits of deeds done in the previous human lives.
      God has made such a nice arrangement that we can not remember about our past lives. This is a great mercy on us that we don’t know any thing of our past lives. Otherwise, our present life would have been miserable because of manifold complexities.
      Even great Yogis may be knowing some thing about their past lives based on inference – not very precisely.
      Only God being eternal and omniscient entity knows every thing about the past of all the souls.
      We humans do not and can not know the exact number of the souls existing in the universe, including the souls in emancipation or liberation.
      We only knows approximate number of human population staying on this small planet earth. We don’t know the total population of human beings existing on the other planets in the cosmos.
      Bhavesh Merja

  65. Mangish bhai,

    Ishwar/Allah ko koi patent nahi kara sakta hai. Koi religion ye nahi kah sakta ki Ishwar sirf usi religion ko follow karne walo ko jannat bhejta hai. Wo sabka hai. Wo sabko uske karmo ka fal deta hai. Ishwar ko pane ke liye kisi khas religion ko ya kisi khas prophet ya sadhu sant ko manna jaruri nahi hai. Khuda aur bande ke bich koi tisra nahi hota hai jo use religious ya kaafir hone ka certificate de.

  66. shri maan ji batlaiye kya allah apka hamara ya kisi ka bhi bachpana vapas kar sakta hai? agar vah apni marji se karta hai hamare apki marji se nahi karta to kyo usse mannte mangi jati kyo duvaye ki jati hai ? kya vahhamari halato se parichit nhahi vah chahega to apni marji s de dega usse kyo manga jata hai jaise manmohan ji ne kabhi p.m/ k post nahi mangi fir bhi unko mil gayi !aisa kam se kam sabhi muslim to kar hi sakte hai 1

  67. Namaste agniveer ji me aapko anek anek dhanyawaad daita jo aap hamare dharm ko promote kar rahe ho aur hamare dharm ke baare me jo galatfemiya hai use dur kar rahe ho ishwar aapko lambi umr de sir plz mujhe in prashno ke uttar bhi de ved ke anusaar supreme god ka naam kya hai aur sanatan dharm me om symbol ka arth kya hai

  68. manniy sri maan ji agar tretvaad galat hai to batlaiye alalh ne kaynaat kaise banali aurallah ke gun is kaaynaat me kyo nahi hai jiv [rooh]me gun alalh ke kyo nahi hai jisse jo chijbantai hai usme vah gun bhi hote hai jaise jab lakdi se kursi mej adi banaye jayenge tabusme lakdi ke gun bhirahenge jevar jab abnega tabusme sona bhi rahega ! isliye tretvad sahi hai n ki allah vaad ?

    • @Raj bhai,phir wahi baat.aap ishwar/Allah ko insani nazriye se mat dekhen, Ishwar bhale hame hamare nazriye se samajhata hai. Aap tretvaad ko sahi sabit karne ke liye Ved me bataye kahan likha hai ki ” Ishawr ne manushya/jiv ko nahi banaya,kewal sharir banaya,atma ishwar ne nahi banaya” adhyay/sukt no zarur bataeyega.Kya baat hai, Ishawar sara sansar banane ki takat rakhta hai, par jiv/atma banane ki takat nahi rakhta.Phir to vedic ishwar sarvshaktimaan nahi hona chahiye,aapke hisab se.

      • @Maansigh
        Agar aapka Iswar Aapko (Maan Singh Ji ko) Ishwar banane ka samarthya nahi rakhta aur na hi Iswar aesa pahaad banane ka samarthya bhi nahi rakhta jisko vah utha sake. Ishka matlab hai ki aapka iswar bhi sarv sakti shalli nahi hai. Qya mai thik hu. Aapka Iswhar aapko purn gyanwan, shaktiwan, aur amar babane ka samrthya nahi rakhta hai to aapka iswhar kamjor hai. Qya me thik hu.

      • @Maansigh
        Agar aapka Iswar Aapko (Maan Singh Ji ko) Ishwar banane ka samarthya nahi rakhta aur na hi Iswar aesa pahaad banane ka samarthya bhi nahi rakhta jisko vah nahi utha sake. Ishka matlab hai ki aapka iswar bhi sarv sakti shalli nahi hai. Qya mai thik hu. Aapka Iswhar aapko purn gyanwan, shaktiwan, aur amar babane ka samrthya nahi rakhta hai to aapka iswhar kamjor hai. Qya me thik hu.

      • @Snatan
        Nahi aap galat ho.Ishwar kya banane ki shakti rakhta hai aur kab, ye wohi janta hai. Uski jab marji jo karna chahe karta hai, sab uski control me hain. aapke/mere anusar woh nahi chalta. Woh jo chahe bana sakta hai kar sakta hai.

      • ye to aap tabhi samjhoge jab aap satya ki paribhasha karoge !..to apko challenge hai ki pehle satya ki paribhasha kar ke bataye !

    • ati samman ke yogy sri maan ji , sarvshakti maan ka yah arth nahi hota jo ap kar rahe hai tab to ham yah bhi kahana chahenge ki hamare ghar me jab roti ishvar nahi bana sakta to kahe ka ishvar sarvshaktimaan kaha jaye ? dekhiye rigved mandal 1- sukt164- mantr 20 jisme jiv v ishvr alag batlaye gaye hai dekhe shevta upnishad adhyay 4 mantr 5 isme bhi isiki pushti hai !apke hisaab se agar ishvar ne jiv ko nbanaya hai to jiv to jhuth dhokah beimanu bhi kar leta hai ishvar to yahnabhhi karta to ishvar ke svbhavik gun jiv me kyo nahi aye ? jaise haluye me ate ke gun majud rahate hai ! aur ate me genhun ke gun majud rahate hai ! hamari baat samajhne ki koshish kijiye 1

  69. @Ankur bhai
    Meri soch aur sochne ka area pehle se kafi badh gaya hai.Lagta hai aap bahut jaldi bazi me uttar dete hain aur apne jaisa sabko samjhte hain. Pehle to yehi nahi mane ki ye ved ka hi mantra hai aur man liya to alankar ki bat karte ho. Aapne woh link nahi padha,nahi to aisi behaki baate nahi karte. Pehale us link pe jake padho ‘aapki kursi’ ka answer mil jayega. Ved me alnkar mante ho aur Quran me nahi,wah ji wah kya ek tarfa soch hai. Any way apne jo Q2:66 puchha hai woh bhi galat puchha,shayad 2:72-73 ke baare puchhna chahte the aap. Koi nahi, ye to Ishawar ka chamtkar tha jaisa Vedo me bhi hai..dekhen– 2. ऋग्वेद 4/19/9 के अनुसार दीमक द्वारा खाए गए कुँवारी के बेटे को इन्द्र ने फिर से जीवित किया और सारे अंगों को इकट्ठे करदिया.
    वम्रीभिः पुत्रम अग्रुवह अदानं निवेशनाद धरिव आ जभर्थ |
    वय अन्धो अख्यद अहिम आददानो निर भूद उखछित सम अरन्त पर्व ||
    अर्थात “हे इन्द्रदेव, आपने दीमकों द्वारा भक्ष्यमान ‘अग्रु’ के पुत्र को उनके स्थान (बिल) से बाहर निकाला। बाहर निकाले जाते समय अंधे ‘अग्रु’-पुत्र ने आहि (सर्प) को भली प्रकार देखा। उसके बाद चींटियों द्वारा काटे गए अंगों को आपने (इन्द्रदेव ने) संयुक्त किया (जोड़ा).”

    • @Maan sigh : the question about sura Al-bakr the context starts from 2:66 only and ends at 73 — isliye maine kaha tha 2:66 ke aage kripya dhyan se padha karen, aap mere shak ko vishwas mein badal rahe hain.
      Mere sawalon ka jawab to diya nahi aapne sirf quran ki aaya ki numbering ko leke baith gaye, yehi sidh kar deta hai aapko koi samajh dar vartalap mein interest nahi hai.
      If you have to respond in this way without responding point-to-point then i am not interested in going any further. .
      aur rahi 4/19/9 ki bata jaise maine kaha yeh kurani login ki aadat hai jhoot pehlana jab tathyon/facts ke aadhar pe khare na utren.

      is mantra ka arth yahan dekhe.

      http://aryasamajjamnagar.org/rugveda_v2/p62.htm

      han aur jaisa maine kaha aur phir kehta hoon agar aap seedhe prahna ka uttar nahi de sakte to kirpa karke time waste na karen. kise na aapko majboor nahi kiya ki is website pe aayein.

      • @Ankur, I am not so skilled and knowledged like you to make himself fool.I have replied ur question about “..murderer will be pointed at..” that it was a miracle.pls read carefully.And then I gave 4/19/9 reference for miracle in Veda also..pls see for 4/19/9
        http://literature.awgp.org/hindibook/vedPuranDarshan/rigved/rugavedabhaaga2a.85
        I don’t know who is telling a lie you or gayatri pariwar, there is no relational b/w both translation. Main hawa me baat nahi karta tathya samne rakh diya. Par lagta hai aap log bas hawa me hi baat karte ho. Apki ‘kursi wali bat clear na huyi ho —http://www.islamhinduism.com/responses/arya-samaj/297-allah-arsh-arya-jawab-sky — pe jake padhen.Lagta hai aapne padh nahin.

      • Dekhiye maan singh ji main aapse bahas nahi karna chahta kyonki mantrarth samajne ke liye pehle mujhe aapko sanskrit sikhqni padegi aur iske liye mere paaas samay nahi hai acha hogo jo aapko sahi lage aap woh karen aur mujhe shama kren mujhse hi bhool hui jo me aapse uljha
        Dhanyavaad

      • @Ankur
        koi baat nahi, mujhe sanskrit aati hai 10+2 tak padha hu. Aapka bhi bahut-2 dhanyavaad.

  70. उत्तरः १. सर्वव्यापक ईश्वर चार सर्वाधिक पवित्र आत्माओं के अंतः करण में ज्ञान का प्रकाश करता है । २. मृतक को विधि पूर्वक जलाना ही वेदोक्त – सर्वोत्तम पद्धति है । ३. ईश्वर को – ईश्वरीय दिव्य गुणों को आदर्श बनाया जा सकता है । मनुष्य अल्पज्ञ, अल्प शक्तिमान होने से आंशिक रूप में ही आदर्श बन सकता है । ४. “आर्य” का अर्थ है अच्छा, जेन्टलमेन, सभ्य व्यक्ति; वह विश्व में कहीं भी हो सकता है । ५. अविद्या-अज्ञान आदि के कारण लोग ईश्वर का यथार्थ स्वरूप नहीं जानते और उसे गलत ढंग से पाने का प्रयास करते हैं । ६. स्वामी दयानन्द आदि ने सिद्ध किया है कि नियोग वैदिक है, आपत्काल में सभ्य संस्कारी समाज में उसका विधि-विधान पूर्वक प्रचलन होता था । ७. मन्दिर में किसी तथाकथित जाति के लोगों को प्रवेश न करने देना मानवता का अपमान है । वैसे आजकल इन मन्दिरों में शांति पाने के लिए या ईश्वर-प्राप्ति के लिए जाना समय को नष्ट करना है । ८. मूर्तिपूजा अज्ञान जनित है, उसे ज्ञान के प्रचार से दूर करने की आवश्यकता है । जबरदस्ती नहीं करनी चाहिए । ९. आश्रम में धार्मिक प्रवृत्ति होनी चाहिए – स्वाध्याय, तप, पठन-पाठन, योगाभ्यास आदि । अनुचित कार्य करने वाले “बाबाओं” का त्याग करना चाहिए और अधिकारियों से उन्हें यथायोग्य दंड भी देना चाहिए ।

  71. 5. Jab ishwar ek hai nirakar hai to uski alag-2 namo se devta bata kar murti puja kyon karte hain?
    6. Kya niyog pratha sahi thi agar nahi to ye satya hai ki vedon me aap jaise logon ne apna mantra milaya.
    7.Daliton ko mandir me jane se kyon roka jata hai, kya woh insaan nahi, ya ishwar unke nahi hain?
    8. Agar murti puja nisedh hai to apne desh ke mandiron se murti aap lig kyo nahi hatwate aur bolte ki nirakar bramh ki upasana karo.
    9. Aaj kal litne ssare baba log hain aur apne ashram me avivahit nariyo ko rakhte hain aur unke sath sote hain, kya ye allowed hai?
    Ye sare jawab swami agniveer ji se likh kar aap denge ved ke marfat(slok ya mantra number ke sath) to main hindu rahunga nahi to main islam kabool kar longa. Main murti puja chhod diya hai,main mughalon, muslim akraman kariyo ko muslim nahi manta woh bhi islam ko badnaam kiye.

    • उक्त नव प्रश्नों के उत्तरः
      १. महर्षि दयानन्द रचित सत्यार्थ प्रकाश का ७वां समुल्लास तथा ऋग्वेदादिभाष्यभूमिका के आरम्भ के प्रकरण पढ़ने से वेद विषयक इस प्रश्न का सम्यक् उत्तर मिल सकता है । सर्वज्ञ सर्वव्यापक ईश्वर ने सृष्टि के आरम्भ में सर्वश्रेष्ठ चार ऋषियों के अन्तःकरण में ज्ञान प्रकाशित किया, जिसे ‘वेद’ कहा जाता है ।
      २. वेदानुसार सर्व मनुष्यों के मृत देहों को अग्नि में विधिपूर्वक जलाना ही उत्तम है ।
      ३. कोई एक ही मनुष्य सभी प्रकार के ज्ञान-कर्म-उपासना के लिए आदर्श नहीं हो सकता । क्योंकि मनुष्य अथवा जीवात्मा स्वाभाविक रूप से अल्पज्ञ – अल्प शक्तिमान है । केवल ईश्वर ही सर्वज्ञ – सर्वशक्तिमान है । ईश्वर को – ईश्वरीय गुणों को आदर्श बनाया जा सकता है ।
      ४. “आर्य” का अर्थ है अच्छा, सज्जन व्यक्ति – जेन्टलमेन । वह भारत में भी होता है, अन्य देश में भी । यह गुण बताता है, किसी तथाकथित जाति नहीं ।
      ५. ईश्वर का वास्तविक स्वरूप जैसा कि वेदादि ग्रन्थों में बताया गया है उसे ठीक से न जानने से तथा मत-पन्थ-मजहब-संप्रदायों के द्वारा किये जा रहे मिथ्या प्रचार के कारण एकेश्वरवाद लुप्त होता जा रहा है, और लोग जड़ पदार्थों को चेतन परमात्मा समझने की भूल कर रहे हैं । ईश्वर एक निराकार सर्वव्यापक चेतन सत्ता है, उसकी कोई मूर्ति या चित्र आदि हो ही नहीं सकता । यह बात का प्रचार करने की आवश्यकता है ।
      ६. महर्षि दयानन्द जी के ग्रन्थों में प्रतिपादित किया गया है कि नियोग का वर्णन वेदादि में है । आपद्काल में यह सामाजिक प्रथा का प्रचलन किया जाता था, ऐसा उन्होंने बताया है । उसके भी विवाह के समान कई सामाजिक नियम-प्रबन्ध आदि होते थे । ब्रह्मचर्य या संयम को जीवन का आदर्श मानकर चलने वाले उत्कृष्ट वैदिक समाज में विशेष स्थितियों में नियोग का प्रचलन आवश्यकता अनुसार नियम पूर्वक होता था ।
      ७. किसी वर्ग विशेष के व्यक्तियों को मन्दिर में प्रवेश करने से रोकना सर्वथा अनुचित है । ऐसा करना मानवता के विरुद्ध है । वैसे आज के मन्दिरों में ईश्वर-उपासना या शांति की प्राप्ति के लिए जाना अपने अमूल्य समय को नष्ट करना है ।
      ८. आर्य समाज के कई निष्ठावान विद्वान् और उपदेशक लोग मूर्तिपूजा की वास्तविकता का ज्ञान लोगों को निरन्तर करा रहे हैं । मूर्तिपूजा अज्ञान जनित दोष है, उसे ज्ञान से ही दूर किया जा सकता है । इस कार्य में पर्याप्त धैर्य एवं परिश्रम की अपेक्षा है ।
      ९. आश्रमों में धार्मिक कार्य, तप, स्वाध्याय, योगाभ्यास, सेवा, पठन-पाठन आदि कार्य ही किये जाने चाहिए । साधु-संन्यासियों को स्वयं अनुशासन में, संयम में रहना चाहिए, तपस्वी रहना चाहिए । अनुचित कार्य करने वाले “बाबाओं” का त्याग करना चाहिए, और अधिकारी लोगों के माध्यम से उन्हें न्याय पूर्वक दंड भी देना चाहिए ।

    • Sri Maan Singh Ji, kya aap ye batane ka kasta karenge ki wo kaun si baate hain jo Islam ko Hindu dharm se shresth banati hain.

  72. Dear Agniveer ji, pranam

    Meri wife muslim hai aur main bhi islam apnane ki soch raha hun.main hindu dharm ki in complexity me confuse ho gaya hun aur samjh gaya hu ki aap log jaise hi log vedon me bhi badlao karte chale gaye sanatan dharm ko bigadte chale gaye. Maine isi site pe aur bhi debate padhe aur socha kaise hain ye aryasamaji log jo apne hi ved par wiswas nahi karte,Ram,Krishna,Shiv aadi ko hi galat sabit karne me lage huye hain.
    Main swami sarswati ji ki kitab styathprakash aur kuran padh raha hu aur tulna karta hun ki swami ji bahut jagah jhuth lika hai aur anya dharmo ki khub aalochna ki hai.
    Mera kuch sawal hai aapse jo mujhe jyada hi confuse kiye huye hain–
    1. Jab ishawar aur insaan ke bich koi abhikarta ya paigamber aisi koi chiz nahi to ved ko ishwar ki vani kaise keh sakte hain? kya ishwar ne khud likh ke insaano ke pass fek diya aur insaan kahi use pada huaa paya? mujhe to ye satya lagta hai ki manusyaon me se hi kisi achche insan ko ishawr chun leta hai aur use hi apne vani sunata hai aur likhata hai, to wahi abhikrta huya.
    2. Hindu dharm me Murdon ko jalaya jata hai, bachchon ko dafnaya jata hai, saap katle to aise murde ko nadi me baha diya jata hai aur sanyasion ko dafnaya jata hai woh bhi baithe huye position me, aisa kyun?
    3. Vaidik dharm ke anushar hamara aadarsh insaan kaun hai?
    4. Arya bhartiya hain ya videshi?

  73. Maine 9 question puchha tha jo aap log uttar dene ke bajay use delete kar diye. iska matlab aryasamaj chor aur dhokebaj hai jo hindu darm ko aur bigad rahe hain.

  74. Agniveer ji apne is quwstion ke answer me likha hai…
    प्रश्न- ईश्वर कहाँ रहता है ?
    —-
    Last para me
    वास्तव में ये एकदम बच्चों जैसी बातें हैं । जब ईश्वर सर्वशक्तिमान और सरे संसार को नियंत्रण में रखता है तो फिर कोई कारण नहीं है कि —–वह खुद को किसी छोटी सी जगह में सीमित कर के रखे ——। और अगर ऐसा है तो फिर उसे सर्वशक्तिमान नहीं कहा जा सकता ।
    Agar Isayiyon ya muslmano ke anusar Ishwar(God/Allah) kisi asmaan par rehta hai aur aap kah rehe hain ki वह खुद को किसी छोटी सी जगह में सीमित कर के रखे । और अगर ऐसा है तो फिर उसे सर्वशक्तिमान नहीं कहा जा सकता ।
    to apke anusar asmaan koi choti jagah hai…. Mujhe to lagta aap hi bachche hain aur logon ko murkh bana rehe hain. Ek asmaan ki lambai/chaudai/uchai etc aapne maap liya hai ya kisi ne maap liya hai???

    • @Mann Singh: I doubt that you name is that but still let see.
      इस बात को समझने के लिएय पहले कुरान या बाइबिल पढ़े । इन मतों में कहाँ गया है की गॉड या अल्लाह सातवें आसमें पे रहता है , यह नहीं कहा गया की वोह आसमान है , इसलिए आप अपने आपको बेवकूफ बना रहे हैं

      • bhai, maine to nahi padha, thoda sa janta hun. God asman pe ho ya satve asman pe .jab hum ek asmaan ko nahi maap sakte to satve asman ko kaise keh sakte hain ki oh chhota hai. kya aap ved padh kar bhi use mante hain ki ishwar ek hai aur nirakar hai.to kya aap murti puja karte ho? agar nahi to thik hai aur haan to phir aap ved ko nahi mante.

      • @MaanSingh : “आसमान पे रहना” और “आसमान होना ” दो अलग बातें है. क्या आप समाज नहीं प् रहे. ? इस्लिएय आसमान मापने की बात है ही नहीं |

      • for this refer any book “Bhagawat Geeta or Guru Granth Sahib” in which each and every dilemma or confusion take place with right and suitable answer. When I went to the Kabbah at Mecca Sharrif I was resting. From there a Kaddam (Moluvi/priest) came to me running and with raging anger and said ” O Fakir move your feet away from the Kabbah and sit properly”. I said with patience, humbly “Why talk in so much anger (rudely) to tell me for what I have done”. After saying this I started to move my feet, whereever I moved my feet the Kabbah sharrif’s door moved. That kaddam/qaddam (priest) after seeing such a miracle was suprised and asked for forgiveness its mean is clear that almighty exist every where. Kabir sahib said”ज्यों तिल में तेल है ज्यों चकमक में आग ,तेरा साईं तुझमे है जाग सके तो जाग” its means god lives inside the human body in form of jivatma.Jesus Christ also call human body as”Temple of living God”.

    • kuram me yahbkaha gaya hai ki allah satve asman me hai aur vah ek singhsan me virajman hai aur us singhasan ko kuch farishte uthye huye hai ! jab singhasan simit hai to fir khuda bhi simit kyo nahi ho jayega ! aur jo simit ho. usko sarvshaktimaan kyo kaha jayega ? kya asman saat hote hai ? kya asman ka koi vajud hai vah to ek khula sthan hai ! dekhe kuran 38/75 jisme kurani allah kahate hai ki hamne adam ko “dono hatho ” se banaya hai! kya dono haath simit nahi huye ! dekhekuran 5/64 jisme” dono khule haath” ka jikar hai. dekhe kuran 39/67 jisme SARI DHARTI KO mutthi me band hone aur ” danye haath” me asman ko lapete hone ki baat kahi gayi hai ! ab bhi kya allah simit hai isme koi shak raha gaya hai ? ishwar kya hai ek chetan shakt ka naam ishwar hai ! vah har jagah hai koisthan uski shakti ke bagair nahi hai ! udaharan ke liye jaise hava har jagah hoti hai ! patrantu dikhalai nahi deti 1 vaise ishvar har jagah hai usi ki shakti se prati pal ham sab svanso ke madhyam se jivan prapt kar rahe hai !

      • aap log to ye samjhane ki koshish kar rahe ho ki muslmano ka khuda simit hai aur hinduon ka ishwar sarvsaktimaan hai. Kya ishwar,Allah,Khuda,God etc alag-alag hain? bilkul bhi nahi.kyon ki har darm me yahi kaha gaya hai ki ishwar ek hai use koi khuda,Allah to koi ishwar, God etc kehta hai aur woh nirakar hai, use kisi ne nahi dekha hai. to uske do hath se matlab ye nahi ki woh hamare jaisa insan hai balki iska ye tatparya hai ki jo muthi me dharti ko rakh sakta hai aur ek hath se aasman ko lapet sakta hai to soch insano ki woh kitna takat rakhta hai.Ye to hamare apne samajh hai. Aur asman sat hain ya nahi abhi tak scientist proof nahi kar paye hain to maane ya na mane aur koi zaroori nahi ki scientist jo proof kar dete hai woh universal truth hota hai,hum ye maan lete hai ki ye sach hai jab tak koi dusra scientist use galat proof nahi kar deta.1. Jaise pehle padha tha padarth ka chota part anu hai. phir aaya ki parmanu,phir aya ki parmanu bhi kai kano se milkar bana hai.2. galeliyo se pehle duniya yahi manti thi ki prithvi isthir hai aur surya uske charo or chakkar laga raha hai, parntu baad me yah glat sabit huaa.Aur main samjhta hu ki God satwen asman ke singhsan par ho ya kahi bhi woh kahi bhi reh kar sab chijon par control rakhtan hai jo bhi dharti aur aakashon ke bich hai,ye bhi kuran me likha hai. To bhaion na ishwar bada hai na Allah simit hai, balki woh ek hi hai aur har jagah hai.

      • manniy sri maan ji ishvar aur allah ek hargij nahi hai ! dono ki khubiya dekhiye ! janwar ke bhi ankh kan munh jibh daant adi hote hai aur manushy ke bhi tab kya janwar manushy ek hi maan liye jayenge ! kuch kahaniya hoti hai aur kuch yatharth hota hai ,dono ko ek saman nahi kahja sakta bhale hi vah kahani kitni saty ke nikat hi kyo n ho ? kahani to kahani hi rahegi ! kuran me alah yah bhi kahate hai hamne “dono hathon”se adam ji ko banaya ? allah ne shaitan se bahas ki javab talab hua ! ishvar kya hai ek chetan shakti ka naam hai ! vah nirakar hai kya kaar ka motar injan ek shakti rakhta hai kya vah kis se batchit kar sakta hai koi bahas kar sakta hai ?ASMAN KOI KAPDA NAHI HAI KI USKODANYE HATH ME LAPET LIYA JAYE ? INHI SAB BATO SE SABIT HOTA HAI KI KURANI ALALAH KO ISHVAR HARGIJ NAHI KAHA JA SAKTA HAI !

      • Ye to main janta hun ki aap log , apne galati chhupane ke liye kitane saare jhuth bole,maine bahut adhayan kiya aur aapke sabhi galat fahmiyon ka samadhan dhundh nikala. Ise dyan se padhiye aur apni soch badal dalo aur maan lo ki Ishawar/Allah/God ne hi humen banaya aur woh ek hai, nirakar hai.—-

        —–http://www.islamhinduism.com/responses/arya-samaj/297-allah-arsh-arya-jawab-sky——

        Aur apna trivaad wala sidhant galat maan lo jo apne Ved me bhi nahi hai ye to apke guru ji ki soch hai.

      • Bhai Maan singh lagta hai aapki sonchne ki shakti khatam ho chuki hai.
        bas apna ullu seedha karne ke liye kuch bhi bol do.

        agar rig ved mein kaha gaya
        –Ishwar sab taraf munh wala hai , sab tarf pag waha hai aur sab taraf aankho wala hai
        to iska seedha matlab yeh hai ki who sarva vyapi hai. kyonkoi yeh “atishayaukiti alankar hai” ab aapko to hindu kuch zyada maloom hi nahi to sanskrit ki bat to chodiye.
        This is also called a HYPERBOLE (figure of speech) in English, kisi vichar ko marmik shabdo mein kehna.

        ab kuran mein kaha gaya ki Allah ki kursi ko char farishte pakde rahenge to kya aap bata saktein hai ki yeh kaunsa figure of speech ya alankar hai? ya iska kya kya anya artha hai
        jisse ke kuch samaj aa sake ki quran mein koi contradiction nahi hai?

        aur aapne mere sawal ka jawab nahi diya sura al barkr mein 2:66 se aage ke bare meni
        aapke tarkik uttar ki pratiksha mein.

      • ईश्वर और अल्लाह का उपदेश एक नही, फिर दोनों एक कैसे ?
        यह यजुर्वेद के प्रथम अध्याय का 9 वाँ, मन्त्र है, इसमें उपदेश मानव मात्र को परमात्मा ने क्या दिया है देखें | यहाँ भक्त परमात्मा से प्रार्थना कर रहा है, हे परमात्मन हम कुटिलता से दूर हों इसके लिए प्राण निरोध द्वारा निर्मलता को प्राप्त करें और हमारा जीवन अन्तः करण परमात्मा द्वारा प्रेरणा से ही संचालित हो रहा है |
        वेद में बीस हजार से अधिक मन्त्र है जो सिर्फ परमात्मा का उपदेश मानव मात्र के भलाई के लिये है मानव मात्र को परमात्मा के जानने के विषय में है मानव किस प्रकार उस परमात्मा को जाने और उसकी स्तुति करे इसी विषय में हजारों उपदेश परमात्मा ने…

      • bhai Maan Singh job khuda 7we aasman per hain to to sab ko control kaisi kar sakta hain ..abhav me bhav kaise sambhav hain …agar ishwar ek aap ek anusar to dharam parivartan ki kya aawaskta .. aap apni batao me bhai khud confuse ho ..agar koi kisi vastu ko apne do hatho se banaye ga to wo smit he hoga me .. chahe allah ho ya koi aur ho …

      • Bhai kis bewakoof ne ye kaha hai ki Allah Paak kisi sinhaasan pr baitha hai or use Farishton ne uthaya hua hai…
        Bhai log U didnt know even a single word of True Islam , alas U r beating the bushes in the Darkness. U r talking about Religion Islam without knowning ABCD of Islam..
        Really Very Funny Bhai…
        First Clear all Ur VED and PURANAS Bhailog , Its my sincere advice to U all… Then try to Sermonize on Islam……….

  75. एडमिन जी , वेदों में ईश्वरीय उपासना के क्या साधन दिए हैं क्या इसमें प्रकाश डालेंगे .

  76. Priy Agniveer ji,

    Aap bahut mahan kary kar rahe hai. Aapne Sanatan Dharm ki burai karne walo ko jis “Ishwar” ki upasana hum karte hai, uske baare me bataya. Ye log nahi jaante hai ki hum “Eko aham dwitiyo nasti ” me vishwas karte hai.

    Akramankari jab is desh me aaye to unhone bahut se logo ka jabran dharmantaran kiya. Jab isse bhi baat nahi bani to unhone apne dharamguruo ki madad se bahut se hindustanio ko “sachche ishwar” aur “sachche majhab” ke naam par bahkana suru kiya aur kuchh had tak kamyab bhi huwe. Hume apne in bhaiyo fir se sanatan dharm ke sahi swarup ke baare me batana hai aur unhe “manawata” ke dharm se jodna hai.

  77. @ Abdul Rasul

    Abdul Bhai, aap ki baato se lagta hai ki iswar, allah, god sabhi alag-alag hai. Jo sawal aap hinduo se karte hai agar usi tarah ka sawal aapse kiya jaye to aap ka uttar kya hoga ? Aaj muslim desh – Afghanistan, Pakistan, Iraq, Libya, Sudan,Egypt …wagairah me kalte aam kyu macha hua hai ? Waha Allah humare muslim bhaiyo ko kyu nahi bacha raha hai ? Agar aapke dharam walo ko allah ka sahi sandesh mila hua hai fir muslim desho me atankwad kyu janam le raha hai ??

    Sachchi baat ye hai ki ishwar/allah/god sab ek hi hai. Aur wo Sabko apne sahi ya galat karmo ka fal deta hai. kuchh kattar panthi, dahshat aur nafrat failane wale maulana qayamat aur dojakh ki aag ka naam lekar sidhe saade logo ko darate hai aur apna ullu sidha karte hai jabki wo khud dojakh me jane wale hai.

  78. अग्निवीर जी,
    सादर अभिनन्दन!
    आपके इस लेख में अनेक शंकाओं का समाधान हो गया है.
    कृपया यह बताएँ कि श्रीमद् भगवद्गीता के अंतिम अंश में भगवान् श्री कृष्ण जब अर्जुन को कहते हैं-
    ‘सर्व धर्मान परित्यज्य मामेकं शरणम् व्रज
    अहम् तवा सर्व पापेभ्यो मोक्षयिश्यमी मा शुचः”
    उनके इस कथन का क्या तात्पर्य है?

  79. चन्द्र आर्य जी,
    मुक्ति पाने के लिए सत्कर्म करना जरुरी है| और कर्म वही कर सकता है जो चेतन है| यानी जिसमे आत्मा का वास हो| पेड़ और पौधें जड़ पदार्थ है| उसमे आत्मा का वास नहीं है|
    दुसरे शब्दों में कहे तो पेड़ और पौधें को अपने अस्तित्व की अनुभूति नहीं होती|
    इसलिए पेड़ और पौधें जड़ पदार्थ होने के कारण और कर्म करने में असमर्थ होने के कारण उसमे कोई पुन:जन्म नहीं होता और नाही उसे मुक्ति मिलती है|

    • manusmriti me pedo ko bhi sthvar jiv mana gaya hai! pedh bhi any janvaro pakshiyo ki tarah ek bhog yoni [saja yoni] kahi ja sakti hai isliye vah sidhe mukti to nahi pyenge lekin baad me vah manshy janm le sakte hai !

    • Jadatw mithya hain. Ped ya wruksh ya koi bhi wastu jad nahi hain.koi bhi wastu nirjeev nahi hain. Is sampurn wishw me sirf chaitany hain. Pratyek kan me sampurn gyan hain.

  80. अगनीवीर जी नमस्ते,
    मेरे मन में एक जिज्ञासा है के में वह जानना चाहता हुँ, वह यह है कि जिस प्रकार हम मानव अपने कर्म कर उऩ कर्मों के फल अनुसार हम अगले जीवन में नया जीवन पातें हैं,
    तो क्या पेड़ पौधौं का कर्म तो सदैव एक जैसा ही रहता है, तो क्या वह इस योनी से मुक्ति नहीं पाते अगर वह मुक्ति पाते हैं तो वह कोन से कर्म कर के कृपया विसतार से समझाने की कृपा करें

    • chandra arya ji namaste…
      dekhiye vedo ke anusar sirf manav yoni hi karm yoni hai, tatha annya bhog yoniya hoti hai….swami dayanand ji ne bataya tha ki jub jivatma ke karmo me paap aur punnya barabar ki matra me hota hai tb use manussya ki yoni prapt hoti hai, lekin vo ek nichle star ka hi manussya hota hai…agar vo satkarm karta hai to uski aatma ka vikas hota hai aur vo apne agle janmo me kramsah sresth manussya banta jata hai …aur mokkch ki or agrasar hota hai…lekin manussya yoni milne ke bad agar uske karm neech hote jate hai aur uske paap ki matra punnya se jada ho jati hai to vo pashu yoni ya ped paudhe ki yoniyo me jakar apne karmo ko bhogta hai….yaddyapi vo jad hai use apne astittva ka anuman nahi hai lekin fir bhi jivatma uske andar bhi hoti hai (niche humare ek bhai ne kaha ki ped paudho me aatma nahi hoti hai so galat hai..jo aatma na hoti to unke karmo ko kaun bhogta??) aur jub uske paap karmo ka chay nimmn yoniyo me poora ho jata hai aur jaise hi paap karmo ki matra punah punnya karmo se kam ho jati hai to vo vapas manussya yoni ko prapt ho jata hai….aur bhai “CHANDRA ARYA JI” mukkti ka jaha tak prashn hai to vo keval manussya yoni me hi sambhav hai,annya yoniyo me nahi…isliye manussya ko srest karm karne chahiye jisse uske aatma ka kramik vikas hota hai aur antatah vo mukti ko prapt ho jata hai……jyada jaanne ke liye kripya “SWAMI DAYANAND JI” dwara rachit granth “SATTYARTH PRAKASH” ka addhyan kare…aasaa hai ki aap santust honge….

    • 84 लाख प्रकार की योनी है जिनमे जीवात्मा exist(विद्यमान ) रहती है | जीवात्मा अपने कर्मो के अनुसार इनमे निवास करती है | जो जैसा करता है वो वैसा भोगता है | यहाँ तक की मनुस्मृति में कहा है (ch 1,verse no.-49) ये पौधे अपने पिछले कर्मो के फलस्वरूप है जिस रूप में जीवात्मा अत्यधिक अंधकार में निवास करती है और इस रूप में भी जीवात्मा में चेतना होती है एवं पौधे भी सुख और दुःख का अनुभव करते हैं| जीव अपने कर्मों के फलस्वरूप इन योनियों में ऊपर नीचे होता रहता है | आप देखिये पौधे किसी से कुछ नहीं लेते सिर्फ देते ही देते है,ये ऐसे योनियो का चुकाना है जिसमें उसने उन योनियो (जो फल का उपभोग कर रही हैं) से लिया था उसी प्रकार अन्य जीव इसी तरह एक दूसरे पर निर्भर रहते है और पारिस्थितिकी संतुलन(ecological balance) का निर्माण होता है और विभिन्न रूपौ में एक दुसरे से लेते और देते रहते है और इस प्रकार लेना=देना | इसी तरह जिसने अच्छा किया है उसे अच्छा और जिसने बुरा किया है उसे बुरा फल भोगना पड़ेगा |
      अब रही बात मनुष्य रूप की,मनुष्य रूप में जीवात्मा की चेतना चरम विन्दु (peak point) तक पहुच सकती है |चेतना (consciousness) मतलब क्या ,क्यों ,किस प्रकार घटनाएँ घटित हो रही हैं के बारे में जान सकता है जबकि अन्य योनी में चेतना इतनी होती है की वो ये तो जान सकता है ये धटना हो रही है इससे ऐसे बचा जा सकता है पर ये नहीं जन पाता कि ये क्यों हो रहा है |
      इसलिए वह यो जो कर्म करे सोच समझ के करे और कर्म का परीणाम जान के करे |

      • maine suna tha ki ek baar machli kha lene se 84 lakh yoni ke baad manushy ka janm lete hai. jabki 100% men se shirf 1% log sakahari hai . bramhan tak mansahari ho gaya hai. yadi 84 lakh yni ke baad manushy janm hota to manushy ka ashtitv hi mit jata. aur abhi sankhya manushy ki sankha jyada hai..

  81. Namaste Agniveer and Raj Ji
    Kripya lekh ki in panktiyo ko aur spast rup se samjhaye khas tor par isko (आप ईश्वरीय परमाणु और अनीश्वरीय परमाणु की सीमा कैसे निर्धारित करेंगे )

    //और अगर आप ये कहें कि ईश्वर समय समय पर दिव्य रूप धारण करता है तो कृपया ये भी बता दें कि किसका दिव्य रूप लेता है क्यूंकि अगर कहें कि ईश्वर मनुष्य का दिव्य रूप धारण करता है तो आप ईश्वरीय परमाणु और अनीश्वरीय परमाणु की सीमा कैसे निर्धारित करेंगे ? और क्यूंकि ईश्वर सर्वत्र एकरस (एक समान ) है तो फिर हम मानवीय- ईश्वर और शेष संसार में अंतर कैसे करें ? और यदि हर जगह एक ही ईश्वर है तो फिर हम सीमा कैसे देख रहे हैं ?//

  82. manniy shri abdu ji ,jinko aap dharmguru samajhte hai vah dharm bhi nahi jante hai tab vah uske guru kaise kahala sakenge ! jaise aaj ke samay me vanaspati telo se banaya hua v jama hua ghi jaise padarth ko ghi kah diya jata haiaur deshi ghi ko bahut se log seva bhi nahi kartehai vaisa hi haal dharm ka bhi hai 1 dharm keval ek haibaki koi dharmnahi hai van manvta ka dharm manushy me agar manvat nahi hai tovah manushy rupi janwar hi khalaya ja sakega 1 manushy me manushyta ane kle liye apne guno ka vikas karna hota hai manusmriti 6/92 me dharm ke lakshan batlaye gay ehai dhriti kshama damo asteyam shaucham indriy nigrah dhi vidya satyam akrodho dashkam dham lakshanam1 dusre shabdo me “dusre ke saath vahi vyavhar kiya jaye jo apne liyebhi pasand aye ” jab ki aj ke samay me kya ho raha hai “badla ” tume aisa kiya to ham aisa karenge aur niche girkar tumko maja chakhayenge ! agarsri raam ji raksha karte hote to yah desh gulam bhi kyo hua ! agar giravat ayito sri ram ji ne usko kyo nahi rok paye ? rokte bhi kaise jab vah mar chuke hai ! sriraamji unnati ke pratik hai ya giravat ke pratik?

  83. आप पुरे लेख इस्लाम को तुलनात्मक पहलू के रुप मेँ लिया गया हैँ । अगर आप वर्तमान हिन्दु धर्म को को इस तरह लेते तो बेहतर होता । और ये तर्क आप अपने पास ही रखो तो ही बेहतर है । जब ईश्वर को अवतार ऑर योगिश्वर की जरुरत क्योँ है ?

    • ishvar ko n avtar lene ki jarurat padti hai aur n yogeshvar banne ki! koi ishvar ki bhakti kare to usko koi matlab nahi hai aur agar koi ishvar ki bhakti kare to usko usse bhi koi matlab nahi hai !

      • @raj.hyd
        Ishwar ki bhakti kare ya na kare ishwar ko koi phark nahi padata to ye quo kaha jata hai ishwar ko apne bhakto se jayada pyar hota hai. Jaisa ki Hindu mante hai ram apne bhakto ki raksha karta hai aur Musliman maante hai Allah musalmano ko hi jaanat pardan karta hai.

      • manniy shri abdu ji , janta me bahut si galatfahamiya faili huyi hai! n shri raam ji apne bhakto ki rajkha karte hai aur n kurani allah muslimo ki raksha karte hai ! jannat jahnnnum adi kalpinik bate hai ! isike lalach me bahut se manushy pade huye hai jab ki usme koi sachhai nahi hai manushyo ko achhe karm jarur karne chahiye jisse samaj me ek achha mahaul ban sake! agar shri raam ji adi apne bhakto ki raksha karte to kyo yah desh hajar saal tak gulam rahata ! agar kurani allah muslimo ki raksha karte to to kyo islamiatankvadi kai lakh muslimo ki hi hatya kyo kar pate ! saddam laden gaddafi adi kyo gair muslimo ke hatho mare jate1 muhammad ji ke baad kyo khalifa bahe huye umar ji usman ji v ali ji ki hatya muslim hi karte! muaham d jike marne kekuch maah baad hi unki eklauti jivit bachi beti jawan garbhvarti fatima ji ki hatya bhi muslim kyo karte kyonahi insabko kurani allah ne bacha liya !

      • @raj.hyd
        Magar jab maine ye baat Hindu dharm Guruo se kahi quo tumhare ram ne tumhari raksha nahi aur tum hazaro sal tak gulam bane rehe to unka uttar tha ki agar ram raksha na karte to aaj Hindu samaj hi nahi hota bharat varsh bhi nahi hota. Ye Ram Ji ki bhakti ka hi phal hai aur aiesa hi jawab sabhi dharm guruo ka hai.

      • Aap sach keh rahe hain. Ishvar Hindu, Musalmaan, Isaai ya aur kisi dharm ke logon ki raksha nahin karte rehte. Dekhiye, Shrimad Bhagvad Gita mein Shri Bhahwan Krishn svayam kehte hain ki ve usi ki raksha karte hain jiske dil mein sachchai aur shuddh bhakti hai, aur uski jo acchhaa kaam karta hai. Shri Bhagwan Shri Krishn Shri Arjun se svayam kahte hain ki acchhaa karne waale ka kabhi nuksaan nahin hota… aisa aadmi agar shaheed bhi ho jaaye tab bhi use Swarg ki praapti hoti hai. Sanatan Dharm guru theek keh rahe hain. Sanatan Dharm ki raksha ke liye hi Ishvar ne Bharat ki raksha ki, na ki isliye ki Bharat ek Hindu mulk hai. Is zameen par sachchi ibaadat karne waalon ki Ishvar hamesha madad karte hain. Dharm Guru ka ye matlab tha.

  84. RESPECTED AGNIVEER JI ,
    NAMASTE!
    aapne humara sandeh door kiya vedo ki adulteratiaon aur authentication ke bare me..uske liye dhannyavad…mera ek aur prashn hai ki swami “DAYANAND SARASWATI JI” ke anusar is sristi ke utpanna hue 1 arab 97 karod sal ke lagbhag ho gaye hai…jubki hume science ye batati hai ki humare is sristi ki aayu 13.7 arab vars hai.to kya report humare vedo ke pramadikta pe prashn chinnha nahi lagati???
    janne ke liye is link pe clic kijiye aur NASA ki report dekhiye…RESPECTED AGNIVEER JI ,
    NAMASTE!
    aapne humara sandeh door kiya vedo ki adulteratiaon aur authentication ke bare me..uske liye dhannyavad…mera ek aur prashn hai ki swami “DAYANAND SARASWATI JI” ke anusar is sristi ke utpanna hue 1 arab 97 karod sal ke lagbhag ho gaye hai…jubki hume science ye batati hai ki humare is sristi ki aayu 13.7 arab vars hai.to kya report humare vedo ke pramadikta pe prashn chinnha nahi lagati???
    janne ke liye is link pe clic kijiye aur NASA ki report dekhiye…RESPECTED AGNIVEER JI ,
    NAMASTE!
    aapne humara sandeh door kiya vedo ki adulteratiaon aur authentication ke bare me..uske liye dhannyavad…mera ek aur prashn hai ki swami “DAYANAND SARASWATI JI” ke anusar is sristi ke utpanna hue 1 arab 97 karod sal ke lagbhag ho gaye hai…jubki hume science ye batati hai ki humare is sristi ki aayu 13.7 arab vars hai.to kya report humare vedo ke pramadikta pe prashn chinnha nahi lagati???
    janne ke liye is link pe clic kijiye aur NASA ki report dekhiye…http://www.google.co.in/url?sa=t&rct=j&q=age+of+universe+according+to+nasa&source=web&cd=9&cad=rja&ved=0CGYQFjAI&url=http%3A%2F%2Fwww.universetoday.com%2F13371%2F1373-billion-years-the-most-accurate-measurement-of-the-age-of-the-universe-yet%2F&ei=pwBkUYWYLNHirAf16oDYDA&usg=AFQjCNGxNuJ3kXHzGKdbuR1LKpffKiPa1w&bvm=bv.44990110,d.bmk

    • @Arya
      Namaste Bhrata

      Jaha tak mera gyan hai scentist 13.7 billion years ki aayu iss brahmand ki batate hai prithvi ki nahi.

  85. RESPECTED AGNIVEER JI ,
    NAMASTE!
    aapne humara sandeh door kiya vedo ki adulteratiaon aur authentication ke bare me..uske liye dhannyavad…mera ek aur prashn hai ki swami “DAYANAND SARASWATI JI” ke anusar is sristi ke utpanna hue 1 arab 97 karod sal ke lagbhag ho gaye hai…jubki hume science ye batati hai ki humare is sristi ki aayu 13.7 arab vars hai.to kya report humare vedo ke pramadikta pe prashn chinnha nahi lagati???
    janne ke liye is link pe clic kijiye aur NASA ki report dekhiye…http://www.google.co.in/url?sa=t&rct=j&q=the+life+of+universe+according+to+NASA&source=web&cd=2&cad=rja&ved=0CDUQFjA

  86. केरल की सरकार से आरटीआई के तहत मांगी गयी जानकारी और कुछ स्थानीय पुलिस की मदद से मिली जानकारी के अनुसार हिन्दू धर्म से परिवर्तित लड़कियों की संख्या 2876 थी लेकिन केवल 705 मामले दर्ज किए गए कासरगोड 568 का आंकड़ा साथ जिहादी रूपांतरण की सूची में सबसे ऊपर है केवल 123 घटनाओं ने पुलिस के साथ पंजीकृत किया

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