इस सृष्टि में सर्वत्र व्याप्त अद्बुत नियमितता पर एक दृष्टिक्षेप ही काफ़ी है किसी महान नियंता की सत्ता को प्रमाणित करने के लिए | यह हस्ती इस परिपूर्णता से काम करती है कि वैज्ञानिक भी उसके शाश्वत नियमों को गणितीय समीकरणों में बांध पाएँ हैं | यह महान सत्ता प्रकाश वर्षों की दूरी पर स्थित दो असम्बद्ध कणों को भी इस सुनिश्चित रीति से गति प्रदान करती है कि गुरुत्वाकर्षण के सार्वभौमिक सिद्धांत का कभी भी अतिक्रमण नहीं हो सकता है | वैज्ञानिक जानते हैं कि दो दूरस्थ कण गुरुत्वाकर्षण के नियमानुसार निकट आते हैं – परन्तु वह क्या कारण है जो उन्हें पास आने और योजनाबद्ध तरीके से सम्मिलित रूप में गतिमान होने की प्रेरणा देता है – यह बताने में वैज्ञानिक भी समर्थ नहीं हैं | इस ब्रह्माण्ड को चलाने वाले ऐसे अन्य अनेक सिद्धांत हैं जिन में से कुछ के गणितीय समीकरणों को आधुनिक वैज्ञानिक बूझ पाएँ हैं, परन्तु अभी भी असंख्य रहस्य विस्तार से खोले जाने बाकी हैं |

अलग-अलग लोग इस हस्ती को अलग-अलग नामों से बुलाते हैं | वैज्ञानिकों के लिए यह ‘सृष्टि के नियम’ हैं, मुसलमान उसे ‘अल्लाह’ तथा ईसाई ‘गौड’ का नाम देते हैं | और ‘वेद’- विश्व की प्राचीनतम पुस्तक उसे अन्य अनेक नामों के साथ ही ‘ओ३म्’ या ‘ईश्वर’ कहती है |

किसी संकीर्ण मनोवृत्ति के अदूरदर्शी एवं छिद्रान्वेषी व्यक्ति को यह संपूर्ण जगत पूरी तरह निष्प्रयोजन लग सकता है, जो सिर्फ घटनाओं के आकस्मिक संयोग से उत्पन्न हुआ हो | अब यह अलग बात है कि उसका इस नतीजे पर पहुँचना ही यह प्रमाणित कर रहा है कि  वह इस आकस्मिकता में भी नियमितता और उद्देश्य को खोजना चाहता है | बहरहाल, हम इस लेख में उसकी अवास्तविक सोच की चीरफाड़ नहीं करेंगे | हम यहां इस मौलिक प्रश्न पर विचार करेंगे जो कि इस विलक्षण विश्व के सौंदर्य और विचित्रताओं को देखकर अधिकतर यथार्थवादी (अज्ञेयवादी + आस्तिक) व्यक्तिओं के मन में उदित होता है – ईश्वर / गौड / अल्लाह ने हमें क्यों बनाया?

बहुत से मत-सम्प्रदाय इस मूलभूत सवाल का जवाब देने की कोशिश करते हैं और अधिकतर लोग इसी तलाश में एक सम्प्रदाय से दूसरे सम्प्रदाय की ख़ाक छानते फिरते हैं|

अवधारणा १: ईश्वर ने हमें बनाया जिससे कि हम उसे पूजें |

बहुत से धार्मिक विद्वानों का यह दावा है कि उसने हमें इसीलिए बनाया जिससे हम उसकी पूजा / इबादत कर सकें | अगर ऐसा मानें तो –

a. ईश्वर एक दम्भी, चापलूसी पसंद तानाशाह से अधिक और कुछ नहीं रह जाता |

b. यह सिद्ध करता है कि ईश्वर अस्थिर है | वह अपनी आदतें बदलता रहता है इसलिए जब वह अनादि काल से अकेला था तो अचानक उसके मन में इस सृष्टि की रचना का ख्याल आया |

मान लीजिये, अगर हम यह कहें कि, उसने किसी एक समय-बिंदु  ‘t1’ पर हमारी रचना का निश्चय किया | अब क्योंकि समय अनादि है और ईश्वर भी हमेशा से ही था- इसलिए यह समय ‘t1’ या अन्य कोई भी समय ‘t2’, ‘t3’ इत्यादि समय के मूल (जो की अनंत (infinite) दूरी पर है) से सम-दूरस्थ हैं | इसीलिए जब वह ‘t1’ समय पर अपनी मर्जी बदल सकता है तो कोई कारण नहीं कि वह ‘t2’, ‘t3’ या अन्य किसी भी समय पर अपनी मर्जी ना बदल सके | साथ ही, यह निश्चय भी नहीं किया जा सकता कि – उसने इस ‘t1’ समय से पहले कभी हमें (या अन्य किसी प्रजाति को) उत्पन्न और नष्ट न किया हो |

जिन सभी सम्प्रदायों का यह दावा है कि अल्लाह ने हमें इसलिए बनाया जिससे कि हम उसकी इबादत कर सकें, वह भी अल्लाह की परिपूर्णता में विश्वास रखतें हैं | यदि अल्लाह पूर्ण है तो वह सभी समय-बिन्दुओं पर अपना काम एक सी निपुणता और एक से नियमों से करेगा | परिपूर्णता से तात्पर्य है कि वह निमिषमात्र भी अपनी आदतों में बदलाव नहीं लाता | अतः यदि  ईश्वर / अल्लाह / गौड ने हमें ‘t1’ समय पर बनाया है तो अपनी पूर्णता बनाये रखने के लिए उसे हमें अन्य समय-अवधि पर भी इसी तरह बनाना होगा | क्योंकि वह हमें दो बार तो बना नहीं सकता इसलिए उसको हमें पहले विनष्ट करना होगा ताकि फिर से हमें बना सके | अब अगर वह हमें इसी तरह बनाता और बिगाड़ता रहा तो वह यह कैसे सुनिश्चित कर पायेगा कि हम नष्ट होने के बाद भी उसकी इबादत करते रहेंगे | इसका मतलब तो यह है कि, या तो अल्लाह समय के साथ ही अपनी मर्जी भी बदलता रहता है या फिर उसने हमें इबादत करने के लिए बनाया ही नहीं है|

शंका: जब उसने खुद हमारा निर्माण किया है, तो वह हमें दुःख भोगने पर मजबूर क्यों करता है ?

यह सबसे ज्यादा हैरत में डालने वाला सवाल है, जिसका संतोषजनक समाधान कोई भी मत-सम्प्रदाय नहीं दे सके | यह अनीश्वरवाद (नास्तिकता) का जनक है | मुसलमानों में यह मान्यता है कि, अल्लाह के पास उसके सिंहासन के नीचे ” लौहे महफूज” नाम की एक किताब है, जिस में सभी जीवों के भविष्य के क्रिया-कलापों की जानकारी पूर्ण विस्तार से दी हुई है | पर इससे जीवों की कर्म-स्वातंत्र्य के अधिकार का हनन होता है | यदि मेरे कर्म पूर्व लिखित ही हैं, तो मुझे काफ़िर होने की सज़ा क्यों मिले ? और अल्लाह ने पहले से ही “लौहे महफूज” में काफिरों के लिए सज़ा भी क्यों तय कर रखी है ? मुलसमान धर्मंप्रचारक इस विरोधाभास का जवाब चतुराई से देते हैं | जैसे की नव्य पैगम्बर जाकिर नाइक इसके जवाब में कहता है, ” एक कक्षा में सभी प्रकार के विद्यार्थी होते हैं | कुछ होशियार होते हैं और प्रथम क्रमांक पाते हैं और कुछ असफल हो जाते हैं  | अब एक चतुर शिक्षक यह पहले से ही जान सकता है कि कौन सा विद्यार्थी किस क्रमांक को प्राप्त करेगा | इसका मतलब यह नहीं होता कि शिक्षक अपने विद्यार्थियों को निश्चित तरीके से ही कार्य करने पर बाध्य कर रहा है |  इसका अर्थ सिर्फ यह है कि शिक्षक यह जानने में पूर्ण सक्षम है कि  कौन क्या करेगा | और क्योंकि अल्लाह सर्वाधिक बुद्धिमान है, वह भविष्य में घटित होने वाली हर चीज़ को जानता है |”

बहुत ही स्वाभाविक लगने वाले इस जवाब में यह बड़ा छिद्र है – शिक्षक अपने विद्यार्थियों के कार्य का पूर्वानुमान सिर्फ तभी लगा सकते हैं जबकि वह उनके पूर्व और वर्त्तमान कार्यों का मूल्यांकन कर चुके हों | पर अल्लाह की बात करें तो उसने स्वयं ही तय कर रखा है कि कौन विद्यार्थी जन्मतः ही बुद्धिमान होगा और कौन मूर्ख !

हालाँकि, मोहनदास गाँधी का जन्म २ अक्तूबर १८६९ को हुआ था, अल्लाह ने उनके जन्म से लाखों वर्ष पहले ही यह तय कर दिया था कि यह बालक एक हिन्दू रहेगा परन्तु मुस्लिमों के प्रति अत्यधिक झुकाव रखते हुए उनका तुष्टिकरण करने में प्रथम क्रमांक पाएगा और फिर भी काफ़िर ही कहलाएगा और दोजख (नरक) के ही लायक समझा जाएगा, बतौर पवित्र मुस्लिम मुहम्मद अली के |  अतः गाँधीजी के पास उनके लिए पूर्व निर्धारित मार्ग पर चलने के अलावा और कोई चारा ही नहीं था |

यह शिक्षक-विद्यार्थी का तर्क तभी जायज है यदि अल्लाह आत्मा का निर्माण करने के बाद उसे पूर्ण विकसित होने का मौका दे- जब तक वह अपने लिए सही निर्णय करने में सक्षम ना हो जाए; बजाय इसके की अल्लाह पहले से ही “लौहे महफूज” में उनके कर्मों को निर्धारित कर दे | इससे तो अल्लाह अन्यायी साबित होता है|

कृपया “Helpless destiny in Islam” तथा “God must be crazy” इन लेखों का अवलोकन करें |

अवधारणा २: उसने हमें परखने के लिए बनाया है |

हम पहले ही इस धारणा को “God must be crazy” में अनेक उदाहरणों के द्वारा निरस्त कर चुके हैं |  फिर भी यदि यह माना जाए कि वह हमारी परीक्षा ही ले रहा है, तब तो उसके पास “लौहे महफूज” होना ही नहीं चाहिए या यूँ कहें कि तब वह पहले से ही हमारा भविष्य जान ही नहीं सकता | क्योंकि भविष्य जानता है तो परीक्षा की आवश्यकता ही क्या रह जाती है ? और यदि ऐसा कहें कि वह दोनों कार्य कर रहा है तो उसका यह बर्ताव एक निरंकुश तानाशाह की तरह है जिसे तमाशे करना पसंद है |

तो आखिर उसने हमें बनाया ही क्यों ???

इस उलझाने वाले सवाल के जवाब में दी जानेवाली सभी अविश्वसनीय कैफियतों को हम निष्प्रभावी कर चुकें हैं | यदि परखने के लिए नहीं और पूजने के लिए भी नहीं, तो और क्या कारण हो सकता है हमें बनाने का ? यह हमें ख़ुशी या आनंद देने के लिए तो हो नहीं सकता क्योंकि इस दुनिया में बहुत सी निर्दयी और क्रूर घटनाओं को हम घटित होते हुए देखते हैं – यहां तक कि लोग इस बेदर्द दुनिया से तंग आकर आत्महत्या तक कर लेते हैं |

चाहे ख़ुशी देने के लिए हो या दुःख देने के लिए या फिर परीक्षा लेने के लिए हो, उसने हमें बनाया ही क्यों ? क्या वह सिर्फ अपने एकाकीपन का लुत्फ़ ही नहीं उठा सकता था ? क्या जरुरत थी कि पहले हमें बनाये और फिर हमें अपने इशारों पर नचाए | विवश होकर यह कहने के आलावा और कोई रास्ता नहीं बचता कि “अल्लाह बेहतर जानता है”  या  “खुदा जाने”  या  “ईश्वर ही जाने उसके खेल”  या फिर  “गोली मार भेजे में” |

बौद्ध धर्मं प्रयोगात्मक है, वह तो इस सवाल से कोई सरोकार ही नहीं रखता | वह कहता है कि इस प्रकार के प्रश्नों के बारे में सोचने से पहले हमें मन को साध कर इन्द्रिय निग्रह द्वारा अपनी प्रज्ञा का स्तर ऊँचा उठाना चाहिए | दुनिया की चकाचौंध में फंसे हुए व्यक्ति के लिए जो कि इससे परे कुछ भी देखने या समझने में असमर्थ है, यह एक बहुत ही व्यावहारिक सुझाव है | इस सबके बावजूद, हमारे अंतस में कहीं ना कहीं यह प्रश्न सुलगता रहता है  – ईश्वर ने हमें बनाया क्यों ?

जब तक इस प्रश्न का संतोषप्रद जवाब नहीं मिल जाता – सभी कुछ निरुद्देश्य लगता है और कोई भी चीज़ मायने नहीं रखती |

यह सच है कि इसका सही जवाब सिर्फ ईश्वर ही जानता है परन्तु मानव जाती के प्रथम ग्रंथ – ‘वेद’ इस पेचीदा सवाल पर पर्याप्त प्रकाश डालतें हैं ताकि आगे हम इसकी गहराई में उतर सकें |

वेद स्पष्ट और निर्णायक रूप से कहतें हैं कि ईश्वर ने हमें नहीं बनाया | और क्योंकि ईश्वर ने हमें कभी बनाया ही नहीं, वह हमें नष्ट भी नहीं करता | जीवात्मा का सृजन और नाश ईश्वर के कार्यक्षेत्र में नहीं आता | अतः जिस प्रकार ईश्वर अनादि और अविनाशी है, उसी प्रकार हम भी हैं | हमारा अस्तित्व ईश्वर के साथ हमेशा से है और आगे भी निरंतर रहेगा |

प्रश्न: यदि ईश्वर ने हमें नहीं बनाया तो वह करता क्या है?

उत्तर: ईश्वर वही करता है जो वह अब कर रहा है | वह हमारा व्यवस्थापन (पालन, कर्म-फल प्रबंधन आदि) करता है |

प्रश्न: तब उसने यह विश्व और ब्रह्माण्ड क्यों बनाया ?

उत्तर: ईश्वर ने इस जगत और ब्रह्माण्ड के हेतु (मूल कारण) का निर्माण नहीं किया | इस जगत का मूल कारण ‘प्रकृति’ हमेशा से ही थी और आगे भी हमेशा रहेगी |

प्रश्न: जब ईश्वर ने इस विश्व को और हमें नहीं बनाया, तो वह करता क्या है – यह एक दुविधा है ?

उत्तर: जैसा पहले बताया जा चुका है, वह हमारा प्रबंधन करता है | विस्तृत रूप में देखा जाए तो – जिस तरह कुम्हार मिटटी और पानी से बर्तन बनता है, उसी तरह ईश्वर इस निर्जीव प्रकृति का रूपांतरण कर यह विश्व / ब्रह्माण्ड बनाता है | फिर वह इस इस ब्रह्माण्ड में जीवात्माओं का संयोजन करता है|

प्रश्न: यह सब वह क्यों करता है ?

उत्तर: यह सब वह करता है ताकि जीवात्मा कर्म करके आनंद प्राप्त कर सके | इसलिए वह जीवात्मा को ब्रह्माण्ड के साथ इस प्रकार संयुक्त करता है जिससे कर्म के सिद्धांत हर समय पूर्णतया बने रहें | इस प्रकार, जीवात्मा अपने कर्मों द्वारा आनंद को बढ़ा या घटा सकता है |

प्रश्न: हमें ख़ुशी देने के लिए उसे इतना प्रपंच करने कि क्या आवश्यकता है ? क्या वो सीधे तौर पर हमें ख़ुशी नहीं दे सकता ?

उत्तर: ईश्वर अपने गुणधर्म के विपरीत कुछ नहीं करता | जैसे, वह स्वयं को न तो कभी नष्ट कर सकता है और न ही नया ईश्वर बना सकता है | जीवात्मा के भी कुछ लक्षण हैं – वह चेतन है, सत् है परन्तु आनंद से रहित है | वह स्वयं कुछ नहीं कर सकता | ये उस मायक्रोप्रोसेसर की तरह है जो सिर्फ मदर बोर्ड और पॉवर सप्लाय से जुड़ने पर ही कार्य कर पाता है |अतः ईश्वर ने कंप्यूटर सिस्टम नुमा ब्रह्माण्ड को बनाया जिससे कि मायक्रोप्रोसेसर नुमा जीवात्मा कार्य कर पाए और अपने सामर्थ्य का उपयोग कर आनंद को प्राप्त करे |

प्रश्न: कर्म का सिद्धांत कैसे काम करता है ?
उत्तर: कृपया ‘FAQ on Theory of Karma’ का भी अवलोकन  करें  | मूलतः जीवात्मा के ६ गुण हैं : इच्छा, द्वेष, प्रयत्न, सुख, दुःख,और ज्ञान | इन सब के मूल में जीव की इच्छा शक्ति और परम आनंद ( मोक्ष ) प्राप्त करने का उद्देश्य है | जब भी जीवात्मा अपने स्वाभाविक गुणों के अनुरूप कार्य करेगा उसके गुण अधिक मुखरित होंगे और वह अपने लक्ष्य के अधिक निकट पहुंचता जाएगा | किन्तु, यदि वह अस्वाभाविक व्यवहार करेगा तो उसके गुणों की अभिव्यक्ति कम होती जाएगी साथ ही वह लक्ष्य से भटक जाएगा | अतः अपने कार्यों के अनुसार जीवात्मा चित्त (जीवात्मा का एक लक्षण ) की विभिन्न अवस्थाओं को प्राप्त करता है |
ईश्वर जीवात्मा के इस लक्षण के अनुसार, उसे ऐसा वातावरण प्रदान करता है | जिससे उसकी इच्छापूर्ति एवं लक्ष्य प्राप्ति में सहायता हो | अतः परमानन्द कार्यों का परिणाम है, कार्य विचारों का, विचार ज्ञान का एवं ज्ञान इच्छा शक्ति का परिणाम है | इससे विपरीत भी सही है – यदि कार्य गलत होंगे तो ज्ञान कम होता जाएगा – परिणामस्वरूप इच्छाशक्ति घट जाएगी | और जब कोई अत्यधिक बुरे कर्म करे तो ईश्वर ऐसे जीवात्माओं को अ-मानव ( अन्य विविध प्राणी ) प्रजाति में भेजता है, जहाँ वे अपनी इच्छा शक्ति का प्रभावी उपयोग न कर पाएँ | यह जीवात्मा के चित्त में जमे मैल की शुद्धि के लिए है | यह प्रक्रिया मृत्यु से बाधित नहीं होती | मृत्यु इस यात्रा में मात्र एक छोटा विराम या पड़ाव है, जहाँ आप अपने वाहन से उतरकर भोजन पानी से सज्ज हो कर नयी शुरुआत करते हैं |

प्रश्न: इसे एक ही बार में समझना काफ़ी कठिन है , कृपया संक्षेप में समझाइये –
उत्तर:

a) ईश्वर, जीव और प्रकृति तीनों शाश्वत सत्ताएं हैं जो हमेशा से थी और हमेशा ही रहेंगी | यह त्रैतवाद का सिद्धांत है |

b) ईश्वर कभी जीव या प्रकृति का सृजन अथवा नाश नहीं करता | वह तो सिर्फ एक उत्कृष्ट प्रबंधक की तरह आत्मा और प्रकृति का संयोजन इस तरह करता है ताकि जीव अपने प्रयत्न से कर्म – फ़ल के अनुसार मोक्ष प्राप्त कर सके |

c) हमारे साथ घटित होने वाली सारी घटनाएं दरअसल हमारे प्रयत्न के फ़लस्वरूप हैं जो हम अंतिम क्षण तक करते हैं | और हम अपने प्रारब्ध को हमारे वर्तमान और भविष्य के कर्मों द्वारा बदल सकते हैं |

d) मृत्यु कभी अंतिम विराम नहीं होती | वह तो हमारी अबाध यात्रा में एक अल्प-विराम (विश्रांति) है |

e) जब हम ईश्वर को निर्माता कहते हैं तो उसका अर्थ है कि वह जीव और प्रकृति को साथ लाकर संयोजित एवं व्यवस्थित आकार प्रदान करता है |  वह जीवों की मदद की लिए ही ब्रह्माण्ड की व्यवस्था करता है | अंततः विनष्ट कर के पुनः निर्माण  की नयी प्रक्रिया शुरू करता है | यह सम्पूर्ण निर्माण- पालन- विनाश की प्रक्रिया उसी तरह है जैसे रात के बाद दिन और दिन के बाद रात आती है | ऐसा कोई समय नहीं था  जब  यह प्रक्रिया नहीं थी या ऐसा कोई समय होगा भी नहीं जब यह प्रक्रिया न हो या बंद  हो जाय |  इसलिए, यही कारण है कि वह ब्रह्मा (निर्माता), विष्णु (पालनहार) और  शिव (प्रलयकर्ता) कहलाता है |

f) ईश्वर का कोई गुण नहीं बदलता, अतः वह हमेशा जीव के कल्याण के लिए ही कार्य करता है |

g) जीवात्मा के पास स्वतंत्र इच्छा है, पर वह उसके ज्ञान के अनुसार है जो उसके कर्मों पर आश्रित है | यही कर्म सिद्धांत का मूलाधार है|

h) ईश्वर सदैव हमारे साथ है तथा हमेशा हमारी मदद करता है | हमें अपनी अंतरात्मा की आवाज सुननी चाहिए और हर क्षण सत्य का स्वीकार तथा असत्य का परित्याग करना चाहिए | सत्य की चाह ही जीवात्मा का गुण तथा इस जगत का प्रयोजन है | जब हम सत्य का स्वीकार करने लगते हैं तो हम तेजी से हमारे अंतिम लक्ष्य – मोक्ष की तरफ़ बढ़ते हैं |
सारांश में, ईश्वर ने हमें अभाव से कभी नहीं बनाया – उसने इस अद्भुत संसार की रचना हमारे लिए की, हमारी सहायता करने के लिए की | और हम इस प्रयोजन की पूर्ति – सत्य की खोज करके पूरी कर सकते हैं | यही वेदों का मुख्य सन्देश और यही जीवन का सार तत्व  है |

प्रश्न: एक अंतिम सवाल – इस बात पर कैसे यकीन करें कि यह सत्य है और कोई नव निर्मित सिद्धांत नहीं ?
उत्तर: इस पर यकीन करने के अनेक कारण हैं, जैसे –
यहां कही गई प्रत्येक बात वेदानुकूल है | जो कि संसार की प्राचीनतम और अपरिवर्तनीय पुस्तक है | नीचे दिए गये पाठ का अवलोकन करने से आप अनेक संदर्भ विस्तार से देख सकते हैं |

यह सिद्धांत सहज बोध और जीवन के नित्य प्रति के अवलोकन के अनुसार है |
यह आखें मूंदकर किसी सिद्धांत को मानने की बात नहीं है | कर्म के सिद्धांत तो सर्वत्र क्रियान्वित होते हुए दिखायी देते हैं | दूर क्यों जाएं? आप मात्र ३० दिनों तक सकारात्मक, प्रसन्न एवं उत्साही बनकर देखिये | नकारात्मक एवं बुरे कर्मों को अपने से दूर रखिये -और फिर देखिये आप क्या अनुभव करते हैं | इस छोटे से प्रयोग से ही देखिये आप के जीवन में आनंद का स्तर कहां तक पहुँचता है | जिन्हें किसी ने नहीं देखा ऐसे चमत्कार की कहानियों या विकासवाद के सिद्धांत से तो यह अधिक विश्वसनीय है |

वेद उसका अन्धानुकरण करने के लिए कभी नहीं कहते | इस सिद्धांत के इस क्रियात्मक पक्ष को हर विवेकशील व्यक्ति स्वीकार करेगा  – कि ज्ञानपूर्वक सत्य का ग्रहण करें और असत्य को त्यागें | Religion of Vedas में वर्णित अच्छे कार्यों को करें | स्मरण रखें कि वेदों का मार्ग अत्यधिक  संगठित और प्रेरणादायी है | जिसमें विश्वास करने की कोई अनिवार्यता नहीं है |  वेदों का अभिप्राय यह है – जैसे ही आप स्वतः सत्य को स्वीकार और असत्य को छोड़ना शुरू करते हैं चीजें स्वतः आप के सामने स्पष्ट हो जाती हैं | यदि आप इस से आश्वस्त नहीं हैं तो चाहे इसे कुछ भी कहें, पर इससे अधिक तार्किक, सहज- स्वाभाविक और प्रेरणात्मक सिद्धांत और कोई नहीं है – ” ईश्वर हमेशा से है तथा हरदम हमारी रक्षा और पालन करता है और हमारे कर्म स्वातंत्र्य का सम्मान करते हुए अपने स्वाभाव से हटे बिना, हमारे कल्याण के लिए ही कार्य करता है और हमें अवसर भी प्रदान करता है | ”

विश्वस्तरीय सर्वाधिक बिकने वाली ” The Secret ” में इस सिद्धांत का जरा सा पुट लेते हुए अनेकों की जिंदगी को बदल दिया है |  इससे सम्पूर्ण सिद्धांत के सामर्थ्य और प्रभाव का अंदाजा लग जाता है | इसे हम अग्निवीर में अपनी समझ से सर्वाधिक अच्छे रूप में प्रस्तुत करने का प्रयास करते हैं |
नोट: इस विषय पर अधिक जानकारी के लिए सत्यार्थ प्रकाश के ७,८ और ९ वें अध्याय का स्वाध्याय अवश्य करें | १२५ वर्ष पुरानी भाषा होते हुए भी इस पुस्तक में अमूल्य एवं अलभ्य सिद्धांत वर्णित हैं |

हिंदी आवृत्ति: http://agniveer.com/wp-content/uploads/2010/09/satyarth_prakash_opt4.pdf

जो व्यक्ति ध्यान पूर्वक इन तत्वों को समझ सके और आत्मसात करे उसे स्वयं के उद्धार के लिए अन्य किसी की आवश्यकता नहीं है | अग्निवीर के आन्दोलन का आधार यही वे अध्याय हैं जो जीवन को बदलने वाले साबित हुए हैं | आगे बढ़ें, और स्वयं अपने आप में एक नया रूपांतरण अनुभव करें |
सत्यमेव जयते!

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Disclaimer: By Quran and Hadiths, we do not refer to their original meanings. We only refer to interpretations made by fanatics and terrorists to justify their kill and rape. We highly respect the original Quran, Hadiths and their creators. We also respect Muslim heroes like APJ Abdul Kalam who are our role models. Our fight is against those who misinterpret them and malign Islam by associating it with terrorism. For example, Mughals, ISIS, Al Qaeda, and every other person who justifies sex-slavery, rape of daughter-in-law and other heinous acts. For full disclaimer, visit "Please read this" in Top and Footer Menu.

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137 Comments on "ईश्वर ने हमें क्यों बनाया ?"

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satya Prakash srivastava
satya Prakash srivastava

Part saran dharam nahi bhai.per piranhas sum nahi aghmai. Paropkar se bada koi dharm nahi hai.doosaro ko pida pahchane se bada pap nahi hai.

jawan
Mujhe to sirf itana pata hai sabse bada dharm prani dharm ya fir aap ise man lijiye acche bure ka dharm .. Yadi aap mai Achhai hai, kisi ka bura nahi karte, kisi jaruratmand ki madad karte hai, samast sansar ko niswarth aur karunamay aur udar prem se dekhte hai… Read more »
Megha

Bahut accha likha hai

Hemant jain

Bahut hi sundar jankariya mili he.. Aap bhai logo ka koi watsaop group ho. .in jankarito k vishay m to pls. Add kare98939-10403

Aoniua

Pls mujhe v add kijiye…mujhe is sab culture se related reality wchi lagti hai aur jaane ka shaukh rakhti hoon

हैदर बेग
हैदर बेग

गरीबों दलितों पिछङो को बेवकूफ़ बनाया जा रहा है

sam

abe murkh yahan dalit aur pichhde kahan se aagye ..isme aisa kya likha hain .

rajk.hyd

shri haidar ji , kuran to mul ki bhul hai vah to sabhi muslimo ko bevkuf bana rahi hai saath me bahut se gair muslimo ko bhi !

Vishal Kumar

@Raj.hyd

Hindi aur Ved ko janne ke liye ye website sabse acchi hai. Kripya iss par visite ki jiye.

http://www.aryamantavya.in/

makarand s s ballal

We are all human being. We are here on this wonderful earth for short time. Therefore, I request all to give best performance for the role each one performing here on this destiny stage.

unknown
mujhe lagta hai ki saare log is dharti par rahkar yaha ke hisab se hi bol rahe hai , jitna wo jante hai ya fir jitna wo samajhte hai , mai unse puchna chahta hu ki kya wo sabhi pura jaante hai.nahi jaante to tark kyu dete hai,mai aapko sirf… Read more »
Mitraj

Bhai aapne jo b likha hai wo sabse hatke aur shydse a sa hi kuch sach hoga lagta hai

Vijay Kumar
भाई लोगों मैं हिन्दू हूँ। लेकिन सभी धर्मों का सम्मान करता हूँ। किसने किसको बनाया मैं ये नहीं जानता लेकिन अगर हमने इस धरती पर जन्म लिया है तो हमें मानवता के प्रति जो अच्छे कर्म हैं वो तो ज़रूर करने चाहिए। और कोई रिश्ता न सही मगर मानवता का… Read more »
rajk.hyd
shri vjay jo aapki baat kuch thik hai ! sabse badi baat manvata hai ” dusre ke saath vahi vyvhaar karo jo apne liye bhi pasand aye ! lekin kuran manavta nahi sikhlati hai jaise 2/54 kuran ki ayat dekhiye jisme sirf bachade ki puja karne valo ko apas me… Read more »
SAMEER
mr kuldeep apne dharam ko dekh ,kaise shaitan aur chudail ki shakal wale bhagwan ki puja karte ho tum log ,tumhare bhagwan to dusro ki biwi ka rape karte they wo nhi dikhai deta ,aur tumhare bhagwan apne aap ko khush krne ke liye janwaro ki bali mangte hai ,… Read more »
rupendra singh thakur
rupendra singh thakur

kya agniveer ki monthly book mil sakti he plz mujhe is no. par bataye 9893268170

Deepesh
too good dosto ek hi jagah sab mil gaya sanatan dharm or islaam sare comments ne bahot sare questions ke answer de diye or kuch logo ki sacchai bhi samne aayi…Thank you all of you And pure to naahi but jitne post read kiye sare bahot ache lage…. agar whatsapp… Read more »
Shamshad Ahmed
AGNIVEER JI APNE JO BHI LIKHA USKO MAINE BADE DHYAN SE PARHA AUR SAMAJHNE KI KOSHISH KI. . . . . . . . . . . . . . AUR IS NATEEJE PAR PAHOONCHA KI . . . . . . . . . APKO ISLAM KE BARE MAIN… Read more »
raj.hyd
shamshad ji yah kaise maloom hoga intarnet me jo jankari hai muslim ki hai ya yahudi ki hai ! kya islami vidvan intarnet se dur rahate hai ?bahut sa islami sahity islami blog valo ka bhi hai ! APNI KAMIYO KO DUSARO PAR THONA EK FAISHAN HO GAYA HAI !… Read more »
Sumer
Hello all user. Mene saab logo ke view pade . sab ne acha likha hai. yaha par koi hindu. koi muslim koi kisi dharm se hai. sub logo ne bahi likha hai jo jo un ke dharm me or us dharm ki books me likha hai. par ? sach kya… Read more »
Dev
Sumer ji mai bhi aapse sahmat hu.mera bhi yahi maanna hai ki insaan ne jo kuchh bhi banaya hai apne swarth ke liye banaya hai.apne aapko achha saabit karne ke liye aur buissnes karne ke liye banaya hai.fir chaahe wo dharam hi kyo na ho.mai bhi naastik hu in sab… Read more »
jayesh chaudhari
me ye nahi manta ke iswar ne hame nani banaya…. mera manna hai ke hame iswar ne hi banya hai.. ye ho sakata hai ke ye dharm ke wo iswar hai wo dharm ke ye iswar hai ye hum ne banaya hai… iswar ne ye sansar anand ke liye banaya… Read more »
Sandeep Bansal

अपने पूना प्रवर्चन ( उपदेश मंजरी ) में महऋषि दयानंद जी कहते हैं कि ईश्वर ने इस सृष्टि का सृजन अपना शक्ति सामर्थ्य दिखाने के लिए किया है । अगर वो सृष्टि न बनाता तो उसका यह सामर्थ्य निष्फल हो जाता ।

Sandeep Bansal
नमस्ते अग्निवीर जी // ईश्वर ने हमें नहीं बनाया | और क्योंकि ईश्वर ने हमें कभी बनाया ही नहीं, वह हमें नष्ट भी नहीं करता | जीवात्मा का सृजन और नाश ईश्वर के कार्यक्षेत्र में नहीं आता | अतः जिस प्रकार ईश्वर अनादि और अविनाशी है, उसी प्रकार हम भी… Read more »
Narayan

Sandeep ji, Namaste!

आत्मा को शरीर देना ही ईश्वर का कर्म-फल सिद्धान्त है थो इसमें आत्मा का सृजन कि बात कहा आयी ?

Raja Hindustani

Bahut achchha post hai sir

Yash

Agniveer sir aap likhte rahiye ye Chuslim bas Chapti Dharti, Suaraj ka Daldal me doob jana “Sachhe Khajoor” Chuhhmad or Pille-Ilaahi hi smjhte h. aap likhte rhiyega. Chuslim bhut bade Jhoote or Dogle hote h. inki Baato pr dhyan mat dijiye.

Maansingh
Dear Harish,Raj aur Ankur Ye to main janta hun ki aap log , apne galati chhupane ke liye kitane saare jhuth bole,maine bahut adhayan kiya aur aapke sabhi galat fahmiyon ka samadhan dhundh nikala. Ise dyan se padhiye aur apni soch badal dalo aur maan lo ki Ishawar/Allah/God ne hi… Read more »
sam

yaar kitni baar me is kamiri muslim ko javab de chuka hun ..jo islam hindusam ki site chalata hain …maan singh ek bat ko bar bar copy paste mat karo bhai ..apne view rakho kya puchna chahte ho

Sanatan Dharma
@Maansingh Quran 26/198-199 ke anusar Islam / Quran kewal Arab me rahne walo ke liye hi hai. Allah ne swaym iski pusti ki hai ki agar ham gair-Arabi bhasha me Quran dete to Arab log us par viswas nahi karte. Arab vasiyo ko dhyam ke rakhakr hi Quran arbi me… Read more »
Maansigh

@Sanatan
Pehale aap padho aur samjho phir puchho.Aap Satyarth Prakash padhkar aisi baat likhte ho, jismae kitne sare jhuth hain. Islam is all for humanity.

sam

maan singh aap se sawal aap ki bat to satay karte hain chaliye ..quran k 33:37 aayat ko aap padh kar bataye ge kya matlab hain ..aap bataiye ..hun jhuth bolte hain aap sach bataiye ..chaliye

Sanatan Dharma
@Maansigh Pahle aap Quran 26/198-199 ki aayat ke bare me uttar denge to mai aage kuchh kahunga. Aayat me Allah ne swayam kahaa hai ki agar ham gair-Arbi bhasha me Quran dete to Arab wasi us quran viswas nahi karte. Iska spast arth hai Quran kewal Saudi Arab me rahne… Read more »
shanker lal meghwal
dear sakar nirakar ka sawal he galat hain. Jo omni potent hain vah sakar bhi hoga nirakar bhi hoga. dono ek hi satya ke do virodhi bindu hain. iswar agar kewal nirakar hain to voh omni potent nahi ho sakta, kyoki uske sakar hone per rok lag gahi? yadi vah… Read more »
raj.hyd
shri maan ji agar islam manvata vadi hota to munafik kafir momin me anek hisse nahi hote ! muslim 73 se jyada firkon ke na bante hote ! hamare pas to 315 firko me muslimo ko bante hone ki lisht bahut saal purabni ek kitab me hai ! agar apko… Read more »
Maansingh
[email protected] yahan phir aap quran ko hatith se mila rahe hain aur Ved ko Upnishad,puran, Ramayan aur mahabharat se nahi mila rahe hain. Jab nahi jante to jawab dena zaroori nahi.Lagta hai aap Allah ki lambai naap chuke ho? quran me kahaan likh hai ki Allah omnipresent nahi hai? Lagta… Read more »
sam

Surah bakar jo dusri surah hain uska hindi me kya matlab hota hain ..batao …maan singh

harish

quran mai kaha likha hai ki allah omnipresent hai ? agar allah omnipresent hota to wo arsh par ya 7th sky par nahi hota….Aur dusri baat ye hai ki mai traivaad ko sabit kar sakta hoo cause and effect ke logic se jo scientific hai….

trackback

[…] in English at http://agniveer.com/why-did-god-create-us/ This post is also available in Hindi at http://agniveer.com/why-did-god-create-us-hi/આ વિશ્વમાં નજરે પડતી અદ્દભુત […]

Ashok choudhary

Aap bhut achha kam krte hen

Maan Sigh
@Raj Kya in aayat se nahi malum hota ki God ko kisi ne nahi dekha woh nirakar hai. Q6:103 Such is Allah, your Lord. There is no God save Him, the Creator of all things, so worship Him. And He taketh care of all things. (102) Vision comprehendeth Him not,… Read more »
sam

bhai dono haatho se banaya aadam ko banaya

raj.hyd
mahamahim shri maan ji ! jo farishte kurni allah ka singhasan uthaye huye hai ,kya vah allah ko nahi dekhte hai? 7/143 me bhi allahkaha rahe hai ki agarpahad sthir raha to tum hamko dekh log rahe hai e/ yani dekhne ki ek sambhavna puri thi ? isi ayat me… Read more »
raj.hyd
mahamahim shri maan ji ! jo farishte kurni allah ka singhasan uthaye huye hai ,kya vah allah ko nahi dekhte hai? 7/143 me bhi allahkaha rahe hai ki agarpahad sthir raha to tum hamko dekh log rahe hai e/ yani dekhne ki ek sambhavna puri thi ? isi ayat me… Read more »
Ankur

@Maan singh : to kya aap mantein hai ki quran mein conflicting description hai allah ka kahan nirakar kahin saakar?

Maan Sigh
1.Read Rigveda 1.64.46 and 1.63.9 Rigveda 10.82.3-says –arousing Lord who is our father…… Rigved 10/31/5 as ” he whose eyes go everywhere, who faces all sides, whose arms are here, there all around and whose feet in all directions… 3. Yajur Ved 32/3 as ruler… Lagta hai aapne Ved padh… Read more »
sam

bhai aap ne jo ved k mantar bataye hain simple si bhasha me ishwar har jagah hain yahi iska matlab hain ..

harish
Allah nirakar nahi hai..Ye pakki baat hai..Aur uska image 60 cubits hai . Allah ke image main hi Adam ko banaya gaya aur isliye Adam ki height bhi hadith mai 60 cubits batayi gayi.. Nirakar wohi ho sakta hai jo omnipresent ho. Jo koi ek jagah par baitha ho ,wo… Read more »
Maansingh
3. This Self is the Lord of all beings, the King of all beings. As the spokes are held together in the hub and in the rim of a wheel, just so all beings, all creatures, all worlds, all lives, are held together in the Self.—Yajur Veda, Brahadaranyaka Upanishad -This… Read more »
Ankur
@Maan Singh :सर्व प्रथम ब्रिहदार्यनक यजुर वेद का अङ्ग नहीं है । अब आगे चलते हुए आपकी टिप्पणियों का विश्लेषण कुछ इस प्रकार है १ . He is assumed to have either a human-like (Indra, Mitra, Yama, Matarishva), animal-like (Garutmat) or even an elemental-like (Varuna, Agni) form. यह बिलकुल ही… Read more »
Maansingh
2. Bright, existing very close, moving in the heart; great and the support of all; in Him is all the universe centered around. All that moves, breathes and blinks. Know Him who is both with form and without form, the most adorable, the Highest of beings, the One beyond the… Read more »
Maansingh
@Ankur.Nahi,koi conflict nahi hai, yeh to hamare samjhane aur manne ke upar hai. par ishwar/Allah to nirakar hi hai,ye sabhi kitaben kehti hain. Ise padhiye—- 1. They call Him Indra, Mitra, Varuna, Agni or the heavenly sunbird Garutmat. The seers call in many ways that which is One; they speak… Read more »
Maan Sigh
@Ankur–Ye kahawat to aap pe bhi phit baithta hai, is mantra me ye bhi to nahi kaha gaya hai ki ishwar ne kewal sharir manaya, jiv/atma nahi…chalo jane do apni-2 samajh hai. ek aur doubt hai pls tippadi kariye– Jab ishawar aur insaan ke bich koi abhikarta ya paigamber aisi… Read more »
sam
aap ki bat man lete hain paigamber wali per 1 lakh 24 hazar paigamber ki awskta kyo padhi allah ko bhejne ki 10 ya 20 se kaam nahi chala …yeh koi traksangat nahi hain …aisa kyo ki mohmmad k bad koi paigamber nahi aaye aaye ga ..allah ne 4 kitab… Read more »
sam
manusay samuday parivartan kar dega to allah sab kuch janne wala kaise hua .. aur jab quran ki safety ki responsibility allah ne li to pichli 3 kitabo ki kyo nahi li ..ab quran per phir se qus mark khada ho gya ab allah nayaysangat bhi nahi rha jab ki… Read more »
raj.hyd
param adarniy shri maan ji, shrishti ke arambh me 4 achhe vyaktiyo ne yog sadhna ke antaragat samadhi avstha tak gaye 1 ussme jo anubhuti huyi kuch gyan ki anubhuti huyi usko ishvariy gyan kaha gaya hai ! ishvar ne kisi ko nahi chuna balki ek badi koshish karne ke… Read more »
Ankur

@Maan Singh : all your questions are answered here.

http://agniveer.com/origin-of-vedas-their-inspiration-and-authority/

raj.hyd
manniy sri javed ji , ap kahate hai ki allah ne apko banaya hai , to jara batlaiye ki allah ki taseer[gun ] apke andar kyo nahi hai ? kuran ke anusar to allah ne sare jivo ko banaya to kya apkoi chnti ke pair bhi bana sakte hai !… Read more »
Maan Sigh
@Raj bhai Kya uljullol bate likhte hain, Ishawar/Allah ne hame banaya/paida kiya to koi zaroori nahi ki usake gud hamare ander ho.Woh jitne gud/dimag dalta hai waisa aadmi hota hai, jaise koi computer utna hi kaam karta hai jitna uske dimaag me(software) dala jata hai. Yeh nahi ki insan ne… Read more »
raj.hyd
param adarniy shri maan ji hmne to is blag me apse koi batchit hi nahi ki apse to dsre blag me batchit ki thi! ishvar ne jiv ko namhi banaya yah saty hai lekin hamare v sabke sharir ka to nirmata hai ! kya apne kisi ki ankho ko pair… Read more »
Maan Sigh
Dear Raj bhai. Kya halva chini ka example diya hai, mai to pehale hi likha hai ki aap sab Ishawar/Allah ko insan/insani niyam se tulna karte hai jo ishawar par lagu nahi.Banaya ya paida kiya ek hi hai. यजुर्वेद 13.4 सारे संसार का एक और मात्र एक ही निर्माता और… Read more »
Ankur
@Maan Singh :”नीम हकीम खात्राए जान ” यह कहावत आप पे सिद्ध हो जाती है . आपने कहा की संसार में सारे आतें हैं , हाँ बिलकुल सही कहा, लेकिन शरीर और आत्मा में अंतर है , हाँ शरीर जो की प्रक्रति है उसे इश्वर ने बनाया है प्रकृति के… Read more »
raj.hyd
mahamhim shri maan ji , dekhe kuran 38/75 keval dono hath hi nahi balki shaitan [shriiblis ji] se bahas bhi ho rah hai ! agar kurn ka allah nirakar hota to yahbahas bhi kaise hoti? dekhe kurn 39/67 jisme kuran ka allah kahata ki kayamat ke baad dharti uski muthhi… Read more »
tera baap

chal bhad mein ja ……
tu gaa… mara
tum jaiuse ki kami nahi….

Chander aarya

Aarya

irshad bhai aap apni pahli pustak (grnth) torait ko nahi mante?
Agar nahi mante to Q.?

To allaih ki agya ka ulnghan karte ho.

Kyunke allah tala me Quran me kaha hai
HUMNE EK KITAB OR
MOUJIJA MUSA KO DIYE HAIN.
Kaya yeh baat sahi hai

Ajay

Namaste Agniveer Ji,

kirpya “MOKSH” ke vishay me prakash daale.

Indian Agnostic
नमस्ते अजय जी अपना द्रष्टिकोण रख रहा हूँ | आशा है कि त्रुटियों पर अग्निवीर जी टिपण्णी करेंगे और आप क्षमा करेंगे ! धर्म , अर्थ , काम , मोक्ष को मै इस तरह से देखता हूँ : काम – वो सारी इच्छाएं जो मै व्यक्तिगत तौर पर पूरी करना… Read more »
JAI BABE DI

@Indian Agonist
I HAVE BEEN REGULARLY VISITING AGNIVEER.COM AND HAVE BEEN GAINING IMMENSE KNOWLEDGE AND ALWAYS HAVE STOPPED MY SELF WITH GREAT EFFORT TO PASS ANY COMMENTS POSITIVE OR NEGATIVE. BUT TODAY JUST COULD NOT STOP MY SELF AND HAVE TO SAY ” RESPECT YOU A LOT “

shravak
@Namaste IA bro —इसी लिए साधारनतया वानप्रस्थ एवं संन्यास आश्रम को ही इस प्रयास के लिए उचित बताया गया है |— क्या इसको आप थोडा और विस्तार से समझा सकते है? अपनी जिम्मेदारिओं को छोड़कर वानप्रस्थ और सन्यासी हो जाना कहा तक उचित है ? इस समय जब देश और… Read more »
Indian Agnostic
Namaste Shravak bro १. क्या इसको आप थोडा और विस्तार से समझा सकते है? अपनी जिम्मेदारिओं को छोड़कर वानप्रस्थ और सन्यासी हो जाना कहा तक उचित है ? मित्रवर आप गलत समझ बैठे ! मैं वानप्रस्थ आश्रम की बात कर रहा था – जो कि ब्रह्मचर्य एवं ग्रहस्थ आश्रम के… Read more »
shravak

नमस्ते भ्राता श्री|

यह तोह आपका बड़प्पन है| आपके उत्तर ही तोह हमारी सोच को दिशा देते है|

साधुवाद|

Indian Agnostic

Namaste Anuj

dhanyawad to aapka hai ki itne sundar vishay par vaartalaap ka avsar pradaan kiya 🙂 ..warna zyada samay to jhoot ka khandan karne mein hi beet jaata hai , satya ke soundarya ko sarahne ka avsar kabhi kabhi hi milta hai ..iske liye aapko sadhuwad hai !

shravak

धन्यवाद आपके उत्तरों के लिए| For time being, मेरी जिग्यासा शांत हो गयी है| आगे जरुरत पड़ी तोह अपने बड़े भाई को फिर पुकारूँगा| 🙂

आपका छोटा भाई,
श्रावक

Indian Agnostic
१. यह आपको कैसे पता चले की अब में अपने सब दायित्व निभा चूका हूँ? मुझे तो सांसारिक/गृहस्थ मार्ग खत्म होता नज़र नहीं आता| हर क्षण किसी न किसी को आपकी जरुरत है| इसी लिए मैंने “साधारनतया” शब्द पर बल दिया था | मोक्ष हर किसी जीव की इच्छा नहीं… Read more »
shravak
—मित्रवर आप गलत समझ बैठे ! मैं वानप्रस्थ आश्रम की बात कर रहा था – जो कि ब्रह्मचर्य एवं ग्रहस्थ आश्रम के बाद आता है – जहां पर आप व्यक्तिगत एवं सामजिक जिम्मेदारियां निभा चुके होते हैं |—- यह आपको कैसे पता चले की अब में अपने सब दायित्व निभा… Read more »
Akhila Padhi
When ever the question of Mokhya comes, I try to describe the same with the following example. Its my belief, may be wrong. Others comment will try to purify the same. We know Parambrahma+Atma+matters = complete. Now lets see Parambrahma as the ocean, atma being the water in it. We… Read more »
Slim Shaikh=starving to be Muslim
Slim Shaikh=starving to be Muslim
@Ajay Bhai aap Quran padhiye. Quran hi ek matra sacha granth hai. Aap chahe to Delhi ki Jama Maszid me jakar Quran free of cost prapt kar sakte hai. Mai aapko vahi par milunga. Vaha aapko Quran ke vishay me jankari bhi di jayegi. Anyatha aap mujhe aapna address de… Read more »
Ajay
salim ji, Quraan bhejne ke liye dhanyawaad, par Quraan mai internet par already padh chuka hoo, aur Quraan me to aisa kuch likha hi nahi hai, dusri baat quraan puner janm ko maanta hi nahi to jawaab kahan se milega dost. aur Moksh ek janm me sambhab nahi ho sakta.… Read more »
Indian Agnostic

@Slim Shaikh ji

aapne to Quran padhi hai ..aap khud hi kyun nahi uttar de dete Ajay ji ka …ho saktra hai aapke lajawab jawab ke baad wo Quran khud khareed ke padhna shuru kar dein ..warna yu hi free copy bhejne ka kya faida ?

Ajay
Namaste Agniveer Ji, Kuch prashn jo hamesha se dimag me chalte the aur bahut jor dalne par thaka dete the aapne iska nivaran kar diya. ek prashn aur agar ishwar, jeev aur prakriti anadi hai to kiya teeno ka koi prarambh nahi hai ya jeev ka prarambh hai. aur yadi… Read more »
Akhila Padhi
अजय जी प्रणाम. १. इश्वर जीव और प्रकृति अनादी हे तो क्यों तीनो का कोई प्रारंभ नही हे ? उ. कुछ समय केलिये वेद, कुरान और बिबेल को छोड़ कर जो वैज्ञनिक तथ्य हे उस पर ध्यान देते हे. प्रकृति अनादी हे. ये केवल उर्जा का बिभिन्न स्वरुप हे. ये… Read more »
Shiv Charan Dagar

Manva jnm me atma garbh me jati hai ya janm letai samay prvist karti hai. Agar gargh me jati hai to garbh ke kis mahine me jati hai. mera yah sansay door krne ka kast karen .Dhanywad ji .

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[…] 2Avoid troubles Remove guilt- Ishopanishad Mantra 3This article is also available in Hindi at http://agniveer.com/4633/why-did-god-create-us-hi/ Even a cursory glance at the extraordinary orderliness that we see in the world around is sufficient […]

neha
hame bhagwan ne nahi balki kaal ne banaya h ye sansar kaal ka banaya hua h. according to वेद kaal ne croro saal tak tapaysa ker ke bhagwan se sarti/ sansar banane ka ver maga .per god /khuda/ rab (you can say anything) usme kaal ko to ver(wish) de diya.… Read more »
Prem

hello neha ji u r right and i m agree with u. but i want to ask a single question? from where u get this information? Mention book name also.

Amjad

Jin meli kucheli cheezon ke peeche tum duniya me bhaag rahe ho, is se kahin khoobsoorat jannat Allah(swt) ne tumhare liye banaii hai. Allah(swt) tumhe Itni khoobsoorat jindgi ada karna chahte hain. Allah(swt) ke rasool me aoo kafiron. Yahi tumhe dozak ki aag se bacha sakta hai.

http://www.youtube.com/watch?v=Ocn1eTDxXkQ&feature=player_embedded

raj singh

murkha insaan to abhi bhi jaan kar anjan mat bat . nahi to narak me jayega

raj.hyd
param adarniy shri amajad ji , sabse pahale yah sochiye ki itna bada allah !!! ek anpad muhammad ji ko apni hol sele “ajensi ” kalpit jannat ke lye bhi kyo dega ? kaun se achhe gun ]tasir]unke pas the ? ap bhale hi muhammad ji andhe ashik ho ya… Read more »
NEERAJ
पहले आप ये बताई ये की भगवान है कौन सब के पास एक ही जवाब होता है की ईश्वर तो शक्तिशाली है उनकी न तो उत्पत्ति हुई और नहीं अंत होगा माना की वे सबकुछ है तो इसका ये मतलब थोड़ी है की उनकी कभी उत्पत्ति न हुई होगी भला… Read more »
भावेश मेरजा
भावेश मेरजा
भगवान है कौन? भगवान (ईश्वर) एक पदार्थ है, वस्तु है, द्रव्य है । जिसमें कई गुण भी हैं और जो कर्म अथवा क्रिया भी करता है । यह सत्य है कि ईश्वर की न तो उत्पत्ति हुई है और न ही उसका कभी अंत भी होगा । इसलिए कि ईश्वर… Read more »
hemendra

shi bt h iswar aur prakti hmesha se h aur aatma ki utpti shiv ling se hui h jo aatma vapas shiv ling me mil jati h vo moks prapt krti h mahadev

raj.hyd
atma aur pra kriti aur ishvar ka kabhi janm bhi nahi hua hai aur n inki maut hoti hai yani yah tino anaadi aur ananat hai ! agar atma ka janm hua hota to paida karne vale ke gun usme jarur hote jo nahi hai ! shivling se kisi ka… Read more »
Vajra
नमस्ते भाई नीरज बनना और बिगड़ना असल में पैदा होना या समाप्त होना नहीं होता. कुछ भी चीज आसमान से नहीं आ टपकती. घड़ा तब बनता है जब मिटटी होती है. मिटटी नहीं हो तो घड़ा नहीं बनेगा. जिसे हम ख़त्म या समाप्त होना कहते हैं वो तो वास्तव में… Read more »
Ajay
Namaste Vajra Ji, Maine yeh prashn aapka post padhe bina hi kar diya tha lekin baad me aapka post padha bahut hi sunder aur saral jawab diya aapne. Padh ker man ko shanti mili. aapka bahut-bahut dhanyawaad. Ek prashn aur tha “MOKSH” Kiya hai. aasha karta hoon jawaab milega. jis… Read more »
Prakash Chandra Shrimali
Prakash Chandra Shrimali

I want to learn & understand Satyarth prakash, & clear the doubts.
whether any place is there, for teaching satyarth prakash or if I come for a month can you suggest suitable person to fulfil this task.
The knowledge gained will be utilised for self development & for Arya samaj.

भावेश मेरजा
भावेश मेरजा

To understand Satyarth-Prakash in a better way one can read:
“Satyarth-Bhaskar” (2 volumes) written by Swami Vidyananda Saraswati
Contact: http://www.vedicbooks.com

Vajra

Namaste Prakash Chandra

In my opinion you should yourself read and explore it. Accept up to where you can appreciate. Leave the rest for future. But read it once completely yourself.

Akhila
@ Irshad. – The basic difference between Vedic Philosophy and Koranic Philosophy is that, Vedas say this body is not “me” the soul inside is “me”, where as Koranic Philosophy says this body is “me”. But one can know the truth easily. When we die our body perish, but the… Read more »
Agniveer is making SAUBHARI MUNIs
Agniveer is making SAUBHARI MUNIs

avoid the word ‘hindu’, ‘hinduism’ etc. Use ‘ÂRYÀ’ ‘ÂRYÀVART’ . Raja ram mohan roy:-( was idiot .

tamal
hindu – jo manushya hindusthan ko apni maa samajhte hai, iss desh ko pyear karte hai, isski dukh me dhukhi hote hai, isski khushi me anandit hote hai, is desh ke liye haste haste jan de shakte hai, unhe hindu kahete hai. bo insan sanatan, islam,isai, sikh, budhis……… any one… Read more »
RAM KISHOR SAUBHARI
Dear agniveer , main saubhari Rushi ji ke kul se hi hoon , kripya jaisa aapne bataya hai ki saubhari muni ne ye kaha hai vo kis ved main hai. rigveda main ya saubhar samhita main kripya jaroor bataiye , thanks
SHAKTI MISHRA

I AM SHAKTI . I AM READING IN GURUKUL. I WANT TO BE YOUR FRIEND. PLEASE CONTECT ME BY EMAIL. ARE YOU DO FRIENDSHIP WITH ME??????????

Ashish Sachi

Hello Agniveer ji,

Great Article again.
I just want to know , have you written anything about the Age of Yugas.

This is a very puzzling issue. I have researched a lot on this. I am very much interested to know your views on it.

Ashish Savya Sachi.

Satyendra
Namaskar Agniveerji, I have no words to say now! This article is one of the best doubt-clearing one for me. I have been asking these questions to my mind and could never got the logic. Your answer gives me the impression that humans have their own-identity and prakriti is the… Read more »
Rajshekhar

Raj

Very good questions,Agniveer Ji should reply to these.

Thanks

Rajshekhar
vijay jaiswar
dear, you should follow hawking closely because Mr. hawking apne dave/theory ka khandan khud kar chuke hai. kitni baar or konsi theory ka kandan kiya hai ye to mujhe pata nahi par kiya hai ye to sach hai. ho sakta hai ek din vo rebirth ki theory me bhi vishvas… Read more »
raj.hyd
hamne ishvar ko koi bhi prarthna patr apne janm ke liye nahi diya tha , fir usne hame kyo paida kiya ? yah uski to tanashahi jaisi lagti hai ! har bat ko ishvar ki marji kaha kar nahi tala ja sakta ? ham dukhi kyo hai ya ham sukhi… Read more »
rajk.hyd
shri irshad ji ganesh ki kahani bhi kaklpt farishto ki tarah hai 1 jab koi bat dharm me dak di jati hai vaha galt bhi hoskati ha vah huro ki bat ho ya parvati se ganesh ki ban eki bat hi sab ek aarh ke thaili ke chatte batte hai… Read more »
Irshad

Dear Raj.Hyd
aap ne apne maa baap ko prathna patr likha tha keya, aap ko paida karne ke liye?????????? sorry boss shayad bura laga hoga,

gp
Bhai logo ladne ki jarurat nahi hai because jo insan his mahol ya jaiai society me janm leta hai or Jo bhi us society se sikhta wahi saxh mankar us knowledge ko disre pe jabardasti thopne ki koshish karta hai ,use ye pata nahi hota hai ki WO bhi wrong… Read more »
raj.hyd
manniy irshad ji yah prashn hamare nahi hai hai, ek aam janta ke ho sakte hai , hamne to matr kuch logo ke sandeh ko yahan vichar ke rup me dala tha ! ishwar ne hamko paida nahi kiya ? agar ishwar ne hamko paida kiya hota to to ishwar… Read more »
arya

Gager me sager bali mai ek baat batana hu.akhil bradmand me jo kuch vi sarvochya hai wah ishwar hi to hai. Jaise jal me swad. Parwato. Me himalaya. Rituo me basant vanchoro me Singh.

truth seeker

@Irshad
Namaste Brother
Ishwar ne hame nahi banaya hai usne to hame body di hai, Aatma, Parmatma & Prakriti tino nitya hai inka kabhi bhi vinas nahi hota. Aatma apne karmo ke anusar body badalata rahta hai.

Irshad
Dear truth seeker says:or Raj. Hyd. sorry boss ye mere question ka answer nahi hai aur rahi baat ishwar ne aap ko nahi banaya to banaya kisne ?????? jab ke aap apne comment se ye zahir kar rahe ho ke aap ko ishwar ne paida kiya “raj.hyd says: May 16,… Read more »
KULDEEP
BHAI AIR HOTI HE, PER DIKHAI NAHI DETI, YE SAB KISNE BNAYA TUMHARE ALLAH NE, JIS ALLAH KO YE BHI NAHI PTA THA KI EARTH GOL HE, TUMHARE KURAN KE HISSAB HE EARTH CHAKOR HE, TUM LOGO KO IED PE APNE BETE KI BALI DENI HOTI HE PER TUM JANWAR… Read more »
Truth Seeker
Truth Seeker
@Irshad Boss Aatma(Ruh) & Pramata (Ishwar) Parkariti (matter) tino nitya hai matlab hamesha rahate hai kabhi bhi koi aesa time nahi tha jab aatma (Ruh) nahi thi, Ishwar ne Ruh ko body di hai taki wo Karm kar sake aur anand prapt kar sake. Ishwar, Aatma or Parkariti ka koi… Read more »
Vajra
Namaste Raj Ji and Raj Shekhar Ji Main aapko Swami Dayanand ki pustak Satyarth Prakash padhne ka paraamarsh doonga. Hum jo kuchh bhogte hain, vah sab hamaare ab tak ke kiye gaye karmon ka parinaam hote hain. Jo hum ab karte hain uska phal aage bhogte hain. Eeshvar bina krodhit… Read more »
Irshad
भाई जी नमसते आप से एक सवाल है जब ईश्‍वर ने दुनिया बनाई सबसे पहले पेड पोधे बनाये उसके बाद जानवर बनाये और उसके हजारों सालो के बाद मनुश्‍य को बनाया और जब मनुश्‍य को बनाया तो वह बिलकुल पाक साफ था इससे तो दुनिया में जो प‍हले मनुष्‍य पैदा… Read more »
amit tiwari
Sarvapratham aap sabhi budhijivion ko mera pranaam, Mai yahaan par kuch prathamik vicharon partial prakash daalana chahoonga. 1) Hum sabhi janmsidh swatantra janm lete hai 2) Hum apane watawaran ke anusaar apani swatantrata ka hanan kar dete hai 3) Hum yadi nahi jaanate ki kya uchit athawa kya anuchit hai… Read more »
amit tiwari
Tritiye tark ke anusaar prakriti ne sabhi jeevon ko vishisht karya hetu nirmit kiya hai. Jeev ko gyaat hai ki kya uchit hai aur kya nahi. Par woh kyonki swatantra hai is liye woh kuch bhi kar sakta hai. Prakritik roop se kisi bhi manushya ya anya jeev par kahi… Read more »
truth seeker

Namaste Agniveer

I am grateful to you have translated the article in Hindi. A lot of thanks.

dharmayoddha

ishwar ne mujhe islam ko khatam karne ke liye banaya ;))

vijay jaiswar

wah wah jiyo bhai

Niyazi

Hello Mr Dharmayoddha aap jo kehre woh bilkul galath hai

Ishwar tho pattar hai usne tumeh kaise kaha dharm………..!

fafafaf
niyazi miya pathhar to hazare aswad bhi hai.dhyan se dekho.bas bahana hai ki child rapist mohammad ne chuma to hum bhi choomte hain ‘अल्लाह ‘ईश्वर नहीं है !! जो लोग अज्ञानवश “ईश्वर अल्लाह तेरे नाम “का भजन करते रहते हैं ,शायद उनको ईश्वर की महानता शक्तियों और गुणों के बारे… Read more »
Irshad
अबे जब शंकर भगवान थे तो उनको यह नहीं पता चला की मेरी पत्‍नी पार्वती ने अपने मैल से एक बच्‍चा पैदा कर दिया हैा जब की तुम उनको भगवान कहते हो कैसे भगवान थे कि उनकी बीवी कुछ नया अविश्‍कार करे और उनको पता न चले और जब गणेश… Read more »
Irshad
हॉ जो आज कल मंदिरो में चल रहा लूट घसूट चल रही है उससे हर कोई वाकिफ है पण्‍डा खा खा के रबडी साले पेट फुला रहै हैं नागा पाखण्‍डी बाबा आपने सामान की पूजा करवा रहै हैं जब किसी हिन्‍दू की पत्‍नी को बच्‍चा नहीं होता है तो यह… Read more »
sam
irshad aap ki bat ka javab saaf sabdo me ,aap ko maa bhen istriling me aati hain kya aap ki maa bhen k ling latak raha hain .. batao ..ling ek partik hain ling ka matlab jo aap keh rahe hain wo anhi hain ..shiv ling matlab kalyan karne wala… Read more »
Irshad
भारतीय संस्कृति सहिष्णुतावादी रही है, लेकिन इस सहिष्णुता ने हमें कहीं न कहीं कायर भी बनाया है । संभवत: यही कारण है कि हमने गुलामी के प्रतीकों को न सिर्फ़ आत्मसात किया, बल्कि उनका महिमामंडल करने में भी हम पीछे नहीं रहे । उदाहरण के लिए हिन्दू शब्द को ही… Read more »
Maan Sigh
@fafafa.. 5 -मुहम्मद की कपट नीति पाहिले मुहम्मद सभी देवताओं को समान बताता था और लोगों से यह कहता था ,कि- “हमारा इलाह (देवता )और तुम्हारा इलाह एक ही हैं .सूरा -अनकबूत 29 :46 29:46 me aapne galat likha hai… Isaka sahi anubaad yah hai — hamar pujya aur tumhar… Read more »
SDC
Azim, hindu gods ayyash ho sakta hain lekin Muhammad toh balatkari tha. Aur kewal balatkari hi nahi tha buddha woh itna bhukha tha ki 6 saal ki bacchi ko bhi nahi chodta tha. Uski bhuk ka andaaza ess baat se lagaya ja sakta hain ki woh sexual slavery ko endorse… Read more »
azim
tu jo bhi hai sun tu apni jankari ko apni baat manwane k liye galat bhi likh raha hai jaise word इलाह nahi ilaaa hai ह word nahi hai jew k gods इला tha naam aur kisi bhi sure me ahi likha ki wo bade sihasan me baithta ai jhoot… Read more »
HAHAHA
Dear fafafaf, Kshamaa karnaa bhai lekin kisi ne galat information dee hai. Allah waisaa bilkul nahi hai jaisaa aapne kahaa hai. Quran ne aapko allah galat tareeke se samjhaayaa hai toh allah bechaare kee kyaa galtee? Mohammed ek Mahaamoorkha hai. Isme koi shankaa ho hi nahi sakti. Achchha hua saalaa… Read more »
javed alam
hame sirf allah ne banaya hai.aour upar jo kuchh bhi allah auor muhammad sahab ke baare me likha hai mai us per vishvash nahi karta, aour na hi kisi musalman ko hoga.muhammad sahab ne kisi ko bahkaya nahi hai aap ne to sab insano ko sach ki raah dekhai hai… Read more »
sam

to bharat me mohmmad kab aaye the talwar ki nok per bane huye muslman hain bharat pakistan me aur bahut se desho me na ki mohmmad k karmo ko dekh kar

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