इस सृष्टि में सर्वत्र व्याप्त अद्बुत नियमितता पर एक दृष्टिक्षेप ही काफ़ी है किसी महान नियंता की सत्ता को प्रमाणित करने के लिए | यह हस्ती इस परिपूर्णता से काम करती है कि वैज्ञानिक भी उसके शाश्वत नियमों को गणितीय समीकरणों में बांध पाएँ हैं | यह महान सत्ता प्रकाश वर्षों की दूरी पर स्थित दो असम्बद्ध कणों को भी इस सुनिश्चित रीति से गति प्रदान करती है कि गुरुत्वाकर्षण के सार्वभौमिक सिद्धांत का कभी भी अतिक्रमण नहीं हो सकता है | वैज्ञानिक जानते हैं कि दो दूरस्थ कण गुरुत्वाकर्षण के नियमानुसार निकट आते हैं – परन्तु वह क्या कारण है जो उन्हें पास आने और योजनाबद्ध तरीके से सम्मिलित रूप में गतिमान होने की प्रेरणा देता है – यह बताने में वैज्ञानिक भी समर्थ नहीं हैं | इस ब्रह्माण्ड को चलाने वाले ऐसे अन्य अनेक सिद्धांत हैं जिन में से कुछ के गणितीय समीकरणों को आधुनिक वैज्ञानिक बूझ पाएँ हैं, परन्तु अभी भी असंख्य रहस्य विस्तार से खोले जाने बाकी हैं |

अलग-अलग लोग इस हस्ती को अलग-अलग नामों से बुलाते हैं | वैज्ञानिकों के लिए यह ‘सृष्टि के नियम’ हैं, मुसलमान उसे ‘अल्लाह’ तथा ईसाई ‘गौड’ का नाम देते हैं | और ‘वेद’- विश्व की प्राचीनतम पुस्तक उसे अन्य अनेक नामों के साथ ही ‘ओ३म्’ या ‘ईश्वर’ कहती है |

किसी संकीर्ण मनोवृत्ति के अदूरदर्शी एवं छिद्रान्वेषी व्यक्ति को यह संपूर्ण जगत पूरी तरह निष्प्रयोजन लग सकता है, जो सिर्फ घटनाओं के आकस्मिक संयोग से उत्पन्न हुआ हो | अब यह अलग बात है कि उसका इस नतीजे पर पहुँचना ही यह प्रमाणित कर रहा है कि  वह इस आकस्मिकता में भी नियमितता और उद्देश्य को खोजना चाहता है | बहरहाल, हम इस लेख में उसकी अवास्तविक सोच की चीरफाड़ नहीं करेंगे | हम यहां इस मौलिक प्रश्न पर विचार करेंगे जो कि इस विलक्षण विश्व के सौंदर्य और विचित्रताओं को देखकर अधिकतर यथार्थवादी (अज्ञेयवादी + आस्तिक) व्यक्तिओं के मन में उदित होता है – ईश्वर / गौड / अल्लाह ने हमें क्यों बनाया?

बहुत से मत-सम्प्रदाय इस मूलभूत सवाल का जवाब देने की कोशिश करते हैं और अधिकतर लोग इसी तलाश में एक सम्प्रदाय से दूसरे सम्प्रदाय की ख़ाक छानते फिरते हैं|

अवधारणा १: ईश्वर ने हमें बनाया जिससे कि हम उसे पूजें |

बहुत से धार्मिक विद्वानों का यह दावा है कि उसने हमें इसीलिए बनाया जिससे हम उसकी पूजा / इबादत कर सकें | अगर ऐसा मानें तो –

a. ईश्वर एक दम्भी, चापलूसी पसंद तानाशाह से अधिक और कुछ नहीं रह जाता |

b. यह सिद्ध करता है कि ईश्वर अस्थिर है | वह अपनी आदतें बदलता रहता है इसलिए जब वह अनादि काल से अकेला था तो अचानक उसके मन में इस सृष्टि की रचना का ख्याल आया |

मान लीजिये, अगर हम यह कहें कि, उसने किसी एक समय-बिंदु  ‘t1’ पर हमारी रचना का निश्चय किया | अब क्योंकि समय अनादि है और ईश्वर भी हमेशा से ही था- इसलिए यह समय ‘t1’ या अन्य कोई भी समय ‘t2’, ‘t3’ इत्यादि समय के मूल (जो की अनंत (infinite) दूरी पर है) से सम-दूरस्थ हैं | इसीलिए जब वह ‘t1’ समय पर अपनी मर्जी बदल सकता है तो कोई कारण नहीं कि वह ‘t2’, ‘t3’ या अन्य किसी भी समय पर अपनी मर्जी ना बदल सके | साथ ही, यह निश्चय भी नहीं किया जा सकता कि – उसने इस ‘t1’ समय से पहले कभी हमें (या अन्य किसी प्रजाति को) उत्पन्न और नष्ट न किया हो |

जिन सभी सम्प्रदायों का यह दावा है कि अल्लाह ने हमें इसलिए बनाया जिससे कि हम उसकी इबादत कर सकें, वह भी अल्लाह की परिपूर्णता में विश्वास रखतें हैं | यदि अल्लाह पूर्ण है तो वह सभी समय-बिन्दुओं पर अपना काम एक सी निपुणता और एक से नियमों से करेगा | परिपूर्णता से तात्पर्य है कि वह निमिषमात्र भी अपनी आदतों में बदलाव नहीं लाता | अतः यदि  ईश्वर / अल्लाह / गौड ने हमें ‘t1’ समय पर बनाया है तो अपनी पूर्णता बनाये रखने के लिए उसे हमें अन्य समय-अवधि पर भी इसी तरह बनाना होगा | क्योंकि वह हमें दो बार तो बना नहीं सकता इसलिए उसको हमें पहले विनष्ट करना होगा ताकि फिर से हमें बना सके | अब अगर वह हमें इसी तरह बनाता और बिगाड़ता रहा तो वह यह कैसे सुनिश्चित कर पायेगा कि हम नष्ट होने के बाद भी उसकी इबादत करते रहेंगे | इसका मतलब तो यह है कि, या तो अल्लाह समय के साथ ही अपनी मर्जी भी बदलता रहता है या फिर उसने हमें इबादत करने के लिए बनाया ही नहीं है|

शंका: जब उसने खुद हमारा निर्माण किया है, तो वह हमें दुःख भोगने पर मजबूर क्यों करता है ?

यह सबसे ज्यादा हैरत में डालने वाला सवाल है, जिसका संतोषजनक समाधान कोई भी मत-सम्प्रदाय नहीं दे सके | यह अनीश्वरवाद (नास्तिकता) का जनक है | मुसलमानों में यह मान्यता है कि, अल्लाह के पास उसके सिंहासन के नीचे ” लौहे महफूज” नाम की एक किताब है, जिस में सभी जीवों के भविष्य के क्रिया-कलापों की जानकारी पूर्ण विस्तार से दी हुई है | पर इससे जीवों की कर्म-स्वातंत्र्य के अधिकार का हनन होता है | यदि मेरे कर्म पूर्व लिखित ही हैं, तो मुझे काफ़िर होने की सज़ा क्यों मिले ? और अल्लाह ने पहले से ही “लौहे महफूज” में काफिरों के लिए सज़ा भी क्यों तय कर रखी है ? मुलसमान धर्मंप्रचारक इस विरोधाभास का जवाब चतुराई से देते हैं | जैसे की नव्य पैगम्बर जाकिर नाइक इसके जवाब में कहता है, ” एक कक्षा में सभी प्रकार के विद्यार्थी होते हैं | कुछ होशियार होते हैं और प्रथम क्रमांक पाते हैं और कुछ असफल हो जाते हैं  | अब एक चतुर शिक्षक यह पहले से ही जान सकता है कि कौन सा विद्यार्थी किस क्रमांक को प्राप्त करेगा | इसका मतलब यह नहीं होता कि शिक्षक अपने विद्यार्थियों को निश्चित तरीके से ही कार्य करने पर बाध्य कर रहा है |  इसका अर्थ सिर्फ यह है कि शिक्षक यह जानने में पूर्ण सक्षम है कि  कौन क्या करेगा | और क्योंकि अल्लाह सर्वाधिक बुद्धिमान है, वह भविष्य में घटित होने वाली हर चीज़ को जानता है |”

बहुत ही स्वाभाविक लगने वाले इस जवाब में यह बड़ा छिद्र है – शिक्षक अपने विद्यार्थियों के कार्य का पूर्वानुमान सिर्फ तभी लगा सकते हैं जबकि वह उनके पूर्व और वर्त्तमान कार्यों का मूल्यांकन कर चुके हों | पर अल्लाह की बात करें तो उसने स्वयं ही तय कर रखा है कि कौन विद्यार्थी जन्मतः ही बुद्धिमान होगा और कौन मूर्ख !

हालाँकि, मोहनदास गाँधी का जन्म २ अक्तूबर १८६९ को हुआ था, अल्लाह ने उनके जन्म से लाखों वर्ष पहले ही यह तय कर दिया था कि यह बालक एक हिन्दू रहेगा परन्तु मुस्लिमों के प्रति अत्यधिक झुकाव रखते हुए उनका तुष्टिकरण करने में प्रथम क्रमांक पाएगा और फिर भी काफ़िर ही कहलाएगा और दोजख (नरक) के ही लायक समझा जाएगा, बतौर पवित्र मुस्लिम मुहम्मद अली के |  अतः गाँधीजी के पास उनके लिए पूर्व निर्धारित मार्ग पर चलने के अलावा और कोई चारा ही नहीं था |

यह शिक्षक-विद्यार्थी का तर्क तभी जायज है यदि अल्लाह आत्मा का निर्माण करने के बाद उसे पूर्ण विकसित होने का मौका दे- जब तक वह अपने लिए सही निर्णय करने में सक्षम ना हो जाए; बजाय इसके की अल्लाह पहले से ही “लौहे महफूज” में उनके कर्मों को निर्धारित कर दे | इससे तो अल्लाह अन्यायी साबित होता है|

कृपया “Helpless destiny in Islam” तथा “God must be crazy” इन लेखों का अवलोकन करें |

अवधारणा २: उसने हमें परखने के लिए बनाया है |

हम पहले ही इस धारणा को “God must be crazy” में अनेक उदाहरणों के द्वारा निरस्त कर चुके हैं |  फिर भी यदि यह माना जाए कि वह हमारी परीक्षा ही ले रहा है, तब तो उसके पास “लौहे महफूज” होना ही नहीं चाहिए या यूँ कहें कि तब वह पहले से ही हमारा भविष्य जान ही नहीं सकता | क्योंकि भविष्य जानता है तो परीक्षा की आवश्यकता ही क्या रह जाती है ? और यदि ऐसा कहें कि वह दोनों कार्य कर रहा है तो उसका यह बर्ताव एक निरंकुश तानाशाह की तरह है जिसे तमाशे करना पसंद है |

तो आखिर उसने हमें बनाया ही क्यों ???

इस उलझाने वाले सवाल के जवाब में दी जानेवाली सभी अविश्वसनीय कैफियतों को हम निष्प्रभावी कर चुकें हैं | यदि परखने के लिए नहीं और पूजने के लिए भी नहीं, तो और क्या कारण हो सकता है हमें बनाने का ? यह हमें ख़ुशी या आनंद देने के लिए तो हो नहीं सकता क्योंकि इस दुनिया में बहुत सी निर्दयी और क्रूर घटनाओं को हम घटित होते हुए देखते हैं – यहां तक कि लोग इस बेदर्द दुनिया से तंग आकर आत्महत्या तक कर लेते हैं |

चाहे ख़ुशी देने के लिए हो या दुःख देने के लिए या फिर परीक्षा लेने के लिए हो, उसने हमें बनाया ही क्यों ? क्या वह सिर्फ अपने एकाकीपन का लुत्फ़ ही नहीं उठा सकता था ? क्या जरुरत थी कि पहले हमें बनाये और फिर हमें अपने इशारों पर नचाए | विवश होकर यह कहने के आलावा और कोई रास्ता नहीं बचता कि “अल्लाह बेहतर जानता है”  या  “खुदा जाने”  या  “ईश्वर ही जाने उसके खेल”  या फिर  “गोली मार भेजे में” |

बौद्ध धर्मं प्रयोगात्मक है, वह तो इस सवाल से कोई सरोकार ही नहीं रखता | वह कहता है कि इस प्रकार के प्रश्नों के बारे में सोचने से पहले हमें मन को साध कर इन्द्रिय निग्रह द्वारा अपनी प्रज्ञा का स्तर ऊँचा उठाना चाहिए | दुनिया की चकाचौंध में फंसे हुए व्यक्ति के लिए जो कि इससे परे कुछ भी देखने या समझने में असमर्थ है, यह एक बहुत ही व्यावहारिक सुझाव है | इस सबके बावजूद, हमारे अंतस में कहीं ना कहीं यह प्रश्न सुलगता रहता है  – ईश्वर ने हमें बनाया क्यों ?

जब तक इस प्रश्न का संतोषप्रद जवाब नहीं मिल जाता – सभी कुछ निरुद्देश्य लगता है और कोई भी चीज़ मायने नहीं रखती |

यह सच है कि इसका सही जवाब सिर्फ ईश्वर ही जानता है परन्तु मानव जाती के प्रथम ग्रंथ – ‘वेद’ इस पेचीदा सवाल पर पर्याप्त प्रकाश डालतें हैं ताकि आगे हम इसकी गहराई में उतर सकें |

वेद स्पष्ट और निर्णायक रूप से कहतें हैं कि ईश्वर ने हमें नहीं बनाया | और क्योंकि ईश्वर ने हमें कभी बनाया ही नहीं, वह हमें नष्ट भी नहीं करता | जीवात्मा का सृजन और नाश ईश्वर के कार्यक्षेत्र में नहीं आता | अतः जिस प्रकार ईश्वर अनादि और अविनाशी है, उसी प्रकार हम भी हैं | हमारा अस्तित्व ईश्वर के साथ हमेशा से है और आगे भी निरंतर रहेगा |

प्रश्न: यदि ईश्वर ने हमें नहीं बनाया तो वह करता क्या है?

उत्तर: ईश्वर वही करता है जो वह अब कर रहा है | वह हमारा व्यवस्थापन (पालन, कर्म-फल प्रबंधन आदि) करता है |

प्रश्न: तब उसने यह विश्व और ब्रह्माण्ड क्यों बनाया ?

उत्तर: ईश्वर ने इस जगत और ब्रह्माण्ड के हेतु (मूल कारण) का निर्माण नहीं किया | इस जगत का मूल कारण ‘प्रकृति’ हमेशा से ही थी और आगे भी हमेशा रहेगी |

प्रश्न: जब ईश्वर ने इस विश्व को और हमें नहीं बनाया, तो वह करता क्या है – यह एक दुविधा है ?

उत्तर: जैसा पहले बताया जा चुका है, वह हमारा प्रबंधन करता है | विस्तृत रूप में देखा जाए तो – जिस तरह कुम्हार मिटटी और पानी से बर्तन बनता है, उसी तरह ईश्वर इस निर्जीव प्रकृति का रूपांतरण कर यह विश्व / ब्रह्माण्ड बनाता है | फिर वह इस इस ब्रह्माण्ड में जीवात्माओं का संयोजन करता है|

प्रश्न: यह सब वह क्यों करता है ?

उत्तर: यह सब वह करता है ताकि जीवात्मा कर्म करके आनंद प्राप्त कर सके | इसलिए वह जीवात्मा को ब्रह्माण्ड के साथ इस प्रकार संयुक्त करता है जिससे कर्म के सिद्धांत हर समय पूर्णतया बने रहें | इस प्रकार, जीवात्मा अपने कर्मों द्वारा आनंद को बढ़ा या घटा सकता है |

प्रश्न: हमें ख़ुशी देने के लिए उसे इतना प्रपंच करने कि क्या आवश्यकता है ? क्या वो सीधे तौर पर हमें ख़ुशी नहीं दे सकता ?

उत्तर: ईश्वर अपने गुणधर्म के विपरीत कुछ नहीं करता | जैसे, वह स्वयं को न तो कभी नष्ट कर सकता है और न ही नया ईश्वर बना सकता है | जीवात्मा के भी कुछ लक्षण हैं – वह चेतन है, सत् है परन्तु आनंद से रहित है | वह स्वयं कुछ नहीं कर सकता | ये उस मायक्रोप्रोसेसर की तरह है जो सिर्फ मदर बोर्ड और पॉवर सप्लाय से जुड़ने पर ही कार्य कर पाता है |अतः ईश्वर ने कंप्यूटर सिस्टम नुमा ब्रह्माण्ड को बनाया जिससे कि मायक्रोप्रोसेसर नुमा जीवात्मा कार्य कर पाए और अपने सामर्थ्य का उपयोग कर आनंद को प्राप्त करे |

प्रश्न: कर्म का सिद्धांत कैसे काम करता है ?
उत्तर: कृपया ‘FAQ on Theory of Karma’ का भी अवलोकन  करें  | मूलतः जीवात्मा के ६ गुण हैं : इच्छा, द्वेष, प्रयत्न, सुख, दुःख,और ज्ञान | इन सब के मूल में जीव की इच्छा शक्ति और परम आनंद ( मोक्ष ) प्राप्त करने का उद्देश्य है | जब भी जीवात्मा अपने स्वाभाविक गुणों के अनुरूप कार्य करेगा उसके गुण अधिक मुखरित होंगे और वह अपने लक्ष्य के अधिक निकट पहुंचता जाएगा | किन्तु, यदि वह अस्वाभाविक व्यवहार करेगा तो उसके गुणों की अभिव्यक्ति कम होती जाएगी साथ ही वह लक्ष्य से भटक जाएगा | अतः अपने कार्यों के अनुसार जीवात्मा चित्त (जीवात्मा का एक लक्षण ) की विभिन्न अवस्थाओं को प्राप्त करता है |
ईश्वर जीवात्मा के इस लक्षण के अनुसार, उसे ऐसा वातावरण प्रदान करता है | जिससे उसकी इच्छापूर्ति एवं लक्ष्य प्राप्ति में सहायता हो | अतः परमानन्द कार्यों का परिणाम है, कार्य विचारों का, विचार ज्ञान का एवं ज्ञान इच्छा शक्ति का परिणाम है | इससे विपरीत भी सही है – यदि कार्य गलत होंगे तो ज्ञान कम होता जाएगा – परिणामस्वरूप इच्छाशक्ति घट जाएगी | और जब कोई अत्यधिक बुरे कर्म करे तो ईश्वर ऐसे जीवात्माओं को अ-मानव ( अन्य विविध प्राणी ) प्रजाति में भेजता है, जहाँ वे अपनी इच्छा शक्ति का प्रभावी उपयोग न कर पाएँ | यह जीवात्मा के चित्त में जमे मैल की शुद्धि के लिए है | यह प्रक्रिया मृत्यु से बाधित नहीं होती | मृत्यु इस यात्रा में मात्र एक छोटा विराम या पड़ाव है, जहाँ आप अपने वाहन से उतरकर भोजन पानी से सज्ज हो कर नयी शुरुआत करते हैं |

प्रश्न: इसे एक ही बार में समझना काफ़ी कठिन है , कृपया संक्षेप में समझाइये –
उत्तर:

a) ईश्वर, जीव और प्रकृति तीनों शाश्वत सत्ताएं हैं जो हमेशा से थी और हमेशा ही रहेंगी | यह त्रैतवाद का सिद्धांत है |

b) ईश्वर कभी जीव या प्रकृति का सृजन अथवा नाश नहीं करता | वह तो सिर्फ एक उत्कृष्ट प्रबंधक की तरह आत्मा और प्रकृति का संयोजन इस तरह करता है ताकि जीव अपने प्रयत्न से कर्म – फ़ल के अनुसार मोक्ष प्राप्त कर सके |

c) हमारे साथ घटित होने वाली सारी घटनाएं दरअसल हमारे प्रयत्न के फ़लस्वरूप हैं जो हम अंतिम क्षण तक करते हैं | और हम अपने प्रारब्ध को हमारे वर्तमान और भविष्य के कर्मों द्वारा बदल सकते हैं |

d) मृत्यु कभी अंतिम विराम नहीं होती | वह तो हमारी अबाध यात्रा में एक अल्प-विराम (विश्रांति) है |

e) जब हम ईश्वर को निर्माता कहते हैं तो उसका अर्थ है कि वह जीव और प्रकृति को साथ लाकर संयोजित एवं व्यवस्थित आकार प्रदान करता है |  वह जीवों की मदद की लिए ही ब्रह्माण्ड की व्यवस्था करता है | अंततः विनष्ट कर के पुनः निर्माण  की नयी प्रक्रिया शुरू करता है | यह सम्पूर्ण निर्माण- पालन- विनाश की प्रक्रिया उसी तरह है जैसे रात के बाद दिन और दिन के बाद रात आती है | ऐसा कोई समय नहीं था  जब  यह प्रक्रिया नहीं थी या ऐसा कोई समय होगा भी नहीं जब यह प्रक्रिया न हो या बंद  हो जाय |  इसलिए, यही कारण है कि वह ब्रह्मा (निर्माता), विष्णु (पालनहार) और  शिव (प्रलयकर्ता) कहलाता है |

f) ईश्वर का कोई गुण नहीं बदलता, अतः वह हमेशा जीव के कल्याण के लिए ही कार्य करता है |

g) जीवात्मा के पास स्वतंत्र इच्छा है, पर वह उसके ज्ञान के अनुसार है जो उसके कर्मों पर आश्रित है | यही कर्म सिद्धांत का मूलाधार है|

h) ईश्वर सदैव हमारे साथ है तथा हमेशा हमारी मदद करता है | हमें अपनी अंतरात्मा की आवाज सुननी चाहिए और हर क्षण सत्य का स्वीकार तथा असत्य का परित्याग करना चाहिए | सत्य की चाह ही जीवात्मा का गुण तथा इस जगत का प्रयोजन है | जब हम सत्य का स्वीकार करने लगते हैं तो हम तेजी से हमारे अंतिम लक्ष्य – मोक्ष की तरफ़ बढ़ते हैं |
सारांश में, ईश्वर ने हमें अभाव से कभी नहीं बनाया – उसने इस अद्भुत संसार की रचना हमारे लिए की, हमारी सहायता करने के लिए की | और हम इस प्रयोजन की पूर्ति – सत्य की खोज करके पूरी कर सकते हैं | यही वेदों का मुख्य सन्देश और यही जीवन का सार तत्व  है |

प्रश्न: एक अंतिम सवाल – इस बात पर कैसे यकीन करें कि यह सत्य है और कोई नव निर्मित सिद्धांत नहीं ?
उत्तर: इस पर यकीन करने के अनेक कारण हैं, जैसे –
यहां कही गई प्रत्येक बात वेदानुकूल है | जो कि संसार की प्राचीनतम और अपरिवर्तनीय पुस्तक है | नीचे दिए गये पाठ का अवलोकन करने से आप अनेक संदर्भ विस्तार से देख सकते हैं |

यह सिद्धांत सहज बोध और जीवन के नित्य प्रति के अवलोकन के अनुसार है |
यह आखें मूंदकर किसी सिद्धांत को मानने की बात नहीं है | कर्म के सिद्धांत तो सर्वत्र क्रियान्वित होते हुए दिखायी देते हैं | दूर क्यों जाएं? आप मात्र ३० दिनों तक सकारात्मक, प्रसन्न एवं उत्साही बनकर देखिये | नकारात्मक एवं बुरे कर्मों को अपने से दूर रखिये -और फिर देखिये आप क्या अनुभव करते हैं | इस छोटे से प्रयोग से ही देखिये आप के जीवन में आनंद का स्तर कहां तक पहुँचता है | जिन्हें किसी ने नहीं देखा ऐसे चमत्कार की कहानियों या विकासवाद के सिद्धांत से तो यह अधिक विश्वसनीय है |

वेद उसका अन्धानुकरण करने के लिए कभी नहीं कहते | इस सिद्धांत के इस क्रियात्मक पक्ष को हर विवेकशील व्यक्ति स्वीकार करेगा  – कि ज्ञानपूर्वक सत्य का ग्रहण करें और असत्य को त्यागें | Religion of Vedas में वर्णित अच्छे कार्यों को करें | स्मरण रखें कि वेदों का मार्ग अत्यधिक  संगठित और प्रेरणादायी है | जिसमें विश्वास करने की कोई अनिवार्यता नहीं है |  वेदों का अभिप्राय यह है – जैसे ही आप स्वतः सत्य को स्वीकार और असत्य को छोड़ना शुरू करते हैं चीजें स्वतः आप के सामने स्पष्ट हो जाती हैं | यदि आप इस से आश्वस्त नहीं हैं तो चाहे इसे कुछ भी कहें, पर इससे अधिक तार्किक, सहज- स्वाभाविक और प्रेरणात्मक सिद्धांत और कोई नहीं है – ” ईश्वर हमेशा से है तथा हरदम हमारी रक्षा और पालन करता है और हमारे कर्म स्वातंत्र्य का सम्मान करते हुए अपने स्वाभाव से हटे बिना, हमारे कल्याण के लिए ही कार्य करता है और हमें अवसर भी प्रदान करता है | ”

विश्वस्तरीय सर्वाधिक बिकने वाली ” The Secret ” में इस सिद्धांत का जरा सा पुट लेते हुए अनेकों की जिंदगी को बदल दिया है |  इससे सम्पूर्ण सिद्धांत के सामर्थ्य और प्रभाव का अंदाजा लग जाता है | इसे हम अग्निवीर में अपनी समझ से सर्वाधिक अच्छे रूप में प्रस्तुत करने का प्रयास करते हैं |
नोट: इस विषय पर अधिक जानकारी के लिए सत्यार्थ प्रकाश के ७,८ और ९ वें अध्याय का स्वाध्याय अवश्य करें | १२५ वर्ष पुरानी भाषा होते हुए भी इस पुस्तक में अमूल्य एवं अलभ्य सिद्धांत वर्णित हैं |

हिंदी आवृत्ति: http://agniveer.com/wp-content/uploads/2010/09/satyarth_prakash_opt4.pdf

जो व्यक्ति ध्यान पूर्वक इन तत्वों को समझ सके और आत्मसात करे उसे स्वयं के उद्धार के लिए अन्य किसी की आवश्यकता नहीं है | अग्निवीर के आन्दोलन का आधार यही वे अध्याय हैं जो जीवन को बदलने वाले साबित हुए हैं | आगे बढ़ें, और स्वयं अपने आप में एक नया रूपांतरण अनुभव करें |
सत्यमेव जयते!

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Disclaimer: By Quran and Hadiths, we do not refer to their original meanings. We only refer to interpretations made by fanatics and terrorists to justify their kill and rape. We highly respect the original Quran, Hadiths and their creators. We also respect Muslim heroes like APJ Abdul Kalam who are our role models. Our fight is against those who misinterpret them and malign Islam by associating it with terrorism. For example, Mughals, ISIS, Al Qaeda, and every other person who justifies sex-slavery, rape of daughter-in-law and other heinous acts. For full disclaimer, visit "Please read this" in Top and Footer Menu.

139 COMMENTS

  1. Comment: lgta h yha sbko bohot jigyasa h janne ki.. PR koi samjh nhi pa rha apni okat ..ki Abe chutiyo tum sb insane ho ghatiya type k.. or itni hi gigyasa h to tumko tumahri ma ki kasam mar k dekh lo ki humare mahadev hai .. bhagwan n ye dusri prithvi ka nirman unki khud ki duniya ko dekh kr kiya tha..kyuki vha k Dev or danav nayya or annyay ko sahi s no jante the..sbse bde humare mahadev h.. fir Vishnu bhagwan, bhrama bhagwan- jinko tum prmeshwar , kehte ho.. gawaro… wese tum logo ki b kya glti h ..jesa tumahre bhagwan apni galtiya chupyege or bde bnne k liy apni kitabo m .. jhuti tarife likhe g to tum b to bhi pdh k chutiy bnoge.. koi dhanke kam to hote ki h .. sb ko pakd k Christian or muslaman bnaya jata h … tum logo ki itni buddhi ni h ki y sb smjh sako.. to ladte raho lgate rho chutiy pane.. bharege pap k ghade… AGR humare bhagwan k bare m kuch bola to.. tum to dharti p hi bhugat rhe ho, be khaya piya mang kr.. or bewakuf pane m jindgi gujar di papi yo n .. marte dum tk akkal ni ati ,,bs bolne ko de do.. chahe apni ma k bare m ho ya behn ,k bare m kyu na ho.. tum to unko b ni chordte ho.. itne papi dimag h gobar jese, to kese samjh jaoge bhagwan ko btao,. ? or humari maha kalika ma k bare m jisne b kha tha, .. vo road p kutte ki trah mar khayega y hum bol rhe h.. unke bhakt.. humari mahakali ma ki wjh se hi ..y tumahre chote mote.. log dharti p aye the jinki tum puja karte ho.. humara kisi dharm s koi dushmani nhi thi. .. jb tum jese gelchode, chutiy .. ghatiya gire hue insan .. humare bhagwan k samne hath jodke kuch mangne k layk b ni ..vo agr apni okat k bahr aye to .. tumko mRNA to padhega.. jai ma bhadra Kali.. jai mahakaal.

  2. Part saran dharam nahi bhai.per piranhas sum nahi aghmai. Paropkar se bada koi dharm nahi hai.doosaro ko pida pahchane se bada pap nahi hai.

  3. Mujhe to sirf itana pata hai sabse bada dharm prani dharm ya fir aap ise man lijiye acche bure ka dharm ..

    Yadi aap mai Achhai hai, kisi ka bura nahi karte, kisi jaruratmand ki madad karte hai, samast sansar ko niswarth aur karunamay aur udar prem se dekhte hai to aapkoaapko Keene ka haq hai

  4. Bahut hi sundar jankariya mili he.. Aap bhai logo ka koi watsaop group ho. .in jankarito k vishay m to pls. Add kare98939-10403

  5. गरीबों दलितों पिछङो को बेवकूफ़ बनाया जा रहा है

  6. We are all human being. We are here on this wonderful earth for short time. Therefore, I request all to give best performance for the role each one performing here on this destiny stage.

  7. mujhe lagta hai ki saare log is dharti par rahkar yaha ke hisab se hi bol rahe hai , jitna wo jante hai ya fir jitna wo samajhte hai , mai unse puchna chahta hu ki kya wo sabhi pura jaante hai.nahi jaante to tark kyu dete hai,mai aapko sirf apna hi feedback dunga jo maine mahsoos kiya aur jiske hone ke chances jyada hai, mere hisab se koi dharam nahi hai , na to bhagwan hai aur na allah, ya fir alag alag devi devta , na to jesus hai aur na hi koi supernatural sakti…kya hai yahi mai aapko batane ka prayash kar raha hu……………….my dear all ……..
    har chiz , har vastu, har sthiti , awm har avastha ki ek prakriti hai…yani ki swabhav…jaise barf thanda hota hai. pani ka koi swad nahi hota. aag lagne se jalan hoti hai, pani girne se aap bhig jaate hai,…etc…..matlab ki ha vastu,isthan ya kuch bhi ho sabka ek swabhav hai…aap is dharti me wo hi jaante hai jo ki dekha , suna ya fir mahsoos kiya hai jo nahi jaante uske baare me aap kaise batayenge…..inhi sab ke aadhar par mai yah tark de raha hu ki hum jaisa karte hai vaisa hi result paate hai,,,,har chiz ka apna alag swabhav hai.ye dharti kyu ghum rahi hai…ho sakta hai ki koi dhakka bahut pahle ka laga hai jiski vajah se yah ghum rahi hai, aur jise aapne kabhi nahi dekha…..to aap kaise kah sakte hai ki ye sab god kar raha hai , ho sakta hai ki kisi badi si chiz ne itni takat se ise ghumaya ho ki wo lakho , arbo round le le.aur us takat ke samne hum itne chote hai ki hum us dharti ke ek round ko ek din mante hai.kyunki hum bahut chote hai..ye duniya , ye universe ya bole to har chiz ka swabhav hai. magar hum bahut chote hai isi vajah se nahi jante . aur jo nahi jaante use god ke naam par dalkar free ho jaate hai. insaan ka swabhav use uske hisab se karne me majboor karta hai.thik usi prakar har chiz ka swabhav bhi use usi ke hisab se karne ko najboor karta hai…..to ye sab alag alag dharam kyu….ise insaan ne banaya hai. kisi god ne nahi , god to kalpnik hai…

  8. भाई लोगों मैं हिन्दू हूँ। लेकिन सभी धर्मों का सम्मान करता हूँ। किसने किसको बनाया मैं ये नहीं जानता लेकिन अगर हमने इस धरती पर जन्म लिया है तो हमें मानवता के प्रति जो अच्छे कर्म हैं वो तो ज़रूर करने चाहिए। और कोई रिश्ता न सही मगर मानवता का रिश्ता तो निभा ही सकते हैं। गीता हो, वेद् पुराण हो, बाइबिल हो याँ कुरान। ये सभी हमें मानवता के पथ पर चलने को अग्रसर करते हैं। हर ज़रूरतमंद की मदद, भूखे को रोटी और किसी का दिल ना दुखाना ही सच्ची मानवता हैं। इस लिए दोस्तों हमलोग आपस में बहंस न करके मानवता के पद पर अग्रसर हों। ज़रूरतमंद की मदद, किसी को धोखा न देना एवं किसी का दिल ना दुखाना। इन् सब चीज़ों से हमें मैं की शान्ति तो अवश्य मिलेगी। और हम अपने पुराण एवं अपने माता पिता के कर्त्तव्य पथ पर चलने का अनुसरण कर सकेंगे।

    धन्यवाद।

    • shri vjay jo aapki baat kuch thik hai ! sabse badi baat manvata hai ” dusre ke saath vahi vyvhaar karo jo apne liye bhi pasand aye !
      lekin kuran manavta nahi sikhlati hai jaise 2/54 kuran ki ayat dekhiye jisme sirf bachade ki puja karne valo ko apas me hatya karne ki baat kahi gayi hai 1 AISE HI DHARM KE NAM PAR KUCH KITABE ANDH VISHVAS AUR PAAKHAND BHI SIKHLATI HAI !

  9. mr kuldeep apne dharam ko dekh ,kaise shaitan aur chudail ki shakal wale bhagwan ki puja karte ho tum log ,tumhare bhagwan to dusro ki biwi ka rape karte they wo nhi dikhai deta ,aur tumhare bhagwan apne aap ko khush krne ke liye janwaro ki bali mangte hai , hahaha ,very funny u and ur bahgwan

  10. too good dosto ek hi jagah sab mil gaya sanatan dharm or islaam sare comments ne bahot sare questions ke answer de diye or kuch logo ki sacchai bhi samne aayi…Thank you all of you And pure to naahi but jitne post read kiye sare bahot ache lage….
    agar whatsapp par koi group ho to add kare 7828780687
    धन्यवाद

  11. AGNIVEER JI APNE JO BHI LIKHA USKO MAINE BADE DHYAN SE PARHA AUR SAMAJHNE KI KOSHISH KI. . . . . . . . . . . . . . AUR IS NATEEJE PAR PAHOONCHA KI . . . . . . . . . APKO ISLAM KE BARE MAIN KUCHH BHI JANKARI NAHI HAI . . . . . . . . . APNI MARJI SE KISI BHI AAYAT KA HAWALA DA DIYA APNI MARJI SE US AAYAT KA KUCHH BHI ANUWAD KAR LIYA . . . . . . . . . . . ISSE ZYADA AUR KYA KAHOO AAP PEHLE ISLAM KE BARE MAI SAHI JANKARI HASIL KARE. . . . . . . . . . . . AUR WO JANKARI INTERNET PAR NAHI MILEGI AUR AGAR AAP INTERNET PAR JANKARI DHOONDNA CHAHONGE TO KHUD HI RASTE SE BHTAK JAONGE . . . . . . . . . . . . . . . . . .{JO BHI JANKARI AAJ INTERNET PAR HAI WO ZYADATAR YAHOODI AUR ISAIYO (ISLAM KE DUSHMANO) NE INTERNET PAR DALI HAI JISSE KI AAP JAISE LOG SAHI RASTA NA PA SAKE}

    • shamshad ji yah kaise maloom hoga intarnet me jo jankari hai muslim ki hai ya yahudi ki hai ! kya islami vidvan intarnet se dur rahate hai ?bahut sa islami sahity islami blog valo ka bhi hai !
      APNI KAMIYO KO DUSARO PAR THONA EK FAISHAN HO GAYA HAI !
      KUCH MUSLIM TO YAH BHI KAHANE LAGE HA I KI SABHI ISLAMI ATANKVADI SIRF YAHUDI HAI ! VAH NAKLI MUSLIM NAAM RAHE HUYE HAI

  12. Hello all user.

    Mene saab logo ke view pade . sab ne acha likha hai. yaha par koi hindu. koi muslim koi kisi dharm se hai. sub logo ne bahi likha hai jo jo un ke dharm me or us dharm ki books me likha hai. par ? sach kya hai koi bhi nahi janta hai. insaan hame yeh nahi malum ki dharm koon sa hai . jo jaha janma bus bo us dharm ka ho gya . yah sab kuch hum logo ne hi bnaya ha. hmare dimak ki upaj hai. or kuch nahi . koon bagbaan koon muslman koon hindu. koon sikh.koon etc. dharm . sab ke sab fack hai . har dharm apni baat ki sabit karne ke liye koi na koi example jarur de dega. par kisi se pucho ki us ne use dekha hai jis ne hame bnaya hai to juti story suna dege . hum insaan jo hai hum me khass baat hai ki hum se koi behas nahi sakta. kio? kio ki hum logo ke pass bolne ke liye shabd kafi hai.par sach nahi. hum bina kuch bhi jane bina kuch samje kisi bhi baat par behas kar sakte hai. baat yaha par hai hame kis ne bnaya to logo ne kaha par itne bhari bhari shabdo me ki upar se nikal gya . mulaan abmulan. kya ha yah sab kuch. ek simpal se shabdo me bhi bta sakte the par nahi sab ne apne baat ko bdaba dene ke liye likha par us ka koi arth nahi . ab yah artical bhi jis ne likha hai us ne hindu dhram ko bdaya hai . fir bich me kisi ne muslim dharm ko. yaar tum log sirf bolte ho or kuch nahi.me nastik hu or koi dhrm nahi hai bus

    • Sumer ji mai bhi aapse sahmat hu.mera bhi yahi maanna hai ki insaan ne jo kuchh bhi banaya hai apne swarth ke liye banaya hai.apne aapko achha saabit karne ke liye aur buissnes karne ke liye banaya hai.fir chaahe wo dharam hi kyo na ho.mai bhi naastik hu in sab dharmo ya majhabo ko nahi manta…mera manna ye hai ki insaan ka sabse bada dharam uska karam hota hai karam sabko karna padta hai .chahe wo hindu ho ya muslim is duniya me jeene ke liye sabko karm karna hi padega .

  13. me ye nahi manta ke iswar ne hame nani banaya…. mera manna hai ke hame iswar ne hi banya hai..
    ye ho sakata hai ke ye dharm ke wo iswar hai wo dharm ke ye iswar hai ye hum ne banaya hai…
    iswar ne ye sansar anand ke liye banaya hai pratyek jiv khush rahe aisa iswar chahte hai…
    par sab karm ke sidhant se bandhe hai jo jesa karega vo vesa payega….. ishwar kisi ko ankush me nahi rakhana chahta aur galat nahi karne dena is liye karm ka sidhant hai…. pratmatma ke gun hai satya prem karuna kartvya

  14. अपने पूना प्रवर्चन ( उपदेश मंजरी ) में महऋषि दयानंद जी कहते हैं कि ईश्वर ने इस सृष्टि का सृजन अपना शक्ति सामर्थ्य दिखाने के लिए किया है । अगर वो सृष्टि न बनाता तो उसका यह सामर्थ्य निष्फल हो जाता ।

  15. नमस्ते अग्निवीर जी

    // ईश्वर ने हमें नहीं बनाया | और क्योंकि ईश्वर ने हमें कभी बनाया ही नहीं, वह हमें नष्ट भी नहीं करता | जीवात्मा का सृजन और नाश ईश्वर के कार्यक्षेत्र में नहीं आता | अतः जिस प्रकार ईश्वर अनादि और अविनाशी है, उसी प्रकार हम भी हैं | हमारा अस्तित्व ईश्वर के साथ हमेशा से है और आगे भी निरंतर रहेगा | //

    // उसी तरह ईश्वर इस निर्जीव प्रकृति का रूपांतरण कर यह विश्व / ब्रह्माण्ड बनाता है | फिर वह इस इस ब्रह्माण्ड में जीवात्माओं का संयोजन करता है| //
    इन दोनों बातों में क्या अंतर है । ईश्वर ने हमें जीवात्माओं से जीव बना दिया । किया तो ईश्वर ने ही है ।

    • Sandeep ji, Namaste!

      आत्मा को शरीर देना ही ईश्वर का कर्म-फल सिद्धान्त है थो इसमें आत्मा का सृजन कि बात कहा आयी ?

  16. Agniveer sir aap likhte rahiye ye Chuslim bas Chapti Dharti, Suaraj ka Daldal me doob jana “Sachhe Khajoor” Chuhhmad or Pille-Ilaahi hi smjhte h. aap likhte rhiyega. Chuslim bhut bade Jhoote or Dogle hote h. inki Baato pr dhyan mat dijiye.

  17. Dear Harish,Raj aur Ankur
    Ye to main janta hun ki aap log , apne galati chhupane ke liye kitane saare jhuth bole,maine bahut adhayan kiya aur aapke sabhi galat fahmiyon ka samadhan dhundh nikala. Ise dyan se padhiye aur apni soch badal dalo aur maan lo ki Ishawar/Allah/God ne hi humen banaya aur woh ek hai, nirakar hai.—-

    —–http://www.islamhinduism.com/responses/arya-samaj/297-allah-arsh-arya-jawab-sky——

    Aur apna trivaad wala sidhant galat maan lo jo apne Ved me bhi nahi hai ye to apke guru ji ki soch hai.

    • @Maansingh
      Quran 26/198-199 ke anusar Islam / Quran kewal Arab me rahne walo ke liye hi hai. Allah ne swaym iski pusti ki hai ki agar ham gair-Arabi bhasha me Quran dete to Arab log us par viswas nahi karte. Arab vasiyo ko dhyam ke rakhakr hi Quran arbi me Allah dwara bheji gai hai. Isliye Arab se bahar rahne wale aap logo ko Islam follow nahi karna chahiye. Qyo aap Islam follow karte hai.

      • @Sanatan
        Pehale aap padho aur samjho phir puchho.Aap Satyarth Prakash padhkar aisi baat likhte ho, jismae kitne sare jhuth hain. Islam is all for humanity.

      • shri maan ji agar islam manvata vadi hota to munafik kafir momin me anek hisse nahi hote ! muslim 73 se jyada firkon ke na bante hote ! hamare pas to 315 firko me muslimo ko bante hone ki lisht bahut saal purabni ek kitab me hai ! agar apko satyarth prkash me jhuthi bate milti hai usko iisi manch me pesh kijiye ham uska samadhan karne ki cheshta karenge 1 kuran to mul ki bhuk]l hai kalpit allah kalpit farishte kalpit jjann at kalpit jahannum kalpit jin n kalpit hure gilme,,kalpit1 24000 nabi rasy=ul homne ki bate in sabka koi adhar hi nahi hai 1

      • @Maansigh
        Pahle aap Quran 26/198-199 ki aayat ke bare me uttar denge to mai aage kuchh kahunga. Aayat me Allah ne swayam kahaa hai ki agar ham gair-Arbi bhasha me Quran dete to Arab wasi us quran viswas nahi karte. Iska spast arth hai Quran kewal Saudi Arab me rahne walo ke liye hai aapke liye nahi.

      • dear sakar nirakar ka sawal he galat hain. Jo omni potent hain vah sakar bhi hoga nirakar bhi hoga. dono ek hi satya ke do virodhi bindu hain. iswar agar kewal nirakar hain to voh omni potent nahi ho sakta, kyoki uske sakar hone per rok lag gahi? yadi vah kewal sakar hain to bhi vah omnipotent nahi ho sakta. isliye iswar ke bare mein nirakar sakar ki bahs hi galat hain. God is uniterpretable hain Avyakhakit hain. sare interpretation hamari indrio se jude hain jo ki es three dimentional phisical word se alag anubhav ko samaj nahi sakta. Iswar prapti or atmasaksatkar ek esi awastha hain jab sab senses/ indria ka sense vaha per samapt ho jate hain. us awastha me iswer hi iswer ko jan sakta hain. esi awasta ka unubhav hote hi vah kahta hain ‘ ki Aham brahmaasmi.” me hi brahm hu. esliye eswar ke Quranic or vedik form jagada senses se juda hain. yeh jagda hamare biased hone se hain. yah contradiction/conflict sab hamare hi banaye hue hain. Stya kya hain, yah to budhpurush hi jante hain, jinone us iswer tatv ka anubhav kiya hain.

      • maan singh aap se sawal aap ki bat to satay karte hain chaliye ..quran k 33:37 aayat ko aap padh kar bataye ge kya matlab hain ..aap bataiye ..hun jhuth bolte hain aap sach bataiye ..chaliye

    • yaar kitni baar me is kamiri muslim ko javab de chuka hun ..jo islam hindusam ki site chalata hain …maan singh ek bat ko bar bar copy paste mat karo bhai ..apne view rakho kya puchna chahte ho

  18. [email protected] yahan phir aap quran ko hatith se mila rahe hain aur Ved ko Upnishad,puran, Ramayan aur mahabharat se nahi mila rahe hain. Jab nahi jante to jawab dena zaroori nahi.Lagta hai aap Allah ki lambai naap chuke ho? quran me kahaan likh hai ki Allah omnipresent nahi hai? Lagta hai aap kewal suni baat kar rahe ho,warna aisi baat nahi likhte bina sura aur aayat no ke. Ye aap apni soch bata rahe ho, jo kabhi badalne wali nahi hai. Kya aap murti puja karte ho?

    • quran mai kaha likha hai ki allah omnipresent hai ? agar allah omnipresent hota to wo arsh par ya 7th sky par nahi hota….Aur dusri baat ye hai ki mai traivaad ko sabit kar sakta hoo cause and effect ke logic se jo scientific hai….

    • @Ankur–Ye kahawat to aap pe bhi phit baithta hai, is mantra me ye bhi to nahi kaha gaya hai ki ishwar ne kewal sharir manaya, jiv/atma nahi…chalo jane do apni-2 samajh hai. ek aur doubt hai pls tippadi kariye–
      Jab ishawar aur insaan ke bich koi abhikarta ya paigamber aisi koi chiz nahi to ved ko ishwar ki vani kaise keh sakte hain? kya ishwar ne khud likh ke insaano ke pass fek diya aur insaan kahi use pada huaa paya? mujhe to ye satya lagta hai ki manusyaon me se hi kisi achche insan ko ishawr chun leta hai aur use hi apne vani sunata hai aur likhata hai, to wahi abhikrta huya.

      • param adarniy shri maan ji, shrishti ke arambh me 4 achhe vyaktiyo ne yog sadhna ke antaragat samadhi avstha tak gaye 1 ussme jo anubhuti huyi kuch gyan ki anubhuti huyi usko ishvariy gyan kaha gaya hai ! ishvar ne kisi ko nahi chuna balki ek badi koshish karne ke baad un maharshiyo ne ishva se gnyan liya hai 1 gyaan hamesha ek khoj ka vishay raha hai 1 jaise aaj ke vaigyanik gyan khojte hai 1agar aapki baat hi man lij jaye bki ishvar ne achhe manushyo ko niyukt kiya to vahniyukti bhi to srishti ke aran]mbh me hi ki jayegi baar niyukt thode hi kiya jayega ? jaisa muahammad ji kahate hai! agar ishvar ka gun niyukti hoga to haesha niyukt karega ya srishti ke arambh me sirf ek baa rsare manushyo ko gyan dene ke liye niyukt karega !

      • aap ki bat man lete hain paigamber wali per 1 lakh 24 hazar paigamber ki awskta kyo padhi allah ko bhejne ki 10 ya 20 se kaam nahi chala …yeh koi traksangat nahi hain …aisa kyo ki mohmmad k bad koi paigamber nahi aaye aaye ga ..allah ne 4 kitab bheji quran ke according torat, jabur,injil ,aur quran mosa dadud isha mohmmad pichli 3 kitabo me parivatan ho gya per quran me koi parivartan nahi hua quran k according ,how is possible allah ko pata nahi tha ki musay uski 3 kitabo

      • manusay samuday parivartan kar dega to allah sab kuch janne wala kaise hua .. aur jab quran ki safety ki responsibility allah ne li to pichli 3 kitabo ki kyo nahi li ..ab quran per phir se qus mark khada ho gya ab allah nayaysangat bhi nahi rha jab ki yeh gun ishwar me nahi ho sakte ..quran keh rahi hain beshak hazarat lut paigambro me se tha yahi injil me lut ne apni beti se sex kiya ..

    • @Raj
      Kya in aayat se nahi malum hota ki God ko kisi ne nahi dekha woh nirakar hai.
      Q6:103 Such is Allah, your Lord. There is no God save Him, the Creator of all things, so worship Him. And He taketh care of all things. (102) Vision comprehendeth Him not, but He comprehendeth (all) vision. He is the Subtile, the Aware.
      Q7:143 And when Moses came to Our appointed tryst and his Lord had spoken unto him, he said: My Lord! Show me (Thy Self), that I may gaze upon Thee. He said: Thou wilt not see Me, but gaze upon the mountain! If it stand still in its place, then thou wilt see Me….
      Do hath ya discussion isliye likha ki insan ko insan jaise samjhane par hi viswas kar sakta hai. Iska matlab ye nahi ki Allah/God ek sharir dharan kiya huaa hai?
      Ved me bhi kai jagah aisa aaya hai, ki Ishawar hame hamare karmo ka phal dega to kya wah ek insan ho gaya jo hame resul dikhayega? etc…

      • @Maan singh : to kya aap mantein hai ki quran mein conflicting description hai allah ka kahan nirakar kahin saakar?

      • @Ankur.Nahi,koi conflict nahi hai, yeh to hamare samjhane aur manne ke upar hai. par ishwar/Allah to nirakar hi hai,ye sabhi kitaben kehti hain. Ise padhiye—-
        1. They call Him Indra, Mitra, Varuna, Agni or the heavenly sunbird Garutmat. The seers call in many ways that which is One; they speak of Agni, Yama, Matarishvan….Rig Veda
        -This verse clearly states God is One though he may have many names, even in the Vedas. All the names Indra, Mitra, Varuna, Agni, Garutmat, Yama, Matarishva are all names God that can be found in the Vedas. In this reference to God, He is assumed to have either a human-like (Indra, Mitra, Yama, Matarishva), animal-like (Garutmat) or even an elemental-like (Varuna, Agni) form.
        To kya ved me contradiction nahi, ki woh nirankar hai ya sakar?. Aur hum ishwar/Allah ko puling mankar koi line likhte ya padhte hain to kya woh Male ho gaya?

      • 2. Bright, existing very close, moving in the heart; great and the support of all; in Him is all the universe centered around. All that moves, breathes and blinks. Know Him who is both with form and without form, the most adorable, the Highest of beings, the One beyond the limits of the finite mind…..Atharva Veda, Mandukya Upanishad
        -This verse captures the entirety of God’s Aspects in beautiful poetry. The first sentence refers to God in the form of Pure Light, Pure Love and the substratum of all existence or Parashakti (The Second Aspect of God). Then he is the Highest of beings, a person, the great Lord, Paramatma (The First Aspect of God). Finally He is the One beyond all limits of the finite mind–Parabrahman (The Third Aspect of God).
        To kya ved me contradiction nahi, ki woh nirankar hai ya sakar?. Aur hum ishwar/Allah ko puling mankar koi line likhte ya padhte hain to kya woh Male ho gaya?

      • 3. This Self is the Lord of all beings, the King of all beings. As the spokes are held together in the hub and in the rim of a wheel, just so all beings, all creatures, all worlds, all lives, are held together in the Self.—Yajur Veda, Brahadaranyaka Upanishad
        -This verse refers to God as the Ruler and orchestrator of the Universe, where He is the one being who is the Creator, Preserver and Dissoluter of the Universe. His actions within the forces of nature keep the worlds in animation. This is God as Lord of the Universe–Paramatma (The First Aspect of God).
        To kya ved ko bhi contradictry maane?

      • @Maan Singh :सर्व प्रथम ब्रिहदार्यनक यजुर वेद का अङ्ग नहीं है । अब आगे चलते हुए आपकी टिप्पणियों का विश्लेषण कुछ इस प्रकार है
        १ . He is assumed to have either a human-like (Indra, Mitra, Yama, Matarishva), animal-like (Garutmat) or even an elemental-like (Varuna, Agni) form.
        यह बिलकुल ही बेवकूफी की बात है. आप मुझे मंत्र संख्या बताएं में आपको मंत्रथ बताता हू . इस्लिएय द्वंध का तो प्रशन ही नहीं है वेदों में .
        २ .मांडूक्य यजुर वेद का अङ्ग नहीं है ।

        ३ I fail to understand, all that you have quoted to prove that there are contradictions, has no bearing on any thing.

        Besides can you tell me what is the significance of sura Al bakr 2:66 onwards where a murderer will be pointed at by the dead person on being hit by meat? do you stand by this great way of investigation provided by the Quranic Allah?

      • 1.Read Rigveda 1.64.46 and 1.63.9
        Rigveda 10.82.3-says –arousing Lord who is our father……
        Rigved 10/31/5 as ” he whose eyes go everywhere, who faces all sides, whose
        arms are here, there all around and whose feet in all directions…
        3. Yajur Ved 32/3 as ruler…
        Lagta hai aapne Ved padh hi nahi…..
        Parantu iska matlab ye nahi ki Ishwar ek Raja, Indra etc jaisa hone se wah sharir dharan karta hai,balki ye uski khubi bayan karti hain.Thik isi tarah quran me bhi Allah ki khubi bayan karne ki gayi hai,iska matlab ye nahi ki usame contradiction hai aur nahi ved me contradiction hai.
        Par aap jaise log alag-2 matlab nikal kar Ishwar ko nirakar aur Allah ko shakar etc batane me lage huye hai,Jab ki Allah/Ishwar/ God sab ek hai. Is satya ko mano.

      • Allah nirakar nahi hai..Ye pakki baat hai..Aur uska image 60 cubits hai . Allah ke image main hi Adam ko banaya gaya aur isliye Adam ki height bhi hadith mai 60 cubits batayi gayi.. Nirakar wohi ho sakta hai jo omnipresent ho. Jo koi ek jagah par baitha ho ,wo ek limited nature wala ho gaya aur limited nature wala nirakar/shapeless nahi ho sakta !..Ved mai God ko omnipresent bataya hai aur isliye ”face on all sides” ye sab figure of speech hai ..Islam ke mamle me aisa nahi kaha jaaa sakta kyuki uski liye pehle omnipresent wala gun hona jaruri hai.

      • mahamahim shri maan ji ! jo farishte kurni allah ka singhasan uthaye huye hai ,kya vah allah ko nahi dekhte hai? 7/143 me bhi allahkaha rahe hai ki agarpahad sthir raha to tum hamko dekh log rahe hai e/ yani dekhne ki ek sambhavna puri thi ? isi ayat me yahbhui kahgaya hai musa sabse paahle muslim thi kahi adam ko pahala rasul banaya jata hai kahin ibrahim pahale muslim hai aur yahaan mud apmne ko pahala muslim ghoshit kar rahe hai ! muaham d ji meraz karne kyo gaye the? kya ishvar se sampark is dharti me nahi ho sakta tha ? kuran ki 2 ayte muaham d ji svayamallah se laye the ! isse siddh hota hai kuran me anek bharam hai !

      • mahamahim shri maan ji ! jo farishte kurni allah ka singhasan uthaye huye hai ,kya vah allah ko nahi dekhte hai? 7/143 me bhi allahkaha rahe hai ki agarpahad sthir raha to tum hamko dekh log rahe hai e/ yani dekhne ki ek sambhavna puri thi ? isi ayat me yahbhui kahgaya hai musa sabse paahle muslim thi kahi adam ko pahala rasul banaya jata hai kahin ibrahim pahale muslim hai aur yahaan mud apmne ko pahala muslim ghoshit kar rahe hai ! muaham d ji meraz karne kyo gaye the? kya ishvar se sampark is dharti me nahi ho sakta tha ? kuran ki 2 ayte muaham d ji svayamallah se laye the ! isse siddh hota hai kuran me anek bharam hai !

  19. manniy sri javed ji , ap kahate hai ki allah ne apko banaya hai , to jara batlaiye ki allah ki taseer[gun ] apke andar kyo nahi hai ? kuran ke anusar to allah ne sare jivo ko banaya to kya apkoi chnti ke pair bhi bana sakte hai ! ya manushy jhuth nahi bolte hai vah to gyani kahalata hai kya manushy bhi gyani hai ? fir kyo kahate hai ki allah ne apko banaya hai ?

    • @Raj bhai
      Kya uljullol bate likhte hain, Ishawar/Allah ne hame banaya/paida kiya to koi zaroori nahi ki usake gud hamare ander ho.Woh jitne gud/dimag dalta hai waisa aadmi hota hai, jaise koi computer utna hi kaam karta hai jitna uske dimaag me(software) dala jata hai. Yeh nahi ki insan ne computer banaya to woh insaan jaisa hi ho? Kya hamare ander hamare maa-baap ke saare gud hote hain, agar woh hame janm dete hain to? Aaplogon ki vidambana yah hai ki aaplog Ishawar ko insano/ya insani niyam kanoon, se tulna karne lagte hai. Agar Sun aur Earth ya bramhand Ishawar ne banaya to kya iname ishwar ke sabhi gud hain?Agniveer ji ke anusar agar Ishwar ne hame banaya hi nahi to woh hamara prabandhan hi kyon karta hai? Kya aapke maa-baap kisi aur ki santan ka prabandhan karte hain? Aaplog to ishwar ko maan kar bhi nahi maante balki use hi jhutha saabit karne me lage hain ki woh insan banane ki takat nahi rakhta,bhale bramhand banane ki rakhta ho.Woh koi chamtkar nahi kar sakta etc, kyon ki aaplogo ki soch hi chhoti hai.

      • param adarniy shri maan ji hmne to is blag me apse koi batchit hi nahi ki apse to dsre blag me batchit ki thi! ishvar ne jiv ko namhi banaya yah saty hai lekin hamare v sabke sharir ka to nirmata hai ! kya apne kisi ki ankho ko pair ke paas dekha hai? yahi uski adbhud rachnahai ki yah ankhe bhi chehare par hai !jaise koi grahani halua banati hai jo usme santulit pani chini v ata athva rava ko senkti hai vah kushlata grahani ki kahalayi jati hai agar haluve me chini jyada pad jaye tohaluva kafi mitha ho jayega ! tab us grahani se shikayat bh ki jayegi ki tumne halua achha nahu banaya hai ! isme chini jyada hai ? to us haluye ke test ka gun grahani ke madhyam se mila jo haluye me test aya vah gun grahani ka hai aur vahi haal ishavrka hai jo usne hamara apka sharirbanaya ya sara sansar uchit tarike se banaya ! sury v dharti me jo gun hai vah ishvar ke nahi apitu ishvar ne jaisa banaya hai vahi gun ate hai ishvar ne yah dharti adi paida nahi ki hai balki banyi hai ! shri agnuivir ji jiv ke vishay me kahrahe hai usne nahi abanya n ki sharir ke vishay me kaha rahe hai 1 isse ishvar jhutha kaise sabit hua vahaapbatlaiye jabki kuraniallah jarur yah kahata hai ki usne” dono hatho “se adam ko banaya ! dekhe kuran 38/75! batlaiye kuran ka allah ke jab do hath hai tab vah ek manushy jaisa kyo nahi kahjayega !

      • Dear Raj bhai.
        Kya halva chini ka example diya hai, mai to pehale hi likha hai ki aap sab Ishawar/Allah ko insan/insani niyam se tulna karte hai jo ishawar par lagu nahi.Banaya ya paida kiya ek hi hai. यजुर्वेद 13.4 सारे संसार का एक और मात्र एक ही निर्माता और नियंता है । एक वही पृथ्वी, आकाश और सूर्यादि लोकों का धारण करने वाला है । वह स्वयं सुखस्वरूप है । एक मात्र वही हमारे लिए उपासनीय है । Aap log ved ko bhi nahi maan rahe hain,saaf likha hai सारे संसार का एक और मात्र एक ही निर्माता और नियंता है aur sansar me sabhi aate hain. Ab kya kahe apko,bahut taras aata hai. Rahi baat kuran ki– dono hathon se banaya–to ye to aapki samajh hai ki usaki tulna insan se karne lage, jabki iska tatparya hai hame wahi banay,insano ko samjhane ke liye haath shabd ka prayog huaa hai.

      • mahamhim shri maan ji , dekhe kuran 38/75 keval dono hath hi nahi balki shaitan [shriiblis ji] se bahas bhi ho rah hai ! agar kurn ka allah nirakar hota to yahbahas bhi kaise hoti? dekhe kurn 39/67 jisme kuran ka allah kahata ki kayamat ke baad dharti uski muthhi me hogi aur danye haath se asman ko lapet lenge ? yah danya hath kis baat ka pratik kaha jayega ? kayamat ke baad 8 farishte kurni allajka singhsan uthey huye honge kya isse kurni alalh simit nahi ho jate hai kya 8 farishto ki sankhya simit nahi kahi jayegi ? hamne kab yajurved ke mantrka virodh kiya ? hamne to bas ishvar ne kaise yah bramhand banaya hai uska ek udaharan halute ke pratik ke taur par diya tha ! udaharan matr samajhane ke liye hote hai !

      • @Maan Singh :”नीम हकीम खात्राए जान ” यह कहावत आप पे सिद्ध हो जाती है . आपने कहा की संसार में सारे आतें हैं , हाँ बिलकुल सही कहा, लेकिन शरीर और आत्मा में अंतर है , हाँ शरीर जो की प्रक्रति है उसे इश्वर ने बनाया है प्रकृति के प्रयोग से परन्तु आत्मा/जीव को नहीं वोह सनातन है . मन्त्र में यह नहीं कहा की आत्मा या जीव को इश्वर ने बनाया है.

  20. Aarya

    irshad bhai aap apni pahli pustak (grnth) torait ko nahi mante?
    Agar nahi mante to Q.?

    To allaih ki agya ka ulnghan karte ho.

    Kyunke allah tala me Quran me kaha hai
    HUMNE EK KITAB OR
    MOUJIJA MUSA KO DIYE HAIN.
    Kaya yeh baat sahi hai

    • @Ajay
      Bhai aap Quran padhiye. Quran hi ek matra sacha granth hai. Aap chahe to Delhi ki Jama Maszid me jakar Quran free of cost prapt kar sakte hai. Mai aapko vahi par milunga. Vaha aapko Quran ke vishay me jankari bhi di jayegi. Anyatha aap mujhe aapna address de mai aapke ghar par hi quran deliver karva dunga. Ye allah ki seva hai aur kuch nahi.

      • @Slim Shaikh ji

        aapne to Quran padhi hai ..aap khud hi kyun nahi uttar de dete Ajay ji ka …ho saktra hai aapke lajawab jawab ke baad wo Quran khud khareed ke padhna shuru kar dein ..warna yu hi free copy bhejne ka kya faida ?

      • salim ji,
        Quraan bhejne ke liye dhanyawaad,
        par Quraan mai internet par already padh chuka hoo, aur Quraan me to aisa kuch likha hi nahi hai, dusri baat quraan puner janm ko maanta hi nahi to jawaab kahan se milega dost.
        aur Moksh ek janm me sambhab nahi ho sakta.
        so thanks for asking about sending the quraan.

    • नमस्ते अजय जी
      अपना द्रष्टिकोण रख रहा हूँ | आशा है कि त्रुटियों पर अग्निवीर जी टिपण्णी करेंगे और आप क्षमा करेंगे !
      धर्म , अर्थ , काम , मोक्ष को मै इस तरह से देखता हूँ :
      काम – वो सारी इच्छाएं जो मै व्यक्तिगत तौर पर पूरी करना चाहता हूँ ( स्वाभाविक है कि ये इच्छाएं समाज एवं धर्म कि परिधि में हों तभी ये उपयुक्त कही जाएंगी )
      अर्थ – वो सारे प्रयास /यत्न जो मैं समाज और परिवार हेतु करता हूँ (जैसे धनार्जन , ज्ञानार्जन इत्यादि जिससे समाज और परिवार में प्रतिष्ठित होऊं और उनका भी भला कर पाऊं – यहाँ भी वही नियम है कि ये प्रयास धार्मिक हों )
      धर्म – वो धुरी जो समाज , व्यक्ति , पंथ से ऊपर उठकर ये इंगित करती हों कि मेरे द्वारा किये गए सामाजिक या व्यक्तिगत प्रयास या इच्छाएं कहीं प्रकृति के नियमों का उल्लघन तो नहीं कर रही ?

      अनन्त काल से , अनेक जन्मो में , व्यक्तिगत और सामाजिक इच्छाओं कि पूर्ती करते हुए स्वाभाविक है कि मुझमे इन इच्छाओं के प्रति वैराग्य उत्पन्न होना शुरू जाये ..यही मोक्ष कि पहली सीढ़ी है ..जिस दिन मुझमे परा वैराग्य उत्पन्न हों जाये ..उसी दिन में मोक्ष के पथ पर चल पड़ता हूँ | परा वैराग्य चर्चा का विषय नहीं है ..या तो वो हों जाता है या नहीं होता है ..और ये भी तय नहीं है कि परा वैराग्य होने पर इसी जन्म में मोक्ष कि पाप्ति भी हों जाये | इसी लिए साधारनतया वानप्रस्थ एवं संन्यास आश्रम को ही इस प्रयास के लिए उचित बताया गया है |

      मोक्ष – जहां आत्मा जन्म जन्म के इच्छा से प्रेरित भटकाव /क्रीडा से तृप्त होने के बाद अपने इच्छारहित स्वभाव (आनद , पूर्णता ) में शांतचित्त विश्राम करती है

      • When ever the question of Mokhya comes, I try to describe the same with the following example. Its my belief, may be wrong. Others comment will try to purify the same.

        We know Parambrahma+Atma+matters = complete.
        Now lets see Parambrahma as the ocean, atma being the water in it. We can take a drop of water or a bucket of it, but it will remain the water, but not the ocean. Again as the water drop came out of ocean, it is not different. This is the Advaitya Sidhanta or non-duality concept.
        The souls were part of the Ocean. They reacted with the sun (matter or prakriti) and separated from the ocean. When they left the ocean, they felt the pain. They tried to know the reason and understood they can get relief when they can reach the ocean. Hence the tried to reach ocean again. They fell down on earth. Some fell on land, some on plants etc (species), some fell on the rivers and moved towards the ocean. On reaching the ocean the all difficulties ended.

        But every time, the water reacts with the sun, and gets separated from the ocean, and every time a soul reached the ocean. this is a continuous process.

        One may ask, why God made such a rule ?
        My answer, who is God ? The souls themselves with perfect consciousness. is not it ?? Who made the rule ? None.

        I started from an equation. now see it again,
        Parambrahma+Soul+Matter = complete. These may change from one form to another. That is what happens all around.

      • @Namaste IA bro

        —इसी लिए साधारनतया वानप्रस्थ एवं संन्यास आश्रम को ही इस प्रयास के लिए उचित बताया गया है |—
        क्या इसको आप थोडा और विस्तार से समझा सकते है? अपनी जिम्मेदारिओं को छोड़कर वानप्रस्थ और सन्यासी हो जाना कहा तक उचित है ? इस समय जब देश और समाज को आपकी सबसे ज्यादा जरुरत है, उस समय अपना कर्त्तव्य क्या होना चाहिए?

      • Namaste Shravak bro

        १. क्या इसको आप थोडा और विस्तार से समझा सकते है? अपनी जिम्मेदारिओं को छोड़कर वानप्रस्थ और सन्यासी हो जाना कहा तक उचित है ?

        मित्रवर आप गलत समझ बैठे ! मैं वानप्रस्थ आश्रम की बात कर रहा था – जो कि ब्रह्मचर्य एवं ग्रहस्थ आश्रम के बाद आता है – जहां पर आप व्यक्तिगत एवं सामजिक जिम्मेदारियां निभा चुके होते हैं |

        २. इस समय जब देश और समाज को आपकी सबसे ज्यादा जरुरत है, उस समय अपना कर्त्तव्य क्या होना चाहिए?

        देश के प्रति कर्त्तव्य तो सन्यासी का भी ख़त्म नहीं हो सकता | राष्ट्र धर्म निभाने के लिए बहुदा सन्यासी ही सबसे पहले कदम उठाते आये हैं |इतना कहने के पश्चात ये अवश्य कहना चाहूँगा की सन्यासी के लिए धर्म से भी गहरी एक मर्यादा होती है ..वो है सत्य की मर्यादा ..जो सभी आवरणों की पोषक है ..और अगर कोई धर्म , राष्ट्र , समाज या व्यक्ति उस गहराई से गलत दिखाई दें तो सन्यासी उससे अपने आप को दूर कर लेता है | हालांकि सन्यासी धर्म -वर्णाश्रम से परे है पर वो बाकी आश्रमों की वजह से अपना स्वातंत्र प्राप्त करता है – और इसी लिए जब उनपर विपदा आती है तो वो राष्ट्र धर्म निभाने में अग्रणी भूमिका अदा करता है |
        मेरे लिए सभी आश्रम श्रेष्ठ हैं और कोई भी आश्रम अप्रासंगिक नहीं नज़र आता

      • —मित्रवर आप गलत समझ बैठे ! मैं वानप्रस्थ आश्रम की बात कर रहा था – जो कि ब्रह्मचर्य एवं ग्रहस्थ आश्रम के बाद आता है – जहां पर आप व्यक्तिगत एवं सामजिक जिम्मेदारियां निभा चुके होते हैं |—-
        यह आपको कैसे पता चले की अब में अपने सब दायित्व निभा चूका हूँ? मुझे तो सांसारिक/गृहस्थ मार्ग खत्म होता नज़र नहीं आता| हर क्षण किसी न किसी को आपकी जरुरत है|

        —मेरे लिए सभी आश्रम श्रेष्ठ हैं और कोई भी आश्रम अप्रासंगिक नहीं नज़र आता|—-
        यानी के सब हालात पे निर्भर करता है| अगर किसी के जीवनकाल में युद्ध का वातावरण रहे तोह उसके लिए दुसरे मार्ग अप्रासंगिक हो जाएंगे?

      • १. यह आपको कैसे पता चले की अब में अपने सब दायित्व निभा चूका हूँ? मुझे तो सांसारिक/गृहस्थ मार्ग खत्म होता नज़र नहीं आता| हर क्षण किसी न किसी को आपकी जरुरत है|

        इसी लिए मैंने “साधारनतया” शब्द पर बल दिया था | मोक्ष हर किसी जीव की इच्छा नहीं होती | जैसे जैसे हम मृत्यु लोक से पलायन की ओर अग्रसर होते हैं तब हमें अपने अंतिम पुरुषार्थ ‘मोक्ष’ पर चिंतन करने का परामर्श शास्त्र देते हैं | ये सिर्फ परामर्श है , कोई बाध्यता नहीं है | आखिरकार हमें इस संसार के चक्र में घुमते रहने का पूरा स्वातंत्र्य है | एक जीवन ऐसा आना है जिसमे हर जीव इस क्रीडा से ( त्रिश्नाओं , इच्छाओं ) से तृप्त होकर अपने स्वरुप को जानने का इच्छुक होगा ..इस स्तिथि में ऐसा भी संभव है कि ऐसा जीव ब्रह्मचर्य के बाद तुरंत सन्यास आश्रम में प्रविष्ट हो जाये | खैर इसके कई permutation -combination हैं |

        रहा सवाल लोगों को आपकी ज़रुरत का ..तो एक आयु के पश्चात आपको लोगो को समझाना पड़ेगा कि आप अमर नहीं हैं – उनकी ज़रूरतें आपके बाद भी बनी रहेंगी | तो उचित तो यही होगा आप ग्रहस्त आश्रम के समाप्त होते होते उन्हें स्वयं पर निर्भर होना बनाएं | उचित इसलिए के आपके आश्रित उस उम्र पर पहुँच चुके होंगे जहां वो किसी का आसरा बनें – उनकी स्वावालंबता आपके हाथ पीछे किये बिना आना मुश्किल है | यह संसार चलायमान है और रहेगा – शरीर आते जाते रहेंगे – ऐसा कोई शरीर नहीं हुआ जिसकी ज़रुरत में संसार आदिकाल से तड़प रहा हो या किसी पल रुक गया हो | इसी बात का चिंतन करना वानप्रस्थ का लक्ष्य है – इस बदलते संसार में वो क्या है जो नहीं बदलता | वो क्या है जो नए शरीर में , नई परिवार में प्रवेश करेगा और करता आया है – उसका स्वरुप क्या है – उसका इस संसारी चक्र में घूमने का पर्याय क्या है – इस्ससे निकलने का क्या औचित्य है – क्या उपाय है इत्यादि

        २. यानी के सब हालात पे निर्भर करता है| अगर किसी के जीवनकाल में युद्ध का वातावरण रहे तोह उसके लिए दुसरे मार्ग अप्रासंगिक हो जाएंगे?
        आपने सही कहा | हमारे सामान्य और विशेष धर्म परिस्थिति और क्षेत्र पर निर्भर करते हैं | इसीलिए अर्जुन का धर्म युद्ध में सन्यास अप्रासंगिक है

      • धन्यवाद आपके उत्तरों के लिए| For time being, मेरी जिग्यासा शांत हो गयी है| आगे जरुरत पड़ी तोह अपने बड़े भाई को फिर पुकारूँगा| 🙂

        आपका छोटा भाई,
        श्रावक

      • Namaste Anuj

        dhanyawad to aapka hai ki itne sundar vishay par vaartalaap ka avsar pradaan kiya 🙂 ..warna zyada samay to jhoot ka khandan karne mein hi beet jaata hai , satya ke soundarya ko sarahne ka avsar kabhi kabhi hi milta hai ..iske liye aapko sadhuwad hai !

      • नमस्ते भ्राता श्री|

        यह तोह आपका बड़प्पन है| आपके उत्तर ही तोह हमारी सोच को दिशा देते है|

        साधुवाद|

      • @Indian Agonist
        I HAVE BEEN REGULARLY VISITING AGNIVEER.COM AND HAVE BEEN GAINING IMMENSE KNOWLEDGE AND ALWAYS HAVE STOPPED MY SELF WITH GREAT EFFORT TO PASS ANY COMMENTS POSITIVE OR NEGATIVE. BUT TODAY JUST COULD NOT STOP MY SELF AND HAVE TO SAY ” RESPECT YOU A LOT “

  21. Namaste Agniveer Ji,
    Kuch prashn jo hamesha se dimag me chalte the aur bahut jor dalne par thaka dete the aapne iska nivaran kar diya. ek prashn aur agar ishwar, jeev aur prakriti anadi hai to kiya teeno ka koi prarambh nahi hai ya jeev ka prarambh hai. aur yadi jeev ka prarambh hai to prakriti aur ishwar ka bhi hoga. kirpya jeev ki utpatti per kuch prakash daaliye.

    • अजय जी प्रणाम.
      १. इश्वर जीव और प्रकृति अनादी हे तो क्यों तीनो का कोई प्रारंभ नही हे ?
      उ. कुछ समय केलिये वेद, कुरान और बिबेल को छोड़ कर जो वैज्ञनिक तथ्य हे उस पर ध्यान देते हे. प्रकृति अनादी हे. ये केवल उर्जा का बिभिन्न स्वरुप हे. ये एक रूप से दूसरे रूप में बदलता रहता हे. ठीक कह रहा हू न में ? ऐसा क्यों हे इसका जवाब आज ताज मनुष्य समझ नही पाया हे.

      अब वेदा में क्या लिखा हे ? के प्रकृति, ब्राह्मण और आत्मा ये तीनों अनादी हे, जो आज के मनुष्य के वैज्ञानिक तथ्य से भी मेल खता हे. क्यों ऐसा हे इसका जवाब वेदा में व् नही दिया हे. अगर आप नासदीय सूक्त पढ़े, तो उसमे कुछ प्रश्न भी पूछे गए हे, आशा हे मनुष्य उन प्रश्नों का उत्तर जरुर प्राप्त कर लेगा.

  22. hame bhagwan ne nahi balki kaal ne banaya h ye sansar kaal ka banaya hua h. according to वेद kaal ne croro saal tak tapaysa ker ke bhagwan se sarti/ sansar banane ka ver maga .per god /khuda/ rab (you can say anything) usme kaal ko to ver(wish) de diya. lakin vo god/khuda/rab (dono jahan ka maalik sab janane wala jesne bharma,vishnu,meash ko banaya vo sab jannewala) usne ver diya ver tha according to वेद (ki malik me tujese ek sarti banane ki agya chata hu.or use teri ruh,soul, aatma(u can say any thing) mangta hu. per god se bada kon tah.chayi vo kaal ho god ne kaha ki m tume apni ruh(,aatma,soul) to deduga per es sarti se ve kasi vapas mere paas aayege tab kaal ne kaha jo kaal ki duniya me rah ker ke teri bhakti,ibadat kerega vo tere rahmo karam se tuj me sama jayega .phir kaal ne duniya ve chees banaye{ jo kuch be aap dekh rahe h sab kaal ka saman h bas aatma hi us rab ki h}to kaal ka sansar bana esa bana ki koi be ruh es sansar me aaker us maalik ki ibbdat na ke sake. lakin us se bada kon.

    phir god ne samay samy per sant, mahtma, phkiro ko yaha bhega ,un sab ne samjaya ki ye sansar hamara nahi h .us maalik ki ibadat kro bas.

    my all brother and sister ye sab log jo be apne aap ko hindushim or islamshim ya phir kise dharm ke bata te ho ye sab apna kam nikalte h.ye aaj se nahi purane time se h or history ghawah h ,dhrm (religion) gawah h pad lo in logo ka harsh bura hua h.ye srif knowledge ka weight utaha rahe h pata sata kuch nahi logo ko logo me ladva rahe h jase koi horse use malum hota h kuch weight tere kandho per h per use us weight ya bhaar ki bare me ye nahi pata hota ki ye kitna ,or kasa h
    bas uska kam use dhonah{pick up kernea.vase hi h ya log .

    app log be murkh h are yadi sach jana na h to us maalik ki pray kro vo sab bata de ga sach kya h kise se puchne ki avasakta nahi

    socho yadi ye vastav me hindu,mushlim,sikh o etc dhrrm ke bare me knowledge rakthe to

    {not that vedas me kise dhrrm ki bari me nahi balki insan ki bari me likha h}

    ye sab log ghum raha kerte h

    socho…

    • hello neha ji u r right and i m agree with u. but i want to ask a single question? from where u get this information? Mention book name also.

    • param adarniy shri amajad ji , sabse pahale yah sochiye ki itna bada allah !!! ek anpad muhammad ji ko apni hol sele “ajensi ” kalpit jannat ke lye bhi kyo dega ? kaun se achhe gun ]tasir]unke pas the ? ap bhale hi muhammad ji andhe ashik ho ya ek natak karte ho ? kya ap bhi ashikane muhammadi hote huye bhi svay 50 sal ke hokar kisi 6-7 sal ki kisi ko apne nikah ke liye koi nyota dena pasand karenge ya apni 6-7 sal ki beti ko jo nikah ka matlab bhi n janti ho sex karvane ki bat bhi n janti ho , uska nikah kisi bhi 50 varshiy muslim se bhi karna pasand karenge ? bas, apni bat dil ke bajaye dimag se dijiyega ! yahi apse karbaddh prarthna hai ! kya aap hamo uttar dena pasand karenge / fir aur bat bhi rakhenge hamare pas to kuran muhammd ji ke sandarbh me prashno ke “bhandar “hai ! abhi to ham iski shuruaat kar rahe hai ! ham apse asha karte hai ki aap hamko javab avshy denge !

  23. पहले आप ये बताई ये की भगवान है कौन सब के पास एक ही जवाब होता है की ईश्वर तो शक्तिशाली है उनकी न तो उत्पत्ति हुई और नहीं अंत होगा माना की वे सबकुछ है तो इसका ये मतलब थोड़ी है की उनकी कभी उत्पत्ति न हुई होगी भला अपने आप कोई चीज कैसे बन सकती है?

    • नमस्ते भाई नीरज

      बनना और बिगड़ना असल में पैदा होना या समाप्त होना नहीं होता. कुछ भी चीज आसमान से नहीं आ टपकती. घड़ा तब बनता है जब मिटटी होती है. मिटटी नहीं हो तो घड़ा नहीं बनेगा. जिसे हम ख़त्म या समाप्त होना कहते हैं वो तो वास्तव में पदार्थ की अवस्था परिवर्तन का नाम है. घड़ा ख़त्म हुआ तो मिटटी बना शून्य नहीं बना. पानी उड़ा तो भाप बना शून्य नहीं बना. तो इससे यह सिद्ध हुआ कि अस्तित्त्व तो पदार्थ का सदा ही होता है पर उसका रूप बदलता जाता है. अब आते हैं बनाने वाले पर. मिटटी को घडा बनाने के लिए कुम्हार चाहिए. आपने भी माना कोई चीज बिना बनाए नहीं बनती. तो यह बात उन पर ही लागू है जो बनती और बिगडती हैं. भगवान् किसी मिटटी या लोहे से मिलकर नहीं बना तो इसलिए उसे किसी बनाने वाले की जरूरत नहीं है. वह तो जैसा आज है वैसा ही कल भी था और सदा से था और सदा रहेगा. अब जब यह बात सिद्ध हुई थी कि पदार्थ सदा से है कभी शून्य से पैदा नहीं हुआ तो पदार्थ को परिवर्तन करने वाला भी सदा से ही होगा. कोई पूछे कि नहीं होगा सदा से तो हम पूछते हैं कि अगर सदा से नहीं था तो फिर अब कहाँ से आ टपका, कब आ टपका? किसने टपकाया? तो यदि ईश्वर या पदार्थ को सदा से नहीं मानते तो विरोध ही विरोध सामने आते हैं जिनका कोई उत्तर किसी के पास नहीं है और न कोई दे सकता है. अतः ईश्वर, पदार्थ को सदा से मानना ही तार्किक है.

      आपकी प्रतिक्रिया जानना चाहूँगा!

      • Namaste Vajra Ji,

        Maine yeh prashn aapka post padhe bina hi kar diya tha lekin baad me aapka post padha bahut hi sunder aur saral jawab diya aapne. Padh ker man ko shanti mili. aapka bahut-bahut dhanyawaad.
        Ek prashn aur tha “MOKSH” Kiya hai.
        aasha karta hoon jawaab milega. jis se mera aur doosro ka gyan bhi badhega.
        Dhanyawaad.

    • भगवान है कौन?
      भगवान (ईश्वर) एक पदार्थ है, वस्तु है, द्रव्य है । जिसमें कई गुण भी हैं और जो कर्म अथवा क्रिया भी करता है ।
      यह सत्य है कि ईश्वर की न तो उत्पत्ति हुई है और न ही उसका कभी अंत भी होगा । इसलिए कि ईश्वर अनुत्पन्न, अनादि, नित्य पदार्थ है । ईश्वर संयोगजन्य (“कार्य” = effect) पदार्थ नहीं है । अतः उसका कोई भी कारण नहीं – न निमित्त कारण, न उपादान कारण और न ही साधारण कारण ।
      संयोग से उत्पन्न पदार्थ अनित्य ही होता है । ईश्वर संयोग से उत्पन्न पदार्ह नहीं है । अतः अनंत काल तक विद्यमान रहेगा । आत्मा (= जीवात्मा = individual soul) और “मूल प्रकृति” (basic material cause of the universe) भी ईश्वर की तरह अनुत्पन्न, अनादि, नित्य पदार्थ हैं । ये तीन पदार्थ न कभी उत्पन्न होते हैं और न कभी नष्ट होते हैं । सदैव विद्यमान रहते है ।

      • shi bt h iswar aur prakti hmesha se h aur aatma ki utpti shiv ling se hui h jo aatma vapas shiv ling me mil jati h vo moks prapt krti h mahadev

      • atma aur pra kriti aur ishvar ka kabhi janm bhi nahi hua hai aur n inki maut hoti hai yani yah tino anaadi aur ananat hai ! agar atma ka janm hua hota to paida karne vale ke gun usme jarur hote jo nahi hai ! shivling se kisi ka bhi janm nahi hota isliye yah baat bhi galat hai ! moksh bhi bahut samay ka hone kebaad bhi simit hai ! vapas fir se janm lena hota hai

  24. I want to learn & understand Satyarth prakash, & clear the doubts.
    whether any place is there, for teaching satyarth prakash or if I come for a month can you suggest suitable person to fulfil this task.
    The knowledge gained will be utilised for self development & for Arya samaj.

  25. @ Irshad. –

    The basic difference between Vedic Philosophy and Koranic Philosophy is that, Vedas say this body is not “me” the soul inside is “me”, where as Koranic Philosophy says this body is “me”.

    But one can know the truth easily. When we die our body perish, but the soul goes to hell or heaven (for ever as per koran) for some time in accordance with the deeds, then he is given another body and the soul again come backs to earth and perform.

    So koran too says body is not “me”, but fails to accept.

    And regarding the matter of ” prarthana patra” this question should be asked to the Koran experts, in Vedas it is clear that the type of body is dependent on deeds.

  26. avoid the word ‘hindu’, ‘hinduism’ etc. Use ‘ÂRYÀ’ ‘ÂRYÀVART’ . Raja ram mohan roy:-( was idiot .

    • Dear agniveer ,

      main saubhari Rushi ji ke kul se hi hoon , kripya jaisa aapne bataya hai ki saubhari muni ne ye kaha hai vo kis ved main hai. rigveda main ya saubhar samhita main
      kripya jaroor bataiye , thanks

    • hindu – jo manushya hindusthan ko apni maa samajhte hai, iss desh ko pyear karte hai, isski dukh me dhukhi hote hai, isski khushi me anandit hote hai, is desh ke liye haste haste jan de shakte hai, unhe hindu kahete hai. bo insan sanatan, islam,isai, sikh, budhis……… any one ho sakta hai,

      ‘ÂRYÀ , sanatan – jo manushya veda ko mante hai, veda ke anusar apni sincharia bitate hai.

  27. Hello Agniveer ji,

    Great Article again.
    I just want to know , have you written anything about the Age of Yugas.

    This is a very puzzling issue. I have researched a lot on this. I am very much interested to know your views on it.

    Ashish Savya Sachi.

  28. Namaskar Agniveerji,

    I have no words to say now!

    This article is one of the best doubt-clearing one for me. I have been asking these questions to my mind and could never got the logic. Your answer gives me the impression that humans have their own-identity and prakriti is the utmost governing factor for Living beings (chetan) and Non-Living things (Jadd). Ishwar is the “Samanwayk” of everything as per the Prakriti.

    I have read literature of Swami Vivekanand, which was littel bit difficult to understand. Your structured and instructional type of article, has made me to clear my doubts.

    Regardless of what other people think, I am satisfied. I do not know what would be required by these adamant people, as they seek gratification only keeping their eyes and ears closed. I request to all the human beings, irrespective of their religions, to come out of their shell of useless bookridden lives and think in a rational manner.

    The people who are open to change are very few and can be counted on fingers. If at all they wish to come out of their traps, they would be threatened to be killed. They are united in their tribes and still living a tribal live, and yet wish to make use of all the modern amenities for the civilization. They are just like an ant when gets in touch with some other tribal group of ants, it gets brutally killed.

    Regards,

    Satyendra

    • dear,
      you should follow hawking closely because Mr. hawking apne dave/theory ka khandan khud kar chuke hai. kitni baar or konsi theory ka kandan kiya hai ye to mujhe pata nahi par kiya hai ye to sach hai.
      ho sakta hai ek din vo rebirth ki theory me bhi vishvas karne lage
      kyuki pahile me bhi rebirth ko fairy story hi manta tha

  29. hamne ishvar ko koi bhi prarthna patr apne janm ke liye nahi diya tha , fir usne hame kyo paida kiya ? yah uski to tanashahi jaisi lagti hai ! har bat ko ishvar ki marji kaha kar nahi tala ja sakta ? ham dukhi kyo hai ya ham sukhi kyo hai ? ham gareeb kyo hai? hAM AMEER KYO HAI ? ham shiksht kyo hai ?ham anpadh kyo hai ? kuch bachhe k umr me mare kuch paida hote hi mar gaye , kuch mare huye hi paida huye , kuch balak pan me mare kuch yuva hokar mare kuch budhape mare ? kuch dukhi hokar mare kuch chalte firte mare , kuch aydhik bimar hokar mare kuch tatkal mare [jaise goli adi ke shikar hokar ] kuch ne ishvar ki prarthna ki , kisi ne jyada ki ,kisi ne bilkul nahi ki , kisi ne kisi ko madhyam banakar ki , kisi ne ulti sidhi jo mila samaj me dekhkar ki , ! kya ishvar naraj hota hai ?kya ishvar khush bhi hota hai ?, fir yah sab kaise hota ha?i tatkal ya bahut der bad ? fir kitni der bad ? agar ham ishvar ko gali de, ya apshabdon ka istemal bhi kare tab ishvar hamara kya kar lega? kya tatkal hamese kuch karega ya bahut din baad karega ? hame to in sabke uttar chahiye kya mil sakenge ? ya hame hi iska samadhan dhundhna padega ?

    • Namaste Raj Ji and Raj Shekhar Ji

      Main aapko Swami Dayanand ki pustak Satyarth Prakash padhne ka paraamarsh doonga.

      Hum jo kuchh bhogte hain, vah sab hamaare ab tak ke kiye gaye karmon ka parinaam hote hain. Jo hum ab karte hain uska phal aage bhogte hain. Eeshvar bina krodhit ya prasann hue humen hamaare karmon ke phal yathaavat deta hai aur satya maarg par chalne ki prerna nirantar deta hai.

      Aap Satyarth Prakash ke 7, 8, 9 adhyaay avashya padhen.

      Dhanyawad

      • भाई जी नमसते
        आप से एक सवाल है जब ईश्‍वर ने दुनिया बनाई
        सबसे पहले पेड पोधे बनाये उसके बाद जानवर बनाये
        और उसके हजारों सालो के बाद मनुश्‍य को बनाया
        और जब मनुश्‍य को बनाया तो वह बिलकुल पाक साफ था
        इससे तो दुनिया में जो प‍हले मनुष्‍य पैदा किये गये
        उन्‍होने तो कोई पाप नहीं किया था
        तो इस तरह तो जो मनुष्‍य पैदा किये गये थे उन सबको मुक्‍ती मिल जानी चाहिये थी
        और दुनिया में मनुष्‍य खत्‍म हो जाने चाहिये थे
        आप कहते है कि जैसा मनुष्‍य कर्म करता है उसी के हिसाब से वह दूसरी योनियों मे जन्‍म लेता हैा
        यानी की हमारे आस पास जितने पेड पौधे जीव जन्‍तु जिनसे हम को फल दूध अनाज इत्‍यादी अपने जीवन मे स्‍तेमाल होने वाली चीजे हमें मिलती हैंा
        यानी की जो व्‍यक्ति कुकर्म करेगा वो अगले जन्‍म में मानव जाति के लिये लाभकारी होगा
        तो इससे यह निष्‍कर्ष निकलता है की कुकर्म करने वाले व्‍यक्ति मानव जाति के लिये हितकर हैं
        अपनी आने वाली नसलों के लिये उन्‍होने पाप किया जिससे अन्‍न या दूध मास की पूर्ति हो सके
        इसका मतलब पाप करना सही है
        वरना अगर सभी सही कर्म करने लगे तो आने वाली जनरेशन को खाने के लाले पड जायेंगे
        और एक चीज बहुत ही जरूरी है की अब तो अधिकांशता पापी ज्‍यादा हैं तो मनुष्‍यों की जनसंख्‍या घटनी चाहिये और जानवर पेड पोधों की संख्‍या बढनी चाहिये लेकिन एैसा नहीं है
        इसका मतलब पुनर्जन्‍म गलत है
        तो सही क्‍या है

      • Sarvapratham aap sabhi budhijivion ko mera pranaam,

        Mai yahaan par kuch prathamik vicharon partial prakash daalana chahoonga.
        1) Hum sabhi janmsidh swatantra janm lete hai
        2) Hum apane watawaran ke anusaar apani swatantrata ka hanan kar dete hai
        3) Hum yadi nahi jaanate ki kya uchit athawa kya anuchit hai kintu anbhigya hote hue bhi hum yadi koi anuchit karya karte hai to antaratma avashya use karne se rokti hai

        Ab mai pratham vichar per aapaka dhayan chahoonga. Ek shishu jab janm leta hai to use nahi gyat ki woh kaun hai. Parantu woh ye awashya janta hai ki woh swatantra hai.
        Vishwa me sabhi jaanta hai ki Prakrti sarvottam hai. Ye is liye bhi kah sakte hai kyonki hum Prakrti ki kisi bhi rachana athwa usaki karya-pranaali me koi bhi dosh nikalane me asamarth rahe hai.
        Yadi mai ye kahoon ki Prakriti ke kisi bhi avishkaar me koi truti nahi hai to ye atishiyokti nahi hogi.
        Is jagat me pratyek jeev ko usaki saranchan tatha usaki karya shili ke anusaar hi vibhajit kiya gaya hai.

        Dwitiya tark ke anusaar har jeev apane watawaran ke anussar apane jeevan ko, prakritiwash, kaya tatha indriyon ki aawashyaktaaon ki purti hetu nirwaahan karte hue apane ko sarwashresth rakhane ki yukti karta rahta hai.
        Yadi mai manushya ke vishaya me kahoon to usaki prathamik mulyon ki poorti ke paschaat woh tulnatmak vishyon par dhyaan deta hai.
        Aur is prakaar prarambh hota hai manushya ke swatantrata ke hanan ka.
        Yadi mai aaj ke samaj me upasthit dharmik sangharsh tatha pratiyogita ke chakrawyooh vishaya me kahoon to dekhata hai ki adhiktar samaanya manushya apane aap ko kisi visisht samooh ke saath jod kar us samooh ke jeevan nirvaahan nirdesho ko anya samooh ke nirdeshon se uttam kah ke apane aap ko sarwottam kahlaane ke udyog me swam ko us samooh ka daas bana raha hai.
        Is karya ko karne me woh swayam apane nitigat mulyon ko maarne se bhi nahi chhokta.
        Kya ye isi prakaar nahi ki kisi swaamibhkt daas ka usake swaami ki agyanusaar kisi andhe koop me kood jana.

      • Tritiye tark ke anusaar prakriti ne sabhi jeevon ko vishisht karya hetu nirmit kiya hai. Jeev ko gyaat hai ki kya uchit hai aur kya nahi. Par woh kyonki swatantra hai is liye woh kuch bhi kar sakta hai.
        Prakritik roop se kisi bhi manushya ya anya jeev par kahi bhi koi chinha nahi hota jo ye nirdhaaran kare ki ye manushya is dharm ka hai aur woh anya. Yadi ye itana hi mulyawaan hota to hume awashya hi ohm, cross, chaand-sitara athawa kisi anya prkaar se chinhit kiya gaya hota.

        Ab ye aap ko sochana hai ki satya kya hai.

    • Dear Raj.Hyd
      aap ne apne maa baap ko prathna patr likha tha keya, aap ko paida karne ke liye?????????? sorry boss shayad bura laga hoga,

      • @Irshad
        Namaste Brother
        Ishwar ne hame nahi banaya hai usne to hame body di hai, Aatma, Parmatma & Prakriti tino nitya hai inka kabhi bhi vinas nahi hota. Aatma apne karmo ke anusar body badalata rahta hai.

      • Dear truth seeker says:or Raj. Hyd.

        sorry boss ye mere question ka answer nahi hai

        aur rahi baat ishwar ne aap ko nahi banaya to banaya kisne ?????? jab ke aap apne comment se ye zahir kar rahe ho ke aap ko ishwar ne paida kiya “raj.hyd says:
        May 16, 2011 at 8:16 pm
        hamne ishvar ko koi bhi prarthna patr apne janm ke liye nahi diya tha , fir usne hame kyo paida kiya”

        thnx

      • @Irshad
        Boss Aatma(Ruh) & Pramata (Ishwar) Parkariti (matter) tino nitya hai matlab hamesha rahate hai kabhi bhi koi aesa time nahi tha jab aatma (Ruh) nahi thi, Ishwar ne Ruh ko body di hai taki wo Karm kar sake aur anand prapt kar sake.
        Ishwar, Aatma or Parkariti ka koi karan nahi hai. Jo chij banati hai uska ka vinas bhi hota hai lekin aatma nitya hai, Iswar ki tarah, na kabhi banati hai na kabhi vinas hota hai. Ishwar ne aatma par daya ki aur use aanand dene ke liye body di hai, jaise jaise tume karm karoge tumhe body milti rahegi.

      • BHAI AIR HOTI HE, PER DIKHAI NAHI DETI, YE SAB KISNE BNAYA TUMHARE ALLAH NE, JIS ALLAH KO YE BHI NAHI PTA THA KI EARTH GOL HE, TUMHARE KURAN KE HISSAB HE EARTH CHAKOR HE, TUM LOGO KO IED PE APNE BETE KI BALI DENI HOTI HE PER TUM JANWAR MAR DETE HO, TUMHARE BACHHE OR JANWAR ME KOI FARQ NAHI HOTA HE, BAAT KARTE HE, OR PHIR USE KHAA BHI JATE HO, 😀 TUM LOGO JAHA REHTE HO WAHA SE NIKAL JAO GANDI BADBU AATI HE CHAHE, KAHI BHI CHALE JAO, TUM APNE BEHNO SE SHADI KAR LETE HO, TABHI TUMHARI POPULATION BAD RAHI HE ITNI, MAA SE BHI SHADI KAR LETE HO, SARI AISH OR ARAM KI CHIZO KO TUM APNA DHARM SE RELATED MANTE HO, ALLAH 1 KITAB DE GYE TUJHE ASMAN SE UTAR KE, KONSI PRINTING PRESS LAGI HE BRAHMAND ME, JO TUM LOGO KI KURAN WAHA SE UTAR AAI, MAKKA ME AISA KIYA JO DUNIYA SE CHHUPAYE CHHUPAYE GHUMTE HO,

      • manniy irshad ji yah prashn hamare nahi hai hai, ek aam janta ke ho sakte hai , hamne to matr kuch logo ke sandeh ko yahan vichar ke rup me dala tha ! ishwar ne hamko paida nahi kiya ? agar ishwar ne hamko paida kiya hota to to ishwar ke gun[taasir ] bhi manush me hoti jo nahi hai ! kya ishwar jhuth bol sakta hai jabki manushy jhuth bhi bolta hai ? ishwar ne sari shrishti banai kya manushy kisi chinti ya machhar ka nirman kar sakta hai ? aise bahut se prashn hai , jo ishwar v manushy me gunon ka milan nahi hota hai !

      • Gager me sager bali mai ek baat batana hu.akhil bradmand me jo kuch vi sarvochya hai wah ishwar hi to hai. Jaise jal me swad. Parwato. Me himalaya. Rituo me basant vanchoro me Singh.

      • Bhai logo ladne ki jarurat nahi hai because jo insan his mahol ya jaiai society me janm leta hai or Jo bhi us society se sikhta wahi saxh mankar us knowledge ko disre pe jabardasti thopne ki koshish karta hai ,use ye pata nahi hota hai ki WO bhi wrong ho sakta hai aise hi jisne ved padhe ya kuran ya gita ya kuch bhi but ak bat batao ki us gyan ko apne samajhne ki koshish ki? aj koi kuran ko galat tarike se or heaven ka lalach bharkar atankwadi banate hai . kuch chalak log murkh banate hai apne faide ke liye or ham log unke bicharo ko dimag me dalkar pap karte hai .pahli bat ye hai ki is nature ka apna ak rule hai jise koi nahi Tod sakta jaise agar bhagwan bhi is dharti pe janm lete hai to unko bhi marna padta hai , ved ,kuran ya koi bhi holy book kabhi bhi galat nahi sikhati sabhi humanity ka rasta batate hai , kya lagta hai bhagwan bolega ki ak jameen ke tukde ko jihad ka nam dekar katl Karo kisi ka ? ab ap jihad karte hai or tumhare hi dharm ka ak nishpap or jise jise jihadi jitna knowledge nahi hai WO Mara jata hai to us bande ka pap ye hai ki WO us desh me paida nahi hua ya fir bhagwan ne pap karwane ke liye ye holy books banai hai. mere bhaiyo kyo itni tension lete ho tumhe un logo pe itna biswas kyo hai Jo apne faide ke liye istemal karte hai . rahi bat gyan ki to gyan samaj ki bhalai ke liye hota hai is tarah dusro ko nicha dikhane Wala gali Dene Wala adhure gyan ka sikar hota hai Jo ki atankwad ko janm deta hai .rahi bat bhagwan alah ya god ko pane ki to chinta mat Karo gita me likha hai ki Jo ishwar ko jis tarah pujta hai WO uaki bhakti ke anusar usi roop me milte hai WO jaisa unko samajhte hai WO usko waisa hi milte hai . so Jo jaisa sochta hai soch lo kyoki jiaka mind jitna hai WO utna hi bolega ak murkh ke samne ak gyani bhi kuch nahi kar sakta kyoki koi bhi insan apna attitude itni easly nahi badalta hai.

    • shri irshad ji ganesh ki kahani bhi kaklpt farishto ki tarah hai 1 jab koi bat dharm me dak di jati hai vaha galt bhi hoskati ha vah huro ki bat ho ya parvati se ganesh ki ban eki bat hi sab ek aarh ke thaili ke chatte batte hai isliy dham ki kahi jani vali pustak koi bhi ho har baat nahi manani chahiye !
      yah duniya pahali baar nahi bani hai jab se ishvar hai tab se yah duniaya banti aur nash hoti rahi hai! yah iska pravah raha hai pichli duniya ke jo karm the us buniyad me aaj ki duniya me insano ko un karmo ki buniyad me janm hua hai !
      jiv asankhy hai isliye sabhi ki abadi bahd sakti hai

      • Hello Mr Dharmayoddha aap jo kehre woh bilkul galath hai

        Ishwar tho pattar hai usne tumeh kaise kaha dharm………..!

      • niyazi miya pathhar to hazare aswad bhi hai.dhyan se dekho.bas bahana hai ki child rapist mohammad ne chuma to hum bhi choomte hain
        ‘अल्लाह ‘ईश्वर नहीं है !!
        जो लोग अज्ञानवश “ईश्वर अल्लाह तेरे नाम “का भजन करते रहते हैं ,शायद उनको ईश्वर की महानता शक्तियों और गुणों के बारे में ,और अल्लाह की तुच्छता और अवगुणों के बारे में ठीकसे पता नहीं है .ईश्वर असंख्य अल्लाह पैदा कर सकता है .क्योंकि असल शब्द अल्लाह नहीं “अल -इलाह “है देखिये कुरआन की पारिभाषिक शब्दावली पेज 1223 और 1224 पर शब्द “इलाह ”

        इलाह का अर्थ देवता या “god “है

        मुहमद के समय अरब में मूर्तिपूजा प्रचलित थी. अकेले काबा में 360 देवता थे हरेक कबीले का अलग अलग देवता था .लोग अपने लड़कों का नाम अपने देवता के नाम से जोड़ देते थे .तत्कालीन अरब इतिहासकार “हिश्शाम बिन कलबी “ने अपनी किताब “किताब अल असनाम “जिसे अंगरेजी में “Book of Idols “भी कहा जाता है अरबों के देवताओं के बारे में विस्तार से लिखा है ,उस से कुछ देवताओं के बारे में दिया जा रहा है .

        1 -अरबों के देवता और उनका स्वरूप

        अरबों के देवता कई रूप के थे जैसे मनुष्य ,स्त्री ,पशु ,या पक्षी आदि ,कोई आकाश वासी था ,कोई यहीं रहता था .कुछ नाम देखिये –

        वद्द-मनुष्य ,सु आ अ -स्त्री ,यगूस-शेर ,याऊक -घोड़ा ,नस्र-बाज ,इसी तरह और देवता थे जिनका नाम कुरआन में है ,जैसे लात ,मनात ,उज्जा और मनाफ .कुरआन में लिखा है –

        “क्या तुमने लात ,मनात ,एक और उज्जा को देखा .सूरा -अन नज्म 53 :19 -20

        इसी तरह एक और देवता था जिसका नाम “इलाह “था जो चाँद पर रहता था वह “Moon god “था उसका स्वरूप “अर्ध चंद्राकार cresent जैसा था चाँद में रहने के कारण उसकी मूर्ति काबे में नहीं राखी जाती थी ,इलाह विनाश का देवता था .और बड़ा देवता था .

        2 -मुहम्मद के पूर्वजों के देवता –

        मुहम्मद के पूर्वजों के नाम भी उनके देवता के नाम पर थे जैसे मुहम्मद के परदादा का नाम “अब्द मनाफ़ “था यानी मनाफ़ का सेवक मुहम्मद की पत्नी खदीजा की देवी का नाम “उज्जा ‘था इसलिए खदीजा के चचेरे भाई के नाम में नौफल बिन अब्द उज्जा लगा था ,जब मुहम्मद के पिताका जन्म हुआ तो उसका नाम “अब्द इलाह “रखा गया था यानी इलाह देवता का सेवक .यह नाम बिगड़ कर अबदल्ला हो गया था

        3 -कुरआन में इलाह का वर्णन –

        “अल -इलाह एक बड़े सिंहासन का स्वामी है -सूरा अत तौबा 9 :129

        “वह महाशाली एक सिंहासन पर बैठता है -सूरा अल मोमनीन 33 :116

        “इलाह एक ऊंचे सिंहासन पर बैठता है “सूरा -अल मोमिन 40 :१५

        4 -इलाह से अल्लाह कैसे बना ?

        अरबी भाषा में किसी भी संज्ञा (Noun )के आगे Definit Article अल लगा दिया जाता है .इसका अर्थ “the “होता है मुहम्मद ने “इलाह “शब्द के आगे “अल “और जोड़ दिया .और “अल्लाह “शब्द गढ़ लिया .वास्तव में इलाह शब्द हिब्रू भाषा का है ,इसका वही अर्थ है जो अंगरेजी में “god “का है .इलाह को बाइबिल में “अजाजील “भी कहा गया है ,यानी विनाश का देवता -बाइबिल -लेवी अध्याय 16 :8 -10 -26

        5 -मुहम्मद की कपट नीति

        पाहिले मुहम्मद सभी देवताओं को समान बताता था और लोगों से यह कहता था ,कि-

        “हमारा इलाह (देवता )और तुम्हारा इलाह एक ही हैं .सूरा -अनकबूत 29 :46

        6 -अरब में तीन काबा थे

        एक काबा मक्का में था .जो मुहम्मद के कबीले ‘कुरेश ‘के कब्जे में था दूसरा काबा नजरान में जो बहरीन केथा पास था ,तीसरा काबा सिन्दादका था जो कूफा और बसरा के बीच स्थित था इनसे चढ़ौती में काफी धन आता था कुरेश मक्का के काबे से जो मिलता था उस से रोजी चलाते थे .जैसा कुरआन में लिखा है –

        “क्या हमने तुम्हें यह जगह (काबा )नहीं बनादी ,जिस से लोगों की कमाई खिचकर तुम्हारे पास चली आती है ,और तुम्हारी रोजी रोटी आराम से चलती है “सूरा -अल कसस 28 :57

        7 -अल इलाह की इबादत क्यों

        जब दूसरे काबे बन गए तो कुरेश की कमाई कम होने लगी .और मुहमद भी गिरगिट की तरह रंग बदलने लगा .उसने लोगोंपर दवाब डाला की वे केवल “अल -इलाह “की इबादत करें उसने कुरआन में यह कहा –

        “तुम्हारा पूज्य केवल इलाह ही है सूरा -अल बकरा 2 :163 ऎसी कई आयतें है –

        8 -मुहम्मद ने काबा की मूर्तियाँ क्यों तोडी ?

        मुहम्मद को अपने कबीले कुरेश से लगाव था ,जब कुरेश की कमाई कम होने लगी और कमाई में कई कबीले हिस्सेदार बन गए तो मुहमद ने सारी मूर्तियाँ तुड़वा दीं.ताकी पूरी कमाई कुरेश के पास आने लगे ,कुरआन में उसने यह लिख दिया –

        “मैंने कुरेश के साथ सम्बन्ध (Attachment )रखा ताकि वे मेरे कारवां को यात्रा के समय सर्दी और गरमी से बचाएं ,इसीलिए मैंने कुरेश को इस घर (काबा )की पूजा के लिए नियुक्त कर दिया .और उनको भूखों मरने से बचाया ,और भय से मुक्त कर दिया .सूरा कुरेश 106 :1 से 4

        9 – मुसलमानों ने काबा को लूटा

        अरब के लोग जनम से लुटेरे हैं .वह लालच के लिए कुछ भी कर सकते हैं .जब उन्हें पता चला कि काबा में बड़ी संपदा है .तो वे मुसलमान होने के बावजूद काबा पर हमला कर बैठे .सन 930 में इस्माइली मुसलमानों के एक योद्धा “अबू ताहिर अल जन्नवी”ने काबा को लूट लिया और बीस हजार हाजियों को क़त्ल करके उनकी लाशों से “आबे जमजम “का कुआ भर दिया .यही नहीं काबा में जो कला पत्थर “संगे असवद”लगा हुआ था उसे उखाड़ कर “अल हिसा “नामकी जगह पर ले गया .और उस काले पत्थर को नापाक कर दिया .यह जगह बहरैन के पास है .सन 952 तक वह पत्थर अल हिसा में रहा और 22 साल तक मक्का में हज नहीं हो सका .क्योकि हज में काले पत्थर को चूमना जरूरी होता है .बाद में जब “फातिमी “हुकूमत आयी तो उसने भारी धन देकर वह काला पत्थर वापस लेकर काबे में लगवा दिया .

        इस तरह मुहम्मद ने एक छोटे से देवता को ईश्वर बना दिया .और मुर्ख लोग अल्लाह को ईश्वर के बराबर मानने लगे .एक कवि ने कहा है-

        “शुक्र कर खुदाया ,मैंने तुझे बनाया .तुझे कौन पूछता था मेरी बंदगी से पहले ”

        इसलिए ईश्वर अल्लाह तेरा नाम कहना बंद करें

      • hame sirf allah ne banaya hai.aour upar jo kuchh bhi allah auor muhammad sahab ke baare me likha hai mai us per vishvash nahi karta, aour na hi kisi musalman ko hoga.muhammad sahab ne kisi ko bahkaya nahi hai aap ne to sab insano ko sach ki raah dekhai hai jin insano ne unki baat mani vo musalman ho gaye aour jinhone nahi mana vo gairmuslim hai..

      • to bharat me mohmmad kab aaye the talwar ki nok per bane huye muslman hain bharat pakistan me aur bahut se desho me na ki mohmmad k karmo ko dekh kar

      • Dear fafafaf,

        Kshamaa karnaa bhai lekin kisi ne galat information dee hai. Allah waisaa bilkul nahi hai jaisaa aapne kahaa hai. Quran ne aapko allah galat tareeke se samjhaayaa hai toh allah bechaare kee kyaa galtee? Mohammed ek Mahaamoorkha hai. Isme koi shankaa ho hi nahi sakti. Achchha hua saalaa jehar peekar mara gayaa. Shaayad Allah ne use aise hee sajaa denee thee. Mujhe toh doubt hai ki woh gadhaa sahi mein koi rasool thaa yaa yeh koi mangadhant kahaani hai. kyunki sirf Quran yeh kehti hai ki woh rasool thaa. Ab jis pustak mein SATANIC VERSES (Shaitaan ke vaakya) paaye jaaye, woh kyaa Allah ke baare mein bataayegee?

        Bhai Musalmaan jo bhi kahe, sach toh Allah se chhiptaa nahi. Jaise Jesus exist nahi karte the, waise hi Mohammed ek chor thaa. Yadi woh sahi mein rasool hota toh abhi tak jeevit hota.

        Ishvar toh martaa nahi aur Allah Shaitaan tak se haar maantaa hai. Quran se bakwaas koi pustak ho hi nahi saktee. Musalmaan kehte hai ki Mohammed ne sach dikhaayaa. Yeh kora gappa hai lekin phir bhi maan lete hai ki chalo bataayaa. Lekin gair musalmaan (4.8 billion) ekmat hokar maante hai ki Mohammed ne aatankavaad hi sikhaayaa.

        Aur thinkers, scientists ityaadi gair muslim khaandaan se hee hai. Musalmaano mein koi hai bhi nahi. Sab so called Muslim scientists actually apostate the aur unme se kaiyo ne to gair muslimo se dosti banaaye thee. Toh sab kaafir the. Bechaare jeevit sirf isliye reh gaye kyunki tab ke raajaa Quran 2.256 ko maante the. Aaj koi Musalmaan jaantaa hi nahi ki Quran 2.256 kaa kyaa artha hai isliye apostate maare jaate hai.

      • tu jo bhi hai sun tu apni jankari ko apni baat manwane k liye galat bhi likh raha hai jaise word इलाह nahi ilaaa hai ह word nahi hai jew k gods इला tha naam aur kisi bhi sure me ahi likha ki wo bade sihasan me baithta ai jhoot batate ho tm log kam padhe likhe logon ko wo allah bada beniyaz hai wo ek noor matra hai…aur mohammad s.a.w.w ki baat karte ho aise waise tm kya jano tmhare bhagwan jo bhi they sab randi baaz ayyash they unke jaise mat samjho kisi ko aur na hi un ghatiya logon ki barabari karao…mohammad s.a.w.w. k jeewan k bae me bhi pata kar lo kaisa raha hai aur kaise zindgi jiya karte they ki kafir bhi unki tareef karte they aur unhe izzat se dekhte they ek kafir umayya qabeele ka to ye tak kahta tha ki main janta hoon yaqeeen karta hon ki ye saccha hai lekin chuki ye mere pariwar me paida nahi hua isliyie main iska virodh karta hoon agar mere pariwar ka hota to main iski raksha aru dosro ko zabardasti iski baat manne ko badhya kar deta

      • Azim, hindu gods ayyash ho sakta hain lekin Muhammad toh balatkari tha. Aur kewal balatkari hi nahi tha buddha woh itna bhukha tha ki 6 saal ki bacchi ko bhi nahi chodta tha. Uski bhuk ka andaaza ess baat se lagaya ja sakta hain ki woh sexual slavery ko endorse karta tha.

      • @fafafa..
        5 -मुहम्मद की कपट नीति
        पाहिले मुहम्मद सभी देवताओं को समान बताता था और लोगों से यह कहता था ,कि-
        “हमारा इलाह (देवता )और तुम्हारा इलाह एक ही हैं .सूरा -अनकबूत 29 :46
        29:46 me aapne galat likha hai… Isaka sahi anubaad yah hai — hamar pujya aur tumhar pujya akela hi hai…. na ki ek hi hai..

      • भारतीय संस्कृति सहिष्णुतावादी रही है, लेकिन इस सहिष्णुता ने हमें कहीं न कहीं कायर भी बनाया है । संभवत: यही कारण है कि हमने गुलामी के प्रतीकों को न सिर्फ़ आत्मसात किया, बल्कि उनका महिमामंडल करने में भी हम पीछे नहीं रहे । उदाहरण के लिए हिन्दू शब्द को ही लें । यह हमारी गुलामी मानसिकता का प्रतीक तो है ही, इसमें गाली भी छुपी है । इतिहासकारों का मानना है कि हिन्दू शब्द ईरानियों का दिया हुआ है । ईसा पूर्व छठी शताब्दी यानी आज से लगभग 2600 वर्ष पूर्व ईरानियों ने पश्चिमोत्तर भारत पर आक्रमण कर इस धारा पर कदम रखे थे, उन्होंने सिन्धु नदी के किनारे रहने वालों को हिन्दू नाम दिया । ईरानी ‘स” का उच्चारण नहीं कर पाते थे और उसकी जगह ‘ह” का इस्तेमाल करते थे । इतिहासकार कहते हैं कि उन्होंने सिन्धु से हिन्दू संबोधन दिया और इसी आधार पर इस देश का दूसरा नाम हिन्दुस्तान पड़ा । सनातन धर्मशास्त्र हमें आर्य और धर्म सनातन बताते हैं, किन्तु हम अब न खुद को आर्य कहते हैं और न ही सनातनी । ईरानियों द्वारा आर्यो को हिन्दू संबोधन देने के बाद ईरानी शब्दकोष में इसे अपमानजनक रूप से प्रस्तुत किया । आपको जानकर आश्चर्य होगा कि ईरानी शब्दकोष में हिन्दू का अर्थ चोर-लुटेरा बताया गया है । ईरानियों द्वारा दिए गए इस संबोधन को आत्मसात करने से पहले हमने यह जानने की कोशिश नहीं की, कि वे हिन्दू शब्द का क्या अर्थ बताते हैं । अपने आपको हिन्दुओं का हितैषी बताने वाले राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ के डॉ. हेडगेवार ने तो दो कदम आगे बढ़कर यह नारा दे डाला – ‘ गर्व से कहो कि हम हिन्दू हैं ।” जबकि हकीकत यह है कि हिन्दू शब्द गर्व का नहीं, बल्कि शर्म का विषय है ।
        नाम की बात चली तो यह भी जान लेना चाहिए कि भारत और हिन्दुस्तान कहे जाने वाले इस देश का एक और नाम है इंडिया । यह शब्द अंगरेज़ों की देन है, जिसे गढ़ने से पहले उन्होंने हमसे भी अपमानजनक शब्दों को समाहित किया । हम इस शब्द को बेहद गर्व से प्रयुक्त करते हैं । पूरी दुनिया में शायद भारत ही एकमात्र ऐसा देश है, जिसके तीन-तीन नाम हैं । भारत वास्तविक नाम है, जबकि हिन्दुस्तान और इंडिया यह दशाते हैं कि हम कभी गुलाम भी रहे हैं । गुलामी की चर्चा हो रही इंडिया गेट का नाम आए, ऐसा हो नहीं सकता । भारत सरकार और भारतवासी इंडिया गेट को एक धरोहर के रूप में मानते हैं,

      • हॉ जो आज कल मंदिरो में चल रहा लूट घसूट चल रही है उससे हर कोई वाकिफ है
        पण्‍डा खा खा के रबडी साले पेट फुला रहै हैं
        नागा पाखण्‍डी बाबा आपने सामान की पूजा करवा रहै हैं
        जब किसी हिन्‍दू की पत्‍नी को बच्‍चा नहीं होता है
        तो यह हिन्‍दू यही नागा पाखण्‍डी बाबा के पास रात को अपनी बीबी को छोड आते हैं
        अगर तुम्‍हे लिंग पूजा इतनी ही प्‍यारी है तो मुसलमान मान जितनी बार पैशाब करने जाते है
        साले लिंग बाबा पे पानी जरूर चढाते हैा
        तो आप को चाहिये की मुूसलमानों के सामानों की पूजा करनी चाहिये क्‍यों कि मुसलमान जितनी बार पैशाब करने जाते है ल्रिग बाबा पर जल जरूर चढाते है
        अबे जब शंकर जी खुद तुम्‍हारे नीचे लटक रहै है
        तो नागा बाबा की क्‍या जरूरत हैा
        सुबह उठते ही कुर्सी पर बैठ कर अपने सभी घर वालों को दर्शन करा दिया करो
        और दूध चढा दिया करो
        साले चूतिया जाहिल
        साले सामान है सामान की ही पूजा करेगे चूतिया कही

      • irshad aap ki bat ka javab saaf sabdo me ,aap ko maa bhen istriling me aati hain kya aap ki maa bhen k ling latak raha hain .. batao ..ling ek partik hain ling ka matlab jo aap keh rahe hain wo anhi hain ..shiv ling matlab kalyan karne wala . hota hain

      • अबे जब शंकर भगवान थे तो उनको यह नहीं पता चला की मेरी पत्‍नी पार्वती ने अपने मैल से एक बच्‍चा पैदा कर दिया हैा जब की तुम उनको भगवान कहते हो कैसे भगवान थे कि उनकी बीवी कुछ नया अविश्‍कार करे और उनको पता न चले
        और जब गणेश – ने कहा की मेरी माता नहा रही हैं आप अंदर नही जा सकते
        तो फिर श्‍ांकर को अपनी तीसरी ऑख खोल कर जान लेना था कि ये कौन है
        या फिर रूक जाना चाहिये था
        रूके इसलिये नही थे क्‍योकि उनको उस वक्‍त बहुत ही त्रीव कामोतेजना चढी थी और उन्‍होने गणेश का सर काट दिया
        अब सर कटा तो दूसरे लोक में गिरा आकेा जो शंकर जी को नही मिला
        मगर फिर भी भगवान ही रहैा
        अबे केसे भगवान है
        जो एक सर नहीं ढूढ पाये
        अच्‍छा उस वक्‍त गूगल नही था वर्ना ढूढ लेते
        अब सर तो मिला नही तो हाथी के बच्‍चे का सिर काट कर गणेश जी को लगा दिया बहुत अच्‍छा
        अब ये बताओ कि जब सर हाथी का लगा था तो दिमाग तो हाथी का ही था
        उसमे इंसानों वाली कैफियत कहॉ से आयी
        अब तुम कहना की शंकर भगवान ने उनको इनसानो वाली बुध्‍दी ट्रासफर कर दी थी
        अबे चू‍तीयों की कहानिया भी पडने मे मजा आता है मगर थेडी देर के लिये

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